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शनिवार, 31 अगस्त 2013

'फेस मशीन' पढ़ लेगी चेहरे की ख़ुशी और ग़म

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फेस मशीन
बीबीसी संवाददाता समांथा फेनविक ने चेहरा पढ़ने वाली मशीन के प्रयोग में हिस्सा लिया

आपका चेहरा आपके बारे में क्या कह रहा है?
किसी के लिए ये बताना शायद मुश्किल हो लेकिन एक नई तकनीक के बारे में दावा किया जा रहा है कि वो चेहरा देखकर पहचान लेगी कि आप ख़ुश हैं, उदास हैं या बोर हो रहे हैं.

लेकिन कंपनी इसके लिए पहले आपकी अनुमति लेती है. इसके बाद बायोमेट्रिक ट्रैकिंग के लिए विशेष वेबकैम से आपके चेहरे के भावों को रिकार्ड करती है.इससे ऑनलाइन विज्ञापन कंपनियों को पता चल सकेगा कि आप उनके क्लिक करेंविज्ञापन पेज को देखकर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं?
इस तकनीक का इस्तेमाल अभी बड़े बजट के विज्ञापनों को लांच करने से पहले लोगों के रुझान को जानने के लिए किया जाता है.

अनौपचारिक प्रयोग

बीबीसी ने इस तकनीक का विकास करने वाले रीयलआइज़ के साथ मिलकर अपने रेडियो-4 के श्रोताओं पर प्रोग्राम ‘यू एंड योर्स’ की रिलीज से पहले अनौपचारिक प्रयोग किए.
"यह कंप्यूटर प्रोग्राम देखने में सक्षम है कि लोगों की भौंहें, मुंह और आंखें कैसे गति करती है? वैश्विक स्तर पर छह भावनाएं होती हैं, जो सबके लिए समान होती है. इसके ऊपर भौगोलिक क्षेत्र और उम्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता. हमने कंप्यूटर्स को लोगों के चेहरे पर आने वाली भावनाओं को पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया है."
मिखेल जैट्मा, प्रबंध निदेशक रियलआइज
इस प्रयोग में रेडियो-4 के 150 श्रोताओं की भावनाओं का पता लगाया गया, जिसमें रेडियो प्रोग्राम की बेहतरीन धुनों को सुनने के दौरान हंसने और मुंह बनाने की उनकी छोटी-छोटी भावनाओं को दर्ज किया गया.
प्रोग्राम सुनने वालों को द आर्चर्स और सेलिंग बाय की लोकप्रिय धुनों के साथ-साथ गॉड सेव द क्वीन की धुन भी सुनाई गई ताकि पता लगे कि श्रोता कैसे उनकी तुलना करते हैं.

चेहरा पढ़ती मशीन

रियलआइज़ के प्रबंध निदेशक मिखाइल जैट्मा ने बीबीसी को बताया कि “यहक्लिक करेंकंप्यूटर प्रोग्राम देखने में सक्षम है कि लोगों की भौंहें, मुंह और आंखें कैसे गति करती है? वैश्विक स्तर पर छह भावनाएं होती हैं, जो सबके लिए समान होती है. इनके ऊपर भौगोलिक क्षेत्र और उम्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता.”
मिखाइल जैट्मा कहते हैं कि “हमने कंप्यूटरों को लोगों के चेहरे पर आने वाली भावनाओं को पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षित किया है.
हम उम्मीद करते हैं कि यह तकनीक क्लिक करेंभविष्य में विज्ञापनों को उपयुक्त, कम खीझ और दबाव वाला बनाने में सहायक होगी.”
लोगों के चेहरे के भावों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक द आर्चर्स और सेलिंग बाय के लिए प्रारंभ में ख़ुशी की दर ज़्यादा थी, जब लोगों ने धुनों को पहचानना शुरु किया.

इस प्रयोग में ख़ुशी के अतिरिक्त उलझन, गुस्से, आश्चर्य और अरुचि की भावनाओं का भी मूल्यांकन किया गया.
समांथा फेनविक
बीबीसी संवाददाता
sabhar : www.bbb.co.uk

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