शिव-पार्वती का प्रेमा-ख्यान अद्भुत है।पार्वती जैसा प्रेम और शंकर जैसा पति, ये दोनों ही अलभ्य हैं।शिव विश्व के चेतना है तो पार्वती विश्व की ऊर्जा हैं।शंकर जी का गोत्र त्रिलोक है।पार्वती जी साधना के माध्यम से शिव जी के ह्रदय में करूणा और समभाव जगाती हैं।उनका तप औरों से भिन्न होते हुए किसी भी इच्छा, वरदान वयक्तिगत सुख के लिए नहीं अपितु संसार के कल्याण के लिए है।शिव स्रोत हैं शक्ति के, पर स्वयं कभी गति नहीं करते – शिव की गति को ही ‘शक्ति’ कहते हैं। जब तक शिव हैं और शक्ति हैं, मामला बिल्कुल ठीक है, क्योंकि शक्ति का पूर्ण समर्पण, शक्ति की पूर्ण भक्ति शिव मात्र के प्रति है। वहां कोई तीसरा मौजूद नहीं।शिव-शक्ति के बीच में किसी तीसरे की गुंजाइश नहीं, तो वहां पर जो कुछ है बहुत सुंदर है। शिव केंद्र में बैठे हैं, ध्यान में, अचल, और उनके चारों तरफ गति है, सुंदर नृत्य है शक्ति का। वहां किसी प्रकार का कोई भेद नहीं, कोई द्वंद नहीं, कोई टकराव नहीं, कोई विकल्प नहीं, कोई संग्राम नहीं।🙏 sabhar Facebook wall mahaavatar baba ji italy
बुधवार, 11 अगस्त 2021
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