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बुधवार, 19 फ़रवरी 2025

तंत्र साधना में असम को स्त्री प्रदेश भी कहा जाता हैं

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 #कामरू_कामाख्या

असम को स्त्री प्रदेश भी कहा जाता हैं। वहां प्राचीन काल से ही तंत्र साधना के क्षेत्र में स्त्री शक्तियों का विशेष प्रभाव मौजूद रहा है। आज भी असम के कामाख्या क्षेत्र में तंत्र साधिकाओ का बहुत बड़ा वर्ग मौजूद है। जो अद्भुत तांत्रिक शक्तियों में  निपुण हैं।असम एक ऐसा क्षेत्र है जहां कामाख्या नामक शक्तिपीठ मौजूद है। शक्तिपीठ के विषय में आप सभी को जानकारी होगी। इसीलिए थोड़ा संक्षेप में विवरण दे रहा हूं। यहां भगवती का गुप्तांग गिरा था ऐसा माना जाता है। यहां पर कामाख्या मंदिर में उसी की पूजा होती है। वहां कोई भी विग्रह नहीं है बल्कि योनि मंडल बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जून के महीने में 3 दिनों के लिए योनि में रजस्त्राव होता है। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और उस क्षेत्र में पूजा-पाठ का कार्यक्रम रोक दिया जाता है। 

उस दौरान यह भी देखा गया कि ब्रह्मपुत्र नदी का जल भी लाल रंग का हो जाता है।उस समय विशेष में, मंदिर में योनि मंडल के ऊपर वस्त्र  बिछा दिये जाते है।इन वस्त्रों को प्रसाद के रूप में दर्शनार्थियों में बांट दिया जाता है। इसे कामाख्या तार कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस वस्त्र का एक भी तार अगर किसी के शरीर पर ताबीज के रूप में या किसी अन्य रुप में मौजूद हैं तो उसके ऊपर किसी भी प्रकार का तांत्रिक प्रयोग कोई प्रभाव नहीं डालेगा। 

इसे मूल शक्तिपीठ माना जाता है। सभी प्रकार के जीवो के जन्म लेने का कारण योनि ही होता है। संभवतः इसीलिए इस पीठ को सबसे ज्यादा मान्यता दी गई हैं। तांत्रिक क्षेत्र में जितने भी सिद्ध पुरुष हुए हैं उन्होंने इस तांत्रिक क्षेत्र में आकर कोई ना कोई साधना सिद्धि अवश्य प्राप्त की है।शाबर मंत्र साधना के अधिकांश विशेषज्ञ या सिद्ध पुरुष कामाख्या को ही अपनी शक्तियों का केंद्र मानते हैं वे यथासंभव वहां जाकर दर्शन करने या वहां साधना करने की कोशिश अवश्य करते हैं।इससे उनकी शक्तियां और उनकी साधनात्मक  क्षमता दोनों और बढ़ती है।कामाख्या को कामरूप, कौरु नगर जैसे नामों से भी जाना जाता है। इन स्थानों पर रहने वाली स्त्रियों को तंत्र विद्या में निपुण माना जाता है। यही नहीं यह भी मान्यता है कि पहले किसी भी जानवर जैसे पक्षी पशुओं में परिवर्तित करके अपने पास बंदी बना लेते हैं फिर उनसे मनचाहा काम भी करवाते हैं आवश्यकता अनुसार आवश्यकताओं की पूर्ति भी करती रहती हैं।

कामाख्या पीठ का लोगों का निजी अनुभव है कोई भी ऐसा काम जो नहीं हो पा रहा हो तो एक बार भगवती कामाख्या के दरवाजे पर पहुंचकर उनसे निवेदन करके जरूर देखें। साल भर के अंदर वह कार्य जरूर पूर्ण हो जाता है। 

हां! इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि वह कार्य किसी को कष्ट पहुंचाने वाला या सामाजिक मान्यता को नष्ट करने वाला न हो। 

आप अपने विकास के लिए कोई भी इच्छा  रखें और भगवती कामाख्या के दर्शन को जाऐ तो 90% संभावना है कि आपका काम हो जाएगा


इस संबंध में मुझे एक कहीं पड़ी हुई घटना की याद आ रही है। जिसे मैं आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूं। जो कामाख्या से संबंधित है और संभवत किसी विदेशी जिज्ञासु ने लिखी है। 

वह विदेशी भारत में  कामाख्या के तंत्र साधिकाओ के विषय में सुनकर आया था। बहुत मेहनत करने के बाद वह एक ऐसी ही तंत्र साधिका के सम्पर्क में आया जिसने उसे प्रत्यक्ष में तंत्र साधना का प्रयोग करके दिखाने पर सहमति व्यक्त कर दी।

साधिका के निर्देश पर वह व्यक्ति एक काला मुर्गा अपने साथ लाया। एक लगभग 8 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया गया, मुर्गे को उस गड्ढे में डाल दिया गया और उसे चटाई से ढक दिया गया।


इसके पश्चात साधिका उस गड्ढे से लगभग चार फीट दूर बैठ गयी। विदेशी भी वहीं पर बैठा रहा ताकि देखता रहे कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही हैं।

उस साधिका ने कुछ मंत्रों का उच्चारण किया और काली मिर्च के दाने उस चटाई पर फेंक दिये। उनके चटाई पर गिरने तक की हल्की आवाज तक उस विदेशी पर्यटक को सुनाई दी! 

उसके बाद मुर्गे की चीख  एक बार सुनाई थी। उसके बाद सब कुछ शांत हो गया।

कुछ समय बाद साधिका ने अपनी आंखे खोली और उस विदेशी पर्यटक को चटाई हटाकर देखने के लिए कहा।

उसे लगा कुछ खास तो घटित हुआ नहीं होगा जैसा मुर्गा है वैसा ही होना चाहिए।

लेकिन.... 

जैसे ही उसने चटाई हटाई वह मुर्गा मृत पड़ा हुआ था। वह तुरंत गढ्ढे में कूदा और उस मुर्गे को बाहर लेकर निकला।

उस मुर्गे के प्राण पखेरु उड़ चुके थे। 

मंत्र शक्ति का प्रभाव उस पर्यटक को पता चल गया था।

उस साधिका ने बताया है यह तो तुम्हें दिखाने के लिए इस गढ्ढे में मुर्गे को रखा गया है। अगर मुर्गा यहां से 100 किलोमीटर दूर भी होता तो भी इसकी यही हालत होनी थी। 


इतना कह कर वह तंत्र साधिका वहां से लुप्त हो गई।

इस घटना से आप कामाख्या तंत्र क्षेत्र की साधिकाओं की क्षमता के बारे में समझ सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनके द्वारा की गई तंत्र की काट बहुत मुश्किल होती है!लगभग असंभव।


गुरु गोरखनाथ तंत्र के अद्भुत विद्वान माने जाते हैं। और शाबर तंत्र साधना में उनका स्थान बेहद प्रतिष्ठित और सिद्ध पुरुषों में लिया जाता है। 

उनके गुरु मछेंद्रनाथ थे! जो इस क्षेत्र से गुजर रहे थे! तभी यहां की रानी ने उन्हें महल में बुलवा लिया और उस के बाद ऐसा प्रयोग सम्पन्न किया कि गुरुदेव मच्छिंन्द्रनाथ सारी दुनियादारी भूलकर राजकाज संभालकर रानी के साथ रास विलास में लीन  हो गये। 

जब काफी समय बीत गया और गुरुदेव मच्छिंन्द्रनाथ का कोई अता पता नहीं चला... 

तो गोरखनाथ अपने गुरु की तलाश में निकले! और किसी प्रकार से अपने गुरु को उस रानी के चंगुल से छुड़ा कर ले जाने में सफल हुए। 

तो कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह हैं कि कामाख्या एक रहस्यमई जगह है और वहां रहने वाली महिला साधिकाओ का रहस्य उस से भी गहरा हैं। दिखने में उनमें कोई भी विशिष्टता दिखाई नहीं देगी! वह सामान्य महिलाओ की तरह ही दिखेगी लेकिन जब वह अपनी औकात पर आ जाये तो अच्छे अच्छे तांत्रिको को अपनी पांव की जूती की नोक पर रख लेती है और अपनी अंगुलियो पर नचाती हैं। एक प्रकार से वे महामाया का ही अंश है जो इस सम्पूर्ण सृष्टि को अपनी अंगुलियों पर नचाती रहती है।

जय माँ कामरूप कामाख्या  🙏🙏🙏

#अनूप साभार  Facebook wall

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