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राजयोग (Raja Yoga) का अर्थ है "योगों का राजा"

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 राजयोग (Raja Yoga) का अर्थ है "योगों का राजा" । यह महर्षि पतंजलि द्वारा बताए गए 'अष्टांग योग' का ही एक रूप है, जिसका मुख्य लक्ष्य मन पर पूर्ण विजय प्राप्त करना और आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) है। ​जहाँ अन्य योग शरीर या श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, राजयोग सीधे चित्त (मन) की वृत्तियों को रोकने पर बल देता है। ​राजयोग के आठ अंग (अष्टांग योग) ​पतंजलि के अनुसार राजयोग की प्राप्ति के लिए इन आठ चरणों का पालन किया जाता है: ​यम: नैतिक अनुशासन (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह)। ​नियम: व्यक्तिगत अनुशासन (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान)। ​आसन: शरीर को स्थिर और सुखदायक अवस्था में रखना। ​प्राणायाम: श्वास की गति पर नियंत्रण। ​प्रत्याहार: इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी करना। ​धारणा: मन को किसी एक विचार या बिंदु पर केंद्रित करना। ​ध्यान: उस केंद्र बिंदु पर निरंतर एकाग्रता। ​समाधि: वह अवस्था जहाँ साधक और ईश्वर (या परम तत्व) एक हो जाते हैं। ​राजयोग के मुख्य लाभ ​मानसिक शांति: यह तनाव और चिंता को कम कर मन को शांत और स्थिर बनाता है। ​इच्...

जनेऊ पहनते के क्या है लाभ, और क्यों पहनते हैं

 जनेऊ पहनते के क्या है लाभ, और क्यों पहनते हैं ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम अर्थात ब्राह्मण ब्रह्म ,ईश्वर, तेज से युक्‍त हो। ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥ जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं। उपनयन' का अर्थ है, 'पास या सन्निकट ले जाना।' किसके पास? ब्रह्म (ईश्वर) और ज्ञान के पास ले जाना। हिन्दू समाज का हर वर्ग जनेऊ धारण कर सकता है। जनेऊ धारण करने के बाद ही द्विज बालक को यज्ञ तथा स्वाध्याय करने का अधिकार प्राप्त होता है। द्विज का अर्थ होता है दूसरा जन्म। कालांतर में इस संस्कार को दूसरे धर्मों में धर्मांतरित करने के लिए उपयोग किया जाने लगा। हिन्दू धर्म में प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है जनेऊ पहनना और उसके नियमों का पालन करना। हर हिन्दू जनेऊ पहन सकता है बशर्ते कि वह उसके नियमों का पालन करे। क्यों पहनते हैं जनेऊ : हिन्दू धर्म के 24 संस्कारों में से एक 'उपनयन संस्कार' के अंतर्गत ही जनेऊ पहनी जाती है जिसे यज्ञोपवीत स...

कामवासना (Sexual energy) को भारतीय दर्शन और मनोविज्ञान में एक अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा

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 कामवासना (Sexual energy) को भारतीय दर्शन और मनोविज्ञान में एक अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा माना गया है। सात्विक दृष्टिकोण का अर्थ है—शुद्धता, संतुलन और ऊर्ध्वगमन (ऊपर की ओर उठाना)। काम का सात्विक उपयोग इसे केवल शारीरिक भोग से हटाकर सृजन और आध्यात्मिक उन्नति की ओर मोड़ने की प्रक्रिया है। ​इसके मुख्य सात्विक उपयोग निम्नलिखित हैं: ​1. सृष्टि का सृजन और निरंतरता ​सात्विक दृष्टि में कामवासना का प्राथमिक उद्देश्य उत्तम संतान की उत्पत्ति है। इसे एक "यज्ञ" की तरह देखा जाता है, जहाँ संभोग का उद्देश्य केवल इंद्रिय सुख न होकर, समाज को एक सजग और संस्कारी नई पीढ़ी देना होता है। ​2. प्रेम और आत्मीयता की प्रगाढ़ता ​जब कामवासना में स्वार्थ या केवल शरीर का आकर्षण नहीं होता, तो वह प्रेम (Love) में बदल जाती है। पति और पत्नी के बीच यह ऊर्जा आपसी विश्वास, मित्रता और मानसिक जुड़ाव को गहरा करने का माध्यम बनती है। यह दो व्यक्तियों के बीच के "अहंकार" को मिटाकर उन्हें एक-दूसरे के प्रति समर्पित बनाती है। ​3. ओज और मेधा में परिवर्तन (Transmutation) ​योग शास्त्र के अनुसार, काम ऊर्जा को यदि संयमित र...

विद्युतमानस यंत्र एक अत्यंत सूक्ष्म तांत्रिक यंत्र

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 विद्युतमानस यंत्र एक अत्यंत सूक्ष्म तांत्रिक यंत्र माना जाता है, जिसका संबंध मन, ऊर्जा और विचार तरंगों को नियंत्रित करने से जोड़ा जाता है। “विद्युत” अर्थात ऊर्जा और “मानस” अर्थात मन—इन दोनों के संयोग से यह यंत्र साधक के मानसिक क्षेत्र को स्थिर, तेज और प्रभावशाली बनाने का माध्यम बनता है। तांत्रिक परंपरा में इसे मानसिक विद्युत शक्ति को जाग्रत करने वाला साधन कहा गया है, जो व्यक्ति के विचारों को दिशा देने और आकर्षण शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है। यह यंत्र मुख्यतः मन को केंद्रित करने, ध्यान में स्थिरता लाने, संकल्प शक्ति बढ़ाने और सूक्ष्म अनुभूति को जाग्रत करने के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ साधनाओं में इसे वशीकरण, आकर्षण और संवाद शक्ति को प्रबल करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह विचार तरंगों को प्रभावी बनाने की क्षमता से जोड़ा जाता है। जो व्यक्ति लगातार मानसिक अशांति, भ्रम या निर्णय लेने में कमजोरी अनुभव करता है, उसके लिए यह यंत्र सहायक माना जाता है। इसके लाभों की बात करें तो यह मन को स्थिर करता है, ध्यान में गहराई लाता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा ...

खाली जगह” से कणों का जन्म: आधुनिक भौतिकी का चौंकाने वाला सच?

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 “खाली जगह” से कणों का जन्म: आधुनिक भौतिकी का चौंकाने वाला सच? हाल ही में वैज्ञानिकों ने प्रयोगों में पहली बार यह स्पष्ट रूप से देखा कि कण वास्तव में खाली जगह यानी वैक्यूम से उत्पन्न हो सकते हैं। पहली नजर में यह दावा किसी जादू जैसा लगता है लेकिन इसके पीछे क्वांटम भौतिकी के गहरे सिद्धांत काम कर रहे हैं। क्या खाली जगह सच में खाली है? भौतिकी में जिसे हम खाली स्थान कहते हैं उसे क्वांटम वैक्यूम कहा जाता है। लेकिन यह पूरी तरह खाली नहीं होता बल्कि इसमें लगातार सूक्ष्म ऊर्जा उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। इन उतार-चढ़ावों से क्षणिक कण (virtual particles) बनते और मिटते रहते हैं यानी शून्य भी एक सक्रिय अवस्था है,जिसमें ऊर्जा छिपी रहती है। कण कैसे पैदा होते हैं? इस घटना को समझाने के लिए वैज्ञानिक Schwinger Effect का सहारा लेते हैं। इसमें बहुत शक्तिशाली विद्युत या ऊर्जा क्षेत्र वैक्यूम को अस्थिर बना देता है और वहाँ से कण-एंटी कण जोड़ी उत्पन्न होती है। पहले यह केवल सिद्धांत था लेकिन अब प्रयोगों में इसके संकेत स्पष्ट रूप से देखे गए हैं। गहराई से विश्लेषण 1. ऊर्जा से पदार्थ (Energy → Matter) यह खोज दिख...

5000 साल पुरानी “मोहेंजो-दड़ो की सील” – क्या आप जानते हैं

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 5000 साल पुरानी “मोहेंजो-दड़ो की सील” – क्या आप जानते हैं ये राज़?ये तस्वीर की एक प्राचीन सील की है… इतनी छोटी चीज़, लेकिन इसके अंदर छिपी है पूरी सभ्यता की कहानी!रोचक तथ्य जो आपको हैरान कर देंगे: . 2600–1900 BCE की निशानी ये सील सिंधु घाटी सभ्यता के समय की है — यानी आज से लगभग 4000–5000 साल पुरानी! . रहस्यमयी भाषाइस पर जो चिन्ह बने हैं, वो अभी तक पूरी तरह पढ़े नहीं जा सके हैं।आज तक कोई भी इन्हें पूरी तरह डिकोड नहीं कर पाया! जानवर क्यों बने हैं? सील पर बने जानवर (जैसे बैल/बकरी) सिर्फ सजावट नहीं थे ये व्यापार, पहचान या परिवार के “लोगो” की तरह इस्तेमाल होते थे। बिजनेस कार्ड जैसा इस्तेमालइन सीलों को मिट्टी पर दबाकर “स्टैंप” की तरह इस्तेमाल किया जाता था जैसे आज हम सिग्नेचर या ब्रांड लगाते हैं!ट्रेडिंग सुपरपावर ऐसी सीलें तक मिली हैं —मतलब उस समय भारत का इंटरनेशनल व्यापार चलता था! . पीछे का उभार क्यों?पीछे जो गोल उभरा हुआ हिस्सा है, वो पकड़ने या पहनने के लिए होता था यानी ये पोर्टेबल आइडेंटिटी टूल था! सोचिए… जब दुनिया में कई जगह सभ्यता शुरू भी नहीं हुई थी,तब भारत में लोग ब्रांडिंग, ट्रेड...

जीवन की सलाह

 योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी । 6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी । 8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें । 10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें । 11. जम्भाई- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है । 16. अस्थमा , मधुमेह , क...