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आत्मा के रहस्य

  एक दो लेख पारे पर ले लेते हैं | उसके बाद पुनः साधक विषय पर आएंगे | ये साधक विषय जरूरी है जो आपको जिम्मेदारी का बोध कराएगा | अभी पारे पर बात करते हैं | पिछले साल जो लेख छोड़ा था उसी को आगे बढ़ाएंगे | लेकिन पहले एक प्रश्न को समझते हैं | जो कई बार पूछा गया है | यदि किसी धातु के केंद्र में परिवर्तन नहीं होगा तो वाह्य परिवर्तन कैसे संभव है ? वैसे तो इस प्रश्न का जवाब मैंने कई बार लिखा है | लेकिन आप लेखों की ध्यान से पढ़ते नहीं हैं | बड़े स्तर के डाक्टर और इंजीनियर भी 10 साल बाद कहते हैं अब बात समझ आई है | तो आप ठीक से समझकर पढ़ा करें | लेकिन चलिए प्रश्न आया है तो इसे एक नए आयाम से समझते हैं | ये सही है यदि किसी धातु या मनुष्य के केंद्र में परिवर्तन नहीं होगा तो वो वास्तविक परिवर्तन नहीं होगा | लेकिन ये पूरा सत्य नहीं है | जी हाँ ये पूरा सत्य नहीं है | लेकिन रस विद्या इसी एक सत्य पर टिकी है कि केंद्र में परिवर्तन करके ही मनुष्य या धातु में परिवर्तन किया जा सकता है | ये भी सत्य है |   क्योंकि रस विद्या के वैज्ञानिकों ने हजार साल पहले लोह वेध या धातु वेध और देह वेध का पारा बनाया | इ...

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