Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Comments

You might like

Subscribe Us

How to what is लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
How to what is लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 15 जुलाई 2021

छाया पुरुष और छाया शरीर

0

           *************************************
परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अद्भुत अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन 

पूज्यपाद गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन

      प्राणमय कोष सूक्ष्म और स्थूल सत्ता के सन्धि स्थल पर विद्यमान है। उसके एक ओर छाया शरीर है और दूसरी ओर है--स्थूल शरीर। प्राणमय कोष का मूलकेंद्र 'नाभि' है। नाभि पर मन को एकाग्र करने पर प्राणमय कोष से तादात्म्य स्थापित हो जाता है। परिणाम यह होता है कि जिस जीवित या मृत व्यक्ति के रूप का उस अवस्था में ध्यान करेंगे, उस व्यक्ति का छाया शरीर आपके सामने स्पष्ट रूप से आ जायेगा। इस क्रिया को अनुभवी और परिपक्व लोग अपने सामने इच्छित व्यक्ति के चित्र को भी रखकर करते हैं। इससे सफलता शीघ्र मिलती है। छाया शरीर से कोई भी कार्य कराया जा सकता है। यदि जीवित व्यक्ति है तो उसके छाया शरीर पर अपना मानसिक प्रभाव डालकर उसे अपने मन के अनुकूल भी किया जा सकता है। उसकी रोग-व्याधि भी दूर की जा सकती है और उसकी समस्याएं भी दूर की जा सकती हैं। यदि व्यक्ति मृत है तो उससे अज्ञात रहस्यों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसी को छाया पुरुष-सिद्धि भी कहते हैं। इस सिद्धि के द्वारा किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से तत्काल सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है और कुछ सीमा तक मनोनुकूल कार्य भी कराया जा सकता है।
      काशी के शिवाला घाट पर एक महाशय रहते थे। नाम् था--शशि शेखर पांडेय। सुना था पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे लोगों की आत्माओं से उन्होंने संपर्क किया था। उनके कमरे में पड़े छोटे से तख्त पर कई लोगों के फोटो चिपके थे जिनमें जीवित और मृत दोनों व्यक्तियों के थे--महिलाओं और पुरुषों के भी। उन फोटो के माध्यम से वे महाशय उनके छाया पुरुषों से संपर्क करते थे। एक दिन गुरुदेव श्री अरुण कुमार शर्मा का भी चित्र लेकर चिपका लिया तख्त पर।(यह उन दिनों की बात है जब गुरुदेव की तरुण अवस्था थी। कोई नौकरी भी नहीं थी उनकी। गुरुदेव उनके कमरे में गए तो वह बोले--बन्धुवर ! मिठाई खिलाइये।
       क्यों, किसलिए ?
       कल आपको नियुक्ति पत्र मिलने वाला है।
       गुरुदेव को याद आया कि दो माह पहले केंद्रीय सरकार में एक वरिष्ठ पद के लिए आवेदन किया था। साक्षात्कार भी हो चुका था। नौकरी की आशा कम ही थी। एक प्रकार से भूल ही चुके थे गुरुदेव्।
       बात सच निकली। दूसरे ही दिन मिल गया नियुक्ति-पत्र डाक से। सचमुच छाया सिद्धि का चमत्कार था यह।

जीवित और मृत व्यक्ति के छाया शरीर में अन्तर

      जीवित व्यक्ति के छाया शरीर के ईथरिक कणों में होने वाले कम्पन अति तीव्र होते हैं लगभग एक सेकेण्ड में पचास हज़ार बार जबकि मृत व्यक्ति के शरीर में वे कम्पन एक सेकेण्ड में 30-40 हज़ार बार होते हैं। वायुतत्व के प्रभाव से वे कम्पन कभी कम, कभी अधिक भी होते हैं जिससे छाया शरीर का आकार-प्रकार घटता-बढ़ता रहता है और कभी-,कभी बेडौल-सा हो जाता है। जीवित व्यक्ति के छाया शरीर को 'छाया पुरुष' और मृत व्यक्ति के छाया शरीर को 'छाया शरीर' कहते हैं।
       अघोर मार्गीय साधक छाया पुरुष की ही सिद्धि करते हैं। इसके लिए श्मशान का वातावरण ही छाया पुरुष की सिद्धि के लिए उचित व अनुकूल बताया गया है। इसके कई कारण हैं जिनमें मुख्य कारण है--साधक को अपनी इच्छानुकूल छाया पुरुष का वहाँ मिल जाना। कोई भी छाया पुरुष साधक के बन्धन में अधिक देर तक नहीं रह सकता। वह हमेशा बंधन-मुक्त होने के लिए व्याकुल रहता है ताकि उसे सूक्ष्म शरीर प्राप्त हो जाये और उसके बाद पुनर्जन्म हो जाये। यदि साधक उसे मुक्त नहीं करता है तो वह उसकी ऐसी दुर्गति करता है कि बतलाया नहीं जा सकता। इसलिए अघोरी नए- नए छाया पुरुष की खोज में रहते हैं। 

sabhar shivrama Tiwari Facebook wall

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv