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रविवार, 24 जुलाई 2022

समझदार कंप्यूटर

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आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की रिसर्च में सबसे बड़ी चुनौती है एक समझदार कंप्यूटर बनाना. कुछ लोग आगाह करते हैं कि यह तकनीक हमारे वजूद को खतरे में डाल सकती है. अगर मशीन हमसे भी ज्यादा स्मार्ट बन बैठे, तब क्या होगा? टेक्टोपिया के इस एपिसोड में हम बात करेंगे एआई की दुनिया की और उन सवालों की, जो मानवता के सामने मुंह बाए खड़े हैं. sabhar dw.de

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बुधवार, 20 जुलाई 2022

घर को ठंडा रखेंगे खास तौर से तैयार किए गए शीशे

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एयरकंडीशनर अब बीते दिनों की बात होगी क्योंकि वैज्ञानिकों ने शीशे की ऐसी खिड़कियां तैयार कर ली हैं जो गर्मी में ठंडक और जाड़े में गर्मी का अहसास दिलाएगी। खास रसायन की परत वाले ये शीशे कम आय वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। भारत जैसे विकासशील देशों में तो खास किस्म की परत वाले शीशों से बनी खिड़कियां धूम मचा सकती हैं। 'क्वींसलैंड यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' के शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैंसों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार एयरकंडीशनर का यह 'इको फ्रेंडली' विकल्प होगा। शोधकर्ताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के चमकदार परत वाले शीशों से घरों में बेतहाशा ऊर्जा की खपत कम कर 45 फीसदी तक बिजली की बचत हो सकेगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आयेगी। शोधकर्ता 'डॉ. बेल' के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में एयरकंडीशनरों का बहुत बड़ा हाथ है। उनके मुताबिक वातानुकूलित घरों और आफिसों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है । बेल ने कहा कि बाजार में उपलब्ध ये शीशे एयरकंडीशनर के मुकाबले तो कूलिंग नहीं करेंगे पर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए ये काफी हैं। ऐसे शीशे वाली खिड़कियों में टिंटेड ग्लास, फिर एयरगैप और उसके बाद खास किस्म की ऊष्मारोधी परत वाले लो-ई ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। बेल के अनुसार अच्छी खिड़कियां घरों को ऊष्मारोधी बनाने में मदद करती हैं। इससे जाड़ों में घर गर्म रहता है और गर्मी में ठंडा । शोधकर्ता ने कहा कि शीशे पर रासायनिक परत वाले और खास किस्म की खिड़कियों के ढांचे जल्द ही हर घर की शोभा बढ़ाएंगे। sabhar dipak kohali vigyan pragati

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डायबिटीज से बचाते हैं खट्टे फल

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दीपक कोहली sabhar vigyan pragati कनाडा के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि खट्टे फल वजन बढ़ने, टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग के खतरे को कम करते हैं। 'ओंटेरियो यूनीवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि खट्टे फलों में पाये जाने वाला 'फ्लेवोनॉयड नैरीनजेनिन' तत्व शरीर में अतिरिक्त वसा को नष्ट कर देता है और वजन बढ़ने से भी रोकता है। इसमें इंसुलिन जैसे गुण भी पाये जाते हैं जो डायबिटीज को रोकने में सहायक सिद्ध हुए हैं। फ्लेवोनॉयड तत्व पौधों में पाया जाता है और मनुष्यों में यह एंटीऑक्सीडेंट की सक्रियता बढ़ाने का काम करता है । अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि यह तत्व लीवर में आनुवंशिक ढंग से अतिरिक्त वसा को नष्ट करता है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर इसके सफल प्रयोग किये हैं।

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जीन्स में छिपा है दीर्घायु का राज

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। जर्मनी के गुटनबर्ग में 12 जून से 15 जून तक यूरोपियन ह्यूमन जेनेटिक्स कांफ्रेंस 2010 सम्पन्न हुई थी इस कांफ्रेंस में बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रो. पाओला सेविस्टियनी द्वारा प्रस्तुत शोध में बताया गया था कि स्वस्थ मनुष्य की जीवन शैली व वातावरण के आधार पर आयु 80 वर्ष होती है। इससे अधिक जीवित रहने का कारण जीन्स में निहित होता है। प्रो. पाओला ने अधिक उम्र वाले लोगों के डीएनए स्कैनिंग टेक्नोलॉजी के जरिये दर्शाया। उन्होंने बताया है कि मानव शरीर में 30 करोड़ (300 मिलियन) जींस में से 150 जींस इससे संबंधित होते हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है । 110 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्ति एक करोड़ में एक होते हैं। जिनमें से 85 से 90 फीसदी महिलायें होती हैं ।

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कैंसर को खत्म करने वाले टीके का निर्माण

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ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टीका बनाने का दावा किया है जो सर्वाधिक घातक किस्म के कैंसरों को भी ठीक कर सकता है । मिडिलसेक्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रे आइल्स के अनुसार स्तन, पेट, अग्न्याशय, सर्विकल और अंडाशय के कैंसर से पीड़ित रोगियों पर परीक्षित इस इंजेक्शन को अगले पांच सालों के दौरान बाजार में उतार दिया जाएगा । अमेरिकी फर्म सेलफेडेक्स थिनेपियूटिक्स के साथ संयुक्त रूप से इस इंजेक्शन को विकसित किया जा रहा है। आईल्स का कहना है कि इस टीके से कैंसर को सिकोड़ा जा सकता है ताकि वह आगे नहीं बढ़े।

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सोमवार, 18 जुलाई 2022

जापान चांद और मंगल पर अपने ट्रेन चलाएगा

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 यह वीडियो अंकित अवस्थी का है उन्होंने समाचार पत्रों का रिसर्च करके बनाया है अंकित अवस्थी जी ने काफी गहराई से इसका अध्ययन किया है इसमें जापान के वैज्ञानिकों ने दावा किया है की सन 2050 के बाद चांद और मंगल के लिए ट्रेन चलाई जाएगी यह मैग्नेट पद्धति के ट्रेन पर आधारित होगी यात्रियों को चांद और मंगल पर जाने की यह सुविधा हो जाएगी


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शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

गुदा कैंसर की नई दवा ने जगाई उम्मीदें

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 अमेरिका में एक प्रयोग में शामिल हुए एक दर्जन से ज्यादा मरीजों का कैंसर ठीक होने को वैज्ञानिकों ने अद्भुत नतीजा बताया है. ये मरीज एक छोटी क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा थे.

न्यूयॉर्क के मेमॉरियल सलोन केटरिंग (एमएसके) कैंसर सेंटर की एक क्लिनिकल ट्रायल में शामिल हुए गुदा कैंसर के मरीजों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया. सेंटर ने बताया कि इन मरीजों को एक प्रायोगिक दवा डोस्टरलाइमैब दी गई थी. रविवार को यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था.

सबका कैंसर ठीक हुआ

प्रकाशित अध्ययन में गुदा कैंसर से पीड़ित रहे 12 मरीजों का ब्यौरा दिया गया है. अध्ययन के मुताबिक मरीजों को हर तीन हफ्ते पर डोस्टरलाइमैब दी गई. यह प्रयोग छह महीने तक चला. प्रयोग के दौरान डॉक्टर यह मानकर चल रहे थे कि मरीजों को इसके बाद कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी आदि जैसे पारंपरिक इलाज कराने होंगे.

यह भी पढ़ेंः स्तन कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी कामयाबी, नई दवा और नई श्रेणी

लेकिन छह महीने बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रयोग में शामिल सभी मरीजों का कैंसर ठीक हो गया था. ऐसा पहली बार है जबकि किसी परीक्षण में सभी कैंसर के मरीजों को सकारात्मक नतीजे मिले हैं. इसलिए वैज्ञानिकोंके बीच इस दवा को लेकर खासा उत्साह है और वे इसे दिशा बदलने वाला प्रयोग मान रहे हैं.

मेमॉरियल सलोन केटरिंग सेंटर के डॉ. लुईस डियाज जूनियर ने न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें किसी और ऐसे अध्ययन की जानकारी नहीं है जिसमें हर मरीज का कैंसर ठीक हो गया हो. उन्होंने कहा, "मेरे विचार में कैंसर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है."

इम्यूनोथेरेपी

यह प्रयोग इम्यूनोथेरेपी पर आधारित था. इम्यूनोथेरेपी में ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनका काम शरीर की रोगों से लड़ने वाली क्षमता को बढ़ाना होता है ताकि शरीर इतना ताकतवर हो जाए कि कैंसर को ठीक कर सके. एमएसके ने एक बयान में कहा कि प्रयोग में गुदा के कैंसर से पीड़ित ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें एक खास तरह का कैंसर म्यूटेशन था.

ऐसे गुदा कैंसर को "मिसमैच रिपेयर डेफिशिएंट" (MMRd) रेक्टल कैंसर कहा जाता है. इस तरह के कैंसर में कीमोथेरेपी का ज्यादा असर नहीं होता है. परीक्षण के दौरान शोधकर्ता देखना चाहते थे कि क्या सिर्फ इम्यूनोथेरेपी से ऐसे कैंसर को ठीक किया जा सकता है, जो अन्य उत्तकों और अंगों में ना फैला हो.

अध्ययन कहता है कि प्रयोग अभी चल रहा है लेकिन जिन 14 मरीजों को दवा दी गई, उन सभी का ट्यूमर खत्म हो गया और किसी पर भी कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. शोधकर्ताओं ने कहा कि किसी भी मरीज को रेडिएशन, सर्जरी या कीमोथेरेपी आदि की जरूरत नहीं है और दो साल से ये मरीज बिल्कुल ठीक हैं. किसी भी मरीज का कैंसर लौटा नहीं है.

शोध में शामिल एमसके की डॉ. ऐंड्रिया केरचक कहती हैं, "मरीजों से ये खुशियों से भरे संदेश और ईमेल पाना अविश्वसनीय रूप से प्रसन्नता देने वाला है. मरीजों को अहसास हो रहा है कि वे अपनी सभी शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से कर पाएंगे, जो रेडिएशन थेरेपी से संभव ना होता."

रिपोर्टः विवेक कुमारhttps://www.dw.com/hi/small-trial-sees-potential-for-new-rectal-cancer-drug/a-62168893

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गुरुवार, 14 जुलाई 2022

क्या है ॐ ध्वनि का रहस्य भाग

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वास्तव में, स्त्री शरीर भी अधूरा शरीर है और पुरुष शरीर भी अधूरा शरीर है; इसलिए सृजन के क्रम में उन दोनों को संयुक्त होना पड़ता है। यह संयुक्त होना दो प्रकार का है। एक पुरुष का शरीर अगर बाहर की स्त्री से संयुक्त हो, तो प्रकृति का सृजन होता है तो प्रकृति की तरफ यात्रा शुरू होती है।


और एक पुरुष का शरीर अगर अपने ही पीछे छिपे स्त्री शरीर से संयुक्त हो, तो ब्रह्म की तरफ का जन्म शुरू होता है ; परमात्मा की तरफ यात्रा शुरू होती है। ऊर्ध्वगमन का यात्रा पथ यही है..भीतर की स्त्री से संबंधित होना, और भीतर के पुरुष से संबंधित होना।


वास्तव में ,जो ऊर्जा है, वह सदा पुरुष से स्त्री की तरफ बहती है ...चाहे वह बाहर की तरफ बहे और चाहे वह भीतर की तरफ बहे। अगर पुरुष के भौतिक शरीर की ऊर्जा भीतर के स्त्री शरीर के प्रति बहे, तो फिर ऊर्जा बाहर विकीर्ण नहीं होती -ब्रह्मचर्य की साधना का यही अर्थ है।


 तब वह निरंतर ऊपर चढ़ती जाती है। चौथे शरीर तक उस ऊर्जा की यात्रा हो सकती है। चौथे शरीर पर ब्रह्मचर्य पूरा हो जाता है। इसके बाद ब्रह्मचर्य जैसी कोई चीज नहीं है; क्योंकि चौथे शरीर को पार करने के बाद साधक न पुरुष है और न स्त्री है।


अब यह जो एक नंबर का शरीर और दो नंबर का शरीर है, इसी को ध्यान में रखकर अर्धनारीश्वर की कल्पना कभी हमने चित्रित की थी। बाकी वह प्रतीक बनकर रह गई और हम उसे कभी समझ नहीं पाए। शिव शंकर अधूरे हैं,देवी पार्वती अधूरी है ..वे दोनों मिलकर एक हैं।


अर्धनारीश्वर का कि आधा अंग पुरुष का है, आधा स्त्री का है। यह जो आधा दूसरा अंग है, यह बाहर प्रकट नहीं है, यह प्रत्येक के भीतर छिपा है। तुम्हारा एक पहलू पुरुष का है, तुम्हारा दूसरा पहलू स्त्री का है। वास्तव  में, ये एक -दूसरे के परिपूरक हैं,ये दो इकाइयां नहीं हैं, ये एक ही इकाई के दो पहलू हैं।


आप देखेंगे कि पुरुष जब दिनभर कार्य करता तो उसका पहला शरीर थक जाता है। घर लौटते-लौटते वह पहला शरीर विश्राम चाहता है। भीतर का स्त्री शरीर प्रमुख हो जाता है, पुरुष शरीर गौण हो जाता है। स्त्री दिन भर स्त्री रहते-रहते पहला शरीर थक जाता है, उसका दूसरा शरीर प्रमुख हो जाता है।


इसलिए स्त्री पुरुष का व्यवहार करने लगती है और पुरुष स्त्री का व्यवहार करने लगता है ...रिवर्सन हो जाता है। ऊर्जा के आंतरिक प्रवाह ऊर्ध्व गमन का मार्ग है कि बाहर के पुरुष का भीतर की स्त्री से मिलन या बाहर की स्त्री का भीतर के पुरुष से मिलन। 


पुरुष शरीर के जो विशेष गुण हैं, वह पहला गुण यह है कि वह आक्रामक है ,दाता है, दे सकता है, ले नहीं सकता। लेकिन पुरुष ग्रहण नहीं कर पाता; उसकी ग्रहण करने की क्षमता बहुत कम है। इसलिए पुरुषों ने धर्म को जन्म तो दिया, लेकिन पुरुष धर्म का संग्रह नहीं करते।


बल्कि स्त्रियां धर्म का संग्रह करती है। स्त्री दे नहीं सकती, ले सकती है।परन्तु इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी महिमा यही है कि जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका दूसरा शरीर पुरुष का;पुनः तीसरा शरीर स्त्री का और चौथा पुरुष का। इस प्रकार जिसका पहला शरीर पुरुष का है।


 उसका दूसरा शरीर स्त्री का ;पुनः तीसरा पुरुष का और चौथा स्त्री का। चौथे शरीर के बाद स्त्री पुरुष शरीर का भेद भी खत्म हो जाता है। उनका ऊर्ध्व गमन हो जाता है। जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका चौथा शरीर पुरुष का है। जिसका पहला शरीर पुरुष का है ;उसका चौथा शरीर स्त्री का है।


इसलिए चौथे शरीर में स्त्रियां देने वाली है दाता है और चौथे शरीर में पुरुष लेने वाले भिक्षुक हैं। सांसारिक जगत में 3 शरीरों का वर्चस्व है। परंतु आध्यात्मिक जगत में यात्रा चौथे शरीर से ही शुरू होती है। स्त्रैण व्यक्तित्व का मतलब यह है कि उनमें स्त्रैण गुण हैं।


कोमलता, प्रेम, ममता, करुणा और अहिंसा आदि वे बढ़ गए; हिंसा क्रोध खत्म हो गया, आक्रमण विदा हो गया। जब भी कोई मुल्क आध्यात्मिक होगा, तो स्त्रैण हो जाएगा; और जब भी स्त्रैण होगा, तब अपने से बहुत साधारण सभ्यताएं उसको हरा देंगी।


सामान्य चौथे शरीर मे ॐ ध्वनि सुनने लगती ओर यात्रा पूर्ण समझ लोग रुक जाते। किन्तु गुरु परंपरा में गुरुजन सदैव कहते कि चौथे शरीर में जल्द आगे बढ़ो साधना समय दोगुना कर दो। क्योकि अगला शरीर आत्म शरीर है वही आपका पहला जन्म होगा स्वयं से। 


उससे पहले न जन्म है न मृत्यु हम किसी ओर के गर्भ से जन्म लेते रहते यह जीवन चक्र यू ही चलता रहता। आत्म शरीर स्वयं से जन्म लेता फिर आप को पराए गर्भ से मुक्ति मिल जाती। इसे मुक्ति कहा है यह मोक्ष या निर्वाण नही है अभी यात्रा बाकी है। 


उदहारण के लिए बौद्ध तिब्बत से निकाल दिए गए या भारत को जिन लोगों ने हराया, वे भारत से बहुत पिछड़ी हुई सभ्यताएं , एक अर्थ में बिलकुल बर्बर सभ्यताएं थीं। लेकिन हम अध्यात्म में दाता हो गए थे, हम उनको आत्मसात ही कर सके, लड़ने का कोई उपाय न था।


तो ऐसी प्रक्रियाएं हैं कि इसी हालत में व्यक्तित्व का रूपांतरण किया जा सकता है..जो तुम्हारा नंबर दो का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर एक का शरीर हो सकता है; और जो तुम्हारे नंबर एक का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर दो का शरीर हो सकता है। 


इसके लिए प्रगाढ़ संकल्प की साधनाएं हैं, जिनसे तुम्हारा इसी जीवन में भी शरीर रूपांतरित हो सकता है। परंतु समस्या तब आती है जब हम चौथे शरीर पर ही रुक जाते हैं। चौथे शरीर के बाद पांचवें ,छठवें और सातवें शरीर की भी तो यात्रा है।


भारत चौथे शरीर पर ही रुक गया इसलिए हार गया। उदाहरण के लिए  गोपिओं को श्री कृष्ण सखी प्रतीत होते हैं; परंतु क्या महाभारत में भी उनका व्यक्तित्व ऐसा है? नही, क्योंकि उनकी यात्रा छटे शरीर की हैं। श्री कृष्ण छटे ब्रह्म शरीर मे है । भारत चौथे शरीर पर रुक गया तो हार गया।


इसीलिए चौथे शरीर के बाद रुकना नहीं हैं... सातवें शरीर तक जाना हैं। राग से शुरू कर वैराग्य के रास्ते वीतरागता तक जाना वैराग्य पर रुकना नही है। जो संसार मे लिप्त होता उसे रागी कहते ओर जो संसार को मिथ्या मान दूर भागता उसे वैरागी कहते। 


राग ओर वैराग्य से ऊपर की अवस्था होती वीतरागता। यहाँ न संसार को पकड़ा होता न ही छोड़ा होता। पूर्ण आनन्द की अवस्था होती यह। जहाँ सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए योगी जन मोक्ष की तरफ बढ़ते रहते राजा जनक की तरह। 


ॐ ध्वनि चौथे शरीर पर सुनाई देती आगे की यात्रा निःशब्द है इस लिए इसे सातवे का प्रतीक माना गया किंतु ॐ ध्वनि सुनने के उपरांत भी बढ़ते रहना है ।Sabhar kundalni shadhana avam yog Facebook wall

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मंगलवार, 12 जुलाई 2022

यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए युटुब क्रिएटर्स ऑफ इंडिया की तरफ से नई जानकारी

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https://youtu.be/x2ApKFFWsO4 

यूट्यूब कौन सी नई जानकारी लेकर आ रहा है इस तरीके से आप अपने यूट्यूब चैनल से अच्छी कमाई कर सकते हैं यूट्यूब की क्या नहीं किया है यूट्यूब वीडियो में अच्छी जानकारी दी गई है

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स्तूपासन के फायदे

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https://vigyanik.quora.com -

  • यहा आतो के इन्फेक्शन को ख़त्म करता है।
  • स्तूपासन आसन करने से पेट के स्नायुओं को शक्ति मिलती है तथा नाड़ी संस्थान को यह व्यवस्थित करता है।
    इस आसन के अभ्यास से कब्ज, पेट के विकार और वीर्य दोष दूर होते हैं तथा पूरा शरीर शुद्ध होता है।
  • उच्च स्तर पर कुण्डलिनी को जागृत करने में भी इस आसन का अभ्यास ज्यादा फायदेमंद है।
  • स्तूपासन आसन आतों की गंदगी को साफ करता है तथा पाचन क्रिया में वृद्धि करने में भी इस आसन के अनेक लाभ है

स्तूपासन करने की विधि -

  • स्तूपासन करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • अब अपने दाएं पैर को बाएं जांघ पर रखें तथा बाएं पैर को दाएं जांघ पर रखें।
  • इसके बाद दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध कर पीछे की ओर ले जाएं। अब दाएं हाथ की मुट्ठी को बाएं हाथ में कसकर पकड़ के नीचे की ओर करके रखें।
  • इसके बाद गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए सामने की ओर जितना झुकना संभव हो जब चाहें मुट्ठियों को कसकर पकड़ कर रखें।
  • आसन की इस स्थिति में 3 से 10 सेकंड तक रहें और सांस को रोक कर रखें।
  • सांस को छोड़ते हुए धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं

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क्या हाइड्रोजन वाकई जादुई ईधन है ?

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हाइड्रोजन ऊर्जा का एक रूप है। यह ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। बिजली की थोड़ी मात्रा का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। हाइड्रोजन गैसोलीन से बेहतर है क्योंकि यह एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है। इसकी ऊर्जा स्वच्छ, पोर्टेबल और नवीकरणीय है। जब हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में जलाया जाता है, तो केवल जलवाष्प और ऊष्मा उत्सर्जित होती है। आपको हाइड्रोजन ईंधन से कोई धुआं नहीं दिखाई देगा। हाइड्रोजन ईंधन हमारे पर्यावरण को बचाता है और हमारी हवा को सांस लेने के लिए स्वस्थ बनाता है।

हाइड्रोजन ईंधन वह ईंधन है जो हाइड्रोजन से बनता है। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे आम तत्वों में से एक है। इससे सूर्य और तारे बनते हैं। यह पानी, मीथेन और अमोनिया में भी है। यह सबसे हल्का तत्व है और इसे पहले कभी ईंधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया गया है।

हाइड्रोजन से चलने वाले ईंधन सेल, वाहन वे वाहन हैं जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया से एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प है। ईंधन सेल एक उपकरण है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच प्रतिक्रिया से बिजली पैदा करता है। इस प्रक्रिया से एकमात्र उत्सर्जन गर्मी और पानी है। ईंधन सेल बैटरी से अलग होते हैं। एक ईंधन सेल लगातार बिजली पैदा करता है जबकि एक बैटरी केवल तब तक बिजली पैदा करती है जब तक बैटरी के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया ऊर्जा जारी करती है।

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ध्यान करने बैठते हैं तो मन भटकने क्यों लग जाता है?

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https://hi.quora.com/ 

ध्यान करने बैठते हैं तो मन भटकने क्यों लग जाता है?

भटकने लगता है, ऐसा नहीं है! हमेशा गतिशील रहने वाले मन से आपका साक्षात्कार होता है !

पहले यह समझिये मन क्या है, और ध्यान क्या है, फिर इसकी गति समझ आएगी!

मन विचारों, भावों, समृति, कल्पना रूपी प्रक्रिया का नाम है जो मस्तिष्क रूपी अंग में सदा चली रहती है !

ध्यान किसी एक विचार के अटूट प्रवाह का नाम है!

जब हम ध्यान करने बैठते हैं तो मन के भीतर निरंतर चलायमान यह गतिविधि हमारी जागरूकता में आ जाती है !

इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं! यह तो अच्छा ही है ! कम से कम बेहोशी की तन्द्रा तो टूटी !

अब करना क्या है ताकि मन को एक नयी आदत में ढाला जाये जिसे हम ध्यान कहते हैं!

इस गति को रोकने का प्रयास न करें! इसके प्रति बस जागरूक रहें! विचार उठा है, चला भी जायेगा! बस छोड़ना सीखें! बह जाने दें इस प्रवाह को अनंत ब्रह्माण्ड में!

जो सब छोड़ देता है, वह सब पा लेता है !

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सोमवार, 11 जुलाई 2022

10 Years after the Higgs, Physicists Are Optimistic for More Discoveries

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https://www.scientificamerican.com

Imagine that you have just arrived on a planet in another solar system. Suddenly, five minutes after you landed, you spot an alien life-form. This is an amazing discovery! You may well spend decades trying to understand this exotic being, probing its properties and investigating how it came to be there. At the same time, you expect that there may be other fascinating creatures around, maybe even more intriguing than the first and possibly much harder to get a glimpse of.

This is how it feels for particle physicists as we begin a new phase, called Run 3, at the world’s most powerful particle accelerator: the Large Hadron Collider (LHC) at CERN near Geneva. This month marks the 10th anniversary of the discovery of the Higgs boson, a long-sought particle that had been predicted almost 50 years earlier. The LHC was built to find the Higgs boson and it did. Its next goal is to find clues to help us decipher other unresolved mysteries. Although the machine has not yet uncovered other novel fundamental particles—especially the hoped for supersymmetric particles that popular theories predicted and may still be out there—since the Higgs boson, the future at the LHC is promising. We have many new avenues to explore and many reasons for optimism.

The Higgs boson discovery, which came just four years after the LHC opened, was a lucky strike—it could have taken much longer to detect the particle, or we might never have found it at all. The particle’s mass might not have been in the range accessible at the collider, or it might not have interacted enough with other particles to be produced in the LHC collisions. It might not even have existed at all. And nature was even kinder: for reasons that we don’t yet understand, it arranged for the Higgs boson’s mass to be 125 times the mass of a proton, a value that causes the Higgs to decay into many of the particles we know at similar rates.* This property makes it convenient to explore how the Higgs boson talks to these other particles and opens many opportunities to look for the unexpected.

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The Higgs boson was the remaining piece of the Standard Model of particle physics, our leading theory of the properties and interactions among the fundamental bits of nature. Much of particle physics does not fit into this model, however. The current state of our field feels like trying to understand the science of cooking when all you have is a good grasp on the theory of how water boils. The Standard Model is silent about dark matter and even the force of gravity. Neutrinos are there, but their tiny masses are unaccounted for. Ordinary matter is there but with no explanation of how it prevailed over antimatter after the big bang. The Higgs boson is there but with no attempt to explain why the invisible Higgs energy field turned itself on in the early universe to give mass to other particles—or why their masses are as different as those of an ant and a whale or why the Higgs gave itself a mass that puts the present-day universe at the edge of cosmic instability.

The LHC was designed as a discovery machine to help us answer these questions, and fortunately for us, it has another 20 years on its horizon before it shuts down. The flagship detectors at the collider—ATLAS and CMS—have become quite different experiments in Run 3 than they were 10 years ago. Both have received upgraded technologies, and a new generation of talented scientists is pursuing novel ideas for how to glimpse what may be out there. In Run 3, all of the LHC experiments will be pushing into previously unexplored territory on multiple fronts. I am trembling with excitement about what may lie ahead.

We have already been able to produce many thousands of Higgs bosons at the LHC and are now working toward detecting the rarer ways by which the particle can be produced and then decay into other particles. There are plenty of chances for surprises, either in precision measurements that may show the Higgs is produced or decays somewhat differently from our Standard Model predictions or through the observation of exotic phenomena related to the Higgs. For instance, the Higgs boson might decay into dark matter, or Higgs decays may violate the expected symmetry between matter and antimatter.

So far we have only seen collisions that produce a single Higgs boson at a time. But we think that it should also be possible to produce two Higgs bosons in one collision. This “di-Higgs” production would give us a direct window into how the Higgs energy field turned on after the big bang because it is a direct measure of how strongly the Higgs boson, and therefore the Higgs energy field, interacts with itself. The Standard Model predicts that collisions producing two Higgs bosons will occur at a finite but tiny rate, suggesting that this process will become detectable near the end of the LHC’s lifetime. This is an exciting prospect, but there is also no compelling reason to believe the details of this prediction: the Standard Model does not claim to know the origins of the Higgs boson or understand the mechanisms of the invisible Higgs field in the early universe. A di-Higgs signal could potentially be seen sooner, during Run 3, perhaps induced by new particles that enhance the process.

Less than one LHC collision in a billion produces a Higgs boson, so the initial discovery was like finding a needle in a very large haystack. Today theorists have proposed many possibilities for other alien particles that could eventually appear in our detectors. But the challenge now is akin to searching for something in a haystack when you don’t even know if you are seeking a needle or some other object entirely. Sorce scientific American. Co.

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रविवार, 10 जुलाई 2022

Blogger to WordPress: A Beginner’s Guide to Migrating Your Site Without Losing SEO

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 Are you planning to transfer your site from Blogger to WordPress but don’t want to lose traffic and search engine rankings? Keep reading, because, in this article, we’ll explain why migrating your site can be beneficial and provide a step-by-step guide to help you complete the transfer process easily.

Why Would You Migrate from Blogger to WordPress?

Blogger is a reliable but simple blogging platform for creating and publishing blog posts. But when it comes to expanding your site towards a larger-scale project (such as a digital store), Blogger may not provide all the features you need.

On the other hand, WordPress is a fully-featured CMS that you can rely on to create any kind of website, from a personal blog to a business site. Let’s cover some of its strongest features:

  • Self-hosted — you can choose where to host your site, which allows for greater control on how much you spend, and what you get for it.
  • Plugin and theme availability — tons of plugins and themes are available to shape your website into whatever you need it to be, and to extend its functionality.
  • Completely customizable — you can easily change how your website looks and tailor it perfectly to your audience.
  • SEO friendly — The WordPress libraries offer plenty of SEO plugins and SEO-friendly themes to improve how your site ranks.
  • Light — WordPress doesn’t require a lot of memory, loads fast, and offers a great user experience for both visitors and webmasters.

Keep in mind that when we talk about WordPress, we talk about the CMS that can be found on WordPress.org, not the platform WordPress.com. The two platforms have many key differences when it comes to hosting, domains, monetization, etc.

3 Easy Steps to Migrate from Blogger to WordPress

Now that you know the benefits, here are the steps to migrate Blogger to WordPress.

Step 1. Get Web Hosting

The first step to WordPress migration is to find the best web hosting provider for your site.

Blogger to WordPress: A Beginner’s Guide to Migrating Your Site Without Losing SEO

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Why Would You Migrate from Blogger to WordPress?

Blogger is a reliable but simple blogging platform for creating and publishing blog posts. But when it comes to expanding your site towards a larger-scale project (such as a digital store), Blogger may not provide all the features you need.

On the other hand, WordPress is a fully-featured CMS that you can rely on to create any kind of website, from a personal blog to a business site. Let’s cover some of its strongest features:

  • Self-hosted — you can choose where to host your site, which allows for greater control on how much you spend, and what you get for it.
  • Plugin and theme availability — tons of plugins and themes are available to shape your website into whatever you need it to be, and to extend its functionality.
  • Completely customizable — you can easily change how your website looks and tailor it perfectly to your audience.
  • SEO friendly — The WordPress libraries offer plenty of SEO plugins and SEO-friendly themes to improve how your site ranks.
  • Light — WordPress doesn’t require a lot of memory, loads fast, and offers a great user experience for both visitors and webmasters.

Keep in mind that when we talk about WordPress, we talk about the CMS that can be found on WordPress.org, not the platform WordPress.com. The two platforms have many key differences when it comes to hosting, domains, monetization, etc.

3 Easy Steps to Migrate from Blogger to WordPress

Now that you know the benefits, here are the steps to migrate Blogger to WordPress.

Step 1. Get Web Hosting

The first step to WordPress migration is to find the best web hosting provider for your site.

Hostinger WordPress Hosting Page

You can check out Hostinger’s WordPress hosting plans, which provide a one-click WordPress installer, a 99.9% uptime guarantee, 24/7 customer support, and special optimization to improve WordPress performance.Here’s how you get Hostinger’s WordPress hosting:

  1. Navigate to the WordPress hosting page.
  2. Pick your preferred plan and click Add to cart.
  3. At the Shopping Cart, you can add other services like daily backups. Then, click Checkout Now.
  4. Complete the Sign Up process to create a new Hostinger account or Log In if you have one.
  5. Pick the payment method and complete the purchase.

If you opt for the Premium or Business plan for 12 months or longer, you can register a premium domain completely free for the first year. Alternatively, if you already have a domain, you can transfer it to Hostinger.

Now we can use the hPanel to install WordPress:

  1. Head to the Hosting menu on the hPanel, select Manage.
  2. Navigate to the Websites section, and choose the Auto Installer.
  3. Select WordPress and fill out all required information, including your domain name, then click Install.

Step 2. Manually Transfer Your Site Data

Next, transfer your site’s content from Blogger to WordPress manually:

  1. From the Blogger Dashboard go to Settings -> Other.
  2. In the Import & back up section, select Back up Content -> Save to your computer. The XML file will be downloaded automatically to your device.Import and Back up Section on Blogger Dashboard
  3. Now, head to the WordPress Dashboard, there go to Tools -> Import.
  4. Choose Blogger by clicking Install Now, then select Run Importer.
  5. On the Import Blogger page, press the Choose File button.
  6. Locate the XML file you’ve saved and Upload it.
  7. You will be redirected to the Assign Authors page. Fill out the user information and click Submit.Assign Author Page on WordPress

Congratulations. You have your Blogger website’s posts, comments, and categories in your new WordPress site. But it’s not over yet, the last step is redirecting your traffic.

Step 3. Redirect Your Traffic with a Plugin

The most important part of preserving SEO is having your old site redirect to the new one. In this tutorial, we’ll use a WordPress plugin ‒ Blogger To WordPress Redirection.

First, set up your WordPress permalinks to resemble Blogger’s link structure.

  1. Head to WordPress Dashboard -> Settings -> Permalinks.
  2. In the Common Settings section, choose Month & name.
  3. Hit Save Changes.

Now, let’s start the redirection setup:

  1. Download and activate the Blogger To WordPress Redirection plugin from the WordPress dashboard’s plugin section.
  2. Navigate to Tools -> Blogger To WordPress Redirection.
  3. Click the Start Configuration button to display the List of Blogs section. Then press Get Code. Copy the generated code.Blogger To WordPress Redirection Generated Code
  4. Now, head to your Blogger Dashboard -> Theme.
  5. Scroll down to the bottom of the page and click Revert to classic themes. Before inserting the code, it’s recommended to backup your old Blogger theme in case anything goes wrong.
  6. In the Edit Theme HTML box, replace the whole code with the generated one -> Save theme.Edit Theme HTML Box on Blogger
  7. If you want to test whether the redirection is successful, head back to the Blogger To WordPress Redirection page and select Verify Configuration. Click the Blogger link in the Test Case section.

Additionally, if your Blogger site has RSS subscribers, you also need to redirect the feed.

  1. Access your Blogger Dashboard -> Settings -> Other.
  2. In the Site Feed section, click Add next to Post Feed Redirect URL.
  3. Type your WordPress feed URL (Eg.: http://yoursitename.com/feed).

Conclusion

As Blogger provides basic features for building a simple blog, migrating from Blogger to WordPress is necessary to get more and better features for growing your site. When transferring, it’s important not to overlook a few key steps that will help carry over traffic and SEO metrics.

Here is the recap of how to carry your site over from Blogger to WordPress without affecting SEO:

  1. Find WordPress hosting that will meet your needs, then install the CMS.
  2. Transfer your site’s content manually by downloading the XML file from Blogger, then upload it to WordPress.
  3. Activate the Blogger To WordPress Redirection plugin to automatically redirect visitors and search engines to your new site.

Make sure to check our guide on how to start a blog to find out the post-migration steps to complete your blog set-up.https://www.hostinger.in/tutorials/how-to-migrate-from-blogger-to-wordpress?ppc_campaign=google_search_generic_hosting_all&bidkw=defaultkeyword&lo=1007823&gclid=Cj0KCQjwzqSWBhDPARIsAK38LY8VwOdmPSdPhxT-MqCsU20idwpx3Eo_zLIGYuy8E_96q9V1TUN1ulYaAm-uEALw_wcB


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