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शनिवार, 9 जुलाई 2022

जड़ी बूटियों के द्वारा बुढ़ापे को दूर भगाया जाए

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 केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ में आयोजित  अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला  के दौरान वैज्ञानिकों ने इस तथ्य को उजागर किया।


सेक्सीफ्रागा लिग्युलता (भारतीय नाम पासानिभिड़ा), वुडफोर्डिया फ्रुटीकोसा (शिनाजितिया) व रोडोमायरटस टोमेन्टोसा हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले ऐसे पौधे हैं जिनमें मौजूद तत्व हमें जवान रहने में मदद करते हैं। हिमालयन ड्रग की शोधकर्ता डॉ. एकता सक्सेना ने बताया कि आंतरिक और बाहरी दो कारणों से हम उम्र दराज दिखने लगते हैं। त्वचा पर झुर्रियां पड़ना, लचीलापन कम होना, आंखों के नीचे काले धब्बे होना बढती उम्र के लक्षण हैं, लेकिन भारत में पाए जाने वाले सेक्सीफ्रागा लिग्युलता में कुछ ऐसे तत्व हैं जो त्वचा के कालेपन को रोकते हैं। इसके अलावा रोडोमायरटस टोमेन्टोसा त्वचा के लचीलेपन को कम करता है। हमारे शरीर में कोलेजन प्रोटीन का बनना भी हमें उम्र दराज दिखाता है। वुड फोर्डिया फ्रुटीकोसा इस प्रोटीन के बनने को कम करता है। इस प्रकार हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों में बुढ़ापा दूर करने की ताकत है तथा ये पौधे त्वचा के कालेपन और झुर्रियों को कम करने में भी मददगार हैं।


राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रमाणित किया है कि गूलर के फल में पाए जाने वाले तत्व शरीर में मुक्त मूलक यानी फ्री-रेडिकल बनने से रोकते हैं। उल्लेखनीय है कि शरीर में फ्री-रेडिकल की मात्रा अधिक होने पर ये कोशिकाओं को मारने लगते हैं और साथ ही डी एन ए को भी नुकसान


पहुंचाते हैं, जिससे तमाम अंगों को क्षति पहुंचती है। फ्री-रेडिकल की वजह से युवा अवस्था में ही बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं। इसके अलावा दिल की बीमारी और ब्रेन स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। वहीं शरीर का मेटाबोलिज्म गडबड होने की वजह से मोटापे और मधुमेह की आशंका बढ़ जाती है। गूलर के फल में उपस्थित तत्व फ्री-रेडिकल के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके डी एन ए को ठीक करते हैं। शोधकर्ताओं ने गूलर के फल के तत्व (फिनॉलिक) को निकाल कर शोध किया। शोध में यह पाया गया कि गूलर खाने से फ्री-रेडिकल को मारने वाले रसायन ग्लूटाथिआन, सुपर


गूलर खाओ, बुढ़ापा दूर भगाओ


ऑक्साइड डिस्म्युटेज की मात्रा बढ़ जाती है और साथ ही क्रीमेडिकल की मंत्रा कम हो जाती है। इसके अलङ ऑक्सीडेविट स्ट्रेस बढ़ाने वाले लैक्टो पराक्सीडेज का स्तर भी कम होता है।


शोधकर्ताओं के अनुसार गुर फिनॉलिक अवयद के अलावा पाया जाने वाला गैलिक, क्लोरोजनिक और इलासिक एसिड फ्री-रडिकल बनने से रोकता है साथ ही शरीर में अधिक बने फ्री-डिकल को कम करता है। इसके सत (एक्स्ट्रैक्ट से एटिऑक्सीडेंट बयाए में बनाई   जा सके sabhar aviskar # latest #arvadik #anti ageing #antiocident

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