रविवार, 31 जनवरी 2021
छिपकली के पूंछ की तरह उगेंगे मनुष्य के अंग
0छिपकली भी अजीब प्राणी है उसकी पूंछ स्वम ही झड़ जाती है है और कुछ समय बाद पुनः उग जाती है वैज्ञानिको ने अब इस रहस्य को समझ लिया है वैज्ञानिको ने यह अनुवांशिक नुस्खा खोज निकला है जो छिपकली के अंग के पुनिर्माण के लिए कारक है वैज्ञानिको का कहना है की आनुवंशिक सामग्री के सही मात्रा में मिश्रण से यह संभव है छिपकली में पाए जाने वाले अंग पुनर्निर्माण के आनुवांशिक सामग्रियों के सही मात्रा का पता लगाकर उन्ही जीन को मानव कोशिका में प्रत्यारोपित कर उपास्थि मांसपेशी यहाँ तक ऋण की हड्डी की पुनर्संग्रचना भविस्य में सभव है एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के किनारो कुसमी ने कहा छिपकली में वही जीन होते है जो मनुस्यो में होते है ये मनुस्यो की शारीरिक संगरचना से मेल खाने वाला जीव है इससे विभिन्य पारकर की बीमारियों का इलाज संभव है
चाँद पे एलियन देखने का दावा
0
जनवरी 31, 2021 in
अन्य ग्रहो के चेतनायुक्त प्राणियों को देखना तथा उनके सात आत्मीयता बढ़ाना सपना सा लगता है इन्ही प्राणियों को को एलियन कहा जाता है एलियन हमेसा से पृथ्वी वासियो के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है कई वैज्ञानिको ने एलियन से जुडी बाते दुनिया के सामने रखी है नासा ने भी एलिअन्स के विषय में एक सूचना दी है नासा ने एक वीडियो में मानव आकृति जैसा प्राणी चाँद पे चलते देखा है नासा ने इस दिशा में और भी जांच कर जानकारी देने को कहा है इस वीडियो को देखने वालो के लिए इसकी परछाई को देख पाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है यह अनरिच्या के शोध में नयी दिशा दे सकती है
शीशे की तरह पारदर्शी होंगे शरीर के अंग
0
जनवरी 31, 2021 in
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे पूरा शरीर शीशे की तरह पारदर्शी हो जाता हैयह शोध सेल नामक अनुसंधान पत्रिका में प्रकाशित हुआ है इस तकनीक से शरीर को हानि नहीं पहुंचती और शरीर के सभी अंगों को देखा जा सकता है इससे यह जानने में मदद मिलेगी कि शरीर के विभिन्न अंग किस तरह काम करते हैं करीब एक सदी से वैज्ञानिक शरीर को पारदर्शी रूप में देखने का प्रयास कर रहे हैं थे लेकिन अधिकांश तक नीचे उतर को नुकसान पहुंचा सकती हैं कोशिकाओं में मौजूद लिपट के मोटे कण प्रकाश किरणों को वितरित कर उसको को अपारदर्शी बना सकते हैं लेकिन उन्हें विकसित करने में प्रयोग होने वाले प्रक्रिया से अंग कमजोर हो सकते हैं और उनका आकार बिगड़ सकता है कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने पूर्व के वैज्ञानिक कामों के आधार पर एक तीन स्तरीय तकनीक विकसित की है एक नरम प्लास्टिक की झिल्ली उसको को सहारा देती है खून के प्रवाह के जरिए अनुवांशिक डिटर्जेंट को उसको लगातार जला डाला जाता है यह रिपीट को खोलता है और अंगों को पारदर्शी बनाता जाता है महत्वपूर्ण जोड़ों को पहचान के लिए इस मिश्रण में पहचान करने वाले रंगों और अंगों को मिलाया जा सकता है
विशालकाय रहस्यमय जलीय जीव
0
जनवरी 31, 2021 in रहस्यमय. जलीय जीव, विशालकाय
लोच नेस मॉन्सटर पानी में रहने वाला एक विशाल जीव है जो अब तक रहस्य्मय ही बना हुआ है इससे संबंधित किद्वन्तियाँ भी प्रचलित है माना जाता है कि यह स्कॉटिश हाई लाइट्स पर रहता है हमने कई समुद्री जीव देखे हैं जिसमें से कुछ अति सुंदर तो कुछ अत्यंत भयंकर होते हैं इन्हीं भयानक जीवो में से एक लोच नेस मॉन्सटर है स्कॉटलैंड की झील लोच नेस पाया गया है वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर एली विलियम्स ने इस अजीब अजीबोगरीब जीव की तस्वीर ली है बाद में जब उन्होंने इन तस्वीरों को देखा तो अली का ध्यान इस मॉन्स्टर की ओर गया हालांकि यह पहली बार नहीं है जब पानी में रहने वाला यह जीव सबकी नजरों में आया है सबसे पहली बार यह इसी झील में 2006 में देखा गया था जिसके बाद से वह वहां आने वाले लोगों को सचेत कर दिया गया था फोटोग्राफर अली ने कहा कि शुरुआत में मुझे लगा वह कोई सांप की प्रजाति है फिर कैटफिश की तरह लगा मगर मुझे नहीं पता वह है क्या मैं यहां विशेष लोगों के ऊपर छोड़ता हूं आपको बता दें लोच नेस मॉन्सटर पानी में रहने वाला एक विशाल जीव है जिस कारण अभी तक बरकरार है कुछ लोग उसके अस्तित्व पर शक भी करते हैं मगर इससे संबंधित कई किस्से भी सामने आए हैं माना जाता है
शनिवार, 30 जनवरी 2021
सोचते ही पहुंच जाएंगे संदेश प्राचीन भारत की बातें सत्य टेलीपैथी
0
जनवरी 30, 2021 in की बातें सत्य टेलीपैथी, जाएंगे संदेश प्राचीन भारत, सोचते ही पहुंच
आने वाले समय में सोचते ही संदेश टेलीपैथी के द्वारा पहुंच जाएंगे यह प्रयोग पहले ही भारत में किया जा चुका है जिसने तिरुवंतपुरम में बैठा व्यक्ति का संदेश 5000 किलोमीटर दूर बैठे फ्रांस में एक व्यक्ति को बिना बताए जो संदेश उसे भेजा गया वह उन्हें डिकोट करके पढ़ लिया जिसमें शोधकर्ता ने इलेक्ट्रोन्सेफेलोग्राफी हेडसेट का प्रयोग करके दिमाग में होला और सिआओ कहने पर न्यू डांस की गतिविधियों की में उनकी इलेक्ट्रिक इक्विटी को रिकॉर्ड किया मैं बायनरी कोर्ट में बदलकर दूसरे व्यक्ति के ब्रेन तक भेज दिया जिससे मात्र महसूस कर डिकोट कर लिया इसमें इलेक्ट्रिक करंट को तमाम तरह के विचारों से जोड़ा जाता है और उसे कंप्यूटर इंटरफेस में डाल दिया जाता है कंप्यूटर इन सिग्नल का विशेषण कर क्रिया को नियंत्रित करता है कंप्यूटर इंटरफेस की जगह आउटपुट के लिए दूसरे व्यक्ति के दिमाग को आईजी से जोड़ दिया जाता है रिसीवर एंड पर बैठे व्यक्ति के पास जब मैसेज पहुंचा पहुंचा तो उसे चमक सी महसूस हुई जब उसने इसे डिकोड किया तो वही संदेश निकला जो संदेश भेजने वालों ने लिखा था इस प्रकार वेदों पुराणों में देवताओं आध्यात्मिक रूप से उन्नत महात्माओं को टेलीपैथी द्वारा संदेश भेज आने का जिक्र मिलता है वह आज इस तरह साबित हो रही है
शुक्रवार, 29 जनवरी 2021
नियंडरथल मानव की थी अपनी भाषा
0
जनवरी 29, 2021 in की थी अपनी, नियंडरथल मानव, भाषा
नियंडरथल होमो सेपियंस की एक विलुप्त प्रजाति है जो आधुनिक मानव से कड़ी से संबंध से संबंधित है नियंडरथल और आधुनिक मानव के डीएनए के अध्ययन से यह साफ़ होता है की 300000 से 400000 वर्ष पूर्व एक ही पूर्व से अलग हुए थे हालांकि अभी भी यह रहस्य है कि नियनथंडल कब और क्यों विलुप्त हुए थे यह जीवाश्मों के अध्ययन से यह जाहिर होता है कि नियंडरथल का मस्तिष्क का आकार लगभग आधुनिक मानव के बराबर था उन्नत प्रकार के औजार बनाते थे उनकी अपनी भाषा थी अभी तक यह ज्ञात नहीं था कि वे आधुनिक मानव की तरह बोल सकते थे या नहीं अभी तक यह सिद्धांत प्रचलित था कि भाषा का विकास आधुनिक मानव के उद्गम वह विकास के साथ ही हुआ है लेकिन अब नवीन अनुसंधान यान इशारा करते हैं कि उनकी अपनी भाषा थी और हो सकता है उनके शब्दों में हमारे प्रजाति की भाषा में भी अपना योगदान दिया हो नीदरलैंड के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलिंगगुइस्टिक निज़मेगेन के शोधकर्ता डान यू तथा स्टीफन सी लेविंसन ने मानव जीवन का अध्ययन करके बताया कि आधुनिक भाषा और वाणी का उद्गम लगभग 500000 वर्ष पूर्व कि हमारे और नियंडरथल के उभयनिष्ठ पूर्वजो तक खोजा जा सकता है
एचआईवी का इलाज मानव जीन से होगा
0
जनवरी 29, 2021 in एचआईवी, का इलाज, मानव जीन से होगा
पूरे विश्व में लगभग तीन करोड़ 40 लाख 98 हज़ार पैदा करने वाले एचआईवी के संक्रमण से पीड़ित है उनमें से एक बड़ी जनसंख्या निर्धन और विकासशील देशों में है एक व्यक्ति में क्रमिक रूप से प्रभाव होते होते प्रतिरोधी तंत्र के कारण जीवन के लिए जोखिम पैदा करने वाले संक्रमण जैसे जीवाणु जाने विसर्जन कवक तथा प्रोटोजोआ अन्य सरकार पूरी तरह से हावी हो जाते हैं और अंत में रोगी की मौत हो जाती है अभी तक कोई प्रभाव की खोज नहीं की जा सकती है उसके लिए दवा का प्रयोग किया जाता है इसका उपयोग की समस्या उत्पन्न हो सकती है अब मानव जीन से एचआईवी का संक्रमण का इलाज संभव है
लैब में तैयार की गई किडनी
0
जनवरी 29, 2021 in किडनी, में तैयार की गई, लैब
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने न केवल लैब में किडनी विकसित करने में सफलता प्राप्त की है बल्कि उसे सफलतापूर्वक एक चूहे में प्रत्यारोपित कर दिया है इस किडनी ने मूत्र बनाना आरंभ कर दिया है और गौरतलब है कि सभी के कई ऐसे हैं जिन्हें लैब में विकसित करके मरीजों को लगाया जा चुका है लेकिन अब तक बनाए गए अंगो में गुर्दा सबसे अधिक शरीर का एक महत्वपूर्णअंग है खून की सफाई करके इसमें फालतू पानी बेकार के तत्वों को निकालता है या रोपण के लिए इसकी मांग भी सबसे ज्यादा है कैसे बनाया जाता है गुर्दा अमेरिका के एक हॉस्पिटल में तैयार किया गया है इसके लिए डाक्टरों ने चूहे की एक किडनी ली और डिटर्जेंट से उसकी सभी पुरानी कोशिकाओं को धो डाला बचे हुए प्रोटीन का जाल हो जो बिलकुल गुर्दे जैसा लग रहा था इसके अंदर खून की कोशिकाओं और निकासी का जटिल भाषा भी मौजूद था प्रोटीन के इस ढांचे को गुर्दे के सभी भाग में सही कोशिका को भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया जहां भी पुनर्निर्माण के लिए ढांचे के साथ मिल गए इसके बाद एक खास तरह से रखा गया और तापमान को पैदा किया गया रखा गया जब देखी गई प्राकृतिककिडनी के मुकाबले का ३० प्रतिशत मूत्र का निर्माण किया यह बड़ी सफलता है आने वाले वक्त में मनुस्य में प्रत्यारोपित करने में सफलता मिल सकती है
अधिक नमक से स्व प्रति रक्षित रोगों का खतरा
0
जनवरी 29, 2021 in अधिक नमक, रोगों का खतरा, से स्व प्रति रक्षित
वह प्रतिरक्षा विकार एक ऐसी शारीरिक अवस्था है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ ऊतकों पर हमला करके उसे उन्हें नष्ट करने लगती है स्व प्रतिरक्षा विकारों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस मायस्थेनिया ग्रेविस ग्रेप्स रोग रूमेटाइड अर्थराइटिस सिस्टमिक लुपस एरिदमेटोसस टाइप 1 डायबिटीज इतिहास शामिल है हाल के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध से इस बात के संकेत मिलते हैं कि बढ़ती स्व प्रति रक्षित रोग दर के पीछे नमक का अधिक उपयोग करना हो सकता है यह खोज शोधकर्ता के विभिन्न दलों द्वारा एक विशेष प्रकार की कोशिकाओं पर किए गए कार्य पर आधारित है जिसे th17 कोशिकाएं कहते हैं यह कोशिकाएं विभिन्न स्व प्रति रक्षित रोगों में लिप्त पाई गई हैं जब हमारा शरीर किसी विशिष्ट रोगाणुओं से संक्रमित होता है तो केवल उसको पहचानने वाली थी वह भी कोशिकाएं ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं यह को शिकायत तेजी से बढ़ती हैं और संक्रमण से लड़ने के लिए अपने जैसी कोशिकाओं की एक फौज तैयार कर लेती है विशेष प्रकार की एटी एवं बी कोशिकाएं आक्रमणकारी रोगाणु की स्मृति बनाए रखती हैं और हमें उनके हक दूसरे हमले से प्रशिक्षित कर देते हैं शोधकर्ताओं के अनुसार जिन लोगों ने यह स्वीकार किया है कि वे फास्ट फूड खाते हैं उसमें th17 कोशिकाओं की संख्या अधिक थी जैसा की सर्वविदित है कि फास्ट फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है यह जानने के लिए क्या नमक ही th17 कोशिकाओं की अधिकता का कारण है शोधकर्ताओं में कोशिकाओं के संवर्धन में सोडियम क्लोराइड डाला उन्होंने पाया कि नमक में मध्यम दर्जे की विधि से अधिक नमक खाने वाले प्राणियों को ही की तरह कोशिकाओं की संख्या 10 गुना तक बढ़ गई इंटेक्स पर कोशिकाओं ने ऐसे और बनाने शुरू कर दिए जो इस बात का सूचक था कि वे हानिकारक कोशिकाएं हो गए थे यह परीक्षण चूहों पर किया गया
गुरुवार, 28 जनवरी 2021
आईटी क्षेत्र में भविष्य में होने वाले बदलाव
0
जनवरी 28, 2021 in आईटी क्षेत्र, में भविष्य, में होने वाले बदलाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- इसके क्षेत्र में कई सफल परीक्षण हो चुकी हैं कुछ क्षेत्रों में इसकी सफलता भी प्राप्त की जा चुकी है आने वाले समय में मानव निर्णय और विश्लेषण के आधार पर इसका प्रयोग किए जाने की संभावना हैमशीन विजन इसमें काफी छोड़कर चल रहा है अभी तक निकालने के बाद बहुत बदलाव देखने को मिलेगा जिसमें ड्राइवरलेस कार और अपने से चलने वाले अन्य उपकरण
सोमेटिक वेब - आंसरिंग मशीन मीटिंग बेबी आंसरिंग मशीन पर काफी शोध कार्य चल रहा है हालांकि इसको बनाने में सफलता हासिल नहीं हो पाई है आने वाले समय आने वाले इसके आने से सर्च इंजन की जरूरत समाप्त हो जाएगी
सॉलि़ड स्टेट ड्राइव -इसे का प्रयास किया जा रहा है सॉलि़ड स्टेट ड्राइव बन जाने के बाद हार्ड ड्राइव की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक की वजह से हटके लैपटॉप कंप्यूटर और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण संभव हो सकेगा साथ ही तेज और ऊर्जा के के फायदे स्टोरेज सिस्टम भी बनाए जा सकते हैं
3D ऑप्टिकल डाटा स्टोरेज- इस तकनीक के क्षेत्र में काफी कार्य चल रहा है इस तकनीक के आ जाने से मैग्नेटिक टेप स्टोरेज और अन्य मास स्टोरेज उपकरणों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक के द्वारा डाटा का भंडारण बड़े स्तर पर करना संभव हो जाएगा
स स्पिंट्रॉनिक्स तकनीक- इसका वर्किंग पूर्व प्रोटोटाइप तैयार हो चुके हैं इस तकनीकी आ जाने से मैकेनिकल मैग्नेटिक हार्ड डिस्क ड्राइव की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक से भारी डाटा भंडारण किया जा सकेगा वायरलेस कम्युनिकेशन इस तकनीक से सभी जगह नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी स्क्रीन लिस्ट डिस्प्ले वर्चुअल रियलिटी का सपना साकार हो सकेगा
3D डिस्प्ले -यह तकनीक बाजार में काफी सुधार हो जाएगा
बुधवार, 27 जनवरी 2021
रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..
0
जनवरी 27, 2021 in
वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या कृत्रिम बुद्धि से बने एंड्रॉयड्स (रोबो) भी धार्मिक हो सकते हैं। उनका कहना है कि संभव है कि एक दिन रोबो की कोई धर्म अपना लें और इसका अर्थ है कि वे मानवता की सेवा कर सकते हैं और इसे नष्ट करने की कोशिश नहीं करेंगे। लेकिन इसका उल्टा भी सच हो सकता है और संभव है कि धार्मिक होने से उनकी ताकत में बढ़ोतरी हो जाए।मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के मर्विन मिंस्की का कहना है कि किसी दिन कम्प्यूटर्स भी नीति शास्त्र को विकसित कर सकते हैं, लेकिन इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि इन मशीनों को लेकर सारी दुनिया में धार्मिक संघर्ष भी पैदा हो सकता है। डेलीमेल डॉटकॉम के लिए एल्ली जोल्फागारीफार्ड का कहना है कि वैज्ञानिक मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धि (आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस) दशकों की अपेक्षा वर्षों में एक वास्तविकता हो सकती है। हाल ही में एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस मनुष्यता के लिए परमाणु हथियारों की तरह से घातक हो सकती है।डेलीमेल डॉटकॉम में डिलन लव ने हाल ही में एक सारगर्भित रिपोर्ट पेश की थी जिसमें ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई थी। लेकिन मॉर्मन ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, लिंकन कैनन ने लव से कहा कि कम्प्यूटर साइंस में ऐसे कोई नियम नहीं हैं कि सॉफ्टवेयर के लिए धार्मिक विश्वास रखना संभव होगा।उनका कहना था कि धर्म विरोधियों के मध्य कुछ ऐसी भोलीभाली आवाजें हैं जो कि एक मशीनी बुद्धि और धार्मिक विश्वासों के बीच तकनीकी असंगति की कल्पना करते हैं। इंस्टीट्यूट फॉर एथिक्स एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज से जुड़े एक स्कॉलर, जॉन मेसरली, का कहना है कि ' मैं मानता हूं कि आप कृत्रिम बुद्धि को लगभग किसी भी चीज पर विश्वास करने के लिए प्रोग्राम कर सकते हैं। वहीं कैनन का कहना है कि धार्मिक सुपरइंटेलीजेंस या तो सबसे अच्छी या सबसे खराब सिद्ध हो सकती है। उनका मानना है कि धर्म मात्र एक ताकत है और इसका उपयोग अच्छे या बुरे के लिए किया जा सकता है।पर जानकारों का कहना है कि धर्म पहले से ही अपने आप में सहिष्णु नहीं है और जिस धर्म के पास सुपरइंटेलीजेंस होगी, वह तो और भी कम सहिष्णु होगा। इन सवालों के बीच एक और प्रश्न उठा है कि क्या कृत्रिम बुद्धि की भी कोई आत्मा (सोल) हो सकती है? जबकि स्वीडिश दार्शनिक निक बॉस्ट्रम का कहना है कि 'सबसे बड़ा डर इस बात का है कि जैसे-जैसे रोबो अधिक स्मार्ट होते जाएंगे, वे एक ऐसा रास्ता चुनेंगे जोकि उनके अस्तित्व को निरंतर बने रहने को सुनिश्चित करता हो और इसका अर्थ मनुष्यता का विनाश हो सकता है।' पर प्रसिद्ध कॉमेडियन ड्रंकन ट्रसेल और रेवरेंड क्रिस्टोफर बेनेक मानते हैं कि धर्म के कारण रोबो मनुष्यता के साथ-साथ रह सकते हैं।पिछले महीने ही एलन मस्क ने एक हजार रोबोटिक्स विशेषज्ञों को चेताया कि स्वचालित हथियार कल के कलाश्निकोव साबित होंगे। इससे पहले प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग भी कह चुके हैं कि जो हथियार सार्थक मानवीय नियंत्रण से बाहर हो सकते हों, उन पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की तरह सभी रोबो हथियार सहज, सुलभ तरीकों से उपलब्ध हो सकते हैं और इनका कच्चा माल हासिल करना भी मुश्किल नहीं होगा। और अंतत: यह तकनीक वैश्विक हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है तथा ऐसे हथियार हत्याओं जैसे काम के लिए आदर्श साबित होंगे
sabhar :aajtak24.in
मंगलवार, 26 जनवरी 2021
किसी भी मरीज के इलाज में खून की कमी नहीं होगी
0
जनवरी 26, 2021 in किसी भी मरीज, के इलाज में खून की कमी नहीं होग
वैज्ञानिकों की मानें, तो आने वाले दिनों में किसी भी मरीज के इलाज में खून की कमी नहीं होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही वे इलाज में जरूरत पड़ने वाले खून की बेशुमार मात्रा सप्लाइ कर पाएंगे। मौजूदा समय में लोगों को चिकित्सा कारणों से जब खून की जरूरत पड़ती है, तो ब्लड की किल्लत के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लड डिसऑर्डर्स और कई अन्य बीमारियों में लोगों को बड़ी मात्रा में खून चढ़ाना पड़ता है। लंबे शोध के बाद वैज्ञानिक वयस्क कोशिकाओं को मूल कोशिकाओं में बदलने में कामयाब हुए हैं। ये मूल कोशिकाएं की भी तरह की रक्त कोशिकाएं बनाने में सक्षम होंगी।पिछले करीब 20 साल से वैज्ञानिक यह पता करने की कोशिश कर रहे थे कि क्या इंसान के खून में कृत्रिम तौर पर मूल कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है। मूल कोशिकाएं शरीर में किसी भी तरह की कोशिकाएं बना सकती हैं। अब शोधकर्ताओं की एक टीम को अलग-अलग तरह की कोशिकाओं को मिलाने में सफलता मिली है। इनमें रक्त की मूल कोशिकाएं भी शामिल हैं। जब इन कोशिकाओं को चूहे के शरीर में डाला गया, तो उन्होंने अलग-अलग तरह की इंसानी रक्त कोशिकाओं का निर्माण किया।अमेरिका के बॉस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉक्टर योइचि सुगिमुरा ने बताया, 'इस शोध की मदद से हम खून की वंशानुगत बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की कोशिकाएं ले सकते हैं और जीन एडिटिंग की मदद से उनके डिसऑर्डर को ठीक करके स्वस्थ रक्त कोशिकाएं तैयार कर सकते हैं। साथ ही, इसके कारण रक्त की मूल कोशिकाओं की अबाध आपूर्ति भी संभव हो सकती है।' हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रमुख और सुगिमुरा के साथी शोधकर्ता डॉक्टर जॉर्ड डेली ने कहा, 'हम शायद जल्द ही स्वस्थ और प्रामाणिक इंसानी रक्त तैयार करने में कामयाब हो जाएंगे। 20 सालों की मेहनत के बाद हम इस मकाम तक पहुंचे हैं।sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com
पौधेां का भी नर्वस सिस्टम होता है
0
जनवरी 26, 2021 in नर्वस सिस्टम होता है, पौधेां का भी
पोलैंड की वर्सा यूनिवर्सिटी ;के प्रोफ़ेसर स्टेनिलो कार पिंस्की और उनके ;साथी वैज्ञानिको का दावा है है की;पौधे प्रकाश में कैद जानकारिया समझ कर प्रतिक्रिया देते है । एक प्रयोग में जब पौधे के ऊपरी भाग में रोशनी डाली गयी ;तो उसका असर पूरे;पौधे पे सामान रूप से हुआ । शोधकर्ता बताते है की पौधेां का भी नर्वस सिस्टम होता है । साथ ही उनकी याददाश्त भी कमालकी होती है;। इसी कारण ;पौधे अपने ऊपर आये वातावरण मेंबदलाव के मुताबिक खुद को ढाल लेते है।
सोमवार, 25 जनवरी 2021
मस्तिष्क प्रत्यारोपण के विकास
0
जनवरी 25, 2021 in प्रत्यारोपण के विकास, मस्तिष्क
बेहद गोपनीय अमेरिकी सैन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले कुछ महीनों में वे मस्तिष्क प्रत्यारोपण के विकास से जुड़ी नई प्रगति के बारे में जानकारी पेश करने वाले हैं. मस्तिष्क प्रत्यारोपण की मदद से याददाश्त बहाल की जा सकेगीअमेरिका की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डीएआरपीए) प्रबुद्ध स्मृति उत्तेजक को बनाने की योजना के कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही है. यह इंसानी दिमाग को बेहतर तरीके से समझने के लिए बनाई गई योजना का हिस्सा है. इस योजना में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दस करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता दी थी.विज्ञान ने पहले ऐसा काम नहीं किया है. और इस पर नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं कि जख्मी सैनिक की याददाश्त को बहाल करने और बूढ़े होते मस्तिष्क के प्रबंधन के नाम पर क्या इंसानी दिमाग के साथ छेड़छाड़ जायज है.कुछ लोगों का कहना है कि जिन लोगों को इससे लाभ पहुंचेगा उनमें पचास लाख अमेरिकी हैं जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित हैं और करीब तीन लाख अमेरिकी फौजी हैं जिनमें महिलाएं और पुरुष शामिल हैं. ये वो सैनिक हैं जो इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान घायल हुए और उनके मस्तिष्क में चोटें आई.डीएआरपीए के प्रोग्राम मैनेजर जस्टिन साचेंज ने इसी हफ्ते अमेरिकी राजधानी में हुई एक कॉन्फ्रेंस में कहा, "अगर आप ड्यूटी के दौरान घायल हो जाते हैं और आप अपने परिवार को याद नहीं रख पाते हैं, ऐसे में हम चाहते हैं कि हम इस तरह के कामों को बहाल कर सकें. हमें लगता है कि हम न्यूरो कृत्रिम उपकरण का विकास कर सकते हैं जो सीधे हिप्पोकैंपस से इंटरफेस कर सकें और पहली प्रकार की यादें बहाल कर सकें. हम यहां एक्सप्लिसिट मेमरी के बारे में बात कर रहे हैं."एक्सप्लिसिट मेमरी यानि स्पष्ट यादें, ये लोगों, घटना, तथ्य और आंकड़ों के बारे में स्मरणशक्ति है और किसी भी शोध ने यह साबित नहीं किया है कि इन्हें दोबारा बहाल किया जा सकता है. अब तक शोधकर्ता पार्किंसन बीमारी से पीड़ित लोगों में झटके कम करने में मदद कर पाए हैं और अल्जाइमर के पीड़ितों में डीप ब्रेन सिमुलेशन प्रक्रिया की मदद से याददाश्त मजबूत करने में सफल हुए हैं.इस तरह के उपकरण हृदय पेसमेकर से प्रोत्साहित हैं और दिमाग में बिजली को पहुंचाते हैं लेकिन यह हर किसी के लिए काम नहीं करता है. जानकारों का कहना है कि स्मृति बहाली के लिए और अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण की जरूरत होगी. वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर रॉबर्ट हैंपसन कहते हैं, "स्मृति, पैटर्न और कनेक्शन की तरह है." डीएआरपीए की योजना पर टिप्पणी से इनकार करते हुए वे कहते हैं, "हमारे लिए स्मृति कृत्रिम बनाना वास्तव में ऐसा कुछ बनाने जैसा है जो विशिष्ट पैटर्न देता हो.चूहों और बंदरों पर हैंपसन के शोध से पता चलता है कि हिप्पोकैंपस में न्यूरॉन्स तब अलग तरह से प्रक्रिया देते हैं, जब वे लाल या नीला रंग या फिर चेहरे की तस्वीर या भोजन के प्रकार को देखते हैं. हैंपसन का कहना है कि मानव की विशिष्ट स्मृति को बहाल करने के लिए वैज्ञानिकों को उस स्मृति के लिए सटीक पैटर्न जानना होगा. सिंथेटिक जीव विज्ञान पर डीएआरपीए को सलाह देने वाले न्यूयॉर्क के लैंगोनी मेडिकल सेंटर में चिकित्सा विज्ञान में नैतिकता पर काम करने वाले आर्थर कैपलान कहते हैं, "जब आप दिमाग से छेड़छाड़ करते हैं तो आप व्यक्तिगत पहचान से भी छेड़छाड़ करते हैं. दिमाग में फेरबदल की कीमत आप स्वयं की भावना को खोने की जोखिम से करते हैं. इस तरह का जोखिम नई तरह का है, जिसका हमने कभी सामना नहीं किया है."
साभार dw.de
रविवार, 24 जनवरी 2021
हिन्दू धर्म और टाइम मशीन का रहस्य समय यात्रा
0
जनवरी 24, 2021 in और टाइम मशीन, का रहस्य, समय यात्रा, हिन्दू धर्म
हम सब समय में यात्रा करते हैं. पिछले साल से में एक साल समय में आगे बढ़ चूका हूँ. दूसरें शब्दों में कहूँ तो हम सब प्रति घंटे 1 घंटा की दर से समय में यात्रा करते हैं. लेकिन यहाँ पर सवाल यह है कि क्या हम प्रति घंटे 1 घंटा की दर से भी ज्यादा तेजी से यात्रा कर सकते है? क्या हम समय में पीछे जा सकते हैं? क्या हम प्रति घंटे 2 घंटे की रफ़्तार से यात्रा कर सकते है? 20 वी सदी के महान वैज्ञानिकअल्बर्ट आइंस्टीन ने विशेष सापेक्षता&(Special Relativity) नामक;सिद्धांत विकसित किया था. विशेष सापेक्षता के सिध्धांत के बारे में तो कल्पना करना भी मुश्किल हैं क्योंकि यह;रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ अलग तरह की ही चीज़े उजागर करता हैं. इस सिध्धांत के मुताबिक समय और अंतरिक्ष एक ही चीज़ हैं. दोनों एकदूसरे से जुड़े हुए हैं. जिसे space-time भी कहते हैं. space-time में कोई भी चीज़ यात्रा कर रही हो उसकी गति की एक सीमा हैं-;3 लाख किलोमीटर. यह प्रकाश की गति हैं.विशेष सापेक्षता का सिध्धांत यह भी दर्शाता हैं की space-time में यात्रा करते वक्त कई आश्चर्यजनक चीजे होती हैं, खास कर के जब आप प्रकाश की गति या उसके आसपास की गति पा लेते हैं. जिन लोगो को आपने पृथ्वी पर पीछे छोड़ दिया हैं उनकी तुलना में आपके लिए समय की गति कम हो जाएगी. आप इस असर को वापस आए बिना नोटिस नहीं कर सकते हैं. सोचिए की आपकी उम्र अभी 15 साल की हैं और आप एक अंतरिक्ष यान में प्रकाश की गति की तुलना में 99.5% तक की गति पा लेते हैं. अपनी यात्रा के दौरान आपने अपने 5 जनमदिन सेलिब्रेट किए, यानी आपने अंतरिक्ष यान में 5 साल बिताए. 5 साल के सफ़र के बाद आप 20 साल की उम्र में अपने घर वापस आते हैं. आप देखेंगे की आपकी उम्र के आपके दोस्त 65 साल के हो गए होंगे. क्योंकि अंतरिक्ष यान में समय आपके लिए ज्यादा धीरे से बिता था. आपने जितने समय में 5 साल अनुभव किए उनते ही समय में आपके दोस्तों ने 50 साल महसूस किए.आइंस्टीन के General Relativity के सिध्धांत के मुताबिक किसी भी तरह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में समय की रफ़्तार कम हो जाती हैं. जैसे समय की गति हमारी पृथ्वी पर अंतरिक्ष की तुलना में कम होगी. जैसे की किसी ब्लैक होल के नजदीक गुरुत्वाकर्षण बहुत तीव्र हो जाता हैं. ऐसी जगह पर समय की रफ़्तार बहुत ही कम हो जाती हैं. तीव्र गुरुत्वाकर्षण की वजह से space-time में कई विकृतियाँ पैदा हो जाती हैं. ऐसी विकृतियों से पैदा हो सकते हैं, जो की;में सफ़र करने के लिए शार्टकट हो सकते हैं. कुछ वैज्ञानिक तो ऐसा ही मानते हैं. जो भी हो मेरा तो यहीं मानना हैं की समय यात्रा सिर्फ भविष्य की ही मुमकिन हो सकती हैं. क्योंकि समय में पीछे जाना मुमकिन ही नहीं हैं. क्योंकि जो हो गया वह हम कभी बदल नहीं सकते लेकिन जो होनेवाला हैं वह अभी भी हाथ में हैं. हम शायद भविष्य की सैर कर सकते हैं लेकिन उसके लिए हमे बहुत ही उम्दा टेक्नोलॉजी की जरुरत होगी और बहुत ज्यादा उर्जा की भी जरुरत होगी. इंग्लैंड के मशहूर लेखक हर्बट जार्ज वेल्स ने 1895 में 'द टाइम मशीन' नामक एक उपन्यास प्रकाशित किया, तो समूचे योरप में तहलका मच गया। इस उपन्यास में वेल्स ने 'टाइम मशीन' की अद्भुत कल्पना की। यह उनकी कल्पना का एक ऐसा आविष्कार था, जिसे विश्व भर में विज्ञान लेखक आज तक उपयोग कर रहे हैं। उपन्यास से प्रेरित होकर इस विषय पर और भी कई तरह के कथा साहित्य रचे गए। इस कॉन्सेप्ट पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बनी। हालांकि वेल्स के उपन्यास में व्यावहारिक रूप से कई विसंगतियां है।टाइम मशीन अभी एक कल्पना है।;टाइम ट्रेवल और टाइम मशीन, यह एक ऐसे उपकरण की कल्पना है जिसमें बैठकर कोई भी मनुष्य भूतकाल या भविष्य के किसी भी समय में सशरीर अपनी पूरी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं के साथ जा सकता है। अधिकतर वैज्ञानिक मानते हैं कि यह कल्पना ही रहेगी कभी हकीकत नहीं बन सकती, क्योंकि यह अतार्किक बात है कि कोई कैसे अतीत में या भविष्य में जाकर अतीत या भविष्य के सच को जान कर उसे बदल दे। जैसे कोई भविष्य में से आकर आपसे कहे कि वह आपका पोता है या अतीत में से आकर कहे कि वह आपका परदादा है, जो यह संभव नहीं है।वैज्ञानिक कहते हैं कि दरअसल,जो घटना घट चुकी है उसका दृश्य और साउंड ब्रह्मांड में मौजूद जरूर रहेगा। जिस तरह आप एक फिल्म देखते हैं उसी तरह वह टाइम मशीन के द्वारा दिखाई देगा। आप उसमें कुछ भी बदलाव नहीं कर सकते। यदि ऐसा करने गए तो वह पार्टिकल्स बिखरकर और अस्पष्ट हो जाएंगे। दूसरा यह कि आप टाइम ट्रैवल से जो घटना नहीं घटी है, लेकिन जो घटने वाली है उसे भी देख सकते हैं, क्योंकि सभी कार्य और कारण की श्रृखंला में बंधे हुए हैं। हालांकि विद्वान यह भी मानते हैं कि भविष्य को जानकर वर्तमान में कुछ सुधारकर भविष्य को बदला जा सकता है, लेकिन अतीत को नहीं।प्राचीनकाल में सनतकुमार,;नारद, अश्विन कुमार आदि कई हिन्दू देवता टाइम ट्रैवल करते थे।टाइम मशीन की कल्पना भी भारतीय धर्मग्रंथों से प्रेरित है। आप सोचेंगे कैसे? वेद और पुराणों में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है। उदाहरणार्थ रेवत नाम का एक राजा ब्रह्मा के पास मिलने ब्रह्मलोक गया और जब वह धरती पर पुन: लौटा तो यहां एक चार युग बीत चुके थे। रेवती के पिता रेवत अपनी पुत्री को लेकर ब्रह्मा के पास योग्य वर की तलाश में गए थे। ब्रह्मा के लोक में उस समय हाहा, हूहू नामक दो गंधर्व गान प्रस्तुत कर रहे थे। गान समाप्त होने के उपरांत रेवत ने ब्रह्मा से पूछा अपनी पुत्री के वरों के बारे में।ब्रह्मा ने कहा, 'यह गान जो तुम्हें अल्पकालिक लगा, वह चतुर्युग तक चला। जिन वरों की तुम चर्चा कर रहे हो, उनके पुत्र-पौत्र भी अब जीवित नहीं हैं। अब तुम धरती पर जाओ और शेषनाग के साथ इसका पाणिग्रहण कर दो जो वह बलराम के रूप में अवतरित हैं।' अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति चार युग तक कैसे जी सकता है? कुछ ऋषि और मुनि सतयुग में भी थे, त्रेता में भी थे और द्वापर में भी। इसका यह मतलब कि क्या वे टाइम ट्रैवल करके पुन: धरती पर समय समय पर लौट आते थे?इसका जवाब है कि हमारी समय की अवधारणा धरती के मान से है लेकिन जैसे ही हम अंतरिक्ष में जाते हैं, समय बदल जाता है। जो व्यक्ति ब्रह्मलोक होकर लौटा उसके लिए तो उसके मान से 1 वर्ष ही लगा। लेकिन अंतरिक्ष के उक्त 1 वर्ष में धरती पर एक युग बीत गया, बुध ग्रह पर तो 4 युग बीत गए होंगे, क्योंकि बुध ग्रह का 1 वर्ष तो 88 दिनों का ही होता है।पहले यह माना जाता था कि समय निरपेक्ष और सार्वभौम है अर्थात सभी के लिए समान है यानी यदि धरती पर 10 बज रहे हैं तो क्या यह मानें कि मंगल ग्रह पर भी 10 ही बज रहे होंगे? लेकिन आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार ऐसा नहीं है। समय की धारणा अलग-अलग है।आइंस्टीन ने कहा कि दो घटनाओं के बीच का मापा गया समय इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें देखने वाला किस गति से जा रहा है। मान लीजिए की दो जुड़वां भाई हैं- A और B। एक अत्यंत तीव्र गति के अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाता है और कुछ समय बाद पृथ्वी पर लौट आता है जबकि B घर पर ही रहता है। A के लिए यह सफर हो सकता है 1 वर्ष का रहा हो, लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटता है तो 10 साल बीत चुके होते हैं। उसका भाई B अब 9 वर्ष बड़ा हो चुका है, जबकि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था। यानी A 10 साल भविष्य में पहुंच गया है। अब वहां पहुंचकर वह वहीं से धरती पर चल रही घटना को देखता है तो वह अतीत को देख रहा होता है।
जैसे एक गोली छूट गई लेकिन यदि आपको उसको देखना है तो उस गोली से भी तेज गति से आगे जाकर उसे क्रॉस करना होगा और फिर पलटकर उसको देखना होगा तभी वह तुम्हें दिखाई देगी। इसी तरह ब्रह्मांड में कई आवाजें, चित्र और घटनाएं जो घटित हो चुकी हैं वे फैलती जा रही हैं। वे जहां तक पहुंच गई हैं वहां पहुंचकर उनको पकड़कर सुना होगा।यदि ऐसा हुआ तो...? कुछ ब्रह्मांडीय किरणें प्रकाश की गति से चलती हैं। उन्हें एक आकाशगंगा पार करने में कुछ क्षण लगते हैं लेकिन पृथ्वी के समय के हिसाब से ये दसियों हजार वर्ष हुए।भौतिकशास्त्र की दृष्टि से यह सत्य है लेकिन अभी तक ऐसी कोई; टाइम मशी नहीं बनी जिससे हम अतीत या भविष्य में पहुंच सकें। यदि ऐसे हो गया तो बहुत बड़ी क्रांति हो जाएगी। मानव जहां खुद की उम्र बढ़ाने में सक्षम होगा वहीं वह भविष्य को बदलना भी सीख जाएगा। इतिहास फिर से लिखा जाएगा।एक और उदाहारण से समझें। आप कार ड्राइव कर रहे हैं आपको पता नहीं है कि 10 किलोमीटर आगे जाकर रास्ता बंद है और वहां एक बड़ा-सा गड्डा है, जो अचानक से दिखाई नहीं देता। आपकी कार तेज गति से चल रही है। अब आप सोचिए कि आपके साथ क्या होने वाला है? लेकिन एक व्यक्ति हेलीकॉप्टर में बैठा है और उसे यह सब कुछ दिखाई दे रहा है अर्थात यह कि वह आपका भविष्य देख रहा है। यदि आपको किसी तकनीक से पता चल जाए कि आगे एक गड्ढा है तो आप बच जाएंगे। भारत का ज्योतिष भी यही करता है कि वह आपको गड्ढे लेकिन एक अतार्किक उदाहरण भी दिया जा सकता है, जैसे कि एक व्यक्ति विवाह करने से पहले अपने पुत्र को देखने जाता है टाइम मशीन से। वहां जाकर उसे पता चलता है कि उनका पुत्र तो जेल के अंदर देशद्रोह के मामले में सजा काट रहा है तो... तब वह दो काम कर सकता है या तो वह किसी अन्य महिला से विवाह करे या विवाह करने का विचार ही त्याग दे।इंग्लैंड के वैज्ञानिक ने किया दावा, बना सकता है क्या प्रकाश के लेज़र Tunnel से भविष्य में संदेश भेजा जा सकता है?अगर ऐसा हो सकता है, तो भविष्य के लोग हमसे क्या कहेंगे?69 वर्षीय Ronald Mallett का यह मानना है कि उन्होंने एक ऐसा Tunnel डिज़ाइन किया है, जो समय से आगे संदेश भेज सकता है. उनका ये कहना है कि इस शताब्दी की ये पहली Time Machine सिद्ध होगी. Mallett अभी University of Connecticut में ख्याति-प्राप्त Theoretical Physicist हैं. वो फ़िलहाल एक डॉक्यूमेंटरी पर काम कर रहे हैं, जिसका विषय है टाइम मशीन बनाने की खोज Mallett ने 10 वर्ष की उम्र से ही शुरु कर दी थी. अपने पिता की मौत के बाद Mallett ने इसे पूरा करने की ठान ली. अपने डॉक्यूमेंटरी ‘Mallett कहते हैं कि, उन्हें ये निर्णय बिलकुल सही लगा, क्योंकि वो अपने मृत पिता को वापस देखना चाहते थे. Mallett के दिमाग में ये सवाल था कि क्या कोई समय पर नियंत्रण कर सकता है? Mallett का ये कहना है, “मेरा व्यक्तित्व, मेरा एक सफल Physicist बनना ये सब बस मेरा पिता से प्यार की वजह से है. मेरा एक एक Mission है, जिसका लक्ष्य है ये पता लगाना कि टाइम मशीन कैसे बनाते हैं? टाइम मशीन कैसे काम करेगीMallett की टाइम मशीन का मूल आधार Einstein की Theory of Relativity है. इस सिद्धांत के अनुसार ये बताया गया है कि प्रकाश की किरणें भी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पैदा कर सकती हैं.एक Scientific Paper में Mallett ने लिखा कि प्रकाश के एक अस्थायी Cylinder के संदर्भ में मजबूत गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए मेरे पास एक सटीक समाधान है, जो Einstein के आंतरिक और बाह्य गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश के समीकरणों के विश्लेषण पर आधारित हैजुड़े हुए लाइन्स की उपस्थिति भविष्य और भूत में समय यात्रा करने का संकेत देती हैं. इस संकेत से ही प्रकाश के अस्थायी Cylinder की सहायता से टाइम मशीन के निर्माण की संभावना दिखती है. का ये मानना है कि भौतिक सिद्धांत पर समय यात्रा असंभव है, पर वो ऐसा सोचते है कि अगर समय के साथ सन्देश भेजा जा सकता है, तो प्रकाश के Tunnel की मदद से N भी भेजे जा सकेंगे कहते हैं कि 1 को Spin Up की दिशा में लगाने पर और 0 को Spin Down की दिशा में लगाने पर हम Neutron Spin के द्वारा बाइनरी कोड भी भेज सकते हैं अगर वाकई टाइम मशीन बन सकती है तो क्या ये सपनों की दुनिया में जीना जैसा नहीं होगा? विकास की दिशा में ये पहल एक चमत्कारी वरदान की भांति सिद्ध होगी. भविष्य और अतीत में सफ़र करना मनुष्य के लिए अत्यंत रोमांचकारी होगा
स्रोत : www.gazabpost.com, वेबदुनिआ , www.universeinhindi.com
"संकल्प शक्ति- सुपर चेतन मन -विज्ञान
0
जनवरी 24, 2021 in - सुपर चेतन मन, -विज्ञान, "संकल्प शक्ति
मानव - मस्तिष्क इतनी विलक्षणताओं का केंद्र है जिसके आगे वर्तमान में अविष्कृत हुए समस्त मानवकृत उपकरण एवं यंत्रों का एकत्रीकरण भी हल्का पड़ेगा. अभी तक मस्तिष्क के 1/10 भाग की ही जानकारी मिल सकी है, 9 /10 भाग अभी तक शरीर शास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है. मस्तिष्क के इस 9/10 भाग में असीमित क्षमताएं भरी पड़ी हैं. मस्तिष्क में अगणित चुम्बकीय केंद्र हैं जो विविध-विधि रिसीवरों और ट्रांसफ़ॉर्मरों का कार्य सम्पादित करती हैं. मानव मस्तिष्क में असीमित रहस्यात्मक असीम शक्ति हैं जिसके विषय में हमें हलकी-फुलकी सतहीय सत्तर की जानकारी हैं. योग साधना का एक उदेश्य इस चेतना विद्युत -शक्ति का अभिवर्धन करना भी है. इसे मनोबल, प्राणशक्ति और आत्मबल भी कहते हैं. संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति के रूप में इसके चमत्कार देखे जा सके हैं. मनोविज्ञान के समूचे खजाने में दो चीजें भरी हैं सूत्र [ Formula ] और तकनीक [Technique ] . सूत्रों में स्थिति का विवेचन होने के साथ तकनीकों के संकेत भी हैं.तकनीकों द्वारा स्थिति को ठीक करने के प्रयास किये जातें हैं. संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति मस्तिष्क के वे हाई momentum वाले विचार हैं जिनकी गति अत्यंत तीब्र और प्रभाव अति गहन होतें हैं और अत्यंत शक्तिशाली होने के कारण उनके परिणाम भी शीघ्रः प्राप्त होतें है. मन के तीन भाग या परतें भावना, विचारणा और व्यवहार मानवीय व्यक्तितिव के तीन पक्ष हैं उनके अनुसार मन को भी तीन परतों में विभक्त किया जा सकता है : भौतिक जानकारी संग्रह करने वाले चेतन - मस्तिष्क [Conscious- Mind ] और ऑटोनोमस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले अचेतन - मस्तिष्क [Sub- Conscious - Mind] अभी अभी विज्ञान की परिधि में आयें हैं. पर अब अतीन्द्रिय - मस्तिष्क [Super-Conscious -Mind] का अस्तित्व भी स्वीकारा जाता हैं . हुना [Huna] हुना [Huna] का अर्थ हवाई द्वीप [ Phillippines ] में गुप्त या सीक्रेट है. शरीर , मन और आत्मा के एकीकरण पर आधारित हुना -तकनीक लगभग 2000 वर्ष पुरानी परामानोविज्ञानिक रहस्यवादी स्कूल हैं. इस गूढ़ और गुप्त तकनीक के प्रयोग से एक साधारण मनुष्य अपनी संकल्प शक्ति द्वारा अपने अन्तराल में प्रसुप्त पड़ी क्षमताओं को जगा कर और विशाल ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तिशाली चेतन तत्त्वों को खीचकर अपने में धरण कर अपने आत्मबल को इतना जागृत कर सकता हैं की वह अपने व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितिओं में मनचाहा परिवर्तन ला सके . हुना के अनुसार मन की तीन परतें Llower –Self [Unconsious- Mind]----- यह Rib-Cage में स्थित है.Middle -Self [Consious -Mind] ------यह भ्रूमध्य में पीनल ग्लैंड में स्थित है.Higher –Self [Super-Consious-Mind] -------यह सर से लगभग 5 फीट की उच्चाई पर स्थित है. Lower –Self : यह हमारा अचेतन मन है.समस्त अनुभवों और भावनाओं का केंद्र है. Middle -Self द्वारा इसे निर्देश और आदेश देकर कार्य करवाया जा सकता है. समस्त जटिल गिल्ट , कोम्प्लेक्सेस , तरह - तरह की आदतें, आस्थाएं, सदेव Lower -Self में संचित रहतें हैं. Lower -Self स्वयं कोई भी तार्किक या बुद्धि पूर्ण निर्णय लेने में पूर्ण रूप से असमर्थ है. Middle -Self : यह हमारा चेतन मन है जिससे हम सोच-विचार करते हैं और निर्णय लेते हैं. यह हमारे बुद्धि के स्तर को दर्शाता है. Higher- Self : मानव मस्तिष्क का वह भानुमती का पिटारा है जिसमें अद्भुत और आश्चर्य जनक क्षमताएं भरी पड़ी हैं, , जिन्हें अगर जीवंत-जागृत कर लिया जाए तो मनुष्य दीन -हीन स्थिति में न रह कर अनंत क्षमताओं को अर्जित कर सकता है. Higher-Self में किसी भी समस्या या परिस्थिति का समाधान करने की असाधारण क्षमता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम उससे मदद मांगें. Higher - Self कभी भी मानव के साधारण क्रिया-कलापों में दखलांदाजी नहीं करा है जब तक विशेष रूप से उससे मदद न मांगी जाये. हुना द्वीप वासी किसी देवी-देवता की जगह अपने कार्यों या प्रयोजनों की सिद्धि के लिए अपने Higher – Self पर पूर्ण रूप से आश्रित होतें हैं और उसीसे से ही प्रार्थना करते हैं. Aka - Chord यह अदृश्य चमकीली - चाँदी की ओप्टिकल फाइबर के समान कॉर्ड या वायर है जो Lower -Self को Higher - Self से और Middle - Self को Lower -Self से जोडती है, . Higher -Self और Middle -Self प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए नहीं होते हैं. प्राण प्राण ही वह तत्व हैं जिसके माध्यम से Higher –Self हमरे अभीष्ट लक्ष्य की पूर्ति करता है. प्राण तत्व की अधिकता गहरी साँस द्वारा संभव है. चेतन मस्तिष्क या Middle-Self द्वारा प्राण तत्व वायु द्वारा ग्रहण किया जाता है. फिर इस प्राणतत्व को Lower-Self अत्यंत उच्च विद्युत –वोल्टेज़ में परिवर्तित कर देता है पुनः इस हाई – वोल्टेज़ का प्रयोग हमारा Higher- Self अभीष्ट की लक्ष्य प्राप्ति के लिए करता है. संकल्प ध्यान की Technique 1. सुख आसन या सुविधजनक जनक स्थिति में बैठ जायें. अपनी आंखें बंद करे, धीमें और गहरी 10 सांसें लें और प्रत्येक साँस के साथ प्राण शक्ति को अपने अन्दर जाता महसूस करे.2. अब ग्रहण किये प्राण शक्ति को अपने सोलर प्लेक्सस [Rib Cage] में एक चमकीली हाई वोल्टेज सिल्वर गेंद के रूप में Visualize करें.3. अब उस गेंद से अत्यंत तीब्र सिल्वर सफ़ेद प्रकाश निकलता देखें जिसे एक सक्रीय ज्वालामुखी से लावा निकलता है , या जैसे दिवाली के अवसर पर जलाये जाने वाले आतिशबाजी आनार से तीब्र गामी प्रकाश निकलता है.4. सफ़ेद प्रकाश को अपने सिर से 5 फीट की ऊंचाई तक जाता देखें .5. अब इस सफ़ेद प्रकाश को सर की ऊपर एक चमकीले सिल्वर रंग के विशाल गोले का रूप धरते देखें .6. इस गोले में अपनी लक्ष्य की विस्तृत और इच्क्षित पूर्ति देखे. आप का लक्ष्य एकदम सपष्ट और निश्चित होना चाहिए.7. अपने इच्क्षित लक्ष्य की अत्यंत बारीक़ और विस्तृत पूर्ति देखें.8. उस सफ़ेद गोले में अपने लक्ष्य को पूरा हुआ देखें और विश्वाश करे की आप का वह कार्य पूर्ण रूपेण , सफलता पूर्वक सम्पादित हो चूका है.9. मन में संकल्प करे की आपका वह इच्क्षित कार्य पूरा हो चूका है.10. प्रक्रिया के अंत में अपने Higher-Self को अपने संकल्प की पूर्ति के लिए धन्यवाद कहें.11. प्रतिदिन यह प्रक्रिया करें , जब तक आप का वह इच्क्षित कार्य पूर्ण नहीं हो जाता है.12. अपने Higher - Self पर विश्वाश करे जो आप के अन्दर ईश्वर के D.N.A. का प्रतिनिधितित्व करता है. वह आपको कभी धोखा नहीं देगा. अतीन्द्रिय विज्ञान और गूढ़ -विज्ञान में ऐसी संभावनाएं हैं जो मानवीय कष्टों को मिटा कर , किसी भी मानव की वर्तमान क्षमता में अधिक वृद्धि कर उसे अधिक सुखी और सफल बना सके. इसके लिए हमें अपना मस्तिष्क खुला रखना चाहिए. बिना अंध-विश्वास और अविश्वासी बने तथ्यों का अन्वेषण करना चाहिए. उपेक्षित और लुप्त प्रायः आत्म-विज्ञान को यदि अन्वेषण और प्रयोगों का क्षेत्र मान कर उसके लिए भौतिक-विज्ञानियों जैसी तत्परता बरती जाय तो अगले दिनों ऐसे अनेक उपयोगी रहस्य उद्घाटित हो सकते हैं , जो भौतिक अविष्कारों से भी अधिक उपयोगी सिद्ध होंगें
द्वारा गीता झा
sabhar :http://hindi.speakingtree.in
"रोबोट से भी सेक्स करेगा इंसान
0
जनवरी 24, 2021 in
"रोबोट से भी सेक्स करेगा इंसान? एक मशहूर वैज्ञानिक के किए गए दावों के मुताबिक अगले 50 साल में इंसान न सिर्फ रोबोट से प्रेम करने लगेगा बल्कि उससे यौन संबंध बनाना भी बेहद आम बात हो जाएगी। डॉ. हेलेन ड्रिसकॉल के मुताबिक जिस तेजी से तकनीक का विकस हो रहा है उससे यह मुमकिन है कि वर्ष 2070 तक दो मानवों के बीच बनने वाले शारीरिक संबंधों को पिछड़ेपन की निशानी माना जाने लगे।गौर हो कि कई देशों में लोग इंसानों की तरह दिखने वाले पुतलों को या सेक्स डॉल्स को अपने सेक्स पार्टनर के तौर पर खरीद रहे हैं। आने वाले वक्त में ऐसे सेक्स रोबोट बनाए जा सकते हैं जो न सिर्फ इंसानों की तरह दिखेंगे बल्कि आपसे बात कर सकेंगे और आपकी हरकतों को भांप कर उसी तरह बिहेव करेंगे ड्रिस्कॉल के मुताबिक यह उन लोगों के लिए बहुत काम का साबित होगा जिनके साथी की मौत हो चुकी है या जो अकेले रहते हैं क्योंकि कोई भी साथी न होने से तो बेहतर रोबोट साथी होना ही है। यहां तक कि लोग इनसे सच में प्यार भी कर बैठेंगे। रोबोट के बारे में यह बात हमेशा से चर्चा का विषय रही है कि रोबोट इंसान की तरह ही सबकुछ कर सकते है। इसे लेकर वैज्ञानिकों की राय कभी एक नहीं रही है। लेकिन 2070 तक इंसानों का रोबोट के साथ सेक्स करने वाला यह दावा यकीनन चौंकाने वाला है
0
जनवरी 24, 2021 in
है कि भविष्य दर्शन फिल्मकारों की कल्पना हमारा हम जानते हैं आने वाली कल की रोबोट घर का खाना बनाने के लिए कोलगेट कंपनी काम करेंगे और 2050 तक हर बीमारी का इलाज हो जाएगा आज के समय में विज्ञान कितने ज्यादा तरक्की कर चुका है हर इंसान जानता है और किसी भी तरह की कृत्रिम शरीर में जाना जा सकता है और हाल ही में एक युवक ने अपने हाथों में कैमरा लगाया है मतलब
गुरुवार, 21 जनवरी 2021
आप अपने ही कम्प्यूटर से इश्क लड़ा सकेंगे
2
जनवरी 21, 2021 in आप अपने ही, कम्प्यूटर, से इश्क लड़ा सकेंगे
2029 में ब्यॉय फ्रेंड ;या गर्लफ्रेंड न हो तो आप अपने ही कम्प्यूटर से इश्क लड़ा सकेंगे। आज से 10 साल बाद, कम्प्यूटर से फ्लर्ट करना यहां तक कि इश्क हो जाना भी संभव होगा। यह दावा है एक फ्यूचरिस्ट का। 'Her' नाम की एक अंग्रेजी फिल्म में एक आदमी एक इंटेलिजेंट कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ रिश्ते कायम करता है। गूगल के इंजिनियरिंग डायरेक्टर रे कुर्जवील का कहना है कि आने वाले कुछ सालों में ऐसी असली कहानियां भी बनेंगी।एनबीसी न्यूज की खबर के मुताबिक, पिछले हफ्ते न्यू यॉर्क की एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि कुछ साल बाद इंसान टेक्नॉलजी से भावनात्मक संबंध बनाने में भी कामयाब हो सकेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे जहां तक लगता है कम्प्यूटर्स ह्यूमन लेवल तक आ जाएंगे। 2029 तक तो वे इतने करीब होंगे कि हम उनके साथ रिश्ते भी बना सकेंगे।की तारीफ करते हुए कुर्जवील ने दावा किया कि यह आने वाले कल की सटीक तस्वीर है। उन्होंने कहा, 'ह्यूमन लेवल से मेरा मतलब इमोशनल इंटेलिजेंस से है। मसलन, जोक सुनाना, मजेदार बातें करना, रोमांटिक होना, प्यार औऱ केयर करना, सेक्सी होना, ये सब ह्यूमन इंटेलिजेंस की निशानियां हैं। यह सब होगा।'कुर्जवील ने इससे पहले भी चेतावनी दी थी कि 2029 में कम्प्यूटर इन्सान से भी आगे निकल जाएंगे। टेक्नॉलजी कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, इसे साबित करने के लिए उन्होंने वॉइस रेकग्निशन सॉफ्टवेयर और गूगल की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का उदाहरण दिया था।एक्सपोनेंशल फाइनैंस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक और संभावना जताई। उनके मुताबिक 'प्रोग्रामिंग' जीन आने वाले वक्त में कैंसर, दूसरी बीमारियों और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक सकेंगे। कपड़ों पर पर्सनलाइज्ड 3डी प्रिंटिंग की भी भविष्यवाणी उन्होंने की 66 वर्षीय कुर्जवील ने 1990 में भविष्यवाणी की थी कि 1998 तक एक कम्प्यूटर चेस गेम में इंसान को हराने के काबिल हो जाएगा। 1997 में आईबीएम के डीप ब्लू ने गैरी कैस्परोव को हराकर इसे साबित कर दिखाया। हालांकि, हाल ही में ट्यूरिंग टेस्ट पास करने वाले रूसी प्रोग्राम यूजीन गूस्टमन के बारे में उनका मानना है कि वह काफी 'सीमित' क्षमताओं वाला प्रोग्राम है। नवभारत टाइम्स इंडिया टाइम्स
मंत्र विज्ञान का रहस्य
0
जनवरी 21, 2021 in
मन्त्र विज्ञान" मन को मनन करने की शक्ति या एकाग्रता प्राप्त करके जप के द्वारा सभी भयों का नाश करके पूरी तरह रक्षा करने वाले शब्दों को मंत्र कहते है। अर्थार्थ मनन करने पर जो रक्षा करे उसे मंत्र कहते है। जो शब्दों का समूह या कोई शब्द विशेष जपने पर मन को एकाग्र करे और प्राण रक्षा के साथ साथ अभीष्ट फल प्रदान करें वे मंत्र होते है।मंत्र शब्द संस्कृत भाषा से है।; संस्कृत के आधार पर मंत्र शब्द का अर्थ सोचना धारणा करना समझना व् चाहना होता है।; मन्त्र जप हमारे यहां सर्वसामान्य है। मन में कहने की प्रणाली दीर्घकाल से चली आ रही है। केवल हिन्दुओ में ही नहीं वरन बौध्द जैन सिक्ख आदि सभी धर्मों में मंत्र जप किया जाता है। मुस्लिम भाई भी तस्बियां घुमाते है।सही अर्थ में मंत्र जप का उद्देश्य अपने इष्ट को स्मरण करना है।; श्रीरामचरित्र मानस में नवधा भक्ति का जिकर भी आता इसमें रामजी शबरी को कहते है की मंत्र जप मम दृढ विस्वास पंचम भक्ति सो वेद प्रकासा मंत्र जप और मुझमे पक्का विश्वास रखो भगवन श्रीकृष्ण जी ने गीता के १० वें अध्याय के २५ वें श्लोक मे जपयज्ञ को अपनी विभूति बताया है। जपयज्ञ सब के लिए आसान है। इसमें कोई ज्यादा खर्च नही कोई कठोर नियम नही। यह जब चाहो तब किया जा सकता है।; हमारे शरीर में ७ केंद्र होते है। उनमे से नीचे के में घृणा आदि होते है।; लेकिन मंत्र जप के प्रभाव से जपने वाले का भय निर्भयता में घृणा प्रेम में और काम राम में बदल जाता है।प्रथम केंद्र मूलाधार होता है।दूसरा स्वाधिष्ठान केंद्र होता है इसमें चिंता निश्चिंता में बदलती है। तीसरा केंद्र मणिपुर है।; जिससे रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है। क्षमा शक्ति विकसित होती है।सात बार ओम या हरिओम मंत्र का गुंजन करने से मूलाधार केंद्र में स्पंदन होता है जिससे रोगो के कीटाणु नष्ट होते है। क्रोध के हमारी जीवनी शक्ति का नाश होता है। वैज्ञानिकों का कहना है की यदि एक घंटे तक क्रोध करनेवाले व्यक्ति के श्वासों के कण इकट्ठे करके अगर इंजेक्शन बनाया जाये तो उस इंजेक्शन से २० लोगो को मारा जा सकता है।
यदि एक घंटे के क्रोध से २० लोगो की मृत्यु हो सकती है तो एक घंटे के हरिनाम कीर्तन से असंख्यों लोगों को आनंद व् मन की शांति मिलती है। मंत्र शक्ति मेंआश्चर्य नही तो क्या है।
मंत्रशक्ति के द्वारा ये सब संभव है मंत्रका अर्थ है, एक शुद्ध ध्वनि। आज आधुनिक विज्ञान ने साबित कर दिया है कि समूचा अस्तित्व ऊर्जा का स्पंदन है, स्पंदन का स्तर अलग अलग होता है। जहां भी कोई स्पंदन होता है, वहां ध्वनि होनी ही है हर रूप के साथ जुड़ी है ध्वनिरूप या आकार अलग-अलग तरह के होते हैं और हर रूप के साथ एक ध्वनि जुड़ी होती है और हर ध्वनि के साथ एक रूप जुड़ा होता है। जब आप कोई ध्वनि मुंह से निकालते हैं, तो उसके साथ एक रूप बनता है। ध्वनियों को एक खास तरह से इस्तेमाल करने का एक पूरा विज्ञान है, जिससे सही तरीके के रूप बनाया जा सके।मंत्र कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका आप उच्चारण करते हैं, यह वह चीज है जो आप बनना चाहते हैं क्योंकि पूरा अस्तित्व ध्वनियों का एक जटिल संगम है। उसमें से हमने कुछ ध्वनियों को पहचाना जो ब्रह्मांड के हर आयाम को खोलने वाली कुंजियों की तरह हैं।हम एक खास क्रम में ध्वनि निकालकर शक्तिशाली रूप बना सकते हैं। इसे ‘नाद योग’ कहा जाता है। अगर ध्वनि पर आपका अधिकार है, तो उससे जुड़े रूप पर भी आपका अधिकार होगा।;उन्होंने दस-दस मिनट के पांच मंत्रों को एक साथ पेश किया है। आप कुछ समय तक इन मंत्रों को सुनकर देख सकते हैं कि किस मंत्र को आप अपने सबसे करीब महसूस करते हैं। फिर आप उसका विस्तृत संस्करण प्राप्त कर सकते हैं और उसके साथ समय बिता सकते हैं। फिलहाल आप सिर्फ इन मंत्रों को सुनिए। संगीत की क्वालिटी या धुन आदि के आधार पर उन्हें पसंद या नापसंद करने की कोशिश न करें। ये ध्वनियां आपके इतने करीब हो जाएं जितनी आपकी सांस। कुछ समय बाद, बिना उन मंत्रों को सुने भी, उस मंत्र की तरंगे आपके भीतर गुंजित होने लगेंगी। यह आपके लिए अद्भुत रूप से असरकारी हो सकता है।
मंत्र कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका आप उच्चारण करते हैं, यह वह चीज है जो आप बनना चाहते हैं क्योंकि पूरा अस्तित्व ध्वनियों का एक जटिल संगम है। उसमें से हमने कुछ ध्वनियों को पहचाना जो ब्रह्मांड के हर आयाम को खोलने वाली कुंजियों की तरह हैं। जब तक आप खुद चाभी नहीं बन जाते, वह आपके लिए नहीं खुलेगा। मंत्र बनने का मतलब है कि आप चाभी बन रहे हैं, चाभी बन कर ही आप ताले को खोल सकते हैं, वरना कोई और उसे आपके लिए खोलेगा और आपको उसकी सुननी पड़ेगी। देखिए आपको मुझे झेलना पड़ रहा है क्योंकि आपने अभी उसे खोला नहीं है। बुधवार को हम आपके लिए पेश करेंगे की बहार, यह एक मौका होगा खुद नए आयामों की चाबी हैं मन्त्र इसका प्रयोग तो हम सदियों से करते आए हैं, लेकिन बिना जाने बूझे इन मंत्रों का उच्चारण फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। क्या हैं मंत्र, उनके पीछे कौन सा विज्ञान छिपा है, बता रहे हैं सद्गुरु जग्गी बासुदेव मंत्र का आशय ध्वनि से होता है। आजकल आधुनिक विज्ञान इस पूरी सृष्टि को एक कंपन मानता है। अब जहां कही भी कंपन होगा, वहां ध्वनि तो होगी ही। इसका मतलब है कि यह संपूर्ण सृष्टि एक प्रकार की ध्वनि या कई ध्वनियों का एक जटिल मिश्रण है। यह भी कह सकते हैं कि संपूर्ण सृष्टि विभिन्न प्रकार के मंत्रों का मेल है। इन में से कुछ मंत्रों या ध्वनियों की पहचान हो चुकी है, जो अपने आप में चाभी की तरह हैं। अगर हम उनका एक खास तरह से इस्तेमाल करें तो वे जीवन के अलग आयाम को खोलने में सक्षम हैं, जिनका अनुभव हम अपने भीतर कर सकते हैं।
मंत्र कई तरह के होते है। हर मंत्र शरीर के किसी निश्चित हिस्से में एक खास तरह की उर्जा जागृत करता है। बिना जागरुकता के किसी आवाज को केवल बार-बार दुहराने से दिमाग में सुस्ती छा जाती है। किसी भी ध्वनि के लगातार उच्चारण से मन सुस्त हो जाता है। जब आप पूरी जागरुकता के साथ उसकी सही समझ के साथ मंत्रोच्चारण करते हैं तो वह एक शक्तिशाली साधन बन सकता है। एक विज्ञान के रूप में, यह एक शक्तिशाली आयाम है। लेकिन आज जिस तरह से बिना किसी आधार या बिना आवश्यक तैयारी के लोगों को मंत्र दिए जा रहे हैं इससे बहुत नुकसान हो सकता हैकुछ मंत्रों या ध्वनियों की पहचान हो चुकी है, जो अपने आप में चाभी की तरह हैं। अगर हम उनका एक खास तरह से इस्तेमाल करें तो वे जीवन के अलग आयाम को खोलने में सक्षम हैं, जिनका अनुभव हम अपने भीतर कर सकते हैं।हर मंत्र शरीर के अलग-अलग हिस्से में एक खास तरह की उर्जा पैदा करता है। मंत्रों का आधार हमेशा से संस्कृत भाष रही है। संस्कृत भाषा ध्वनि की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। लेकिन जब अलग-अलग लोग इसे बोलते हैं तो हर व्यक्ति अपने एक अलग अंदाज में बोलता है। अगर एक बंगाली कोई मंत्र बोल रहा है तो वह अपने अंदाज में बोलेगा। इसी तरह एक तमिल भाषी उसी चीज को दूसरे ढंग से कहेगा। अगर कोई अमेरिकी इनका उच्चारण करेगा तो वह बिल्कुल ही अलग होगा। इन मंत्रों के सटीक उच्चारण की अगर सही ट्रेनिंग न दी जाए तो अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग, जब अपने अंदाज में मंत्रों को बोलेंगे तो उच्चारण के बिगडऩे का खतरा रहता है। हालांकि इस तरह की ट्रेनिंग बेहद थका देने वाली होती है। इसे सीखने के लिए जिस धैर्य, लगन और जितने समय की जरूरत होती है, वह आजकल लोगों के पास है ही नही। इसके लिए जबरदस्त लगन और काफी वक्त की जरूरत होती हैदरअसल, अध्यात्म की दिशा में मंत्र एक बहुत अच्छी शुरुआत हो सकते है। सिर्फ एक मंत्र ही लोगों के जीवन में बहुत कुछ कर सकता है। मंत्र किसी चीज की रचना के लिए एक प्रभावशाली शक्ति बन सकते हैं, लेकिन ऐसा तभी हो सकता है कि जब वे ऐसे स्रोत से आएं, जहाँ यह समझ हो कि ध्वनि ही सबकुछ है। जब हम कहते हैं कि ‘ध्वनि ही सबकुछ है’ तो हमारा मतलब इस सृष्टि से होता है। अगर मंत्र वैसे स्रोत और समझ के उस स्तर से आएं तथा उनका संचारण अगर पूरी तरह शुद्ध हो तो मंत्र एक प्रभावशाली शञ्चित बन सकते हैं। sabhar isha fondation
3डी प्रिंटर से ही बनेगी कार
0
जनवरी 21, 2021 in 3डी प्रिंटर, से ही बनेगी कार?
क्या एक दिन आप 3डी प्रिंटर पर बनी कार चलाएँगे? कार टेकनोलॉजी से जुड़े ताज़ा शोध इस पूरे उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहे हैं और ये बिलकुल संभव है कि आप आने वाले समय में 3डी प्रिंटर पर बनी कार ही चलाएँ.अमरीकी ऊर्जा विभाग की प्रयोगशाला ओक रिज नेशनल ने 3डी प्रिंटर पर न केवल स्पोर्ट्स कार बनाई बल्कि 2015 के डीट्रॉयट ऑटो शो में इसे प्रदर्शित भी किया है.पहली नजर में तैयार की गई शेलबी कोबरा कार आम स्पोर्ट्स कार जैसी ही लगती है, चाहे ये प्लास्टिक से बनी है. हालांकि ये स्टील से भी बनाई जा सकती है.इसमें कहीं भी स्टील के पैनल का इस्तेमाल नहीं हुआ है. ये कार 85 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलाई जा सकती है थ्री-डायमेंशनल तरीके से कार प्रिंटिंग?थ्री डायमेंशनल प्रिटिंग वो नई तकनीक है जिसके इस्तेमाल में पहले कंप्यूटर में डिज़ाइन बनाया जाता है.फिर उक्त कमांड के ज़रिए 3डी प्रिंटर, या ये कहें कि इंडस्ट्रियल रोबोट उस डिज़ाइन को, सही पदार्थ (मेटीरियल) का इस्तेमाल करते हुए परत दर परत प्रिंट करता है या बनाता है.इस प्रयोग में पिघले हुए प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हुए उसे मनचाहा आकार दिया जाता है. ऐसा मेटल से भी किया जा सकता है.इस तकनीक को अंजाम देने वाले उपकरण को थ्री-डी प्रिंटर या फिर इंडस्ट्रियल रोबोट कहा जाता है.छह सप्ताह में कार तैयारइस लैब के डॉक्टर चैड ड्यूटी नेबीबीसी फ्यूचर को बताया, "हमने इसे प्लास्टिक की परतों से बनाया है. 24 घंटे में प्लास्टिक से बॉडी को प्रिंट किया (बनाया) जा सकता है."वो बताते हैं, "बाद में इसमें इंजन और उपरी बाडी, लाइट, ब्रेक, गियर, और अन्य चीजों को असेंबल किया जाता है. कुल 6 सप्ताह में 6 लोग ऐसी कार तैयार कर लेते हैं. ख़ास बात यह है कि इसको बाद में डि-असेंबल कर पूरी तरह से अलग किया जा सकता है."दरअसल प्लास्टिक की परत दर परत प्रिंट करके कार तैयार करने का मतलब केवल ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि कार के अलग अलग हिस्सों को थ्री-डायमेंशनल प्रिटिंग के जरिए पहले प्रिंट करना और फिर उन्हें असेंबल करना हैज़ाहिर है ये कार फ़िलहाल बिक्री के लिए नहीं बनी है. इसे प्रयोग के दौरान तैयार किया गया है. लेकिन इसने दूसरे कार निर्माताओं को ऐसी कार तैयार करने का विकल्प तो दे ही दिया है.बेहद सस्ती होगी कारअमरीकी कार निर्माता लोकल मोटर ने प्रिंट करके कार को तैयार किया है जिसे डीट्रॉयट ऑटो शो में प्रदर्शित किया गया.लोकल मोटर्स के जे रोजर्स कहते हैं, "इस कार को बनाना आसान है और ये काफी कम खर्चे में बनाई जा सकती है. इसके रख रखाव का खर्च भी बेहद कम हो जाता है. मेरे ख्याल से यही भविष्य की कार होगी.ऐसे में जाहिर है कि ऑटोमोटिव इंडस्ट्री एक नए युग के लिए तैयारी करती दिख रही है.sabhar bbc.co.uk
बुधवार, 20 जनवरी 2021
टेलीपैथी सम्मोहन अवचेतन मन और विज्ञान
0
जनवरी 20, 2021 in अवचेतन मन, और विज्ञान, टेलीपैथी, सम्मोहन
टैलीपैथी;क्या है हमारे पुराणों में वर्णित है की देवता लोग ;आपस में बातचीत ;बिना कुछ ;कर लेते थे | और सोचते थे दूसरे ;लोगो ;के पास;सन्देश ;जाता था धर्म और विज्ञान ने दुनिया के कई तरह के रहस्यों से पर्दा उठाया है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस युग में अब सब कुछ संभव होने लगा है। मानव का ज्ञान पहले की अपेक्षा बढ़ा है। लेकिन इस ज्ञान के बावजूद व्यक्ति की सोच अभी भी मध्ययुगीन ही है। वह इतना ज्ञान होने के बावजूद भी मूर्ख, क्रूर, हिंसक और मूढ़ बना हुआ है।खैर, आज हम विज्ञान की मदद से हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसी व्यक्ति से मोबाइल, इंटरनेट या वीडियो कालिंग के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन प्राचीन काल में ऐसा संभव नहीं था तो वे कैसे एक दूसरे से संपर्क पर पाते थे? मान लीजिये आप समुद्र, जंगल या रेगिस्तान में भटक गए हैं और आपके पास सेटेलाइट फोन है भी तो उसकी बैटरी डिस्चार्च हो गई है ऐसे में आप कैसे लोगों से संपर्क कर सकते हैं?दरअसल, बगैर किसी उपकरण की मदद से लोगों से संपर्क करने की कला को ही टेलीपैथी कहते हैं। जरूरी नहीं कि हम किसी से संपर्क करें। हम दूरस्थ बैठे किसी भी व्यक्ति की वार्ता को सुन सकते हैं, देख सकते हैं और उसकी स्थिति को जान सकते हैं। इसीलिये टेलीपैथी को हिन्दी में दूरानुभूति कहते हैं। टेलीपैथी शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल 1882 में फैड्रिक डब्लू एच मायर्स ने किया था। कहते हैं कि जिस व्यक्ति में यह छठी ज्ञानेंद्रिय होती है वह जान लेता है कि दूसरों के मन में क्या चल रहा है। यह परामनोविज्ञान का विषय है जिसमें टेलीपैथी के कई प्रकार बताए जाते हैं।टेली' शब्द से ही टेलीफोन, टेलीविजन आदि शब्द बने हैं। ये सभी दूर के संदेश और चित्र को पकड़ने वाले यंत्र हैं। आदमी के मस्तिष्क में भी इस तरह की क्षमता होती है। कोई व्यक्ति जब किसी के मन की बात जान ले या दूर घट रही घटना को पकड़कर उसका वर्णन कर दे तो उसे पारेंद्रिय ज्ञान से संपन्न व्यक्ति कहा जाता है। महाभारतकाल में संजय के पास यह क्षमता थी। उन्होंने दूर चल रहे युद्ध का वर्णन धृतराष्ट्र को कह सुनाया था।भविष्य का आभास कर लेना भी टेलीपैथिक विद्या के अंतर्गत ही आता है। किसी को देखकर उसके मन की बात भांप लेने की शक्ति हासिल करना तो बहुत ही आसान है। चित्त को स्थित कर ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।दरअसल टेलीपैथी दो व्यक्तियों के बीच विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान को भी कहते हैं। इस विद्या में हमारी पांच ज्ञानेंद्रियों का इस्तेमाल नहीं होता, यानी इसमें देखने, सुनने, सूंघने, छूने और चखने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह हमारे मन और मस्तिष्क की शक्ति होती है टेलीपैथी सिखने के सामान्यत: तीन तरीके है ध्यान द्वारा योग द्वारा तीसरा आधुनिक तकनीक ध्यान द्वारा लगातार ध्यान करते रहने से चित्त स्थिर होने लगता है। चित्त के स्थिर और शांति होने से साक्षीभाव घटित होता है। यह संवेदनशिल अवस्था टेलीपैथी के लिये जरूरी होती है। ध्यानसंपन्न व्यक्ति किसी के भी मन की बात समझ सकता है। कितने ही दूर बैठे व्यक्ति की स्थिति और वार्तालाप का वर्णन कर सकता है।योग में मन: शक्ति योग के द्वारा इस शक्ति हो हासिल किया जा सकता है। ज्ञान की स्थिति में संयम होने पर दूसरे के चित्त का ज्ञान होता है। यदि चित्त शांत है तो दूसरे के मन का हाल जानने की शक्ति हासिल हो जाएगी। योग में त्राटक विद्या, प्राण विद्या के माध्यम से भी आप यह विद्या सिख सकते हैं।टेलीपैथी का आधुनिक तरीका तरीके भले ही आधुनिक हो लेकिन इसके सर्वप्रथम आपको ध्यान का अभ्यास तो करना ही होगा तभी यह तरीका कारगर सिद्ध होगा। टेलीपैथी उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके जरिए बिना किसी भौतिक माध्यम की सहायता के एक इंसान दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क को पढ़ने अथवा उसे अपने विचारों से अवगत कराने में कामयाब होता हैआधुनिक तरीके के अनुसार ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है। इस विद्या में सम्मोहन का भी सहरा लिया जाता है। सम्मोहन के माध्यम से हम अपने चेतन मन को सुलाकर अवचेतन मन को जाग्रत करते हैं और फिर इस अवचेतन मन के माध्यम से हम दूसरे व्यक्ति के मन बात, विचार आदि पढ़ लेते हैं और यदि वह हजारों किलोमीटर भी बैठा है तो इस मन के माध्यम से व्यक्ति को वह उसके सामने ही नजर आता है। क्या होता है अवचेतन मन...चेतन मन और अचेतन मन : हमारे मन की मुख्यतः दो अवस्थाएं (कई स्तर) होती हैं-चेतन मन और 2. अवचेतन मन (आदिम आत्मचेतन मन):सम्मोहन के दौरान अवचेतन मन को जाग्रत किया जाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति की शक्ति बढ़ जाती है लेकिन उसका उसे आभास नहीं होता, क्योंकि उस वक्त वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों का ही पालन कर रहा होता है।. चेतन मन :इसे जाग्रत मन भी मान सकते हैं। चेतन मन में रहकर ही हम दैनिक कार्यों को निपटाते हैं अर्थात खुली आंखों से हम कार्य करते हैं। विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क का वह भाग जिसमें होने वाली क्रियाओं की जानकारी हमें होती है। यह वस्तुनिष्ठ एवं तर्क पर आधारित होता है।. अवचेतन मन: जो मन सपने देख रहा है वह अवचेतन मन है। इसे अर्धचेतन मन भी कहते हैं। गहरी सुसुप्ति अवस्था में भी यह मन जाग्रत रहता है। विज्ञान के अनुसार जाग्रत मस्तिष्क के परे मस्तिष्क का हिस्सा अवचेतन मन होता है। हमें इसकी जानकारी नहीं होती। अवचेतन मन की शक्ति क्या है...अवचेतन मन की शक्ति हमारा अवचेतन मन चेतन मन की अपेक्षा अधिक याद रखता है एवं सुझावों को ग्रहण करता है। आदिम आत्मचेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है।यह मन हमें आने वाले खतरे या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। इसे आप छठी इंद्री भी कह सकते हैं। यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन 6 माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास भी करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त मन की सुनी-अनसुनी कर देते हैं। उक्त मन को साधना ही सम्मोहन है अवचेतन को साधने का असर : सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को देखना और दूरस्थ दृश्यों को जाना जा सकता है। इसके सधने से व्यक्ति को बीमारी या रोग के होने का पूर्वाभास हो जाता है।कैसे साधें इस अवचेतन मन को, जानिये तरीका..कैसे साधें इस मन को ;वैसे इस मन को साधने के बहुत से तरीके या विधियां हैं, लेकिन सीधा रास्ता है कि प्राणायाम से सीधे प्रत्याहार और प्रत्याहार से धारणा को साधें। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव करने लगेंगे जिसको आम इंसान अनुभव नहीं कर सकता। इसको साधने के लिए त्राटक भी कर सकते हैं। त्राटक भी कई प्रकार से किया जाता है। ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है।शवासन में लेट जाएं और आंखें बंद कर ध्यान करें। लगातार इसका अभ्यास करें और योग निद्रा में जाने का प्रयास करें। योग निद्रा अर्थात शरीर और चेतन मन इस अवस्था में सो जाता है लेकिन अवचेतन मन जाग्रत रहता है। समझाने के लिए कहना होगा कि शरीर और मन सो जाता है लेकिन आप जागे रहते हैं। यह जाग्रत अवस्था जब गहराने लगती है तो आप ईथर माध्यम से जुड़ जाते हैं और फिर खुद को निर्देश देकर कुछ भी करने की क्षमता रखते है कुछ लोग अंगूठे को आंखों की सीध में रखकर, तो कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलाते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं, लेकिन यह कितना सही है यह हम नहीं जानते।;कल्पना करें कि आप कोई बात किसी व्यक्ति को कहने के लिए सोचें और उस तक वह बात पहुंच जाए। बार बार कल्पना करें और अपनी बात को दोहराएं। दोहराने का यह अभ्यास जब गहराएगा तो उस व्यक्ति तक आपके मस्तिष्क की तरंगे पहुंचने लगेगी। यदि आप उसे यहां बुलाना चाहते हैं तो कल्पना में उसका चित्र देखकर उसके बुलाने का संदेश भेजें। धीरे धीरे जब यह प्रयोग कामयाब होने लगेगा तो आपका विश्वास भी बढ़ता जाएगा।इसी तरह आप किसी भी व्यक्ति के होने की स्थिति की पहले कल्पना करते हैं जब वह कल्पना प्रगाड़ होने लगती है तब सही सूचना देने लगती है। कुछ भी बोलने से पहले दिमाग में कुछ तरंगें बनती हैं। जापानी वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने इसे डीकोड करना जान लिया है और उनके परिणाम 90 प्रतिशत तक सफल हैं। वैसे, उनका यह प्रयोग सिर्फ जापानी भाषा तक ही सीमित है। लेकिन आश्चर्य नहीं कि इस टेक्नोलॉजी का उपयोग दूसरी भाषाओं में भी संभव होगा।ब्रेन कंप्यूटर विशेषज्ञ प्रो. यामाजाकी तोषिमासा के नेतृत्व में एक टीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना और संचार इंजीनियर इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित वर्कशॉप में इसका लाइव प्रदर्शन भी किया। उन्होंने साबित किया कि बोले जाने से दो सेकेंड पहले उनकी मशीन उस बात को समझ लेती है जो बोली जाने वाली है। यह टीम दिमाग के एक खास हिस्से की गतिविधियों पर काम कर रही है जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ब्रोका कहते हैं। यह हिस्सा भाषा प्रक्रिया और बोलने से संबंधित है।विचारों से बनता भविष्य भगवान बुद्ध कहते हैं कि आज आप जो भी हैं, वह आपके पिछले विचारों का परिणाम है। विचार ही वस्तु बन जाते हैं। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही भविष्य का निर्माण करते हैं। यही बात 'दि सीक्रेट' में भी कही गई है और यही बात धम्मपद, गीता, जिनसूत्र और योगसूत्र में कही गई है। इसे आज का विज्ञान आकर्षण का नियम कहता है।संसार को हम पांचों इंद्रियों से ही जानते हैं और कोई दूसरा रास्ता नहीं। जो भी ग्रहण किया गया है, उसका मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उस प्रभाव से ही 'चित्त' निर्मित होता है और निरंतर परिवर्तित होने वाला होता है। इस चित्त को समझने से ही आपके जीवन का खेल आपको समझ में आने लगेगा। अधिकतर लोग अब इसे समझकर अच्छे स्थान, माहौल और लोगों के बीच रहने लगे हैं। वे अपनी सोच को बदलने के लिए ध्यान या पॉजिटिव मोटिवेशन की क्लासेस भी जाने लगे हैं।वैज्ञानिक कहते हैं कि मानव मस्तिष्क में 24 घंटे में लगभग 60 हजार विचार आते हैं। उनमें से ज्यादातर नकारात्मक होते हैं। नकारात्मक विचारों का पलड़ा भारी है तो फिर भविष्य भी वैसा ही होगा और यदि मिश्रित विचार हैं तो मिश्रित भविष्य होगा। अधिकतर लोग नकारात्मक फिल्में, सीरियल और गाने देखते रहते हैं इससे उनका मन और मस्तिष्क वैसा ही निर्मित हो जाता है। वे गंदे या जासूसी उपन्यास पढ़कर भी वैसा ही सोचने लगते हैं। आजकल तो इंटरनेट हैं, जहां हर तरह की नकारात्मक चीजें ढूंढी जा सकती हैं। न्यूज चैनल दिनभर नकारात्मक खबरें ही दिखाते रहते हैं जिन्हें देखकर सामूहिक रूप से समाज का मन और मस्तिष्क खराब होता रहता है। अवस्थाएं हैं- जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति। उक्त 3 तरह की अवस्थाओं के अलावा हमने और किसी प्रकार की अवस्था को नहीं जाना है। जगत 3 स्तरों वाला है- एक स्थूल जगत जिसकी अनुभूति जाग्रत अवस्था में होती है। दूसरा, सूक्ष्म जगत जिसका स्वप्न में अनुभव करते हैं तथा तीसरा, कारण जगत जिसकी अनुभूति सुषुप्ति में होती है।उक्त तीनों अवस्थाओं में विचार और भाव निरंतर चलते रहते हैं। जो विचार धीरे-धीरे जाने-अनजाने दृढ़ होने लगते हैं वे धारणा का रूप धर लेते हैं। चित्त के लिए अभी कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन मान लीजिए कि आपका मन ही आपके लिए जिन्न बन जाता है और वह आपके बस में नहीं है, तब आप क्या करेंगे? धारणा बन गए विचार ही आपके स्वप्न का हिस्सा बन जाते हैं। आप जानते ही हैं कि स्वप्न तो स्वप्न ही होते हैं उनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं फिर भी आप वहां उस काल्पनिक दुनिया में उपस्थित होते हैं।इसी तरह बचपन में यदि यह सीखा है कि आत्मा मरने के बाद स्वर्ग या नर्क जाती है और आज भी आप यही मानते हैं तो आप निश्चित ही एक काल्पनिक स्वर्ग या नर्क में पहुंच जाएंगे। यदि आपके मन में यह धारणा बैठ गई है कि मरने के बाद व्यक्ति कब्र में ही लेटा रहता है तो आपके साथ वैसा ही होगा। हर धर्म आपको एक अलग धारणा से ग्रसित कर देता है। हालांकि यह तो एक उदाहरण भर है। धर्म आपके चित्त को एक जगह बांधने के लिए निरंतर कुछ पढ़ने या प्रार्थना करने के लिए कहता है।वैज्ञानिकों ने आपके मस्तिष्क की सोच, कल्पना और आपके स्वप्न पर कई तरह के प्रयोग करके जाना है कि आप हजारों तरह की झूठी धारणाओं, भय, आशंकाओं आदि से ग्रसित रहते हैं, जो कि आपके जीवन के लिए जहर की तरह कार्य करते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि भय के कारण नकारात्मक विचार बहुत तेजी से मस्तिष्क में घर बना लेते हैं और फिर इनको निकालना बहुत ही मुश्किल होता है सम्मोहन अर्धचेतनावस्था में लाया जा सकता है जो समाधि, या स्वप्नावस्था, से मिलती-जुलती होती है, किंतु सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता है तथा जाग्रतावस्था में उसके लिए जो कुछ संभव है, वह सब कुछ कर सकता है, किंतु यह सब कार्य वह सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर करता है।कभी कभी यह सम्मोहन बिना किसी सुझाव के भी काम करता है और केवल लिखाई और पढ़ाई में भी काम करता है जैसे के फलाने मर्ज की दवा यहाँ मिलती है इस प्रकार के हिप्नोसिस का प्रयोग भारत में ज्यादा होता है सम्मोहन ;विद्या जाता है; दरअसल यौगिक क्रियाओं का उद्देश्य मन को पूर्ण रूप से एकाग्र करके समाधि में लीन कर देना है और इस लीन करने की शक्ति का जो अंश प्राप्त होता है, उसी को सम्मोहन कहते हैं। सम्मोहन की शक्ति प्राप्त करने के.अनेक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। सम्मोहन का अर्थ आमतौर पर वशीकरण से लगाया जाता है। वशीकरण अर्थात किसी को वश में करने की विद्या, जबकि यह सम्मोहन की प्रतिष्ठा को गिराने वाली बात है। मन के कई स्तर होते हैं। उनमें से एक है आदिम आत्म..चेतन मन। आदिम आत्म चेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है। यह मन हमें आने वाले खतरे या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। इसे आप छटी...यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन छह माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त..क्या होगा इस मन को साधने से यह मन आपकी हर तरह की मदद करने के लिए तैयार है, बशर्ते आप इसके प्रति समर्पित हों। यह किसी के भी अतीत और भविष्य को जानने की क्षमता रखता है। आपके साथ घटने वाली घटनाओं;को टालने के उपाय खोज लेंगे। आप स्वयं की ही नहीं दूसरों की बीमारी दूर करने की क्षमता भी हासिल कर सकते हैं। ;सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को.कैसे साधें इस मन को प्राणायम से साधे प्रत्याहार को और प्रत्याहार से धारणा को। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव..;ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। त्राटक उपासना को हठयोग में दिव्य साधना से संबोधित किया गया है। आप उक्त साधना के बारे में जानकारी प्राप्त कर किसी योग्य नियमित सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योगनिंद्रा करते हुए ध्यान करें। ध्यान में विपश्यना और नादब्रह्म का उपयोग करें। प्रत्याहार का पालन करते हुए धारणा को साधने का प्रयास करें। संकल्प के प्रबल होने से..धारणा को साधने में आसानी होगी है। संकल्प सधता है अभ्यास के महत्व को समझने से। इसके संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए मिलें किसी योग्य योग शिक्षक या सम्मोहनविद से। sabhar : webduniya
मंगलवार, 19 जनवरी 2021
कैंसर के खिलाफ लड़ने के लिए इम्यूनोथेरेपी के जरिए नया इलाज
0
जनवरी 19, 2021 in के खिलाफ लड़ने के लिए इम्यूनोथेरेपी, के जरिए नया इलाज, कैंसर
ताजा शोध से पता चला है कि कुछ ट्यूमर या कैंसर के अंदर ही प्रतिरक्षा कोशिकाओं की "फैक्ट्रियां" होती हैं. जो शरीर को कैंसर के खिलाफ लड़ने में मदद करती हैं.हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने कैंसर के खिलाफ लड़ने के लिए इम्यूनोथेरेपी के जरिए नया इलाज खोजा है. इसमें शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर उन्हें ट्यूमर से लड़ने लायक बनाया जाता है.यह तकनीक तृतीयक लिम्फॉइड संरचनाएं (टीएलएस) इस इलाज में कारगर साबित हुई हैं. हाल के वर्षों में, डॉक्टरों ने कैंसर, इम्यूनोथेरेपी के नए उपचार की ओर रुख किया है, जो ट्यूमर से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का लाभ उठाकर काम करता है. साइंस जर्नल "नेचर" में इस उपचार से संबंधित तीन शोध प्रकाशित हुए हैं. जो दुनिया के अलग देशों के वैज्ञानिकों की ओर से आए हैं.शोध में बताया गया है कि श्वेत रक्त कोशिकाएं या टी-सेल्स ट्यूमर को मारने का काम कैसे करती हैं. कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए यह "प्रशिक्षित" होती हैं. हालांकि यह उपचार केवल 20 प्रतिशत रोगियों पर ही बेहतर काम कर रहा है. शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों कुछ ही मरीज इस इलाज में बेहतर परिणाम दे रहे हैं.वैज्ञानिकों ने बताया कि ट्यूमर या कैंसर पर बनी कुछ कोशिकीय संरचनाएं शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद करने के लिए "कारखानों या स्कूलों" जैसे काम करती हैं. पेरिस डेकार्टी यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल के कॉर्डेलिए रिसर्च सेंटर में इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर वुल्फ फ्रीडमैन ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा, "इन टी-कोशिकाओं को तृतीयक लिम्फॉइड संरचनाओं के 'स्कूलों' में शिक्षित करने की आवश्यकता है. जहां वे प्रभावी रूप से कैंसर कोशिकाओं को पहचाकर उन पर हमला करना सीख सकते हैं.रिसर्च का निष्कर्ष है कि केवल टी-सेल ही कैंसर से लड़ने में सक्षम नहीं हैं बल्कि ऐसे कुछ और एजेंट भी शरीर में हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि तृतीयक लिम्फॉइड संरचनाएं या टीएलएस, बी-सेल से भरी हुई थीं, जो भी एंटीबॉडी का उत्पादन करने वाली एक तरह की प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं. प्रोफेसर फ्रीडमैन ने बताया, "हम 15 साल से टी-सेल से ही कैंसर को खत्म करने के आदी बन चुके हैं. हमने यह देखने के लिए सारकोमा जैसे कैंसर का विश्लेषण किया कि उनके पास कौन से समूह हैं. जो कैंसर से लड़ सकते हैं. इसके परिणामस्वरूप हमारे पास बी-कोशिकाएं आईं.अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी के एंडरसन कैंसर सेंटर में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की डॉक्टर बेथ हेल्मिंक कहती हैं कि इस खोज ने इम्यूनोथेरेपी में बी-कोशिकाओं से जुड़ी धारणाओं को बदल दिया है. बेथ के मुताबिक, "इन अध्ययनों के माध्यम से हमने पाया कि बी-कोशिकाएं ट्यूमर-विरोधी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए एक सार्थक तरीके से योगदान दे रही हैं."इस खोज में कई आश्चर्यजनक बातें सामने आई हैं. पहले कैंसर रोगियों में बी-कोशिकाओं की बहुतायत को ज्यादातर खराब रोग के रूप में देखा जाता रहा है. इसके उलट अध्ययन में पाया गया कि उनके ट्यूमर में टीएलएस के अंदर बी- कोशिकाओं के उच्च स्तर वाले रोगियों में इम्यूनोथेरेपी के लिए अच्छी प्रतिक्रिया की संभावना होती हैं.बार्ट्स एंड लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री में लेक्चरर लुईसा जेम्स कहती हैं, "अध्ययन की यह श्रृंखला रोमांचक इसलिए भी है क्योंकि यह विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकने में सक्षम है. हालांकि जेम्स इस अध्ययन में शामिल नहीं थीं, उन्होंने इस शोध को पढ़ने के बाद कहा, "कम समय में ही इस शोध के परिणामस्वरूप रोगियों को इम्यूनोथेरेपी से लाभ होने की संभावना के लिए नया टूल मिल जाएगा. जिससे भविष्य में बेहतर उपचार का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है."हालांकि अभी भी कई प्रश्न हैं जिनके उत्तर नहीं मिल पाए हैं. जैसे कि ऐसी संरचनाएं कुछ ही तरह के ट्यूमर में क्यों बनती हैं और बाकी में नहीं. यह स्पष्ट हो गया है कि इन्ही संरचनाओं के अंदर पाई जाने वाली बी-कोशिकाएं इम्यूनोथेरेपी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन ऐसा कैसे होता है इसका उत्तर अब तक वैज्ञानिकों के पास नहीं हैयह हो सकता है कि बी-कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए आगे आती हों और एंटीबॉडी का निर्माण करती हों. सभी टीएलएस समान नहीं होते. शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं की तीन श्रेणियां पाईं लेकिन केवल एक कोशिका कैंसर को मात देने में "परिपक्व" पाई गई.विशेषज्ञों का कहना है कि इस रिसर्च ने कई आशाजनक रास्ते खोले हैं. यह शोध डॉक्टरों को उन मरीजों का इलाज करने में मदद कर सकता है जो इम्यूनोथेरेपी के लिए अच्छी प्रतिक्रियाएं देते हैं. स्वीडन के लुंथ विश्वविद्यालय में ऑन्कोलॉजी और पैथोलॉजी के प्रोफेसर गोरान जॉनसन ने इनमें से एक अध्ययन पर काम किया है. जॉनसन बताते हैं, "अगर कोई ऐसा उपचार विकसित किया जा सके जिससे टीएलएस के निर्माण को बढ़ाया जा सके, तो हम इसे आजकल की इम्यूनोथेरेपी रेजिमेंट के साथ जोड़ कर इलाज कर सकते हैं." उनका मानना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा रोगियों में इम्यूनोथेरेपी का असर दिखेगा." sabhar : dw.de
5जी तकनीक से काफी बदलाव होगा
0
जनवरी 19, 2021 in 5जी तकनीक, से काफी बदलाव होगा
दुनिया के कुछ देशों में 5जी की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के नाम शामिल हैं। धीरे-धीरे 5जी इंटरनेट पूरी दुनिया में शुरू हो जाएगा। गार्टनर के मुताबिक, 2020 तक दुनिया भर में 5जी वायरलेस नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर रिवेन्यू 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
साल 2025 तक 75 अरब इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस आने की उम्मीद है, जिससे यह दुनिया इंटरनेट की मदद से अधिकतर काम बड़ी आसानी से कर सकेगी। 5जी कमर्शियल नेटवर्क आने के बाद पहला फायदा मोबाइल ब्रांडबैंड को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा। साथ ही हर घर तक बिना फाइबर लेन के फाइबर स्पीड होगी
समय की होगी बचत
इंटरनेट की स्पीड बढ़ने से न सिर्फ जिंदगी आसान होगी बल्कि समय की भी बचत होगी। दरअसल, वर्तमान समय में कोई भी एच एचडी क्वालिटी की फिल्म डाउनलोड करने में काफी समय लगता है लेकिन 5जी आने के बाद किसी भी काम को चंद सेकेंड में किया जा सकेगा। यहां तक कि कई बार तार के माध्यम से आने वाले इंटरनेट कनेक्शन में कनेक्टिविटी टूटने की आशंका रहती है, 5जी में उस तरह की भी समस्या नहीं होगी।
इन देशों में शुरू हो चुकी है 5जी सेवा
5जी सर्विस अमेरिका, दक्षिण कोरिया और कुछ यूरोपियन देश जैसे स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और ब्रिटेन का नाम शामिल है। इसके अलावा कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, स्पेन, स्वीडन, कतर और द यूएई 5जी के शुरुआत की घोषणा कर चुके हैं।
दक्षिण कोरिया, चीन, जापान भर रहे फर्राटा
दक्षिण कोरिया, चीन, जापान जैसे देश अगले साल 5जी तकनीक को लोगों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इसके लिए उनका होमवर्क भी पूरा हो चुका है। दरअसल, जिस तरह बुलेट ट्रेन के लिए पूरी तरह अलग ट्रैक बनाने की जरूरत होती है, उसी तरह 5जी तकनीक के लिए भी खास इंतजाम करने होते हैं। इसके लिए 80 फीसदी मोबाइल टावर को ऑप्टिकल फाइबर से लैस करने की जरूरत होती है, जबकि देश में मात्र 15फीसदी टावर इस तकनीक से जुड़े हैं। इंडस्ट्री के मुताबिक, अभी जो स्थिति है, उसमें 5जी तकनीक आने में तीन-चार साल लग सकते हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि जब 4जी तकनीक ही पूरे देश में अपने पैमानों पर खरी नहीं उतर रही, ऐसे में 5जी की बात करना जल्दबाजी ही है। एक सर्वे में आया भी है कि 4जी सर्विस पूरे विश्व में सबसे धीमी भारत में ही है।
सरकार कर रही यह दावा
सरकार का कहना है कि 5जी जैसी तकनीक देश में आए, इसे देखते हुए ही नई टेलिकॉम नीति बनाई गई है और इसे केंद्र सरकार ने पिछले साल ही मंजूरी दी है। प्रस्तावित नीति में टेलिकॉम सेक्टर में लाइसेंसिंग और फ्रेमवर्क, सभी के लिए कनेक्टिविटी, सेवाओं की गुणवत्ता, व्यापार करने में आसानी और नई तकनीक पर जोर जैसे 5जी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी चीजें शामिल हैं। इस नीति में टेलिकॉम सेक्टर में 100 अरब डॉलर के निवेश को किस तरह आकर्षित किया जाए, इस बारे में भी रोडमैप दिया गया है। सरकार का दावा है कि इसमें 5जी के लिए भी रोडमैप है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह इसकी राह में मौजूद बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
5जी तकनीक से आएगी सूचना क्रांत
जानकारों का मानना है कि 5जी से तकनीक में नई क्रांति आ जाएगी। इसे 4जी तकनीक से 1000 गुना तेज माना जाता है। इस तकनीक के उपयोग में आने के बाद दैनिक जरूरतों से जुड़ी तकनीकी सुविधाएं भी हाइटेक हो जाएंगी।
5जी कैसे करता है काम
इसमें कई नई तकनीक इस्तेमाल की जाएंगी और यह हाई फ्रिकवेंसी बैंड 3.5गीगाहर्ट्ज से 26गीगारर्ट्ज या उससे भी ज्यादा पर काम करेगा। जहां 4जी में सिग्नल के लिए बड़े हाई पाव सेल टावर्स की जरूरत होती है, वहीं 5जी वायरलेस सिग्नल को भेजने के लिए बहुत सारे छोटे सेल स्टेशन का इस्तेमाल करेगा। जिन्हें छोटी-छोटी जगह जैसे लाइट पोल्स या बिल्डिंग पर लगाया जा सकता है। यहां पर मल्टीपल स्मोल सेल से उसका इस्तेमाल किया जाएगा, क्योंकि यह मिलिमीटर वेव स्पेक्ट्रम हमेशा 30गीगाहर्ट्ज से 300गीगाहर्ट्ज के भीतर ही होती है और 5जी में हाई स्पीड पैदा करने की ही जरूरत है।
पहली जनरेशन
पहली जनरेशन में वायरलेस टेक्नोलॉजी के लिए स्पेक्ट्रम की लोवर फ्रिक्वेंसी बेंड का इस्तेमाल होता था, जिससे कि दूरी ज्यादा होती है। इससे जूझने के लिए इंडस्ट्री ने 5जी नेटवर्क में लोअर फ्रिक्वेंसी स्पेक्स्ट्रम इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है। जिससे नेटवर्क ऑपरेटर सिस्टम का इस्तेमाल कर सके, जो कि उनके पास पहले से ही मौजूद है। इसकी इंटरनेट स्पीड पहले के जनरेशन से 10 से 20 गुना ज्यादा होगी जो अपने आपमें बहुत ही तेज होगी।
4जी से 5जी से कितना अलग
5जी पूरी तरह से 4जी तकनीक से अलग होगी। शुरुआत में अपने ओरिजिनल स्पीड में काम करेगा या नहीं यह भी तय नहीं है क्योंकि यह सब कुछ टेलीकॉम कंपनियों का निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। फिलहाल 4जी पर सर्वाधिक 45 एमबीपीएस मुमकिन है लेकिन एक चिप को बनाने वाली कंपनी का अनुमान है कि 5जी तकनीक से काफी बदलाव होगा
सोमवार, 18 जनवरी 2021
क्यों होती है इम्यूनिटी कमजोर
0
जनवरी 18, 2021 in कमजोर, क्यों होती है इम्यूनिटी
शरीर में चर्बी का अनावश्यक रूप से जमा होना। वजन बहुत कम होना।- फास्टफूड, जंकफूड आदि का ज्यादा सेवन।शरीर को ठीक से पोषण न मिलना। धूम्रपान, शराब, ड्रग आदि का सेवन। पेनकिलर, एंटीबॉयोटिक आदि दवाओं का लंबे समय तक सेवन। लंबे समय तक तनाव में रहना। लंबे समय तक कम नींद लेना अथवा अनावश्यक रूप से देर तक सोना। शारीरिक श्रम प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहना। बचपन और बुढ़ापे में रोगप्रतिरोधक शक्ति सामान्य तौर पर कुछ कमजोर होती है, पर खराब जीवनशैली केचलते युवावस्था में भी यह कमजोर हो सकती है। गर्भवती स्त्री का खान-पान ठीक न हो या वह कुपोषण का शिकार हो तो होने वाले बच्चे की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की संभावना बनी रहती है। अगर आप चीनी ज्यादा खाते हैं तो यह इम्यूनिटी के लिए नुकसानदेह हैअमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में छपे एक शोध के अनुसार सौ ग्राम या इससेअधिक शुगर खा लेने की स्थिति में श्वेत रुधिर कणिकाओं की रोगाणुओं को मारने की क्षमता- कम पानी पीने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है, क्योंकि पर्याप्त पानी के अभाव में शरीर सेविजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल पाना कठिन हो जाता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें कई बीमारियों से सुरक्षित रखती है. छोटी-मोटी ऐसी कई बीमारियां होती हैं जिनसे हमारा शरीरखुद ही निपट लेता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है. ऐसे में शरीर कमजोर हो जाता है;और हम जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं.हमारा इम्यून सिस्टम हमें कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रखता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण,फंगस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है. इन बातों से यह तो स्पष्ट हो जाता है कि इम्यून पावर के कमजोर होने पर बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि हम अपनी इम्यून पावर को बनाए रखें. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,;कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं . ग्रीन टी और ब्लैक टी, दोनों ही इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद होती हैं लेकिन एक दिन में इनके एक से दो कप ही पिएं.ज्यादा मात्रा में इसके सेवन से नुकसान हो . कच्चा लहसुन खाना भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में सहायक होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में एलिसिन, जिंक,सल्फर, सेलेनियम और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं.दही के सेवन से भी इम्यून पावर बढ़ती है. इसके साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मददगार होती है. ओट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं. साथ ही इसमें एंटी-माइक्राबियल गुण भी होता है.;हर रोज ओट्स का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है. विटामिन डी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है. साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए और दिल संबंधी बीमारियों को दूर रखने के लिए भी विटामिन डी लेना बहुत जरूरी है.संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है.स्रोत हिंदुस्तानडॉट कॉम
रविवार, 17 जनवरी 2021
चुकंदर के रस से रहेँगे जवान
0
जनवरी 17, 2021 in के रस, चुकंदर, जवान, से रहेँगे
शरीर विज्ञानी कहते हैं कि इंसानी शरीर के लिए फलों और सब्जियों का भोजन ही सबसे बढिया होता है। इस बात को एक हालिया रिसर्च से और भी अधिक बल मिलता है। कुदरत ने हमारी धरती पर एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट और गुणकारी फल और शाक-सब्जियों को पैदा किया है। जमीन के अंदर पैदा होने वाला चुकंदर हमारी सेहत के लिये बेहद गुणकारी कंद है। चुकंदर के गुणों पर किए गए हालिया रिसर्च के नतीजे काफी उत्साहवर्धक हैं।रिसर्च के नतीजों के मुताबिक चुकंदर का रस बुजुर्गो को ऊर्जावान बना सकता है। एक नए अध्ययन के मुताबिक यह रस बुजुर्गो के जीवन में फिर से जवानों के जैसी सक्रियता बढ़ा देता है।अध्ययन के मुताबिक बुजुर्गो को चुकंदर का रस पीने के बाद हल्का-फुल्का व्यायाम करने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उन्हें पैदल चलने के लिए जितना प्रयास करना पड़ता है, चुकंदर का रस पीने से उसमें 12 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।"जर्नल ऑफ एप्लाइड फि जियोलॉजी" में ब्रिटेन के एग्जिटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि चुकंदर का रस पीने के बाद बुजुर्ग वह काम भी कर सकते हैं, जिनके लिए वैसे कोशिश भी नहीं करते हैं।चुकंदर का रस रक्त वाहिनियों को फैला देता है और इससे शारीरिक सक्रियता के दौरान मांसपेशियों की ऑक्सीजन की आवश्यकता कम हो जाती है। लोगों की उम्र बढ़ने या उनमें ह्वदय परिसंचरण तंत्र को प्रभावित करने वाली स्थितियां निर्मित होने पर उनमें व्यायाम के दौरान अंदर ली जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा में नाटकीय रूप से कमी आ जाती है।
शनिवार, 16 जनवरी 2021
प्रयोगशाला में कृत्रिम मस्तिष्क कोशिका का निर्माण
0
जनवरी 16, 2021 in कोशिका का निर्माण, प्रयोगशाला, मस्तिष्क, में कृत्रिम
यूनिवर्सिटी आफ साउदर्न केलिफोर्निया विटरबी स्कूल आफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एलिस पार्कर ने कृत्रिम मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण प्रयोगशाला में किया है मस्तिष्क कोशिका एक प्रकार का तंत्रिकाओं के बीच का जोड़ है जो जिससे होकर विभिन्न रंग या रासायनिक संदेश एक तरीका से दूसरे तक गुजरते हैं कृत्रिम मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण करने के लिए प्रोफेसर एलिस पार्क कर और चूने तंत्रिकाओं को जोड़ने वाली डिजाइन नैनो टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ के बनाया है
ऐसा व्यक्ति जिसने दी थी एड्स को मात
0
जनवरी 16, 2021 in ऐसा व्यक्ति. जिसने, को मात, दी थी एड्स
अमेरिका के एक ऐसे व्यक्ति ने विश्व की सबसे खतरनाक बीमारी को मात देखकर चिकित्सा जगत को समर्पित कर दिया था वह दुनिया का ऐसा पहला मरीज है जिसके शरीर में एचआईवी वायरस पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं 45 वर्षीय तिमोथी रे ब्राउन के लिए इसे किस्मत की ही बात कहेंगे कि दरअसल व एड्स के अलावा एक और प्राण घातक बीमारी एक प्रकार का ब्लड कैंसर से पीड़ित थे के इलाज के लिए उनके शरीर में एक बार बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है उसी के बाद उनका एड्स भी ठीक होने लगा अब उनके शरीर में एचआईवी वायरस पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं डॉक्टरों ने इस अनोखी घटना को फंग्शनल चोर का 9995 में ब्राउन के शरीर में एचआईवी वायरस के संक्रमण के बारे में पता लगा था वह ल्यूकेमिया से जूझ रहे थे तब वह जर्मनी में रहते थे बर्लिन में 2007 में हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन ने उनकी जिंदगी बदल दी वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके शरीर में जिसका बोन मैरो प्रस्तावित किया गया उसके अंदर रहे होंगे जो के जरिए पहुंच गए और वह काकेशियाई मूल का रहा होगा यूरोप स्थित काकेशिया पर्वत इसके आसपास रहने वाले लोग के माने जाते हैं होते हैं और उत्तर पश्चिम एशिया पाए जाते हैं 1 प्रतिसत लोगों के शरीर में प्रतिरोध पाए जाते हैं उनमें से एक रहा होगा का मानना है कि में यूरोप में लाखों लोगों की जान लेने वाले ग्रेटर प्लेग से बच जाने वाले लोगों में स्वतः ही एड्स से लड़ने की छमता बिकसित हो गयी थी उसके बाद यह जीन पीढ़ी दर पीढ़ी उनके सन्तानो में आ गयी एच आई वी वायरस की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डाक्टर जे लेवि ने इसे चिक्तिसा जगत की एक उपलब्धि माना है उनका कहना है की उन एड्स प्रतिरोधी जीनो की संगरचना की पता लगाकर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है
महिला के रक्त की जांच से गर्भस्थ शिशु के लिंग का सटीक निर्धारण
0
जनवरी 16, 2021 in की जांच से गर्भस्थ शिशु, के .लिंग का सटीक निर्धारण, के रक्त, महिला
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन शोध पत्रिका में प्रकाशित एक अन्वेषण के अनुसार गर्भवती महिलाओं के रुधिर के डीएनए के परीक्षण से 7 सप्ताह के गर्भस्थ शिशु के लिंग का निर्धारण किया जा सकता है और इससे उनको कोई हाथ भी नहीं पहुंचती है शोध में कहा गया है कि यदि एमियों से टेंसेस लिखित या सोनोग्राम आज विधियों की तुलना में अधिक सटीक है तथा गर्भवती महिला के गर्भाशय जहां से अधिक सुरक्षित है गर्भस्थ शिशु का अल्ट्रासाउंड भी 11 से 14 सप्ताह का होने पर ही किया जा सकता है लेकिन रक्त के डीएनए के परीक्षण के साथ सप्ताह के गर्भ में शिशु का लिंग निर्धारित किया जा सकता है
ऐसा जीन किसी भी पौधे को किसी भी मौसम में उगाने में सक्षम
0
जनवरी 16, 2021 in ऐसा जीन, किसी भी पौधे को किसी भी, में उगाने में सक्षम, मौसम
अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पादपों में एक महत्वपूर्ण अनुसार अनुवांशिक जीन की पहचान की है जो उनकी जैविक घड़ी को गतिशील रखता है det1 नामक इस जीन की मदद से पादपों में कुछ बदलाव लाकर उन्हें भिन्न मौसमों और स्थानों पर उगाया जा सकता है साथ ही इससे वैश्विक खाद्य उत्पादन बढ़ सकता है ज्ञातव्य हो कि करीब करीब सभी जिलों में एक जैविक घड़ी होती है जो दिन और रात के साथ जैविक क्रियाओं के सामान में उन्हें मदद करती है पादपों में या घड़ी वृद्धि को दोनों समय और दिन या सीजन के लिए समायोजित करने में महत्वपूर्ण है यह घड़ी प्रातः जीवन और साय जीन से संबंध है प्रातः जिनके प्रोटीन दिन निकलने पर साय जीन पर हावी हो जाते हैं और शाम होने पर इसका उल्टा होता है अल्बर्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई dt1 नामक जीन जैविक चक्कर में को दबाने में अहम भूमिका निभाता है मुख्य अनुसंधानकर्ता जिंक 1 दिन के अनुसार जो पादप कंपनी dt1 में बनाते हैं उनमें जैविक घड़ी तेज होती है उसमें कम समय में फूल आ जाते हैं beta1 नामक जीन की खोज से विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को दुर्गम स्थानों से इतर सहज और अन्य स्थानों पर भी उगाया जा सकता है इस खोज से चिकित्सा के क्षेत्र में काफी मदद मिल सकती है
शुक्रवार, 15 जनवरी 2021
क्यों होती है इम्यूनिटी कमजोर
0
जनवरी 15, 2021 in इम्यूनिटी, कमजोर, क्यों होती है
शरीर में चर्बी का अनावश्यक रूप से जमा होना- वजन बहुत कम होना फास्टफूड, जंकफूड आदि का ज्यादा सेवन।शरीर को ठीक से पोषण न मिलना- धूम्रपान, शराब, ड्रग आदि का सेवन- पेनकिलर, एंटीबॉयोटिक आदि दवाओं का लंबे समय तक सेवन। लंबे समय तक तनाव में रहना। लंबे समय तक कम नींद लेना अथवा अनावश्यक रूप से देर तक सोना शारीरिक श्रम का अभाव। प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहना।- बचपन और बुढ़ापे में रोगप्रतिरोधक शक्ति सामान्य तौर पर कुछ कमजोर होती है, पर खराब जीवनशैली;चलते युवावस्था में भी यह कमजोर हो सकती है।- गर्भवती स्त्री का खान-पान ठीक न हो या वह कुपोषण का शिकार हो तो होने वाले बच्चे की भी रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की संभावना बनी रहत- अगर आप चीनी ज्यादा खाते हैं तो यह इम्यूनिटी के लिए नुकसानदेह है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में छपे एक शोध के अनुसार सौ ग्राम या इससे अधिक शुगर खा लेने की स्थिति में श्वेत रुधिर कणिकाओं की रोगाणुओं को मारने की क्षमतापांच घंटे तक के लिए कमजोर पड़ जाती है। कम पानी पीने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है, क्योंकि पर्याप्त पानी के अभाव में शरीर सेविजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल पाना कठिन हो जाता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें कई बीमारियों से सुरक्षित रखती है. छोटी-मोटी ऐसी कई बीमारियां होती हैं जिनसे हमारा शरीर खुद ही निपट लेता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है. ऐसे में शरीर कमजोर हो जाता है और हम जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं.हमारा इम्यून सिस्टम हमें कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रखता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण,फंगस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है. इन बातों से यह तो स्पष्ट हो जाता है कि इम्यून पावर के कमजोर होने पर बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि हम अपनी इम्यून पावर को बनाए रखें.रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,;कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं : ग्रीन टी और ब्लैक टी, दोनों ही इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद होती हैं लेकिन एक दिन में इनके एक से दो कप ही पिएं.ज्यादा मात्रा में इसके सेवन से नुकसान हो सकता है.कच्चा लहसुन खाना भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में सहायक होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में एलिसिन, जिंक,सल्फर, सेलेनियम और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं. दही के सेवन से भी इम्यून पावर बढ़ती है. इसके साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मददगार. ओट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं. साथ ही इसमें एंटी-माइक्राबियल गुण भी होता है.;हर रोज ओट्स का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है.. विटामिन डी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है. साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए और दिल संबंधी बीमारियों को दूर रखने के लिए भी विटामिन डी लेना बहुत जरूरी है.संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है स्रोत हिंदुस्तानडॉट कॉम dainik jagaran
vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता
0
जनवरी 15, 2021 in
vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता: इटली के वैज्ञानिको ने न्यूरो चीप बनाने में सफलता हासिल की है जिससे जीवित मस्तिस्क कोशिकाएं सिलिकन सर्कीट से सम्बन्ध की जा सकेगी इसके अतिर...
vigyan kee takneek: कपड़ो से पैदा होगी बिजली
0
जनवरी 15, 2021 in
vigyan kee takneek: कपड़ो से पैदा होगी बिजली: जल्द ही बाजारों में नैनो फाइबर से बने पावर सूट उपलब्ध होंगे वैज्ञानिको ने हमारी जीवन सैली में क्रांती ला दी है उन्होंने इंसान की सुख सुबिध...
vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता
0
जनवरी 15, 2021 in
vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता: इटली के वैज्ञानिको ने न्यूरो चीप बनाने में सफलता हासिल की है जिससे जीवित मस्तिस्क कोशिकाएं सिलिकन सर्कीट से सम्बन्ध की जा सकेगी इसके अतिर...
गुरुवार, 14 जनवरी 2021
भगदड़ रोकेगा सॉफ्टवेयर
0
जनवरी 14, 2021 in
त्योहारों और बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने के दौरान पैदा होने वाली भगदड़ जैसी स्थिति पर काबू पाना अब ज्यादा आसान होगा क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है जो बिल्कुल सही ढंग से इस बात का पता लगा सकेगा कि कोई भीड़ कर खतरे के स्तर तक पहुंचेगी जिससे भगदड़ पर काबू पाया जा सकेगा इस सॉफ्टवेयर का विकास जर्मनी के वैज्ञानिकों ने किया है और उनका कहना है कि इससे सुरक्षा कर्मचारियों को इस बात की सुविधा मिलेगी कि भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने से पहले वह भीड़ को तितर-बितर कर सकें यह सॉफ्टवेयर किसी भीड़ की स्थिति का अध्ययन और उसकी जांच करता है ऐसा वह भीड़ के वीडियो फुटेज के हर पिक्सेल को देखकर करता है जैसे ही उसे लगता है कि वीडियो पिक्सेल के बीच काफी समानता है वह सुरक्षा कर्मचारियों को अलग कर देता है
एक गोली से ही होगा त्वचा कैंसर की रोकथाम
0
जनवरी 14, 2021 in
त्वचा कैंसर का इलाज अब निकट भविष्य में एक गोली खाने बरसे हो सकेगा वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा विकसित करने का दावा किया है जिससे लोगों में से हुई क्षति को दुरुस्त कर इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा अमेरिका के ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने इस बात का अध्ययन किया कि पशु पक्षी किस प्रकार सूर्य की नुकसानदेह किरणों से खुद को बचाते हैं इस खोज से और ऐसी दवा विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा जो सन वर्ण से पैदा होने वाली इस बीमारी को खत्म कर देगी और सर्वाधिक विनाशकारी कैंसर में से एक माने जाने वाले त्वचा कैंसर से लोगों की रक्षा करेगी वास्तव में 10 सालों के शोध के बाद शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने में सफलता हासिल की है
सोमवार, 11 जनवरी 2021
एक दशक बाद हो सकती है मनुष्य की उम्र 1000 वर्ष
0
जनवरी 11, 2021 in एक दशक. बाद हो सकती है मनुष्य, की उम्र. 1000 वर्ष
ब्रिटेन की एक बैग यह प्रसिद्ध वैज्ञानिक का दावा है कि जीवन का 150 वां बसंत देखने वाला आदमी तो पहले ही जन्म ले चुका है लेकिन यह तो कुछ भी नहीं अगले दशकों में ऐसे कई पहले व्यक्ति पैदा होंगे जो उम्र के 1000 में पड़ाव तक पहुंचेंगे लोग भले ही इस बात पर विश्वास ना करें लेकिन डॉक्टर डी ग्रे नामक इस वैज्ञानिक को पूरा विश्वास है कि उनके ही जीवन काल में बैठ डॉक्टरों के पास वह सभी साधन और औजार होंगे जिससे वे बुढ़ापे का इलाज करने में पूरी तरह सक्षम होंगे बायोमेडिकल जेंटो लार्जेस्ट तथा अध्यक्षता पर पिछले कई वर्षों से शोध करने वाले संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर डि gre का दावा है कि ऐसा संभव होगा तमाम तरह की बीमारियों को समाप्त कर ऐसा करने से जीवन को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया जा सकता है तब आदमी उम्रदराज तो होगा ना है वह स्पष्ट है इस समय जीवन प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2030 में 100 वर्ष की उम्र पार करने वाले की संख्या कई लाख में होगी इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा जीने वाला व्यक्ति कार्यकाल 122 वर्ष का है जापान में वर्ष 2010 में 44000 से ज्यादा लोग 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे उनका मानना है कि विकासशील देशों में कारण बाधित हो सकती है डॉक्टर डिग्री ऐसे समय को हकीकत बनते देखते हैं जब लोग अपने डॉक्टरों के पास नियमित मेंटेनेंस के लिए जाया करेंगे
उस समय तक जीन थेरेपी स्टेम सेल थेरेपी इम्यून सिस्टम स्टिमुलेशन एडवांस मेडिकल तकनीक आम लोगों की पहुंच तक होगी जिससे लोग अपने को फिट एवं फाइंड रख सकेंगे डॉक्टर डिग्री मानते हैं कि बुढ़ापा कुल मिलाकर हमारे शरीर में जीवन भर संजीत होने वाला अलग अलग किस्म का सूक्ष्म और कोशिकीय loss है और इसे रोकना संभव है इस बात पर अभी बात हो सकती है कि भविष्य में आदमी की औसत आयु कहां तक पहुंचेगी लेकिन जो प्रवृतियां है वह स्पष्ट है इस समय जीवन की प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है
चीन में मिला दुनिया की सबसे पुराना पक्षी
0
जनवरी 11, 2021 in चीन, में मिला दुनिया. की सबसे पुराना .पक्षी
चीन के जीवाश्म भी धोने पक्षी नुमा प्राचीन डायनासोर का एक सा जीवाश्म ढूंढ निकाला है जिनके दुनिया का प्रथम पक्षी होने का दावा किया जा रहा है अगर चीनी वैज्ञानिकों का यह दावा सही होता है तो यह अब तक विश्व का सबसे पुराना पक्षी माने जाने वाला जर्मनी के aakeyo पैट्रिक्स ko पीछे छोड़ देगा इनके जीवा सुविधाओं के अनुसार मुर्गी के आकार का या डायनासोर जीवाश्म 15.5 करोड़ वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों ने इसे shiyaotengiya jhengi नाम दिया है इस जीवाश्म को चीन के लिए प्रांत में खोजा गया है इस प्रांत में पहले भी प्राचीन काल के जीवाश्म मिलते रहे हैं shiyaotengiya jhengi akeyopatriks पक्षी के जीवाश्म से भी 5000000 वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों को यह जीवन पत्थर की एक सीन में दबा हुआ मिला पत्थर पर से निशान भी साफ देखे जा सकते हैं जिसमें इस पक्षी के पंख भी होने के संकेत हैं इस डायनासोर रूपी पक्षी के मिलने पर वैज्ञानिकों की मौजूदा समय की पक्षियों को लेकर वैज्ञानिकों का सिद्धांत धूमिल होता जा रहा है इसमें कहा गया है कि आधुनिक पक्षी का विकास डायनासोर से ही हुआ होगा हालांकि यह खोज इस थ्योरी को पूरी तरह से खारिज नहीं करती है लेकिन इस क्षेत्र में नए सूर्य के प्रवेश द्वार खोल देती है इस डायनोसोर की रूपरेखा सीधे-सीधे आज के पक्षियों से नहीं मिलती है लेकिन arkyptrks से काफी मिलती जुलती है उल्लेखनीय है बैटरी ब्रिटिश प्राणी वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने 18 सो 59 में अपनी पुस्तक गुणों की उत्पत्ति में डायनासोर के नष्ट हो जाने की टूटी पड़ी को जोड़ते हुए बताया था कि पक्षियों का विकास जरूर डायनासोर से हुआ होगा इस पुस्तक के प्रकाशन के 2 वर्ष बाद ही जर्मनी में arkyoptrks ko खोज निकाला गया था
रविवार, 10 जनवरी 2021
प्रकाश की गति वाले प्रयोग में चौंकाने वाले नतीजे
0
जनवरी 10, 2021 in की गति, प्रकाश, वाले प्रयोग में चौंकाने वाले नतीजे
जिनेवा में स्थित भौतिकी की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला शरण में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने सबअटॉमिक पार्टिकल यानी अति सूक्ष्म कण ने दोनों की गति प्रकाश की गति से भी ज्यादा पाई है अगर ऐसा सच हुआ तो यह भौतिकी के मूलभूत नियमों को पलटने वाली खोज होगी क्योंकि उनके मुताबिक प्रकाश की गति से ज्यादा तेज कुछ भी नहीं है शर्म से 732 किलोमीटर दूर स्थित ग्रैंड सांसों प्रयोगशाला को भेजे गए न्यूट्रींों प्रकाश की गति से 1 सेकंड से के बहुत ही छोटे हिस्से से तेज पाए गए शोधकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि वे इस नतीजे से काफी आश्चर्यचकित है और इसलिए उन्होंने कोई दावा नहीं करते हुए अन्य लोगों से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करने की अपील की है शोधकर्ताओं के गुटके ने कहा है कि वे इस दावे को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं रिपोर्ट इटली में ग्रंथों की भूमिकाएं भेजा जिससे पता चले कि उनमें से कितने रूप बदलकर के रूप में वहां पहुंचे इस प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने देखा कि उतनी ही दूरी के कुछ हिस्से से तेजी से तय कर ली इस टीम ने नैनों की यह दूरी तय करने का प्रयोग किया उसके बाद इतनी बार इस जानकारी को पाया जिससे एक औपचारिक खोज कहा जा सके मगर वैज्ञानिकों का यह दल समझता है की प्रक्रिया में मामूली सी भी गलती से बेहद गलत नतीजे आ सकता है कि करने प्रकाश की गति को भी पछाड़ दिया इसलिए उन्होंने अपनी आंखों के सामने रख दिया है
सिंगिंग वर्ल्ड के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार
0
जनवरी 10, 2021 in का ब्लूप्रिंट, तैयार, वर्ल्ड के जीनोम, सिंगिंग
गाने वाली चिड़िया जेबरा फिंच के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार कर लेने की डॉक्टरों द्वारा घोषणा की गई है वाशिंगटन विश्वविद्यालय के डॉ वेसले वारेन के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा की गई इस खोज से कई वैज्ञानिक विधियों को सुलझाने में मदद मिलने की संभावना है खासकर इंसानों और अन्य प्राणियों में आवाज सीखने के रहस्य के बारे में जानने के लिए यह खोज काफी महत्वपूर्ण हो सकती है वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस जीनोम ब्लूप्रिंट से स्पीच डिसऑर्डर मसलन ऑटिज्म हकलाना और पार्किंसन जैसे रोगों के जेनेटिक कारण ओं को भी समझा जा सकता है जेबरा फिंच नाम की यह चिड़िया आवाज को सीखने की प्रक्रिया का बेहतरीन उदाहरण है उल्लेखनीय है कि सिंगिंग वर्ल्ड के अलावा मुर्गा ही एकमात्र ऐसा पक्षी है जिसके दिनों का पूरा खाका खींचने में सफलता वैज्ञानिकों को मिली है इस तुलना के बाद यह पता लगाया जा सका है कि आखिर कौन से ऐसे हैं जो आवाज गाने को सीखने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
शनिवार, 9 जनवरी 2021
नयनो वाकर की खोज
0
जनवरी 09, 2021 in नयनो, वाकर की खोज
अमेरिकी वैज्ञानिको ने पहली बार मनुष्य की भांति चलने वाला अणु डिजाईन किया है जिसे नयनो वाकर नाम दिया गया है नयनो वाकर के माध्यम से बहुत सी सुचनाये छोटे से चिप में एकत्र की जा सकती है वैज्ञानिको के अनुसार सूछ्म अणु के सपाट पर मनुष्य की भांति सीधा चलना अदभुत है इससे पुरे विश्व जहाँ हम रहते है की नक़ल नयनो मीटर से स्केल से उतारी जा सकती है ९, १० डि डि ऐ को जोड़ने वाले तत्व पैरो का काम करते है उष्मा मिलते यह सक्रिय होजाता है और उससे चलने फिरने की उर्जा मिलने लगती है डिडिऐ बिना नयनो रेल या नयनो ग्रुब्स के सपाट सतह पर मनुष्य की तरह चल सकता है नयनो वाकर पहली बार १००००० से अधिक कदम चला जहाँ तक डिडिऐ का प्रश्न है इसे मनुष्य की तरह चलने फिरने के लिए किसी सहारे कीजरूरत नहीं होती
दुनिया की सबसे छोटी इलेक्ट्रिक मोटर तैयार
0
जनवरी 09, 2021 in तैयार, दुनिया की सबसे छोटी. इलेक्ट्रिक मोटर
टफ्ट्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विश्व की सबसे छोटी इलेक्ट्रिक मोटर तैयार की है इसका कारण के बराबर है छोटे आकार की मोटर के विकास से वैज्ञानिकों को मेडिसिन से इंजीनियरिंग तक के क्षेत्रों में नए स्तर पर उपकरण तैयार करने में मदद मिलेगी
विश्व की सबसे छोटे आकार की इलेक्ट्रिक मोटर 1 नैनोमीटर से भी कम है जो कि मौजूदा विश्व रिकार्ड 200 नैनोमीटर की मोटर के नाम है इस मोटर के छोटे आकार का इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि मनुष्य के एक बाल की मोटाई 60000 नैनोमीटर के बराबर होती है
टफन टफन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता चार्ल्स एप्स स्काई की टीम इस मोटर को एक लो टेंपरेचर स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप के माध्यम से नियंत्रित करती है एलटी एसडीएम जैसे उपकरण अमेरिका में 100 के बराबर ही हैं
बिजली बनाने में काम आएंगे जिओ वेक्टर
0
जनवरी 09, 2021 in बनाने में काम आएंगे जिओ, बिजली, वेक्टर
मिट्टी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया जियो व्यक्ति से दोहरा लाभ मिल सकता है बैटरी यों का यह समूह परमाणु के कचरे जैसे अन्य विषाक्त पदार्थों की सफाई करते समय बिजली भी उत्पन्न कर सकते हैं यह बात एक शोध में सामने आई है मिशीगन विश्वविद्यालय में फैक्ट्रियों पर शोध करने वाली माइक्रोबायोलॉजिस्ट जी मा रेgu वेरा ने कहा कि जियो वेक्टर अति सूक्ष्म जीव होते हैं जो पूरे विश्व के परमाणु ईंधन उसे दूसरी जगहों की सफाई करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं अमेरिका के कोलोराडो में स्थित फैक्ट्री में यूरेनियम के अवशेषों की सफाई के दौरान इन व्यक्तियों के प्रभाव की जांच हो चुकी है यूरेनियम की सफाई करने के लिए शोधकर्ताओं ने भूमि के अंदर दूषित जल में एसीटेट का प्रवेश कराया था
यूरेनियम जियो फैक्टर का पसंदीदा भोजन है जमीन के अंदर पहले से ही मौजूद बैक्टीरिया समुदाय के विकास को बहुत तेजी से बढ़ा देता है और वह यूरेनियम को खड़ा कर साफ कर देते हैं
दिमाग में घुसे बिना भी दिमाग को नुकसान पहुंचाता है कोरोना
0
जनवरी 09, 2021 in दिमाग, में घुसे बिना भी दिमाग को नुकसान पहुंचाता है. कोरोना
अब तक यही माना जाता रहा है कि यह वायरस शरीर के जिस जिस हिस्से में पहुंचता है, वहां ही नुकसान पहुंचाता है. लेकिन अब रिसर्चरों ने पाया है कि दिमाग में घुसे बिना भी कोरोना दिमाग को नुकसान पहुंचाता है.
कोरोना वायरस नाक या मुंह के रास्ते सांस की नली में पहुंचता है और वहां से फेफड़ों में घुस जाता है. यही वजह है कि कोरोना टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जाता है. इसी कारण सांस में दिक्कत भी आती है. अधिकतर मौतों का कारण भी यही होता है कि फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं.
रिसर्चरों ने ऐसे 19 लोगों के मस्तिष्क पर शोध किया जिनकी मौत कोविड-19 के कारण हुई है. इन्होंने पहले शरीर की उन कोशिकाओं पर ध्यान दिया जिन्हें कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्यादा नुकसान होता है. इसमें ओल्फैक्ट्री बल्ब शामिल है जो गंध को समझने के लिए जिम्मेदार होता है. इसके बाद उन्होंने ब्रेनस्टेम की जांच की, जो सांस लेने और दिल के धड़कने का काम कराता है.
19 में 14 मरीजों में ये दोनों या फिर इनमें से किसी एक को नुकसान हुआ था. किसी मरीज में दिमाग के इन हिस्सों की रक्त कोशिकाएं जम गई थीं, तो किसी में कोशिशकाओं में लीकेज देखा गया. दिमाग में जहां जहां भी ऐसा लीकेज मिला, वहां इम्यून सिस्टम में खराबी भी दर्ज की गई. लेकिन रिसर्चर ये देख कर हैरान थे कि इस सारे नुकसान के बावजूद वहां वायरस बिलकुल भी मौजूद नहीं था.
द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी इस रिपोर्ट में डॉ अवींद्र नाथ ने लिखा है, "हम भौचक्के रह गए." अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक के डॉक्टर नाथ ने बताया कि उनकी रिसर्च टीम ने दिमाग में जिस तरह का नुकसान देखा, वैसा आम तौर पर स्ट्रोक या फिर न्यूरो-इंफ्लेमेटरी रोगों में ही देखा जाता है, "अब तक हमारे नतीजे यह दिखाते हैं कि शायद यह नुकसान सार्स-कोव-2 वायरस ने सीधे तौर पर नहीं किया है. भविष्य में हम यह पता लगाने की योजना बना रहे हैं कि कोविड-19 किस तरह से मस्तिष्क की रक्त कोशिकाओं पर असर करता है और क्या इससे मरीजों में छोटे और लंबे समय के अलग अलग लक्षण पैदा होते हैं."
महामारी के दौरान ज्यादा गिर रहे हैं बाल
एक अन्य शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान न्यूयॉर्क शहर में लोगों के बाल पहले से ज्यादा झड़ रहे हैं. शहर के एक ऐसे इलाके में जहां अश्वेत लोगों की आबादी अधिक है, वहां बालों के रोग टेलोजेन इफ्लूवियम (टीई) में 400 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह शोध अमेरिका के जर्नल ऑफ द अमेरिकन अकैडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में छपा है. इसके अनुसार नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच टीई के मात्र 0.4 प्रतिशत ही मामले थे, जबकि अगस्त तक यह बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो चुका था.
रिपोर्ट में लिखा गया है, "अभी यह साफ नहीं है कि टीई की असली वजह कोरोना महामारी के कारण लोगों में मनोवैज्ञानिक रूप से हुए बदलाव हैं या फिर यह अत्यंत भावुक तनाव का नतीजा है." डॉक्टरों का कहना है कि अकसर किसी सदमे के करीब तीन महीने बाद लोगों में टीई के लक्षण दिखते हैं. ऐसे में मुमकिन है कि न्यूयॉर्क में बड़े स्तर पर कोरोना फैलने से लोगों को भीषण तनाव हुआ हो, जिसके तीन महीने बाद बाल गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई. sabhar : dw.de
शुक्रवार, 8 जनवरी 2021
wordmedia.in: होमी जहांगीर भाभा की भविष्यवाणी क्या ब्रिटेन में स...
0
जनवरी 08, 2021 in
wordmedia.in: होमी जहांगीर भाभा की भविष्यवाणी क्या ब्रिटेन में स...: ब्रिटेन ने 2040 तक फ्यूज़न रिएक्टर वाला व्यावसायिक बिजलीघर बनाने का एलान किया है. क्या यह मुमकिन है?न्यूक्लियर फ्यूज़न (संलयन) का विज्ञान 19...
गुरुवार, 7 जनवरी 2021
कोरोना वैक्सीन के हैं ये साइड इफेक्ट सुरक्षित टीका क्या होता है
0
जनवरी 07, 2021 in कोरोना, क्या होता है, टीका, वैक्सीन के हैं ये साइड इफेक्ट सुरक्षित
कोरोना की वैक्सीन जितनी जल्दबाजी में बनी हैं, उसे देखते हुए कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि इसे लेना ठीक भी रहेगा या नहीं. जानिए कौन सी कंपनी की वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट हैं ताकि आपके सभी शक दूर हो जाएं.कोई भी टीका लगने के बाद त्वचा का लाल होना, टीके वाली जगह पर सूजन और कुछ वक्त तक इंजेक्शन का दर्द होना आम बात है. कुछ लोगों को पहले तीन दिनों में थकान, बुखार और सिरदर्द भी होता है. इसका मतलब होता है कि टीका अपना काम कर रहा है और शरीर ने बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी बनाना शुरू कर दिया है.
बड़े साइड इफेक्ट का खतरा?
अब तक जिन जिन टीकों को अनुमति मिली है, परीक्षणों में उनमें से किसी में भी बड़े साइड इफेक्ट नहीं मिले हैं. यूरोप की यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए), अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) और विश्व स्वास्थ्य संगठन तीनों ने इन्हें अनुमति दी है. एक दो मामलों में लोगों को वैक्सीन से एलर्जी होने के मामले सामने आए थे लेकिन परीक्षण में हिस्सा लेने वाले बाकी लोगों में ऐसा नहीं देखा गया
बायोनटेक फाइजर
जर्मनी और अमेरिका ने मिलकर जो टीका बनाया है वह बाकी टीकों से अलग है. वह एमआरएनए का इस्तेमाल करता है यानी इसमें कीटाणु नहीं बल्कि उसका सिर्फ एक जेनेटिक कोड है. यह टीका अब कई लोगों को लग चुका है. अमेरिका में एक और ब्रिटेन में दो लोगों को इससे काफी एलर्जी हुई. इसके बाद ब्रिटेन की राष्ट्रीय दवा एजेंसी एमएचआरए ने चेतावनी दी कि जिन लोगों को किसी भी टीके से जरा भी एलर्जी रही हो, वे इसे ना लगवाएं
सुरक्षित टीका क्या होता है?
जर्मनी में कोरोना पर नजर रखने वाले रॉबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट की वैक्सीनेशन कमिटी के सदस्य के सदस्य क्रिस्टियान बोगडान बताते हैं कि किसी टीके से अगर एक वृद्ध व्यक्ति की उम्र 20 प्रतिशत घटती है लेकिन साथ ही अगर 50 हजार में से सिर्फ एक व्यक्ति को उससे एलर्जी होती है, तो वे ऐसे टीके को सुरक्षित मानेंगे. उनके अनुसार यूरोप में इसी पैमाने पर टीकों को अनुमति दी जा रही है. sabhar : dw.de
मंगलवार, 5 जनवरी 2021
कोरोना थमा नहीं, बर्ड फ्लू की नई आफ़त आ गई
0
जनवरी 05, 2021 in की नई आफ़त आ गई, कोरोना, थमा नहीं, बर्ड फ्लू
कोरोना की मुसीबत अभी बनी हुई ही थी कि भारत में एक और संकट खड़ा होता दिख रहा है.देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू फैलने की ख़बरें आ रही हैं.मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में बड़ी तादाद में पक्षियों की मौत अचानक से हुई है.सोमवार को केरल, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान ने इस बात की पुष्टि कर दी कि उनके यहां बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत की वजह बर्ड फ्लू है.केरल के कोच्चि में एक महिला मरे हुए बत्तखों के साथ, इन बत्तखों की मौत एच5एन8 बर्ड फ्लू से हुई है sabhar :bbc.co.uk
एंटी-बायोटिक्स आख़िर कब, क्यों और कैसे बेअसर होने लगे : दुनिया जहान
0
जनवरी 05, 2021 in एंटी-बायोटिक्स, एंटी-बायोटिक्स आख़िर, कब, क्यों और कैसे, दुनिया जहान
बैक्टीरिया के मामूली इंफेक्शन से हमारा शरीर अपने इम्यून सिस्टम के दम पर निपट लेता है. लेकिन जब इम्यून सिस्टम का ही दम निकल जाता है तो बैक्टीरिया से लड़ने और उसे हराने के लिए लिए एंटी-बायोटिक्स की ज़रूरत होती है.लेकिन धीरे-धीरे कई वर्षों में हुआ ये कि हमने-आपने जाने-अनजाने इतनी अधिक एंटी-बायोटिक्स ले ली है कि बैक्टीरिया को भी एंटी-बायोटिक्स की एक तरह से आदत हो गई है और नतीजा ये हुआ कि एंटी-बायोटिक्स, बैक्टीरिया पर बेअसर नज़र आने लगीं.तो इस हफ्ते, दुनिया जहान में हम ये सवाल पूछ रहे हैं कि एंटी-बायोटिक्स आख़िर कब, क्यों और कैसे बेअसर होने लगे और ये नौबत क्यों आई.एंटी-बायोटिक्स वो दवाएं हैं जो हमारे शरीर में बैक्टीरिया की वजह से होने वाले इंफेक्शन को रोकने में मदद करती हैं.
sabhar :https://www.bbc.com
रविवार, 3 जनवरी 2021
भूख से लड़ने वाला योद्धा -डा नारमन इ बोरलाग
0
जनवरी 03, 2021 in डा नारमन इ बोरलाग, भूख, से लड़ने वाला योद्धा -
डा नारमन इ बोरलाग एक ऐसे ब्यक्ति का नाम है जो जीवन पर्यंत मानव जाती के लिए भूख से लड़ता रहा इस ऋषि को भारत सहित दुनिया के अनेक देश के लोग इन्हें हरित क्रांती का जनक कहते है २० वी सदी की इस क्रांति ने तीसरी दुनिया की करीब एक अरब कुपोषित आबादी को दो जून की रोटी उपलब्ध कराई डा बोरलाग को इस कार्य हेतु १९७० में नोबेल विश्व शांति पुरस्कार दिया गया इस वैज्ञानिक को भारत का अन्नदाता भी कहा जाता है और दुनिया इन्हें प्यार से प्रो व्हीट कहती है इनका जन्म २५ मार्च १९१४ को हुआ १९३९ इन्होने विश्विद्यालय से बी एसी करने के बाद १९४२ में पी यच डी की डिग्री प्राप्त करने के बाद १९४४ में मेक्सिको में गेहूं शोध से जुड़े उस समय गेहूं की उत्पादकता बहूत कम थी पुरे विश्व में लगभग आकाल की स्थिति थी परन्तु इस वैज्ञानिक ने हार न मानते हुए गेहूं के मोटे और छोटे ताने के विकाश के लिए १९५३ में नोरिन -१० नामक गेहूं की एक जापानी किस्म को अधिक उपजाऊ अमेरिकी किस्म बेबर -१४ से संकरण कराया इस प्रकार लगभग तीन गुना अधिक उत्पादन वाली जातीय प्राप्त हुयी जिससे भारत सहित अन्य विकाश शील देशो में खाद्य समस्या हल हुई हम इस ऋषि केआभारी रहेंगे रहेंगे
शुक्रवार, 1 जनवरी 2021
बिना चीरे के होगी मस्तिष्क की सर्जरी
0
जनवरी 01, 2021 in बिना चीरे के होगी मस्तिष्क की सर्जरी
मस्तिष्क की सर्जरी के लिए अब डाक्टरों को चीरा लगाने की जरूरत नहीं होगी वैज्ञानिको ने कहा गामा नाइफ नामक उपकरण से विना चीरा लगाये मस्तिष्क की सर्जरी की जा सकती है वैज्ञानिको का दावा है की वे अब बिना चीर फाड़ किये मस्तिष्क कैंसर से पीड़ित मरीजो के मस्तिष्क की नेयुरोलाजिकल सर्जरी कर सकते है सिडनी स्थित मैक्वायर विश्व विद्यालय अस्पताल ने गामा नाइफ का उपयोग कर पहली बार सर्जरी की यह उपकरण मस्तिष्क कैंसर और मस्तिष्क सम्बंधित कई बीमारियों के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है न्यूरो सर्जन डा जान फ्यूलर ने कहा गामा नाइफ से सर्जरी अपने आप में पहली सरजरी है और बताया की इलाज के दौरान मरीज होश में था इसमे हेलमेट नुमा उपकरण मरीज के सर पर पहना कर कोबाल्ट -६० स्रोतों के विकिरण पुंज को मस्तिष्क के भीतरी लछ्य पर डाला जाता है इसका अविष्कार स्वीडन के लार्स लेक्सेल ने १९६७ में किया था
लेज़र किरणों की सहायता से जल संघनन विधि से बारिश पर नियंत्रण
0
जनवरी 01, 2021 in किरणों, की सहायता से जल संघनन, लेज़र, विधि से बारिश पर नियंत्रण
Ads
-
वैज्ञानिकों को इंडोनेशियाई वर्षावन के अंदरूनी हिस्सों में एक ऐसा मेंढक मिला है जो अंडे देने के बजाय सीधे बच्चे को जन्म देता है. एशिया ...
-
वैज्ञानिकों ने अलग-अलग लोगों के चेहरों में अंतर पाए जाने के कारणों को समझने में आरंभिक सफलता प्राप्त कर ली है. चूहों पर हुए अध्ययन में ...
-
अमेरिका के लास वेगास को आलीशान होटलों और कसीनो के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक मेला भी लगता है. इस बार इस मे...
-
photo : vigyanpragti वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग्स का कहना है की ब्रह्माण्ड की संग्रचना के पीछे भौतिक के नियम है न कि कोई ईश्वरीय सरी...
-
भौतिक वैज्ञानिक तथा लेखक पाल डेवीस के अनुसार “ समय ” आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है। समय की प्रकृति से जुड़े अनेक अनसुलझे प्रश्न है। ...
-
लंदन: वैज्ञानिकों ने पौधे के संवहन तंत्र में सर्किट लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक पौधे का निर्माण किया है। इससे विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की ...
-
मुख्य रूप से वीडियो देखने और मनोरंजन का साधन मानी जाने वाली यूट्यूब वेबसाइट का इस्तेमाल अब शिक्षा के प्रचार प्रसार में भी हो रहा है. ख...