टेलीपैथी और सम्मोहन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

टेलीपैथी के लिए चित्र परिणाम    

टैलीपैथी  क्या  है हमारे  पुराणों  में वर्णित  है की देवता लोग  आपस  में बातचीत  बिना कुछ  कहे  कर लेते थे |  और  वो  सोचते थे  तो  दूसरे  लोगो  के पास  सन्देश  पहुंच  जाता था ,धर्म और विज्ञान ने दुनिया के कई तरह के रहस्यों से पर्दा उठाया है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस युग में अब सब कुछ संभव होने लगा है। मानव का ज्ञान पहले की अपेक्षा बढ़ा है। लेकिन इस ज्ञान के बावजूद व्यक्ति की सोच अभी भी मध्ययुगीन ही है। वह इतना ज्ञान होने के बावजूद भी मूर्ख, क्रूर, हिंसक और मूढ़ बना हुआ है।
खैर, आज हम विज्ञान की मदद से हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसी व्यक्ति से मोबाइल, इंटरनेट या वीडियो कालिंग के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन प्राचीन काल में ऐसा संभव नहीं था तो वे कैसे एक दूसरे से संपर्क पर पाते थे? मान लीजिये आप समुद्र, जंगल या रेगिस्तान में भटक गए हैं और आपके पास सेटेलाइट फोन है भी तो उसकी बैटरी डिस्चार्च हो गई है ऐसे में आप कैसे लोगों से संपर्क कर सकते हैं?
दरअसल, बगैर किसी उपकरण की मदद से लोगों से संपर्क करने की कला को ही टेलीपैथी कहते हैं। जरूरी नहीं कि हम किसी से संपर्क करें। हम दूरस्थ बैठे किसी भी व्यक्ति की वार्ता को सुन सकते हैं, देख सकते हैं और उसकी स्थिति को जान सकते हैं। इसीलिये टेलीपैथी को हिन्दी में दूरानुभूति कहते हैं। टेलीपैथी शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल 1882 में फैड्रिक डब्लू एच मायर्स ने किया था। कहते हैं कि जिस व्यक्ति में यह छठी ज्ञानेंद्रिय होती है वह जान लेता है कि दूसरों के मन में क्या चल रहा है। यह परामनोविज्ञान का विषय है जिसमें टेलीपैथी के कई प्रकार बताए जाते हैं।
'टेली' शब्द से ही टेलीफोन, टेलीविजन आदि शब्द बने हैं। ये सभी दूर के संदेश और चित्र को पकड़ने वाले यंत्र हैं। आदमी के मस्तिष्क में भी इस तरह की क्षमता होती है। कोई व्यक्ति जब किसी के मन की बात जान ले या दूर घट रही घटना को पकड़कर उसका वर्णन कर दे तो उसे पारेंद्रिय ज्ञान से संपन्न व्यक्ति कहा जाता है। महाभारतकाल में संजय के पास यह क्षमता थी। उन्होंने दूर चल रहे युद्ध का वर्णन धृतराष्ट्र को कह सुनाया था।
भविष्य का आभास कर लेना भी टेलीपैथिक विद्या के अंतर्गत ही आता है। किसी को देखकर उसके मन की बात भांप लेने की शक्ति हासिल करना तो बहुत ही आसान है। चित्त को स्थित कर ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।
दरअसल टेलीपैथी दो व्यक्तियों के बीच विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान को भी कहते हैं। इस विद्या में हमारी पांच ज्ञानेंद्रियों का इस्तेमाल नहीं होता, यानी इसमें देखने, सुनने, सूंघने, छूने और चखने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह हमारे मन और मस्तिष्क की शक्ति होती है। 

टेलीपैथी सिखने के सामान्यत: तीन तरीके हैं:
पहला : ध्यान द्वारा
दूसरा : योग द्वारा
तीसरा : आधुनिक तकनीक
ध्यान द्वारा : लगातार ध्यान करते रहने से चित्त स्थिर होने लगता है। चित्त के स्थिर और शांति होने से साक्षीभाव घटित होता है। यह संवेदनशिल अवस्था टेलीपैथी के लिये जरूरी होती है। ध्यानसंपन्न व्यक्ति किसी के भी मन की बात समझ सकता है। कितने ही दूर बैठे व्यक्ति की स्थिति और वार्तालाप का वर्णन कर सकता है।
योग द्वारा : योग में मन: शक्ति योग के द्वारा इस शक्ति हो हासिल किया जा सकता है। ज्ञान की स्थिति में संयम होने पर दूसरे के चित्त का ज्ञान होता है। यदि चित्त शांत है तो दूसरे के मन का हाल जानने की शक्ति हासिल हो जाएगी। योग में त्राटक विद्या, प्राण विद्या के माध्यम से भी आप यह विद्या सिख सकते हैं।
अगले पन्ने पर आधुनिक तरीका...
टेलीपैथी का आधुनिक तरीका : तरीके भले ही आधुनिक हो लेकिन इसके सर्वप्रथम आपको ध्यान का अभ्यास तो करना ही होगा तभी यह तरीका कारगर सिद्ध होगा। टेलीपैथी उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके जरिए बिना किसी भौतिक माध्यम की सहायता के एक इंसान दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क को पढ़ने अथवा उसे अपने विचारों से अवगत कराने में कामयाब होता है।
आधुनिक तरीके के अनुसार ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है। इस विद्या में सम्मोहन का भी सहरा लिया जाता है। सम्मोहन के माध्यम से हम अपने चेतन मन को सुलाकर अवचेतन मन को जाग्रत करते हैं और फिर इस अवचेतन मन के माध्यम से हम दूसरे व्यक्ति के मन बात, विचार आदि पढ़ लेते हैं और यदि वह हजारों किलोमीटर भी बैठा है तो इस मन के माध्यम से व्यक्ति को वह उसके सामने ही नजर आता है।
अगले पन्ने पर क्या होता है अवचेतन मन...
चेतन मन और अचेतन मन : हमारे मन की मुख्यतः दो अवस्थाएं (कई स्तर) होती हैं-
चेतन मन और 2. अवचेतन मन (आदिम आत्मचेतन मन): सम्मोहन के दौरान अवचेतन मन को जाग्रत किया जाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति की शक्ति बढ़ जाती है लेकिन उसका उसे आभास नहीं होता, क्योंकि उस वक्त वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों का ही पालन कर रहा होता है।
1. चेतन मन : इसे जाग्रत मन भी मान सकते हैं। चेतन मन में रहकर ही हम दैनिक कार्यों को निपटाते हैं अर्थात खुली आंखों से हम कार्य करते हैं। विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क का वह भाग जिसमें होने वाली क्रियाओं की जानकारी हमें होती है। यह वस्तुनिष्ठ एवं तर्क पर आधारित होता है।
2. अवचेतन मन : जो मन सपने देख रहा है वह अवचेतन मन है। इसे अर्धचेतन मन भी कहते हैं। गहरी सुसुप्ति अवस्था में भी यह मन जाग्रत रहता है। विज्ञान के अनुसार जाग्रत मस्तिष्क के परे मस्तिष्क का हिस्सा अवचेतन मन होता है। हमें इसकी जानकारी नहीं होती।
अगले पन्ने पर जानिये अवचेतन मन की शक्ति क्या है...
अवचेतन मन की शक्ति : हमारा अवचेतन मन चेतन मन की अपेक्षा अधिक याद रखता है एवं सुझावों को ग्रहण करता है। आदिम आत्मचेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है।
यह मन हमें आने वाले खतरे या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। इसे आप छठी इंद्री भी कह सकते हैं। यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन 6 माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास भी करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त मन की सुनी-अनसुनी कर देते हैं। उक्त मन को साधना ही सम्मोहन है।
अवचेतन को साधने का असर : सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को देखना और दूरस्थ दृश्यों को जाना जा सकता है। इसके सधने से व्यक्ति को बीमारी या रोग के होने का पूर्वाभास हो जाता है।
कैसे साधें इस अवचेतन मन को, जानिये तरीका...
कैसे साधें इस मन को :
पहला तरीका : वैसे इस मन को साधने के बहुत से तरीके या विधियां हैं, लेकिन सीधा रास्ता है कि प्राणायाम से सीधे प्रत्याहार और प्रत्याहार से धारणा को साधें। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव करने लगेंगे जिसको आम इंसान अनुभव नहीं कर सकता। इसको साधने के लिए त्राटक भी कर सकते हैं। त्राटक भी कई प्रकार से किया जाता है। ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है।
दूसरा तरीका : शवासन में लेट जाएं और आंखें बंद कर ध्यान करें। लगातार इसका अभ्यास करें और योग निद्रा में जाने का प्रयास करें। योग निद्रा अर्थात शरीर और चेतन मन इस अवस्था में सो जाता है लेकिन अवचेतन मन जाग्रत रहता है। समझाने के लिए कहना होगा कि शरीर और मन सो जाता है लेकिन आप जागे रहते हैं। यह जाग्रत अवस्था जब गहराने लगती है तो आप ईथर माध्‍यम से जुड़ जाते हैं और फिर खुद को निर्देश देकर कुछ भी करने की क्षमता रखते हैं।
तीसरा तरीका : कुछ लोग अंगूठे को आंखों की सीध में रखकर, तो कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलाते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं, लेकिन यह कितना सही है यह हम नहीं जानते।
अगले पन्ने पर चौथा तरीका जानिये..
चौथा तरीका कल्पना : कल्पना करें कि आप कोई बात किसी व्यक्ति को कहने के लिए सोचें और उस तक वह बात पहुंच जाए। बार बार कल्पना करें और अपनी बात को दोहराएं। दोहराने का यह अभ्यास जब गहराएगा तो उस व्यक्ति तक आपके मस्तिष्क की तरंगे पहुंचने लगेगी। यदि आप उसे यहां बुलाना चाहते हैं तो कल्पना में उसका चित्र देखकर उसके बुलाने का संदेश भेजें। धीरे धीरे जब यह प्रयोग कामयाब होने लगेगा तो आपका विश्वास भी बढ़ता जाएगा।
इसी तरह आप किसी भी व्यक्ति के होने की स्थिति की पहले कल्पना करते हैं जब वह कल्पना प्रगाड़ होने लगती है तब सही सूचना देने लगती है। कुछ भी बोलने से पहले दिमाग में कुछ तरंगें बनती हैं। जापानी वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने इसे डीकोड करना जान लिया है और उनके परिणाम 90 प्रतिशत तक सफल हैं। वैसे, उनका यह प्रयोग सिर्फ जापानी भाषा तक ही सीमित है। लेकिन आश्चर्य नहीं कि इस टेक्नोलॉजी का उपयोग दूसरी भाषाओं में भी संभव होगा।
ब्रेन कंप्यूटर विशेषज्ञ प्रो. यामाजाकी तोषिमासा के नेतृत्व में एक टीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना और संचार इंजीनियर इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित वर्कशॉप में इसका लाइव प्रदर्शन भी किया। उन्होंने साबित किया कि बोले जाने से दो सेकेंड पहले उनकी मशीन उस बात को समझ लेती है जो बोली जाने वाली है। यह टीम दिमाग के एक खास हिस्से की गतिविधियों पर काम कर रही है जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ब्रोका कहते हैं। यह हिस्सा भाषा प्रक्रिया और बोलने से संबंधित है।
विचारों से बनता भविष्य : भगवान बुद्ध कहते हैं कि आज आप जो भी हैं, वह आपके पिछले विचारों का परिणाम है। विचार ही वस्तु बन जाते हैं। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही भविष्य का निर्माण करते हैं। यही बात 'दि सीक्रेट' में भी कही गई है और यही बात धम्मपद, गीता, जिनसूत्र और योगसूत्र में कही गई है। इसे आज का विज्ञान आकर्षण का नियम कहता है।
संसार को हम पांचों इंद्रियों से ही जानते हैं और कोई दूसरा रास्ता नहीं। जो भी ग्रहण किया गया है, उसका मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उस प्रभाव से ही 'चित्त' निर्मित होता है और निरंतर परिवर्तित होने वाला होता है। इस चित्त को समझने से ही आपके जीवन का खेल आपको समझ में आने लगेगा। अधिकतर लोग अब इसे समझकर अच्‍छे स्थान, माहौल और लोगों के बीच रहने लगे हैं। वे अपनी सोच को बदलने के लिए ध्यान या पॉजिटिव मोटिवेशन की क्लासेस भी जाने लगे हैं।
वैज्ञानिक कहते हैं कि मानव मस्तिष्क में 24 घंटे में लगभग 60 हजार विचार आते हैं। उनमें से ज्यादातर नकारात्मक होते हैं। नकारात्मक विचारों का पलड़ा भारी है तो फिर भविष्य भी वैसा ही होगा और यदि मिश्रित विचार हैं तो मिश्रित भविष्य होगा। अधिकतर लोग नकारात्मक फिल्में, सीरियल और गाने देखते रहते हैं इससे उनका मन और मस्तिष्क वैसा ही निर्मित हो जाता है। वे गंदे या जासूसी उपन्यास पढ़कर भी वैसा ही सोचने लगते हैं। आजकल तो इंटरनेट हैं, जहां हर तरह की नकारात्मक चीजें ढूंढी जा सकती हैं। न्यूज चैनल दिनभर नकारात्मक खबरें ही दिखाते रहते हैं जिन्हें देखकर सामूहिक रूप से समाज का मन और मस्तिष्क खराब होता रहता है।
जैसी मति वैसी गति : 3 अवस्थाएं हैं- जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति। उक्त 3 तरह की अवस्थाओं के अलावा हमने और किसी प्रकार की अवस्था को नहीं जाना है। जगत 3 स्तरों वाला है- एक स्थूल जगत जिसकी अनुभूति जाग्रत अवस्था में होती है। दूसरा, सूक्ष्म जगत जिसका स्वप्न में अनुभव करते हैं तथा तीसरा, कारण जगत जिसकी अनुभूति सुषुप्ति में होती है।
उक्त तीनों अवस्थाओं में विचार और भाव निरंतर चलते रहते हैं। जो विचार धीरे-धीरे जाने-अनजाने दृढ़ होने लगते हैं वे धारणा का रूप धर लेते हैं। चित्त के लिए अभी कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन मान लीजिए कि आपका मन ही आपके लिए जिन्न बन जाता है और वह आपके बस में नहीं है, तब आप क्या करेंगे? धारणा बन गए विचार ही आपके स्वप्न का हिस्सा बन जाते हैं। आप जानते ही हैं कि स्वप्न तो स्वप्न ही होते हैं उनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं फिर भी आप वहां उस काल्पनिक दुनिया में उपस्थित होते हैं।
इसी तरह बचपन में यदि यह सीखा है कि आत्मा मरने के बाद स्वर्ग या नर्क जाती है और आज भी आप यही मानते हैं तो आप निश्‍चित ही एक काल्पनिक स्वर्ग या नर्क में पहुंच जाएंगे। यदि आपके मन में यह धारणा बैठ गई है कि मरने के बाद व्यक्ति कब्र में ही लेटा रहता है तो आपके साथ वैसा ही होगा। हर धर्म आपको एक अलग धारणा से ग्रसित कर देता है। हालांकि यह तो एक उदाहरण भर है। धर्म आपके चित्त को एक जगह बांधने के लिए निरंतर कुछ पढ़ने या प्रार्थना करने के लिए कहता है।
वैज्ञानिकों ने आपके मस्तिष्क की सोच, कल्पना और आपके स्वप्न पर कई तरह के प्रयोग करके जाना है कि आप हजारों तरह की झूठी धारणाओं, भय, आशंकाओं आदि से ग्रसित रहते हैं, जो कि आपके जीवन के लिए जहर की तरह कार्य करते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि भय के कारण नकारात्मक विचार बहुत तेजी से मस्तिष्क में घर बना लेते हैं और फिर इनको निकालना बहुत ही मुश्किल होता है 

साभार  डेलीहंट 
सम्मोहन (Hypnosis) वह कला है जिसके द्वारा मनुष्य उस अर्धचेतनावस्था में लाया जा सकता है जो समाधि, या स्वप्नावस्था, से मिलती-जुलती होती है, किंतु सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता है तथा जाग्रतावस्था में उसके लिए जो कुछ संभव है, वह सब कुछ कर सकता है, किंतु यह सब कार्य वह सम्मोहनकर्ता के सुझाव पर करता है।कभी कभी यह सम्मोहन बिना किसी सुझाव के भी काम करता है और केवल लिखाई और पढ़ाई में भी काम करता है जैसे के फलाने मर्ज की दवा यहाँ मिलती है इस प्रकार के हिप्नोसिस का प्रयोग भारत में ज्यादा होता है
 विकिपीडिया से
सम्मोहन  विद्या  भारत की  प्राचीनतम  और सर्वश्रेष्ठ  विद्या है  इसे  त्रिकाल विद्या के  नाम से  जाना जाता है | दरअसल यौगिक क्रियाओं का उद्देश्य मन को पूर्ण रूप से एकाग्र करके समाधि में लीन कर देना है और इस लीन करने की शक्ति का जो अंश प्राप्त होता है, उसी को सम्मोहन कहते हैं। सम्मोहन की शक्ति प्राप्त करने के.अनेक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं।  ..

सम्मोहन का अर्थ आमतौर पर वशीकरण से लगाया जाता है। वशीकरण अर्थात किसी को वश में करने की विद्या, ‍ज‍बकि यह सम्मोहन की प्रतिष्ठा को गिराने वाली बात है। मन के कई स्तर होते हैं। उनमें से एक है आदिम आत्म..चेतन मन। आदिम आत्म चेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है। यह मन हमें आने वाले खतरे या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। इसे आप छटी...यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन छह माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त..क्या होगा इस मन को साधने से :
यह मन आपकी हर तरह की मदद करने के लिए तैयार है, बशर्ते आप इसके प्रति समर्पित हों। यह किसी के भी अतीत और भविष्य को जानने की क्षमता रखता है। आपके साथ घटने वाली घटनाओं  को टालने के उपाय खोज लेंगे। आप स्वयं की ही नहीं दूसरों की बीमारी दूर करने की क्षमता भी हासिल कर सकते हैं।  सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को.कैसे साधें इस मन को :
प्राणायम से साधे प्रत्याहार को और प्रत्याहार से धारणा को। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव... ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। त्राटक उपासना को हठयोग में दिव्य साधना से संबोधित किया गया है। आप उक्त साधना के बारे में जानकारी प्राप्त कर किसी योग्य.. नियमित सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योगनिंद्रा करते हुए ध्यान करें। ध्यान में विपश्यना और नादब्रह्म का उपयोग करें। प्रत्याहार का पालन करते हुए धारणा को साधने का प्रयास करें। संकल्प के प्रबल होने से..धारणा को साधने में आसानी होगी है। संकल्प सधता है अभ्यास के महत्व को समझने से। इसके संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए मिलें किसी योग्य योग शिक्षक या सम्मोहनविद से।  
स्रोत.webdunia.com

फेसबुक ला रहा है नई तकनीक, दिमाग जो सोचेगा वही टाइप हो जाएगा

नई दिल्ली: फेसबुक इन दिनों एक नए तरीके की तकनीक पर काम कर रही है, जिसमें फेसबुक पर लिखने से आपको निजात मिल जाएगी. इस तकनीक में आप जो सोचेंगे वही टाइप होना शुरू हो जाएगा. फेसबुक इंक ने अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के पूर्व प्रमुख के नेतृत्व में चलाए गए गोपनीय प्रोजेक्ट से पर्दा हटाते हुए बताया कि कंपनी अब विचार व स्पर्श द्वारा संचार की दिशा में शोध कर रही है. 
हाल ही में लॉन्च बिल्डिंग-8 शोध तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फेसबुक द्वारा ब्रेन सेंसिंग पर काम किया जा रहा है.
इसके तहत फेसबुक इस्तेमाल करने वालों को टाइपिंग के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी और वह दिमाग में जो सोचेगा वही टाइप हो जाएगा.
पेंटागन की डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजंसी (डीएआरपीए) के पूर्व निदेशक व फेसबुक की हेड ऑफ सीक्रेटिव बिल्डिंग-8 के उपाध्यक्ष रेजिना डुगन ने कंपनी के एफ-8 सम्मेलन में कहा कि हम बिल्डिंग-8 पर काम कर रहे हैं. 
उन्होंने कहा, 'भविष्य क्रांतिकारी तकनीकी से भरा हुआ है, जो बिना टाइपिंग के हमें लोगों से संवाद करने योग्य बनाएगी.'    
इस शोध पर फेसबुक में 60 लोगों की टीम काम कर रही है.
sabhar : zeenews.com 

नया स्मार्ट चश्मा, एक ही लैंस करेगा विभिन्न लैंसों का काम

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने ऐसे स्मार्ट ग्लासेस (चश्मा) विकसित किए हैं जिनके लैंस तरल आधारित हैं और उनका लचीलापन हर उस वस्तु पर फोकस करने में मदद करेगा जिसे भी ग्लासेस पहनने वाला व्यक्ति देख रहा होगा.यूटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इन ग्लासेस को कुछ इस तरह विकसित किया गया कि वह आंख की प्राकृतिक पुतली की तरह काम करेंगे यानी वह हर उस वस्तु पर फोकस कर सकेंगे जिसे भी व्यक्ति देख रहा है चाहे वह वस्तु दूर की हो या फिर पास की. उम्र बढ़ने के साथ हमारी आंखों के लैंस कड़क होते जाते हैं और विभिन्न दूरी पर फोकस करने की अपनी क्षमता और लचीलापन खो देते हैं.
इसलिए चश्मा लगाने की जरूरत पड़ती है. लेकिन तब मुश्किल और बढ़ जाती है जब हम विभिन्न दूरी पर फोकस करने की क्षमता खो देते हैं और ऐसी स्थिति में हमें अलग-अलग दूरी पर देखने के लिए विभिन्न लैंसों की जरूरत पड़ती है.
नए विकसित चश्मों में ग्लिसरिन से बने लैंस होते हैं जिन्हें दो लचीली झिल्लियों के बीच रखा जाता है. इन लैंसों को फ्रेम में लगा दिया जाता है. ये झिल्लियां फोकस मिलाने के लिए मुड़ जाती हैं. लैंस का लचीलापन और मुड़ने की क्षमता के चलते एक ही लैंस बहुलैंस का काम कर सकता है. यह शोध ऑप्टिक्स एक्सप्रेस जर्नल में प्रकाशित हुआ.
ज़ी न्यूज़ डेस्क 

फेसबुक ऐसे बदल देगा आपके जीवन का सच

Facebook, one of the most popular searches of this century, has made it clear that its mission is to open the reality of reality.
The company wants that the gadgets which are already in the hands of people, can show them the world of reality reality and for that they do not have to wait for any high tech gear to be installed.
Introducing its annual developers conference in Silicon Valley, Facebook CEO Mark Zuckerberg said that the camera of smartphones is an early platform filled with reality. With this help, which can be adjusted to social media

Zuckerberg said, "I'm confident that we will now go ahead with this Augmented Reality platform." He predicted that this technique will be fitted in the eye glasses in the future. Zuckerberg told how to use digital plants, animals, masks and much more. Your browser's version of this program looks like People in Pokémon go show animated creatures in real surroundings of their surroundings In the words of Zuckerberg, "Augmented Reality will put real and digital in an entirely new way." So far, Facebook was focusing on developing Virtual Reality and developing it as a new computing platform. He is specially on the use of Rift Headgear, which makes Facebook's own Oculus Unit
Tools experts of Augmented Reality liked it but it will take time to reach the hands of their common users. Jackdow Research analyst Ian Dawson explains, "Facebook has come into the world of advanced realities and related technologies, now it seems that they are serious about it and will try to challenge applications like Snapchat."
Snapchat came with a feature Chat with a variety of animated characters such as masks on face also came with Snapchat. Snapchat inscribed "Paint the World Around You in 3D" right at the same time. In addition to jumping in the technology of Facebook, now in the reality of the big companies, there was a great deal of competition among the big companies. Sabhar: dw.de
RP / MJ (AFP)

Featured Post

हमारा विज्ञानऔर हमारी धरोहर

जब हमारे देश में बड़ी बड़ी  राइस मील नहीं थी तो धान को घर पर ही कूटकर भूसे को अलग कर चावल प्राप्त किया जाता था... असलियत में वही...