आदुनिक मानव के पूर्वज होमोसपेयांस को अपने विकाश काल में प्रकृति के प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा उसे भोजन जुटाने तथा जलवावुगत परिवर्तनों से बचने के लिए कदा संगर्ष करना पड़ा उससे हिंसक पशु उसके जान के दुश्मन बने हुए थे किन्तु इन सबके बिरुद्ध परिस्तितियो का सामना आदि मानव ने बड़े साहस के साथ किया
लघु दुर्गा सप्तशती
{{{ॐ}}} #लघु_दुर्गा_सप्तशती ॐ वींवींवीं वेणुहस्ते स्तुतिविधवटुके हां तथा तानमाता, स्वानंदेमंदरुपे अविहतनिरुते भक्तिदे मुक्तिदे त्वम् । हंसः सोहं विशाले वलयगतिहसे सिद्धिदे वाममार्गे, ह्रीं ह्रीं ह्रीं सिद्धलोके कष कष विपुले वीरभद्रे नमस्ते ।। १ ।। ॐ ह्रीं-कारं चोच्चरंती ममहरतु भयं चर्ममुंडे प्रचंडे, खांखांखां खड्गपाणे ध्रकध्रकध्रकिते उग्ररुपे स्वरुपे । हुंहुंहुं-कार-नादे गगन-भुवि तथा व्यापिनी व्योमरुपे, हंहंहं-कारनादे सुरगणनमिते राक्षसानां निहंत्रि ।। २ ।। ऐं लोके कीर्तयंती मम हरतु भयं चंडरुपे नमस्ते, घ्रां घ्रां घ्रां घोररुपे घघघघघटिते घर्घरे घोररावे । निर्मांसे काकजंघे घसित-नख-नखा-धूम्र-नेत्रे त्रिनेत्रे, हस्ताब्जे शूलमुंडे कलकुलकुकुले श्रीमहेशी नमस्ते ।। ३ ।। क्रीं क्रीं क्रीं ऐं कुमारी कुहकुहमखिले कोकिले, मानुरागे मुद्रासंज्ञत्रिरेखां कुरु कुरु सततं श्रीमहामारि गुह्ये । तेजोंगे सिद्धिन...
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