स्ट्रिंग थ्योरी भारतीय दर्शन के करीब

इस सिद्धांत के अनुसार सभी कण एक धागे रूपी रचना के रूप में है जिसे स्ट्रिंग कहते है यह अति छोटी इकाई है तथा फ्रीकवेंसी पे आधारित होती यह एक आयाम की संगरचना है इसकी एक निश्चित लम्बाई है यह गति के अतिरिक्त दोलन भी कर सकता है यदि यह दोलन करे तो हम जान नहीं सकते यह बिंदु है या रिंग यह किसी और तरीके से गति करे तो उसे फोटान कहा जाता है तीसरे तरीके से दोलन करने पे क्वार्क कहा जा सकता है यानी अलग अलग तरीके से गति करने पे सभी मुलभुत कणो की ब्याख्या कर सकता है यदि स्ट्रिंग सिद्धांत सही है तो समस्त ब्रमांड कणों से नहीं स्ट्रिंग से बना है डबल स्लेट एक्सपरिमेंट में यह सिद्ध किया जा चुका की स्ट्रिंग या इलेक्ट्रान देखने से प्रभावित होते है जब देखा जाता है तो बिंदु के रूप में दिखायी देते है और जब नहीं देखा जाता है तो वेब के रूप में ब्यवहार करते है भारतीय आधात्मिक दर्शन मन दृष्टि और स्वर पे आधारित मंत्रो का प्रयोग करके सृष्टि या ब्रमांड में परिवर्तन किया जा सकता है नई सृष्टि को मन की कल्पना से बनाया जा सकता है इस प्रकार स्ट्रिंग सिद्धांत इसकी पुष्टि करता है की मंत्र इत्यादि के द्वारा कुछ भी किया जा सकता है

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