रूसी वैज्ञानिकों ने गम्भीर रोगों के इलाज के लिए दुनिया का पहला 'स्मार्ट' नैनोकण

रूसी वैज्ञानिकों ने गम्भीर रोगों के इलाज के लिए दुनिया का पहला 'स्मार्ट' नैनोकण

रूसी वैज्ञानिकों ने चिकित्सा के क्षेत्र में नैनोरोबोटों की खोज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये नैनोरोबोट शरीर मेंजैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उपयोग कर रोग का ठीक-ठीक निदान कर सकेंगे। इस नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके रोगों केनिदान और गम्भीर रोगों के उपचार के नए तरीकों की खोज की जा सकेगी।


प्रोख़रोफ़ सामान्य भौतिकी संस्थान, शेम्याकिन और अवचेन्निकोफ़ जैव-आर्गेनिक रसायन संस्थान तथा मास्को के भौतिकी तकनीकी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा मिलकर किए जा रहे इस अनुसन्धान की रिपोर्ट प्रमुख वैज्ञानिक पत्रिका ’नेचर नैनोटैक्नोलौजी’ में प्रकाशित हुई है।
अपने काम के बारे में बताते हुए वैज्ञानिकों ने लिखा है कि उनका यह अनुसन्धान जैवमोलेक्यूल की सहायता से बीमारी का पता लगाने के सिद्धान्त पर आधारित है। यदि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में तार्किक तत्त्वों की मदद से करेण्ट के द्वारा या वोल्टेज़ के द्वारा क्रिया की जाती है तो जैव रासायनिक प्रणालियों में कोई ऐसा निश्चित तत्त्व सामने आएगा जो जैविक प्रणालियों पर उपचारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। इस स्थिति में नैनोकणों की विशेष रूप से चयनित रचना बाहरी परत के माध्यम से कुछ निश्चित कार्यों को पूरा करेगी।
वैज्ञानिकों ने इन नैनोकणों को कैंसर कोशिकाओं के साथ लक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करके दिखाया। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस अतिरिक्त नियंत्रण के फलस्वरूप स्वस्थ ऊतकों और अंगों पर कम से कम प्रभाव डालते हुए कैंसर की कोशिकाओं का अधिक सटीक रूप से विनाश किया जा सकेगा।

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दिमाग़ की उत्तेजना दिल के लिए फायदेमंद!

मनुष्य का दिमाग

जेम्स गैलाघर
हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट

दिमाग़ के एक हिस्से की उत्तेजना दिल के लिए फायदेमंद हो सकती है.
'प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस' में प्रकाशित इस रिसर्च पेपर के अनुसार दिमाग़ का जो हिस्सा शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है, उसके उत्तेजित होने से दिल का दौरा पड़ने के बाद मरीज़ की हालत सुधर सकती है.

'द स्ट्रोक एसोसिएशन' ने कहा है कि रिसर्च से दिलचस्प नतीजे निकले हैं. देखा गया है कि दिल के दौरे से लोगों की याद्दाश्त चली जाती है, उनकी गतिविधियों और बातचीत करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.अध्ययन में चूहे के दिमाग़ पर तेज़ रोशनी डाली गई. ये चूहे उन जानवरों की तुलना में तेजी से दौड़ने लगे जिन पर यह प्रयोग नहीं आज़माया गया था.
ख़ून के थक्के से दिमाग़ की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और शुगर की आपूर्ति बंद हो जाती है और वे कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं. स्ट्रोक होने की सूरत में नुक़सान कम हो इसके लिए जल्द से जल्द इलाज ज़रूरी होता है.

उत्तेजना

मनुष्य का दिमाग
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की रिसर्च टीम ने जानवरों पर परीक्षण करके इस बात का पता लगाने की कोशिश की कि क्या दिमाग़ को उत्तेजित करने से उनके दिल में कोई सुधार आता है या नहीं.
शोधकर्ताओं को ये विश्वास है कि उत्तेजना से होने वाला असर इस बात पर निर्भर करेगा कि दौरा पड़ने के बाद दिमाग़ में कितने अंदरूनी बदलाव होते हैं. उन्होंने मस्तिष्क की कोशिकाओं को जोड़ने वाले तरल पदार्थ का स्तर बढ़ा हुआ पाया.
रिसर्च टीम के लीडर प्रोफेसर गैरी स्टीनबर्ग ने कहा है कि दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में मरीज के दिमाग की कोशिकाओं को बचाने के लिए दवा का चुनाव एक चुनौती था. sabhar :http://.bbc.co.uk/

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