Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Comments

You might like

Subscribe Us

बुधवार, 3 मई 2017

नया स्मार्ट चश्मा, एक ही लैंस करेगा विभिन्न लैंसों का काम

0

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने ऐसे स्मार्ट ग्लासेस (चश्मा) विकसित किए हैं जिनके लैंस तरल आधारित हैं और उनका लचीलापन हर उस वस्तु पर फोकस करने में मदद करेगा जिसे भी ग्लासेस पहनने वाला व्यक्ति देख रहा होगा.यूटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इन ग्लासेस को कुछ इस तरह विकसित किया गया कि वह आंख की प्राकृतिक पुतली की तरह काम करेंगे यानी वह हर उस वस्तु पर फोकस कर सकेंगे जिसे भी व्यक्ति देख रहा है चाहे वह वस्तु दूर की हो या फिर पास की. उम्र बढ़ने के साथ हमारी आंखों के लैंस कड़क होते जाते हैं और विभिन्न दूरी पर फोकस करने की अपनी क्षमता और लचीलापन खो देते हैं.
इसलिए चश्मा लगाने की जरूरत पड़ती है. लेकिन तब मुश्किल और बढ़ जाती है जब हम विभिन्न दूरी पर फोकस करने की क्षमता खो देते हैं और ऐसी स्थिति में हमें अलग-अलग दूरी पर देखने के लिए विभिन्न लैंसों की जरूरत पड़ती है.
नए विकसित चश्मों में ग्लिसरिन से बने लैंस होते हैं जिन्हें दो लचीली झिल्लियों के बीच रखा जाता है. इन लैंसों को फ्रेम में लगा दिया जाता है. ये झिल्लियां फोकस मिलाने के लिए मुड़ जाती हैं. लैंस का लचीलापन और मुड़ने की क्षमता के चलते एक ही लैंस बहुलैंस का काम कर सकता है. यह शोध ऑप्टिक्स एक्सप्रेस जर्नल में प्रकाशित हुआ.
ज़ी न्यूज़ डेस्क 

Read more

सोमवार, 1 मई 2017

फेसबुक ऐसे बदल देगा आपके जीवन का सच

0

Facebook, one of the most popular searches of this century, has made it clear that its mission is to open the reality of reality.
The company wants that the gadgets which are already in the hands of people, can show them the world of reality reality and for that they do not have to wait for any high tech gear to be installed.
Introducing its annual developers conference in Silicon Valley, Facebook CEO Mark Zuckerberg said that the camera of smartphones is an early platform filled with reality. With this help, which can be adjusted to social media

Zuckerberg said, "I'm confident that we will now go ahead with this Augmented Reality platform." He predicted that this technique will be fitted in the eye glasses in the future. Zuckerberg told how to use digital plants, animals, masks and much more. Your browser's version of this program looks like People in Pokémon go show animated creatures in real surroundings of their surroundings In the words of Zuckerberg, "Augmented Reality will put real and digital in an entirely new way." So far, Facebook was focusing on developing Virtual Reality and developing it as a new computing platform. He is specially on the use of Rift Headgear, which makes Facebook's own Oculus Unit
Tools experts of Augmented Reality liked it but it will take time to reach the hands of their common users. Jackdow Research analyst Ian Dawson explains, "Facebook has come into the world of advanced realities and related technologies, now it seems that they are serious about it and will try to challenge applications like Snapchat."
Snapchat came with a feature Chat with a variety of animated characters such as masks on face also came with Snapchat. Snapchat inscribed "Paint the World Around You in 3D" right at the same time. In addition to jumping in the technology of Facebook, now in the reality of the big companies, there was a great deal of competition among the big companies. Sabhar: dw.de
RP / MJ (AFP)

Read more

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

परमात्मा और विज्ञान

1

मनुष्य की इच्छा सदियों से ये रही है की उसे वह सर्वशक्तिमान हो जाए वह प्रकृति पर विजय प्राप्त कर ले | इसके लिए वह परमात्मा और विज्ञान का सहारा लेता है | वह कौन है कहाँ से आया है कहा जायेगा मरने के बाद कहा जाएगा क्या मरने बाद भी अस्तित्व है समस्याएं क्यों आती है धीरे धीरे मनुष्य अपनी जिज्ञासा विज्ञान के माध्यम से जानना शुरू की ठीक यही जिज्ञासा मेरे मन में भी थी किया जो धर्म में बताया गया है किया वह कपोल कल्पित है या उनमे कुछ सच्चाई भी है इसके लिए मैंने एक ब्लॉग बहुत पहले शुरू किया था की मानव का विकास विज्ञान और अध्यात्म के द्वारा पर मैंने सोचा की पहले विज्ञान का अध्ययन किया जाये और उसके बाद इसे अध्यात्म की कसौटी पर रखा जाए इसके लिए मैंने विज्ञान इंडिया डॉट कॉम - अनंतवार्ता डॉट काम शुरू किया इस साइट पे आप को विज्ञान और अध्यात्म से जुडी रोचक जान कारी आप को मिलेगी अब बाते विज्ञान की करते है विज्ञान अवधारणाओं को नहीं मानता जब तक वह किसी तथ्य को कसौटी पर परख़ नहीं लेता तबतक मानता नहीं और सत्य भी जब तक आप किसी भी चीज को सामने नहीं देखेंगे तो आप ही नहीं मानेंगे तो क्या विभिन्या धर्मो में जो बताया गया है क्या वह असत्य है केवल कपोल कल्पना नहीं ऐसा नहीं है आध्यात्मिक बाते जो कही गयी है उसे आज विज्ञान भी सिद्द कर रहा है | इसके लिए हम आगे की पोस्टो में चर्चा करेंगे विज्ञान ईश्वर को नहीं मानता वो मानता है की पूरी प्रक्रिति एक मशीन है इसके सब कलपुर्जो को समझ लेंगे जिस प्रकार गाडी चलाते वैसे इसे भी ऑपरेट कर सकते है | और अध्यात्म कहता है की सब कुछ परमात्मा है सबके भीतर भी है और बहार भी है साकार भी है और निराकार भी है विज्ञान के तरफ यदि बड़े बड़े वैज्ञानिक है तो अध्यात्म की तरफ योगी सन्यासी और विचारक जो ये कहते है की सब कुछ परमात्मा की इच्छा पर है सृस्टि एक माया जब परमात्मा की इच्छा होती है तभी सृष्टि का सृजन , परमात्मा अनंत है उसकी इच्छा भी अनंत इसलिए सृष्टियाँ भी अनंत इस लिए कहा गया है की हरी अनंत हरी कथा अनंता अब विज्ञान भी अनंत सृस्टि की संभावना मान रहा है आगे की चर्चा अगली पोस्ट में

Read more

मंगलवार, 28 मार्च 2017

थ्री डी प्रिंट वाले शारीरिक अंगों के दौर में पहुंचा भारत

0

गुड़गांव: थ्री डी प्रिंट वाले शारीरिक अंग अब भारत में हकीकत का रूप ले चुके हैं और यह निश्चित रूप से देश के चिकित्सकीय परिदृश्य को बदलकर रख सकता है। एक स्कूल शिक्षिका के साहस ने भारत में एक ऐसी चिकित्सकीय क्रांति को जन्म दिया है, जिसपर ज्यादा लोगों का ध्यान ही नहीं गया। यह चिकित्सकीय क्रांति बरेली से गुड़गांव तक फैल गई है।
नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल के एक चिकित्सक ने कहा, ‘थ्री डी प्रिंटिंग एक ऐसा आगामी नवोन्मेष है, जो निजी जरूरत के अनुरूप उपचार देने की पेशकश करता है।’ इसी तकनीक को पूरे-पूरे अंग बदलने के लिए जीवित उतकों पर भी आजमाया जा रहा है लेकिन इसमें अभी वक्त लगेगा। जरा सोचिए कि आप अपने खुद के गुर्दे की एक प्रति निकालें और अपने खराब गुर्दे को बदलवा लें।
इस माह की शुरुआत में गुड़गांव स्थित मेदांता : द मेडिसिटी के युवा चिकित्सकों के एक दल ने एक महिला की खराब हो चुकी रीढ़ को बदलकर पहली बार थ्री डी प्रिंटेड टाइटेनियम इंप्लांट लगा दिया। इस सर्जरी ने महिला को एक नया जीवन दे दिया। सर्जरी के महज चार दिन बाद महिला चलने-फिरने लगी थी। चिकित्सकों का कहना है कि यदि सर्जरी के लिए पारंपरिक तरीके अपनाए गए होते तो उसे चलने में महीनों लग जाते।
मेदांता के संस्थापक डॉ नरेश त्रेहन ने कहा, ‘थ्री डी प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी ने जिंदगियां बचाने के लिए शरीर के अंगों के पुनर्निर्माण का एक नया आयाम खोल दिया है।’ पिछले माह 32 वर्षीय महिला के लिए चलना और बोलना बहुत मुश्किल हो गया था क्योंकि टीबी के कारण उनकी गर्दन की कशेरूक क्षतिग्रस्त होने लगी थी। रीढ़ की हड्डी में संकुचन शुरू होने पर वह अपनी टांगों के प्रति संवेदना खोने लगीं। इससे जीवन मुश्किल हो गया था।
भारत में अपनी तरह की इस पहली सर्जरी ने इस महिला में लगभग सामान्य जीवन बिता पाने की उम्मीद जगा दी है। तीन फरवरी को 10 घंटे तक सर्जरी करवाने वाली यह महिला अपनी पहचान नहीं बताना चाहती। उन्होंने कहा, ‘मैं अब ठीक हूं लेकिन पहले मुझे बहुत समस्या होती थी। मैं चल नहीं सकती थी। दर्द के कारण मैं रात को सो नहीं पाती थी, कुछ भी नहीं कर पाती थी। अब मैं बेहतर महसूस कर रही हूं।’
इस जटिल चिकित्सकीय समस्या के सामने आने पर 10 स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक दल ने पहली बार गर्दन में संक्रमित जोड़ को हटाकर अत्याधुनिक थ्री डी प्रिंटेड टाइटेनियम इंप्लांट लगाने का फैसला किया। इसका अन्य विकल्प यह रहता कि मरीज की ही टांग की एक हड्डी का इस्तेमाल किया जाता लेकिन चिकित्सकीय दल का कहना है कि इस स्थिति में मरीज को सर्जरी के बाद छह माह से अधिक समय तक बिस्तर पर ही रहना होता।
मेंदांता के प्रमुख सर्जन डॉ वी आनंद नाइक ने कहा, ‘हमने गर्दन से नीचे पक्षाघात का शिकार हो रही मरीज की क्षतिग्रस्त रीढ़ में थ्री डी प्रिंटेड कशेरूक लगाया। देश में ऐसा पहली बार किया गया और दुनिया में संभवत: यह तीसरी बार था।’ ऐसी एक सर्जरी पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में हुई थी और एक सर्जरी वर्ष 2015 में चीन में हुई थी।
एक्स-रे और उच्च विभेदन क्षमता वाले कैट-स्कैन का इस्तेमाल करके क्षतिग्रस्त रीढ़ का थ्री डी कंप्यूटर मॉडल बनाया गया। इसके बाद कंप्यूटर पर उचित डिजाइन तैयार किया गया और बरेली में इसे थ्रीडी प्रिंटर में भेजा गया। इस तरह मरीज के लिए टाइटेनियम इंप्लांट तैयार किया गया।
तीन सेमी लंबे इस धात्विक चिकित्सकीय उत्पाद में 154 ग्राम उच्च स्तरीय टाइटेनियम लगा है और इसकी कीमत एक लाख रूपए से कम है। लगभग पूरे दिन चली इस सर्जरी में इसे सिर और धड़ के बीच में लगाया गया और रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव से मरीज को राहत दिलाई गई।
मेदांता में इस थ्री डी इंप्लांट के प्रमुख डिजाइनर डॉ राहुल जैन ने कहा, ‘इस इंप्लांट को डिजाइन करना काफी मुश्किल था क्योंकि रीढ़ की संरचना जटिल है। टाइटेनियम के इंप्लांट पूरी तरह सुरक्षित हैं क्योंकि ये जैव अपघटनीय हैं और यह भी सुनिश्चित किया गया कि यह रीढ़ की हड्डी से टकराए नहीं।’
भाषा sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

रविवार, 29 नवंबर 2015

वैज्ञानिकों ने विकसित किया इलेक्ट्रॉनिक पौधा, विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत

0

लंदन: वैज्ञानिकों ने पौधे के संवहन तंत्र में सर्किट लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक पौधे का निर्माण किया है। इससे विज्ञान के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत हो सकती है।
//--> //-->
स्वीडन के लिकोंपिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के दल ने पौधों के अंदर लगाए गए तारों, डिजिटल लॉजिक और प्रदर्शनकारी तत्वों को दिखाया गया है, जो आर्गेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के नए अनुप्रयोगों और वनस्पति विज्ञान में नए उपकरण विकसित करने में मददगार हो सकते हैं।
उमीआ प्लांट साइंस सेंटर के निदेशक और प्लांट रिप्रोडक्शन बायलॉजी के प्रोफेसर ओव निल्सन ने कहा, इससे पहले वैज्ञानिकों के पास जीवित पौधे में विभिन्न अणुओं के सकेंद्रण को मापने के लिए कोई अच्छा उपकरण नहीं था, लेकिन इस शोध के बाद हम पौधों का विकास करने वाले उन विभिन्न पदार्थो की मात्रा को प्रभावित करने में सक्षम हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा, पौधों में रासायनिक मार्गो पर नियंत्रण से प्रकाश संश्लेषण आधारित ईंधन सेल, सेंसर्स (ज्ञानेंद्रियों) और वृद्धि नियामकों के लिए रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही ऐसे उपकरण भी तैयार किए जा सकते हैं, जो पौधों की आंतरिक क्रियाओं को व्यवस्थित कर सकें।
उन्होंने कहा, यह सफलता वनस्पति विज्ञान और ऑर्गेनिक साइंस के विविध क्षेत्रों के विलय की ओर पहला कदम है। हमारा उद्देश्य उर्जा की मदद से पर्यावरण और वनस्पति विज्ञान के नए रास्तों को खोजना है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

घर बैठे चला रहे हैं अपना 'चैनल'

0



मुख्य रूप से वीडियो देखने और मनोरंजन का साधन मानी जाने वाली यूट्यूब वेबसाइट का इस्तेमाल अब शिक्षा के प्रचार प्रसार में भी हो रहा है.
खाना बनाना, गीत संगीत से लेकर सिलाई कढ़ाई तक के कामों को आप वीडियो देख कर ऑनलाईन सीख सकते हैं.
यूट्यूब के माध्यम से लोगों के मोबाईल पर पहुंच कर, कुछ 'शिक्षक' न सिर्फ़ आधारभूत शिक्षा ही दे रहे हैं बल्कि एक बेरोज़गार को रोज़गार भी दिला रहे हैं.

एग्ज़ाम फ़ीवर

Image copyrightsangathan palghar school
यू-ट्यूब पर ज़्यादातर वीडियो मनोरंजन आधारित होते हैं लेकिन शिक्षाप्रद वीडियो भी अब यहां आपको नज़र आने लगे होंगे.
ये वीडियो लोगों को सिर्फ़ शिक्षित ही नहीं कर रहे बल्कि उनको बेहतर स्किल भी दे रहे हैं और ऐसे ही कुछ नि:शुल्क यू-ट्यूब वीडियो चैनल आजकल लोकप्रिय हो रहे हैं.
ऐसा ही एक चैनल है 'एग्ज़ाम फ़ीवर' जिसे रोशनी मुखर्जी चलाती हैं और इस चैनल के 83 हज़ार सब्सक्राइबर हैं.
झारखंड के धनबाद ज़िले में पली-बढ़ी रोशनी मुखर्जी को बचपन से ही पढ़ाई से लगाव था और बैंगलूरू की एक आई टी कंपनी में विश्लेषक के तौर पर काम कर रही रोशनी ने 2011 में यू-ट्यूब पर 'एक्ज़ाम फ़ीवर' के नाम से चैनल बनाया.
लगभग हर दिन रोशनी इस चैनल पर दो वीडियो अपलोड करती हैं और अपने चैनल पर आने वाले छात्रों को विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी देती हैं.
Image copyrightroshni mukherji
रोशनी कहती हैं, "पढ़ाना मेरा पैशन है और आईटी सेक्टर में रहने के कारण मुझे पता था की इंटरनेट के माध्यम से ही कुछ करना है, आप मेरे चैनल को एक ऑनलाईन ट्यूशन कह सकते हैं."
आर्थिक पहलू पर बात करते हुए रोशनी कहती हैं, "एक्ज़ाम फ़ीवर मेरा जुनून है बिज़नेस नहीं पर इसे चलाने के लिए भी लागत लगती है इसलिए मैंने आर्थिक मदद के लिए एक नया ऑप्शन बनाया है."

के श्रीप्रिया कनिगोल्ला

कोयंबटूर में रहने वाली गृहणी श्रीप्रिया कनिगोल्ला बचपन से ही चित्रकला और कारीगरी में दिलचस्पी थी जिसमें शामिल है फैब्रिक पेंटिंग, माला बनाना, फूल बनाना.
अपनी शिल्प कला को युट्यूब चैनल में डालने के लिए पांच साल पहले प्रोत्साहन दिया उनके 16 वर्षीय बेटे ने, "मुझे तो कैमरा भी चलाना नहीं आता था लेकिन अब मैंने वीडियो की एडिटिंग के लिए सॉफ्टवेयर सीख लिया है और सारे वीडियो मैं खुद ही बनाती और अपलोड करती हूँ."
श्रीप्रिया के चैनल के लगभग 40 हज़ार सब्सक्रिप्शन हैं और अब तक उन्होंने 240 वीडियो अपलोड किए, उनकी कोशिश रहती है कि वो हर हफ़्ते करीबन 2 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करें.
2010 में शुरू किए इस चैनल के लिए वो कहती हैं, "पेंटिंग करना और क्राफ्ट बनाना मेरा शौक है और मुझे ख़ुशी है की लोग इसका लाभ उठा रहे हैं. कितने लोग इस कला के वीडियो को देखकर स्कूलों में सिखा रहे हैं. मुझे ख़ुशी है की मैं लघु उद्योग को बढ़ावा दे रही हूँ."
2012 में उनकी यूट्यूब के साथ पार्टनरशिप हुई और कुछ पैसे मिलना भी शुरू हो गए हैं और उनके अधिकतर दर्शक जर्मनी, अर्जेंटीना से है जो अक्सर इस कला से जुड़े सवाल पूछते रहते है.

मेक मी जीनियस

2010 में कुछ छात्रों द्वारा शुरू किया गया युट्यूब चैनल 'मेक मी जीनियस' बच्चों के लिए दिलचस्प एनीमेशन के ज़रिए विज्ञान के वीडियो अपलोड करता है.
5 साल से जारी इस चैनल के लगभग 70 हज़ार सब्सक्रिप्शन हैं.
हालांकि ये छात्र अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं क्योंकि वो इसे प्रसिद्धि के लिए नहीं कर रहे हैं.
नाम न बताने की शर्त पर इस चैनल के संस्थापक कहते हैं, "न हमें फ़ेम चाहिए, न पैसा. बस मैं इतना कह सकता हूँ कि हम कुल 5 लोग हैं."
इन छात्रों का लक्ष्य है की वो निस्वार्थ और मुफ़्त एजुकेशन दें और हर हफ़्ते वीडियो डालने वाले इस ग्रुप को अब यूट्यूब के विज्ञापन से पैसे मिलने लगे हैं.
sabhar :http://www.bbc.com/

Read more

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

डायरेक्टर्स ऑफ बोर्ड की बैठक में 2025 तक रोबोट भी ले सकता है हिस्सा

0

नई दिल्ली : विज्ञान कथाओं के दायरे से निकलकर अब रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीनें कॉरपोरेट निदेशक मंडल में जगह पा सकती हैं। इसके अलावा बहुत उम्मीद है कि पहले रोबोटिक फार्मासिस्ट, 3डी-प्रिंटेड कार और इंप्लांटेबल मोबाइल फोन समेत 11 नई आधुनिक प्रौद्योगिकी 2015 में वास्तविकता बन सकती है।

डायरेक्टर्स ऑफ बोर्ड की बैठक में 2025 तक रोबोट भी ले सकता है हिस्सा
विश्व आर्थिक मंच के साफ्टवेयर एवं समाज के भविष्य पर वैश्विक एजेंडा परिषद द्वारा किए गए 800 कार्यकारियों के सर्वेक्षण में कहा गया ‘करीब आधे उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन किसी कंपनी के निदेशक मंडल में 2025 तक होगी जबकि पहला 3डी-प्रिंटेड लीवर 2024 तक प्रवेश करेगा।’ इस सर्वेक्षण में कहा गया कि विश्व क्रांतिकारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है और नयी प्रौद्येागिकी जल्दी ही वास्तविकता बन जाएगी जो कुछ साल पहले तक विज्ञान कथाओं तक सीमित थी।

सर्वेक्षण में शामिल 90 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 2025 तक कम से कम 10 प्रतिशत लोग इंटरनेट से जुड़े कपड़े पहनेंगे। 75 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका में पहला रोबोट फार्मासिस्ट होगा जबकि 63 प्रतिशत का मानना है कि पहला ट्रैफिक लाइट मुक्त शहर होगा जबकि 45 प्रतिशत का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन निदेशक मंडल में शामिल होगी।
sabhar http://zeenews.india.com/

Read more

रविवार, 23 अगस्त 2015

75 वर्ष से हवा के दम पर जिंदा प्रहलाद जानी

0



गुजरात के मेहसाणा जिले में रह रहे 83 वर्षीय प्रहलादजानी उर्फ माताजी चुनरी वाले (पुरुष साधक) पिछले 75 साल से बिना कुछ खाए-पिए रहने तथा दैनिक क्रियाओं को भी योग की शक्ति से रोक देने की वजह से चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौती बन गए हैं। इस वक्त उनकी उम्र 83 वर्ष है।

प्रहलाद जानी स्वयं कहते हैं कि यह तो दुर्गा माता का वरदान हैं, 'मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आए। कहा, हमारे साथ चलो, लेकिन मैंने मना कर दिया। करीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे पास आयीं और मेरी जीभ पर अंगुली रखी। तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख।'
 
चराड़ा गांव निवासी प्रहलाद भाई जानी कक्षा तीन तक पढे़ लिखे हैं। जानी का दावा है कि दैवीय कृपा तथा योग साधना के बल पर वे करीब 75 वर्ष से बिना कुछ खाए पिए-जिंदा हैं।  
 
मल मूत्र भी नहीं बनता : इतना ही नहीं मल-मूत्र त्यागने जैसी दैनिक क्रियाओं को योग के जरिए उन्होंने रोक रखा है। स्टर्लिंग अस्पताल के न्यूरोफिजिशियन डॉ. सुधीर शाह बताते हैं कि जानी के ब्लैडर में मूत्र बनता है, लेकिन कहां गायब हो जाता है इसका पता करने में विज्ञान भी अभी तक विफल ही रहा है।
 
क्या कहता है विज्ञान?
डॉक्टरों का मानना है कि कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना खाना खाए 30 से 40 दिन तक जीवित रह सकता है। लेकिन बिना पानी के पांच दिन से ज्यादा जिन्दा रहना सम्भव ही नहीं है। अभी तक उपलब्ध आंकणों के अनुसार 1981 में उत्तरी आयरलैण्ड में कैदियों ने भूख हड़ताल की थी, जिसमें 10 कैदियों की मृत्यु हो गई थी। उन कैदियों में सिर्फ एक व्यक्ति ही 73 दिन बिना खाए-पिए जिंदा रह पाया था।
 
कुल मिलाकर विज्ञान और आध्यात्म के बीच फंसी ये पहेली सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। प्रहलादभाई के मुताबिक दूसरे देशों के कई डॉक्टर भी उन्हें अपने यहां बुलाकर रिसर्च करना चाहते हैं, लेकिन वो अपना देश छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते।
सीसीटीवी की निगाह में रखा कई दिन : भारत के डॉक्टर 2003 और 2005 में भी प्रहलाद जानी की अच्छी तरह जांच-परख कर चुके हैं। इन जाचों के अगुआ रहे अहमदाबाद के न्यूरॉलॉजिस्ट (तंत्रिकारोग विशेषज्ञ) डॉ. सुधीर शाह ने कहा, 'उनका कोई शारीरिक ट्रांसफॉर्मेशन (कायाकल्प) हुआ है। वे जाने-अनजाने में बाहर से शक्ति प्राप्त करते हैं। उन्हें कैलरी (यानी भोजन) की जरूरत ही नहीं पड़ती। हमने तो कई दिन तक उनका अवलोकन किया, एक-एक सेकंड का वीडियो लिया। उन्होंने न तो कुछ खाया, न पिया, न पेशाब किया और न शौचालय गए।'

22 अप्रैल 2011 को प्रहलाद जानी डॉक्टरी जाँच-परख के लिए एक बार फिर अहमदाबाद के एक अस्पातल में 15 दिनों तक भर्ती थे। इस बार भारतीय सेना के रक्षा शोध और विकास संगठन का शरीरक्रिया। विज्ञान संस्थान DIPAS जानना चाहता था कि प्रहलाद जानी के शरीर में ऐसी कौन सी क्रियाएं चलती हैं कि उन्हें खाने-पीने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ती।
 
तीस डॉक्टरों की एक टीम ने तरह-तरह की डॉक्टरी परीक्षाएं कीं। मैग्नेटिक रिजोनैंस इमेजींग मशीन से उन के शरीर को स्कैन किया। हृदय और मस्तिष्क क्रियाओं को तरह तरह से मापा। रक्त परीक्षा की, दो वीडियो कैमरों के द्वारा चौबीसो घंटे प्रहलाद जानी पर नजर रखी। जब भी वे अपना बिस्तर छोड़ते, एक वीडियो कैमरा साथ-साथ चलता। तत्पश्चात यह पाया कि प्रहलाद जानी का दावा एकदम सच है। वे सचमुच बिना खाना और पानी के न सिर्फ जिंदा हैं बल्कि पूरी तरह से स्वस्थ भी हैं।
 
इस दौरान हर आधे से एक घंटे में प्रहलाद जानी को फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट,एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, यूरो सर्जन, आंख के डॉक्टर और जेनेटिक के जानकार डॉक्टरों की टीम के जरिए चेक किया जाता रहा और उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती रही।
 
डॉ. शाह बताते हैं कि पहली बार माताजी का मुंबई के जे.जे. अस्पताल में परीक्षण किया गया था, लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका। वे बताते हैं कि यह माताजी कभी बीमार नहीं हुए, उनकी शारीरिक क्रियाएं सभी सामान्य रूप से क्रियाशील हैं। चिकित्सक समय-समय पर उनका परीक्षण भी करते हैं, लेकिन ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट आदि सभी सामान्य ही पाई गई हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान डिस्कवरी चैनल ने भी उन पर एक लघु फिल्म तैयार की है। इसके अलावा डॉ. शाह ने भी माताजी के तथ्यों को केस स्टडी के रूप में अपनी वेबसाइट पर डालकर दुनिया के चिकित्सकों को इस पहेली को सुलझाने की चुनौती दी है, लेकिन फिलहाल तक कोई भी इस पहेली को नहीं सुलझा पाया है।
 
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उर्मन ध्रूव बताते हैं कि जानी का शरीर पूरी तरह स्वस्थ है, चिकित्सा विज्ञान के समक्ष वे अब तक अबूझ पहेली बने हुए हैं। उनकी एक भी कोशिका में चर्बी का कोई अंश नहीं है। इसे दैवीय कृपा नहीं कहा जा सकता, लेकिन उनके शरीर में ऊर्जा का कोई अतिरिक्त स्रोत जरूर है। वैज्ञानिक इसे करिश्मा कहने से फिलहाल बच रहे हैं पर इतना जरूर मानते हैं कि प्रहलाद जानी आम इंसान से अलग हैं।
 
10 दिन की पड़ताल के बाद तीन सौ डॉक्टरों की टीम ने रिपोर्ट दी कि-
1. 10 दिन तक प्रह्लादभाई ने कुछ नहीं खाया, यहां तक की पानी भी नहीं पीया
2. 10 दिन बाद भी उनके शरीर के सभी अंग पहले की तरह काम कर रहे हैं
3. दिल की धड़कनों में कोई खास बदलाव नहीं आया
4. पेट की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी कुछ गड़बड़ी नहीं
5. दिमाग के एमआरआई में भी कुछ खास नहीं निकला
6. सीने का एक्स-रे भी सामान्य रहा
7. 10 दिन भूखे रहने पर कोई असर नहीं
8. हीमोग्लोबीन के स्तर में कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
 
परिणाम आने की प्रतीक्षा : 
इस बार डीएनए विश्लेषण के लिए आवश्यक नमूने भी लिए गए। शरीर के हार्मोनों, एंज़ाइमों और ऊर्जादायी चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) क्रिया संबंधी ठेर सारे आंकड़े जुटाए गए। उनका अध्ययन करने और उन्हें समझने-बूझने में दो महीने तक का समय लग सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी इसमें रुचि दिखाई थी। यदि माताजी के ऊर्जा का स्रोत का पता चल जाता है तो शायद यह अंतरिक्ष यात्रियों एवं सेना के जवानों के लिए कारगर साबित होगा। यदि जानी के ऊर्जा स्रोत का पता चल जाता है तो चिकित्सकों का दावा है कि इससे अंतरिक्ष यात्रियों तथा सेना के जवानों की खाद्य समस्या हल हो सकती है साथ ही अकाल एवं भुखमरी जैसी समस्या को भी समाप्त किया जा सकता है।

अगर इसके पीछे प्रहलादभाई के शरीर में मौजूद कोई खास जीन काम कर रहा है तो उसे जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से खोजना होगा। अगर ऐसा हो गया तो-
1. दुनियाभर में भुखमरी की समस्या से निपटा जा सकता है।
2. इंसान के बीमार शरीर को स्वस्थ किया जा सकता है।
3. बुढ़ापे को रोकने में मदद मिल सकती है।
4. बर्फीले पहाड़ों पर रह रहे सैनिकों को मदद मिलेगी।
5. अंतरिक्ष यात्रा पर गए लोगों को खाने का सामान साथ नहीं ले जाना पड़ेगा।
 
अंत में जानिए भूखे रहने का रहस्य...


प्रहलाद जानी अपनी आयु के आठवें दशक में भी नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं और ध्यान लगाते हैं। योगी-ध्यानी व्यक्तियों में चमत्कारिक गुणों की कहानियों पर भारत में लोगों को आश्चर्य नहीं होता, पर विज्ञान उन्हें स्वीकार नहीं करता।

आज भी भारत की धरती पर ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कई वर्षों से भोजन नहीं किया, लेकिन वे सूर्य योग के बल पर आज भी स्वस्थ और जिंदा हैं। भूख और प्यास से मुक्त सिर्फ सूर्य के प्रकाश के बल पर वे जिंदा हैं।
 
प्राचीनकाल में ऐसे कई सूर्य साधक थे, जो सूर्य उपासना के बल पर भूख-प्यास से मुक्त ही नहीं रहते थे बल्कि सूर्य की शक्ति से इतनी ऊर्जा हासिल कर लेते थे कि वे किसी भी प्रकार का चमत्कार कर सकते थे। उनमें से ही एक सुग्रीव के भाई बालि का नाम भी लिया जाता है। बालि में ऐसी शक्ति थी कि वह जिससे भी लड़ता था तो उसकी आधी शक्ति छीन लेता था।
 
वर्तमान युग में प्रहलाद जानी इस बाद का पुख्ता उदाहरण है कि बगैर खाए-पीए व्यक्ति जिंदगी गुजार सकता है। गुजरात में मेहसाणा जिले के प्रहलाद जानी एक ऐसा चमत्कार बन गए हैं जिसने विज्ञान को चौतरफा चक्कर में डाल दिया है। वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो रहा है? sabhar :http://www.aajtak24.in/

 

Read more

तो क्या रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..?

0

तो क्या रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..?

वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या कृत्रिम बुद्धि से बने एंड्रॉयड्‍स (रोबो) भी धार्मिक हो सकते हैं। उनका कहना है कि संभव है कि एक दिन रोबो की कोई धर्म अपना लें और इसका अर्थ है कि वे मानवता की सेवा कर सकते हैं और इसे नष्ट करने की कोशिश नहीं करेंगे। लेकिन इसका उल्टा भी सच हो सकता है और संभव है कि धार्मिक होने से उनकी ताकत में बढ़ोतरी हो जाए।

मैसाचुसेट्‍स इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के मर्विन मिंस्की का कहना है कि किसी दिन कम्प्यूटर्स भी नीति शास्त्र को विकसित कर सकते हैं, लेकिन इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि इन मशीनों को लेकर सारी दुनिया में धार्मिक संघर्ष भी पैदा हो सकता है।  
 
डेलीमेल डॉटकॉम के लिए एल्ली जोल्फागारीफार्ड का कहना है कि वैज्ञानिक मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धि (आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस) दशकों की अपेक्षा वर्षों में एक वास्तविकता हो सकती है। हाल ही में एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस मनुष्यता के लिए परमाणु हथियारों की तरह से घातक हो सकती है।

डेलीमेल डॉटकॉम में डिलन लव ने हाल ही में एक सारगर्भित रिपोर्ट पेश की थी जिसमें ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई थी। लेकिन मॉर्मन ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, लिंकन कैनन ने लव से कहा कि कम्प्यूटर साइंस में ऐसे कोई नियम नहीं हैं कि सॉफ्टवेयर के लिए धार्मिक विश्वास रखना संभव होगा।

उनका कहना था कि धर्म विरोधियों के मध्य कुछ ऐसी भोलीभाली आवाजें हैं जो कि एक मशीनी बुद्धि और धार्मिक विश्वासों के बीच तकनीकी असंगति की कल्पना करते हैं। इंस्टीट्‍यूट फॉर एथिक्स एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज से जुड़े एक स्कॉलर, जॉन मेसरली, का कहना है कि ' मैं मानता हूं कि आप कृत्रिम बुद्धि को लगभग किसी भी चीज पर विश्वास करने के लिए प्रोग्राम कर सकते हैं। वहीं कैनन का कहना है कि धार्मिक सुपरइंटेलीजेंस या तो सबसे अच्‍छी या सबसे खराब सिद्ध हो सकती है। उनका मानना है कि धर्म मात्र एक ताकत है और इसका उपयोग अच्‍छे या बुरे के लिए किया जा सकता है।

पर जानकारों का कहना है कि धर्म पहले से ही अपने आप में सहिष्णु नहीं है और जिस धर्म के पास सुपरइंटेलीजेंस होगी, वह तो और भी कम ‍सहिष्णु होगा। इन सवालों के बीच एक और प्रश्न उठा है कि क्या कृत्रिम बुद्धि की भी कोई आत्मा (सोल) हो सकती है? जबकि स्वीडिश दार्शनिक निक बॉस्ट्रम का कहना है कि 'सबसे बड़ा डर इस बात का है कि जैसे-जैसे रोबो अधिक स्मार्ट होते जाएंगे, वे एक ऐसा रास्ता चुनेंगे जोकि उनके अस्तित्व को निरंतर बने रहने को सुनिश्चित करता हो और इसका अर्थ मनुष्यता का विनाश हो सकता है।' पर प्रसिद्ध कॉमेडियन ड्रंकन ट्रसेल और रेवरेंड क्रिस्टोफर बेनेक मानते हैं कि धर्म के कारण रोबो मनुष्यता के साथ-साथ रह सकते हैं।

पिछले महीने ही एलन मस्क ने एक हजार रोबोटिक्स विशेषज्ञों को चेताया कि स्वचालित हथियार कल के कलाश्निकोव साबित होंगे। इससे पहले प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग भी कह चुके हैं कि जो हथियार सार्थक मानवीय नियंत्रण से बाहर हो सकते हों, उन पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की तरह सभी रोबो हथियार सहज, सुलभ तरीकों से उपलब्ध हो सकते हैं और इनका कच्चा माल हासिल करना भी मुश्किल नहीं होगा। और अंतत: यह तकनीक वैश्विक हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है तथा ऐसे हथियार हत्याओं जैसे काम के लिए आदर्श साबित होंगे।
sabhar :http://www.aajtak24.in/

Read more

बुधवार, 12 अगस्त 2015

टेलीपैथी' तकनीक पर काम रहा है फेसबुक

0


मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। क्‍या हो, यदि आप अपने फेसबुक पेज की वॉल पर कुछ पोस्‍ट करने के बारे में सोचे यह वह आपके टाइप किए बगैर ही पोस्‍ट हो जाए। यह हवा-हवाई बात नहीं है, बल्कि फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जकरबर्ग की योजना का हिस्‍सा है।
वो एक नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। दरअसल मार्क फेसबुक को टेलीपैथी से जोड़ना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि लोगों को अपने फेसबुक पेज पर कुछ भी पोस्‍ट करने, लाइक करने या शेयर करने के लिए कम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप, स्‍मार्टफोन या टैबलेट की जरूरत ही न पड़े। यह सब केवल सोचने से हो जाए।
मार्क अपने फेसबुक पेज पर नियमित रूप से लोगों के सवालों के जवाब देते हैं। हाल ही में उनसे एक सवाल पूछा गया कि भविष्‍य का फेसबुक कैसा होगा। इस पर उन्‍होंने अपनी टेलीपैथी योजना के बारे में बताया।
मार्क के मुताबिक वो चाहते हैं कि लोग अपनी भावनाओं को टेलीपैथी के जरिए फेसबुक पर शेयर कर सकें। इसके लिए काफी उन्‍नत तकनीक की जरूरत पड़ेगी, जिस पर कंपनी रिसर्च कर रही है।
उन्‍होंने बताया कि इसके लिए अत्‍यधिक उन्‍नत तकनीक के साथ ही खास किस्‍म के डिवाइसेस की जरूरत भी पड़ेगी, जो इंसानी भावनाओं तथा विचारों को शब्‍दों की शक्‍ल देकर फेसबुक वॉल पर पोस्‍ट कर सके।
गौरतलब है कि हाल ही में भारत में फेसबुक यूजर्स की संख्‍या 12.5 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। वहीं पूरी दुनिया में यह आंकड़ा अरबों में पहुंच चुका है
- sabhar http://naidunia.jagran.com/

Read more

बेंगलुरू में बन रहा ऐसा रोबोट, 'मां' जैसा रखेगा ख्याल

0




बेंगलुरू। जिस तरह मां अपने बच्चे का पूरा ख्याल रखती है, उसी तरह भारत में अनोखा रोबोट बन रहा है, जो अपने मालिक की हर जरूरत को पूरा करेगा। बेंगलुरू स्थित तकनीकी फर्म नोशन इंक ने इस 'मदर' रोबोट को ईव नाम दिया है। यह 2018 से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। इसमें आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस होगी, यानी यह अपने दिमाग का इस्तेमाल कर सकेगा। कंपनी के सीईओ रोशन श्रवण के अनुसार, ईव में मातृत्व का भाव है।
ऐसा होगा यह अनोखा रोबोट
  • ईव का आकार गोल और वजन करीब 100 ग्राम है।
  • यह मशीन 15 मिनट तक उड़ान भरकर 2 किमी दूरी तय करने की क्षमता रखती है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस की मदद से यह इनसानों की तरह रोज-रोज के कामों और संदर्भों को समझ सकता है।
  • आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस का फायदा यह होगा कि आम इनसान भी इस मशीन से बात करके अपनी जरूरत के अनुसार एप्लिकेशन बना सकेंगे। उन्हें लंबे प्रोग्राम लिखने की जरूरत नहीं होगी।
  • कंप्युटर के साथ बात करने की कोडिंग की समस्याएं यहां हल कर ली गई हैं।
  • डिवाइस में इसके मालिक के जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी होगी, लेकिन इसे कहीं साझा नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह मशीन किसी सर्वर से नहीं जुड़ी होगी।
  • ईव से जुड़े दो अहम पहलुओं - मुवमेंट और विजन पर माइक्रोसॉफ्ट काम कर रहा है।
  • इसमें मल्टीपल रोटेटिंग कैमरे होंगे। इनकी मदद से 360 डिग्री विजन प्राप्त हो सकेगा।
  • कोई आपको विजिटिंग कार्ड देता है तो यह उसका विवरण अपनी मेमोरी में फीड कर लेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत बता देगा।
  • आप कार चला रहे हैं तो यह डैशबोर्ड पर बैठकर हर हलचल को रिकॉर्ड करेगा।
अभी कांच को नहीं समझ पाती है ईव
श्रवण ने बताया कि अभी कुछ तकनीकी खामियों पर काम किया जा रहा है। मसलन- यह रोबोट अभी यह नहीं समझ पा रहा है कि कांच के आरपास नहीं जाया जा सकता है। कोशिश की जा रही है कि यह रोबोट अपने-आप खुद को चार्ज भी कर ले।
- sabhar http://www.jagran.com/

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv