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मंगलवार, 13 नवंबर 2018

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लंदन/ इंसानी दिमाग जैसे दुनिया के सबसे बड़े कम्प्यूटर ने काम शुरू किया, एक सेकंड में मानेगा 20 हजार करोड़ से ज्यादा कमांड

worlds largest human brain like supercomputer switched on first time

Dainik Bhaskar

Nov 12, 2018, 10:34 AM IST
गैजेट डेस्क. इंसानी दिमाग की तरह काम करने के लिए बनाए गए दुनिया के सबसे बड़े और पहले सुपर कम्प्यूटर ने रविवार को काम करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए इस सुपर कम्प्यूटर को बनाने में 141.38 करोड़ रुपए की लागत आई है। 2006 में इसे बनाना शुरू किया गया था। यह कंप्यूटर सिर्फ एक सेकंड में 20 हजार करोड़ से ज्यादा कमांड एक बार में कर सकता है। इसके प्रोसेसर में लगी चिप्स में 100 अरब ट्रांजिस्टर हैं। इस कंप्यूटर के जरिए वैज्ञानिकों को न्यूरोलॉजी से संबंधित बीमारियों की पहचान और उसके इलाज में मदद मिलेगी। 

12 साल की मेहनत के बाद बना सुपर कम्प्यूटर
सुपर कंप्यूटर की इस मशीन को 'स्पिननेकर' नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के मुखिया स्टीव फरबेर का कहना है कि यह मशीन दुनिया की अब तक की सबसे तेज और नियत समय में सबसे अधिक बायोलॉजिकल न्यूरॉन्स की नकल कर सकती है।  उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर में बहुत सी ऐसी चीजें करने में मुश्किल होती है, जो इंसान स्वाभाविक रूप से कर लेते हैं। नवजात शिशु भी अपनी मां को पहचान लेते हैं लेकिन किसी खास व्यक्ति को पहचानने वाला कम्प्यूटर बनाने का काम हमने संभव कर दिखाया।  उन्होंने कहा कि अब हम दिमागी क्रिया को आसानी से पहचान सकते हैं। मैं अब यह कह सकता हूं कि हम 12 सालों की मेहनत और कोशिशों में कामयाब रहे हैं और हमारा उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा। इस परियोजना से जुड़े प्रोफेसर हेनरी मार्कराम कहते हैं कि इंसान का दिमाग इतना खास क्यों होता है? ज्ञान और व्यवहार के पीछे का मूल ढांचा क्या है? दिमागी बीमारियों का इलाज कैसे किया जाए सुपर कम्प्यूटर के जरिए हम अब इन सभी उपायों का आसानी से विश्लेषण कर सकते हैं। 

चूहे से आया आइडिया कि इसमें इंसानी दिमाग की हलचल कैसे नापें : प्रोफेसर स्टीव फरबेर बोले- हमें ये आइडिया चूहे की दिमागी हलचल देखकर आया। चूहे के दिमाग में लगभग 100 विमान खरीदने पर फैसला हुआ था: सरकार
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शनिवार, 14 अप्रैल 2018

ब्रह्मांड

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आज से14 वर्ष पूर्व ब्रह्मांड का कोई अस्तित्व नहीं था ब्रह्मांड एक छोटे से अधिक सघन बिंदुओं में सिमटा हुआ था अचानक एक जबरदस्त विस्फोट बिग बैंग हुआ और ब्रह्मांड अस्तित्व में आया महाविस्फोट के प्रारंभिक क्षणों में पदार्थ प्रकाश का मिलाजुला गर्म लावा तेजी से चारों तरफ बिखरने लगा कुछ ही क्षणों मेंब्रहमांड  व्यापक हो गया लगभग 400000 साल बाद पहले की गति धीरे-धीरे कुछ धीमी हुई ब्रह्मांड थोड़ा ठंड विरल हुआ और प्रकाश बिना पडार्थ से टकराये बेरोकटोक लंबी दूरी तय करने लगा और ब्रह्मांड प्रकाशमान होने लगा तब से आज तक ब्रह्मांड हजार गुना अधिक विस्तार ले चुका है ब्रह्मांड का आने वाला आने वाले समय में क्या भविष्य है सबसे महत्व प्रश्न है क्या अनंत ब्रम्हांड अनंत काल तक विस्तार लेता ही जाएगा साधांतिक दृष्टि से इस बारे में तीन तस्वीर उभरती हैं सुदूर में अदृश्य अदृश्य पदार्थ के विशिष्ट गुरुत्व बल भारी पड़ा और ब्रह्मांड के फैलने की गति धीमी हुई ब्रह्मांड के बढ़ते आकार में धीरे-धीरे पदार्थों की ताकत घटने लगी और अदृश्य ऊ र्जा रूपी विकार्षण शक्ति
अपना प्रभाव जमाने लगे फलत ब्रह्मांड की  फैलने कि दर  तेज हुई अगले सौ साल तक यदि यह दर  स्थिर भी रहे तो बहुत सी आकाशगंगाओं का अंतिम प्रकाश जी हम तक पहुंच नहीं पाएगा अदृश्य ऊर्जा का प्रमुख बढ़ने पर फैलने की दर तेज हुई होती हुई आकाशगंगाओं सौर परिवार ग्रहों हमारी पृथ्वी और इसी क्रम में अणुओं के नाभिक तक को नष्ट भ्रष्ट कर देगी इसके बाद क्या होगा इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है लेकिन यदि अदृश्य के पदार्थों का साम्राज्य स्थापित होता है यानी पदार्थ स घन  होकर
घुरतीव प्रभाव को और अधिक बलशाली बना देते तो दूर  स्थित आकाश गंगा भी  हमें आसानी से नजर आने लगेंगे यदि आदृश्य ऊ र्जा  ऋणात्माक हो  जाती है तो पहले धीरे-धीरे और तेजी से अपने आदिस्वरूप  के छोटे  से विन्दू मे  सिमाटने के लिए विवश होगा
निर्वात भौतकी य़ा शुन्यता  ब्रहमांड का भविष्य निश्चित करेगा  अमेरिकी ऊर्जा विभाग और नासा ने मिलकर अंतरिक्ष आधारित एक अति महत्वाकांक्षी योजना जॉइन डार्क एनर्जी मिशन का एक प्रस्ताव रखा है दशक में पूर्ण होने वाली इस परियोजना में 2 मीटर व्यास की एक अंतरिक्ष दूरबीन स्थापित की जानी है
Jagaran 

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रविवार, 8 अप्रैल 2018

मनोविकृति

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आज समाज में सेक्स के प्रति लेकर मनोविकृति उत्पन्न हो रही है आज का समाज बलात्कार और सामाजिक बुराइयों से पीड़ित है इसका प्रमुख कारण मनोवैज्ञानिक है आज बलात्कार हिंसा हत्या के पीछे मनोविज्ञान का ही कारण कार्य करता है इसमें व्यक्ति के पीछे इसमें छिपी हुई उसकी इच्छा दमन
भी कारण है समाज में विभिन्न प्रकार के संचार माध्यम उपलब्ध है इसका दुरुपयोग हो रहा है इसके माध्यम से सामाजिक मनोवृति को बिगाड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं आज आर्थिक युग में पैसे को सबसे बड़ा मानते हुए सामाजिक हित अनहित का ध्यान ना रखते हुए समाज में मनोरोग फैलाया जा रहा है अवचेतन मन में पिक्चर और नेट के माध्यम से मनोविकृति पैदा की जा रही है जो कि स्वस्थ समाज का लक्षण नहीं है अपने मनो रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है
प्रमुख कारण संचार माध्यम ही है स्वास्थ्य काम होकर कुंठित सेक्स उत्पन्न ना हो रहा है इससे समाज में मनोविकृति फैल रही है जो कि उपचार से ही दूर की जा सकती है के लिए बड़े पैमाने पर मनोचिकित्सक की आवश्यकता है पहले समाज को धार्मिक गुरुओं के द्वारा निर्देश दिया जाता था पर आज के गुरु स्वयं भ्रमित है इस प्रकार समाज के प्रति मनोवैज्ञानिकों का उत्तरदायित्व बढ़ जाता है

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मंगलवार, 6 जून 2017

30 सेकंड के फर्क ने मिटा दिया था डायनसोर युग का वजूद

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30 seconds caused end of dinosaurs from earth, reveals bbc documentary
डायनासोर युग के अंत के लिए कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा ऐस्टरॉइड धरती से टकराया था जिससे पैदा हुए विस्फोट ने इन विशालकाय जानवरों का वजूद खत्म कर दिया। लेकिन इस विस्फोट की टाइमिंग को लेकर बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बहुत दिलचस्प तथ्य सामने आया है। द डे डायनासोर डाइड नाम की इस डॉक्युमेंट्री में बताया गया है कि जिस ऐस्टरॉइड ने डायनासोरों का अंत किया, अगर वह धरती से 30 सेकंड जल्दी (पहले) या 30 सेकंड देर (बाद) से टकराता तो उसका असर जमीनी भूभाग पर इतना कम होता कि डायनासोर खत्म नहीं होते। ऐसा इसलिए क्योंकि 30 सेकंड की देरी या जल्दी गिरने की स्थिति में वह जमीन की बजाय समुद्र में गिरता।

यह ऐस्टरॉइड 6.6 करोड़ साल पहले मेक्सिको के युकटॉन प्रायद्वीप से टकराया था जिससे वहां 111 मील चौड़ा और 20 मील गहरा गड्ढा बन गया था। वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की जांच की तो वहां की चट्टान में सल्फर कम्पाउन्ड पाया गया। ऐस्टरॉइट की टक्कर से यह चट्टान वाष्प में बदल गई थी जिसने हवा में धूल का बादल बना दिया था। इसके परिणामस्वरूप पूरी धरती नाटकीय रूप से ठंडी हो गई और पूरे एक दशक तक इसी स्थिति में रही। उन हालात में अधिकतर जीवों की मौत हो गई। उनमें डायनसोरों की मौत विस्फोटक के चलते पैदा हुई सुनामी के कारण खाने की चीजों के अंत होने या आसामान से गिरीं पिघली चट्टानों की वजह से नहीं हुई थी।
sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com

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जल्द खत्म हो जाएगी इंसानी खून की किल्लत

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limitless blood supplies to become a reality soon, claims scientists
वैज्ञानिकों की मानें, तो आने वाले दिनों में किसी भी मरीज के इलाज में खून की कमी नहीं होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही वे इलाज में जरूरत पड़ने वाले खून की बेशुमार मात्रा सप्लाइ कर पाएंगे। मौजूदा समय में लोगों को चिकित्सा कारणों से जब खून की जरूरत पड़ती है, तो ब्लड की किल्लत के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लड डिसऑर्डर्स और कई अन्य बीमारियों में लोगों को बड़ी मात्रा में खून चढ़ाना पड़ता है। लंबे शोध के बाद वैज्ञानिक वयस्क कोशिकाओं को मूल कोशिकाओं में बदलने में कामयाब हुए हैं। ये मूल कोशिकाएं की भी तरह की रक्त कोशिकाएं बनाने में सक्षम होंगी। 

पिछले करीब 20 साल से वैज्ञानिक यह पता करने की कोशिश कर रहे थे कि क्या इंसान के खून में कृत्रिम तौर पर मूल कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है। मूल कोशिकाएं शरीर में किसी भी तरह की कोशिकाएं बना सकती हैं। अब शोधकर्ताओं की एक टीम को अलग-अलग तरह की कोशिकाओं को मिलाने में सफलता मिली है। इनमें रक्त की मूल कोशिकाएं भी शामिल हैं। जब इन कोशिकाओं को चूहे के शरीर में डाला गया, तो उन्होंने अलग-अलग तरह की इंसानी रक्त कोशिकाओं का निर्माण किया। 

अमेरिका के बॉस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉक्टर योइचि सुगिमुरा ने बताया, 'इस शोध की मदद से हम खून की वंशानुगत बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की कोशिकाएं ले सकते हैं और जीन एडिटिंग की मदद से उनके डिसऑर्डर को ठीक करके स्वस्थ रक्त कोशिकाएं तैयार कर सकते हैं। साथ ही, इसके कारण रक्त की मूल कोशिकाओं की अबाध आपूर्ति भी संभव हो सकती है।' हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रमुख और सुगिमुरा के साथी शोधकर्ता डॉक्टर जॉर्ड डेली ने कहा, 'हम शायद जल्द ही स्वस्थ और प्रामाणिक इंसानी रक्त तैयार करने में कामयाब हो जाएंगे। 20 सालों की मेहनत के बाद हम इस मकाम तक पहुंचे हैं।'
sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com

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