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शुक्रवार, 30 जून 2023

जापान के वैज्ञानिको ने एक पहनने वाला आर्म बनाया

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जापान के वैज्ञानिको ने एक ऐसा पहनने वाला आर्म बनाया
है जो एक साथ कई कार्य कर सकता है जैसे दुर्गा जी और भगवान विष्णु के कई हाथ होते थे इससे यह साबित होता है की यह कपोल कल्पित परिकल्पना नहीं अपितु सत्य है जैसे जैसे विज्ञान आगे बढ़ता जायेगा सनातन की बाते सत्य साबित होती जाएँगी आने वाले समय में पहनने वाले ड्रोन भी बनाये जायेंगे pic sabhar Dw.de

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मंगलवार, 27 जून 2023

वैक्सीन ला सकती हैं कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव

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कैंसर के इलाज के में वैक्सीन एक बड़ी प्रगति साबित हो सकती है. दशकों के रिसर्च के बाद आखिरकार वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी है और उनका मानना है कि अगले पांच सालों में और भी ऐसी वैक्सीन मिलने लगेंगी. वैज्ञानिक जिन वैक्सीनों पर काम कर रहे हैं वे पारंपरिक तरीके से काम नहीं करेंगी. बल्कि ये वैक्सीन ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर को वापस आने से रोकने में मदद करेंगे. इस प्रायोगिक रिसर्च में स्तन और फेफड़े के कैंसर को लक्ष्य बनाया गया. इस साल जानलेवा त्वचा के कैंसर मेलानोमा और पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में भी सफलता हासिल हुई है. वैज्ञानिक अब पहले से कहीं ज्यादा इस बात की समझ रखते हैं कि कैंसर, शरीर के इम्यून सिस्टम से कैसे अपने को छिपाये रखता है. कैंसर की वैक्सीन कैंसर सेल को ढूंढ़कर उनको मारने का काम करती हैं. कुछ नई वैक्सीन एमआरएनए का इस्तेमाल करती हैं जो बनाई गई तो कैंसर से लड़ने के लिए थीं, लेकिन इनका पहला इस्तेमाल कोविड-19 के लिए हुआ. प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बेहतर बनाने पर जोर डॉ नोरा डिसिस यूडब्लू मेडिसिन के कैंसर वैक्सीन सेंटर, सिएटल में काम करती हैं. उनका कहना है कि वैक्सीन को काम करने के लिए पहले उसे इम्यून सिस्टम के टी सेल को यह सिखाना पड़ेगा कि कैंसर खतरनाक है. एक बार ट्रेनिंग मिल गई तो फिर टी सेल शरीर में कहीं भी खतरे को खत्म कर सकते हैं. विज्ञानसंयुक्त राज्य अमेरिका वैक्सीन ला सकती हैं कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव 3 घंटे पहले3 घंटे पहले कैंसर के इलाज के में वैक्सीन एक बड़ी प्रगति साबित हो सकती है. दशकों के रिसर्च के बाद आखिरकार वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी है और उनका मानना है कि अगले पांच सालों में और भी ऐसी वैक्सीन मिलने लगेंगी. कैंसर कोशिकाओं का थ्रीडी प्रारूप कैंसर की कोशिकाओं को सिकोड़ने और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विकसित करने की तैयारी है वैज्ञानिक जिन वैक्सीनों पर काम कर रहे हैं वे पारंपरिक तरीके से काम नहीं करेंगी. बल्कि ये वैक्सीन ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर को वापस आने से रोकने में मदद करेंगे. इस प्रायोगिक रिसर्च में स्तन और फेफड़े के कैंसर को लक्ष्य बनाया गया. इस साल जानलेवा त्वचा के कैंसर मेलानोमा और पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में भी सफलता हासिल हुई है. वैज्ञानिक अब पहले से कहीं ज्यादा इस बात की समझ रखते हैं कि कैंसर, शरीर के इम्यून सिस्टम से कैसे अपने को छिपाये रखता है. कैंसर की वैक्सीन कैंसर सेल को ढूंढ़कर उनको मारने का काम करती हैं. कुछ नई वैक्सीन एमआरएनए का इस्तेमाल करती हैं जो बनाई गई तो कैंसर से लड़ने के लिए थीं, लेकिन इनका पहला इस्तेमाल कोविड-19 के लिए हुआ. प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बेहतर बनाने पर जोर डॉ नोरा डिसिस यूडब्लू मेडिसिन के कैंसर वैक्सीन सेंटर, सिएटल में काम करती हैं. उनका कहना है कि वैक्सीन को काम करने के लिए पहले उसे इम्यून सिस्टम के टी सेल को यह सिखाना पड़ेगा कि कैंसर खतरनाक है. एक बार ट्रेनिंग मिल गई तो फिर टी सेल शरीर में कहीं भी खतरे को खत्म कर सकते हैं. वैक्सीन से शायद काबू में आ सकेगा कैंसरवैक्सीन से शायद काबू में आ सकेगा कैंसर कैंसर के इलाज के लिए कई तरह के वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है इलाज के लिए वैक्सीन बनाने की प्रगति चुनौतीपूर्ण रही. पहली वैक्सीन, प्रोवेंज, को 2010 में अमेरिका में मंजूरी दी गई. यह वैक्सीन फैले हुए प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए काम में लाई गई थी. इस प्रक्रिया में मरीजों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को लैब में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद उन्हें आईवी के माध्यम से शरीर में वापस डाल दिया जाता है. प्रारंभिक मूत्राशय कैंसर और उन्नत मेलानोमा के इलाज के लिए भी वैक्सीन उपलब्ध हैं. दवा बनाने वाली कंपनियां मोडेर्ना और मर्क मिलकर मेलानोमा के मरीजों के लिए व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन विकसित कर रहे हैं. इसके लिए एक बड़ा अध्ययन इसी साल शुरू होगा. ये वैक्सीन कैंसर टिश्यू में मिलने वाले सैकड़ों म्यूटेशनों पर आधारित होंगे. व्यक्तिगत वैक्सीन का यह फायदा है कि यह इम्यून सिस्टम को बेहतर रूप से ट्रेन करके कैंसर की कोशिकाओं को मार सकते हैं. लेकिन जाहिर है यह वैक्सीन महंगे होंगे. वैक्सीन के लिए चाहिए स्वयंसेवी मरीज वहीं यूडब्लू मेडिसिन में जो वैक्सीन विकसित किए जा रहे हैं, वे ज्यादा लोगों पर काम करेंगे, ना कि केवल एक मरीज पर. फिलहाल स्तन के प्रारंभिक और गंभीर कैंसर, फेफड़े और ओवेरियन कैंसर के लिए रिसर्च चल रहा है. अगले साल तक कुछ नतीजे आने की उम्मीद भी है sabhar dw.de

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गुरुवार, 22 जून 2023

भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं.

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 भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही 


भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है.


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रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."

लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी.

इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी 

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही 


रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."


न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकातन्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकात



इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी होनी चाहिए.



रिलायंस और स्टारलिंक के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. भारतीय टेलिकॉम उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक, रिलायंस भारत सरकार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए दबाव डालती रहेगी. वह पूरी कोशिश करेगी कि भारत सरकार विदेशी कंपनियों की मांग न माने.


5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी, सरकार ने कमाए 1.5 लाख करोड़


मस्क के लिए बहुत कुछ दांव पर है. वह 2021 से भारत में स्टारलिंक कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मस्क ने भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने पर चर्चा की.


दूसरी तरफ अंबानी जानते हैं कि दिग्गज विदेश प्लेयरों के आंगन में आने से उनके कारोबार को भी मुश्किलें होंगी. नीलामी के मामले में स्टारलिंक, एमेजॉन सैटेलाइट इंटरनेट इनिशिएटिव और ब्रिटिश सरकार के समर्थन वाली कंपनी वनवेब की एक जैसी राय है.


भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर



रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."


न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकातन्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकात

न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकाततस्वीर: India's Press Information Bureau/REUTERS

रिलायंस जियो के करोड़ों ग्राहकों की जानकारी लीक


इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी होनी चाहिए.


रिलायंस जियोरिलायंस जियो

रिलायंस जियोतस्वीर: Indranil Aditya/NurPhoto/picture alliance

रिलायंस और स्टारलिंक के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. भारतीय टेलिकॉम उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक, रिलायंस भारत सरकार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए दबाव डालती रहेगी. वह पूरी कोशिश करेगी कि भारत सरकार विदेशी कंपनियों की मांग न माने.


5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी, सरकार ने कमाए 1.5 लाख करोड़


मस्क के लिए बहुत कुछ दांव पर है. वह 2021 से भारत में स्टारलिंक कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मस्क ने भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने पर चर्चा की.


दूसरी तरफ अंबानी जानते हैं कि दिग्गज विदेश प्लेयरों के आंगन में आने से उनके कारोबार को भी मुश्किलें होंगी. नीलामी के मामले में स्टारलिंक, एमेजॉन सैटेलाइट इंटरनेट इनिशिएटिव और ब्रिटिश सरकार के समर्थन वाली कंपनी वनवेब की एक जैसी राय है.



नीलामी बनाम लाइसेंसिंग

भारत के इंटरनेट बाजार के लिए प्रतिपर्धा कर रही 64 कंपनियों में से 48 ने लाइसेंसिंग का समर्थन किया है. 12 नीलामी के पक्ष में हैं और चार न्यूट्रल स्टैंड वाली हैं.


भारतीय टेलिकॉम इंडस्ट्री के एक और भीतरी सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि रिलायंस को डर है कि विदेशी दिग्गजों की वजह से भारतीय कंपनियों को मुश्किल होगी. भारत के ई-कॉमर्स बाजार में अंबानी की रिटेल कंपनी एमेजॉन से पिछड़ चुकी है. रिलायंस को डर है कि ब्रॉडबैंड सेक्टर में भी यही हाल न हो.


बाजार की समीक्षा करने वालों का अनुमान है कि 2030 तक भारत का ब्रॉडबैंड बाजार 1.9 अरब डॉलर का हो जाएगा. फिलहाल यह 36 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से आगे बढ़ रहा है.


स्टारलिंक का कहना है कि दुनिया भर के 84 देशों में उसकी सेवाओं को मंजूरी मिल चुकी है. उसके पास 15 लाख एक्टिव यूजर्स हैं. एमेजॉन भी 2024 में ऐसी सैटेलाइटों का पहला सेट लॉन्च करने जा रही है. Sabhar Dw.de

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Google इंडिया में अपने स्मार्टफोन Pixel का उत्पादन करेगी

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गूगल ने इंडिया में कुछ कंपनियों से बातचीत शुरू की है। इनमें Lava International और Dixon Technologies India शामिल हैं। इसके अलावा वह Foxconn Technology Group की इंडियन यूनिट Bharat FIH से भी बात कर रही है। गूगल जिन संभावित पार्टनर्स से बातचीत कर रही है, उनमें ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री की PLI स्कीम के तहत इनसेंटिव मिला है। दुनिया में स्मार्टफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी Apple ने इंडिया में अपना सप्लायर बेस बढ़ाने का लिए इस स्कीम का फायदा उठाया है

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शनिवार, 17 जून 2023

सेक्स ऊर्जा है, उस ऊर्जा को रूपांतरण करने की कला जानो-ओशो *

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 * जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर। उस ऊर्जा के पूरे अर्थ, मार्ग, व्यवस्था को जान कर उससे मुक्त हो सकता है। 


आंखें बंद कर लेने से कोई कभी मुक्त नहीं हो सकता। आंखें बंद कर लेने वाले सोचते हों कि आंख बंद कर लेने से शत्रु समाप्त हो गया है, तो वे पागल हैं। सेक्स के संबंध 

में आदमी ने शुतुरमुर्ग का व्यवहार किया है आज तक। वह सोचता है, आंख बंद कर लो सेक्स के प्रति तो सेक्स मिट गया।


अगर आंख बंद कर लेने से चीजें मिटती होतीं, तो बहुत आसान थी जिंदगी, बहुत आसान होती दुनिया। आंखें बंद करने से कुछ मिटता नहीं, बल्कि जिस चीज के संबंध में हम आंखें बंद करते हैं, हम प्रमाण देते हैं कि हम उससे भयभीत हो गए हैं, 

हम डर गए हैं। वह हमसे ज्यादा मजबूत है, उससे हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए हम आंख बंद करते हैं। आंख बंद करना कमजोरी का लक्षण है।


और सेक्स के बाबत सारी मनुष्य-जाति आंख बंद करके बैठ गई है। न केवल आंख बंद करके बैठ गई है, बल्कि उसने सब तरह की लड़ाई भी सेक्स से ली है। और उसके परिणाम, उसके दुष्परिणाम सारे जगत में ज्ञात हैं।


अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, 


सेक्स का दमन मौजूद है। अगर आदमी इतना बेचैन, अशांत, इतना दुखी और पीड़ित है, तो इस पीड़ित होने के पीछे उसने जीवन की एक बड़ी शक्ति को बिना समझे उसकी तरफ पीठ खड़ी कर 

ली है, उसका कारण है। और परिणाम उलटे आते हैं।


आदमी को हमने विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना दुखी भी न था।


मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।


क्या आपने कभी सोचा? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते हैं, जाति भूल सकते हैं, चेहरा भूल सकते हैं। लेकिन कभी आपको खयाल आया कि आप यह भी भूल सके हैं कि जिससे आप मिले थे,वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सके इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरुष है या स्त्री? जब सारी बातें भूल जाती हैं तो यह क्यों नहीं भूलता?


हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। इसलिए सब बात भूल जाती है, लेकिन यह बात नहीं भूलती। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, 


जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते - यह आग क्या थी?


और मैं आपसे कहता हूं, अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। मनुष्य के भीतर बिजली 

से भी बड़ी ताकत है सेक्स की। मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की।


कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है? उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा 

हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। 

एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम - 

ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। 


सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा सकते। 


               * सम्भोग से समाधि की ओर *


                           * ओशो * 


                                                             ***** DSB *****

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शनिवार, 10 जून 2023

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शुक्रवार, 9 जून 2023

गूगल Passkey से अकाउंट में पासवर्ड डालने की जरुरत नहीं है | Google Passkey

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आज का दोर इन्टरनेट का है इन्टरनेट के बिना एक दिन पर नहीं चलता इसके साथ गूगल का यूज़ करते है और गूगल का अकाउंट बनता है इसके बाद पासवर्ड भीर याद नहीं रहेता


 गूगल का अपडेट आया है इसमे पासवर्ड याद रखने की जरुरत नहीं पड़ेगा  पासवर्ड याद रखन बहुत मुश्किल हो जाता है इसका सलूशन लेके आया है |


गूगल ने फेसला किया है लोगो को पासवर्ड से बहुत हेरान होते है इसमे तू जो कंप्यूटर का यूजर को याद रखते है पर मोबाइल यूजर होते है वो तो दुसरे से Gmail अकाउंट बनवाते है एस लिए गूगल ने  passkeys ऑप्शन पेस किया है |


जैसे के बताने में ख़ुशी होगी आप और  हमारे लिए  गूगल के यूजर है जाएदा तर gmail ,youtube, मोबाइल का playstore का यूज़ करते हो  वो सब में पासवर्ड की जरुरत पड़ती है |



यूजर अपने अकाउंट के  जाने के बाद passkey को इनेबल करना होगा तू  जब आप गूगल अकाउंट में पासवर्ड के बाद two स्टेम्प verification आता है जब आप passkey का ओन  कर लो गे तू पासवर्ड से मुक्ति  हो जायेगा |


Google Passkey क्या है ?

आपके मन में गूगल passkey  की समझना जब आप लैपटॉप या मोबाइल में लॉगइन करते हो तो आप इसमें पेन फिंगरप्रिंट फेस की मदद से अकाउंट ओपन कर सकते हो |


गूगल का यूज करते हो तो आपको पासवर्ड टू स्टेप वेरीफिकेशन इसके साथ जो कभी ओटीपी आता ओटीपी नहीं आएगा इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी |


गूगल Passkey का फायदा

जब passkey को अनेबल करते हो जब इसका यूज करते हो और आप कहीं भी मोबाइल या लैपटॉप लेकर बैठे हो तो आपको पासवर्ड डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी और कोई आपका पासवर्ड देख भी नहीं पाएगा वह आपका पासवर्ड चोरी होने की संभावना रहेगी नहीं रहेगी गूगल में सिक्योरिटी परपस के लिए यह ऑप्शन लांच किया होगा इसका यूज कर सकते हैं |


गूगल में एक फीचर को लॉगइन करने की प्रक्रिया को पहले से हो सके इसके लिए ऑप्शन लेकर आए और गूगल का मकसद है लोग सुरक्षित रहे|


Google Passkey का सेटअप(Setup) कैसे करे ?

गूगल अकाउंट के अंदर passkey को सेट करने के लिए आपको पहले गूगल अकाउंट सेटिंग जीमेल को लॉगइन करना होगा


इसके बाद फोटो के साइन दिखेगा इसमें आपको अकाउंट मैनेज पर क्लिक करना होगा


Google Passkey का सेटअपsetup कैसे करे min

Google Passkey का सेटअप(setup) कैसे करे

उसके बाद आपको सिक्योरिटी का ऑप्शन देखने को मिलेगा


इस पर क्लिक करके आपको सेकुरिटी ऑप्शन देखने को मिलेगा


इसमें जाकर आप उसको अनेबल कर सकते हो


आप मोबाइल और लैपटॉप के लिए किस का यूज़ कर सकते 

Sabhar https://www.thedigitalpk.com/how-to-use-google-passkey-without-password-login.html


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हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है

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 हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है।


1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।


2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।


3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।


4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना ।


5. ज़्यादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।


6.  क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।


7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।


8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खेलाना....


9. गाँव, जंगल,   से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना।


 इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने  जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।


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गुरुवार, 8 जून 2023

कपूर के पौधे

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 कुछ दिन पहले मैंने अपने गार्डन के कपूर के पौधे की इमेज शेयर की थी,जिसे आप सब ने काफी सराहा। साथ ही बहुत सारे प्रश्न और शंकाए भी थी। तो आज का कपूर के पेड़ से संबंधित ये पोस्ट आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। मैं कपूर का पौधा इसलिए कह रहा हू कि मेरा पौधा वर्तमान में मात्र 10 इंच के pot में लगा हुआ है और इसके पेड़ बनने के लिए इसको जमीन मिलना अभी बाकी है। तो चलिए बात करते है कपूर के पौधे के बारे में...

वर्तमान समय में प्रचलित कपूर केमिकल्स के ही बने होते हैं। यह कमाल का तत्व प्रकृति में भी विद्यमान होता है। दरअसल कपूर एक विशालकाय पेड़ से प्राप्त होते हैं जिनका मेडिसिनल वैल्यू कमाल का होता है। केमिकल्स वाले कपूर में मेडिसिनल वैल्यू का कोई अता-पता नहीं होता।कपूर लगभग हर घर में प्रयोग में लाया जाता है। पूजा पाठ में तो खास तौर पर इसका इस्तेमाल होता है। पूजा खत्म होने के बाद आरती के समय कपूर की अनिवार्यता हर किसी को पता है। कपूर सिर्फ फैक्ट्रियों में नहीं बनते, बल्कि पेड़ पर भी उगते हैं। यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी। इसके साथ ही कपूर के गुणकारी फायदे और इसके कुछ अनछुए रहस्य भी हैं, जिससे लोग शायद अनभिज्ञ हैं।कपूर एक विशालकाय, बहुवर्षायु लगभग सदाबहार वृक्ष है। इसका वृक्ष, एशिया के विभिन्न भागों में मसलन भारत, श्रीलंका, चीन, जापान, मलेशिया, कोरिया, ताइवान, इन्डोनेशिया आदि देशों में पाया जाता है। कपूर के वृक्ष की लम्बाई 50 से 100 फीट तक होती है। इसके सुन्दर, अति सुगन्धित पुष्प और मनमोहक फल तथा पत्तियाँ बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि कहीं-कहीं इसे श्रृंगारिक वृक्ष के रुप में भी अपनाया गया है। पत्तियां बड़ी सुन्दर, चिकनी, मोमी, लालीमायुक्त हरापन लिए होती हैं। वसन्त ऋतु में छोटे-छोटे अति सुगन्धित फूल लगते हैं। इसके फल भी बड़े मोहक होते हैं।


कपूर वृक्ष की लकड़ियां सुन्दर फर्नीचर के काम में भी लायी जाती हैं। यह काफी मजबूत और टिकाऊ होती है। इसके पेड़ से प्राप्त लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, तेज ताप पर उबाला जाता है फिर वाष्पीकरण और शीतलीकरण विधि से रवादार कपूर का निर्माण होता है। इसके अलावा, इससे अर्क और तेल भी बनाया जाता है, जिसका प्रयोग प्रसाधन एवं औषधी कार्यों में बहुतायत होता है। आयुर्वेद में इसके अनेक औषधीय प्रयोगों का वर्णन है। एलोपैथी और होमियोपैथी दवाइयों में भी कपूर का प्रयोग होता है। यह शीतवीर्य है, यानी इसकी तासीर ठंडी है। भारतीय कर्मकांड और तन्त्र में तो कपूर रचाबसा है ही, कपूर की कज्जली और गौघृत से काजल भी बनाया जाता है। यह बड़ा गुणकारी होता है।

कपूर का पौधा हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसकी सुगंध इतनी अच्छी होती है कि इसकी सुगंध से आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं। कपूर का पौधा अपनी सुगंध से चारों ओर के वातावरण को खुशबूदार बना देता है।

कपूर के पौधे को हम अपने घर में,बाहर, कहीं भी किसी भी जगह पर लगा सकते हैं।इसे हम अपने घर में, गमले में,कहीं भी लगा सकते हैं। कपूर का पौधा केवल एक पौधा ही नहीं है अपितु यह हमारे लिए स्वास्थ्य रूपी खजाने का भंडार है।

ऐसा माना जाता है कपूर का पौधा लगाने से घर से बीमारियां दूर हो जाती हैं। अगर कोई व्यक्ति कपूर के पौधे के संपर्क में रहता है तो वह हमेशा स्वस्थ रहता है।

सबसे बड़ा फायदा कपूर का पौधा लगाने से जो हमें होता है वह यह है कि यह पर्यावरण को शुद्ध करने में बहुत बड़ी मदद करता है।

दोस्तों इस तरह से कपूर का पौधा हमारे लिए बहुत ही लाभकारी है।यह हमें जीवन वायु प्रदान करता है।

# sabhar : ashishkibagia

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शनिवार, 3 जून 2023

वृद्धावस्था को रोकना या धीमा करना संभव है

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वृद्धावस्था को पूर्णतः रोकना या धीमा करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो हर व्यक्ति के लिए अवश्य होगी। हालांकि, कुछ उपायों द्वारा वृद्धावस्था के कुछ प्रभावों को धीमा किया जा सकता है और स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में मदद मिल सकती है।


यहां कुछ उपाय हैं जो वृद्धावस्था के प्रभावों को धीमा कर सकते हैं:


स्वस्थ आहार: सही आहार लेना वृद्धावस्था के लक्षणों को धीमा कर सकता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, फल, सब्जियां, अण्डे, दूध आदि सेवन करें।


नियमित शारीरिक गतिविधि: योग, ध्यान, पैदल चलना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना वृद्धावस्था को धीमा करने में मदद कर सकता है।


मानसिक स्थिरता: स्वस्थ मानसिक स्थिति रखना वृद्धावस्था के दुष्प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान और मनोरंजन के लिए समय निकालें।


नियमित चेकअप: नियमित चिकित्सा जांच और अनुसरण से वृद्धावस्था की सेहत पर नजर रखी जा सकती है और संभावित समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकता है।


यदि वृद्धावस्था के किसी व्यक्ति के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं, तो उन्हें एक प्रशिक्षित चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। वे सही और व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर सकते हैं जो उन्हें वृद्धावस्था के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

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