प्राचीन ग्रीस के वैभवशाली इतिहास के पीछे एक ऐसा गुप्त कामुकता का अध्याय
प्राचीन Greece में “सिम्पोजियम” (Symposium) वास्तव में उच्च वर्ग के पुरुषों की एक सामाजिक सभा होती थी। यहाँ लोग भोजन के बाद एकत्र होकर शराब पीते, संगीत सुनते, कविता पाठ करते, दर्शन, राजनीति और कला पर चर्चा करते थे।
प्राचीन ग्रीस के वैभवशाली इतिहास के पीछे एक ऐसा गुप्त अध्याय छिपा है, जहाँ रईसों की शामें सिर्फ दर्शन और राजनीति की चर्चाओं में नहीं, बल्कि चरम का*मुकता के साये में ढलती थीं। इसे कहा जाता था 'सिम्पोजियम'—दिखने में तो यह बुद्धिजीवियों की एक सभा थी, लेकिन हकीकत में यह अमीरों की वो 'सीक्रेट' पार्टी थी जहाँ शराब की हर बूंद के साथ ह*वस का नशा गहरा होता जाता था।
इन महफिलों में एथेंस के ताकतवर पुरुष अर्ध*नग्न होकर मखमली बिस्तरों पर लेटते थे, जहाँ उनके मनोरंजन के लिए 'हेटेरा' (उच्च वर्ग की बेहद खूबसूरत और शिक्षित दासियाँ) को खास तौर पर बुलाया जाता था। ये दासियाँ केवल संगीत या नृत्य के लिए नहीं होती थीं, बल्कि उनका मुख्य काम पुरुषों की हर दबी हुई जि*स्मानी चाहत को पूरा करना था।
जैसे-जैसे रात परवान चढ़ती और सुराही से शराब छलकती, वैसे-वैसे वहां मौजूद लोगों की मर्यादाएं पिघलने लगती थीं। रोशनी के धुंधलके में संगीत की धुनें और भी उत्तेजक हो जाती थीं और अजनबियों के बीच जि*स्मानी नज़दीकियों का वो खेल शुरू होता था, जिसकी कल्पना भी आज का समाज नहीं कर सकता।
यह सभाएँ अक्सर बेकाबू होकर एक ऐसी 'ओरजी' में बदल जाती थीं, जहाँ नैतिकता का कोई स्थान नहीं था। दार्शनिक बातों के बीच शुरू हुआ यह सिलसिला सुबह होते-होते जिस्मानी सुख के चरम पर जाकर रुकता था।
इतिहासकार बताते हैं कि इन बंद कमरों के भीतर वह सब कुछ जायज था जो बाहर की दुनिया में वर्जित था। सिम्पोजियम केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि उस दौर के रईसों के लिए अपनी मर्दानगी और ह*वस को बेलगाम छोड़ने का एक आलीशान बहाना था। आज भी इन सभाओं के किस्से सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि कैसे ज्ञान की आड़ में कामुकता का ऐसा नंगा नाच परोसा जाता था। साभार सोनाली bist
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