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शनिवार, 13 सितंबर 2014

स्मार्टफोन के बाद स्मार्ट होम

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स्मार्टफोन के इस दौर में एक ऐसे स्मार्ट होम की कल्पना करना कोई अजीब बात नहीं जहां उपकरण एक दूसरे से बातें करेंगे और फ्रिज खुद दूध की देखभाल करेगा. बहुत जल्द यह सपना भी सच होने वाला है.
बर्निल में चल रहे ईफा इलेक्ट्रॉनिक मेले में भविष्य के स्मार्ट घरों की कल्पना पेश की गई. स्मार्ट दौर में सबसे आगे निकलने की दौड़ में सैमसंग, एप्पल और गूगल जैसी कामयाब कंपनियां जद्दोजहद में लगी हैं. कंपनियों को उम्मीद है कि तकनीकी क्रांति के साथ आने वाला समय उनके लिए अरबों डॉलर का मुनाफा लेकर आएगा. मार्केट रिसर्च कंपनी आईएचएस की लीसा ऐरोस्मिथ मानती हैं कि बहुत जल्द स्मार्ट होम बाजार में बहुत आम बात होगी.
स्मार्ट होम की कल्पना और इसकी तैयारियां 1980 के दशक से ही की जा रही हैं. लेकिन अब तक इसके रास्ते में कई तकनीकी बाधाएं खड़ी थीं. उपकरणों का एक दूसरे के साथ तालमेल बिठा पाना, इंटरनेट की बेहतर सुविधा न होना और तार का झंझट जैसी अड़चनें. लेकिन आने वाले समय में कंपनियां एक दूसरे से मिलकर चलने वाले उपकरणों को बढ़ावा दे रही हैं. जैसे कि घर की हीटिंग का घर पहुंचने से पहले कार से ही स्विच ऑन कर देना. यहां तक कि छुट्टी पर गए लोग किसी सुहानी जगह बैठे कैमरे के जरिए अपने घर पर भी नजर रख सकेंगे.
भविष्य का घर
ईफा में कोरियाई कंपनी सैमसंग ने 2020 को ध्यान में रखते हुए भविष्य का घर पेश किया. इसमें एक ऐसी तकनीक भी होगी जो किचेन में खाना बनाते समय एक के बाद एक आपको बताती जाएगी के कब क्या किया जाए. यहां तक कि एक ऐसा डिजिटल कोच जो आपके साथ दौड़ लगाएगा. साथ ही आपको बताता जाएगा कि आपने कितनी कसरत की और कितनी करना बाकी है. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के अध्यक्ष बू क्यून ने कहा, "बहुत सारे लोगों के लिए यह अभी भी किसी ख्वाब की तरह ही है. लेकिन बदलाव आ रहा है और अब बहुत पास है. याद कीजिए कि कुछ ही सालों में कितनी तेजी से स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी बदल कर रख दी है."
घरेलू उपकरणों में इंटरनेट
स्मार्ट होम की दिशा में छोटे छोटे कदम बढ़ाते हुए सैमसंग ने अमेरिकी कंपनी स्मार्ट थिंग्स को खरीद लिया. यह कंपनी छोटे छोटे घरेलू उपकरणों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए ऐप तैयार कर रही है. इससे पहले गूगल ने ऊर्जा बचाने वाले फायर अलार्म और थर्मोस्टैट बना रही नेस्ट लैब्स को 3.2 अरब डॉलर में खरीदा था. ये उपकरण यह भी पता लगा सकेंगे कि घर पर कोई है या नहीं.
रिसर्च कंपनी गार्टनर की आनेट सिमरमन के मुताबिक, "स्मार्ट होम की कल्पना को सच करने के लिए चीजों के इंटरनेट के अस्तित्व में आना बहुत जरूरी था."
एबीआई रिसर्च कंपनी के मुताबिक पिछले साल करीब 1.7 करोड़ स्वचलित घरेलू उपकरण खरीदे गए. अनुमान है कि 2018 तक इनकी बिक्री आधे अरब से ज्यादा होगी. फिलहाल कंपनियां इंटेलिजेंट घरों की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं.
एसएफ/आईबी (एएफपी)
sabhar :http://www.dw.de/

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गुरुवार, 11 सितंबर 2014

स्टेम सेल से जल्द ठीक होंगे' स्ट्रोक के मरी़ज़

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स्टेम सेल, दिमाग

स्ट्रोक होने के बाद दिमाग में स्टेम सेल डालने से सेहत में सुधार की रफ़्तार बढ़ सकती है.
लंदन के इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने इस पद्धति की सुरक्षा की जांच के लिए किए गए शुरुआती प्रयोग में स्ट्रोक का शिकार हुए पांच लोगों की अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में ख़ास तरह के स्टेम सेल्स डाले.

इन पांच लोगों में से चार को गंभीर स्ट्रोक पड़ा था. वह बोलने में अक्षम हो गए थे और शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था.इन्हें दिमाग में सीधे जाने वाली नस के ज़रिए क्षतिग्रस्त हिस्से में पहुंचाया गया.
ऐसे स्ट्रोक से मरने वालों और विकलांग होने वालों की दर ज़्यादा होती है.
लेकिन छह महीने पूरे होते-होते चार में से तीन ख़ुद अपनी देखभाल करने लगे थे. थोड़ी मदद से सभी चलने और रोज़मर्रा के काम करने लगे.
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इसके लिए व्यापक अध्ययन की ज़रूरत है.
sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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बुधवार, 10 सितंबर 2014

झील की सतह पर 'चलने वाली चट्टानों' का रहस्य सुलझा!

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झील की सतह पर 'चलने वाली चट्टानों' का रहस्य सुलझा!

वैज्ञानिकों के एक दल का दावा है कि उन्होंने कैलिफोर्निया में मौत की घाटी में एक सूखी झील पर बेतरतीब ढंग से गतिमान चट्टानों के रहस्य को सुलझा लिया है।

गतिमान चट्टानें सूखी झील रेसट्रैक प्लाया की सतह पर हैं जिनके रहस्य को समझने के लिए शोधकर्ता 1940 से पड़ताल कर रहे हैं। इनमें से कुछ चट्टानों का वजन 320 किलो से भी अधिक है जो कई वर्षो की अवधि में झील की सतह पर एक सिरे से दूसरे छोर पर चले जाते हैं और अपने पीछे पथमार्ग की निशानी छोड़ जाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के पेलियोबॉयोलाजिस्ट रिचर्ड नॉरिस की अगुवाई में एक टीम ने गतिमान चट्टानों का अध्ययन किया। इसके निष्कर्षो का प्रकाशन गुरुवार को पीएलओएस वन जर्नल में किया गया है। इसके अनुसार, जाहिर तौर पर चट्टानें भले एक दशक से ठहरी हों या बगैर अधिक गति किए हों लेकिन कुछ अवसरों पर वे धीमी गति से यात्रा करती हैं। यह बर्फ और हवा के असामान्य संयोजन के परिणामस्वरुप होता है। नॉरिस ने कहा कि यह उस समय होता है जब वे सूखी झील पर बर्फ की एक पतली परत के साथ जमे होते हैं और हल्की हवा से टूट जाते हैं, जिससे चट्टानों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर बर्फ की परतें आती हैं जो उन्हें प्रति मिनट कुछ यार्ड चलने के लिए पर्याप्त बल देती हैं।
sabhar :http://hindi.ruvr.ru/

और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_08_31/276651512/

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इस लड़की के हैं तीन 'माता-पिता'

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अलाना सारीनेन

एक मां और एक पिता की संतान में तो कुछ भी असामान्य नहीं है. लेकिन अगर किसी बच्चे के शरीर में तीन लोगों का डीएनए हो तो?
कुछ ऐसा ही मामला है अलाना सारीनेन का और दुनिया में ऐसे गिने चुने ही किस्से हैं.

तीसरा व्यक्ति कैसे बनता है बच्चे का बॉयोलॉज़िकल माँ या बाप? - पढ़ें पूरी रिपोर्ट
अलाना सारीनेन को गोल्फ़ खेलना, पियानो बजाना, संगीत सुनना और दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद है. इन सब आदतों को देखते हुए वह दुनिया की दूसरी किशोरियों की तरह ही है, लेकिन असल में उनसे भिन्न हैं.
अलाना कहती हैं, "कई लोग मुझसे कहते हैं कि मेरा चेहरा मेरी मां से मिलता है, मेरी आंखे मेरे पिता की तरह हैं. वगैरह-वगैरह.. मुझे कुछ विशेषताएं उनसे मिली हैं और मेरी शख्सियत भी कुछ उनकी ही तरह है."
वह कहती हैं, "मेरे शरीर में एक और महिला का भी डीएनए है. लेकिन मैं उन्हें अपनी दूसरी मां नहीं मानती, मेरी शरीर में उनके कुछ माइटोकॉन्ड्रिया हैं."

माइटोकॉन्ड्रिया का महत्व

कोशिका संरचना
माइटोकॉन्ड्रिया किसी भी कोशिका के अंदर पाया जाता है जिसका मुख्य काम कोशिका के हर हिस्से में ऊर्जा पहुंचाना होता है. इसी कारण माइटोकांड्रिया को कोशिका का पावर हाउस भी कहा जाता है.
माइटोकॉन्ड्रिया की एक ख़ासियत यह है कि यह सिर्फ़ मां से ही विरासत में मिलते हैं, पिता से कभी नहीं.
अलाना दुनिया की उन 30 से 50 लोगों में से एक हैं, जिनके शरीर में किसी तीसरे व्यक्ति के कुछ माइटोकॉन्ड्रिया हैं और इसी वजह से कुछ डीएनए भी.
अमरीका के एक मशहूर इनफर्टिलिटी केंद्र में उपचार के बाद वह गर्भ में आई थीं, जिस पर बाद में प्रतिबंध लगा दिया गया था.

कब ज़रूरी होती है ये तकनीक

भ्रूण की मरम्मत
लेकिन, जल्द ही अलाना जैसे लोगों की तादाद बढ़ सकती है, क्योंकि ब्रिटेन अनुवांशिक बीमारी को खत्म करने के लिए माइटोकॉन्ड्रिया लेने की नई तकनीकी को क़ानूनी दर्जा दे सकता है.
इसे माइटोकॉन्ड्रियल रिप्लेसमेंट कहा जाता है और अगर ब्रितानी संसद से इसे मंज़ूरी मिल जाती है तो ब्रिटेन तीन लोगों के डीएनए लेकर पैदा होने वाले बच्चों को क़ानूनी वैधता देने वाला पहला देश होगा.
दरअसल, अलाना की मां शेरोन सारीनेन दस साल से आईवीएफ तकनीक से मां बनने का प्रयास कर रही थी.
शेरोन कहती हैं, "मैं अयोग्य महसूस कर रही थी. मुझे अपराधबोध हो रहा था कि मैं अपने पति को एक बच्चा नहीं दे पा रही हूं. मैं सो नहीं सकती थी और चौबीसों घंटे मेरे दिमाग में यही सब चलता रहता था."

साइटोप्लास्मा

भ्रूण की मरम्मत
1990 के दशक में विकसित साइटोप्लास्मिक ट्रांसफ़र टेस्ट ट्यूब बेबी की उन्नत तकनीक है, जिसमें शुक्राणु को एक अंडाणु में डाला जाता है.
अमरीका के न्यू जर्सी में डॉक्टर ज्याक कोहेन ने एक महिला के साइटोप्लास्म को शेरोन के अंडाणु में स्थानांतरित किया. इसके बाद उसे उसके पति के शुक्राणु के साथ फर्टिलाइज़ किया गया.
बर्नार्डी
माइटोकॉन्ड्रियल बीमारी के चलते बर्नार्डी के सात बच्चों की मृत्यु हो गई थी
इस प्रक्रिया के दौरान कुछ माइटोकॉन्ड्रिया भी स्थानांतरित हुआ और उस महिला का कुछ डीएन भी भ्रूण में पहुंच गया.
शेरोन कहती हैं कि उनकी बेटी अलाना स्वस्थ और अन्य किशोरियों की तरह है.

वह कहती हैं, "मैं इससे बेहतर बच्चे की इच्छा नहीं रख सकती थी. वह कुशाग्र और सुंदर है. उसे गणित और विज्ञान पसंद हैं. जब वो पढ़ नहीं रही होती है तो घर के काम में मेरी मदद करती है."
sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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जब एक किसान को मिला दोमुंहा सांप

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दोमुंहा सांप


तुर्की के उत्तर पश्चिमी इलाके में एक किसान को एक दोमुंहा सांप मिलने की ख़बर है.
क्लिक करेंतुर्की के अख़बार रैडिकल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक गिरेसन के ब्लैक सी प्रांत में यह सांप पाया गया है. अंताल्या शहर में रेंगने वाले जीवों को रखने की एक जगह पर इसे रखा गया है.
सांप की देख-भाल कर रहे ओज़गुर एरेल्दी कहते हैं कि इसके आकार के कारण इस पर लगातार नज़र रखने की जररूत है.
वे कहते हैं, "चूंकि सांप के दो मुंह हैं इसलिए इसकी गर्दन सामान्य सांपों की तुलना में पतली है. ये सांप अपने शिकार को पूरी तरह से निगल कर पचा लेता है. अगर आप इस सांप को बड़ी खुराक देते हैं तो इसका दम घुट सकता है इसलिए हम इसे छोटी छोटी खुराकों में खाना दे रहे हैं."
हालांकि ये सांप अभी कम उम्र है और तेज भागने वाले सांपों की नस्ल का लगता है.

शिकारियों की नज़र

दोमुंहा सांप
अंताल्या एक्वेरियम के रेंगने वाले जीवों को रखने की जगह पर काम करने वाले कुनेयत एल्पगुवेन बताते हैं कि दोमुंहे सांप के जंगल में बचने के आसार बहुत कम होते हैं.
वे कहते हैं, "दोमुंहा होना इसके लिए मुसीबत है. शरीर के इस तरह के ढांचे की वजह से शिकार पर हमला करना इसके लिए हमेशा मुश्किल होता है जबकि शिकारियों की इस पर हमेशा नजर रहती है."
क्लिक करेंहुर्रियेत डेली न्यूज़ के मुताबिक यह सांप अभी दो हफ्ते का ही है और एल्पगुवेन का कहना है कि अगले कुछ महीनों के भीतर इस सांप की लंबाई 20 सेंटीमीटर हो जाने की संभावना है.

इस महीने की शुरुआत में इसी अखबार ने पश्चिमी तुर्की के एक सागर तट पर क्लिक करेंदोमुंहे डॉल्फ़िन के बहकर आने की खबर छापी थी.
sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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मंगलवार, 9 सितंबर 2014

समूचे ब्रह्मांड को तबाह कर सकता है ‘गॉड पार्टिकल’: स्टीफन हॉकिंग

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समूचे ब्रह्मांड को तबाह कर सकता है ‘गॉड पार्टिकल’: स्टीफन हॉकिंग

लंदन : भौतिकशास्त्री स्टीफन हॉकिंग ने आगाह किया है कि महज दो साल पहले वैज्ञानिकों ने जिस मायावी कण ‘गॉड पार्टिकल’ की खोज की थी उसमें समूचे ब्रह्मांड को तबाह-बरबाद करने की क्षमता है।
एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार हॉकिंग ने एक नई किताब ‘स्टारमस’ के प्राक्कथन में लिखा कि अत्यंत उच्च उर्जा स्तर पर हिग्स बोसोन अस्थिर हो सकता है। इससे प्रलयकारी निर्वात क्षय की शुरुआत हो सकती है जिससे दिक् और काल ढह जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस ब्रह्मांड में हर जो चीज अस्तित्व में है हिग्स बोसोन उसे रूप और आकार देता है।
हॉकिंग ने बताया, हिग्स क्षमता की यह चिंताजनक विशिष्टता है कि यह 100 अरब गिगा इलेक्ट्रोन वोल्ट पर अत्यंत स्थिर हो सकती है। वह कहते हैं, इसका यह अर्थ हो सकता है कि वास्तविक निर्वात का एक बुलबुला प्रकाश की गति से फैलेगा जिससे ब्रह्मांड प्रलयकारी निर्वात क्षय से गुजरेगा।
हॉकिंग ने आगाह किया, यह कभी भी हो सकता है और हम उसे आते हुए नहीं देखेंगे। बहरहाल, उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रलय के निकट भविष्य में होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन उच्च उर्जा में हिग्स के अस्थिर होने के खतरे इतने ज्यादा हैं कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। sabhar :http://zeenews.india.com/

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सोमवार, 8 सितंबर 2014

हिम मानव की संभावना

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हिम मानव के लिए चित्र परिणाम

फोटो : गूगल

हिमालय पे मिले हिम मानव के  बालों  का डीएनए  का  जांच करने के बाद ब्रिटिश वैज्ञानिको ने ये दावा किया की  धुव्रीय  भालू जैसा एक प्राणी हिमालय पे मौजूद है ।धुव्रीय  भालुओं की की इस प्रजाति को अभी तक विलुप्त माना जाता था  40 हजार पहले का इसका जीवाश्म पाया गया था ।

जी हाँ, दुनिया में हिममानव भी है

यह कहना है उस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के सहभागियों का, जो रूस के दक्षिणी साइबेयाई इलाके के केमेरेवा प्रदेश में

यह कहना है उस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के सहभागियों का, जो रूस के दक्षिणी साइबेयाई इलाके के केमेरेवा प्रदेश में सम्पन्न हुआ। पहाड़ी शोरिया या गोरनाया शोरिया अभियान से वापिस लौटने वाले वैज्ञानिक कुछ एसी चीज़ें लेकर वापिस लौटे हैं, जिन्हें कोई मानव ही तैयार कर सकता है। और अब उनका मानना है कि ये चीज़ें उस बात में कोई संदेह नहीं रहने देतीं कि साइबेरिया में येती यानी हिममानव भी रहता है...  साभार :http://hindi.ruvr.ru/

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रविवार, 7 सितंबर 2014

महिला की पीठ में उगी नाक..!

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में एक महिला का के जरिए पक्षाघात का इलाज किया जाना था, लेकिन आठ वर्ष बाद महिला की उग आई। डॉक्टर ने उसका इलाजा करने के लिए उसकी पीठ में एक स्टेम सेल इस उम्मीद से छोड़ दी थी कि क्षतिग्रस्त नर्व का इलाज हो जाएगा। लेकिन इलाज सफल नहीं हुआ और महिला ने शिकायत की कि उसकी पीठ में लगातार दर्द रहता है। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस घटना के आठ वर्ष बाद उसकी पीठ में एक नाक उग आई थी जो कि तीन सेमी लम्बी थी और इसमें हड्‍डियां भी थीं। 

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर ने महिला की पीठ में नेजल टिशू डाल दिया था। डेली मेल ऑन लाइन डॉट कॉम में छपी एक खबर के मुताबिक अब अमेरिकी नागरिक इस अज्ञात महिला का पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन के ‍हास्पिटल द इगेज मोनिज में इलाज किया गया था। तब डॉक्टर ने उसकी रीढ़ की हड्‍डी में एक स्टेम सेल टिशू डाल दिया था। तब डॉक्टरों ने सोचा था कि ऐसा करने से न्यूरल सेल्स विकसित हो जाएंगी और महिला की रीढ़ की हड्‍डी में जो क्षति हुई थी, वह ठीक हो जाएगी, लेकिन यह इलाज सफल नहीं हो सका था। 

पर पिछले वर्ष आठ वर्षों में इस 36 वर्षीय महिला ने‍ शिकायत की थी कि उसकी पीठ में बहुत तेज दर्द होता रहा है जोकि लगातार बढ़ता जा रहा है। जब डॉक्टरों ने देखा तो उन्हें पता लगा कि उसकी पीठ में 3 सेमी लम्बी नाक उग आई है। यह नेजल टिशू से बनी थी और इसमें थोड़ी सी हड्‍डियां और नर्व ब्राचेंस भी थीं लेकिन ये इस्पाइनल कॉर्ड से जुड़ नहीं पाई थीं।

बाद में, यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा हास्पिटल्स एंड क्लीनिक्स, आयोवा सिटी के न्यूरो सर्जन ब्राइन डीलफी ने इस नाक को काटकर अलग किया। उनका कहना था कि यह नाक घातक नहीं थी लेकिन इसमें से एक गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ निकल रहा था संभवत: इसी कारण से उसकी पीठ में तेज दर्द हो रहा था। 

डेट्रॉयड, मिशिगन की वायने स्टेट यूनिवर्सिटी के स्टेम सेल रिसर्चर ज्यां पेडुजी-नेल्सन का कहना था कि जिन लोगों ने भी नेजल टिशू को ग्रहण किया है उनमें से ज्यादातर ने सुधार का अनुभव किया था। उन्होंने न्यू साइंटिस्ट से कहा था कि इस तरह की विपरीत घटना से मैं दुखी हूं लेकिन इस तरह की घटनाएं एक फीसदी से भी कम होती हैं। इस मामले में स्टेम सेल के विशेषज्ञ प्रोफेसर एलेक्जेंडर सीफैलियान का कहना है कि स्टेम सेल की यह विशेषता होती है कि ये दूसरे प्रकार के सेल में भी बदल जाते हैं। इतना ही नहीं, अगर ठीक समय से इलाज नहीं किया जाता है तो ये कैंसर सेल में भी बदल जाती हैं और इससे बीमार की जान भी जा सकती है। 

इस महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था जिसके कारण से लगातार दर्द का अनुभव होता रहा। दुनिया में ऐसी ही अन्य तरह के समाचार आते रहे हैं। चीन में एक युवक के माथे पर नाक उगाई गई थी क्योंकि उसकी नाक एक कार दुर्घटना में टूट गई थी। चूंकि दुर्घटना के बाद उसकी असली नाक में संक्रमण हो गया था और यह विकृत हो गई थी। 22 वर्षीय शियाओ लियान को दूसरी नाक लगाने के ऑपरेशन चीन के फूजियान प्रांत के फूजू नगर में किया गया था।
sabhar :http://hindi.webdunia.com/

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शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

इंसान 2040 तक खोज निकालेगा एलियन

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न्यूयॉर्क। इंसान आगामी 25 वर्षो के अंदर अंतरिक्ष में एलियन निर्मित विद्युत चुंबकीय तरंगों का पता लगाकर कुशाग्र अलौकिक जीवन को खोज निकालने में सक्षम हो जाएगा। यह दावा एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने किया है।
कैलीफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित एसईटीआइ [सर्च फॉर एक्ट्राटरेस्ट्रियल इंटेलीजेंस] इंस्टीट्यूट के सेठ शोस्तक के अनुसार, 2040 या इसके बाद तक खगोलविद एलियन निर्मित विद्युत चुंबकीय तरंगों का पता लगाने के लिए तारा मंडलों की बारीकी से पर्याप्त जांच कर चुके होंगे। उन्होंने यह बात पिछले सप्ताह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में नासा के 2014 अभिनव उन्नत अवधारणा विषयक संगोष्ठी में चर्चा के दौरान कही। स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, शोस्तक ने कहा कि मुझे लगता है कि हम इस प्रकार के प्रयोगों का इस्तेमाल कर दो दर्जन सालों के अंदर अलौकिक जीवन का पता लगा लेंगे।

उन्होंने कहा कि अभी तक कुछ हजार तारा मंडलों को देखने के बावजूद हमें अब से अगले 24 वर्षो तक हो सकता है कि दस लाख तारा मंडलों पर गौर करना होगा। कुछ पाने के लिए दस लाख की संख्या सही है। शोस्तक की यह भविष्यवाणी नासा के अंतरिक्ष दूरबीन केपलर की प्रगति पर आधारित है जिससे आकाशगंगा में मौजूद जीवन के योग्य ग्रहों के प्रमाण मिल चुके हैं। उनका विश्वास है कि पांच तारा मंडलों में से एक में कम से कम एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन की उत्पत्ति हो सकती है।

यहां एलियंस उतरते हैं


अंग्रेजी फिल्मों या हिंदी फिल्मों में आपने जादू और जोकर फिल्म में अक्षय कुमार के साथ एलियन को देखा होगा। ये सारे एलियन केवल पर्दे के लिए ही होते हैं और हम यह मानकर चलते हैं कि एलियंस का कोई अस्तित्व नहीं होता। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि दुनिया में एक ऐसी भी जगह है जहां एलियन उतरते हैं और इसका प्रमाण भी है।
रूस में यूराल क्षेत्र एक ऐसी ही जगह है। माना जाता है कि यहां एलियंस उतरते हैं। इस रहस्यमय स्थल पर जाने वालों को अज्ञात और चमत्कारिक शक्तियों का आभास होता है। रूस का बरमूडा त्रिकोण कहलाने वाला पर्म जोन कई रहस्यमयी बातों के लिए जाना जाता है। कहते हैं यहां जाने वाला कोई भी बीमार व्यक्ति बिना इलाज के ठीक हो जाता है। यहां कुछ रहस्यमय आवाजें भी सुनाई देती हैं। यहां कई बार उड़नतश्तरियों को देखा गया है। अभी हाल में यहां एक विशालकाय उल्कापिंड भी गिरा था। यहां के निवासी यहां अंतरिक्ष यानों के उतरने की बात करते हैं। अभी तक कोई भी देश इस रहस्यमय स्थान के रहस्यों से पर्दा नहीं उठा पाया है। sabhar :http://www.jagran.com/

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अब जूते बताएंगे सही रास्ता

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यह भी बताते हैं कि कितनी कैलरी खर्च हुई।




ये खास जूते सितंबर से बिक्री के लिए बाजार में आएंगे। इनमें ब्लूटूथ ट्रांसरिसीवर लगा है जो पहनने वाले के स्मार्टफोन के ऐप से जुड़ा है। गूगल मैप के जरिए जूते सही दिशा बताने के लिए वाइब्रेट करते हैं और यूजर को बताते हैं कि दांएं या बाएं किस ओर मुड़ना है। 

इस तरह के जूते बनाने का आइडिया 30 वर्षीय क्रिस्पियान लॉरेंस और 28 साल के अनिरुद्ध शर्मा को आया। जूते की कीमत 6,000 से लेकर 9,000 रुपये के बीच है। 2011 में दोनों ने एक अपार्टमेंट से छोटी सी टेक कंपनी की स्थापना की और अब इसमें 50 लोग काम करते हैं। लॉरेंस बताते हैं, हमें यह विचार आया और हमने महसूस किया कि यह नेत्रहीन लोगों के लिए काफी मददगार साबित होंगे, यह बिना ऑडियो और फिजिकल डिस्ट्रैक्शन के काम करेगा।
sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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गुरुवार, 4 सितंबर 2014

छिपकली की पूंछ जैसे उगेंगे मनुष्य के अंग!

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न्यूयॉर्क। अपनी विशेषता के कारण प्राचीन समय से मानव जाति के लिए आकर्षण का केन्द्र रही है। विदित हो कि छिपकली की पूंछ का अपने आप अलग हो जाना और फिर इसके स्थान पर नई पूंछ उग आना मनुष्य के लिए कौतूहल का विषय रहा है।

लेकिन, अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने अब इस पहेली का रहस्य सुलझा लिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी हो गई है कि आखिर कैसे छिपकली नई पूंछ उगा सकती है। वैज्ञानिकों ने वह आनुवांशिक नुस्खा खोज निकाला है जो छिपकली में अंग के पुनर्निर्माण के लिए जिम्मेदार होता है। 

अमेरिका की एरीजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में लाइफ साइंसेज की प्रोफेसर डॉ. केनरो कुसुमी का कहना है किछिपकली में भी 326 वही जीन होते हैं जो मनुष्यों में भी पाए जाते हैं। वे मनुष्यों की शारीरिक संरचना से सबसे ज्यादा मेल खाने वाले जीव हैं। जर्नल 'पीएलओएस वन' में बीस अगस्त को प्रकाशित शोध में कहा गया है कि इस खोज से कई रोगों को ठीक करने में मदद मिल सकती है। 

इस आनुवांशिक नुस्खे का पता लगाकर उन्हीं जीन को मानव कोशिका में आरोपित कर उपास्थि, मांसपेशी और रीढ़ की हड्डी की पुनर्संरचना भविष्य में संभव हो सकती है और इस तरह से मनुष्यों में आर्थराइटिस (गठिया वात) जैसी बीमारी को समाप्त किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अपनी फिर से उगाई गई पूंछ में छिपकली बहुत सारे कार्टिलेज उगाती है और इसी प्रक्रिया को सक्रिय करके मनुष्यों के घुटनों में नए कार्टिलेज उगाए जा सकेंगे
साभार :http://hindi.webdunia.com/

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