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मंगलवार, 4 जुलाई 2023

जापानी वैज्ञानिकों ने बच्चे की शक्ल का रोबोट बनाया, यह स्पर्श और दर्द महसूस कर सकता है; वीडियो वायरल

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रोबोट का नाम 'एफेट्टो' है, इटैलियन में मतलब एफेक्शन यानी प्यार होता है एफेट्टो को 2011 में तैयार किया था, 2018 तक इसमें कई बदलाव किए गए हैं टोक्यो. जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा एंड्रॉइड बेस्ड रोबोट बनाया है, जो दर्द महसूस कर सकता है। इनका दावा है कि वह दिन दूर नहीं जब इंसान रोबोट के साथ रह सकेगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि इंसानों से जैसे रोबोट होना नई बात नहीं है, लेकिन इनमें फीलिंग (अहसास) लाना बड़ी कामयाबी है। ओसाका यूनिवर्सिटी की टीम ने ऐसे रोबोट का एक वीडियो जारी किया है। प्रोफेसर असादा ने इसका नाम 'एफेट्टो' नाम दिया है। इसका इटैलियन में मतलब एफेक्शन यानी प्यार (स्नेह) है। टीम ने रोबोट का चेहरा बनाया है। यह कोमल स्पर्श और कठोर स्पर्श को पहचान कर सकता है और चेहरे पर इसके भाव देखे जा सकते हैं। एफेट्टो को 2011 में इसे लोगों के सामने रखा था। इसके बाद 2018 तक इसमें कई बदलाव किए गए। इसमें इलेक्ट्रिकल चार्ज के जरिए सिंथेटिक स्किन लगाई गई है, इसके जरिए दर्द को महसूस किया जा सकता है। रोबोट में एक स्पर्श और दर्द तंत्रिका तंत्र का एम्बेड कर रहे हैं प्रोफेसर असादा ने बताया कि हम रोबोट में एक स्पर्श और दर्द तंत्रिका तंत्र का एम्बेड कर रहे हैं, ताकि रोबोट को दर्द महसूस हो और वह दूसरों के छूने और दर्द को महसूस कर सके। अगर यह संभव हुआ तो हम देखेंगे कि क्या सहानुभूति और नैतिकता भी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि हम इंटेलिजेंट रोबोट्स के साथ सिम्बाइटिक सोसाइटी बनाने का लक्ष्य रख रहे हैं। प्रोफेसर ने कहा कि हम कामयाब हुए थे तो रोबोट जापान के वृद्ध समाज को भावनात्मक और शारीरिक सहायता प्रदान कर सकते हैं। sabhar Bhaskar.com

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ब्रम्हांडीय ऊर्जा से सभी रोगो का इलाज हो सकता है

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महान योगी स्वामी योगानन्द ने कहा है की रोगो को ब्रम्हांडीय ऊर्जा से ठीक किया जा सकता है योगानन्द युक्तेस्वर गिरी जी के शिष्य थे युक्तेस्वर गिरी जी लाहड़ी महाशय के शिस्य थे लाहड़ी महाशय महावतार बाबा जी के शिष्य थे जिन्होंने काफी चमत्कार किये

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हाइड्रोजन पेट्रोल-डीज़ल और बिजली का कितना बड़ा विकल्प बन पाएगी - दुनिया जहान

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स्कूल की प्रयोगशाला में जिस तरह धातु की दो पट्टियों को पानी में डुबोकर उन्हें बैटरी से जोड़ने पर धातु की पट्टियों पर बुलबुले उभरते है. असल में ये ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बुलबुले होते हैं यानी H2O. पानी के तत्वों का विघटन होकर वो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में बदल जाता है. इस हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है. खाना पकाया जा सकता है, गाड़ियां ही नहीं बल्कि हवाई जहाज़ उड़ाने के लिए भी इस ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है. पेट्रोल या कोयले से कार्बन गैस बनती है और पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाती है. मगर हाइड्रोजन की सबसे अच्छी बात यह है कि जलने के बाद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिल कर पानी में बदल जाते हैं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. स्कूल की प्रयोगशाला में जिस तरह धातु की दो पट्टियों को पानी में डुबोकर उन्हें बैटरी से जोड़ने पर धातु की पट्टियों पर बुलबुले उभरते है. असल में ये ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बुलबुले होते हैं यानी H2O. पानी के तत्वों का विघटन होकर वो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में बदल जाता है. इस हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है. खाना पकाया जा सकता है, गाड़ियां ही नहीं बल्कि हवाई जहाज़ उड़ाने के लिए भी इस ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है. पेट्रोल या कोयले से कार्बन गैस बनती है और पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाती है. मगर हाइड्रोजन की सबसे अच्छी बात यह है कि जलने के बाद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिल कर पानी में बदल जाते हैं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अक्षय ऊर्जा साबित हो सकती है और जलवायु परिवर्तन की समस्या सुलझाने में भी मददगार सिद्ध हो सकती है. हाइड्रोजन से कैसे बनता है ईंधन? ब्रिटेन की शेफ़िल्ड यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग की प्रोफ़ेसर और ब्रिटेन की संस्थाओं में हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर अनुसंधान कर रही रेचेल रॉथमन कहती हैं हाइड्रोजन को कई तरीक़े से जलाकर ईंधन का काम लिया जा सकता है. उनके मुताबिक़, “हाइड्रोजन के जलने से भाप बनती है. हम हाइड्रोजन को किसी छोटी बॉयलर टंकी में जला सकते हैं या बड़ी फ़ैक्ट्रियों या बड़े वाहनों की टंकी में जला सकते हैं. इसे वाहनों को कंबस्टन इंजन में भरकर जलाया जा सकता है या बैटरी के सेल में रख कर ऊर्जा पैदा की जा सकती है.” हाइड्रोजन तो कई तरीके से बनायी जा सकती हैं मगर ज़रूरी यह है कि उसे स्वच्छ तरीके से बनाया जाए. रेचेल रॉथमन कहती हैं, “हाइड्रोजन धरती पर प्राकृतिक रूप से नहीं मिलती लेकिन पानी, हाइड्रोकार्बन के रूप में कोयले और गैस और तेल में मिलती है. हाइड्रोकार्बन स्रोत यानि प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन निकालने की प्रक्रिया को स्टीम मीथेन रिफ़ॉर्मिंग कहते हैं और दुनियाभर में इसका इस्तेमाल हो रहा है और हर साल 12 करोड़ टन हाइड्रोजन बनाया जा रहा है." "लेकिन इसमें समस्या यह है कि इससे कार्बन गैस का उत्सर्जन भी होता है. इसलिए हाइड्रोजन बनाने का सबसे बेहतर तरीका है उसे पानी से निकालने का जिसे इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं. इस प्रक्रिया में सिर्फ़ ऑक्सीजन ही बाहर निकलती है.” हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रियाओं को ब्लू, ग्रीन या ब्राउन रंग के चार्ट में दिखाया जाता है जो यह बताते हैं कि वह प्रक्रिया कितनी स्वच्छ है यानि उस प्रक्रिया से कितनी कार्बन बाहर निकलती है. रेचेल रॉथमन बताती हैं कि फ़िलहाल मिथेन स्टीम रिफ़ॉर्मिंग की ब्राउन प्रक्रिया से कार्बन गैस भी निकल कर हवा में मिलती है. ब्लू प्रक्रिया में अंतर सिर्फ इतना है कि इससे निकलने वाली कार्बन गैस को इकट्ठा कर उसका कोई और इस्तेमाल किया जा सकता है. सबसे बेहतरीन है ग्रीन प्रक्रिया और वो है इलेक्ट्रोलिसिस यानि पानी से हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया. बेहतर तो यह होगा कि हम अपनी ज़रूरत की पूरी ऊर्जा ब्लू और ग्रीन प्रक्रिया से बनाए रेचेल रॉथमन कहती हैं, “हमने जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करने का जो नेट ज़ीरो लक्ष्य रखा है उसके लिए आवश्यक मात्रा में इलक्ट्रोलिसिस से हाइड्रोजन नहीं बन रहा है और उसके लिए जिस किस्म की टेक्नोलॉजी चाहिए, उसके बनने में समय लगेगा. तब तक हम ब्राउन और ब्लू प्रक्रिया वाली हाइड्रोजन का इस्तेमाल करते रहेंगे.” लेकिन क्या सहारा रेगिस्तान में सौर ऊर्जा पैनल बिछा कर वहां इलेक्ट्रोलिसिस के ज़रिए हाइड्रोजन बना कर दुनिया को नहीं सप्लाई की जा सकती? रेचेल रॉथमन कहती हैं इसमें कई दिक्कतें हैं, “सहारा रेगिस्तान में बिजली बना कर दूसरी जगहों पर सप्लाई करना आसान नहीं है. हाइड्रोजन के अणु बहुत सूक्ष्म होते हैं और आसानी से हवा में रिस जाते हैं. इसलिए हाइड्रोजन को बड़े कंटेनरों में भरकर भेजा जाए तो मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन रिस जाएगी." "दूसरी बात उसे लाने के लिए पानी के बड़े जहाज़ों की ज़रूरत होगी जो डीज़ल पर चलते हैं. तो कार्बन कम करने का लक्ष्य तो वहीं का वहीं रह जाएगा.” इससे साफ़ है कि इस्तेमाल की जगह ही हाइड्रोजन बनाई जाए. मगर क्या उसे बनाने के लिए घर के पिछवाड़े जैसी जगहों पर इलेक्ट्रोलायसर उपकरण लगाए जा सकते हैं? रेचेल रॉथमन का कहना है कि सैद्धांतिक तौर पर यह संभव तो है लेकिन चुनौती इसे बड़े पैमाने पर सस्ती कीमत पर बनाने की है ताकि यह व्यवहारिक और टिकाऊ विकल्प बन पाए जो फ़िलहाल आसान नहीं है. विमान, ट्रेन और गाड़ियां यातायात साधनों पर बड़े पैमाने पर ऊर्जा खर्च होती है और यह कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा स्रोत भी है. अब हम सड़कों पर बिजली से चलने वाली गाड़ियां देख रहे हैं जो लिथियम बैटरी पर चलती हैं. मगर बड़े ट्रक, ट्रेन और नौकाओं को चलाने के लिए बैटरी की क्षमता काफ़ी नहीं होती. इन साधनों को चलाने में भी हाइड्रोजन का इस्तेमाल हो सकता है. दुनियाभर में संस्थाओं को स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल के तरीकों पर सलाह देने वाली संस्था में क्लीन एयर टास्क फोर्स के प्रबंधक थॉमस वॉकर कहते हैं कि मालवाहक पोत और ट्रकों को हाइड्रोजन से चलाया जा सकता है. वो कहते हैं, “दुनिया में यातायात साधनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 2-3% हिस्सा बड़ी मालवाहक पोतों से होता है. इन नौकाओं में अमोनिया यानी नाइट्रोजन और हाइड्रोजन को ईंधन की तरह इस्तेमाल करने से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है.” और सामान की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रकों में बैटरी की जगह कंबस्टन इंजन में हाइड्रोजन भर कर चलाने से भी क्या मदद मिल सकती है? थॉमस वॉकर कहते हैं, “ट्रक लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और बैटरियों पर उन्हें चलाने में समस्या यह है कि उन्हें कई बार चार्ज करना पड़ेगा. ये बैटरियां बहुत बड़ी होती हैं और 1000 किलोवॉट की बैटरी चार्ज करने में पांच घंटे तक का समय लग सकता है. लेकिन इसी ट्रक में हाइड्रोजन भरने में सिर्फ़ 20 मिनट लगते हैं.” “मगर हाइड्रोजन के साथ भी एक समस्या है कि इसे भरने के लिए पेचीदा किस्म के उपकरणों की ज़रूरत पड़ती है क्योंकि दबाव की वजह से यह बहुत गर्म हो जाती हैं तो यह सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी होता है कि ट्रक में डालते समय हाइड्रोजन गैस सही कंडिशन में हो और दबाव बिल्कुल सही रहे.” अगर उपकरणों और टेक्नोलॉजी की समस्या सुलझ भी जाए तो यह सुनिश्चित करना होगा कि हर जगह पर्याप्त संख्या में हाइड्रोजन पंप उपलब्ध हों. वॉकर कहते हैं इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने होंगे और इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ़ से रियायतें भी देनी होंगी. लेकिन क्या हवाई जहाज़ चलाने के लिए हाइड्रोजन का इस्तेमाल हो सकता है? थॉमस वाकर का मानना है कि इस दिशा में कुछ प्रयास तो हो रहे हैं, “हमें लगता है कि हवाई यायतायात में हाइड्रोजन के इस्तेमाल से काफ़ी बदलाव लाए जा सकते हैं. यातायात से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 10% विमानों से होता है.” “हमने हाल में देखा है कि छोटे विमानों में हाइड्रोजन के इस्तेमाल के प्रयोग के अच्छे नतीजे दिखाई दिए हैं. हाइड्रोजन के इस्तेमाल के लिए हवाई ज़हाज़ के इंजन में बदलाव लाया जा रहा है.” मगर थॉमस वॉकर यह भी याद दिलाते हैं कि हवाई यातायात के क्षेत्र में हाइड्रोजन के इस्तेमाल में कम से कम 10 से 20 साल का समय लग सकता है. घर और उद्योगों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल हाइड्रोजन का इस्तेमाल रसोई में खाना बनाने और घरों को गर्म रखने के लिए भी किया जा सकता है. न्यूकासल यूनिवर्सिटी में ऊर्जा विषय की प्रोफ़ेसर सारा वॉकर कहती हैं कि ब्रिटेन में फ़िलहाल खाना बनाने या इमारतों को गर्म रखने के लिए 80% प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है. कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हाड्रोजन इसका विकल्प बन सकता है. साल 2019 से ही ब्रिटेन की सरकार ने कुछ गिने चुने इलाकों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल प्रयोग के तौर पर शुरू कर दिया है. लेकिन उसके लिए कुछ बदलावों की ज़रूरत होगी. वो कहती हैं, “हमें घरों और इमारतों में इस्तेमाल होने वाले उन ब्वायलरों को बदलना होगा जो प्राकृतिक गैस पर काम करते हैं. इसी तरह हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने के लिए खाना पकाने के उपकरण भी बदलने होंगे." "हम देख रहे हैं कि इसके इस्तेमाल से लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ रहा है, वो किस प्रकार इस बदलाव को अपना पा रहे हैं और हाइड्रोजन के इस्तेमाल की पूरी व्यवस्था कैसे काम करती है.” प्रयोग सारा वॉकर कहती हैं कील यूनिवर्सटी में पूरी तरह हाइड्रोजन के ज़रिए हीटिंग की ज़रूरत पूरी करने का प्रयोग किया गया और उसके नतीजे भी अच्छे निकले. ब्रिटेन सरकार 2026 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है इसलिए उसे तय करना होगा कि हाइड्रोजन उत्पादन और सप्लाई नेटवर्क के ढांचे बनाने के लिए किस प्रकार का निवेश करे या फिर बिजली के मूलभूत ढांचा निर्माण पर बल दे. पूरी दुनिया इस समय प्राकृतिक गैस की क़ीमत में आए उछाल से निपट रही है ऐसे में हाइड्रोजन के इस्तेमाल की क्या क़ीमत होगी? वो कहती हैं, “स्वाभाविक है कि हाइड्रोजन गैस मंहगी होगी क्योंकि ब्रिटेन में फ़िलहाल 97 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस प्राकृतिक गैस से बनायी जा रही है. हालांकि वो तरीक़ा स्वच्छ है फिर भी हमें देखना है कि हम साफ़ ऊर्जा कम क़ीमत पर कैसे बना सकते हैं.” सारा वॉकर का यह भी कहना है कि हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में अपनाने के शुरुआती दौर में इसका इस्तेमाल इमारतों को गर्म करने के बजाय अगर बड़े उद्योगों में किया जाए तो बेहतर रहेगा. उनके अनुसार, “हाइड्रोजन का इस्तेमाल पहले उद्योगों को ऊर्जा सप्लाई में होना चाहिए जैसे कि शीशा और धातु और केमिकल फ़ैक्ट्रियां जहां ऊंचे तापमान की ज़रूरत पड़ती है. वहां हाइड्रोजन का इस्तेमाल शुरुआत में अधिक आसान हो सकता है.” जहां तक घरों और इमारतों को गर्म रखने का सवाल है, सारा वॉकर का कहना है कि फ़िलहाल उसके लिए हमें दूसरे ईंधन का इस्तेमाल करना चाहिए. क्या ये हवाई दावे हैं? रॉबर्ट हावर्थ जीव वैज्ञानक हैं और पर्यावरणीय मामलों के विशेषज्ञ भी. वो अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं और हाइड्रोजन को ईंधन की तरह इस्तेमाल करने को लेकर उन्हें कई संदेह हैं. वो कहते हैं, “पहले कभी हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन की तरह नहीं किया गया है. इसका इस्तेमाल खाद, रिफ़ाइंड पेट्रोलियम या प्लास्टिक जैसी दूसरी चीज़ें बनाने में होता रहा है. कुछ ऊर्जा विशेषज्ञ कहते हैं कि कार्बन उत्सर्जन कम करने में यह काम आएगा लेकिन मेरे ख़्याल से कार्बन उत्सर्जन कम करने में हाइड्रोजन की भूमिका होगी लेकिन काफ़ी छोटी भूमिका होगी. मगर पिछले कुछ सालों में इसकी भूमिका को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है.” रॉबर्ट हावर्थ कहते हैं कि पानी से बिजली के ज़रिए इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया से हाइड्रोजन बनाना बिजली का अच्छा इस्तेमाल नहीं होगा. “इलेक्ट्रोलिसिस से हाइड्रोजन बनाना किफ़ायती तरीक़ा नहीं है क्योंकि इसमें बिजली से पैदा होने वाली लगभग 40% ऊर्जा बेकार हो जाएगी और जो हाइड्रोजन बनेगा उसे दूसरी जगहों पर ले जाने के दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा रिस जाएगा. इसे घर की रसोई में या घरों की हीटिंग के लिए इस्तेमाल करना बिल्कुल भी व्यवहारिक या किफ़ायती नहीं होगा.” रॉबर्ट हावर्थ का मानना है इससे बेहतर तरीका तो घरों को गर्म करने के लिए बिजली का इस्तेमाल है. वहीं वो ब्लू हाइड्रोजन यानी गैस या तेल से निकालने वाले हाइड्रोजन की भी आलोचना करते हैं. “ब्लू हाइड्रोजन बनाने का काम 10 साल से चल रहा है लेकिन इस प्रक्रिया से कार्बन उत्सर्जन में कोई ख़ास कमी नहीं आई है. वहीं हाइड्रोजन जब पर्यावरण में घुलता है तो वो धरती की तापमान बढ़ाता है क्योंकि वो पर्यावरण की दूसरी गैसों और तत्वों से मिलकर उनकी रासायनिक संरचना को बदल देता है. हाइड्रोजन के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन से मिलने से भाप भी बनती है और तापमान बढ़ता है.” तो फिर हाइड्रोजन को लेकर दुनिया में इतना उत्साह क्यों है? रॉबर्ट हावर्थ कहते हैं, “सरकार और प्राकृतिक गैस और तेल उद्योग इसे बहुत बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहा है. वो इसलिए भी ऐसा कर रहे हैं क्योंकि वो प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को प्रमोट करना चाहते हैं. दूसरे वो चाहते हैं कि इन गैस पाइपलाइनों का इस्तेमाल जारी रहे. उनका दावा है कि ये पाइपलाइनें हाइड्रोजन सप्लाई के काम भी आ सकती हैं. लेकिन मौजूदा पाइप लाइनों से हाइड्रोजन की सप्लाई नहीं हो सकती. वो चाहते हैं कि कम से कम 10-20 सालों तक प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल जारी रहे और वो मुनाफ़ा कमाते रहें.” रॉबर्ट हावर्थ का कहना है कि भविष्य में संभवतः हाइड्रोजन विमान और बड़े पोतों में ईंधन की तरह भी काम आए लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में उसकी भूमिका छोटी ही रहेगी.sabhar Bbc.com

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सोमवार, 3 जुलाई 2023

64 योगिनियां साधना

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प्राचीन तंत्र शास्त्र में 64 योगिनियां बताई गई हैं। कहा जाता है कि ये सभी आद्यशक्ति मां काली की ही अलग-अलग कला है। इनमें दस महाविद्याएं तथा सिद्ध विद्याएं भी शामिल हैं। तंत्र के अनुसार घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए मां आद्यशक्ति ने 64 रुप धारण किए थे, जो कालांतर में 64 योगिनी कहलाईं। तंत्र शास्त्र में किसी भी महाविद्या का पूजन आरंभ करने से पूर्व 64 योगिनियों को सिद्ध करने का विधान बताया गया है। इन्हें सिद्ध करने के बाद विश्व में ऐसा कोई काम नहीं जो साधक नहीं कर सकता, अर्थात् साधक स्वयं ही ईश्वरमय हो जाता है। 64 योगिनियों साधना के द्वारा वास्तु दोष, पितृदोष, कालसर्प दोष तथा कुंडली के अन्य सभी दोष दूर हो जाते हैं। इनके अलावा दिव्य दृष्टि (किसी का भी भूत, भविष्य या वर्तमान जान लेना) जैसी कई सिद्धियां बहुत ही आसानी से साधक के पास आ जाती है। परन्तु इन सिद्धियों का भूल कर भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। अन्यथा अनिष्ट होने की आशंका रहती है। चौसठ योगिनियों के नाम इस प्रकार है- (1) बहुरूपा (2) तारा (3) नर्मदा (4) यमुना (5) शांति (6) वारुणी (7) क्षेमकरी (8) ऐन्द्री (9) वाराही (10) रणवीरा (11) वानरमुखी (12) वैष्णवी (13) कालरात्रि (14) वैद्यरूपा (15) चर्चिका (16) बेताली (17) छिन्नमस्तिका (18) वृषवाहन (19) ज्वाला कामिनी (20) घटवारा (21) करकाली (22) सरस्वती (23) बिरूपा (24) कौवेरी (25) भालुका (26) नारसिंही (27) बिराजा (28) विकटानन (29) महालक्ष्मी (30) कौमारी (31) महामाया (32) रति (33) करकरी (34) सर्पश्या (35) यक्षिणी (36) विनायकी (37) विंध्यवासिनी (38) वीरकुमारी (39) माहेश्वरी (40) अम्बिका (41) कामायनी (42) घटाबरी (43) स्तुति (44) काली (45) उमा (46) नारायणी (47) समुद्रा (48) ब्राह्मी (49) ज्वालामुखी (50) आग्नेयी (51) अदिति (52) चन्द्रकान्ति (53) वायुवेगा (54) चामुण्डा (55) मूर्ति (56) गंगा (57) धूमावती (58) गांधारी (59) सर्व मंगला (60) अजिता (61) सूर्यपुत्री (62) वायु वीणा (63) अघोर (64) भद्रकाली तंत्र में 64 योगिनियों की साधना द्वारा मुख्यतः षटकर्मों सिद्ध किए जाते हैं। ये सभी अलौकिक शक्तियों से सम्पन्न होने के कारण साधक को उसकी मनवांछित वरदान देने में सक्षम है। इन्हें सिद्ध कर लेने के बाद साधक जो भी चाहें कर सकता है। संक्षेप में इन्हीं को मातृका भी कहा जाता है और इनकी आराधना के द्वारा साधक विभिन्न प्रकार की दिव्य सिद्धियां प्राप्त कर चमत्कार दिखाने में सक्षम होते हैं। 64 योगिनियों की साधना सोमवार या अमावस्या या पूर्णिमा की रात्रि से आरंभ की जाती है। साधना आरंभ करने से पहले स्नान-ध्यान आदि से निवृत होकर अपने पितृगण, इष्टदेव तथा गुरु का आशीर्वाद लें। इसके बाद गणेश मंत्र तथा गुरुमंत्र का जप किया जाता है ताकि साधना में किसी भी प्रकार का विघ्न न आएं। इसके बाद भगवान शिव की पूजा करते हुए शिवलिंग पर जल तथा अष्टगंध युक्त चावल अर्पित करें। इसके बाद आपकी पूजा आरंभ होती है। अंत में जिस योगिनी को आपको सिद्ध करना हैं उसके मंत्र की कम से कम एक माला अथवा ग्यारह माला का जाप करें। 64 योगिनियों के मंत्र इस प्रकार हैं– (1) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काली नित्य सिद्धमाता स्वाहा। (2) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कपलिनी नागलक्ष्मी स्वाहा। (3) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुला देवी स्वर्णदेहा स्वाहा। (4) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुरुकुल्ला रसनाथा स्वाहा। (5) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विरोधिनी विलासिनी स्वाहा। (6) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विप्रचित्ता रक्तप्रिया स्वाहा। (7) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्र रक्त भोग रूपा स्वाहा। (8) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्रप्रभा शुक्रनाथा स्वाहा। (9) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दीपा मुक्तिः रक्ता देहा स्वाहा। (10) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीला भुक्ति रक्त स्पर्शा स्वाहा। (11) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री घना महा जगदम्बा स्वाहा। (12) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बलाका काम सेविता स्वाहा। (13) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातृ देवी आत्मविद्या स्वाहा। (14) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मुद्रा पूर्णा रजतकृपा स्वाहा। (15) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मिता तंत्र कौला दीक्षा स्वाहा। (16) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महाकाली सिद्धेश्वरी स्वाहा। (17) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कामेश्वरी सर्वशक्ति स्वाहा। (18) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भगमालिनी तारिणी स्वाहा। (19) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्यकलींना तंत्रार्पिता स्वाहा। (20) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरुण्ड तत्त्व उत्तमा स्वाहा। (21) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वह्निवासिनी शासिनि स्वाहा। (22) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महवज्रेश्वरी रक्त देवी स्वाहा। (23) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शिवदूती आदि शक्ति स्वाहा। (24) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री त्वरिता ऊर्ध्वरेतादा स्वाहा। (25) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुलसुंदरी कामिनी स्वाहा। (26) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीलपताका सिद्धिदा स्वाहा। (27) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्य जनन स्वरूपिणी स्वाहा। (28) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विजया देवी वसुदा स्वाहा। (29) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सर्वमङ्गला तन्त्रदा स्वाहा। (30) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ज्वालामालिनी नागिनी स्वाहा। (31) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चित्रा देवी रक्तपुजा स्वाहा। (32) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ललिता कन्या शुक्रदा स्वाहा। (33) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री डाकिनी मदसालिनी स्वाहा। (34) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री राकिनी पापराशिनी स्वाहा। (35) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लाकिनी सर्वतन्त्रेसी स्वाहा। (36) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काकिनी नागनार्तिकी स्वाहा। (37) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शाकिनी मित्ररूपिणी स्वाहा। (38) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री हाकिनी मनोहारिणी स्वाहा। (39) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री तारा योग रक्ता पूर्णा स्वाहा। (40) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री षोडशी लतिका देवी स्वाहा। (41) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भुवनेश्वरी मंत्रिणी स्वाहा। (42) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री छिन्नमस्ता योनिवेगा स्वाहा। (43) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरवी सत्य सुकरिणी स्वाहा। (44) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री धूमावती कुण्डलिनी स्वाहा। (45) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बगलामुखी गुरु मूर्ति स्वाहा। (46) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातंगी कांटा युवती स्वाहा। (47) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कमला शुक्ल संस्थिता स्वाहा। (48) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री प्रकृति ब्रह्मेन्द्री देवी स्वाहा। (49) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गायत्री नित्यचित्रिणी स्वाहा। (50) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मोहिनी माता योगिनी स्वाहा। (51) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सरस्वती स्वर्गदेवी स्वाहा। (52) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अन्नपूर्णी शिवसंगी स्वाहा। (53) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नारसिंही वामदेवी स्वाहा। (54) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गंगा योनि स्वरूपिणी स्वाहा। (55) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अपराजिता समाप्तिदा स्वाहा। (56) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चामुंडा परि अंगनाथा स्वाहा। (57) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वाराही सत्येकाकिनी स्वाहा। (58) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कौमारी क्रिया शक्तिनि स्वाहा। (59) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री इन्द्राणी मुक्ति नियन्त्रिणी स्वाहा। (60) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ब्रह्माणी आनन्दा मूर्ती स्वाहा। (61) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वैष्णवी सत्य रूपिणी स्वाहा। (62) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री माहेश्वरी पराशक्ति स्वाहा। (63) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लक्ष्मी मनोरमायोनि स्वाहा। (64) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दुर्गा सच्चिदानंद स्वाहा। विधिवत मंत्र जाप पूर्ण करने के बाद भगवान शिव की आरती करें तथा साधना समाप्त होने के बाद शिवलिंग पर चढ़ाये गए चावल अलग से रख लें तथा अगले दिन बहते जल या नदी में प्रवाहित कर दें। साधनात्मक अन्य गोपनीय जानकारी प्राप्त करने हेतु आप मुझे संपर्क करें और नाथ संप्रदाय के सेवा का लाभ उठाएं... sabhar Facebook wall gurubalaknath nathsamprday

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शनिवार, 1 जुलाई 2023

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस: पीएम मोदी ने चिकित्सकों के योगदान की सराहना की

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भारत ने 1991 से हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया है, 1882 में डॉ. बिधान चंद्र रॉय के जन्मदिन की याद में - वह डॉक्टर जिनकी देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका थी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के अवसर पर डॉक्टरों द्वारा किए गए काम की प्रशंसा की और उन्हें उच्चतम स्तर के साहस, निस्वार्थता और लचीलेपन का उदाहरण बताया। "डॉक्टर्स दिवस पर, मैं पूरे डॉक्टर समुदाय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। यहां तक ​​कि सबसे अभूतपूर्व व्यस्त समय के दौरान भी, डॉक्टरों ने साहस, निस्वार्थता और लचीलेपन की उच्चतम डिग्री का उदाहरण दिया है। उनका समर्पण उपचार से परे है; यह हमारे समाज को आशा देता है और ताकत, “प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया। केरल राज्य प्रमुख विजयन पिनाराई ने भी डॉक्टरों को बधाई दी और उन्हें हमारे समाज का स्तंभ बताया। sabhar https://sputniknews.in

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बायोबैंक से पता चल रहे हैं बीमारियों के शुरुआती बायोबैंक से पता चल रहे हैं बीमारियों के शुरुआती लक्षण

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एक दशक पहले बीबीसी संवाददाता फ़र्गस वॉल्श ऐसे पहले व्यक्ति बने, जो दुनिया के सबसे बड़े स्कैनिंग प्रोजेक्ट से जुड़े. शरीर पर बढ़ती उम्र का क्या असर होता है, ये समझने के लिए यूके बायोबैंक बनाया गया. इसमें वॉलंटियर्स के दिमाग, दिल और हड्डियों की तस्वीरें ली गईं, जिससे बीमारियों को समझने और उनके इलाज में मदद मिल सकती है. अब दस साल बाद फ़र्गस वॉल्श एक बार फिर स्कैनिंग के लिए गए, ये देखने के लिए कि उनके शरीर में क्या-क्या बदलाव आए हैं.sabhar BBc.com

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शुक्रवार, 30 जून 2023

जापान के वैज्ञानिको ने एक पहनने वाला आर्म बनाया

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जापान के वैज्ञानिको ने एक ऐसा पहनने वाला आर्म बनाया
है जो एक साथ कई कार्य कर सकता है जैसे दुर्गा जी और भगवान विष्णु के कई हाथ होते थे इससे यह साबित होता है की यह कपोल कल्पित परिकल्पना नहीं अपितु सत्य है जैसे जैसे विज्ञान आगे बढ़ता जायेगा सनातन की बाते सत्य साबित होती जाएँगी आने वाले समय में पहनने वाले ड्रोन भी बनाये जायेंगे pic sabhar Dw.de

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मंगलवार, 27 जून 2023

वैक्सीन ला सकती हैं कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव

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कैंसर के इलाज के में वैक्सीन एक बड़ी प्रगति साबित हो सकती है. दशकों के रिसर्च के बाद आखिरकार वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी है और उनका मानना है कि अगले पांच सालों में और भी ऐसी वैक्सीन मिलने लगेंगी. वैज्ञानिक जिन वैक्सीनों पर काम कर रहे हैं वे पारंपरिक तरीके से काम नहीं करेंगी. बल्कि ये वैक्सीन ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर को वापस आने से रोकने में मदद करेंगे. इस प्रायोगिक रिसर्च में स्तन और फेफड़े के कैंसर को लक्ष्य बनाया गया. इस साल जानलेवा त्वचा के कैंसर मेलानोमा और पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में भी सफलता हासिल हुई है. वैज्ञानिक अब पहले से कहीं ज्यादा इस बात की समझ रखते हैं कि कैंसर, शरीर के इम्यून सिस्टम से कैसे अपने को छिपाये रखता है. कैंसर की वैक्सीन कैंसर सेल को ढूंढ़कर उनको मारने का काम करती हैं. कुछ नई वैक्सीन एमआरएनए का इस्तेमाल करती हैं जो बनाई गई तो कैंसर से लड़ने के लिए थीं, लेकिन इनका पहला इस्तेमाल कोविड-19 के लिए हुआ. प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बेहतर बनाने पर जोर डॉ नोरा डिसिस यूडब्लू मेडिसिन के कैंसर वैक्सीन सेंटर, सिएटल में काम करती हैं. उनका कहना है कि वैक्सीन को काम करने के लिए पहले उसे इम्यून सिस्टम के टी सेल को यह सिखाना पड़ेगा कि कैंसर खतरनाक है. एक बार ट्रेनिंग मिल गई तो फिर टी सेल शरीर में कहीं भी खतरे को खत्म कर सकते हैं. विज्ञानसंयुक्त राज्य अमेरिका वैक्सीन ला सकती हैं कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव 3 घंटे पहले3 घंटे पहले कैंसर के इलाज के में वैक्सीन एक बड़ी प्रगति साबित हो सकती है. दशकों के रिसर्च के बाद आखिरकार वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी है और उनका मानना है कि अगले पांच सालों में और भी ऐसी वैक्सीन मिलने लगेंगी. कैंसर कोशिकाओं का थ्रीडी प्रारूप कैंसर की कोशिकाओं को सिकोड़ने और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विकसित करने की तैयारी है वैज्ञानिक जिन वैक्सीनों पर काम कर रहे हैं वे पारंपरिक तरीके से काम नहीं करेंगी. बल्कि ये वैक्सीन ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर को वापस आने से रोकने में मदद करेंगे. इस प्रायोगिक रिसर्च में स्तन और फेफड़े के कैंसर को लक्ष्य बनाया गया. इस साल जानलेवा त्वचा के कैंसर मेलानोमा और पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में भी सफलता हासिल हुई है. वैज्ञानिक अब पहले से कहीं ज्यादा इस बात की समझ रखते हैं कि कैंसर, शरीर के इम्यून सिस्टम से कैसे अपने को छिपाये रखता है. कैंसर की वैक्सीन कैंसर सेल को ढूंढ़कर उनको मारने का काम करती हैं. कुछ नई वैक्सीन एमआरएनए का इस्तेमाल करती हैं जो बनाई गई तो कैंसर से लड़ने के लिए थीं, लेकिन इनका पहला इस्तेमाल कोविड-19 के लिए हुआ. प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बेहतर बनाने पर जोर डॉ नोरा डिसिस यूडब्लू मेडिसिन के कैंसर वैक्सीन सेंटर, सिएटल में काम करती हैं. उनका कहना है कि वैक्सीन को काम करने के लिए पहले उसे इम्यून सिस्टम के टी सेल को यह सिखाना पड़ेगा कि कैंसर खतरनाक है. एक बार ट्रेनिंग मिल गई तो फिर टी सेल शरीर में कहीं भी खतरे को खत्म कर सकते हैं. वैक्सीन से शायद काबू में आ सकेगा कैंसरवैक्सीन से शायद काबू में आ सकेगा कैंसर कैंसर के इलाज के लिए कई तरह के वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है इलाज के लिए वैक्सीन बनाने की प्रगति चुनौतीपूर्ण रही. पहली वैक्सीन, प्रोवेंज, को 2010 में अमेरिका में मंजूरी दी गई. यह वैक्सीन फैले हुए प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए काम में लाई गई थी. इस प्रक्रिया में मरीजों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को लैब में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद उन्हें आईवी के माध्यम से शरीर में वापस डाल दिया जाता है. प्रारंभिक मूत्राशय कैंसर और उन्नत मेलानोमा के इलाज के लिए भी वैक्सीन उपलब्ध हैं. दवा बनाने वाली कंपनियां मोडेर्ना और मर्क मिलकर मेलानोमा के मरीजों के लिए व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन विकसित कर रहे हैं. इसके लिए एक बड़ा अध्ययन इसी साल शुरू होगा. ये वैक्सीन कैंसर टिश्यू में मिलने वाले सैकड़ों म्यूटेशनों पर आधारित होंगे. व्यक्तिगत वैक्सीन का यह फायदा है कि यह इम्यून सिस्टम को बेहतर रूप से ट्रेन करके कैंसर की कोशिकाओं को मार सकते हैं. लेकिन जाहिर है यह वैक्सीन महंगे होंगे. वैक्सीन के लिए चाहिए स्वयंसेवी मरीज वहीं यूडब्लू मेडिसिन में जो वैक्सीन विकसित किए जा रहे हैं, वे ज्यादा लोगों पर काम करेंगे, ना कि केवल एक मरीज पर. फिलहाल स्तन के प्रारंभिक और गंभीर कैंसर, फेफड़े और ओवेरियन कैंसर के लिए रिसर्च चल रहा है. अगले साल तक कुछ नतीजे आने की उम्मीद भी है sabhar dw.de

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गुरुवार, 22 जून 2023

भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं.

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 भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही 


भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है.


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रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."

लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी.

इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी 

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क भारत के इंटरनेट व्यापार में पैर जमाना चाहते हैं. लेकिन एशिया के सबसे बड़े सेठ से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही 


रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."


न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकातन्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकात



इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी होनी चाहिए.



रिलायंस और स्टारलिंक के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. भारतीय टेलिकॉम उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक, रिलायंस भारत सरकार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए दबाव डालती रहेगी. वह पूरी कोशिश करेगी कि भारत सरकार विदेशी कंपनियों की मांग न माने.


5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी, सरकार ने कमाए 1.5 लाख करोड़


मस्क के लिए बहुत कुछ दांव पर है. वह 2021 से भारत में स्टारलिंक कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मस्क ने भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने पर चर्चा की.


दूसरी तरफ अंबानी जानते हैं कि दिग्गज विदेश प्लेयरों के आंगन में आने से उनके कारोबार को भी मुश्किलें होंगी. नीलामी के मामले में स्टारलिंक, एमेजॉन सैटेलाइट इंटरनेट इनिशिएटिव और ब्रिटिश सरकार के समर्थन वाली कंपनी वनवेब की एक जैसी राय है.


भारतीय बाजार के लिए लोकल और ग्लोबल अरबपति में टक्कर



रिलायंस जियो ने 2016 में भारत के टेलिकॉम बाजार में कदम रखते ही ग्राहकों को मुफ्त डाटा बांटना शुरू किया. साल भर के भीतर मुकेश अंबानी की कंपनी ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसे जमे जमाए बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ बाजार पर दबदबा बना लिया. आज जियो के पास 43.9 करोड़ ग्राहक हैं. भारत भर में उसके 80 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.




लेकिन अब एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का सामना दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार इलॉन मस्क से होने जा रहा है. न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मस्क ने कहा कि वह भारत में स्टारलिंक सर्विस लॉन्च करने को बेताब हैं. टेस्ला के संस्थापक मस्क के मुताबिक सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली उनकी कंपनी भारत के सुदूर गांवों को तेज इंटरनेट से जोड़ सकती है. मस्क मानते हैं कि दुर्गम गांवों को "इससे बहुत बड़ी मदद मिलेगी."


न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकातन्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकात

न्यूयॉर्क में मोदी से मस्क की मुलाकाततस्वीर: India's Press Information Bureau/REUTERS

रिलायंस जियो के करोड़ों ग्राहकों की जानकारी लीक


इलॉन मस्क ने यह नहीं बताया कि स्टारलिंक की सीधी टक्कर मुकेश अंबानी से होने जा रही है. असल में भारत सरकार सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम नीलाम करना चाहती है. लेकिन मस्क कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार नीलामी के बजाए ग्लोबल ट्रेंड फॉलो करे और स्पेक्ट्रम लाइसेंस बांट दे. मस्क का तर्क है कि ऐसा करने से तमाम कंपनियां संसाधनों को साझा कर सकेगी. वो मानते हैं कि नीलामी से कंपनियां भौगोलिक सीमाओं में बंध जाएंगी. इससे लागत बढ़ेगी.


जियो की घबराहट की वजह

रिलायंस, स्टारलिंक की इस मांग का विरोध कर रही है. जियो कनेक्शन देने वाली कंपनी की मांग है कि सरकार सार्वजनिक रूप से नीलामी कराए. रिलायंस का कहना है कि विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर, स्थानीय टेलिकॉम प्लेयरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लिहाजा निष्पक्षता के खातिर नीलामी होनी चाहिए.


रिलायंस जियोरिलायंस जियो

रिलायंस जियोतस्वीर: Indranil Aditya/NurPhoto/picture alliance

रिलायंस और स्टारलिंक के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. भारतीय टेलिकॉम उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक, रिलायंस भारत सरकार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए दबाव डालती रहेगी. वह पूरी कोशिश करेगी कि भारत सरकार विदेशी कंपनियों की मांग न माने.


5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी, सरकार ने कमाए 1.5 लाख करोड़


मस्क के लिए बहुत कुछ दांव पर है. वह 2021 से भारत में स्टारलिंक कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान मस्क ने भारत में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने पर चर्चा की.


दूसरी तरफ अंबानी जानते हैं कि दिग्गज विदेश प्लेयरों के आंगन में आने से उनके कारोबार को भी मुश्किलें होंगी. नीलामी के मामले में स्टारलिंक, एमेजॉन सैटेलाइट इंटरनेट इनिशिएटिव और ब्रिटिश सरकार के समर्थन वाली कंपनी वनवेब की एक जैसी राय है.



नीलामी बनाम लाइसेंसिंग

भारत के इंटरनेट बाजार के लिए प्रतिपर्धा कर रही 64 कंपनियों में से 48 ने लाइसेंसिंग का समर्थन किया है. 12 नीलामी के पक्ष में हैं और चार न्यूट्रल स्टैंड वाली हैं.


भारतीय टेलिकॉम इंडस्ट्री के एक और भीतरी सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि रिलायंस को डर है कि विदेशी दिग्गजों की वजह से भारतीय कंपनियों को मुश्किल होगी. भारत के ई-कॉमर्स बाजार में अंबानी की रिटेल कंपनी एमेजॉन से पिछड़ चुकी है. रिलायंस को डर है कि ब्रॉडबैंड सेक्टर में भी यही हाल न हो.


बाजार की समीक्षा करने वालों का अनुमान है कि 2030 तक भारत का ब्रॉडबैंड बाजार 1.9 अरब डॉलर का हो जाएगा. फिलहाल यह 36 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से आगे बढ़ रहा है.


स्टारलिंक का कहना है कि दुनिया भर के 84 देशों में उसकी सेवाओं को मंजूरी मिल चुकी है. उसके पास 15 लाख एक्टिव यूजर्स हैं. एमेजॉन भी 2024 में ऐसी सैटेलाइटों का पहला सेट लॉन्च करने जा रही है. Sabhar Dw.de

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Google इंडिया में अपने स्मार्टफोन Pixel का उत्पादन करेगी

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गूगल ने इंडिया में कुछ कंपनियों से बातचीत शुरू की है। इनमें Lava International और Dixon Technologies India शामिल हैं। इसके अलावा वह Foxconn Technology Group की इंडियन यूनिट Bharat FIH से भी बात कर रही है। गूगल जिन संभावित पार्टनर्स से बातचीत कर रही है, उनमें ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री की PLI स्कीम के तहत इनसेंटिव मिला है। दुनिया में स्मार्टफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी Apple ने इंडिया में अपना सप्लायर बेस बढ़ाने का लिए इस स्कीम का फायदा उठाया है

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शनिवार, 17 जून 2023

सेक्स ऊर्जा है, उस ऊर्जा को रूपांतरण करने की कला जानो-ओशो *

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 * जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर। उस ऊर्जा के पूरे अर्थ, मार्ग, व्यवस्था को जान कर उससे मुक्त हो सकता है। 


आंखें बंद कर लेने से कोई कभी मुक्त नहीं हो सकता। आंखें बंद कर लेने वाले सोचते हों कि आंख बंद कर लेने से शत्रु समाप्त हो गया है, तो वे पागल हैं। सेक्स के संबंध 

में आदमी ने शुतुरमुर्ग का व्यवहार किया है आज तक। वह सोचता है, आंख बंद कर लो सेक्स के प्रति तो सेक्स मिट गया।


अगर आंख बंद कर लेने से चीजें मिटती होतीं, तो बहुत आसान थी जिंदगी, बहुत आसान होती दुनिया। आंखें बंद करने से कुछ मिटता नहीं, बल्कि जिस चीज के संबंध में हम आंखें बंद करते हैं, हम प्रमाण देते हैं कि हम उससे भयभीत हो गए हैं, 

हम डर गए हैं। वह हमसे ज्यादा मजबूत है, उससे हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए हम आंख बंद करते हैं। आंख बंद करना कमजोरी का लक्षण है।


और सेक्स के बाबत सारी मनुष्य-जाति आंख बंद करके बैठ गई है। न केवल आंख बंद करके बैठ गई है, बल्कि उसने सब तरह की लड़ाई भी सेक्स से ली है। और उसके परिणाम, उसके दुष्परिणाम सारे जगत में ज्ञात हैं।


अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, 


सेक्स का दमन मौजूद है। अगर आदमी इतना बेचैन, अशांत, इतना दुखी और पीड़ित है, तो इस पीड़ित होने के पीछे उसने जीवन की एक बड़ी शक्ति को बिना समझे उसकी तरफ पीठ खड़ी कर 

ली है, उसका कारण है। और परिणाम उलटे आते हैं।


आदमी को हमने विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना दुखी भी न था।


मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।


क्या आपने कभी सोचा? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते हैं, जाति भूल सकते हैं, चेहरा भूल सकते हैं। लेकिन कभी आपको खयाल आया कि आप यह भी भूल सके हैं कि जिससे आप मिले थे,वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सके इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरुष है या स्त्री? जब सारी बातें भूल जाती हैं तो यह क्यों नहीं भूलता?


हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। इसलिए सब बात भूल जाती है, लेकिन यह बात नहीं भूलती। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, 


जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते - यह आग क्या थी?


और मैं आपसे कहता हूं, अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। मनुष्य के भीतर बिजली 

से भी बड़ी ताकत है सेक्स की। मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की।


कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है? उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा 

हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। 

एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम - 

ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। 


सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा सकते। 


               * सम्भोग से समाधि की ओर *


                           * ओशो * 


                                                             ***** DSB *****

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