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सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

मानवता सुरक्षित रह सकती यदि प्रभावी कदम उठाए जाएं

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 बिलकुल, मैं “मानवता को बचाने और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अगले 50 सालों में जरूरी कदम” की **ठोस और क्रमबद्ध सूची** बना देता हूँ। इसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: **सामाजिक, तकनीकी/वैज्ञानिक, और नैतिक/दार्शनिक कदम**।


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## 1. **सामाजिक कदम**


1. **सर्व शिक्षा अभियान और जागरूकता**


   * सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और Critical Thinking सिखाना।

   * सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की समझ बढ़ाना।


2. **समानता और न्याय सुनिश्चित करना**


   * लैंगिक, आर्थिक और जातीय असमानताओं को कम करना।

   * गरीब और कमजोर वर्गों को अवसर देना।


3. **सामाजिक सहयोग और वैश्विक शांति**


   * देशों और समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाना।

   * हिंसा और युद्ध के विकल्प के रूप में संवाद और कूटनीति को प्रोत्साहित करना।


4. **स्वस्थ जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य**


   * हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएँ और पोषण सुनिश्चित करना।

   * मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देना।


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## 2. **तकनीकी और वैज्ञानिक कदम**


1. **पर्यावरण संरक्षण और जलवायु नियंत्रण**


   * नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, हाइड्रो) अपनाना।

   * जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता की सुरक्षा।


2. **सुरक्षित और जिम्मेदार तकनीक**


   * AI, रोबोटिक्स और जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग पर नियंत्रण।

   * डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता सुनिश्चित करना।


3. **वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार**


   * स्वास्थ्य, ऊर्जा, अंतरिक्ष और जलवायु क्षेत्र में अनुसंधान बढ़ाना।

   * प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के लिए तैयारी।


4. **स्मार्ट शहर और जीवन संरचना**


   * शहरों को टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना।


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## 3. **नैतिक और दार्शनिक कदम**


1. **सहानुभूति और सहयोग का विकास**


   * व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर दूसरों के लिए चिंता और सहायता बढ़ाना।

   * अहिंसा और सहिष्णुता को जीवन का हिस्सा बनाना।


2. **नैतिक शिक्षा और आदर्श**


   * बच्चों और युवाओं को नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और जिम्मेदारी सिखाना।

   * समाज में विश्वास और पारदर्शिता को प्रोत्साहित करना।


3. **सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि**


   * कला, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानसिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखना।


4. **सकारात्मक सोच और दीर्घकालिक दृष्टि**


   * केवल व्यक्तिगत लाभ की बजाय मानवता के दीर्घकालिक हित को प्राथमिकता देना।

   * भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सतत सोच और योजना बनाना।


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### 🔹 निष्कर्ष


यदि ये कदम सच में लागू किए जाएँ, तो आने वाले 50 सालों में मानवता **न केवल जीवित रहेगी, बल्कि विकसित और नैतिक रूप से मजबूत भी होगी।**

इनमें **सामाजिक चेतना + तकनीकी समझ + नैतिक मूल्यों** का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण 


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गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

क्या केवल सेक्स से ही बंधे रह सकते हैं स्त्री और पुरुष

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L "क्या केवल सेक्स से ही बंधे रह सकते हैं स्त्री और पुरुष?"


सेक्स यह शब्द सुनते ही बहुत से लोगों के मन में या तो एक तीव्र आकर्षण उत्पन्न होता है या फिर एक प्रकार का झिझक और संकोच। भारतीय समाज में यह विषय आज भी पूरी तरह से खुलकर नहीं बोला जाता, लेकिन यह मानवीय अस्तित्व का एक स्वाभाविक और आवश्यक हिस्सा है। परंतु जब यह प्रश्न उठता है कि क्या केवल सेक्स के आधार पर कोई संबंध टिक सकता है, या क्या एक महिला और पुरुष सिर्फ सेक्स के कारण ही जीवनभर एक-दूसरे से बंधे रह सकते हैं, तब यह मुद्दा केवल शारीरिक नहीं रह जाता यह मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और यहां तक कि आत्मिक स्तर तक पहुंच जाता है।


मानव मनोविज्ञान की गहराई में उतरें तो यह स्पष्ट होता है कि सेक्स, रिश्तों का एक अभिन्न अंग ज़रूर हो सकता है, लेकिन यह रिश्ता बनाए रखने का इकलौता आधार नहीं हो सकता। शुरूआती आकर्षण चाहे जितना भी तीव्र क्यों न हो, समय के साथ उसका असर फीका पड़ता है। यह एक प्रकार का रसायन है, जो संबंध की शुरुआत में बहुत प्रभावशाली होता है, परंतु समय के साथ इसके प्रभाव को बनाए रखने के लिए भावनात्मक समझ, आपसी आदर और मानसिक सामंजस्य की आवश्यकता होती है।


सेक्स से जुड़े हार्मोन जैसे ऑक्सिटोसिन और डोपामिन, व्यक्ति को एक अस्थायी सुख और जुड़ाव का अनुभव जरूर कराते हैं। इन हार्मोनों के कारण दो व्यक्ति एक-दूसरे के बहुत करीब महसूस कर सकते हैं, लेकिन यह निकटता स्थायी तभी हो सकती है जब उनके बीच संवाद, समझ और भरोसा हो। एक रिश्ता, जिसमें केवल शारीरिक संबंध हैं, वह कुछ समय बाद खोखला लगने लगता है, क्योंकि इंसान केवल शरीर नहीं है वह भावनाओं, विचारों, उम्मीदों और आत्मीयता से भी बना है।


एक महिला जब किसी संबंध में होती है, तो सामान्यतः वह सेक्स के साथ-साथ सुरक्षा, स्नेह, समझदारी और सम्मान की अपेक्षा करती है। उसके लिए सेक्स केवल शारीरिक सुख नहीं होता, बल्कि एक गहराई से जुड़ा अनुभव होता है जिसमें वह अपना दिल खोलती है। यदि उसे लगे कि उसके साथ केवल शारीरिक उपयोग हो रहा है और भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, तो वह बहुत जल्द उस संबंध से खुद को अलग कर सकती है, चाहे वह कितना भी आकर्षक क्यों न हो।


पुरुषों की बात करें, तो पारंपरिक रूप से समाज ने उन्हें यह सिखाया है कि वे सेक्स को एक प्रमुख आवश्यकता मानें। परंतु आज का पुरुष भी बदल रहा है। वह भी भावनात्मक समर्थन, समझ और अपनापन चाहता है। अकेले सेक्स उसे खुशी नहीं देता वह एक ऐसा रिश्ता चाहता है जिसमें उसे भी सुना जाए, समझा जाए और जहाँ वह अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सके। यदि ऐसा नहीं होता, तो पुरुष भी उस संबंध से ऊबने लगता है।


अब यदि हम समाज और संस्कृति की बात करें, तो भारतीय सामाजिक व्यवस्था में सेक्स को हमेशा ही विवाह या लंबे रिश्ते के संदर्भ में देखा गया है। यहाँ सेक्स केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं और दो परिवारों के जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि जब कोई रिश्ता केवल सेक्स पर आधारित होता है, तो समाज उसे स्थायित्व नहीं देता, बल्कि उसे अस्वीकार कर देता है। यह सामाजिक अस्वीकार्यता कई बार मानसिक और भावनात्मक दबाव बनकर व्यक्ति को भी भीतर से तोड़ने लगती है।


आज के आधुनिक समय में, जब रिश्ते सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए पलक झपकते ही बन और बिगड़ जाते हैं, तब यह सवाल और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। बहुत से लोग आज इस भ्रम में जी रहे हैं कि शारीरिक आकर्षण और नियमित सेक्स एक मजबूत रिश्ते की निशानी है। लेकिन जब जीवन की वास्तविक कठिनाइयाँ सामने आती हैं जैसे आर्थिक समस्याएं, मानसिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, या स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ तब यह स्पष्ट हो जाता है कि केवल सेक्स किसी रिश्ते को टिकाए रखने में असमर्थ है।


इसके विपरीत, वे रिश्ते अधिक स्थायी सिद्ध होते हैं जिनमें संवाद होता है, एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र होती है, और दोनों साथी मिलकर एक-दूसरे के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं। जहाँ केवल सेक्स होता है, वहाँ उत्साह भले हो, परंतु स्थायित्व की गारंटी नहीं होती। वहाँ आकर्षण होता है, पर समर्पण नहीं। वहाँ उत्तेजना होती है, पर समझदारी नहीं।


एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इंसान की आवश्यकताएं समय के साथ बदलती हैं। बीस की उम्र में जो चीज़ें प्राथमिक लगती हैं, चालीस की उम्र में उनका महत्व कम हो जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, व्यक्ति सेक्स के बजाय companionship (साथ) की अधिक तलाश करने लगता है। वह चाहता है कि कोई ऐसा हो जो उसे बिना कहे समझे, जो उसकी चुप्पी में भी अर्थ तलाशे, और जिसके साथ वह बिना किसी दिखावे के जी सके। ऐसे में केवल सेक्स पर आधारित रिश्ता उसके लिए सतही और अधूरा हो जाता है।


यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सेक्स के बिना भी गहराई से टिके रहते हैं। कुछ जीवनसाथी ऐसे भी होते हैं जो शारीरिक संबंधों के अभाव के बावजूद एक-दूसरे के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते हैं, क्योंकि उनके बीच सम्मान, समझ और जीवन के प्रति समान दृष्टिकोण होता है। वहीं, कई बार यह भी देखा गया है कि बहुत अच्छे शारीरिक संबंधों के बावजूद रिश्ते टूट जाते हैं, क्योंकि उनमें वह भावनात्मक परिपक्वता और आपसी समझ नहीं होती।


इसलिए, निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि सेक्स एक रिश्ता बनाने का माध्यम हो सकता है, लेकिन उसे बनाए रखने का आधार नहीं। यह रिश्ते को एक शुरुआत दे सकता है, लेकिन उसे जीवनभर की यात्रा में बदलने के लिए उसमें बहुत कुछ और चाहिए संवाद, समझ, संवेदना, साझेदारी और सबसे महत्वपूर्ण, एक-दूसरे के प्रति आत्मीयता और सम्मान। जब तक यह सारे तत्व एक साथ मौजूद न हों, तब तक कोई भी रिश्ता केवल सेक्स के आधार पर नहीं टिक सकता।


यह बात पुरुष और महिला दोनों पर समान रूप से लागू होती है। दोनों को चाहिए शारीरिक संतुष्टि के साथ मानसिक सुकून, आत्मिक जुड़ाव के साथ भावनात्मक गहराई। और जब यह संतुलन बनता है, तभी कोई रिश्ता वास्तव में पूर्ण, संतोषजनक और स्थायी बन पाता है। sabhar public authar Facebook 


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मंगलवार, 3 जून 2025

2050 तक मौत हमेशा के लिए टल सकती है

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 साइंटिस्ट्स का कहना है कि अगर कोई 2050 तक ज़िंदा रहा, तो वह मौत को हमेशा के लिए टाल सकता है! यह सुनकर भले ही आपको अविश्वसनीय लगे, लेकिन यह एक गंभीर वैज्ञानिक दावे की शुरुआत है। हाल के शोधों और विकासों के अनुसार, चिकित्सा और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इतनी प्रगति हो सकती है कि इंसान अपनी जीवनकाल को बढ़ाने में सक्षम हो सकता है, और शायद एक दिन "अमरता" की सीमा तक पहुंच सकता है।


आजकल के वैज्ञानिक शोधों में जीवनकाल बढ़ाने के लिए कई उपायों पर काम हो रहा है, जैसे एंटी-एजिंग टेक्नोलॉजी, जीन थेरेपी, स्टेम सेल रिसर्च और क्लोनिंग। साथ ही, कुछ शोधकर्ता न्यूरो साइंस और बायोमेडिकल साइंस के उपयोग से मृत्यु को टालने के तरीकों पर काम कर रहे हैं, ताकि शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने वाली जैविक प्रक्रिया को स्थिर किया जा सके।


हालांकि, अभी यह सभी विचार प्रयोगात्मक हैं और इनमें काफी समय और शोध की आवश्यकता है, लेकिन 2050 तक इस दिशा में संभावनाएं वाकई काफी बढ़ चुकी होंगी। यह दावा इस बात का भी संकेत देता है कि भविष्य में हम मानव जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने से पहले उसे बढ़ा सकते हैं।


#Immortality #LifeExtension #AntiAging #FutureOfMedicine #Biotech #2025viralvideo

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गुरुवार, 10 अप्रैल 2025

कोलेस्ट्रोल) हार्टअटैक,अर्जुन की छाल से ऐसे करे कण्ट्रोल

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 💥 खून में कचरा (Acidity) की वजह से आता है (कोलेस्ट्रोल) हार्टअटैक,अर्जुन की छाल से ऐसे करे कण्ट्रोल.....!!


बागभट्ट जी सुबह दूध पीने को मना करते हैं लेकिन जो सुबह हम चाय पीते हैं उसमें भी दूध का यूज होता है बाग़भट्ट जी के किसी भी सूत्र और शास्त्र में चाय का उल्लेख नहीं किया गया  क्योंकि बाग़भट्ट जी 3500 वर्ष पहले हुए और चाय 250 साल पहले अंग्रेजों के द्वारा लाई गयी ।


हाँ लेकिन उन्होंने काढ़े का जीक्र किया है वो कहते है जो काढ़ा हमारे वात पित्त और कफ को कम करे ऐसा कोई भी कड़ा सुबह दूध में मिलाकर पिया जा सकता है जैसे कि अर्जुन की छाल का काढ़ा वात को सबसे ज्यादा कम करता है यह रक्त की एसिडिटी को कम करता है जो की शरीर की एसिडिटी से भी ज्यादा खतरनाक होती है और हार्ट अटैक का कारण बनती है अर्जुन की छाल सबसे तेजी से रक्त की एसिडिटी को ख़त्म करता है इसलिए अर्जुन की छाल का काढ़ा पीयें


नवम्बर दिसम्बर जनवरी और फ़रवरी में वात सबसे ज्यादा होता है ठण्ड के दिनों में वायु का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और इस समय में अर्जुन की छाल का काढ़ा गर्म दूध में मिलकर पीयें तो औषधि का काम करेगा. याद रहे की यह काढे की तासीर हमेशा गर्म होती है इसलिए इसे ठण्ड के समय में ही प्रयोग करें हमारे देश में कोई भी ठंडा काढ़ा नही होता यदि आप सुबह दूध पीना ही चाहते है तो अर्जुन की छाल के काढे के साथ पीयें.


इससे आपको दो फायदे होंगे भविष्य में आपको हार्ट अटैक कभी नहीं होगा और अब तक आपने जो बेकार चीजें खाई हैं ये उसे शरीर से साफ़ कर देगा क्योंकि यह छाल का काढ़ा रक्त को साफ़ करता है और शरीर में सबसे ज्यादा कचरा(कोलेस्ट्रोल) रक्त में ही होता है


सबसे बड़ी बात तो ये है कि अर्जुन की छाल 100 रूपये किलो मिलती है, जो आप पंसारी की दुकान से ले सकते है और चाय 500 रूपये किलो मिलती है और 3000 रूपये किलो कॉफ़ी मिलती है इसलिए सुबह ठण्ड में चायकॉफी की जगह अर्जुन की छाल का काढ़ा दूध के साथ पीयें


किस तरह करें सेवन  

       एक गिलास दूध और आधा चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर और अगर इसमें गुड़ मिलायेंगे तो बहुत अच्छा यदि गुड़ न मिले तो   खांड या फिर बुरा(राजस्थान,बिहार,यू.पी. वाला चीनी वाला नहीं). ध्यान रहे चीनी का इस्तेमाल न करे अगर मिश्री मिले तो वह गुड़ से भी अच्छा होता है अगर सोंठ है तो उसे भी मिलाया जा सकता है जिससे वह और भी उत्तम क्वालिटी का बन जायेगा क्योंकि अर्जुन छाल और सोंठ दोनों ही वात नाशक है


जाने कौन से रोगों से मिलेगा छुटकारा

    इसे पीने से हड्डियों के समस्त विकार एवं शरीर में वात के सभी रोग जैसे घुटने का दर्द, कंधे का दर्द, डाईबीटीस, हार्ट अटैक ये सब वात के रोग हैं शांत हो जाते है। साभार Facebook 

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रविवार, 30 मार्च 2025

स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व

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 ईस्वर ने स्तन क्यों दिये....?


समझिये...


बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!!


इसे फैशन या दिखावा ना बनायें... और अगर दिखाना ही है तो आपका पति है दूसरे को क्यों दिखाना...?


स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व । जब तक स्त्री माँ नही बन जाती तब तक उसकी ऊर्जा पूर्णतः स्तनों तक नही पहुँचती..!!


शरीर शास्त्री ये प्रश्न उठाते रहते है। कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है। क्योंकि पुरूष को बच्चे को दूध तो पिलाना नहीं है। फिर उनकी क्या आवश्यकता है। वे ऋणात्‍मक ध्रुव है। इसलिए तो पुरूष के मन में स्त्री के स्तनों की और इतना आकर्षण है। वे धनात्‍मक ध्रुव है।


इतने काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैस पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस है। और यह कोई नई बात नहीं है। गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र भी स्तनों के ही है। स्तन उनमें महत्‍वपूर्ण है। बाकी का सारा शरीर ऐसा मालूम पड़ता है कि जैसे स्तनों के चारों और बनाया गया हो। स्तन आधार भूत है।


क्‍योंकि स्तन उनके धनात्मक ध्रुव है। और जहां तक योनि का प्रश्न है वह करीब-करीब संवेदन रहित है। स्तन उसके सबसे संवेदनशील अंग है। और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तनों के आस-पास है।


यही कारण है कि हिंदू कहते है कि जबतक स्त्री मां नहीं बन जाती, वह तृप्त नहीं होती। पुरूष के लिए यह बात सत्य नहीं है। कोई नहीं कहेगा कि पुरूष जब तक पिता न बन जाए तृप्त नहीं होगा। पिता होना तो मात्र एक संयोग है। कोई पिता हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। यह कोई बहुत आधारभूत सवाल नहीं है। एक पुरूष बिना पिता बने रह सकता है। और उसका कुछ न खोये।


लेकिन बिना मां बने स्त्री कुछ खो देती है। क्योंकि उसकी पूरी सृजनात्मकता, उसकी पूरी प्रक्रिया तभी जागती है। जब वह मां बन जाती है। जब उसके स्तन उसके अस्तित्व के केंद्र बन जाते है। तब वह पूर्ण होती है। और वह स्तनों तक नहीं पहुंच सकती यदि उसे पुकारने वाला कोई बच्चा न हो।


तो पुरूष स्त्रियों से विवाह करते है ताकि उन्हें पत्नियाँ मिल सके, और स्त्रियां पुरूषों से विवाह करती है ताकि वे मां बन सकें। इसलिए नहीं कि उन्हें पति मिल सके। उनका पूरा का पूरा मौलिक रुझान ही एक बच्चा पाने में है जो उनके स्त्रीत्‍व को पुकारें।


पश्चिम में बच्चों को सीधे स्तन से दूध न पिलाने का फैशन हो गया है। यह बहुत खतरनाक है। क्योंकि इसका अर्थ यह हुआ कि स्त्री कभी अपनी सृजनात्‍मकता के केंद्र पर नहीं पहुंच सकेगी। जब एक पुरूष किसी स्त्री से प्रेम करता है तो वह उसके स्तनों को प्रेम कर सकता है। लेकिन उन्हें मां नहीं कह सकता।


केवल एक छोटा बच्चा ही उन्हें मां कह सकता है।


कृपया गलत कमेंट ना करें. 🙏🙏

साभार Facebook 

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सोमवार, 24 मार्च 2025

दुनिया का पहला अंतरिक्ष होटल "2027 में,

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 दुनिया का पहला अंतरिक्ष होटल "2027 में, पृथ्वी की कक्षा में खुलने की संभावना है। जिसका नाम 'वॉयेजर होटल' होगा। यह होटल 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाएगा और इस होटल में लगभग 400 लोगों के ठहरने का इंतजाम होगा। इस होटल में बार, लाउंज, सिनेमा और स्पा जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी।"




#viralpost2025シ #facthubanup #viralpost2024 #viralphotochallenge #foodblogger #quotes #facts #couple #love #post Sweta Singh Vlogs Rupesh Kumar 

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विज्ञान अर्थात विषय का ज्ञान: ऋतु सिसोदिया

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 विज्ञान अर्थात विषय का ज्ञान


10 हजार करोड़ की पावर आपके ब्रेन में है इसका सही से उपयोग किया तो आइंस्टीन बन जाओगे आतंकवादी भी बन जाओगे जादूगर भी बन जाओगे लोगो को मोरख भी बनाओगे


सोच पर प्रहार 

हमारे दिमाग का निर्माण कैसे हुआ ऊर्जा भोजन से प्राय होती है केमिकल रिलीज होते है


खोज कीजिये भाई

वैदिक scince सनातन वर्ड ही वेद से निकला मंत्र का प्रभाव साइंस के प्रक्रिया है क्योंकि ऊर्जा का ही खेल है सारा


इसलिए ही तो हम आज भी मांनासिक गुलाम है

क्योंकि ज्ञान को जान नही समझा नही सत्य को धारण कैसे करते जब जानते ही नही थे


लड़ो भिड़ा मार काट बस इसे में उलझाए रखा

बाकी सभी अन्य जाती उठान क्यों कर गयी ज्ञान कौशल को बढ़ाया


हमने अहनकार को इसलिए प्रगति अवरुद्ध हुई


एन्टीनाधारी  निहितार्थ स्वर्थी अल्प श्रम जीवी है परजीवी अधिक है तो कोई खतरा मोल ना लेते इधर उधर लुढ़कते रहते है


समय काल परिस्थितियों अनुरूप वेश बदल लेते

वह लक्षय से भृमित नही थे


प्रत्येक जीव स्वतंत्र है भाई तो क्षत्रय बन्धन में क्यों है अब मौके का लाभ उठाओ ज्ञान कौशल से भरो अपने को  साभार ऋतु सिसोदिया 

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