चूहे में इंसानी दिमाग

मस्तिष्क के प्रत्यारोपण की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक अहम कदम आगे बढ़ाया है. मानव दिमाग का अहम जीन जब उन्होंने चूहे में प्रत्यारोपित किया तो पाया कि चूहे का दिमाग सामान्य से ज्यादा तेज चलने लगा.



रिसर्चरों के मुताबिक इस रिसर्च का लक्ष्य यह देखना था कि अन्य प्रजातियों में मानव दिमाग का कुछ हिस्सा लगाने पर उनकी प्रक्रिया पर कैसा असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रत्यारोपण के बाद चूहा अन्य चूहों के मुकाबले अपना खाना ढूंढने में ज्यादा चालाक पाया गया. उसके पास नए तरीकों की समझ देखी गई.
एक जीन के प्रभाव को अलग करके देखने पर क्रमिक विकास के बारे में भी काफी कुछ पता चलता है कि इंसान में कुछ बेहद अनूठी खूबियां कैसे आईं. जिस जीन को प्रत्यारोपित किया गया वह बोलचाल और भाषा से संबंधित है, इसे फॉक्सपी2 कहते हैं. जिस चूहे में ये जीन डाला गया उसमें जटिल न्यूरॉन पैदा हुए और ज्यादा क्षमतावान दिमाग पाया गया. इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट के रिसर्चरों ने चूहे को एक भूलभुलैया वाले रास्ते से चॉकलेट ढूंढने की ट्रेनिंग दी. इंसानी जीन वाले चूहे ने इस काम को 8 दिनों में सीख लिया जबकि आम चूहे को इसमें 11 दिन लग गए.
इसके बाद वैज्ञानिकों ने कमरे से उन तमाम चीजों को निकाल दिया जिनसे रास्ते की पहचान होती हो. अब चूहे रास्ता समझने के लिए सिर्फ फर्श की संरचना पर ही निर्भर थे. इसके विपरीत एक टेस्ट यूं भी किया गया कि कमरे की चीजें वहीं रहीं लेकिन टाइल्स निकाल दी गई. इन दोनों प्रयोगों में आम चूहों को मानव जीन वाले चूहों जितना ही सक्षम पाया गया. यानि नतीजा यह निकला कि उनको सिखाने में जो तकनीक इस्तेमाल की गई है वे सिर्फ उसी के इस्तेमाल होने पर ज्यादा सक्षम दिखाई देते हैं.
मानव दिमाग का यह जीन ज्ञान संबंधी क्षमता को बढ़ाता है. यह जीन सीखी हुई चीजों को याद दिलाने में मदद करता है. जबकि बगैर टाइल या बगैर सामान के फर्श पर खाना ढूंढना उसे नहीं सिखाया गया था इसलिए उसे वह याद भी नहीं था. लेकिन दिमाग सीखी हुई चीजों को याददाश्त से दोबारा करने और बेख्याली में कोई काम करने के बीच अदला बदली करता रहता है. जैसे कोई छोटा बच्चा जब कोई नए शब्द सुनता है तो उन्हें दोहराता है लेकिन इसी बीच वह बेख्याली में अन्य पहले से याद शब्द भी बोलने लगता है. इस रिसर्च का यह भी अहम हिस्सा है कि दिमाग में ऐसा कैसे होता है.
एसएफ/एएम (रॉयटर्स)
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विज्ञान का हिंदी में प्रसार हेतु विशेषज्ञों ने अपने विचार ब्यक्त किये

     




जीएफ  कॉलेज शाहजहाँपुर  के बायो टेक्नोलॉजी  बिभाग ने हिंदी दिवस के अवसर विज्ञान का हिंदी में प्रसार हेतु एक संगोष्टी का आयोजन किया  जिसमे विज्ञान का हिंदी में प्रसार हेतु  विशेषज्ञों  ने अपने विचार ब्यक्त किये इस अवसर पर विशेषज्ञों  नयी तकनीको  का हिंदी में सरल भाषा में प्रसार हेतु तकनीको की क्लिष्ट हिंदी का प्रयोग न करके उसी शब्दों को अंग्रेजी को हिंदी भाषा में लिखे तो ज्यादे अच्छा होगा इस अवसर पे बायो टेक्नोलॉजी बिभाग के छात्रों और बायो टेक्नोलॉजी  के हेड डॉ  स्वप्निल यादव जो एक वैज्ञानिक भी है छात्रों के साथ सलतम वैज्ञानिक भाषा के माद्यम से छात्रों को विज्ञानं के बारे जागरूकता प्रदान करते हुए विज्ञानं और हिंदी एक साथ चलने पे बल दिया  इस अवसर पे जीएफ  कॉलेज के प्रधानाचार्य ने भी विचार ब्यक्त किये जो निम्न लोगो ने जो योगदान दिया वो निम्न है
 डॉ. टी.बी. यादव (वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र) 2: श्री अखिलेश पाल (गन्ना वैज्ञानिक) 3 श्री अमित त्यागी (सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार) डॉ AQUIL अहमद (प्रिंसिपल): की अध्यक्षता आयोजक: डॉ. AMREEN इकबाल धन्यवाद प्रस्ताव: डॉ. FAIYAZ अहमद लंगर: डॉ. SWAPANIL यादव श्री विवेक कुमार, Asmat जहान, डॉ: के लिए विशेष धन्यवाद. पुनीत MANISHI, डॉ. बरखा सक्सेना

   

अब चलेगा दिमाग से कंप्यूटर


फोटो : samaylive.com


अब कंप्यूटर चलने के लिए की-बोर्ड और माउस की आवश्यकता नहीं होगी । आप जैसे ही सोचेंगे की कंप्यूटर पे कोई बेबसाइट खुल जाए  वह अपने आप खुल जायेगी ।  यह अब हकीकत में होने वाला है , वैज्ञानिको ने एक ऐसे कंप्यूटर को बनाने का दावा  किया है जो आदमी के दिमाग को पढ़ सकेगा । 
इंटेल कार्पोरेसन का एक समूह  ऐसी ही इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है ।  इस तकनीक प्रयोग अभी ब्रमांड वैज्ञानिक प्रो स्टेफन हाकिंस के ऊपर भी होने वाला है , जो मोटर न्यूरॉन नामक रोग से पीड़ित है जिसमे वो दिमाग से ही सोच कर ऐसे कंप्यूटर के माध्यम से लोगो तक अपनी बात पंहुचा सकेंगे ।  ये कंप्यूटर उसी तरह कार्य करेंगे  जैसे अस्पतालों में  प्रयोग  किया जाने वाला मैग्नेटिक रेजोनेंस स्कैनर करता है , जो दिमाग की  गतिविधियों  को ग्रहण कर सकने की छमता रखता है । 


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