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शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

लैब में तैयार की गई किडनी

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने न केवल लैब में किडनी विकसित करने में सफलता प्राप्त की है बल्कि उसे सफलतापूर्वक एक चूहे में प्रत्यारोपित कर दिया है इस किडनी ने मूत्र बनाना आरंभ कर दिया है और गौरतलब है कि सभी के कई ऐसे हैं जिन्हें लैब में विकसित करके मरीजों को लगाया जा चुका है लेकिन अब तक बनाए गए अंगो में गुर्दा सबसे अधिक शरीर का एक महत्वपूर्णअंग है खून की सफाई करके इसमें फालतू पानी बेकार के तत्वों को निकालता है या रोपण के लिए इसकी मांग भी सबसे ज्यादा है कैसे बनाया जाता है गुर्दा अमेरिका के एक हॉस्पिटल में तैयार किया गया है इसके लिए डाक्टरों ने चूहे की एक किडनी ली और डिटर्जेंट से उसकी सभी पुरानी कोशिकाओं को धो डाला बचे हुए प्रोटीन का जाल हो जो बिलकुल गुर्दे जैसा लग रहा था इसके अंदर खून की कोशिकाओं और निकासी का जटिल भाषा भी मौजूद था प्रोटीन के इस ढांचे को गुर्दे के सभी भाग में सही कोशिका को भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया जहां भी पुनर्निर्माण के लिए ढांचे के साथ मिल गए इसके बाद एक खास तरह से रखा गया और तापमान को पैदा किया गया रखा गया जब देखी गई प्राकृतिककिडनी के मुकाबले का ३० प्रतिशत मूत्र का निर्माण किया यह बड़ी सफलता है आने वाले वक्त में मनुस्य में प्रत्यारोपित करने में सफलता मिल सकती है

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अधिक नमक से स्व प्रति रक्षित रोगों का खतरा

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वह प्रतिरक्षा विकार एक ऐसी शारीरिक अवस्था है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ ऊतकों पर हमला करके उसे उन्हें नष्ट करने लगती है स्व प्रतिरक्षा विकारों में मल्टीपल स्क्लेरोसिस मायस्थेनिया ग्रेविस ग्रेप्स रोग रूमेटाइड अर्थराइटिस सिस्टमिक लुपस एरिदमेटोसस टाइप 1 डायबिटीज इतिहास शामिल है हाल के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध से इस बात के संकेत मिलते हैं कि बढ़ती स्व प्रति रक्षित रोग दर के पीछे नमक का अधिक उपयोग करना हो सकता है यह खोज शोधकर्ता के विभिन्न दलों द्वारा एक विशेष प्रकार की कोशिकाओं पर किए गए कार्य पर आधारित है जिसे th17 कोशिकाएं कहते हैं यह कोशिकाएं विभिन्न स्व प्रति रक्षित रोगों में लिप्त पाई गई हैं जब हमारा शरीर किसी विशिष्ट रोगाणुओं से संक्रमित होता है तो केवल उसको पहचानने वाली थी वह भी कोशिकाएं ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं यह को शिकायत तेजी से बढ़ती हैं और संक्रमण से लड़ने के लिए अपने जैसी कोशिकाओं की एक फौज तैयार कर लेती है विशेष प्रकार की एटी एवं बी कोशिकाएं आक्रमणकारी रोगाणु की स्मृति बनाए रखती हैं और हमें उनके हक दूसरे हमले से प्रशिक्षित कर देते हैं शोधकर्ताओं के अनुसार जिन लोगों ने यह स्वीकार किया है कि वे फास्ट फूड खाते हैं उसमें th17 कोशिकाओं की संख्या अधिक थी जैसा की सर्वविदित है कि फास्ट फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है यह जानने के लिए क्या नमक ही th17 कोशिकाओं की अधिकता का कारण है शोधकर्ताओं में कोशिकाओं के संवर्धन में सोडियम क्लोराइड डाला उन्होंने पाया कि नमक में मध्यम दर्जे की विधि से अधिक नमक खाने वाले प्राणियों को ही की तरह कोशिकाओं की संख्या 10 गुना तक बढ़ गई इंटेक्स पर कोशिकाओं ने ऐसे और बनाने शुरू कर दिए जो इस बात का सूचक था कि वे हानिकारक कोशिकाएं हो गए थे यह परीक्षण चूहों पर किया गया

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गुरुवार, 28 जनवरी 2021

आईटी क्षेत्र में भविष्य में होने वाले बदलाव

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- इसके क्षेत्र में कई सफल परीक्षण हो चुकी हैं कुछ क्षेत्रों में इसकी सफलता भी प्राप्त की जा चुकी है आने वाले समय में मानव निर्णय और विश्लेषण के आधार पर इसका प्रयोग किए जाने की संभावना हैमशीन विजन इसमें काफी छोड़कर चल रहा है अभी तक निकालने के बाद बहुत बदलाव देखने को मिलेगा जिसमें ड्राइवरलेस कार और अपने से चलने वाले अन्य उपकरण सोमेटिक वेब - आंसरिंग मशीन मीटिंग बेबी आंसरिंग मशीन पर काफी शोध कार्य चल रहा है हालांकि इसको बनाने में सफलता हासिल नहीं हो पाई है आने वाले समय आने वाले इसके आने से सर्च इंजन की जरूरत समाप्त हो जाएगी सॉलि़ड स्टेट ड्राइव -इसे का प्रयास किया जा रहा है सॉलि़ड स्टेट ड्राइव बन जाने के बाद हार्ड ड्राइव की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक की वजह से हटके लैपटॉप कंप्यूटर और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण संभव हो सकेगा साथ ही तेज और ऊर्जा के के फायदे स्टोरेज सिस्टम भी बनाए जा सकते हैं 3D ऑप्टिकल डाटा स्टोरेज- इस तकनीक के क्षेत्र में काफी कार्य चल रहा है इस तकनीक के आ जाने से मैग्नेटिक टेप स्टोरेज और अन्य मास स्टोरेज उपकरणों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक के द्वारा डाटा का भंडारण बड़े स्तर पर करना संभव हो जाएगा स स्पिंट्रॉनिक्स तकनीक- इसका वर्किंग पूर्व प्रोटोटाइप तैयार हो चुके हैं इस तकनीकी आ जाने से मैकेनिकल मैग्नेटिक हार्ड डिस्क ड्राइव की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी इस तकनीक से भारी डाटा भंडारण किया जा सकेगा वायरलेस कम्युनिकेशन इस तकनीक से सभी जगह नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी स्क्रीन लिस्ट डिस्प्ले वर्चुअल रियलिटी का सपना साकार हो सकेगा 3D डिस्प्ले -यह तकनीक बाजार में काफी सुधार हो जाएगा

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बुधवार, 27 जनवरी 2021

रोबोट भी हो जाएंगे धार्मिक..

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वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या कृत्रिम बुद्धि से बने एंड्रॉयड्‍स (रोबो) भी धार्मिक हो सकते हैं। उनका कहना है कि संभव है कि एक दिन रोबो की कोई धर्म अपना लें और इसका अर्थ है कि वे मानवता की सेवा कर सकते हैं और इसे नष्ट करने की कोशिश नहीं करेंगे। लेकिन इसका उल्टा भी सच हो सकता है और संभव है कि धार्मिक होने से उनकी ताकत में बढ़ोतरी हो जाए।मैसाचुसेट्‍स इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के मर्विन मिंस्की का कहना है कि किसी दिन कम्प्यूटर्स भी नीति शास्त्र को विकसित कर सकते हैं, लेकिन इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि इन मशीनों को लेकर सारी दुनिया में धार्मिक संघर्ष भी पैदा हो सकता है। डेलीमेल डॉटकॉम के लिए एल्ली जोल्फागारीफार्ड का कहना है कि वैज्ञानिक मानते हैं कि कृत्रिम बुद्धि (आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस) दशकों की अपेक्षा वर्षों में एक वास्तविकता हो सकती है। हाल ही में एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस मनुष्यता के लिए परमाणु हथियारों की तरह से घातक हो सकती है।डेलीमेल डॉटकॉम में डिलन लव ने हाल ही में एक सारगर्भित रिपोर्ट पेश की थी जिसमें ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई थी। लेकिन मॉर्मन ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, लिंकन कैनन ने लव से कहा कि कम्प्यूटर साइंस में ऐसे कोई नियम नहीं हैं कि सॉफ्टवेयर के लिए धार्मिक विश्वास रखना संभव होगा।उनका कहना था कि धर्म विरोधियों के मध्य कुछ ऐसी भोलीभाली आवाजें हैं जो कि एक मशीनी बुद्धि और धार्मिक विश्वासों के बीच तकनीकी असंगति की कल्पना करते हैं। इंस्टीट्‍यूट फॉर एथिक्स एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज से जुड़े एक स्कॉलर, जॉन मेसरली, का कहना है कि ' मैं मानता हूं कि आप कृत्रिम बुद्धि को लगभग किसी भी चीज पर विश्वास करने के लिए प्रोग्राम कर सकते हैं। वहीं कैनन का कहना है कि धार्मिक सुपरइंटेलीजेंस या तो सबसे अच्‍छी या सबसे खराब सिद्ध हो सकती है। उनका मानना है कि धर्म मात्र एक ताकत है और इसका उपयोग अच्‍छे या बुरे के लिए किया जा सकता है।पर जानकारों का कहना है कि धर्म पहले से ही अपने आप में सहिष्णु नहीं है और जिस धर्म के पास सुपरइंटेलीजेंस होगी, वह तो और भी कम ‍सहिष्णु होगा। इन सवालों के बीच एक और प्रश्न उठा है कि क्या कृत्रिम बुद्धि की भी कोई आत्मा (सोल) हो सकती है? जबकि स्वीडिश दार्शनिक निक बॉस्ट्रम का कहना है कि 'सबसे बड़ा डर इस बात का है कि जैसे-जैसे रोबो अधिक स्मार्ट होते जाएंगे, वे एक ऐसा रास्ता चुनेंगे जोकि उनके अस्तित्व को निरंतर बने रहने को सुनिश्चित करता हो और इसका अर्थ मनुष्यता का विनाश हो सकता है।' पर प्रसिद्ध कॉमेडियन ड्रंकन ट्रसेल और रेवरेंड क्रिस्टोफर बेनेक मानते हैं कि धर्म के कारण रोबो मनुष्यता के साथ-साथ रह सकते हैं।पिछले महीने ही एलन मस्क ने एक हजार रोबोटिक्स विशेषज्ञों को चेताया कि स्वचालित हथियार कल के कलाश्निकोव साबित होंगे। इससे पहले प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग भी कह चुके हैं कि जो हथियार सार्थक मानवीय नियंत्रण से बाहर हो सकते हों, उन पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की तरह सभी रोबो हथियार सहज, सुलभ तरीकों से उपलब्ध हो सकते हैं और इनका कच्चा माल हासिल करना भी मुश्किल नहीं होगा। और अंतत: यह तकनीक वैश्विक हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है तथा ऐसे हथियार हत्याओं जैसे काम के लिए आदर्श साबित होंगे sabhar :aajtak24.in

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मंगलवार, 26 जनवरी 2021

किसी भी मरीज के इलाज में खून की कमी नहीं होगी

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वैज्ञानिकों की मानें, तो आने वाले दिनों में किसी भी मरीज के इलाज में खून की कमी नहीं होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही वे इलाज में जरूरत पड़ने वाले खून की बेशुमार मात्रा सप्लाइ कर पाएंगे। मौजूदा समय में लोगों को चिकित्सा कारणों से जब खून की जरूरत पड़ती है, तो ब्लड की किल्लत के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लड डिसऑर्डर्स और कई अन्य बीमारियों में लोगों को बड़ी मात्रा में खून चढ़ाना पड़ता है। लंबे शोध के बाद वैज्ञानिक वयस्क कोशिकाओं को मूल कोशिकाओं में बदलने में कामयाब हुए हैं। ये मूल कोशिकाएं की भी तरह की रक्त कोशिकाएं बनाने में सक्षम होंगी।पिछले करीब 20 साल से वैज्ञानिक यह पता करने की कोशिश कर रहे थे कि क्या इंसान के खून में कृत्रिम तौर पर मूल कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है। मूल कोशिकाएं शरीर में किसी भी तरह की कोशिकाएं बना सकती हैं। अब शोधकर्ताओं की एक टीम को अलग-अलग तरह की कोशिकाओं को मिलाने में सफलता मिली है। इनमें रक्त की मूल कोशिकाएं भी शामिल हैं। जब इन कोशिकाओं को चूहे के शरीर में डाला गया, तो उन्होंने अलग-अलग तरह की इंसानी रक्त कोशिकाओं का निर्माण किया।अमेरिका के बॉस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉक्टर योइचि सुगिमुरा ने बताया, 'इस शोध की मदद से हम खून की वंशानुगत बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की कोशिकाएं ले सकते हैं और जीन एडिटिंग की मदद से उनके डिसऑर्डर को ठीक करके स्वस्थ रक्त कोशिकाएं तैयार कर सकते हैं। साथ ही, इसके कारण रक्त की मूल कोशिकाओं की अबाध आपूर्ति भी संभव हो सकती है।' हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रमुख और सुगिमुरा के साथी शोधकर्ता डॉक्टर जॉर्ड डेली ने कहा, 'हम शायद जल्द ही स्वस्थ और प्रामाणिक इंसानी रक्त तैयार करने में कामयाब हो जाएंगे। 20 सालों की मेहनत के बाद हम इस मकाम तक पहुंचे हैं।sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com

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पौधेां का भी नर्वस सिस्टम होता है

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पोलैंड की वर्सा यूनिवर्सिटी ;के प्रोफ़ेसर स्टेनिलो कार पिंस्की और उनके ;साथी वैज्ञानिको का दावा है है की;पौधे प्रकाश में कैद जानकारिया समझ कर प्रतिक्रिया देते है । एक प्रयोग में जब पौधे के ऊपरी भाग में रोशनी डाली गयी ;तो उसका असर पूरे;पौधे पे सामान रूप से हुआ । शोधकर्ता बताते है की पौधेां का भी नर्वस सिस्टम होता है । साथ ही उनकी याददाश्त भी कमालकी होती है;। इसी कारण ;पौधे अपने ऊपर आये वातावरण मेंबदलाव के मुताबिक खुद को ढाल लेते है।

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सोमवार, 25 जनवरी 2021

मस्तिष्क प्रत्यारोपण के विकास

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बेहद गोपनीय अमेरिकी सैन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले कुछ महीनों में वे मस्तिष्क प्रत्यारोपण के विकास से जुड़ी नई प्रगति के बारे में जानकारी पेश करने वाले हैं. मस्तिष्क प्रत्यारोपण की मदद से याददाश्त बहाल की जा सकेगीअमेरिका की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डीएआरपीए) प्रबुद्ध स्मृति उत्तेजक को बनाने की योजना के कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही है. यह इंसानी दिमाग को बेहतर तरीके से समझने के लिए बनाई गई योजना का हिस्सा है. इस योजना में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दस करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता दी थी.विज्ञान ने पहले ऐसा काम नहीं किया है. और इस पर नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं कि जख्मी सैनिक की याददाश्त को बहाल करने और बूढ़े होते मस्तिष्क के प्रबंधन के नाम पर क्या इंसानी दिमाग के साथ छेड़छाड़ जायज है.कुछ लोगों का कहना है कि जिन लोगों को इससे लाभ पहुंचेगा उनमें पचास लाख अमेरिकी हैं जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित हैं और करीब तीन लाख अमेरिकी फौजी हैं जिनमें महिलाएं और पुरुष शामिल हैं. ये वो सैनिक हैं जो इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान घायल हुए और उनके मस्तिष्क में चोटें आई.डीएआरपीए के प्रोग्राम मैनेजर जस्टिन साचेंज ने इसी हफ्ते अमेरिकी राजधानी में हुई एक कॉन्फ्रेंस में कहा, "अगर आप ड्यूटी के दौरान घायल हो जाते हैं और आप अपने परिवार को याद नहीं रख पाते हैं, ऐसे में हम चाहते हैं कि हम इस तरह के कामों को बहाल कर सकें. हमें लगता है कि हम न्यूरो कृत्रिम उपकरण का विकास कर सकते हैं जो सीधे हिप्पोकैंपस से इंटरफेस कर सकें और पहली प्रकार की यादें बहाल कर सकें. हम यहां एक्सप्लिसिट मेमरी के बारे में बात कर रहे हैं."एक्सप्लिसिट मेमरी यानि स्पष्ट यादें, ये लोगों, घटना, तथ्य और आंकड़ों के बारे में स्मरणशक्ति है और किसी भी शोध ने यह साबित नहीं किया है कि इन्हें दोबारा बहाल किया जा सकता है. अब तक शोधकर्ता पार्किंसन बीमारी से पीड़ित लोगों में झटके कम करने में मदद कर पाए हैं और अल्जाइमर के पीड़ितों में डीप ब्रेन सिमुलेशन प्रक्रिया की मदद से याददाश्त मजबूत करने में सफल हुए हैं.इस तरह के उपकरण हृदय पेसमेकर से प्रोत्साहित हैं और दिमाग में बिजली को पहुंचाते हैं लेकिन यह हर किसी के लिए काम नहीं करता है. जानकारों का कहना है कि स्मृति बहाली के लिए और अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण की जरूरत होगी. वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर रॉबर्ट हैंपसन कहते हैं, "स्मृति, पैटर्न और कनेक्शन की तरह है." डीएआरपीए की योजना पर टिप्पणी से इनकार करते हुए वे कहते हैं, "हमारे लिए स्मृति कृत्रिम बनाना वास्तव में ऐसा कुछ बनाने जैसा है जो विशिष्ट पैटर्न देता हो.चूहों और बंदरों पर हैंपसन के शोध से पता चलता है कि हिप्पोकैंपस में न्यूरॉन्स तब अलग तरह से प्रक्रिया देते हैं, जब वे लाल या नीला रंग या फिर चेहरे की तस्वीर या भोजन के प्रकार को देखते हैं. हैंपसन का कहना है कि मानव की विशिष्ट स्मृति को बहाल करने के लिए वैज्ञानिकों को उस स्मृति के लिए सटीक पैटर्न जानना होगा. सिंथेटिक जीव विज्ञान पर डीएआरपीए को सलाह देने वाले न्यूयॉर्क के लैंगोनी मेडिकल सेंटर में चिकित्सा विज्ञान में नैतिकता पर काम करने वाले आर्थर कैपलान कहते हैं, "जब आप दिमाग से छेड़छाड़ करते हैं तो आप व्यक्तिगत पहचान से भी छेड़छाड़ करते हैं. दिमाग में फेरबदल की कीमत आप स्वयं की भावना को खोने की जोखिम से करते हैं. इस तरह का जोखिम नई तरह का है, जिसका हमने कभी सामना नहीं किया है." साभार dw.de

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रविवार, 24 जनवरी 2021

हिन्दू धर्म और टाइम मशीन का रहस्य समय यात्रा

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हम सब समय में यात्रा करते हैं. पिछले साल से में एक साल समय में आगे बढ़ चूका हूँ. दूसरें शब्दों में कहूँ तो हम सब प्रति घंटे 1 घंटा की दर से समय में यात्रा करते हैं. लेकिन यहाँ पर सवाल यह है कि क्या हम प्रति घंटे 1 घंटा की दर से भी ज्यादा तेजी से यात्रा कर सकते है? क्या हम समय में पीछे जा सकते हैं? क्या हम प्रति घंटे 2 घंटे की रफ़्तार से यात्रा कर सकते है? 20 वी सदी के महान वैज्ञानिकअल्बर्ट आइंस्टीन ने विशेष सापेक्षता&(Special Relativity) नामक;सिद्धांत विकसित किया था. विशेष सापेक्षता के सिध्धांत के बारे में तो कल्पना करना भी मुश्किल हैं क्योंकि यह;रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ अलग तरह की ही चीज़े उजागर करता हैं. इस सिध्धांत के मुताबिक समय और अंतरिक्ष एक ही चीज़ हैं. दोनों एकदूसरे से जुड़े हुए हैं. जिसे space-time भी कहते हैं. space-time में कोई भी चीज़ यात्रा कर रही हो उसकी गति की एक सीमा हैं-;3 लाख किलोमीटर. यह प्रकाश की गति हैं.विशेष सापेक्षता का सिध्धांत यह भी दर्शाता हैं की space-time में यात्रा करते वक्त कई आश्चर्यजनक चीजे होती हैं, खास कर के जब आप प्रकाश की गति या उसके आसपास की गति पा लेते हैं. जिन लोगो को आपने पृथ्वी पर पीछे छोड़ दिया हैं उनकी तुलना में आपके लिए समय की गति कम हो जाएगी. आप इस असर को वापस आए बिना नोटिस नहीं कर सकते हैं. सोचिए की आपकी उम्र अभी 15 साल की हैं और आप एक अंतरिक्ष यान में प्रकाश की गति की तुलना में 99.5% तक की गति पा लेते हैं. अपनी यात्रा के दौरान आपने अपने 5 जनमदिन सेलिब्रेट किए, यानी आपने अंतरिक्ष यान में 5 साल बिताए. 5 साल के सफ़र के बाद आप 20 साल की उम्र में अपने घर वापस आते हैं. आप देखेंगे की आपकी उम्र के आपके दोस्त 65 साल के हो गए होंगे. क्योंकि अंतरिक्ष यान में समय आपके लिए ज्यादा धीरे से बिता था. आपने जितने समय में 5 साल अनुभव किए उनते ही समय में आपके दोस्तों ने 50 साल महसूस किए.आइंस्टीन के General Relativity के सिध्धांत के मुताबिक किसी भी तरह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में समय की रफ़्तार कम हो जाती हैं. जैसे समय की गति हमारी पृथ्वी पर अंतरिक्ष की तुलना में कम होगी. जैसे की किसी ब्लैक होल के नजदीक गुरुत्वाकर्षण बहुत तीव्र हो जाता हैं. ऐसी जगह पर समय की रफ़्तार बहुत ही कम हो जाती हैं. तीव्र गुरुत्वाकर्षण की वजह से space-time में कई विकृतियाँ पैदा हो जाती हैं. ऐसी विकृतियों से पैदा हो सकते हैं, जो की;में सफ़र करने के लिए शार्टकट हो सकते हैं. कुछ वैज्ञानिक तो ऐसा ही मानते हैं. जो भी हो मेरा तो यहीं मानना हैं की समय यात्रा सिर्फ भविष्य की ही मुमकिन हो सकती हैं. क्योंकि समय में पीछे जाना मुमकिन ही नहीं हैं. क्योंकि जो हो गया वह हम कभी बदल नहीं सकते लेकिन जो होनेवाला हैं वह अभी भी हाथ में हैं. हम शायद भविष्य की सैर कर सकते हैं लेकिन उसके लिए हमे बहुत ही उम्दा टेक्नोलॉजी की जरुरत होगी और बहुत ज्यादा उर्जा की भी जरुरत होगी. इंग्लैंड के मशहूर लेखक हर्बट जार्ज वेल्स ने 1895 में 'द टाइम मशीन' नामक एक उपन्यास प्रकाशित किया, तो समूचे योरप में तहलका मच गया। इस उपन्यास में वेल्स ने 'टाइम मशीन' की अद्भुत कल्पना की। यह उनकी कल्पना का एक ऐसा आविष्कार था, जिसे विश्व भर में विज्ञान लेखक आज तक उपयोग कर रहे हैं। उपन्यास से प्रेरित होकर इस विषय पर और भी कई तरह के कथा साहित्य रचे गए। इस कॉन्सेप्ट पर हॉलीवुड में एक फिल्म भी बनी। हालांकि वेल्स के उपन्यास में व्यावहारिक रूप से कई विसंगतियां है।टाइम मशीन अभी एक कल्पना है।;टाइम ट्रेवल और टाइम मशीन, यह एक ऐसे उपकरण की कल्पना है जिसमें बैठकर कोई भी मनुष्य भूतकाल या भविष्य के किसी भी समय में सशरीर अपनी पूरी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं के साथ जा सकता है। अधिकतर वैज्ञानिक मानते हैं कि यह कल्पना ही रहेगी कभी हकीकत नहीं बन सकती, क्योंकि यह अतार्किक बात है कि कोई कैसे अतीत में या भविष्य में जाकर अतीत या भविष्य के सच को जान कर उसे बदल दे। जैसे कोई भविष्य में से आकर आपसे कहे कि वह आपका पोता है या अतीत में से आकर कहे कि वह आपका परदादा है, जो यह संभव नहीं है।वैज्ञानिक कहते हैं कि दरअसल,जो घटना घट चुकी है उसका दृश्य और साउंड ब्रह्मांड में मौजूद जरूर रहेगा। जिस तरह आप एक फिल्म देखते हैं उसी तरह वह टाइम मशीन के द्वारा दिखाई देगा। आप उसमें कुछ भी बदलाव नहीं कर सकते। यदि ऐसा करने गए तो वह पार्टिकल्स बिखरकर और अस्पष्‍ट हो जाएंगे। दूसरा यह कि आप टाइम ट्रैवल से जो घटना नहीं घटी है, लेकिन जो घटने वाली है उसे भी देख सकते हैं, क्योंकि सभी कार्य और कारण की श्रृखंला में बंधे हुए हैं। हालांकि विद्वान यह भी मानते हैं कि भविष्य को जानकर वर्तमान में कुछ सुधारकर भविष्य को बदला जा सकता है, लेकिन अतीत को नहीं।प्राचीनकाल में सनतकुमार,;नारद, अश्‍विन कुमार आदि कई हिन्दू देवता टाइम ट्रैवल करते थे।टाइम मशीन की कल्पना भी भारतीय धर्मग्रंथों से प्रेरित है। आप सोचेंगे कैसे? वेद और पुराणों में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है। उदाहरणार्थ रेवत नाम का एक राजा ब्रह्मा के पास मिलने ब्रह्मलोक गया और जब वह धरती पर पुन: लौटा तो यहां एक चार युग बीत चुके थे। रेवती के पिता रेवत अपनी पुत्री को लेकर ब्रह्मा के पास योग्य वर की तलाश में गए थे। ब्रह्मा के लोक में उस समय हाहा, हूहू नामक दो गंधर्व गान प्रस्तुत कर रहे थे। गान समाप्त होने के उपरांत रेवत ने ब्रह्मा से पूछा अपनी पुत्री के वरों के बारे में।ब्रह्मा ने कहा, 'यह गान जो तुम्हें अल्पकालिक लगा, वह चतुर्युग तक चला। जिन वरों की तुम चर्चा कर रहे हो, उनके पुत्र-पौत्र भी अब जीवित नहीं हैं। अब तुम धरती पर जाओ और शेषनाग के साथ इसका पाणिग्रहण कर दो जो वह बलराम के रूप में अवतरित हैं।' अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति चार युग तक कैसे जी सकता है? कुछ ऋषि और मुनि सतयुग में भी थे, त्रेता में भी थे और द्वापर में भी। इसका यह मतलब कि क्या वे टाइम ट्रैवल करके पुन: धरती पर समय समय पर लौट आते थे?इसका जवाब है कि हमारी समय की अवधारणा धरती के मान से है लेकिन जैसे ही हम अंतरिक्ष में जाते हैं, समय बदल जाता है। जो व्यक्ति ब्रह्मलोक होकर लौटा उसके लिए तो उसके मान से 1 वर्ष ही लगा। लेकिन अंतरिक्ष के उक्त 1 वर्ष में धरती पर एक युग बीत गया, बुध ग्रह पर तो 4 युग बीत गए होंगे, क्योंकि बुध ग्रह का 1 वर्ष तो 88 दिनों का ही होता है।पहले यह माना जाता था कि समय निरपेक्ष और सार्वभौम है अर्थात सभी के लिए समान है यानी यदि धरती पर 10 बज रहे हैं तो क्या यह मानें कि मंगल ग्रह पर भी 10 ही बज रहे होंगे? लेकिन आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार ऐसा नहीं है। समय की धारणा अलग-अलग है।आइंस्टीन ने कहा कि दो घटनाओं के बीच का मापा गया समय इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें देखने वाला किस गति से जा रहा है। मान लीजिए की दो जुड़वां भाई हैं- A और B। एक अत्यंत तीव्र गति के अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाता है और कुछ समय बाद पृथ्वी पर लौट आता है जबकि B घर पर ही रहता है। A के लिए यह सफर हो सकता है 1 वर्ष का रहा हो, लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटता है तो 10 साल बीत चुके होते हैं। उसका भाई B अब 9 वर्ष बड़ा हो चुका है, जबकि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था। यानी A 10 साल भविष्य में पहुंच गया है। अब वहां पहुंचकर वह वहीं से धरती पर चल रही घटना को देखता है तो वह अतीत को देख रहा होता है। जैसे एक गोली छूट गई लेकिन यदि आपको उसको देखना है तो उस गोली से भी तेज गति से आगे जाकर उसे क्रॉस करना होगा और फिर पलटकर उसको देखना होगा तभी वह तुम्हें दिखाई देगी। इसी तरह ब्रह्मांड में कई आवाजें, चित्र और घटनाएं जो घटित हो चुकी हैं वे फैलती जा रही हैं। वे जहां तक पहुंच गई हैं वहां पहुंचकर उनको पकड़कर सुना होगा।यदि ऐसा हुआ तो...? कुछ ब्रह्मांडीय किरणें प्रकाश की गति से चलती हैं। उन्हें एक आकाशगंगा पार करने में कुछ क्षण लगते हैं लेकिन पृथ्वी के समय के हिसाब से ये दसियों हजार वर्ष हुए।भौतिकशास्त्र की दृष्टि से यह सत्य है लेकिन अभी तक ऐसी कोई; टाइम मशी नहीं बनी जिससे हम अतीत या भविष्य में पहुंच सकें। यदि ऐसे हो गया तो बहुत बड़ी क्रांति हो जाएगी। मानव जहां खुद की उम्र बढ़ाने में सक्षम होगा वहीं वह भविष्य को बदलना भी सीख जाएगा। इतिहास फिर से लिखा जाएगा।एक और उदाहारण से समझें। आप कार ड्राइव कर रहे हैं आपको पता नहीं है कि 10 किलोमीटर आगे जाकर रास्ता बंद है और वहां एक बड़ा-सा गड्डा है, जो अचानक से दिखाई नहीं देता। आपकी कार तेज गति से चल रही है। अब आप सोचिए कि आपके साथ क्या होने वाला है? लेकिन एक व्यक्ति हेलीकॉप्टर में बैठा है और उसे यह सब कुछ दिखाई दे रहा है अर्थात यह कि वह आपका भविष्य देख रहा है। यदि आपको किसी तकनीक से पता चल जाए कि आगे एक गड्‍ढा है तो आप बच जाएंगे। भारत का ज्योतिष भी यही करता है कि वह आपको गड्ढे लेकिन एक अतार्किक उदाहरण भी दिया जा सकता है, जैसे कि एक व्यक्ति विवाह करने से पहले अपने पुत्र को देखने जाता है टाइम मशीन से। वहां जाकर उसे पता चलता है कि उनका पुत्र तो जेल के अंदर देशद्रोह के मामले में सजा काट रहा है तो... तब वह दो काम कर सकता है या तो वह किसी अन्य महिला से विवाह करे या विवाह करने का विचार ही त्याग दे।इंग्लैंड के वैज्ञानिक ने किया दावा, बना सकता है क्या प्रकाश के लेज़र Tunnel से भविष्य में संदेश भेजा जा सकता है?अगर ऐसा हो सकता है, तो भविष्य के लोग हमसे क्या कहेंगे?69 वर्षीय Ronald Mallett का यह मानना है कि उन्होंने एक ऐसा Tunnel डिज़ाइन किया है, जो समय से आगे संदेश भेज सकता है. उनका ये कहना है कि इस शताब्दी की ये पहली Time Machine सिद्ध होगी. Mallett अभी University of Connecticut में ख्याति-प्राप्त Theoretical Physicist हैं. वो फ़िलहाल एक डॉक्यूमेंटरी पर काम कर रहे हैं, जिसका विषय है टाइम मशीन बनाने की खोज Mallett ने 10 वर्ष की उम्र से ही शुरु कर दी थी. अपने पिता की मौत के बाद Mallett ने इसे पूरा करने की ठान ली. अपने डॉक्यूमेंटरी ‘Mallett कहते हैं कि, उन्हें ये निर्णय बिलकुल सही लगा, क्योंकि वो अपने मृत पिता को वापस देखना चाहते थे. Mallett के दिमाग में ये सवाल था कि क्या कोई समय पर नियंत्रण कर सकता है? Mallett का ये कहना है, “मेरा व्यक्तित्व, मेरा एक सफल Physicist बनना ये सब बस मेरा पिता से प्यार की वजह से है. मेरा एक एक Mission है, जिसका लक्ष्य है ये पता लगाना कि टाइम मशीन कैसे बनाते हैं? टाइम मशीन कैसे काम करेगीMallett की टाइम मशीन का मूल आधार Einstein की Theory of Relativity है. इस सिद्धांत के अनुसार ये बताया गया है कि प्रकाश की किरणें भी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पैदा कर सकती हैं.एक Scientific Paper में Mallett ने लिखा कि प्रकाश के एक अस्थायी Cylinder के संदर्भ में मजबूत गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए मेरे पास एक सटीक समाधान है, जो Einstein के आंतरिक और बाह्य गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश के समीकरणों के विश्लेषण पर आधारित हैजुड़े हुए लाइन्स की उपस्थिति भविष्य और भूत में समय यात्रा करने का संकेत देती हैं. इस संकेत से ही प्रकाश के अस्थायी Cylinder की सहायता से टाइम मशीन के निर्माण की संभावना दिखती है. का ये मानना है कि भौतिक सिद्धांत पर समय यात्रा असंभव है, पर वो ऐसा सोचते है कि अगर समय के साथ सन्देश भेजा जा सकता है, तो प्रकाश के Tunnel की मदद से N भी भेजे जा सकेंगे कहते हैं कि 1 को Spin Up की दिशा में लगाने पर और 0 को Spin Down की दिशा में लगाने पर हम Neutron Spin के द्वारा बाइनरी कोड भी भेज सकते हैं अगर वाकई टाइम मशीन बन सकती है तो क्या ये सपनों की दुनिया में जीना जैसा नहीं होगा? विकास की दिशा में ये पहल एक चमत्कारी वरदान की भांति सिद्ध होगी. भविष्य और अतीत में सफ़र करना मनुष्य के लिए अत्यंत रोमांचकारी होगा स्रोत : www.gazabpost.com, वेबदुनिआ , www.universeinhindi.com

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"संकल्प शक्ति- सुपर चेतन मन -विज्ञान

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मानव - मस्तिष्क इतनी विलक्षणताओं का केंद्र है जिसके आगे वर्तमान में अविष्कृत हुए समस्त मानवकृत उपकरण एवं यंत्रों का एकत्रीकरण भी हल्का पड़ेगा. अभी तक मस्तिष्क के 1/10 भाग की ही जानकारी मिल सकी है, 9 /10 भाग अभी तक शरीर शास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है. मस्तिष्क के इस 9/10 भाग में असीमित क्षमताएं भरी पड़ी हैं. मस्तिष्क में अगणित चुम्बकीय केंद्र हैं जो विविध-विधि रिसीवरों और ट्रांसफ़ॉर्मरों का कार्य सम्पादित करती हैं. मानव मस्तिष्क में असीमित रहस्यात्मक असीम शक्ति हैं जिसके विषय में हमें हलकी-फुलकी सतहीय सत्तर की जानकारी हैं. योग साधना का एक उदेश्य इस चेतना विद्युत -शक्ति का अभिवर्धन करना भी है. इसे मनोबल, प्राणशक्ति और आत्मबल भी कहते हैं. संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति के रूप में इसके चमत्कार देखे जा सके हैं. मनोविज्ञान के समूचे खजाने में दो चीजें भरी हैं सूत्र [ Formula ] और तकनीक [Technique ] . सूत्रों में स्थिति का विवेचन होने के साथ तकनीकों के संकेत भी हैं.तकनीकों द्वारा स्थिति को ठीक करने के प्रयास किये जातें हैं. संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति मस्तिष्क के वे हाई momentum वाले विचार हैं जिनकी गति अत्यंत तीब्र और प्रभाव अति गहन होतें हैं और अत्यंत शक्तिशाली होने के कारण उनके परिणाम भी शीघ्रः प्राप्त होतें है. मन के तीन भाग या परतें भावना, विचारणा और व्यवहार मानवीय व्यक्तितिव के तीन पक्ष हैं उनके अनुसार मन को भी तीन परतों में विभक्त किया जा सकता है : भौतिक जानकारी संग्रह करने वाले चेतन - मस्तिष्क [Conscious- Mind ] और ऑटोनोमस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले अचेतन - मस्तिष्क [Sub- Conscious - Mind] अभी अभी विज्ञान की परिधि में आयें हैं. पर अब अतीन्द्रिय - मस्तिष्क [Super-Conscious -Mind] का अस्तित्व भी स्वीकारा जाता हैं . हुना [Huna] हुना [Huna] का अर्थ हवाई द्वीप [ Phillippines ] में गुप्त या सीक्रेट है. शरीर , मन और आत्मा के एकीकरण पर आधारित हुना -तकनीक लगभग 2000 वर्ष पुरानी परामानोविज्ञानिक रहस्यवादी स्कूल हैं. इस गूढ़ और गुप्त तकनीक के प्रयोग से एक साधारण मनुष्य अपनी संकल्प शक्ति द्वारा अपने अन्तराल में प्रसुप्त पड़ी क्षमताओं को जगा कर और विशाल ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तिशाली चेतन तत्त्वों को खीचकर अपने में धरण कर अपने आत्मबल को इतना जागृत कर सकता हैं की वह अपने व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितिओं में मनचाहा परिवर्तन ला सके . हुना के अनुसार मन की तीन परतें Llower –Self [Unconsious- Mind]----- यह Rib-Cage में स्थित है.Middle -Self [Consious -Mind] ------यह भ्रूमध्य में पीनल ग्लैंड में स्थित है.Higher –Self [Super-Consious-Mind] -------यह सर से लगभग 5 फीट की उच्चाई पर स्थित है.  Lower –Self : यह हमारा अचेतन मन है.समस्त अनुभवों और भावनाओं का केंद्र है. Middle -Self द्वारा इसे निर्देश और आदेश देकर कार्य करवाया जा सकता है. समस्त जटिल गिल्ट , कोम्प्लेक्सेस , तरह - तरह की आदतें, आस्थाएं, सदेव Lower -Self में संचित रहतें हैं. Lower -Self स्वयं कोई भी तार्किक या बुद्धि पूर्ण निर्णय लेने में पूर्ण रूप से असमर्थ है. Middle -Self : यह हमारा चेतन मन है जिससे हम सोच-विचार करते हैं और निर्णय लेते हैं. यह हमारे बुद्धि के स्तर को दर्शाता है. Higher- Self : मानव मस्तिष्क का वह भानुमती का पिटारा है जिसमें अद्भुत और आश्चर्य जनक क्षमताएं भरी पड़ी हैं, , जिन्हें अगर जीवंत-जागृत कर लिया जाए तो मनुष्य दीन -हीन स्थिति में न रह कर अनंत क्षमताओं को अर्जित कर सकता है. Higher-Self में किसी भी समस्या या परिस्थिति का समाधान करने की असाधारण क्षमता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम उससे मदद मांगें. Higher - Self कभी भी मानव के साधारण क्रिया-कलापों में दखलांदाजी नहीं करा है जब तक विशेष रूप से उससे मदद न मांगी जाये. हुना द्वीप वासी किसी देवी-देवता की जगह अपने कार्यों या प्रयोजनों की सिद्धि के लिए अपने Higher – Self पर पूर्ण रूप से आश्रित होतें हैं और उसीसे से ही प्रार्थना करते हैं.  Aka - Chord यह अदृश्य चमकीली - चाँदी की ओप्टिकल फाइबर के समान कॉर्ड या वायर है जो Lower -Self को Higher - Self से और Middle - Self को Lower -Self से जोडती है, . Higher -Self और Middle -Self प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए नहीं होते हैं. प्राण प्राण ही वह तत्व हैं जिसके माध्यम से Higher –Self हमरे अभीष्ट लक्ष्य की पूर्ति करता है. प्राण तत्व की अधिकता गहरी साँस द्वारा संभव है. चेतन मस्तिष्क या Middle-Self द्वारा प्राण तत्व वायु द्वारा ग्रहण किया जाता है. फिर इस प्राणतत्व को Lower-Self अत्यंत उच्च विद्युत –वोल्टेज़ में परिवर्तित कर देता है पुनः इस हाई – वोल्टेज़ का प्रयोग हमारा Higher- Self अभीष्ट की लक्ष्य प्राप्ति के लिए करता है. संकल्प ध्यान की Technique 1. सुख आसन या सुविधजनक जनक स्थिति में बैठ जायें. अपनी आंखें बंद करे, धीमें और गहरी 10 सांसें लें और प्रत्येक साँस के साथ प्राण शक्ति को अपने अन्दर जाता महसूस करे.2. अब ग्रहण किये प्राण शक्ति को अपने सोलर प्लेक्सस [Rib Cage] में एक चमकीली हाई वोल्टेज सिल्वर गेंद के रूप में Visualize करें.3. अब उस गेंद से अत्यंत तीब्र सिल्वर सफ़ेद प्रकाश निकलता देखें जिसे एक सक्रीय ज्वालामुखी से लावा निकलता है , या जैसे दिवाली के अवसर पर जलाये जाने वाले आतिशबाजी आनार से तीब्र गामी प्रकाश निकलता है.4. सफ़ेद प्रकाश को अपने सिर से 5 फीट की ऊंचाई तक जाता देखें .5. अब इस सफ़ेद प्रकाश को सर की ऊपर एक चमकीले सिल्वर रंग के विशाल गोले का रूप धरते देखें .6. इस गोले में अपनी लक्ष्य की विस्तृत और इच्क्षित पूर्ति देखे. आप का लक्ष्य एकदम सपष्ट और निश्चित होना चाहिए.7. अपने इच्क्षित लक्ष्य की अत्यंत बारीक़ और विस्तृत पूर्ति देखें.8. उस सफ़ेद गोले में अपने लक्ष्य को पूरा हुआ देखें और विश्वाश करे की आप का वह कार्य पूर्ण रूपेण , सफलता पूर्वक सम्पादित हो चूका है.9. मन में संकल्प करे की आपका वह इच्क्षित कार्य पूरा हो चूका है.10. प्रक्रिया के अंत में अपने Higher-Self को अपने संकल्प की पूर्ति के लिए धन्यवाद कहें.11. प्रतिदिन यह प्रक्रिया करें , जब तक आप का वह इच्क्षित कार्य पूर्ण नहीं हो जाता है.12. अपने Higher - Self पर विश्वाश करे जो आप के अन्दर ईश्वर के D.N.A. का प्रतिनिधितित्व करता है. वह आपको कभी धोखा नहीं देगा. अतीन्द्रिय विज्ञान और गूढ़ -विज्ञान में ऐसी संभावनाएं हैं जो मानवीय कष्टों को मिटा कर , किसी भी मानव की वर्तमान क्षमता में अधिक वृद्धि कर उसे अधिक सुखी और सफल बना सके. इसके लिए हमें अपना मस्तिष्क खुला रखना चाहिए. बिना अंध-विश्वास और अविश्वासी बने तथ्यों का अन्वेषण करना चाहिए. उपेक्षित और लुप्त प्रायः आत्म-विज्ञान को यदि अन्वेषण और प्रयोगों का क्षेत्र मान कर उसके लिए भौतिक-विज्ञानियों जैसी तत्परता बरती जाय तो अगले दिनों ऐसे अनेक उपयोगी रहस्य उद्घाटित हो सकते हैं , जो भौतिक अविष्कारों से भी अधिक उपयोगी सिद्ध होंगें द्वारा गीता झा sabhar :http://hindi.speakingtree.in

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"रोबोट से भी सेक्स करेगा इंसान

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"रोबोट से भी सेक्स करेगा इंसान? एक मशहूर वैज्ञानिक के किए गए दावों के मुताबिक अगले 50 साल में इंसान न सिर्फ रोबोट से प्रेम करने लगेगा बल्कि उससे यौन संबंध बनाना भी बेहद आम बात हो जाएगी। डॉ. हेलेन ड्रिसकॉल के मुताबिक जिस तेजी से तकनीक का विकस हो रहा है उससे यह मुमकिन है कि वर्ष 2070 तक दो मानवों के बीच बनने वाले शारीरिक संबंधों को पिछड़ेपन की निशानी माना जाने लगे।गौर हो कि कई देशों में लोग इंसानों की तरह दिखने वाले पुतलों को या सेक्स डॉल्स को अपने सेक्स पार्टनर के तौर पर खरीद रहे हैं। आने वाले वक्त में ऐसे सेक्स रोबोट बनाए जा सकते हैं जो न सिर्फ इंसानों की तरह दिखेंगे बल्कि आपसे बात कर सकेंगे और आपकी हरकतों को भांप कर उसी तरह बिहेव करेंगे ड्रिस्कॉल के मुताबिक यह उन लोगों के लिए बहुत काम का साबित होगा जिनके साथी की मौत हो चुकी है या जो अकेले रहते हैं क्योंकि कोई भी साथी न होने से तो बेहतर रोबोट साथी होना ही है। यहां तक कि लोग इनसे सच में प्यार भी कर बैठेंगे। रोबोट के बारे में यह बात हमेशा से चर्चा का विषय रही है कि रोबोट इंसान की तरह ही सबकुछ कर सकते है। इसे लेकर वैज्ञानिकों की राय कभी एक नहीं रही है। लेकिन 2070 तक इंसानों का रोबोट के साथ सेक्स करने वाला यह दावा यकीनन चौंकाने वाला है

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है कि भविष्य दर्शन फिल्मकारों की कल्पना हमारा हम जानते हैं आने वाली कल की रोबोट घर का खाना बनाने के लिए कोलगेट कंपनी काम करेंगे और 2050 तक हर बीमारी का इलाज हो जाएगा आज के समय में विज्ञान कितने ज्यादा तरक्की कर चुका है हर इंसान जानता है और किसी भी तरह की कृत्रिम शरीर में जाना जा सकता है और हाल ही में एक युवक ने अपने हाथों में कैमरा  लगाया है मतलब

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