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बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

योग शरीर और विज्ञान

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---------------:योग और मेरुदण्ड:---------------
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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन

पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि वन्दन

      साधना की दृष्टि से मानव शरीर में जितने महत्वपूर्ण अंग हैं, उनमें सर्वाधिक मूल्यवान, सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है--'मेरुदण्ड'। मेरुदण्ड यानी रीढ़ की हड्डी। जिन हड्डियों के छोटे-छोटे टुकड़ों से मेरुदण्ड का निर्माण होता है, उनकी संख्या 84 है जिनका अगोचर सम्बन्ध जीवात्मा के 84 लाख योनियों से बतलाया गया है। प्रत्येक अस्थि-खण्ड में एक लाख योनियों के संस्कार विद्यमान हैं। 84 अस्थि-खंडों की श्रृंखला वाले इस मेरु-दण्ड के ऊपरी सिरे पर स्थितिशील ऊर्जा (स्टेटिक एनर्जी) यानी परात्पर 'शिवतत्त्व' की स्थिति है। इसी प्रकार इसके नीचे वाले सिरे पर गतिशील ऊर्जा (डायनेमिक एनर्जी) यानी शक्तितत्त्व या पराशक्ति की स्थिति है। योग की भाषा में इन्हीं दोनों सिरों को क्रमशः 'सहस्त्रार चक्र' और 'मूलाधार चक्र' कहते हैं। इन दोनों चक्र-बिंदुओं को तंत्र में ऊर्ध्व त्रिकोण और अधो त्रिकोण के रूप में परिकल्पित किया गया है। प्रथम चक्र-बिंदु पर जहाँ परात्पर शिवतत्त्व की स्थिति है, वहां शरीर और मन का मिलन होता है, इसी प्रकार दूसरे चक्र-बिन्दु पर जहां पराशक्ति तत्व की स्थिति है, वहां शरीर और आत्मा का मिलन होता है।
      मन और आत्मा का मिलन-केंद्र को योग की भाषा में 'अनाहत चक्र' कहते हैं। सहस्त्रार, मूलाधार और अनाहत के अलावा चार और चक्र हैं। तंत्र के अनुसार ये तीनों महत्वपूर्ण चक्र महाचक्र हैं। महाचक्रों का सम्बन्ध ॐ से बतलाया गया है। ॐ का ऊपरी भाग सहस्त्रार है, मध्य भाग अनाहत है और निम्न भाग मूलाधार है। ॐ में तीन ध्वनियां हैं--अ, उ और म्। अ और उ स्वर और म् व्यंजन है। सभी ध्वनियों और वर्णाक्षरों का लय म् में ही होता है। मेरुदण्ड के ऊपर अ, मध्य में उ और नीचे म् की स्थिति है। इस प्रकार पूरा मेरुदण्ड 'ॐ' से युक्त है। इन तीनों की समवेत ध्वनि को योग-तंत्र की भाषा में 'परावाक' कहते हैं। शरीर के भीतर इन तीनों के अपने-अपने केंद्रों से वैसे तो अलग-अलग ध्वनि निकलती है, पर एक स्थान विशेष पर ये तीनों ध्वनियां आपस में मिलकर परावाक का रूप धारण कर लेती हैं।
      वह स्थान विशेष कहाँ है ?
      वह स्थान विशेष है--नाभि (मणिपूरक चक्र) यह परावाक शक्ति का ही स्थान है। पराशक्ति ही परावाक रूप में व्यक्त होकर स्वरों और बाद में वर्णाक्षरों का निर्माण करती है। मगर उस निर्माण का एक क्रम है और उसी क्रम को 'परा', 'पश्यन्ति', 'मध्यमा' और 'बैखरी' कहते हैं। यदि इन चारों को परावाक के चार रूप कहा जाय तो साधुतर होगा।
      स्वर और वर्णाक्षरों की उत्पत्ति की दिशा में परावाक के ये रूप तो हैं ही, इनके अलावा उसके दो और गरिमामय रूप हैं जिन्हें 'भाव' और 'विचार' कहते हैं। प्रथम भाव की उत्पत्ति होती है और फिर बाद में विचार की। भाव कारण है और विचार है उसका परिणाम। sabhar sivram Tiwari Facebook wall

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मानव शरीर का चक्र विज्ञान

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------------------:ज्ञानतन्तु:------------------
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                    भाग--02
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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन

पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि वन्दन

      तंत्र के मतानुसार मानव शरीर में छः चक्र हैं जो चेतना-शक्ति के केंद्र-स्थल हैं--मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपूरक चक्र, अनाहद चक्र, विशुद्ध चक्र और आज्ञाचक्र। सहस्त्रदल वाला चक्र यानी 'सहस्त्रार' चक्र सातवें और 'सोम' नामक आठवें चक्र का योग में गणना करते हैं जहां अनवरत सोम की वर्षा होती रहती है, अमृत-क्षरण होता रहता है और जीवनी-शक्ति बराबर गतिमान होती रहती है। जब इस अमृत का क्षरण बन्द होने लगता है, तब जीवन-चक्र भी समाप्त होने लगता है। अमृत-क्षरण अनवरत चलता है। यह साधक की साधना पर निर्भर करता है। हज़ारों वर्ष तक जीवित रहने वाले दीर्घजीवी साधकों को इस सोमरस का पान योग द्वारा सम्भव होता है। आज भी हिमालय की कंदराओं में सिद्ध साधक इसी सोमतत्व का पान कर वर्षों से साधना  में लीन हैं।
      देखा जाय तो ज्ञानतंतुओं का समूह शरीर में स्वाभाविक क्रियाएं जैसे रक्त का प्रवाह, श्वांस-प्रश्वांस, चय-अपचय आदि क्रिया करता है। मस्तिष्क के स्मरण बल आदि के कार्य-समूह को पाश्चात्य शरीरशास्त्री ज्ञानतन्तु बल (नर्व फोर्स) कहते हैं भारतीय योग इसे 'प्राणतत्व' कहता है। इसका सामर्थ्य और इसकी तुलना का स्वरूप विद्युत-प्रवाह से मिलता-जुलता है। यदि प्राणतत्व न हो तो हृदय अपनी स्वाभाविक क्रिया नहीं कर सकता और रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाएगा। फेफड़े श्वांस-प्रश्वांस की क्रिया भी नहीं कर सकते, शरीर में सब जगह प्राणों का संचार भी नहीं हो सकता जिसके अभाव में शरीर और मस्तिष्क के अवयव अपना कार्य नहीं कर सकते। शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति और कार्बन डाई ऑक्ससाइड का निष्कासन भी सम्भव नहीं है प्राणतत्व के अभाव में। sabhar Shivram tiwari Facebook wall

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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

chetan aur avchetan man vigyan aur adyatm

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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

पुनः उग आएंगे छतिग्रस्त अंग

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वैज्ञानिको ने मानव शरीर में मौजूद उस खाश जीन का पता लगा लिया है जिसे स्विच ऑफ़ करते ही हमारे छतिग्रस्त अंग नए सिरे से पैदा हो जायेगे अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित विस्टार संस्थान के वैज्ञानिक की टीम ने पी २१ नामक जीन को तलाशा है यह जीन लाखो वर्षो के विकाश क्रम में स्विच ओंन हो गयी थी पी २१ नामक जीन कोशिकाओं के पुनर्जनम को रोके हुए है जब चूहों के सरीर में में इस जीन को निष्क्री किया गया तो उनके छातीग्रस्त उतक फिर पैदा हुए यह ब्लास्तेमा नाक एक संग्रचना के कारन संभव हुआ वैज्ञानिको ने ये भी बताया की पी२१ हटा देने पर मानव शरीर कोसिकायो में स्टेम सेल कोसिकायो का लगातार निर्माण किया जा सकता है

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क्वांटम कम्प्युटर बनेगा भविष्य का कम्प्युटर

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आगे भविष्य में कम्प्युटर के कार्य करने के तरीके बदल जायेंगे आने वाले भविष्य में आप के कम्प्यूटरों का स्थान क्वांटम कम्प्युटर ले लेगा जो चिप के स्थान पर द्रवों से भरा होगा यह भौतिक नियमो से संचालित नहीं होगा इसके आपरेसन के लिए क्वांटम यांत्रिकी का प्रयोग होगा अर्थात किसी बस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर विना स्थान परिवर्तन के पहुंचाना और समान्तर ब्रह्माण्ड जैसा सिधांत है यह कम्प्युटर पेंटियम -३ से १ अरब गुना ज्यादे तेजी से गड़ना करेगा और यह पलक झपकते पुरे इंटरनेट को खंगालने में सछम होगा यह कम्पूटर २०३० के आस पास आप के पास उपलब्द होगा यह सबसे एडवांस सिकोरिटी कोड को आसानी से तोड़ देगा इसके कम्पूटर चिपों के स्थान पर द्रव भरा होगा जिसमे उपस्थित परमाणु का प्रयोग गड़ना के लिए करेंगे परमाणु प्राकृतिक रूप से सूछ्म कल्कुलेटर है इसकी गति ऊपर नीचे होती है जो डिजिटल तकनीक से मेल खाती है क्वांटम यांत्रिकी के द्वारा सूछ्म अर्थात अणु परमाणु क्वार्ट इत्यादि के संसार को समझा जा सकता है इसके नियम इतने विचित्र है उनको समझना आसान नहीं है लेकिन इनके सिधांत को बार बार सिध्य किया गया है क्योकि किसी परमाणु का चक्रण एक ही समय में ऊपर या नीचे हो सकता है इसलिए पारंपरिक कम्पूटर के एक बिट के बराबर नहीं हो सकता है यह कुछ अलग है वैज्ञानिक इसे क्युबित कहते है यदि आप क्युबित के एक समूह को एक साथ रखे तो वे बर्तमान कम्पूटरों की तरह एक रेखीय गड़नाये नहीं करते वे एक समय सभी संभावितगड़ना करते है एक

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सौर ऊर्जा से चीनी बनाने में सफलता

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वैज्ञानिको ने सौर ऊर्जा से चीनी बनाने में सफलता प्राप्त की है सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता के दल ने सौर ऊर्जा से चीनी बनाने की कोशिश में कृत्रिम फोटो सिंथेटिक के जरिये चीनी बनाने की थी उन्होंने पौधों मेढक फफूद एन्जाएम और बैक्टेरिया को एक फोम के खोल में बंद करके सूरज की रोशनी और कार्बन डाई आक्साइड की मौजूदगी से इस प्रक्रिया में सफलता पाई यह पूरी प्रक्रिया अर्ध विषुवतीय छेत्र के टुंगारा मेडक के फोम से बने घोसले पर आधारित थी इस प्रक्रिया में सूरज की पूरी रोसनी का इस्तमाल चीनी बनाने के लिए होता है जबकि पौधे और फफूद फोटो सिंथेटिक के दौरान प्रकाश का इस्तेमाल अन्य कामो के लिए भी करते है इससे बनाई गयी चीनी को बड़ी आसानी से इथेनाल और दूसरे बायो फ्यूल में बदला जा सकता है यह एक ईधन के छेत्र एक अहम् खोज है

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बायो प्रिंटर से बनेगे इंसानी अंग

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अमेरिकी वैज्ञानिको ने ऐसा बायो प्रिंटर बनाने का दावा किया है जो जरूरतों के मुताबिक इंसानी अंग बना पायेगा कैलिफोर्निया स्थित रीजेनेरेटिव मेडिसिन कंपनी ओरागानोव ने इसी तरह की एक प्रोटोटाईप मशीन बिकसित कर ली है जो खून की नलिया उगाने में कामयाब है इसी से वैज्ञानिक बिरादरी में उम्मीद जगी है की एक दिन वो नए अंग उगा सकेगे यह मशीन थ्री डी लेसर तकनीक पर आधारित है फिलहाल इसकी मदद से मशीनो के पार्ट बनाये जाते है लेकिन बायो प्रिंटर में प्लास्टिक और मेटल की जगह जीवित टिशु प्रयोग किये जायेंगे इसके लिए दो लेसर बेस्ड प्रिंटिग हेड जीते जागते सेल्स को जेल की पतली शीट पर रखेंगे जरूरत के हिसाब से बने ढाचे में एक के ऊपर एक परते बनाती जायेंगी इसके बाद सेल्स आपस में जुड़ जायेंगी

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वैज्ञानिको ने आयु बड़ाने का तरीका प्राप्त किया

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वैज्ञानिको ने आनुवंसिक गुणों के आधार पर ऐसा उपाय ढूढ़ निकाला है जिसकी मदद से न सिर्फ दिर्ग्यायु जीवन संभव है बल्कि कैंसर का खतरा भी पूरी तारा ख़त्म हो जाएगा मेड्रिड स्थित स्पेन के रास्ट्रीय कन्सर शोध केंद्र के वैज्ञानिकों का एक दल चूहों पर प्रयोग के बाद इस निष्कर्ष पर पंहुचा है शोध के दौरान वैज्ञानिको ने तेलोमेरास पी ५३ पी १६ नाम के जिन्श की अतिरिक्त प्रति चूहों के स्टेम सेल में डाल दी तीनो गईं लम्बी आयु और टयूमर की वृद्धि रोकने में महत्वपूर्ण माने जाते है वैज्ञानिको ने पाया की चूहों की आयु ४५फीसदी तक बढ गयी और वे टयूमर से मुक्त रहे असल में इन तीन जीनो की अतिरिक्त प्रती डालने से चूहों के शरीर में अधिक प्रोटीन बनाने लगा और वे अधिक सक्रीय हो गए इस वजह से क्रोमोजोम का सिकुरना बंद होगया यही वो प्रक्रिया है जो किसी जीव या आदमी की उम्र बड़ा देती है क्रोमोजोम के सिकुरने से ही आदमी बूढा होता है इस तरह से मनुष्य के ज्यादे दिनों तक जवान रहने की संभावना बड़ी है इससे आयु भी बढेगी और कैंसर पर भी रोक लगेगी

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चन्द्रमा पर ओक्सीजन का स्रोत मिला

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हबल खौगोल दूरबीन के अत्याधुनिक कैमरे ने चन्द्रमा पर ऐरिस्तैराश ज्वालामुखी के मुहाने की क्लोजप तस्वीर उतारी है यह मुहाना ओक्सिजन हासिल किये जाने वाले खनिज का महत्त्व पूर्ण स्रोत हो सकता है ग्रीन वेल्ट स्थित नासा के गाडार्ड स्पेश फलाईट सेंटर के अनुसार अगस्त में पूर्ण चंद्रमा के दौरान ली गयी ये तस्वीरे बहुमूल्य सिद्य हो सकती है हब्बल ने अल्त्रवैलेट प्रकाश में तस्वीर उतारी है इन तस्वीरों से यह पता चला है की ओक्सिजन का स्रोत इलामेनाईट नाम का खनीज चन्द्रमा पर है विज्ञानियों के अनुसार विदमान लौह टिटेनियम और ओक्सिजन के समिसरण से इल्मेनिते का निर्माण हुआ है इससे भविष्य में चन्द्र अभियानों के लिए और वहा रिहाईश की सूरत में सांस लेने योग्य ओक्सिजन आसानी से हासिल किया जा सकता है यह खनिज बैसल्तिक चट्टानों में पाया जाता है इस चट्टान से ओक्सिजान हासिल करने की प्रक्रिया में पानी भी निकल सकता है

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अमेरीकी वैज्ञानिको ने कृतिम फेफड़ा बनाया

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अमेरिकी वैज्ञानिको ने कृतिम फेफड़ा बनाने का दावा किया है की उन्होंने इंसानी फेफड़ा बनाने की दिशा में प्रगति की है उनका दावा है कि उन्होंने प्रयोगशाला में विकसित कोसिकायो को चूहों के फेफड़े में कामयाबी से लगाकर नया फेफड़ा बनाने कि दिशा में अहम प्रगती कि है उन्होंने इंसानी फेफड़े कि तरह नजर आने वाली माइको चिप पर एक कृत्रिम उपकरण बनाकर इस दिशा में एक अहम प्रगती करने का दावा किया है येल यूनिवर्सिटी के शोध करताओ ने फेफड़े को बनाने में कामयाबी हासिल कि प्रयोगशाला में बिकसित कोसिकायो के इस्तेमाल से इन फेफड़े ने ४५ से १२० मिनट तक कार्य किया और फिर उन्हें चूहों में फिट कर दिया गया

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प्रकृतीक एंटी बायोटिक विटामीन डी

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हाल में किये गए शोधों से यह सिध्य हो गया है की विटामीन डी मनुष्य के शरीर के लिए के लिए एक प्रकृतीक एंटी बायोटिक की तरह कार्य करता है इससे इस विटामीन के कई फायदे सामने आये हैं इससे  की शरीर प्रतिरोधक छमता बड़ती है  जिससे  ह्रदय रोग में बचाव तथा इन्प्लुन्सा बीमारियों से शरीर को बचाता है यहाँ तक दावा किया जा रहा है इससे टी बी एड्स जैसी बीमारियों की थीरेपी इसके एनालोग को प्रयोग किया जा सकता है वैज्ञानिको का यहाँ तक कहना है सही मात्र में विटामीन डी शरीर में नहीं  पहुँच रही  है  तो स्वाथ्य के लिए हानिकारक है |

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