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शनिवार, 17 जून 2023

सेक्स ऊर्जा है, उस ऊर्जा को रूपांतरण करने की कला जानो-ओशो *

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 * जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर। उस ऊर्जा के पूरे अर्थ, मार्ग, व्यवस्था को जान कर उससे मुक्त हो सकता है। 


आंखें बंद कर लेने से कोई कभी मुक्त नहीं हो सकता। आंखें बंद कर लेने वाले सोचते हों कि आंख बंद कर लेने से शत्रु समाप्त हो गया है, तो वे पागल हैं। सेक्स के संबंध 

में आदमी ने शुतुरमुर्ग का व्यवहार किया है आज तक। वह सोचता है, आंख बंद कर लो सेक्स के प्रति तो सेक्स मिट गया।


अगर आंख बंद कर लेने से चीजें मिटती होतीं, तो बहुत आसान थी जिंदगी, बहुत आसान होती दुनिया। आंखें बंद करने से कुछ मिटता नहीं, बल्कि जिस चीज के संबंध में हम आंखें बंद करते हैं, हम प्रमाण देते हैं कि हम उससे भयभीत हो गए हैं, 

हम डर गए हैं। वह हमसे ज्यादा मजबूत है, उससे हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए हम आंख बंद करते हैं। आंख बंद करना कमजोरी का लक्षण है।


और सेक्स के बाबत सारी मनुष्य-जाति आंख बंद करके बैठ गई है। न केवल आंख बंद करके बैठ गई है, बल्कि उसने सब तरह की लड़ाई भी सेक्स से ली है। और उसके परिणाम, उसके दुष्परिणाम सारे जगत में ज्ञात हैं।


अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, 


सेक्स का दमन मौजूद है। अगर आदमी इतना बेचैन, अशांत, इतना दुखी और पीड़ित है, तो इस पीड़ित होने के पीछे उसने जीवन की एक बड़ी शक्ति को बिना समझे उसकी तरफ पीठ खड़ी कर 

ली है, उसका कारण है। और परिणाम उलटे आते हैं।


आदमी को हमने विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना दुखी भी न था।


मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।


क्या आपने कभी सोचा? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते हैं, जाति भूल सकते हैं, चेहरा भूल सकते हैं। लेकिन कभी आपको खयाल आया कि आप यह भी भूल सके हैं कि जिससे आप मिले थे,वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सके इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरुष है या स्त्री? जब सारी बातें भूल जाती हैं तो यह क्यों नहीं भूलता?


हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। इसलिए सब बात भूल जाती है, लेकिन यह बात नहीं भूलती। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, 


जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते - यह आग क्या थी?


और मैं आपसे कहता हूं, अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। मनुष्य के भीतर बिजली 

से भी बड़ी ताकत है सेक्स की। मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की।


कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है? उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा 

हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। 

एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम - 

ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। 


सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा सकते। 


               * सम्भोग से समाधि की ओर *


                           * ओशो * 


                                                             ***** DSB *****

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शनिवार, 10 जून 2023

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शुक्रवार, 9 जून 2023

गूगल Passkey से अकाउंट में पासवर्ड डालने की जरुरत नहीं है | Google Passkey

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आज का दोर इन्टरनेट का है इन्टरनेट के बिना एक दिन पर नहीं चलता इसके साथ गूगल का यूज़ करते है और गूगल का अकाउंट बनता है इसके बाद पासवर्ड भीर याद नहीं रहेता


 गूगल का अपडेट आया है इसमे पासवर्ड याद रखने की जरुरत नहीं पड़ेगा  पासवर्ड याद रखन बहुत मुश्किल हो जाता है इसका सलूशन लेके आया है |


गूगल ने फेसला किया है लोगो को पासवर्ड से बहुत हेरान होते है इसमे तू जो कंप्यूटर का यूजर को याद रखते है पर मोबाइल यूजर होते है वो तो दुसरे से Gmail अकाउंट बनवाते है एस लिए गूगल ने  passkeys ऑप्शन पेस किया है |


जैसे के बताने में ख़ुशी होगी आप और  हमारे लिए  गूगल के यूजर है जाएदा तर gmail ,youtube, मोबाइल का playstore का यूज़ करते हो  वो सब में पासवर्ड की जरुरत पड़ती है |



यूजर अपने अकाउंट के  जाने के बाद passkey को इनेबल करना होगा तू  जब आप गूगल अकाउंट में पासवर्ड के बाद two स्टेम्प verification आता है जब आप passkey का ओन  कर लो गे तू पासवर्ड से मुक्ति  हो जायेगा |


Google Passkey क्या है ?

आपके मन में गूगल passkey  की समझना जब आप लैपटॉप या मोबाइल में लॉगइन करते हो तो आप इसमें पेन फिंगरप्रिंट फेस की मदद से अकाउंट ओपन कर सकते हो |


गूगल का यूज करते हो तो आपको पासवर्ड टू स्टेप वेरीफिकेशन इसके साथ जो कभी ओटीपी आता ओटीपी नहीं आएगा इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी |


गूगल Passkey का फायदा

जब passkey को अनेबल करते हो जब इसका यूज करते हो और आप कहीं भी मोबाइल या लैपटॉप लेकर बैठे हो तो आपको पासवर्ड डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी और कोई आपका पासवर्ड देख भी नहीं पाएगा वह आपका पासवर्ड चोरी होने की संभावना रहेगी नहीं रहेगी गूगल में सिक्योरिटी परपस के लिए यह ऑप्शन लांच किया होगा इसका यूज कर सकते हैं |


गूगल में एक फीचर को लॉगइन करने की प्रक्रिया को पहले से हो सके इसके लिए ऑप्शन लेकर आए और गूगल का मकसद है लोग सुरक्षित रहे|


Google Passkey का सेटअप(Setup) कैसे करे ?

गूगल अकाउंट के अंदर passkey को सेट करने के लिए आपको पहले गूगल अकाउंट सेटिंग जीमेल को लॉगइन करना होगा


इसके बाद फोटो के साइन दिखेगा इसमें आपको अकाउंट मैनेज पर क्लिक करना होगा


Google Passkey का सेटअपsetup कैसे करे min

Google Passkey का सेटअप(setup) कैसे करे

उसके बाद आपको सिक्योरिटी का ऑप्शन देखने को मिलेगा


इस पर क्लिक करके आपको सेकुरिटी ऑप्शन देखने को मिलेगा


इसमें जाकर आप उसको अनेबल कर सकते हो


आप मोबाइल और लैपटॉप के लिए किस का यूज़ कर सकते 

Sabhar https://www.thedigitalpk.com/how-to-use-google-passkey-without-password-login.html


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हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है

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 हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है।


1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।


2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।


3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।


4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना ।


5. ज़्यादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।


6.  क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।


7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।


8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खेलाना....


9. गाँव, जंगल,   से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना।


 इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने  जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।


🚩जय हिंद जय भारत🚩 sabhar : Soniya singh facebook wall


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गुरुवार, 8 जून 2023

कपूर के पौधे

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 कुछ दिन पहले मैंने अपने गार्डन के कपूर के पौधे की इमेज शेयर की थी,जिसे आप सब ने काफी सराहा। साथ ही बहुत सारे प्रश्न और शंकाए भी थी। तो आज का कपूर के पेड़ से संबंधित ये पोस्ट आपके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। मैं कपूर का पौधा इसलिए कह रहा हू कि मेरा पौधा वर्तमान में मात्र 10 इंच के pot में लगा हुआ है और इसके पेड़ बनने के लिए इसको जमीन मिलना अभी बाकी है। तो चलिए बात करते है कपूर के पौधे के बारे में...

वर्तमान समय में प्रचलित कपूर केमिकल्स के ही बने होते हैं। यह कमाल का तत्व प्रकृति में भी विद्यमान होता है। दरअसल कपूर एक विशालकाय पेड़ से प्राप्त होते हैं जिनका मेडिसिनल वैल्यू कमाल का होता है। केमिकल्स वाले कपूर में मेडिसिनल वैल्यू का कोई अता-पता नहीं होता।कपूर लगभग हर घर में प्रयोग में लाया जाता है। पूजा पाठ में तो खास तौर पर इसका इस्तेमाल होता है। पूजा खत्म होने के बाद आरती के समय कपूर की अनिवार्यता हर किसी को पता है। कपूर सिर्फ फैक्ट्रियों में नहीं बनते, बल्कि पेड़ पर भी उगते हैं। यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी। इसके साथ ही कपूर के गुणकारी फायदे और इसके कुछ अनछुए रहस्य भी हैं, जिससे लोग शायद अनभिज्ञ हैं।कपूर एक विशालकाय, बहुवर्षायु लगभग सदाबहार वृक्ष है। इसका वृक्ष, एशिया के विभिन्न भागों में मसलन भारत, श्रीलंका, चीन, जापान, मलेशिया, कोरिया, ताइवान, इन्डोनेशिया आदि देशों में पाया जाता है। कपूर के वृक्ष की लम्बाई 50 से 100 फीट तक होती है। इसके सुन्दर, अति सुगन्धित पुष्प और मनमोहक फल तथा पत्तियाँ बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि कहीं-कहीं इसे श्रृंगारिक वृक्ष के रुप में भी अपनाया गया है। पत्तियां बड़ी सुन्दर, चिकनी, मोमी, लालीमायुक्त हरापन लिए होती हैं। वसन्त ऋतु में छोटे-छोटे अति सुगन्धित फूल लगते हैं। इसके फल भी बड़े मोहक होते हैं।


कपूर वृक्ष की लकड़ियां सुन्दर फर्नीचर के काम में भी लायी जाती हैं। यह काफी मजबूत और टिकाऊ होती है। इसके पेड़ से प्राप्त लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, तेज ताप पर उबाला जाता है फिर वाष्पीकरण और शीतलीकरण विधि से रवादार कपूर का निर्माण होता है। इसके अलावा, इससे अर्क और तेल भी बनाया जाता है, जिसका प्रयोग प्रसाधन एवं औषधी कार्यों में बहुतायत होता है। आयुर्वेद में इसके अनेक औषधीय प्रयोगों का वर्णन है। एलोपैथी और होमियोपैथी दवाइयों में भी कपूर का प्रयोग होता है। यह शीतवीर्य है, यानी इसकी तासीर ठंडी है। भारतीय कर्मकांड और तन्त्र में तो कपूर रचाबसा है ही, कपूर की कज्जली और गौघृत से काजल भी बनाया जाता है। यह बड़ा गुणकारी होता है।

कपूर का पौधा हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसकी सुगंध इतनी अच्छी होती है कि इसकी सुगंध से आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं। कपूर का पौधा अपनी सुगंध से चारों ओर के वातावरण को खुशबूदार बना देता है।

कपूर के पौधे को हम अपने घर में,बाहर, कहीं भी किसी भी जगह पर लगा सकते हैं।इसे हम अपने घर में, गमले में,कहीं भी लगा सकते हैं। कपूर का पौधा केवल एक पौधा ही नहीं है अपितु यह हमारे लिए स्वास्थ्य रूपी खजाने का भंडार है।

ऐसा माना जाता है कपूर का पौधा लगाने से घर से बीमारियां दूर हो जाती हैं। अगर कोई व्यक्ति कपूर के पौधे के संपर्क में रहता है तो वह हमेशा स्वस्थ रहता है।

सबसे बड़ा फायदा कपूर का पौधा लगाने से जो हमें होता है वह यह है कि यह पर्यावरण को शुद्ध करने में बहुत बड़ी मदद करता है।

दोस्तों इस तरह से कपूर का पौधा हमारे लिए बहुत ही लाभकारी है।यह हमें जीवन वायु प्रदान करता है।

# sabhar : ashishkibagia

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शनिवार, 3 जून 2023

वृद्धावस्था को रोकना या धीमा करना संभव है

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वृद्धावस्था को पूर्णतः रोकना या धीमा करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो हर व्यक्ति के लिए अवश्य होगी। हालांकि, कुछ उपायों द्वारा वृद्धावस्था के कुछ प्रभावों को धीमा किया जा सकता है और स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में मदद मिल सकती है।


यहां कुछ उपाय हैं जो वृद्धावस्था के प्रभावों को धीमा कर सकते हैं:


स्वस्थ आहार: सही आहार लेना वृद्धावस्था के लक्षणों को धीमा कर सकता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, फल, सब्जियां, अण्डे, दूध आदि सेवन करें।


नियमित शारीरिक गतिविधि: योग, ध्यान, पैदल चलना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना वृद्धावस्था को धीमा करने में मदद कर सकता है।


मानसिक स्थिरता: स्वस्थ मानसिक स्थिति रखना वृद्धावस्था के दुष्प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान और मनोरंजन के लिए समय निकालें।


नियमित चेकअप: नियमित चिकित्सा जांच और अनुसरण से वृद्धावस्था की सेहत पर नजर रखी जा सकती है और संभावित समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकता है।


यदि वृद्धावस्था के किसी व्यक्ति के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं, तो उन्हें एक प्रशिक्षित चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। वे सही और व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर सकते हैं जो उन्हें वृद्धावस्था के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

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शुक्रवार, 26 मई 2023

क्या है Neuralink Brain Chip

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 ब्रेन-चिप प्रौद्योगिकी विकास



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क्या दिमाग में चिप डालकर इंसानों को कंट्रोल करने की योजना बन चुकी? ब्रेन-चिप 


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अभी तक, दिमाग में चिप डालकर इंसानों को कंट्रोल करने की योजना का कोई साक्षात्कार नहीं हुआ है और ऐसी तकनीकों के बारे में भी कोई प्रमाणिक सूचना नहीं है जो मुझे अवगत कराती हो। ब्रेन-चिप प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसका उपयोग आमतौर पर मेडिकल और संशोधन के क्षेत्र में होता है, जैसे कि न्यूरोसाइंस, न्यूरोप्रोस्थेटिक्स, और न्यूरोलॉजिकल बिपप्रौद्योगिकल इम्प्लांट्स आदि।


अभी तक, मनुष्यों को कंट्रोल करने के लिए इस तरह के चिप्स का उपयोग नहीं होता है। व्यक्तिगत गोपनीयता और नैतिकता से जुड़े मुद्दों के कारण, इस प्रकार के तकनीकी विकास पर भी विवाद हैं। इसे संभवतः बच्चों के सुरक्षा या नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इस तकनीक के उपयोग के लिए नैतिक और कानूनी दिशानिर्देश और प्रमाणित नियंत्रण अपनाने की जरूरत होगी






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Neuralink Brain Chip एक तकनीकी उपकरण है जो मनुष्यों के दिमाग में एक चिप या इम्प्लांट के रूप में स्थापित किया जा सकता है। Neuralink नामक एक कंपनी द्वारा विकसित यह चिप दिमागी संचार को सुधारने और मानव-मशीन संबंधों को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है। इसका मुख्य उद्देश्य एक आधुनिक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) बनाना है, जिसके माध्यम से दिमागी गतिविधियों को पढ़ा जा सके और इनपुट और आउटपुट के माध्यम से कंप्यूटर सिस्टम के साथ इंटरैक्ट किया जा सके।


यह चिप इम्प्लांट छोटे साइज का होता है और विज्ञानिक दल द्वारा दिमागी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है। यह चिप विभिन्न सेंसर्स और इलेक्ट्रोड्स का उपयोग करके दिमाग की गतिविधियों को पढ़ता है और संग्रह किए गए डेटा को कंप्यूटर सिस्टम के साथ विभिन्न तरीकों से संचार करता है।


Neuralink Brain Chip के लिए कई संभावित उपयोग हैं, जैसे कि न्यूरोसाइंस और न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में 





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गुरुवार, 25 मई 2023

अब गाय के गोबर से बिजली

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ब्रिटेन के किसान अब गाय के गोबर से बिजली पैदा कर के अच्छी कमाई कर रहे हैं। ये किसान गाय के गोबर का इस्तेमाल कर के AA साइज की ‘पैटरी (बैटरी)’ तैयार कर रहे हैं। इन ‘Patteries’ को रिचार्ज भी किया जा सकता है। अब माना जा रहा है कि ये रिचार्जेबल ‘पैटरीज’ ब्रिटेन की रिन्यूवेबल एनर्जी की दिशा में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। अनुसंधान में सामने आया है कि 1 किलो गाय के गोबर से 3.75 kWh (किलोवॉट ऑवर) बिजली पैदा की जा सकती है।

इसे कुछ यूँ समझिए कि एक किलो गाय के गोबर से पैदा हुई बिजली से एक वैक्यूम क्लीनर को 5 घंटे तक संचालित किया जा सकता है, या फिर 3.5 घंटे तक आप आयरन का इस्तेमाल करते हुए कपड़ों पर इस्त्री कर सकते हैं। इन बैटरियों को ‘Arla’ नाम की डेयरी कोऑपरेटिव संस्था ने बनाया है। इस कार्य में ‘GP बैटरीज’ नाम की बैटरी कंपनी ने किसानों की मदद की है। दोनों कंपनियों ने बताया है कि एक गाय से मिलने वाले गोबर से 1 साल तक 3 घरों को बिजली दी जा सकती है।

इस हिसाब से देखा जाए तो अगर 4.6 लाख गायों के गोबर को एकत्रित किया जाए और ऊर्जा के उत्पादन में उनका उपयोग किया जाए तो इससे यूनाइटेड किंगडम के (UK) के 12 लाख घरों में साल भर बिजली की कमी नहीं होगी। विशेषज्ञ इसे ‘विश्वसनीय और सुसंगत’ स्रोत बता रहे हैं, जिससे बिजली पैदा हो सकती है। अकेले ‘Arla’ कंपनी की गायों से हर साल 10 लाख टन गोबर मिलता है। ‘Anaerobic Digestion (अवायवीय पाचन)’ की प्रक्रिया द्वारा गोबर से ऊर्जा प्राप्त की जा रही है।

इस प्रक्रिया के तहत गोबर को बायोगैस और बायो-फर्टिलाइजर में तोड़ दिया जाता है। ब्रिटिश किसानों का कहना है कि ये एक इनोवेटिव प्रयास है, जो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध गोबर का सदुपयोग कर के ब्रिटेन की एक बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है। उनका कहना है कि अपने खेतों और पूरे एस्टेट में वो इसी ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। यहाँ तक कि गोबर से ऊर्जा बनाने के बाद जो वेस्ट बचता है, उसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है।

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नैनोटेक्नोलॉजी भविष्य की संभावनाएं

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एक ऐसी दुनिया की कल्पना कीजिए जसे कार को अणु दर अणु असेम्बल किया जाता है और लोगों का ऑपरेशन कोशिका के आकार के रोबोट द्वारा किया जाता है। वे मानव मस्तिष्क की फैटेसी और साइंस फिक्शन का हिस्सा लग सकता है। लेकिन हम ऐसी सूक्ष्म मशीन बनाने के करीब पहुंच चुके हैं जो का निर्माण आणविक स्तर पर होगा की मदद से हम आणविक आकार के कंप्यूटर और रोबोट बनाने में सफल होगे, जिनकी मदद से कई आविष्कार करने में सफल होंगे।

क्या है नैनोटेक्नोलॉजी ?

नैनोटेक्नोलॉजी की सर्वप्रथम परिकल्पना 1959 में नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकविद रिचर्ड फेनमैन ने अपने देयर इज प्लेन्टी ऑफ रूम एट द बॉटम नामक भाषण में की थी तब फेनमैन ने प्रतिपादित किया था कि पारंपरिक आकार की रोबोट भुजाओं से खुद की अनुकृति तैयार कराई जाए जिसका आकार मौलिक रोबोट भुजा से 1/10 हो। तत्पश्चात इन नई निर्मित रोबोट भुजाओं से तब तक सूक्ष्म से सूक्ष्मतर रोबोट भुजाओं का निर्माण किया जाये जब तक वे आणविक आकार की न हो जाएं। यदि हमारे पास ऐसी करोड़ों व अरबो आणविक रोबोट भुजाएँ हो जाएं तो उन्हें प्रोग्राम करके एक अकेले अणु से विशाल आकार के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इसे उन्होंने बॉटम अप मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नीक का नाम दिया था।

1980 के दशक के दौरान एम आई टी के इंजीनियर के. इटिक ड्रेक्सलेर ने इंजन्स ऑफ क्रिएशन नामक पुस्तक का प्रकाशन किया जिसमें आणविक नैनोटेक्नोलॉजी की संकल्पना प्रस्तुत की गई थी।

नैनोटेक्नोलॉजी नामकरण 1976 में जापान के वैज्ञानिक नोरिया ताजी ने किया था जो लंबाई की एक यूनिट है। यह एक इंच के एक अरब हिस्से के बराबर होता है। एक से लेकर सौ नैनोमीटर को नैनोमेन कहा जाता है। एक नैनोमीटर एक मीटर का एक करोड़वाँ भाग होता है।

नैनोटेक्नोलॉजी किस तरीके से काम करती है? जब किसी पदार्थ में परमाणु स्तर पर फेरबदल किया

जाता है तो उसके प्रकाशिक, चुंबकीय, विद्युतीय व अन्य गुणधमों में परिवर्तन हो जाता है। इतने छोटे पदार्थ के लिए सरफेस टु वॉल्यूम अनुपात महत्वपूर्ण होता है तथा ज्यादातर अणु परातल में आकर पदार्थ को हाइपर एक्टिव बनाते है। इस प्रभाव से पदार्थ की रासायनिक क्रियाशीलता बदलती है, जिसके कारण बेहतर गुणवत्ता वाले नवीन उत्प्रेरक, मिश्र धातुएं व कंपोजिट पदार्थ उत्पन्न किए जा सकते है। नैनोमैटेरियल बेहद हल्के, मजबूत पारदर्शी और अपने मूल पदार्थ से पूर्णतया भिन्न होते हैं। नैनोटेक्नोलॉजी से बने पदार्थ का आकार

भविष्य की संभावनाएं

नैनोटेक्नोलॉजी की अन्य संभावनाओं में स विनिर्माण प्रक्रिया शामिल है। इसमें ऐसे पदार्थ संभावना निहित है जो जीव प्रणाली की नकल करें व अभी तक के अधिक अनुप्रयोगों का उद्देश्यों उपल वृद्धि करना रहा है। हल्की व कम ईंधन खपत वाली कोशिश जारी है। प्रदूषकों को निति करने वाले घोल को विकसित करने का प्रयास जारी है जिसे जब तो वे सौर ऊर्जा का भंडारण कर सकें।

राइस यूनीवर्सिटी, संय अमेरिका के रिचर्ड की खोज की थी. का कहना है कि मोद विद्युत संप्रेषण के लिए किया जा सकता है। जा डॉट्स और नैनो मशीन का प्रयोग विभिन्न रोगों के किया जा सकता है।

मानव के बाल के 50 हजार हिस्से के बराबर होता

क्या है फायदे की संभावनाएं ?

नैनोटेक्नोलॉजी निम्न क्षेत्रों में फायदेमंद सिद्ध हो

 मैन्यूफैक्चरिंग

 प्रिसीजन मैन्यूफैक्चरिंग

 मैटेरियल रियूज

 मिनीएचराइजेशन

1 मेडिसिन

फार्मास्युटिकल्स रोग निवारण

नैनोमशीन असाइड सर्जरी

पर्यावरण

टोक्सिन क्लीनअप रिसाइकिलिंग

मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में मैनोटेक्नोलॉजी की साथ ही मेडिकल व पर्यावरण के क्षेत्र में भी इस नैनोमशीनों की सहायता से हम फार्मास्युटिकल्स डिजाइन व संश्लेषित कर सकते हैं। इसकी सहाय इलाज संभव है। इसकी सहायता से हम बीमार व्या देखभाल कर सकते हैं। साथ ही नॅनोटेक्नोलॉजी आसानी से ऑपरेट कर सकती है जहाँ डॉक्टर आर सकते हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में हम नैनोमशीनों की तेल रिसाव की समस्या से आसानी से निपट सकते

नैनोटेक्नोलॉजी के संभावित खतरे

नैनोटेक्नोलॉजी का दूसरा पहलू भी है जो हमें त

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सीएसए और आईआईटी ने मिल कर बनाया क्रॉप ट्रीटमेंट इक्विपमेंट नाम का

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खेतों में खड़ी फसलों में होने वाली डिसीज को लेकर प्रोडक्शन घटने से फार्मर्स को परेशान होने की जरूरत नहीं है. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) और आईआईटी कानपुर ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो कि खेत में खड़ा होकर फसलों में होने वाले रोगों को बताएगा साथ ही हल्का-फुल्का रोग होने पर दवा का छिड़काव भी कर देगा. सेंट्रल गवर्नमेंट से इस रोबोट को पेटेंट सर्टिफिकेट भी मिल गया है..


कीमत 25 लाख से ऊपर


• सीएसए के प्लांट पैथोलॉजी डिपार्टमेंट से के साइंटिस्ट डॉ. एसके बिस्वास, आईआईटी के डॉ. अनिरुद्ध भट्टाचार्य, डॉ. विशाख भट्टाचार्य और डॉ. महेंद्र कुमार गोहिल ने टीम के साथ मिल कर जिस रोबोट को तैयार किया है, उसका नाम शस्य उपचार यंत्र (क्रॉप ट्रीटमेंट इक्विपमेंट) रखा गया है. साइंटिस्ट और टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट की ओर बनाए गए रोबोट की कीमत 25 लाख से ऊपर हो सकती है. हालांकि कीमत को लेकर अभी तक कोई ऑफिशियल डिक्लेरेशन नहीं किया गया है. ऐसे में यह रोबोट रिच फॉर्मर्स और एफपीओ के लिए उपयोगी साबित होगा. एफपीओ के जरिए इस रोबोट, का उपयोग छोटे फार्मर भी कर सकेंगे.


● सीएसए के खेतों में चल रहा क्रॉप ट्रीटमेंट इक्विपमेंट रोबोट का ट्रायल.


रोबोट को एक खेत में इस्टैबलिश किया जाएगा, जिसके बाद यह खेतों में इंसान की तरह घुमेगा


आलू, टमाटर की फसल...


यह रोबोट आलू और टमाटर की क्रॉप में पौधों की कैनोपी, टेंपरेचर, ह्यूमिडीटी, और डिसीज के सिस्टम्स को पहचानने के बाद उसके मैनेजमेंट का काम करेंगा. सीएसए के डॉ.


दवा का छिड़काव भी करेगा रोबोट बीमारी की इंफार्मेशन देने के साथ साथ छोटी-मोटी डिसीज का ट्रीटमेंट भी खुद ही कर देगा. रोबोट में टंकी लगी है, जिसमें आर्गेनिक पेस्टीसाइड (जीवामृत, घनामृत, ट्राइकोडर्मा) आदि भरा होगा. डिसीज का पता लगने पर बीमारी अनुसार स्वयं ही पौधे पर पेस्टीसाइड का छिड़काव हो जाएगा. रोबोट की मेमोरी की पड़ताल करने पर डिसीज पता भी चल जाएगी.


ऐसे काम करेगा रोबोट


रोबोट में सेंसर और कैमरे लगे हुए हैं, वह पौधों में डिसीज को M आईडेंटिफाई मो में डिसीज का नाम और फोटो सेव कर लेगा


• इसके बाद आपके पास मोबाइल में डिसीज के होने का मैसेज आएगा या फिर आप स्वयं भी मेमोरी को कर सकते हैं


| एआई, एमएल पर काम


यह रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) पर काम करेगा. इसमें आलू और टमाटर में लगने वाली डिसीज और उनके सिम्टम्स को सेव किया गया है, जिसको वह एआई के जरिए आईडेंटिफाई करता है. उसके बाद दवा का छिड़काव मशीन लर्निंग के. जरिए होता है. भविष्य में यह रोबोट आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में बहुत हेल्पफुल साबित होगा.


बिस्वास ने बताया कि इस रोबोट से फार्मर क्रॉप में सीरियस डिसीज के • नुकसान पहचानने के पहले उसका मैनेजमेंट कर सकेंगे.


डिसीज की प्री इंफॉर्मेशन


उन्होंने यह भी बताया कि रोबोट फ्यूचर में होने वाली डिसीज की


पॉसिबिलिटीज पर वार्निंग भी देने का काम करेगा. डिसीज की प्री इंफार्मेशन मिलने से उसका मैनेजमेंट आर्गेनिक मैथड से हो सकेगा, आर्गेनिक मैनेजमेंट होने की वजह से मनुष्यों पर केमिकल्स का साइड इफेक्ट नहीं होगा. यह इस ... आधुनिक रोबोट का एक बेहद इंपार्टेंट फैक्टर है.

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ए आई टेक्नोलॉजी: भविष्य की अद्भुतता का रहस्य

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 ए आई टेक्नोलॉजी: भविष्य की अद्भुतता का रहस्य


हर एक के जीवन में तकनीकी उन्नति ने अपार प्रभाव डाला है। विज्ञान और तकनीक ने हमारी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल दिया है और एक नया युग शुरू हो गया है, जिसे हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कहते हैं। AI ने न केवल व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है, बल्कि हर आदमी के जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है। आइए, हम एक यात्रा पर निकलें जहां हम AI टेक्नोलॉजी के बारे में अधिक जानेंगे और इसके भविष्य के बारे में सोचेंगे।




H1: Introduction to AI Technology

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी AI, एक ऐसी तकनीक है जो मानव-जैसी बुद्धि को सिमुलेट करती है। यह कंप्यूटर विज्ञान और संगणक विज्ञान का एक उदाहरण है जिसमें मशीनों को सिखने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की जाती है। एक AI सिस्टम में अल्गोरिदम, संगणक शक्ति, और सामान्य बुद्धि के सिद्धांत का उपयोग किया जाता है ताकि वह मानवों के समान काम कर सके।








H2: Understanding AI Technology

AI टेक्नोलॉजी को समझने के लिए हमें सबसे पहले उसके तत्वों को समझना जरूरी है। इसमें विशेष रूप से तीन मुख्य तत्व होते हैं: संगणना शक्ति, डेटा, और अल्गोरिदम। संगणना शक्ति का उपयोग करके AI सिस्टम बड़े और जटिल संख्यात्मक कार्यों को तेजी से पूरा कर सकते हैं। डेटा AI के लिए मूलभूत होता है, क्योंकि यह सिस्टम को सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। और अल्गोरिदम, जो AI की मंशा और कार्यों को संचालित करने में मदद करता है, विशेष रूप से मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के माध्यम से उपयोग किया जाता है।


H3: Applications of AI Technology

AI टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है। आइए हम कुछ मुख्य उदाहरणों को देखें:


AI Technology in Everyday Life

AI आपके दैनिक जीवन को बदल देती है। आपने सिर्फ उचित खोज करके आपने अपने स्मार्टफोन को कहा कि आपको रास्ते में कहां जाना है और इतिहास देखकर वेबसाइटों और ऐप्स द्वारा निर्धारित विज्ञापनों को देखा है। यह सब AI के बल पर संभव होता है। अन्य ऊद्योगिक उपयोगों में AI को खुदरा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता उत्पादन, संचार और निर्माण शामिल हैं।

 Impact of AI Technology on Society

AI टेक्नोलॉजी का समाज पर गहरा प्रभाव होता है। इसका उपयोग सुरक्षा, रोजगार, चिकित्सा, वित्तीय सेवाएं, और कई और क्षेत्रों में किया जाता है। हालांकि, इसके साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। AI ने नौकरियों को प्रभावित किया है, जहां कुछ कार्य अब अटोमेशन के द्वारा किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, यह नैतिक और न्यायिक मुद्दों को भी उठा सकती है, जैसे डेटा निजता, असंबंधित निर्णय लेने की क्षमता, और अद्यतित कानूनी मार्गदर्शिका की आवश्यकता।


Advantages and Disadvantages of AI Technology

AI टेक्नोलॉजी के कई लाभ और हानियां हैं। हमें इन दोनों को समझने की आवश्यकता होती है ताकि हम इसे सही ढंग से उपयोग कर सकें।

 Advantages of AI Technology

AI टेक्नोलॉजी के कई लाभ हैं। इसका उपयोग टास्क के गतिशीलता को बढ़ाने, निष्पक्ष निर्णय लेने, नई और अद्वितीय आईडियाओं को खोजने, और समस्याओं का समाधान करने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह काम की ऊर्जा, समय, और वित्त की बचत करने में सहायक होता है।

 Disadvantages of AI Technology

यद्यपि AI टेक्नोलॉजी में कई लाभ हैं, लेकिन इसके साथ कुछ हानियां भी हैं। यह नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, डेटा निजता के मुद्दों का सामना कर सकता है, और विकासशीलता और जीवन की अवधारणाओं को प्रभावित कर सकता है। हमें इन चुनौतियों का सामना करते हुए एक नियमित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है ताकि हम सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर सकें।


 Conclusion

AI टेक्नोलॉजी आधुनिक दुनिया में एक महत्वपूर्ण और रोचक विषय है। यह मानवीय बुद्धि को सिमुलेट करने की क्षमता रखती है और हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है। हालांकि, हमें इसके उपयोग के साथ सावधान रहना चाहिए और उन नैतिक मुद्दों को समझना चाहिए जो इसके साथ जुड़े हुए हैं। AI निरंतर विकास कर रही है और हमारे जीवन को और बेहतर बना सकती है, लेकिन इसे सही ढंग से नियंत्रित करना आवश्यक है।


. क्या AI सिस्टम वास्तविक में सोच सकते हैं?

AI सिस्टम वास्तविक में सोच नहीं सकते हैं, लेकिन वे मानवों के तरीके से कार्य करने और निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। वे डेटा और अल्गोरिदम के आधार पर समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और लगातार सीखते रह सकते हैं।


 AI का उपयोग किस-किस क्षेत्र में होता है?

AI का उपयोग कई क्षेत्रों में होता है, जैसे संगणक विज्ञान, वाणिज्यिक क्षेत्र, स्वास्थ्य सेवाएं, निर्माण, संचार, और खुदरा उद्योग। इसका उपयोग डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, और स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए किया जाता है।

 क्या AI सिस्टम त्रुटि कर सकते हैं?

हाँ, AI सिस्टम त्रुटि कर सकते हैं। यह डेटा की गणना में त्रुटि कर सकते हैं, असंख्य विकल्पों में गलत निर्णय ले सकते हैं, और उपयोगकर्ताओं की प्राथमिकताओं को समझने में असफल हो सकते हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि AI सिस्टमों में त्रुटियां कम हों और सुरक्षा के साथ उपयोग किए जाएं।


क्या AI कानूनी नैतिकता को प्रभावित कर सकता है?

हाँ, AI कानूनी नैतिकता को प्रभावित कर सकता है। AI का उपयोग निजता, उचितता, और अद्यतित कानूनी मार्गदर्शिका के मामले में चुनौतियों का सामना कर सकता है। इसलिए, सावधानीपूर्वक और नैतिकता के साथ AI का उपयोग किया जाना चाहिए।

क्या AI को मानवीय बुद्धि से अधिक करने की क्षमता है?

AI की क्षमता मानवीय बुद्धि को सिमुलेट करने से अधिक नहीं है। हालांकि, यह ताकतवर गणना, तेजी से सीखने, और बड़े मात्रा में डेटा को प्रसंस्करण करने की क्षमता रखता है। लेकिन यह मानवीय अनुभव, संवेदनशीलता, और सामजिक अवधारणाओं को पूरी तरह से समझने की क्षमता से वंचित है।






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