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सोमवार, 17 जुलाई 2023

उद्देश्य की भावना अकेलेपन, हृदय रोग से बचाती है

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 साइकोलॉजी एंड एजिंग जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन से  पता चला है कि जीवन में उद्देश्य की भावना होने से अकेलेपन से बचाव होता है। यह, बदले में, जीवन भर हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने और सुधारने में मदद कर सकता है।


अध्ययन में 2,300 से अधिक स्विस वयस्कों को शामिल किया गया जिन्होंने एक सर्वेक्षण पूरा किया जिसमें उनके उद्देश्य की भावना, अकेलापन, दूसरों से प्राप्त समर्थन का स्तर और दूसरों को प्रदान किए गए समर्थन के स्तर को मापा गया। सर्वेक्षण के सवालों में साथी की कमी, दूसरों से अलगाव, छोड़े जाने की भावना, यह महसूस करना कि किसी के जीवन में पर्याप्त उद्देश्य नहीं है, और प्रतिभागियों द्वारा अपनी गतिविधियों को महत्व दिया जाना जैसे कारकों को मापा गया। सर्वेक्षण पूरा करने के बाद, चार चरों में से प्रत्येक के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए एक मॉडल का उपयोग किया गया था।


परिणामों से पता चला कि उद्देश्य की भावना अकेलेपन के साथ नकारात्मक रूप से जुड़ी हुई थी - दूसरे शब्दों में, लोगों के पास जितना अधिक उद्देश्य था, उन्हें उतना ही कम अकेलापन महसूस होता था। उद्देश्य की भावना सकारात्मक रूप से समर्थन देने और दूसरों से समर्थन प्राप्त करने दोनों के साथ जुड़ी हुई थी, यह सुझाव देते हुए कि सामाजिक संबंध किसी के उद्देश्य की भावना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लेखकों ने कहा  कि उद्देश्य की भावना होने से आपको यह धारणा मिलती है कि आपके पास दिन-प्रतिदिन कुछ "नेतृत्व और निर्देशन" है। उद्देश्यों के उदाहरणों में बागवानी, परिवार, कार्य, सामाजिक क्लब, स्वयंसेवा और खेल लीग शामिल हो सकते हैं। उद्देश्य की भावना पैदा करने वाली कई गतिविधियाँ अन्य लोगों को शामिल करती हैं, यही कारण है कि आंशिक रूप से अकेलापन और उद्देश्य की भावना नकारात्मक रूप से सहसंबद्ध होती हैं। हालाँकि, लेखकों ने आगे कहा कि अपने आप में उद्देश्य की भावना अकेलेपन से भी बचाती है, भले ही उस उद्देश्य में अन्य लोग शामिल हों। पिछले अध्ययन दिखाया गया है कि अकेलापन दिल के जोखिमों को बढ़ाता है, इसलिए उद्देश्य की भावना रखने से अकेलेपन को कम करके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सकता है। महत्वपूर्ण रूप से, लेखकों ने कहा कि किसी का उद्देश्य दुनिया को बचाने की खोज करना नहीं है; यहां तक ​​कि छोटी-छोटी चीजें भी जीवन में उद्देश्य पैदा कर सकती हैं, और जो चीजें दूसरों को मामूली लग सकती हैं, वे आपको उद्देश्य की भावना ला सकती हैं, जब तक वे आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।


स्रोत: मनोविज्ञान और एजिंग , साइंस डेली , लैबरूट्सheartdisease

Sabhar https://www.labroots.com

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रविवार, 16 जुलाई 2023

मैदान की जगह कंप्यूटर की स्क्रीन पर लड़ा जाएगा तीसरा विश्व युद्ध

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Worldwar computerमैदान की जगह कंप्यूटर की स्क्रीन पर लड़ा जाएगा तीसरा विश्व युद्ध इंटरनेट क्रांति आने के बाद जीवन उन्नत तो हुआ है लेकिन इतना उन्नत नहीं कि जीवन और मृत्यु डिजिटल हो जाएं। लेकिन अगर अमे‌रिका की मानें तो अगला विश्व युद्ध मैदान की बजाय इंटरनेट यानी साइबरस्पेस में लड़ा जाएगा। अगर ऐसा होता है तो जान की बजाय संसाधनों और धन की क्षति पिछले युद्धों से ज्यादा और भयंकर होगी।


अमेरिका के रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा ने कहा है कि भविष्य में युद्ध का मैदान साइबरस्पेस होगा क्योंकि हमलावरों ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और अब वे अमेरिका के पावर ग्रिडों और सरकारी प्रणाली को नष्ट करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।


पैनेटा ने सैन्य प्रतिष्ठानों की अधिकता वाले वर्जीनिया के शहर नोरफोक में एक कार्यक्रम में कहा।।हमारे सामने साइबरस्पेस के रूप में युद्ध की एक नयी चुनौती मुंह बाए खडी है। हम इस पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि भविष्य का युद्ध साइबरस्पेस में ही लडा जाएगा।


अमेरिकी बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर हाल के दिनों में संदिग्ध ईरानी हैकरों लगातार हमले किए हैं। साइबर फाइटर्स आफ इज अददीन अल कासम नाम के एक संगठन ने दावा किया है कि उसने इस्लाम विरोधी वीडियो के विरोधस्वरूप अमेरिकी वित्तीय संस्थाओं को निशाना बनाया है।


पैनेटा ने कहा कि अभी जब वो यहां आप लोगों से बात कर रहे हैं अमेरिका में साइबर हमले जारी हैं। हमारे बैंकों पर और वित्तीय संस्थाओं पर। अब वे ऐसी क्षमता विकसित कर रहे हैं जिससे वे हमारे पावर ग्रिडों। वित्तीय व्यवस्थाओं और सरकारी प्रणालियों को निशाना बना सकें और इस देश को तहस।नहस कर सकें। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इसके लिए सीधे तौर पर किसी देश का नाम लिया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने साइबर हमलों के स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर फोरेंसिक में उल्लेखनीय निवेश किया है। उन्होंने साइबर हमलावरों को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के पास उन्हें धर दबोचने और कानून के दायरे में लाने की क्षमता है। sabhar : amarujala.com

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शनिवार, 15 जुलाई 2023

कैलाश पर्वत और चंद्रमा का रहस्य

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Sabhar Nisa sanatani facebookwall

कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है चकित.;


कैलाश पर्वत, इस एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग शिव का निवास स्थान मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है।


किन्तु वहीं नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश एक रहस्यमयी जगह है। नासा के साथ-साथ कई रूसी वैज्ञानिकों ने कैलाश पर्वत पर अपनी रिपोर्ट दी है।


उन सभी का मानना है कि कैलाश वास्तव में कई अलौकिक शक्तियों का केंद्र है। विज्ञान यह दावा तो नहीं करता है कि यहाँ शिव देखे गये हैं किन्तु यह सभी मानते हैं कि, यहाँ पर कई पवित्र शक्तियां जरूर काम कर रही हैं। तो आइये आज हम आपको कैलाश पर्वत से जुड़े हुए कुछ रहस्य बताते हैं।


#कैलाश_पर्वत_के_रहस्य.


रहस्य 1– रूस के वैज्ञानिको का ऐसा मानना है कि, कैलाश पर्वत आकाश और धरती के साथ इस तरह से केंद्र में है जहाँ पर चारों दिशाएँ मिल रही हैं। वहीं रूसी विज्ञान का दावा है कि यह स्थान एक्सिस मुंडी है और इसी स्थान पर व्यक्ति अलौकिक शक्तियों से आसानी से संपर्क कर सकता है। धरती पर यह स्थान सबसे अधिक शक्तिशाली स्थान है।


रहस्य 2 - दावा किया जाता है कि आज तक कोई भी व्यक्ति कैलाश पर्वत के शिखर पर नहीं पहुच पाया है। वहीं 11 सदी में तिब्बत के योगी मिलारेपी के यहाँ जाने का दावा किया जाता रहा है। किन्तु इस योगी के पास इस बात के प्रमाण नहीं थे या फिर वह स्वयं प्रमाण प्रस्तुत नहीं करना चाहता था। इसलिए यह भी एक रहस्य है कि इन्होंने यहाँ कदम रखा या फिर वह कुछ बताना नहीं चाहते थे।


रहस्य 3 - कैलाश पर्वत पर दो झीलें हैं और यह दोनों ही रहस्य बनी हुई हैं। आज तक इनका भी रहस्य कोई खोज नहीं पाया है। एक झील साफ़ और पवित्र जल की है। इसका आकार सूर्य के समान बताया गया है। वहीं दूसरी झील अपवित्र और गंदे जल की है तो इसका आकार चन्द्रमा के समान है। 


रहस्य 4 - यहाँ के आध्यात्मिक और शास्त्रों के अनुसार रहस्य की बात करें तो कैलाश पर्वत पे कोई भी व्यक्ति शरीर के साथ उच्चतम शिखर पर नहीं पहुच सकता है। ऐसा बताया गया है कि, यहाँ पर देवताओं का आज भी निवास हैं। पवित्र संतों की आत्माओं को ही यहाँ निवास करने का अधिकार दिया गया है।


रहस्य 5 - कैलाश पर्वत का एक रहस्य यह भी बताया जाता है कि जब कैलाश पर बर्फ पिघलती है

https://www.facebook.com/100086652771092/posts/pfbid02iMf65M5Q1A2DuwVSDdBHA7gpZPRCUEroJFJ2u6YgkDyoGiJ3hGpuBxcHTBwTyDK3l/?mibextid=Nif5oz

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शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

चंद्रयान ३ का सफल लांचिंग हो गई

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भारत ने अंतरिछ में एक लम्बी छलांग लगा दी है चंद्रयान ३ का सफल लांचिंग 

ISRO Chandrayaan 3 Launch News Update: इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 ने अपनी सटीक कक्षा में चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है. अंतरिक्ष यान पूरी तरह सामान्य व्यवहार कर रहा है. परियोजना निदेशक पी वीरमुथुवेल और इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने LVM3 M4 वाहन को सफलतापूर्वक कक्षा में लॉन्च करने के बाद अपनी खुशी साझा की.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 4 साल बाद एक बार फिर से पृथ्वी के इकलौते उपग्रह चांद पर चंद्रयान पहुंचाने के अपने तीसरे अभियान को लॉन्च किया. फैट बॉय’ एलवीएम-एम4 रॉकेट ने ठीक 2 बजकर 35 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरीक्ष केंद्र से चंद्रयान-3 को लेकर उड़ान भरी. इसरो ने कहा कि लॉन्चिंग के कुछ मिनट बाद एमएलवी-एम4 चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा में लेकर सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया. इसके बाद चंद्रयान-3 ने लॉन्च रॉकेट से अलग होकर चंद्रमा तक की अपनी यात्रा शुरू कर दी. चंद्रयान-3 को चंद्रमा की सतह पर उतरने में करीब 50 दिन का समय लगेगा. इसरो के मुताबिक 23 या 24 अगस्त तक यह चांद की सतह पर लैंड कर सकता है.

इसरो का चांद पर यान को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने यानी सुरक्षित तरीके से यान उतारने का यह मिशन अगर सफल हो जाता है तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जो ऐसा कर पाने में सक्षम हुए हैं. अगस्त के आखिर में चंद्रयान-3 का लैंडर, रोवर को लेकर चंद्रमा पर उतरेगा. फ्रांस के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे चंद्रयान मिशन के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि भारतीय अंतरिक्ष के क्षेत्र में 14 जुलाई 2023 का दिन हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा तथा यह राष्ट्र की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा. चंद्रयान-2, 2019 में चांद की सतह पर सुरक्षित तरीके से उतरने में विफल रहा था जिससे इसरो का दल काफी निराश हो गया था. तब भावुक हुए तत्कालीन इसरो प्रमुख के. सिवन को गले लगा कर ढांढस बंधाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें आज भी लोगों को याद हैं.

इसरो के वैज्ञानिक सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग तकनीक में महारथ हासिल करने का लाक्ष्य साधे हुए हैं. अगर भारत ऐसा कर पाने में सफल हो जाता है वह अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद इस सूची में चौथा देश बन जाएगा. इसरो अपने चंद्र मॉड्यूल से चांद की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग कर उसकी जमीन पर चहलकदमी का प्रदर्शन कर नई ऊंचाइयों को छूने जा रहा है. इसरो के अनुसार, यह मिशन भावी अन्तरग्रहीय मिशनों के लिए भी सहायक साबित हो सकता है. चंद्रयान-3 मिशन में एक स्वदेशी प्रणोदन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और एक रोवर शामिल हैं, जिसका उद्देशय अन्तरग्रहीय मिशनों के लिए जरूरी नई प्रौद्योगिकियों का विकास एवं उनका प्रदर्शन करना है.

सबसे लंबे और भारी एलवीएम3 रॉकेट (पूर्व में जीएसएलवी एमके3 कहलाने वाले) की भारी भरकम सामान ले जाने की क्षमता की वजह से इसरो के वैज्ञानिक उसे प्यार से ‘फैट बॉय’ भी कहते हैं. इस ‘फैट बॉय’ ने लगातार 7वीं सफल लॉन्चिंग को अंजाम देकर इसरो का विश्वास कायम रखा. इसरो ने कहा कि एलवीएम-एम4 ने एकबार फिर साबित किया कि बेहद वजनी लॉन्चिंग प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा करने में उसका कोई सानी नहीं है. इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 ने अपनी सटीक कक्षा में चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है. अंतरिक्ष यान पूरी तरह सामान्य व्यवहार कर रहा है. परियोजना निदेशक पी वीरमुथुवेल और इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने LVM3 M4 वाहन को सफलतापूर्वक कक्षा में लॉन्च करने के बाद अपनी खुशी साझा की. Sabhar https://hindi.news18.com/news/nation/chandrayaan-3-mission-launch-today-live-update-isro-india-moon-landing-countdown-in-sarish-dhawan-space-centre-sriharikota-news-6881287.html

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बुधवार, 12 जुलाई 2023

कैसे बनेगा हवा से शुद्ध पानी

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 वाटरजेन' नामक कंपनी ने हाल ही में हवा से जल बनाने की तकनीक को विकसित किया है। जिसमें अधिक नमी वाली हवा के तापमान को कम किया जाता है और इसके फलस्‍वरूप हवा में मौजूद जल के अणु नीचे गिरने लगते हैं और इन्‍हें एकत्रित कर लिया जाता है।


कंपनी के सहायक सीईओ ए कोहावी के अनुसार ''हवा के इस तंत्र में से गुजारने के पर सिस्‍टम हवा में की आर्द्रता को कम करने का काम करता है और एकत्रित जल को एक विशेष टैंक में एकत्रित कर लिया जाता है।''


आगे उन्‍होंने बताया कि ''इस जल को एक बड़े फिल्‍टरेशन तंत्र से गुजारा जाता है, जिसके कारण इसमें होने वाली संभावित सूक्ष्‍मजैव या रसायन संबंधी अशुद्धियां अलग हो जाती हैं। इसके बाद जल को एक विशाल टैंक में रखा जाता है, जहां जल की शुद्धता के सारे पैमानों का ध्‍यान रखा जाता है।

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हालांकि इस तरह के यंत्र अन्‍य कंपनियों द्वारा भी बनाए जा चुके हैं, जिनका उपयोग औद्योगिक और घरेलू कार्यों में किया जाता है। लेकिन 'वाटरजेन' का दावा है कि उनके द्वारा विकसित किए गए इस यंत्र में कम से कम ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।


आगे कोहावी ने बताया कि ''हालांकि कुछ अन्‍य कंपनियां भी इसका दावा करती हैं और यह इतना मुश्‍किल कार्य नहीं है कि हवा से जल के अणु एकत्रित कर लिए जाएं। लेकिन मुद्दा यह है कि कम से कम ऊर्जा की खपत में इस कार्य को अंजाम दिया जाए।''


आगे उन्‍होंने बताया कि जब हम इस कार्य को और अधिक कुशलता से कर पाऐंगे तो वास्‍तव में पीने के जल की समस्‍या का इससे अच्‍छा निवारण कोई दूसरा नहीं हो सकता कि वायु से ही जल बना लिया जाए।


यह यंत्र एक दिन में 250-800 लीटर जल निर्मित कर सकता है जिसकी मात्रा तापमान और आर्द्रता के आधार पर भिन्‍न हो सकती है।


कंपनी ने प्रारंभ में इस तकनीक का उपयोग आईडीए या 'इजराइल डिफेंस फोर्स' के लिए किया। और वर्तमान में 'वाटरजेन' कंपनी सात देशों की रक्षा सेनाओं को लिए सेवा प्रदान कर रही है। लेकिन अब कंपनी इस आम लोगों के लिए भी बाजार में उपलब्‍ध कराना चाहती है।


कोहावी ने आगे बताया कि कंपनी इस प्रोडक्‍ट को कई देशों जैसे भारत के बाज़ार में उतारना चाहता है, जहां पीने के शुद्ध जल की समस्‍या है। इससे वहां के लोगों को शुद्ध जल के लिए वाटर सप्‍लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आगे कोहावी बताते हैं कि ''यह सिस्‍टम मात्र 1.5 रुपए में एक लीटर शुद्ध जल निर्मित करेगा जबकि वाटर बॉटल खरीदने पर आप एक लीटर शुद्ध जल के लिए 15 रुपए चुकाते हैं। (एजेंसियां) sabhar webdunia.com


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मंगलवार, 11 जुलाई 2023

प्रोटीन शेक पीना कितना फ़ायदेमंद, कितना नुक़सानदेह

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प्रोटीन शेक पीना कितना फ़ायदेमंद, कितना नुक़सानदेह

ब्रिटेन में प्रोटीन शेक पीने के कारण एक भारतीय मूल के किशोर की मौत की वजह को लेकर आई एक ख़बर ने नई बहस छेड़ दी है.


सवाल उठ रहे हैं कि प्रोटीन सप्लिमेंट्स पर लगे लेबल पर चेतावनी लिखी होनी चाहिए या नहीं.

दरअसल, लंदन में रहने वाले 16 साल के रोहन की तबीयत 15 अगस्त 2020 को अचानक बिगड़ गई थी और उसके तीन दिन बाद उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया था.

क़रीब पौने तीन साल तक चली गहन पड़ताल के बाद जांचकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि रोहन की मौत उस प्रोटीन शेक के कारण हुई थी, जो उनके पिता ने वज़न बढ़ाने के लिए दिया था.


जांचकर्ताओं के मुताबिक़, रोहन को ऑर्निथीन ट्रांसकार्बामिलेज़ (OTC) डेफ़िशिएंसी नाम की एक आनुवांशिक समस्या थी, जिसकी वजह से प्रोटीन शेक लेने के बाद उनके शरीर में अमोनिया जानलेवा स्तर पर पहुंच गया था.


जांचकर्ता ने अदालत में कहा कि उनकी राय में प्रोटीन सप्लिमेंट के लेबल पर ये चेतावनी छापनी चाहिए.


उनके अनुसार, ''भले ही OTC डेफ़िशिएंसी आम समस्या नहीं है लेकिन जिन्हें यह डिसऑर्डर है उनके लिए अतिरिक्त प्रोटीन लेना ख़तरनाक हो सकता है.''


इस ख़बर के बाद ब्रिटेन ही नहीं पूरी दुनिया में प्रोटीन सप्लिमेंट्स को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं और कहा जा रहा है कि प्रोटीन सप्लिमेंट के लेबल पर इस तरह की चेतावनी हो क्योंकि युवाओं, ख़ासकर जिम जाने वालों में प्रोटीन शेक ख़ासा लोकप्रिय है.

प्रोटीन ज़रूरी क्यों है?

प्रोटीन एक ज़रूरी पोषक तत्व है. मांसपेशियां बनाने और उनकी रिपेयर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.


प्रोटीन हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाता है साथ ही दिल, दिमाग़ और त्वचा को स्वस्थ रखता है.


इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रीसर्च (ICMR) के अनुसार, भारतीयों के लिए रोज़ अपने वज़न के हिसाब से 0.8 से 1 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन काफ़ी है और आपके भोजन का एक चौथाई हिस्सा प्रोटीन होना चाहिए.


यह शरीर के लिए ज़रूरी प्रोटीन की मानक मात्रा है. उम्र, सेहत, शारीरिक श्रम और व्यायाम के स्तर के आधार पर हर किसी की प्रोटीन की ज़रूरत अलग होती है लेकिन अधिकतर लोगों को सही मात्रा का पता ही नहीं होता.


अंडे, दूध, दही, मछली, दाल, मीट, सोया वगैरह प्रोटीन से भरपूर होते हैं और संपन्न देशों के ज्यादातर युवाओं को इसकी ज़रूरी मात्रा अपने खाने से ही मिल जाती है.


डाइट से न मिल पाने वाले प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए प्रोटीन सप्लिमेंट्स इस्तेमाल किए जाते हैं.


ज्यादातर प्रोटीन सप्लिमेंट पाउडर के रूप में उपलब्ध होते हैं जिनका मुख्यत: शेक बनाकर सेवन किया जाता है.


प्रोटीन पाउडर अलग-अलग स्रोतों से लिए गए प्रोटीन का पाउडर होता है. यह प्रोटीन पाउडर, आलू, सोयाबीन, चावल और मटर जैसे पौधों से भी लिया जाता है और अंडों या दूध से भी.

कितना ख़तरनाक है प्रोटीन सप्लिमेंट लेना?

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉक्टर समीर जम्वाल जीव रसायन विभाग में एमडी हैं. वह बताते हैं, “अगर आप 50 किलो के हैं तो 50 ग्राम प्रोटीन रोज़ लेने में कोई समस्या नहीं है.''


वह बताते हैं कि प्रोटीन को पचाने के बाद बनने वाले अतिरिक्त अमोनिया को शरीर यूरिया में बदल देता है जो पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है.


मगर कई लोगों के शरीर में अमोनिया को यूरिया में बदलने वाले एंज़ाइम नहीं होते यानी उन्हें यूरिया साइकल डिसऑर्डर होता है.


डॉक्टर समीर बताते हैं कि इसका नुक़सान ये होता है कि शरीर में अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है जो दिमाग़ के लिए बहुत हानिकारक होता है.


वे बताते हैं कि ये यूरिया डिसऑर्डर अलग-अलग तरह के होते हैं और जिन लोगों में इस तरह की समस्या होती है उनके लिए अधिक प्रोटीन लेना ख़तरनाक हो सकता है.

डॉक्टर मनीष बताते हैं कि बहुत से लोग ऐसे हैं जो नफ़ा-नुक़सान जाने बिना सप्लिमेंट लेना शुरू कर देते हैं, जबकि उन्हें ज़रूरत ही नहीं होती.


वे कहते हैं, “बॉडी बिल्डिंग का तब क्या फ़ायदा जब आप स्वस्थ न हों. आपने देखा होगा कि जिम जाने वाले कई लोगों को कार्डिएक अरेस्ट हुए हैं. अच्छी डील-डौल ही अच्छे स्वास्थ्य का पैमाना नहीं होती. सबसे ज़रूरी है संतुलित आहार.”


वहीं डॉक्टर समीर जम्वाल प्रोटीन सप्लिमेंट से जुड़े एक बड़े ख़तरे के बारे में आगाह करते हैं. यह ख़तरा है- प्रोटीन सप्लिमेंट में हेवी मेटल्स की अशुद्धियां.


डॉक्टर जम्वाल बताते हैं, “आमतौर पर जिम जाने वाले लोग दूध से बनने वाले वे प्रोटीन (Whey Protein) को इस्तेमाल करते हैं. अगर फ़ैक्ट्री में सावधानी न बरती जाए तो स्रोत से प्रोटीन को अलग करने प्रक्रिया में लेड, आर्सेनिक और मर्क्युरी जैसे हेवी मेटल्स मिलने का ख़तरा रहता है. इन हेवी मेटल्स को शरीर बाहर नहीं निकाल पाता और किडनी और लीवर जैसे अंगों को नुक़सान पहुंचता 

प्रोटीन सप्लिमेंट का बाज़ार

भारत में प्रोटीन और अन्य सप्लिमेंट्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है.


आईएमएआरसी (IMARC) के अनुसार, 2022 में भारत में डायटरी सप्लिमेंट्स का बाजार लगभग 436 अरब रुपये का था जो 2028 तक क़रीब 958 अरब रुपये का हो जाएगा.


इसमें बड़ा हिस्सा प्रोटीन सप्लिमेंट्स का है. ऐसे में मुनाफ़े के लिए नकली और मिलावटी प्रोटीन सप्लिमेंट का कारोबार भी चल निकला है.


पश्चिमी दिल्ली में सप्लिमेंट्स और हेल्थ केयर उत्पादों का शोरूम चलाने वाले अमन चौहान बताते हैं कि मिलावटी और नकली उत्पादों से बचना ज़रूरी है.


वे कहते हैं, “स्थापित कंपनियों द्वारा अधिकृत स्टोर से ही सप्लिमेंट खरीदने चाहिए. प्रॉडक्ट के पैकेज पर हॉलमार्क स्टैम्प, इंपोर्टर का टैग चेक करें और जीएसटी बिल ज़रूर लें.”

चेतावनी लगाने से कुछ बदलेगा?

अभी ब्रिटेन में इस बात को लेकर फ़ैसला नहीं हुआ है कि वहां प्रोटीन सप्लिमेंट के लेबल पर कोई चेतावनी देनी है या नहीं.


लेकिन क्या केवल चेतावनी देना काफ़ी होगा?


क्योंकि इससे जुड़ा एक सवाल ये भी है कि भारत में अभी जेनेटिक मैपिंग करवाने का चलन नहीं है जिससे यह पता चल सके कि किसी को कौन सा जेनेटिक डिसऑर्डर है और उसे किन चीज़ों के सेवन से समस्या हो सकती है.


ऐसे में डॉक्टरों के पास अधिकतर मामले तभी आते हैं, जब किसी को उस डिसऑर्डर के कारण गंभीर समस्या हो जाए.


फिर लेबल पर चेतावनी देना शायद उतना कारगर साबित न हो.


डॉक्टर बताते हैं कि सप्लिमेंट्स लेने की बजाए लोगों को अपनी खुराक का ख़्याल रखना चाहिए और संतुलित आहार लेना चाहिए sabhar BBC.com https://www.bbc.com

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सोलर सेल काम कर गए, तो जगह-जगह सौर ऊर्जा इकट्ठा होगी

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 सोलर टेक्नोलॉजी लगातार बेहतर हो रही है. ज्यादा समय तक चलने वाले ये लचीले सोलर सेल इंसान के बाल से भी पतले हैं और किसी भी सतह पर लगाए जा सकते हैं. देखिए ये कैसे काम करते हैं और कहां-कहां इस्तेमाल हो सकते हैं.

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ये सोलर सेल काम कर गए, तो जगह-जगह सौर ऊर्जा इकट्ठा होगी

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सोलर टेक्नोलॉजी लगातार बेहतर हो रही है. ज्यादा समय तक चलने वाले ये लचीले सोलर सेल इंसान के बाल से भी पतले हैं और किसी भी सतह पर लगाए जा सकते हैं. देखिए ये कैसे काम करते हैं और कहां-कहां इस्तेमाल हो सकते हैं. 


 इंजीनियर्स ने एक ऐसा सोलर सेल बनाया है जो बालों से भी पतला है और ये कपड़ों से बिजली पैदा कर सकता है. जी हां, अब आपके कपड़े भी आपको बिजली देंगे. समय के साथ टेक्नोलॉजी में बदलाव हो रहा है. पहले जिन कामों को करने में घंटो या कई दिनों का समय लगता था वो अब महज कुछ सेकंड या मिनट में पूरा हो रहा है. टेक्नोलॉजी ने हम सभी की जिंदगी सरल बना दी है. इस बीच टेक्नोलॉजी के क्षेत्र से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आ रही है. दरअसल, एमआईटी के रिसचर्स ने एक अल्ट्राथिन और अल्ट्रालाइट सोलर सेल तैयार किया है. यानी इंजीनियर्स ने बेहद हल्का और बालों से भी पतला सोलर सेल खोज निकाला है. इस सोलर सेल का इस्तेमाल किसी भी सतह पर किया जा सकता है. जिस सतह पर सोलर सेल को लगाया जाएगा वो पावर सोर्स में बदल जाएगा. यानी अगर आप इस सोलर सेल को कपड़ों में लगाते हैं तो आपके कपड़े बिजली पैदा करने लगेंग. ऐसे डेवलप की गई टेक्नोलॉजी बाल से भी पतले इस सोलर सेल को डेवलप करने के लिए रिसर्चर्स ने नैनोमेटेरियल का इस्तेमाल प्रिंटेबल इलेक्ट्रॉनिक इंक में किया है जिससे नोवल सोलर सेल डिवाइस बनाया जा सके. रिसर्च पेपर के लीड ऑथर Vladimir Bulović ने बताया की हमारा लाइटवेट फोटोवोल्टिक (PV) का मौजूदा वर्जन उतना बेहतर नहीं है जितना सिलिकॉन पीवीएस होते हैं. मगर इनका वजन बहुत कम है. उन्होंने कहा कि इन पावर सेल्स का इस्तेमाल कन्वेंशनल सिलिकॉन पीवीएस को रिप्लेस करने के लिए नहीं बल्कि जहां ये काम नहीं आएंगे वहां लाइटवेट फोटोवॉल्टिक सेल का इस्तेमाल किया जाएगा. बता दें इस प्रिंटेड मॉड्यूल (सोलर सेल) की थिकनेस सिर्फ 15 माइक्रोन है जबकि इंसान के बालों की थिकनेस 70 माइक्रोन तक होती है. यानी ये सोलर सेल इतना पतला है इसे कहीं भी आसानी से लगाया जा सकता है. Sabhar:abplive.com

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सोमवार, 10 जुलाई 2023

ट्विटर के मुक़ाबले ज़करबर्ग के थ्रेड्स में क्या है अलग और ख़ास

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फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा ने अपने नए ऐप को लॉन्च कर दिया है, जिसे ट्विटर का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है. मेटा के नए ऐप का नाम है थ्रेड्स जिसे कंपनी एक टेक्स्ट बेस्ड कन्वरसेशन ऐप कहती है. ये ऐप सौ से ज़्यादा देशों में उपलब्ध है. इसका इस्तेमाल कर बीबीसी संवाददाता जेम्स क्लेटन ने क्या पाया. देखिए इस रिपोर्ट में.sabhar BBC.com

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रविवार, 9 जुलाई 2023

अनुवादिका नामक ट्रान्स लेटर छात्रों को हिन्दी में

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सी०एस से एम ५० में शिक्षा मंथन में हिस्सा लेने आये पद्‌मश्री डा० दामू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अनुवादिनी अलोबल वाइस एन्ड् डाक्युमेन्ट ए आई ट्रॉन्स लेसन कम्पुटर tool है जिसे ऍ आई सी टी ईट ने कि विकसित किया  है अनुवादिका   ट्रान्स लेटर छात्रों को हिन्दी में  पढाई करायेगा यह 80 प्रतिशत शुद्ध है गुगल की दिक्कते नहीं आयेगी गुगल से टाइप  करने पर अनेर दिक्कतें आती है २२ भाषाओं में अनुवाद करेगा 13 सेकेन्ड में 500 पेज काअनुवाद होगा ऑन  लाइन  ट्रांसलेशन टेक्स्ट ट्रांसलेशन image translation  speech translation video vice translation table translation होगा यह इन्टर नेट की दुनिआ में क्रन्तिकारी कदम होगा जो कमियाँ गूगल में है वो दूर की गयी है 


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शनिवार, 8 जुलाई 2023

लैब में बने गोश्त को क्यों नहीं पसंद कर रहे लोग, देखिए यह रिपोर्ट

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क्या लैब में बने मीट खाने के लिए तैयार हैं आप. क़रीब तीन साल पहले सिंगापुर लैब में तैयार मीट की बिक्री को मंज़ूरी देने वाला पहला देश बना था. तब कहा गया था कि यह तकनीक गेम चेंजर साबित होगी. निवेशकों ने इस बिज़नेस में क़रीब तीन अरब डॉलर भी लगा दिए. लेकिन अब लैब में तैयार मीट के कारोबार में वो तेज़ी नहीं देखी जा रही है, जिसका अंदाज़ा लगाया जा रहा था. पर ऐसा क्यों? देखिए बीबीसी संवादादाता निक मार्श की रिपोर्ट. sabhar BBC.com

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