योग किसको कहते है


           योग मे ही सजॅन है,योग मे ही विसजॅन है, योग मे ही रूपांतरण है, योग मे ही समानता है,योग मे ही जीवन है,योग मे हो चलायमान है,योग मे ही वियोग है,योग मे ही विग्यान है, योग मे ही ग्यान है।
          मानव शरीर मे जो योग क्रिया के माध्यम से मानव मशीन का उपयोग करके स्थूळ शरीर की दसेय ईन्द्रीयो की जो अलग अलग रूप मे शक्तिओ काम करती है वह सभी शक्तिओ को एक स्थान पर एक रूप मे एकत्रित करके कायॅवाहीत करके ध्यान  धारणा के मारफत अपनी आत्मा को ज्योत (ऊजाॅ)  स्वरूप मे दशॅन करना  ये पुरी क्रिया जो करते है उनको योग कहा जाता है ओर निती नियमो के आधिन जो नित्य ये क्रियामे लगे रहते है उनको योगी षुरूष कहा जाता है। आत्मा से परमात्मा तक देखना ईसीको योग कहते है निराकार चैंतन्य को आंतरीक द्रष्टि से  आकार मे देखना ऊसीको योग कहते है।
           मानव शरीर मे अलग-अलग स्थान पर जो अलग-अलग शक्तिया काम करती है उन सभी को क्रम वाईझ जागृत करने के बाद सभी शक्तियो को त्रिभेटी ए एक रूप मे एकत्रित  करके उनको कायॅवाहित करना है। ओर शरीर की भीतर जो प्राण तत्व होता है वह प्राणतत्व को जागृत करने के लीए प्राणायाम का सहारा लेके प्राण तत्व को उजाॅ स्वरूप मे लाकर त्रिभेटी पर उस उजाॅ को आंतर द्रष्टि से देखना पडता है। यह आत्मा को जागृत ईस तरीके से करनी पडती है।
            जब ललाटे त्रिभेटी पर उजाॅ स्वरूप मे ज्योत देखाई देती है। तब ईसी समय मस्तक मे आपको अनहद  सुनाई देता है तब ईस समय अपनी मनको ओर आंतर नजर को प्रकाश मे ओर अनहद नाद मे विलिन कर दो प्रकाश को झांख झांख के देखा करो ऑर मन को अनहदनाद को सुनने मे तल्लिन कर दो। जब आपका मन ओर आंतरीक नजर दोनो तल्लिन हो जाये ईसी समय आपको त्रिभेटी पे अखुट चैंतन्य के भंदार के रूप मे ऊजाॅ का स्रोत ईतना वहेगा कि  सूयॅका उजाला भी कम लगेगा वो ऊजाॅ मे मन ओर आंतर नजर को तल्लिन कर देने से आपकी आत्मा आपके भ्रह्माड को वेध कर अखिल भ्रह्मांड मे विलिन हो जाता है।ईस समय यह समाधि की बिलकुल नजदीक पहोच जाते है। ईसी समय आपकि प्राण शरीर का विकास हो जाता है।ओर ईसके बाद प्रेकटीस जारी रखने से आपका सुक्ष्म शरीर भी अलग हो जाता हो।जब आपका सूक्ष्म शरीर अलग हो जावे  बादमे आत्मा का ड्राईवर संकल्प है। आप जो संकल्प ईसी समय छोडोगे वो संकल्प आपका भ्रह्माड को वेधन करके अखिल भ्रह्मांड मे वो संकल्प की तरंगे जाती है। ओर अखिल भ्रह्मांड मे से सिध्ध होकर रीटॅन होती है। आपके नजर के सामने ही वो संकल्प वास्तविकता मे परिवतॅन हो जाती है। यही  योग क्रिया का सबसे बडा प्रमाण आपको मिल जाता है।सूयॅ की उजाला से बहुत गुणे ज्यादा उजाला आपको दिखता है वही ब्रह्मतत्व है।वही चैंतन्य आत्मा है , वही निरंजन है।वही निराकार है।, वही अविनाशी है, वही भ्रह्मांड का चैंतन्य है।लेकिन अपनी संकल्प शक्ति द्रढ ओर मजबुत करनी पडती है।ऊसकी थोडे समय की एक साधना से संकल्प शक्ति ओर मनोबल दोनो द्रढ मजबूत हो जाती है इसके बिना सिफॅ ऊजाला देखने से कुछ भी नही मिलता  टुंक मे इतना कह सकते है की आत्मा को जीव मे से शिव मे पलटाने के लिए मानव शरीर मे योग क्रिया बहुत महत्व की है।ये शरीर की तमाम सत्ता  बाह्य मन के पास होती है वह सत्ता मन के पास से लेकर आत्मा को सोंपने की जो क्रिया होती है।उनको योग कहते है । शरीर मे सत्ता का पलटा करना है ओर मनको स्थिर करना है ये क्रिया को योग क्रिया कहते है।
           योगासन को योग नही कहते ,योगासन तो सिफॅ शरीर की तंदूरस्ती के लीए होता है।योग क्रिया करने के लिए अनुभवी सद्दगुरू मिलेगा तो ही योगक्रिया शिखा सकते है । नहीतर ये काया को पलटोओ खवरावी देने जैसा हो जायेगा ओर हवा मे हवातिया मारने जैसी हालत आपकी हो जायेगी । योगक्रिया करने से पहले अपने शरीर को निरोगी करना पडता है ।ईसके बिना योगक्रिया नही हो सकती  कोई मानव करभी नही सकता अपान वायु को भी दुरगंध दूर करनी पडती है ।  अपान वायुकी दुरगंध दूर नही होगी तो आपके शरीर का बेलेन्स बिगड जायेगा शायद पागलपन भी आ शकता है।
           योगक्रिया करने के लिए सबसे पहले शरीर मे से  गेस,पित्त,कबज्यात ओर कफ से रहीत करना पडता है। बादमे हर दिन उसकी प्रेकटिस करनी पडती हो। प्रेकटिस करने के लिए आपको जो आसन शरीर को अनुकुल होवे वो आसन ग्रहण करके शांत मनसे थोडी देर बैठे रहो बाद मे अपने शरीर का शिथिलिकरण करदो ईसके बाद मे अपनी सूक्ष्मणा नादी को शरू करदो बाद मे बिलकुल टटार बैठ के अपनी आंतरीक नजर त्रिभेटी पे स्थिर करदो इसके बाद मे एक मिनीट की लंबाइ वाला प्राणायाम करो ।ईतना करनेमे आपको 5 वषॅ तक का समय लगता है।5 वषॅ तक आपको ये हताई हुई योग क्रिया पर सतत हरदिन दो कलाक की प्रकटिस जारी रखना है।तब आपको थोडासा कुदरती चैंतन्य का अनुभव होगा लेकिन इतना याद रखना अपनि शरीर पहले निरोगी करना है। बाद मे ये योगक्रिया की प्रकटिस करना वरना आपको शरीर मे बहुत तकलिफे आ जायेगी ओर आशन भी सिध्ध करना पडेगा यदी कोई भी मानव को यह प्रेकटिस करने की ईच्छा होवेतो मुझे मीलेगा तो उनको जरूर सलाह देके संपुणॅ योगक्रिया का मागॅदशॅन अवश्य करुंगा प्रमाण के साथ करऊगा ।
          हदय के तकलिफ वाले ,बी.पी. की तकलिफ वाले मानव ये योगक्रिया की प्रेकटिस कभी मत करना।।
       
         गगनगीरीजी महाराज
      फोन--9574752091

No comments:

Post a Comment

vigyan ke naye samachar ke liye dekhe

Featured Post

हमारा विज्ञानऔर हमारी धरोहर

जब हमारे देश में बड़ी बड़ी  राइस मील नहीं थी तो धान को घर पर ही कूटकर भूसे को अलग कर चावल प्राप्त किया जाता था... असलियत में वही...