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गुरुवार, 14 जनवरी 2021

एक गोली से ही होगा त्वचा कैंसर की रोकथाम

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 त्वचा कैंसर का इलाज अब निकट भविष्य में एक गोली खाने बरसे हो सकेगा वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा विकसित करने का दावा किया है जिससे लोगों में से हुई क्षति को दुरुस्त कर इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा अमेरिका के ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने इस बात का अध्ययन किया कि पशु पक्षी किस प्रकार सूर्य की नुकसानदेह किरणों से खुद को बचाते हैं इस खोज से और ऐसी दवा विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा जो सन वर्ण से पैदा होने वाली इस बीमारी को खत्म कर देगी और सर्वाधिक विनाशकारी  कैंसर में से एक माने जाने वाले  त्वचा कैंसर से लोगों की रक्षा करेगी वास्तव में 10 सालों के शोध के बाद शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने में सफलता हासिल की है

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सोमवार, 11 जनवरी 2021

एक दशक बाद हो सकती है मनुष्य की उम्र 1000 वर्ष

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ब्रिटेन की एक बैग यह प्रसिद्ध वैज्ञानिक का दावा है कि जीवन का 150 वां बसंत देखने वाला आदमी तो पहले ही जन्म ले चुका है लेकिन यह तो कुछ भी नहीं अगले दशकों में ऐसे कई पहले व्यक्ति पैदा होंगे जो उम्र के 1000 में पड़ाव तक पहुंचेंगे लोग भले ही इस बात पर विश्वास ना करें लेकिन डॉक्टर डी ग्रे नामक इस वैज्ञानिक को पूरा विश्वास है कि उनके ही जीवन काल में बैठ डॉक्टरों के पास वह सभी साधन और औजार होंगे जिससे वे बुढ़ापे का इलाज करने में पूरी तरह सक्षम होंगे बायोमेडिकल जेंटो लार्जेस्ट तथा अध्यक्षता पर पिछले कई वर्षों से शोध करने वाले संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर डि gre  का दावा है कि ऐसा संभव होगा तमाम तरह की बीमारियों को समाप्त कर ऐसा करने से जीवन को अनिश्चित काल  के लिए बढ़ाया जा सकता है तब आदमी उम्रदराज तो होगा ना है वह स्पष्ट है इस समय जीवन प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2030 में 100 वर्ष की उम्र पार करने वाले की संख्या कई लाख में होगी इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा जीने वाला व्यक्ति कार्यकाल 122 वर्ष का है जापान में वर्ष 2010 में 44000 से ज्यादा लोग 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे उनका मानना है कि विकासशील देशों में कारण बाधित हो सकती है डॉक्टर डिग्री ऐसे समय को हकीकत बनते देखते हैं जब लोग अपने डॉक्टरों के पास नियमित मेंटेनेंस के लिए जाया करेंगे 
 उस समय तक जीन थेरेपी स्टेम सेल थेरेपी इम्यून सिस्टम स्टिमुलेशन एडवांस मेडिकल तकनीक आम लोगों की पहुंच तक होगी जिससे लोग अपने को फिट एवं फाइंड रख सकेंगे डॉक्टर डिग्री मानते हैं कि बुढ़ापा कुल मिलाकर हमारे शरीर में जीवन भर संजीत होने वाला अलग अलग  किस्म का सूक्ष्म और कोशिकीय loss  है और इसे रोकना संभव है इस बात पर अभी बात हो सकती है कि भविष्य में आदमी की औसत आयु कहां तक पहुंचेगी लेकिन जो प्रवृतियां है वह स्पष्ट है इस समय जीवन की प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है

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चीन में मिला दुनिया की सबसे पुराना पक्षी

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 चीन के जीवाश्म भी धोने पक्षी नुमा प्राचीन डायनासोर का एक सा जीवाश्म ढूंढ निकाला है जिनके दुनिया का प्रथम पक्षी होने का दावा किया जा रहा है अगर चीनी वैज्ञानिकों का यह दावा सही होता है तो यह अब तक विश्व का सबसे पुराना पक्षी माने जाने वाला जर्मनी के  aakeyo पैट्रिक्स ko पीछे छोड़ देगा  इनके जीवा सुविधाओं के अनुसार मुर्गी के आकार का या डायनासोर जीवाश्म 15.5 करोड़ वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों ने इसे shiyaotengiya jhengi नाम दिया है इस जीवाश्म को चीन के लिए प्रांत में खोजा गया है इस प्रांत में पहले भी प्राचीन काल के जीवाश्म मिलते रहे हैं shiyaotengiya jhengi akeyopatriks पक्षी के जीवाश्म से भी 5000000 वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों को यह जीवन पत्थर की एक सीन में दबा हुआ मिला पत्थर पर से निशान भी साफ देखे जा सकते हैं जिसमें इस पक्षी के पंख भी होने के संकेत हैं इस डायनासोर रूपी पक्षी के मिलने पर वैज्ञानिकों की मौजूदा समय की पक्षियों को लेकर वैज्ञानिकों का सिद्धांत धूमिल होता जा रहा है इसमें कहा गया है कि आधुनिक पक्षी का विकास डायनासोर से ही हुआ होगा हालांकि यह खोज इस थ्योरी को पूरी तरह से खारिज नहीं करती है लेकिन इस क्षेत्र में नए सूर्य के प्रवेश द्वार खोल देती है इस डायनोसोर की रूपरेखा सीधे-सीधे आज के पक्षियों से नहीं मिलती है लेकिन arkyptrks  से काफी मिलती जुलती है उल्लेखनीय है बैटरी ब्रिटिश प्राणी वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने 18 सो 59 में अपनी पुस्तक गुणों की उत्पत्ति में डायनासोर के नष्ट हो जाने की टूटी पड़ी को जोड़ते हुए बताया था कि पक्षियों का विकास जरूर डायनासोर से हुआ होगा इस पुस्तक के प्रकाशन के 2 वर्ष बाद ही जर्मनी में arkyoptrks ko  खोज निकाला गया था

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रविवार, 10 जनवरी 2021

प्रकाश की गति वाले प्रयोग में चौंकाने वाले नतीजे

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जिनेवा में स्थित भौतिकी की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला शरण में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने सबअटॉमिक पार्टिकल यानी अति सूक्ष्म कण ने दोनों की गति प्रकाश की गति से भी ज्यादा पाई है अगर ऐसा सच हुआ तो यह भौतिकी के मूलभूत नियमों को पलटने वाली खोज होगी क्योंकि उनके मुताबिक प्रकाश की गति से ज्यादा तेज कुछ भी नहीं है शर्म से 732 किलोमीटर दूर स्थित ग्रैंड सांसों प्रयोगशाला को भेजे गए न्यूट्रींों प्रकाश की गति से 1 सेकंड से के बहुत ही छोटे हिस्से से तेज पाए गए शोधकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि वे इस नतीजे से काफी आश्चर्यचकित है और इसलिए उन्होंने कोई दावा नहीं करते हुए अन्य लोगों से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करने की अपील की है शोधकर्ताओं के गुटके ने कहा है कि वे इस दावे को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं रिपोर्ट इटली में ग्रंथों की भूमिकाएं भेजा जिससे पता चले कि उनमें से कितने रूप बदलकर के रूप में वहां पहुंचे इस प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने देखा कि उतनी ही दूरी के कुछ हिस्से से तेजी से तय कर ली इस टीम ने नैनों की यह दूरी तय करने का प्रयोग किया उसके बाद इतनी बार इस जानकारी को पाया जिससे एक औपचारिक खोज कहा जा सके मगर वैज्ञानिकों का यह दल समझता है की प्रक्रिया में मामूली सी भी गलती से बेहद गलत नतीजे आ सकता है कि करने प्रकाश की गति को भी पछाड़ दिया इसलिए उन्होंने अपनी आंखों के सामने रख दिया है










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सिंगिंग वर्ल्ड के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार

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 गाने वाली चिड़िया जेबरा फिंच के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार कर लेने की डॉक्टरों द्वारा घोषणा की गई है वाशिंगटन विश्वविद्यालय के डॉ वेसले वारेन के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा की गई इस खोज से कई वैज्ञानिक विधियों को सुलझाने में मदद मिलने की संभावना है खासकर इंसानों और अन्य प्राणियों में आवाज सीखने के रहस्य के बारे में जानने के लिए यह खोज काफी महत्वपूर्ण हो सकती है वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस जीनोम ब्लूप्रिंट से स्पीच डिसऑर्डर मसलन ऑटिज्म हकलाना और पार्किंसन जैसे रोगों के जेनेटिक कारण ओं को भी समझा जा सकता है जेबरा फिंच नाम की यह चिड़िया आवाज को सीखने की प्रक्रिया का बेहतरीन उदाहरण है उल्लेखनीय है कि सिंगिंग वर्ल्ड के अलावा मुर्गा ही एकमात्र ऐसा पक्षी है जिसके दिनों का पूरा खाका खींचने में सफलता वैज्ञानिकों को मिली है इस तुलना के बाद यह पता लगाया जा सका है कि आखिर कौन से ऐसे हैं जो आवाज गाने को सीखने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

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शनिवार, 9 जनवरी 2021

नयनो वाकर की खोज

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अमेरिकी वैज्ञानिको ने पहली बार मनुष्य की भांति चलने वाला अणु डिजाईन किया है जिसे नयनो वाकर नाम दिया गया है नयनो वाकर के माध्यम से बहुत सी सुचनाये छोटे से चिप में एकत्र की जा सकती है वैज्ञानिको के अनुसार सूछ्म अणु के सपाट पर मनुष्य की भांति सीधा चलना अदभुत है इससे पुरे विश्व जहाँ हम रहते है की नक़ल नयनो मीटर से स्केल से उतारी जा सकती है ९, १० डि डि ऐ को जोड़ने वाले तत्व पैरो का काम करते है उष्मा मिलते यह सक्रिय होजाता है और उससे चलने फिरने की उर्जा मिलने लगती है डिडिऐ बिना नयनो रेल या नयनो ग्रुब्स के सपाट सतह पर मनुष्य की तरह चल सकता है नयनो वाकर पहली बार १००००० से अधिक कदम चला जहाँ तक डिडिऐ का प्रश्न है इसे मनुष्य की तरह चलने फिरने के लिए किसी सहारे कीजरूरत नहीं होती

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दुनिया की सबसे छोटी इलेक्ट्रिक मोटर तैयार

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  टफ्ट्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विश्व की सबसे छोटी इलेक्ट्रिक मोटर तैयार की है इसका कारण के बराबर है छोटे आकार की मोटर के विकास से वैज्ञानिकों को  मेडिसिन से इंजीनियरिंग तक के क्षेत्रों में नए स्तर पर उपकरण तैयार करने में मदद मिलेगी 
 विश्व की सबसे छोटे आकार की इलेक्ट्रिक मोटर 1 नैनोमीटर से भी कम है जो कि मौजूदा विश्व रिकार्ड 200 नैनोमीटर की मोटर के नाम है इस मोटर के छोटे आकार का इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि मनुष्य के एक बाल की मोटाई 60000 नैनोमीटर के बराबर होती है
 टफन टफन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता  चार्ल्स एप्स  स्काई की टीम इस मोटर को एक लो टेंपरेचर स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप के माध्यम से नियंत्रित करती है एलटी एसडीएम जैसे उपकरण अमेरिका में 100 के बराबर ही हैं

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बिजली बनाने में काम आएंगे जिओ वेक्टर

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 मिट्टी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया जियो व्यक्ति से दोहरा लाभ मिल सकता है बैटरी यों का यह समूह  परमाणु के कचरे जैसे अन्य विषाक्त पदार्थों की सफाई करते समय बिजली भी उत्पन्न कर सकते हैं यह बात एक शोध में सामने आई है मिशीगन विश्वविद्यालय में फैक्ट्रियों पर शोध करने वाली माइक्रोबायोलॉजिस्ट जी मा रेgu  वेरा  ने कहा कि जियो वेक्टर अति सूक्ष्म जीव होते हैं जो पूरे विश्व के परमाणु ईंधन उसे दूसरी जगहों की सफाई करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं  अमेरिका के कोलोराडो में स्थित फैक्ट्री में यूरेनियम के अवशेषों की सफाई के दौरान इन व्यक्तियों के प्रभाव की जांच हो चुकी है यूरेनियम की सफाई करने के लिए शोधकर्ताओं ने भूमि के अंदर दूषित जल में एसीटेट का प्रवेश कराया था
 यूरेनियम जियो फैक्टर का पसंदीदा भोजन है जमीन के अंदर पहले से ही मौजूद बैक्टीरिया समुदाय के विकास को बहुत तेजी से बढ़ा देता है और वह यूरेनियम को खड़ा कर साफ कर देते हैं

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दिमाग में घुसे बिना भी दिमाग को नुकसान पहुंचाता है कोरोना

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अब तक यही माना जाता रहा है कि यह वायरस शरीर के जिस जिस हिस्से में पहुंचता है, वहां ही नुकसान पहुंचाता है. लेकिन अब रिसर्चरों ने पाया है कि दिमाग में घुसे बिना भी कोरोना दिमाग को नुकसान पहुंचाता है. कोरोना वायरस नाक या मुंह के रास्ते सांस की नली में पहुंचता है और वहां से फेफड़ों में घुस जाता है. यही वजह है कि कोरोना टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जाता है. इसी कारण सांस में दिक्कत भी आती है. अधिकतर मौतों का कारण भी यही होता है कि फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं. रिसर्चरों ने ऐसे 19 लोगों के मस्तिष्क पर शोध किया जिनकी मौत कोविड-19 के कारण हुई है. इन्होंने पहले शरीर की उन कोशिकाओं पर ध्यान दिया जिन्हें कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्यादा नुकसान होता है. इसमें ओल्फैक्ट्री बल्ब शामिल है जो गंध को समझने के लिए जिम्मेदार होता है. इसके बाद उन्होंने ब्रेनस्टेम की जांच की, जो सांस लेने और दिल के धड़कने का काम कराता है. 19 में 14 मरीजों में ये दोनों या फिर इनमें से किसी एक को नुकसान हुआ था. किसी मरीज में दिमाग के इन हिस्सों की रक्त कोशिकाएं जम गई थीं, तो किसी में कोशिशकाओं में लीकेज देखा गया. दिमाग में जहां जहां भी ऐसा लीकेज मिला, वहां इम्यून सिस्टम में खराबी भी दर्ज की गई. लेकिन रिसर्चर ये देख कर हैरान थे कि इस सारे नुकसान के बावजूद वहां वायरस बिलकुल भी मौजूद नहीं था. द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी इस रिपोर्ट में डॉ अवींद्र नाथ ने लिखा है, "हम भौचक्के रह गए." अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक के डॉक्टर नाथ ने बताया कि उनकी रिसर्च टीम ने दिमाग में जिस तरह का नुकसान देखा, वैसा आम तौर पर स्ट्रोक या फिर न्यूरो-इंफ्लेमेटरी रोगों में ही देखा जाता है, "अब तक हमारे नतीजे यह दिखाते हैं कि शायद यह नुकसान सार्स-कोव-2 वायरस ने सीधे तौर पर नहीं किया है. भविष्य में हम यह पता लगाने की योजना बना रहे हैं कि कोविड-19 किस तरह से मस्तिष्क की रक्त कोशिकाओं पर असर करता है और क्या इससे मरीजों में छोटे और लंबे समय के अलग अलग लक्षण पैदा होते हैं." महामारी के दौरान ज्यादा गिर रहे हैं बाल एक अन्य शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान न्यूयॉर्क शहर में लोगों के बाल पहले से ज्यादा झड़ रहे हैं. शहर के एक ऐसे इलाके में जहां अश्वेत लोगों की आबादी अधिक है, वहां बालों के रोग टेलोजेन इफ्लूवियम (टीई) में 400 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह शोध अमेरिका के जर्नल ऑफ द अमेरिकन अकैडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में छपा है. इसके अनुसार नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच टीई के मात्र 0.4 प्रतिशत ही मामले थे, जबकि अगस्त तक यह बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो चुका था. रिपोर्ट में लिखा गया है, "अभी यह साफ नहीं है कि टीई की असली वजह कोरोना महामारी के कारण लोगों में मनोवैज्ञानिक रूप से हुए बदलाव हैं या फिर यह अत्यंत भावुक तनाव का नतीजा है." डॉक्टरों का कहना है कि अकसर किसी सदमे के करीब तीन महीने बाद लोगों में टीई के लक्षण दिखते हैं. ऐसे में मुमकिन है कि न्यूयॉर्क में बड़े स्तर पर कोरोना फैलने से लोगों को भीषण तनाव हुआ हो, जिसके तीन महीने बाद बाल गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई. sabhar : dw.de

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शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

wordmedia.in: होमी जहांगीर भाभा की भविष्यवाणी क्या ब्रिटेन में स...

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wordmedia.in: होमी जहांगीर भाभा की भविष्यवाणी क्या ब्रिटेन में स...: ब्रिटेन ने 2040 तक फ्यूज़न रिएक्टर वाला व्यावसायिक बिजलीघर बनाने का एलान किया है. क्या यह मुमकिन है?न्यूक्लियर फ्यूज़न (संलयन) का विज्ञान 19...

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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

कोरोना वैक्सीन के हैं ये साइड इफेक्ट सुरक्षित टीका क्या होता है

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कोरोना की वैक्सीन जितनी जल्दबाजी में बनी हैं, उसे देखते हुए कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि इसे लेना ठीक भी रहेगा या नहीं. जानिए कौन सी कंपनी की वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट हैं ताकि आपके सभी शक दूर हो जाएं.कोई भी टीका लगने के बाद त्वचा का लाल होना, टीके वाली जगह पर सूजन और कुछ वक्त तक इंजेक्शन का दर्द होना आम बात है. कुछ लोगों को पहले तीन दिनों में थकान, बुखार और सिरदर्द भी होता है. इसका मतलब होता है कि टीका अपना काम कर रहा है और शरीर ने बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी बनाना शुरू कर दिया है. बड़े साइड इफेक्ट का खतरा? अब तक जिन जिन टीकों को अनुमति मिली है, परीक्षणों में उनमें से किसी में भी बड़े साइड इफेक्ट नहीं मिले हैं. यूरोप की यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए), अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) और विश्व स्वास्थ्य संगठन तीनों ने इन्हें अनुमति दी है. एक दो मामलों में लोगों को वैक्सीन से एलर्जी होने के मामले सामने आए थे लेकिन परीक्षण में हिस्सा लेने वाले बाकी लोगों में ऐसा नहीं देखा गया बायोनटेक फाइजर जर्मनी और अमेरिका ने मिलकर जो टीका बनाया है वह बाकी टीकों से अलग है. वह एमआरएनए का इस्तेमाल करता है यानी इसमें कीटाणु नहीं बल्कि उसका सिर्फ एक जेनेटिक कोड है. यह टीका अब कई लोगों को लग चुका है. अमेरिका में एक और ब्रिटेन में दो लोगों को इससे काफी एलर्जी हुई. इसके बाद ब्रिटेन की राष्ट्रीय दवा एजेंसी एमएचआरए ने चेतावनी दी कि जिन लोगों को किसी भी टीके से जरा भी एलर्जी रही हो, वे इसे ना लगवाएं सुरक्षित टीका क्या होता है? जर्मनी में कोरोना पर नजर रखने वाले रॉबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट की वैक्सीनेशन कमिटी के सदस्य के सदस्य क्रिस्टियान बोगडान बताते हैं कि किसी टीके से अगर एक वृद्ध व्यक्ति की उम्र 20 प्रतिशत घटती है लेकिन साथ ही अगर 50 हजार में से सिर्फ एक व्यक्ति को उससे एलर्जी होती है, तो वे ऐसे टीके को सुरक्षित मानेंगे. उनके अनुसार यूरोप में इसी पैमाने पर टीकों को अनुमति दी जा रही है. sabhar : dw.de

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