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सोमवार, 1 अगस्त 2022

अम्ल क्षार और लवण क्या होते हैं

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अम्ल • अम्ल ऐसे यौगिक पदार्थ होते हैं, जिनमें हाइड्रोजन प्रतिस्थाप्य के रूप में रहता है। UTT • विलयन में H (aq) आयन के निर्माण के कारण ही पदार्थ की प्रकृति अम्लीय होती है। • जब कोई अम्ल किसी धातु के साथ अभिक्रिया करता है तब हाइड्रोजन का उत्सर्जन होता है। साथ ही संगत लवण का निर्माण होता है। • जब अम्ल किसी धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट से अभिक्रिया करता है तो यह संगत लवण कार्बन डाइऑक्साइड गैस एवं जल उत्पन्न करता है। • अम्ल का जलीय विलयन नीले लिटमस को लाल कर देता है। • अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं। ● खट्टे दूध में लैक्टिक अम्ल पाया जाता है। • सिरके एवं अचार में एसीटिक अम्ल होता है। ● नींबू एवं सन्तरे में साइट्रिक अम्ल होता है। नाइट्रिक अम्ल का प्रयोग सोने एवं चाँदी के शुद्धीकरण में किया जाता है। • कपड़े से जंग के धब्बे हटाने के लिए ऑक्जैलिक अम्ल प्रयोग होता है। • 3:1 के अनुपात में सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सान्द्र नाइट्रिक अम्ल का ताजा मिश्रण 'अम्लराज' (Aqua regia) कहलाता है। यह सोने एवं प्लेटिनम को गलाने में समर्थ होता है। भस्म • भस्म ऐसा यौगिक होता है जो अम्ल से प्रतिक्रिया कर लवण एवं जल देता है। • जब भस्म किसी धातु से अभिक्रिया करता है तो हाइड्रोजन गैस के उत्सर्जन के साथ एक लवण का निर्माण होता है जिसका ऋण आयन एक धातु एवं ऑक्सीजन के परमाणुओं से संयुक्त रूप से निर्मित होता है। pH स्केल क्या है ? • जल में क्षारकीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं, क्योंकि ये हाइड्रॉक्साइड आयन का निर्माण करते हैं। तो अम्लीय होता है न ही क्षारकीय, तब यह बैंगनी रंग का होता है। • भस्म दो प्रकार के होते हैं- जल में विलेय भस्म एवं जल में अविलेय भस्म । अम्ल, भस्म एवं लवण हाइड्रॉक्साइड (KOH), सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NAOH) आदि। • मिल्क ऑफ मैग्नेशिया या मैग्नेशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)2 ] नामक भस्म का उपयोग पेट की अम्लीयता को दूर करने में किया जाता है। • जल में विलेय भस्म को 'क्षार' कहा जाता है। यह लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है तथा स्वाद में कड़वा होता है, जैसे-पोटैशियम • जल में अविलेय भस्म, अम्ल के साथ प्रतिक्रिया कर लवण एवं जल बनाते हैं, किन्तु क्षार के अन्य गुण प्रदर्शित नहीं करते, जैसे- कॉपर हाइड्रॉक्साइड (Cu(OH)2) • कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2] ऐसा भस्म है, जिसका उपयोग घरों में चूना पोतने में, ब्लीचिंग पाउडर बनाने में जल को मृदु बनाने में तथा चमड़े के ऊपर बाल साफ करने में किया जाता है। • कास्टिक सोडा या सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) भी एक भस्म है। इसका उपयोग साबुन बनाने में दवा बनाने में पेट्रोलियम साफ में एवं कपड़ा व कागज बनाने में किया जाता है। क्या होता है लिटमस -पत्र ? लिटमस-पत्र एक प्राकृतिक सूचक होता है, जिसका निर्माण थैलोफाइटा समूह के लिचेन (lichen) नामक पौधे से किया जाता है। लिटमस विलयन जब न • किसी विलयन के pH का मान 7 से जितना कम होगा, उसकी अम्लीयता उतनी ही अधिक होगी तथा किसी विलयन के pH का मान 7 से जितना अधिक होगा उसकी क्षारीयता उतनी ही कम होगी। • एक उदासीन विलयन के pH का मान 7 होता बढ़ती हुई अम्लीय प्रकृति, उदासीन, बढ़ती हुई ● है। क्षारक प्रकृति • H आयन की सान्द्रता में वृद्धि 7 H आयन की सान्द्रता में कमी हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम जाता है तो वह 'अम्लीय वर्षा' कहलाती है। ● • सभी जीवों में उपापचय की क्रिया pH की एक सीमा में होती है। ● मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों प्रारम्भ हो जाता है। • जीवित प्राणी केवल संकीर्ण pH परास में ही जीवित रह सकते हैं। कुछ सामान्य पदार्थों के pH मान पदार्थ pH मान 8.4 7.4 6.5 6.4 6.0 2.8 24 22 समुद्री जल रक्त लार दूध मूत्र शराब सिरका नींबू • किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया, जिसे 'pH स्केल' कहते हैं। का क्षय लवण • अम्ल एवं भस्म की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप लवण का निर्माण होता है। • इस pH में P अक्षर जर्मन भाषा के शब्द Potz से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'शक्ति'। इस pH स्केल से सामान्यतः शून्य से चौदह तक pH को ज्ञात किया जा सकता है। • प्रबल अम्ल एवं प्रबल भस्म से निर्मित लवण का pH मान 7 होता है तथा ये उदासीन होते हैं। • जब प्रबल अम्ल एवं दुर्बल भस्म के लवण के pH का मान 7 से कम होता है तो ये 'अम्लीय' होते हैं। • जब प्रबल भस्म एवं दुर्बल अम्ल के लवण के pH 7 से अधिक होता है तो ये 'क्षारकीय' होते हैं। pH स्केल से सम्बन्धित कुछ तथ्य • pH (0-14) स्केल का उपयोग अम्ल या क्षारक की प्रबलता की जाँच में होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सोडियम हाइड्रोक्साइड के विलयन की अभिक्रिया से उत्पन्न लवण 'सोडियम क्लोराइड' का प्रयोग हम भोजन में करते हैं। ●समसामयिकी महासागर

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रविवार, 24 जुलाई 2022

समझदार कंप्यूटर

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आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की रिसर्च में सबसे बड़ी चुनौती है एक समझदार कंप्यूटर बनाना. कुछ लोग आगाह करते हैं कि यह तकनीक हमारे वजूद को खतरे में डाल सकती है. अगर मशीन हमसे भी ज्यादा स्मार्ट बन बैठे, तब क्या होगा? टेक्टोपिया के इस एपिसोड में हम बात करेंगे एआई की दुनिया की और उन सवालों की, जो मानवता के सामने मुंह बाए खड़े हैं. sabhar dw.de

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बुधवार, 20 जुलाई 2022

घर को ठंडा रखेंगे खास तौर से तैयार किए गए शीशे

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एयरकंडीशनर अब बीते दिनों की बात होगी क्योंकि वैज्ञानिकों ने शीशे की ऐसी खिड़कियां तैयार कर ली हैं जो गर्मी में ठंडक और जाड़े में गर्मी का अहसास दिलाएगी। खास रसायन की परत वाले ये शीशे कम आय वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। भारत जैसे विकासशील देशों में तो खास किस्म की परत वाले शीशों से बनी खिड़कियां धूम मचा सकती हैं। 'क्वींसलैंड यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' के शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैंसों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार एयरकंडीशनर का यह 'इको फ्रेंडली' विकल्प होगा। शोधकर्ताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के चमकदार परत वाले शीशों से घरों में बेतहाशा ऊर्जा की खपत कम कर 45 फीसदी तक बिजली की बचत हो सकेगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आयेगी। शोधकर्ता 'डॉ. बेल' के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में एयरकंडीशनरों का बहुत बड़ा हाथ है। उनके मुताबिक वातानुकूलित घरों और आफिसों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है । बेल ने कहा कि बाजार में उपलब्ध ये शीशे एयरकंडीशनर के मुकाबले तो कूलिंग नहीं करेंगे पर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए ये काफी हैं। ऐसे शीशे वाली खिड़कियों में टिंटेड ग्लास, फिर एयरगैप और उसके बाद खास किस्म की ऊष्मारोधी परत वाले लो-ई ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। बेल के अनुसार अच्छी खिड़कियां घरों को ऊष्मारोधी बनाने में मदद करती हैं। इससे जाड़ों में घर गर्म रहता है और गर्मी में ठंडा । शोधकर्ता ने कहा कि शीशे पर रासायनिक परत वाले और खास किस्म की खिड़कियों के ढांचे जल्द ही हर घर की शोभा बढ़ाएंगे। sabhar dipak kohali vigyan pragati

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डायबिटीज से बचाते हैं खट्टे फल

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दीपक कोहली sabhar vigyan pragati कनाडा के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि खट्टे फल वजन बढ़ने, टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग के खतरे को कम करते हैं। 'ओंटेरियो यूनीवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि खट्टे फलों में पाये जाने वाला 'फ्लेवोनॉयड नैरीनजेनिन' तत्व शरीर में अतिरिक्त वसा को नष्ट कर देता है और वजन बढ़ने से भी रोकता है। इसमें इंसुलिन जैसे गुण भी पाये जाते हैं जो डायबिटीज को रोकने में सहायक सिद्ध हुए हैं। फ्लेवोनॉयड तत्व पौधों में पाया जाता है और मनुष्यों में यह एंटीऑक्सीडेंट की सक्रियता बढ़ाने का काम करता है । अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि यह तत्व लीवर में आनुवंशिक ढंग से अतिरिक्त वसा को नष्ट करता है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर इसके सफल प्रयोग किये हैं।

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जीन्स में छिपा है दीर्घायु का राज

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। जर्मनी के गुटनबर्ग में 12 जून से 15 जून तक यूरोपियन ह्यूमन जेनेटिक्स कांफ्रेंस 2010 सम्पन्न हुई थी इस कांफ्रेंस में बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रो. पाओला सेविस्टियनी द्वारा प्रस्तुत शोध में बताया गया था कि स्वस्थ मनुष्य की जीवन शैली व वातावरण के आधार पर आयु 80 वर्ष होती है। इससे अधिक जीवित रहने का कारण जीन्स में निहित होता है। प्रो. पाओला ने अधिक उम्र वाले लोगों के डीएनए स्कैनिंग टेक्नोलॉजी के जरिये दर्शाया। उन्होंने बताया है कि मानव शरीर में 30 करोड़ (300 मिलियन) जींस में से 150 जींस इससे संबंधित होते हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है । 110 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्ति एक करोड़ में एक होते हैं। जिनमें से 85 से 90 फीसदी महिलायें होती हैं ।

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कैंसर को खत्म करने वाले टीके का निर्माण

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ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टीका बनाने का दावा किया है जो सर्वाधिक घातक किस्म के कैंसरों को भी ठीक कर सकता है । मिडिलसेक्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रे आइल्स के अनुसार स्तन, पेट, अग्न्याशय, सर्विकल और अंडाशय के कैंसर से पीड़ित रोगियों पर परीक्षित इस इंजेक्शन को अगले पांच सालों के दौरान बाजार में उतार दिया जाएगा । अमेरिकी फर्म सेलफेडेक्स थिनेपियूटिक्स के साथ संयुक्त रूप से इस इंजेक्शन को विकसित किया जा रहा है। आईल्स का कहना है कि इस टीके से कैंसर को सिकोड़ा जा सकता है ताकि वह आगे नहीं बढ़े।

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सोमवार, 18 जुलाई 2022

जापान चांद और मंगल पर अपने ट्रेन चलाएगा

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 यह वीडियो अंकित अवस्थी का है उन्होंने समाचार पत्रों का रिसर्च करके बनाया है अंकित अवस्थी जी ने काफी गहराई से इसका अध्ययन किया है इसमें जापान के वैज्ञानिकों ने दावा किया है की सन 2050 के बाद चांद और मंगल के लिए ट्रेन चलाई जाएगी यह मैग्नेट पद्धति के ट्रेन पर आधारित होगी यात्रियों को चांद और मंगल पर जाने की यह सुविधा हो जाएगी


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शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

गुदा कैंसर की नई दवा ने जगाई उम्मीदें

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 अमेरिका में एक प्रयोग में शामिल हुए एक दर्जन से ज्यादा मरीजों का कैंसर ठीक होने को वैज्ञानिकों ने अद्भुत नतीजा बताया है. ये मरीज एक छोटी क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा थे.

न्यूयॉर्क के मेमॉरियल सलोन केटरिंग (एमएसके) कैंसर सेंटर की एक क्लिनिकल ट्रायल में शामिल हुए गुदा कैंसर के मरीजों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया. सेंटर ने बताया कि इन मरीजों को एक प्रायोगिक दवा डोस्टरलाइमैब दी गई थी. रविवार को यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था.

सबका कैंसर ठीक हुआ

प्रकाशित अध्ययन में गुदा कैंसर से पीड़ित रहे 12 मरीजों का ब्यौरा दिया गया है. अध्ययन के मुताबिक मरीजों को हर तीन हफ्ते पर डोस्टरलाइमैब दी गई. यह प्रयोग छह महीने तक चला. प्रयोग के दौरान डॉक्टर यह मानकर चल रहे थे कि मरीजों को इसके बाद कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी आदि जैसे पारंपरिक इलाज कराने होंगे.

यह भी पढ़ेंः स्तन कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी कामयाबी, नई दवा और नई श्रेणी

लेकिन छह महीने बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रयोग में शामिल सभी मरीजों का कैंसर ठीक हो गया था. ऐसा पहली बार है जबकि किसी परीक्षण में सभी कैंसर के मरीजों को सकारात्मक नतीजे मिले हैं. इसलिए वैज्ञानिकोंके बीच इस दवा को लेकर खासा उत्साह है और वे इसे दिशा बदलने वाला प्रयोग मान रहे हैं.

मेमॉरियल सलोन केटरिंग सेंटर के डॉ. लुईस डियाज जूनियर ने न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें किसी और ऐसे अध्ययन की जानकारी नहीं है जिसमें हर मरीज का कैंसर ठीक हो गया हो. उन्होंने कहा, "मेरे विचार में कैंसर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है."

इम्यूनोथेरेपी

यह प्रयोग इम्यूनोथेरेपी पर आधारित था. इम्यूनोथेरेपी में ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनका काम शरीर की रोगों से लड़ने वाली क्षमता को बढ़ाना होता है ताकि शरीर इतना ताकतवर हो जाए कि कैंसर को ठीक कर सके. एमएसके ने एक बयान में कहा कि प्रयोग में गुदा के कैंसर से पीड़ित ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें एक खास तरह का कैंसर म्यूटेशन था.

ऐसे गुदा कैंसर को "मिसमैच रिपेयर डेफिशिएंट" (MMRd) रेक्टल कैंसर कहा जाता है. इस तरह के कैंसर में कीमोथेरेपी का ज्यादा असर नहीं होता है. परीक्षण के दौरान शोधकर्ता देखना चाहते थे कि क्या सिर्फ इम्यूनोथेरेपी से ऐसे कैंसर को ठीक किया जा सकता है, जो अन्य उत्तकों और अंगों में ना फैला हो.

अध्ययन कहता है कि प्रयोग अभी चल रहा है लेकिन जिन 14 मरीजों को दवा दी गई, उन सभी का ट्यूमर खत्म हो गया और किसी पर भी कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. शोधकर्ताओं ने कहा कि किसी भी मरीज को रेडिएशन, सर्जरी या कीमोथेरेपी आदि की जरूरत नहीं है और दो साल से ये मरीज बिल्कुल ठीक हैं. किसी भी मरीज का कैंसर लौटा नहीं है.

शोध में शामिल एमसके की डॉ. ऐंड्रिया केरचक कहती हैं, "मरीजों से ये खुशियों से भरे संदेश और ईमेल पाना अविश्वसनीय रूप से प्रसन्नता देने वाला है. मरीजों को अहसास हो रहा है कि वे अपनी सभी शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से कर पाएंगे, जो रेडिएशन थेरेपी से संभव ना होता."

रिपोर्टः विवेक कुमारhttps://www.dw.com/hi/small-trial-sees-potential-for-new-rectal-cancer-drug/a-62168893

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गुरुवार, 14 जुलाई 2022

क्या है ॐ ध्वनि का रहस्य भाग

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वास्तव में, स्त्री शरीर भी अधूरा शरीर है और पुरुष शरीर भी अधूरा शरीर है; इसलिए सृजन के क्रम में उन दोनों को संयुक्त होना पड़ता है। यह संयुक्त होना दो प्रकार का है। एक पुरुष का शरीर अगर बाहर की स्त्री से संयुक्त हो, तो प्रकृति का सृजन होता है तो प्रकृति की तरफ यात्रा शुरू होती है।


और एक पुरुष का शरीर अगर अपने ही पीछे छिपे स्त्री शरीर से संयुक्त हो, तो ब्रह्म की तरफ का जन्म शुरू होता है ; परमात्मा की तरफ यात्रा शुरू होती है। ऊर्ध्वगमन का यात्रा पथ यही है..भीतर की स्त्री से संबंधित होना, और भीतर के पुरुष से संबंधित होना।


वास्तव में ,जो ऊर्जा है, वह सदा पुरुष से स्त्री की तरफ बहती है ...चाहे वह बाहर की तरफ बहे और चाहे वह भीतर की तरफ बहे। अगर पुरुष के भौतिक शरीर की ऊर्जा भीतर के स्त्री शरीर के प्रति बहे, तो फिर ऊर्जा बाहर विकीर्ण नहीं होती -ब्रह्मचर्य की साधना का यही अर्थ है।


 तब वह निरंतर ऊपर चढ़ती जाती है। चौथे शरीर तक उस ऊर्जा की यात्रा हो सकती है। चौथे शरीर पर ब्रह्मचर्य पूरा हो जाता है। इसके बाद ब्रह्मचर्य जैसी कोई चीज नहीं है; क्योंकि चौथे शरीर को पार करने के बाद साधक न पुरुष है और न स्त्री है।


अब यह जो एक नंबर का शरीर और दो नंबर का शरीर है, इसी को ध्यान में रखकर अर्धनारीश्वर की कल्पना कभी हमने चित्रित की थी। बाकी वह प्रतीक बनकर रह गई और हम उसे कभी समझ नहीं पाए। शिव शंकर अधूरे हैं,देवी पार्वती अधूरी है ..वे दोनों मिलकर एक हैं।


अर्धनारीश्वर का कि आधा अंग पुरुष का है, आधा स्त्री का है। यह जो आधा दूसरा अंग है, यह बाहर प्रकट नहीं है, यह प्रत्येक के भीतर छिपा है। तुम्हारा एक पहलू पुरुष का है, तुम्हारा दूसरा पहलू स्त्री का है। वास्तव  में, ये एक -दूसरे के परिपूरक हैं,ये दो इकाइयां नहीं हैं, ये एक ही इकाई के दो पहलू हैं।


आप देखेंगे कि पुरुष जब दिनभर कार्य करता तो उसका पहला शरीर थक जाता है। घर लौटते-लौटते वह पहला शरीर विश्राम चाहता है। भीतर का स्त्री शरीर प्रमुख हो जाता है, पुरुष शरीर गौण हो जाता है। स्त्री दिन भर स्त्री रहते-रहते पहला शरीर थक जाता है, उसका दूसरा शरीर प्रमुख हो जाता है।


इसलिए स्त्री पुरुष का व्यवहार करने लगती है और पुरुष स्त्री का व्यवहार करने लगता है ...रिवर्सन हो जाता है। ऊर्जा के आंतरिक प्रवाह ऊर्ध्व गमन का मार्ग है कि बाहर के पुरुष का भीतर की स्त्री से मिलन या बाहर की स्त्री का भीतर के पुरुष से मिलन। 


पुरुष शरीर के जो विशेष गुण हैं, वह पहला गुण यह है कि वह आक्रामक है ,दाता है, दे सकता है, ले नहीं सकता। लेकिन पुरुष ग्रहण नहीं कर पाता; उसकी ग्रहण करने की क्षमता बहुत कम है। इसलिए पुरुषों ने धर्म को जन्म तो दिया, लेकिन पुरुष धर्म का संग्रह नहीं करते।


बल्कि स्त्रियां धर्म का संग्रह करती है। स्त्री दे नहीं सकती, ले सकती है।परन्तु इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी महिमा यही है कि जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका दूसरा शरीर पुरुष का;पुनः तीसरा शरीर स्त्री का और चौथा पुरुष का। इस प्रकार जिसका पहला शरीर पुरुष का है।


 उसका दूसरा शरीर स्त्री का ;पुनः तीसरा पुरुष का और चौथा स्त्री का। चौथे शरीर के बाद स्त्री पुरुष शरीर का भेद भी खत्म हो जाता है। उनका ऊर्ध्व गमन हो जाता है। जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका चौथा शरीर पुरुष का है। जिसका पहला शरीर पुरुष का है ;उसका चौथा शरीर स्त्री का है।


इसलिए चौथे शरीर में स्त्रियां देने वाली है दाता है और चौथे शरीर में पुरुष लेने वाले भिक्षुक हैं। सांसारिक जगत में 3 शरीरों का वर्चस्व है। परंतु आध्यात्मिक जगत में यात्रा चौथे शरीर से ही शुरू होती है। स्त्रैण व्यक्तित्व का मतलब यह है कि उनमें स्त्रैण गुण हैं।


कोमलता, प्रेम, ममता, करुणा और अहिंसा आदि वे बढ़ गए; हिंसा क्रोध खत्म हो गया, आक्रमण विदा हो गया। जब भी कोई मुल्क आध्यात्मिक होगा, तो स्त्रैण हो जाएगा; और जब भी स्त्रैण होगा, तब अपने से बहुत साधारण सभ्यताएं उसको हरा देंगी।


सामान्य चौथे शरीर मे ॐ ध्वनि सुनने लगती ओर यात्रा पूर्ण समझ लोग रुक जाते। किन्तु गुरु परंपरा में गुरुजन सदैव कहते कि चौथे शरीर में जल्द आगे बढ़ो साधना समय दोगुना कर दो। क्योकि अगला शरीर आत्म शरीर है वही आपका पहला जन्म होगा स्वयं से। 


उससे पहले न जन्म है न मृत्यु हम किसी ओर के गर्भ से जन्म लेते रहते यह जीवन चक्र यू ही चलता रहता। आत्म शरीर स्वयं से जन्म लेता फिर आप को पराए गर्भ से मुक्ति मिल जाती। इसे मुक्ति कहा है यह मोक्ष या निर्वाण नही है अभी यात्रा बाकी है। 


उदहारण के लिए बौद्ध तिब्बत से निकाल दिए गए या भारत को जिन लोगों ने हराया, वे भारत से बहुत पिछड़ी हुई सभ्यताएं , एक अर्थ में बिलकुल बर्बर सभ्यताएं थीं। लेकिन हम अध्यात्म में दाता हो गए थे, हम उनको आत्मसात ही कर सके, लड़ने का कोई उपाय न था।


तो ऐसी प्रक्रियाएं हैं कि इसी हालत में व्यक्तित्व का रूपांतरण किया जा सकता है..जो तुम्हारा नंबर दो का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर एक का शरीर हो सकता है; और जो तुम्हारे नंबर एक का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर दो का शरीर हो सकता है। 


इसके लिए प्रगाढ़ संकल्प की साधनाएं हैं, जिनसे तुम्हारा इसी जीवन में भी शरीर रूपांतरित हो सकता है। परंतु समस्या तब आती है जब हम चौथे शरीर पर ही रुक जाते हैं। चौथे शरीर के बाद पांचवें ,छठवें और सातवें शरीर की भी तो यात्रा है।


भारत चौथे शरीर पर ही रुक गया इसलिए हार गया। उदाहरण के लिए  गोपिओं को श्री कृष्ण सखी प्रतीत होते हैं; परंतु क्या महाभारत में भी उनका व्यक्तित्व ऐसा है? नही, क्योंकि उनकी यात्रा छटे शरीर की हैं। श्री कृष्ण छटे ब्रह्म शरीर मे है । भारत चौथे शरीर पर रुक गया तो हार गया।


इसीलिए चौथे शरीर के बाद रुकना नहीं हैं... सातवें शरीर तक जाना हैं। राग से शुरू कर वैराग्य के रास्ते वीतरागता तक जाना वैराग्य पर रुकना नही है। जो संसार मे लिप्त होता उसे रागी कहते ओर जो संसार को मिथ्या मान दूर भागता उसे वैरागी कहते। 


राग ओर वैराग्य से ऊपर की अवस्था होती वीतरागता। यहाँ न संसार को पकड़ा होता न ही छोड़ा होता। पूर्ण आनन्द की अवस्था होती यह। जहाँ सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए योगी जन मोक्ष की तरफ बढ़ते रहते राजा जनक की तरह। 


ॐ ध्वनि चौथे शरीर पर सुनाई देती आगे की यात्रा निःशब्द है इस लिए इसे सातवे का प्रतीक माना गया किंतु ॐ ध्वनि सुनने के उपरांत भी बढ़ते रहना है ।Sabhar kundalni shadhana avam yog Facebook wall

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मंगलवार, 12 जुलाई 2022

यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए युटुब क्रिएटर्स ऑफ इंडिया की तरफ से नई जानकारी

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https://youtu.be/x2ApKFFWsO4 

यूट्यूब कौन सी नई जानकारी लेकर आ रहा है इस तरीके से आप अपने यूट्यूब चैनल से अच्छी कमाई कर सकते हैं यूट्यूब की क्या नहीं किया है यूट्यूब वीडियो में अच्छी जानकारी दी गई है

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स्तूपासन के फायदे

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https://vigyanik.quora.com -

  • यहा आतो के इन्फेक्शन को ख़त्म करता है।
  • स्तूपासन आसन करने से पेट के स्नायुओं को शक्ति मिलती है तथा नाड़ी संस्थान को यह व्यवस्थित करता है।
    इस आसन के अभ्यास से कब्ज, पेट के विकार और वीर्य दोष दूर होते हैं तथा पूरा शरीर शुद्ध होता है।
  • उच्च स्तर पर कुण्डलिनी को जागृत करने में भी इस आसन का अभ्यास ज्यादा फायदेमंद है।
  • स्तूपासन आसन आतों की गंदगी को साफ करता है तथा पाचन क्रिया में वृद्धि करने में भी इस आसन के अनेक लाभ है

स्तूपासन करने की विधि -

  • स्तूपासन करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • अब अपने दाएं पैर को बाएं जांघ पर रखें तथा बाएं पैर को दाएं जांघ पर रखें।
  • इसके बाद दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध कर पीछे की ओर ले जाएं। अब दाएं हाथ की मुट्ठी को बाएं हाथ में कसकर पकड़ के नीचे की ओर करके रखें।
  • इसके बाद गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए सामने की ओर जितना झुकना संभव हो जब चाहें मुट्ठियों को कसकर पकड़ कर रखें।
  • आसन की इस स्थिति में 3 से 10 सेकंड तक रहें और सांस को रोक कर रखें।
  • सांस को छोड़ते हुए धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं

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