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शुक्रवार, 28 जुलाई 2023

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा 

चीन ने एआई के मामले में दुनिया के अन्य देशों से आगे निकलने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया है. विशेषज्ञों को डर है कि एआई के क्षेत्र में चीन के दिग्गज बनने से काफी कुछ बदल सकता है. आखिर इस डर की वजह क्या है?


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा

निक मार्टिन
4 घंटे पहले

चीन ने एआई के मामले में दुनिया के अन्य देशों से आगे निकलने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया है. विशेषज्ञों को डर है कि एआई के क्षेत्र में चीन के दिग्गज बनने से काफी कुछ बदल सकता है. आखिर इस डर की वजह क्या है?

https://p.dw.com/p/4UTQ3
चीन में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक एआई रोबोट
चीन एआई की दुनिया का दिग्गज बनने की तैयारी में हैतस्वीर: Florence Lo/REUTERS

टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीन की दिग्गज कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट के निर्माण में अपने अमेरिकी प्रतिद्वंदियों की तरह ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश सिर्फ इस साल एआई प्रोजेक्ट पर 15 अरब डॉलर खर्च करने वाला है. यह बजट पिछले दो वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ गया है. माइक्रोसॉफ्ट की ओर से तैयार किए गए चैट जीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल के लॉन्च होने से पहले भी कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने यह दावा करने से इनकार कर दिया था कि एआई की दौड़ में पश्चिमी देशों का दबदबा होगा. ये हालत तब है जबकि सबसे बेहतर एआई प्रयोगशालाएं अमेरिका और ब्रिटेन में हैं.

क्या है जेनरेटिव एआई, कैसे करेगा मदद

ताइवान के कंप्यूटर वैज्ञानिक, पूंजीपति और तकनीकी प्रबंधक काई-फू ली ने 2018 में अनुमान लगाया था कि चीन जल्द ही एआई महाशक्ति के रूप में अमेरिका से आगे निकल जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा था कि यह तकनीक इनोवेशन वाले पहले चरण को पार कर चुकी है. ली ने तर्क दिया कि दुनिया अब एआई का इस्तेमाल करने वाले चरण में पहुंच चुकी है, जहां चीन को बढ़त हासिल है. चीन अपने नागरिकों की जासूसी करने के लिए लंबे समय से एआई का इस्तेमाल कर रहा है और इससे उसने काफी ज्यादा डाटा इकट्ठा कर लिया है. इस डाटा की मदद से एआई प्लेटफॉर्म खुद को बेहतर बना रहे हैं. पूरी दुनिया में निगरानी के लिए स्थापित किए गए करीब 1 अरब में से आधे से अधिक कैमरे चीन में तैनात किए गए हैं. हालांकि, ली के आलोचकों का तर्क है कि एआई क्रांति अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है और पश्चिमी देशों के पास इसकी कुंजी है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा

निक मार्टिन
4 घंटे पहले

चीन ने एआई के मामले में दुनिया के अन्य देशों से आगे निकलने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया है. विशेषज्ञों को डर है कि एआई के क्षेत्र में चीन के दिग्गज बनने से काफी कुछ बदल सकता है. आखिर इस डर की वजह क्या है?

https://p.dw.com/p/4UTQ3
चीन में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक एआई रोबोट
चीन एआई की दुनिया का दिग्गज बनने की तैयारी में हैतस्वीर: Florence Lo/REUTERS

टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीन की दिग्गज कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट के निर्माण में अपने अमेरिकी प्रतिद्वंदियों की तरह ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश सिर्फ इस साल एआई प्रोजेक्ट पर 15 अरब डॉलर खर्च करने वाला है. यह बजट पिछले दो वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ गया है. माइक्रोसॉफ्ट की ओर से तैयार किए गए चैट जीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल के लॉन्च होने से पहले भी कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने यह दावा करने से इनकार कर दिया था कि एआई की दौड़ में पश्चिमी देशों का दबदबा होगा. ये हालत तब है जबकि सबसे बेहतर एआई प्रयोगशालाएं अमेरिका और ब्रिटेन में हैं.

क्या है जेनरेटिव एआई, कैसे करेगा मदद

ताइवान के कंप्यूटर वैज्ञानिक, पूंजीपति और तकनीकी प्रबंधक काई-फू ली ने 2018 में अनुमान लगाया था कि चीन जल्द ही एआई महाशक्ति के रूप में अमेरिका से आगे निकल जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा था कि यह तकनीक इनोवेशन वाले पहले चरण को पार कर चुकी है. ली ने तर्क दिया कि दुनिया अब एआई का इस्तेमाल करने वाले चरण में पहुंच चुकी है, जहां चीन को बढ़त हासिल है. चीन अपने नागरिकों की जासूसी करने के लिए लंबे समय से एआई का इस्तेमाल कर रहा है और इससे उसने काफी ज्यादा डाटा इकट्ठा कर लिया है. इस डाटा की मदद से एआई प्लेटफॉर्म खुद को बेहतर बना रहे हैं. पूरी दुनिया में निगरानी के लिए स्थापित किए गए करीब 1 अरब में से आधे से अधिक कैमरे चीन में तैनात किए गए हैं. हालांकि, ली के आलोचकों का तर्क है कि एआई क्रांति अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है और पश्चिमी देशों के पास इसकी कुंजी है.

चैट जीपीटी का चीनी संस्करण एर्नी बॉट
एआई के लिए चीन के पास आंकड़ों का भंडार पहले से मौजूद हैतस्वीर: CFOTO/picture alliance

चीन से अमेरिका परेशान 

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के पॉल जी एलन स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पेड्रो डोमिंगोस ने डीडब्ल्यू को बताया, "एआई के क्षेत्र में बड़ी खोज अब तक नहीं हुई है. अब भी अमेरिका का इस क्षेत्र में दबदबा है.” डोमिंगोस ने बड़े डाटा से ‘पर्याप्त नतीजे नहीं मिलने' पर बात की. इसमें कहा गया कि अपनी 1.4 अरब की आबादी की जासूसी करने से चीन को अमेरिका की तुलना में ज्यादा लाभ नहीं होगा. उन्होंने कहा, "अलग-अलग तरीके का डाटा होना भी काफी मायने रखता है. मैं चीन की तुलना में यूरोप से डाटा लेना पसंद करूंगा, क्योंकि यह काफी विविधता वाला है. इसलिए, आप इससे ज्यादा सीख सकते हैं.”

पत्रकारों का काम आसान करने एआई टूल ला रहा है गूगल

अमेरिका स्पष्ट रूप से चीन की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं से परेशान है, क्योंकि चीनी सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति के तहत तय किया है कि उसे 2030 तक एआई के क्षेत्र में दुनिया में सर्वोच्च स्थान हासिल करना है. चीन के साथ लगातार बिगड़ते संबंधों के कारण पिछले साल अमेरिका ने सबसे बेहतर मेमोरी चिप के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. अपने एआई लैंग्वेज मॉडल को बेहतर बनाने के लिए चीनी कंपनियों को इन चिप की जरूरत है.

सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और अध्ययन निदेशक पॉल शार्रे ने डीडब्ल्यू को बताया, "सबसे अत्याधुनिक एआई सिस्टम के लिए भारी मात्रा में हार्डवेयर यानी हजारों की संख्या में खास चिप की जरूरत होती है.”  उन्होंने आगे कहा, "अगर चीन को ये चिप नहीं मिलते हैं, तो वह सबसे बेहतर सिस्टम नहीं बना पाएगा. समय के साथ यह अंतर बढ़ने की संभावना है, क्योंकि चिप से जुड़ी टेक्नोलॉजी भी लगातार बेहतर हो रही है.” इस हालात में चीनी कंपनियां कोई और तरीका ढूंढ सकती हैं. इससे घरेलू सेमीकंडक्टर बाजार में निवेश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि स्थानीय उत्पादक अपने चिप को बेहतर बनाने की होड़ में हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा

निक मार्टिन
4 घंटे पहले

चीन ने एआई के मामले में दुनिया के अन्य देशों से आगे निकलने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया है. विशेषज्ञों को डर है कि एआई के क्षेत्र में चीन के दिग्गज बनने से काफी कुछ बदल सकता है. आखिर इस डर की वजह क्या है?

https://p.dw.com/p/4UTQ3
चीन में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक एआई रोबोट
चीन एआई की दुनिया का दिग्गज बनने की तैयारी में हैतस्वीर: Florence Lo/REUTERS

टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीन की दिग्गज कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट के निर्माण में अपने अमेरिकी प्रतिद्वंदियों की तरह ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश सिर्फ इस साल एआई प्रोजेक्ट पर 15 अरब डॉलर खर्च करने वाला है. यह बजट पिछले दो वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ गया है. माइक्रोसॉफ्ट की ओर से तैयार किए गए चैट जीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल के लॉन्च होने से पहले भी कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने यह दावा करने से इनकार कर दिया था कि एआई की दौड़ में पश्चिमी देशों का दबदबा होगा. ये हालत तब है जबकि सबसे बेहतर एआई प्रयोगशालाएं अमेरिका और ब्रिटेन में हैं.

क्या है जेनरेटिव एआई, कैसे करेगा मदद

ताइवान के कंप्यूटर वैज्ञानिक, पूंजीपति और तकनीकी प्रबंधक काई-फू ली ने 2018 में अनुमान लगाया था कि चीन जल्द ही एआई महाशक्ति के रूप में अमेरिका से आगे निकल जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा था कि यह तकनीक इनोवेशन वाले पहले चरण को पार कर चुकी है. ली ने तर्क दिया कि दुनिया अब एआई का इस्तेमाल करने वाले चरण में पहुंच चुकी है, जहां चीन को बढ़त हासिल है. चीन अपने नागरिकों की जासूसी करने के लिए लंबे समय से एआई का इस्तेमाल कर रहा है और इससे उसने काफी ज्यादा डाटा इकट्ठा कर लिया है. इस डाटा की मदद से एआई प्लेटफॉर्म खुद को बेहतर बना रहे हैं. पूरी दुनिया में निगरानी के लिए स्थापित किए गए करीब 1 अरब में से आधे से अधिक कैमरे चीन में तैनात किए गए हैं. हालांकि, ली के आलोचकों का तर्क है कि एआई क्रांति अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है और पश्चिमी देशों के पास इसकी कुंजी है.

चैट जीपीटी का चीनी संस्करण एर्नी बॉट
एआई के लिए चीन के पास आंकड़ों का भंडार पहले से मौजूद हैतस्वीर: CFOTO/picture alliance

चीन से अमेरिका परेशान 

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के पॉल जी एलन स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पेड्रो डोमिंगोस ने डीडब्ल्यू को बताया, "एआई के क्षेत्र में बड़ी खोज अब तक नहीं हुई है. अब भी अमेरिका का इस क्षेत्र में दबदबा है.” डोमिंगोस ने बड़े डाटा से ‘पर्याप्त नतीजे नहीं मिलने' पर बात की. इसमें कहा गया कि अपनी 1.4 अरब की आबादी की जासूसी करने से चीन को अमेरिका की तुलना में ज्यादा लाभ नहीं होगा. उन्होंने कहा, "अलग-अलग तरीके का डाटा होना भी काफी मायने रखता है. मैं चीन की तुलना में यूरोप से डाटा लेना पसंद करूंगा, क्योंकि यह काफी विविधता वाला है. इसलिए, आप इससे ज्यादा सीख सकते हैं.”

पत्रकारों का काम आसान करने एआई टूल ला रहा है गूगल

अमेरिका स्पष्ट रूप से चीन की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं से परेशान है, क्योंकि चीनी सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति के तहत तय किया है कि उसे 2030 तक एआई के क्षेत्र में दुनिया में सर्वोच्च स्थान हासिल करना है. चीन के साथ लगातार बिगड़ते संबंधों के कारण पिछले साल अमेरिका ने सबसे बेहतर मेमोरी चिप के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. अपने एआई लैंग्वेज मॉडल को बेहतर बनाने के लिए चीनी कंपनियों को इन चिप की जरूरत है.

सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और अध्ययन निदेशक पॉल शार्रे ने डीडब्ल्यू को बताया, "सबसे अत्याधुनिक एआई सिस्टम के लिए भारी मात्रा में हार्डवेयर यानी हजारों की संख्या में खास चिप की जरूरत होती है.”  उन्होंने आगे कहा, "अगर चीन को ये चिप नहीं मिलते हैं, तो वह सबसे बेहतर सिस्टम नहीं बना पाएगा. समय के साथ यह अंतर बढ़ने की संभावना है, क्योंकि चिप से जुड़ी टेक्नोलॉजी भी लगातार बेहतर हो रही है.” इस हालात में चीनी कंपनियां कोई और तरीका ढूंढ सकती हैं. इससे घरेलू सेमीकंडक्टर बाजार में निवेश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि स्थानीय उत्पादक अपने चिप को बेहतर बनाने की होड़ में हैं.

हांघझू में दाहुआ टेक्नोलॉजी के दफ्तर में लगे सर्विलांस कैमरे
चीन सीसीटीवी कैमरों के जरिए अपने नागरिकों पर निगाह रखता है और उनके आंकड़े जमा करता हैतस्वीर: STR/AFP/Getty Images

चीन को मिला ओपन सोर्स का फायदा

अमेरिका एक और सुराख को बंद कर सकता है. वह यह है कि अमेरिकी मशीन लर्निंग प्लैटफॉर्म ओपन सोर्स है. इसे आसानी से कॉपी करके इसमें बदलाव किया जा सकता है. ‘फोर बैटलग्राउंड्स: पावर इन द एज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' पुस्तक के लेखक शार्रे ने चेतावनी दी, "अगर आपकी पहुंच प्रशिक्षित एआई मॉडल तक है, तो आपको बेहतर चिप की जरूरत नहीं है. इसलिए, यह एक वास्तविक जोखिम है जिससे निर्यात पर लगा प्रतिबंध बेअसर हो जाएगा.”

दरअसल, ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अलीबाबा और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म बायडू जैसी कंपनियों ने चैट जीपीटी के अपने चीनी वर्जन अप्रैल में लॉन्च किए. इससे कुछ महीने पहले ही अमेरिकी कंपनी ने चैट जीपीटी को लॉन्च किया था.

चीन के सामने कई चुनौतियां

एआई के क्षेत्र में बढ़त बनाने से पहले चीन को कई अन्य बाधाओं को पार करना होगा. पिछले दो वर्षों से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तकनीकी क्षेत्र को लेकर सख्ती बरते हुए हैं. इससे चीनी अधिकारी ज्यादा जोखिम उठाने से परहेज कर रहे हैं. येल लॉ स्कूल के पॉल त्साई चाइना सेंटर में फेलो कर्मन लुसेरो ने डीडब्ल्यू को बताया, "देश के तकनीकी क्षेत्र के लिए लगातार नए नियम लागू किए गए हैं. अक्सर ये नियम काफी ज्यादा अस्पष्ट रहे हैं. इससे उद्योग पर गहरा असर पड़ा है.”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतना खर्च क्यों कर रहे हैं खाड़ी के देश

लुसेरो ने बताया कि सेंसरशिप के प्रति चीनी सरकार की सनक उनके लिए दुखदायी साबित हो सकती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में डाटा गायब होने या कई विषयों का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रोग्राम किए जाने पर, एआई मॉडल सीखने की अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा, "चीन में सेंसर किए जाने वाले कॉन्टेंट को लेकर हमेशा नियम बदलते रहते हैं. आज जिस कॉन्टेंट के इस्तेमाल की अनुमति है कल उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि कल क्या होगा.”


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में चीन के दबदबे से डर कैसा

निक मार्टिन
4 घंटे पहले

चीन ने एआई के मामले में दुनिया के अन्य देशों से आगे निकलने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया है. विशेषज्ञों को डर है कि एआई के क्षेत्र में चीन के दिग्गज बनने से काफी कुछ बदल सकता है. आखिर इस डर की वजह क्या है?

https://p.dw.com/p/4UTQ3
चीन में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक एआई रोबोट
चीन एआई की दुनिया का दिग्गज बनने की तैयारी में हैतस्वीर: Florence Lo/REUTERS

टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीन की दिग्गज कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट के निर्माण में अपने अमेरिकी प्रतिद्वंदियों की तरह ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश सिर्फ इस साल एआई प्रोजेक्ट पर 15 अरब डॉलर खर्च करने वाला है. यह बजट पिछले दो वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ गया है. माइक्रोसॉफ्ट की ओर से तैयार किए गए चैट जीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल के लॉन्च होने से पहले भी कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने यह दावा करने से इनकार कर दिया था कि एआई की दौड़ में पश्चिमी देशों का दबदबा होगा. ये हालत तब है जबकि सबसे बेहतर एआई प्रयोगशालाएं अमेरिका और ब्रिटेन में हैं.

क्या है जेनरेटिव एआई, कैसे करेगा मदद

ताइवान के कंप्यूटर वैज्ञानिक, पूंजीपति और तकनीकी प्रबंधक काई-फू ली ने 2018 में अनुमान लगाया था कि चीन जल्द ही एआई महाशक्ति के रूप में अमेरिका से आगे निकल जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा था कि यह तकनीक इनोवेशन वाले पहले चरण को पार कर चुकी है. ली ने तर्क दिया कि दुनिया अब एआई का इस्तेमाल करने वाले चरण में पहुंच चुकी है, जहां चीन को बढ़त हासिल है. चीन अपने नागरिकों की जासूसी करने के लिए लंबे समय से एआई का इस्तेमाल कर रहा है और इससे उसने काफी ज्यादा डाटा इकट्ठा कर लिया है. इस डाटा की मदद से एआई प्लेटफॉर्म खुद को बेहतर बना रहे हैं. पूरी दुनिया में निगरानी के लिए स्थापित किए गए करीब 1 अरब में से आधे से अधिक कैमरे चीन में तैनात किए गए हैं. हालांकि, ली के आलोचकों का तर्क है कि एआई क्रांति अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है और पश्चिमी देशों के पास इसकी कुंजी है.

चैट जीपीटी का चीनी संस्करण एर्नी बॉट
एआई के लिए चीन के पास आंकड़ों का भंडार पहले से मौजूद हैतस्वीर: CFOTO/picture alliance

चीन से अमेरिका परेशान 

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के पॉल जी एलन स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पेड्रो डोमिंगोस ने डीडब्ल्यू को बताया, "एआई के क्षेत्र में बड़ी खोज अब तक नहीं हुई है. अब भी अमेरिका का इस क्षेत्र में दबदबा है.” डोमिंगोस ने बड़े डाटा से ‘पर्याप्त नतीजे नहीं मिलने' पर बात की. इसमें कहा गया कि अपनी 1.4 अरब की आबादी की जासूसी करने से चीन को अमेरिका की तुलना में ज्यादा लाभ नहीं होगा. उन्होंने कहा, "अलग-अलग तरीके का डाटा होना भी काफी मायने रखता है. मैं चीन की तुलना में यूरोप से डाटा लेना पसंद करूंगा, क्योंकि यह काफी विविधता वाला है. इसलिए, आप इससे ज्यादा सीख सकते हैं.”

पत्रकारों का काम आसान करने एआई टूल ला रहा है गूगल

अमेरिका स्पष्ट रूप से चीन की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं से परेशान है, क्योंकि चीनी सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति के तहत तय किया है कि उसे 2030 तक एआई के क्षेत्र में दुनिया में सर्वोच्च स्थान हासिल करना है. चीन के साथ लगातार बिगड़ते संबंधों के कारण पिछले साल अमेरिका ने सबसे बेहतर मेमोरी चिप के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. अपने एआई लैंग्वेज मॉडल को बेहतर बनाने के लिए चीनी कंपनियों को इन चिप की जरूरत है.

सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और अध्ययन निदेशक पॉल शार्रे ने डीडब्ल्यू को बताया, "सबसे अत्याधुनिक एआई सिस्टम के लिए भारी मात्रा में हार्डवेयर यानी हजारों की संख्या में खास चिप की जरूरत होती है.”  उन्होंने आगे कहा, "अगर चीन को ये चिप नहीं मिलते हैं, तो वह सबसे बेहतर सिस्टम नहीं बना पाएगा. समय के साथ यह अंतर बढ़ने की संभावना है, क्योंकि चिप से जुड़ी टेक्नोलॉजी भी लगातार बेहतर हो रही है.” इस हालात में चीनी कंपनियां कोई और तरीका ढूंढ सकती हैं. इससे घरेलू सेमीकंडक्टर बाजार में निवेश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि स्थानीय उत्पादक अपने चिप को बेहतर बनाने की होड़ में हैं.

हांघझू में दाहुआ टेक्नोलॉजी के दफ्तर में लगे सर्विलांस कैमरे
चीन सीसीटीवी कैमरों के जरिए अपने नागरिकों पर निगाह रखता है और उनके आंकड़े जमा करता हैतस्वीर: STR/AFP/Getty Images

चीन को मिला ओपन सोर्स का फायदा

अमेरिका एक और सुराख को बंद कर सकता है. वह यह है कि अमेरिकी मशीन लर्निंग प्लैटफॉर्म ओपन सोर्स है. इसे आसानी से कॉपी करके इसमें बदलाव किया जा सकता है. ‘फोर बैटलग्राउंड्स: पावर इन द एज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' पुस्तक के लेखक शार्रे ने चेतावनी दी, "अगर आपकी पहुंच प्रशिक्षित एआई मॉडल तक है, तो आपको बेहतर चिप की जरूरत नहीं है. इसलिए, यह एक वास्तविक जोखिम है जिससे निर्यात पर लगा प्रतिबंध बेअसर हो जाएगा.”

दरअसल, ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अलीबाबा और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म बायडू जैसी कंपनियों ने चैट जीपीटी के अपने चीनी वर्जन अप्रैल में लॉन्च किए. इससे कुछ महीने पहले ही अमेरिकी कंपनी ने चैट जीपीटी को लॉन्च किया था.

चीन के सामने कई चुनौतियां

एआई के क्षेत्र में बढ़त बनाने से पहले चीन को कई अन्य बाधाओं को पार करना होगा. पिछले दो वर्षों से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तकनीकी क्षेत्र को लेकर सख्ती बरते हुए हैं. इससे चीनी अधिकारी ज्यादा जोखिम उठाने से परहेज कर रहे हैं. येल लॉ स्कूल के पॉल त्साई चाइना सेंटर में फेलो कर्मन लुसेरो ने डीडब्ल्यू को बताया, "देश के तकनीकी क्षेत्र के लिए लगातार नए नियम लागू किए गए हैं. अक्सर ये नियम काफी ज्यादा अस्पष्ट रहे हैं. इससे उद्योग पर गहरा असर पड़ा है.”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतना खर्च क्यों कर रहे हैं खाड़ी के देश

लुसेरो ने बताया कि सेंसरशिप के प्रति चीनी सरकार की सनक उनके लिए दुखदायी साबित हो सकती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में डाटा गायब होने या कई विषयों का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रोग्राम किए जाने पर, एआई मॉडल सीखने की अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा, "चीन में सेंसर किए जाने वाले कॉन्टेंट को लेकर हमेशा नियम बदलते रहते हैं. आज जिस कॉन्टेंट के इस्तेमाल की अनुमति है कल उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि कल क्या होगा.”

दिमाग में जो चल रहा है उसे पढ़ सके AI

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जरूरी है प्रतिभा का पलायन रोकना

चीन अपने लक्ष्य को हासिल कर सके, इसके लिए पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिकों की भी कमी है. एआई के क्षेत्र में कुशल लोगों की टीम बनाने के प्रयास के बावजूद, तकनीकी क्षेत्र में शीर्ष स्तर के कर्मचारियों को अपनी टीम में बनाए रखना एक चुनौती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर उनकी मांग है. शोर्रे ने कहा, "प्रतिभा का पलायन चीन के लिए एक बड़ी समस्या है. चीन के बेहतर एआई वैज्ञानिक दूसरे देश चले जाते हैं. ऐसा नहीं है कि वे अध्ययन करने या काम करने के लिए विदेश जाते हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक तरीके से जिंदगी जीना चाहते हैं जो चीन में शायद ही संभव है.”

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सख्त कानूनों की तलाश में दुनिया

इन तमाम समस्याओं के बावजूद, उनका मानना है कि चीन के एआई लैब पश्चिम के बेहतर लैब से महज 18 महीने पीछे हैं. जब समाज में एआई के इस्तेमाल की बात आती है, तो चीन इसमें पहले से ही बढ़त बनाए हुए है.

बेधड़क एआई का इस्तेमाल कर रहा चीन

डोमिंगोस कहते हैं कि पश्चिम में कुछ लोग अब भी सवाल उठाते हैं कि क्या सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए एआई के इस्तेमाल पर रोक लगा देनी चाहिए. वहीं, चीन इस तकनीक का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है. चीन के लिए यह तकनीक ‘निरंकुश शासन के लिए ड्रीम टूल' जैसा है.

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "लोकतांत्रिक दुनिया में हमारे लिए यह जरूरी है कि अमेरिका आगे बढ़े. अगर चीन आगे बढ़ जाता है, तो हमें राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य रूप से काफी परेशानी होगी.” डोमिंगोस ने तर्क दिया कि जिस तरह से पिछली शताब्दी में अमेरिकी संस्कृति और प्रौद्योगिकी वैश्विक स्तर पर फैली, उसी तरह एआई पर चीन का प्रभुत्व बाकी दुनिया को उसके जैसा बना देगा. Sabhar Dw.de खबरें लिखने में गूगल का एआई टूल करेगा मदद

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गुरुवार, 20 जुलाई 2023

अदृश्य` पदार्थ चलाएगा आपका कंप्यूटर

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 न्यूयार्क : कंप्यूटर की तकनीक वाले इस युग में चीजें नित सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होती जा रही हैं, तथा वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाला समय तथाकथित अतिसूक्ष्म `मेटामटीरियल्स` का होगा। किसी पदार्थ को अदृश्य करने के लिए प्रकाश तरंगों की प्रकृति को परिवर्तित कर देने वाले ये मेटामटीरियल्स कंप्यूटर के कार्य भी कर सकते हैं।


अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, मेटामटीरियल्स आने वाली प्रकाश की तरंगों के आकार को इस तरह परिवर्तित कर सकते हैं, जिनका प्रभाव कंप्यूटर द्वारा किए जाने वाले गणना के समान ही होता है।


अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रवक्ता नाडेर एंगटा ने बताया, "जैसे ही प्रकाश इस पदार्थ से होकर बाहर आता है, प्रकाश की तरंगों का आकार इस तरह का हो जाता है कि वह गणितीय परिणाम देने वाला हो जाता है।"


शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रौद्योगिकी चित्रों के साथ कंप्यूटर पर काम करने जैसी प्रक्रियाओं को गति प्रदान कर सकता है। यह शोधपत्र `साइंस` नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।


एंगटा ने बताया कि यह प्रौद्योगिकी जटिल गणनाओं में भी सहायक हो सकता है। भविष्य में मेटमटीरियल्स का उपयोग एक से अधिक गणितीय अवकलनों के लिए किया जा सकता है।


अध्ययन में कहा गया है कि कंप्यूटर या मोबाइल में चित्रों को दिखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तरल अणुओं की तकनीकी पर ही मेटामटीरियल्स की कार्य पद्धति आधारित है। (एजेंसी) sabhar : http://zeenews.india.com/

न्यूयार्क : कंप्यूटर की तकनीक वाले इस युग में चीजें नित सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होती जा रही हैं, 

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अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत

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 । ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक ईजाद की है, जिससे दांत की सड़न के बाद ड्रिलिंग और फीलिंग जैसे झमेलों से छुटकारा मिल सकता है

 अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत

अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत


लंदन। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक ईजाद की है, जिससे दांत की सड़न के बाद ड्रिलिंग और फीलिंग जैसे झमेलों से छुटकारा मिल सकता है। हर साल दुनियाभर में करीब 2.3 बिलियन लोगों को दांतों की समस्या से जूझना पड़ता है। 

 

ब्रिटिश रिसर्चरों ने एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया है, जिससे सड़े हुए कैविटी वाले दांत अब खुद-बखुद रिपेयर हो जाएंगे। यह शोध लंदन के किंग्स कॉलेज में किया गया, जहां इस नेचरल रिपेयर के लिए इलेक्ट्रिकल करंट का इस्तेमाल किया गया।

 

इस ट्रीटमेंट की खोज करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो यह अनोखा ट्रीटमेंट तीन वर्षों के भीतर आम लोगों तक पहुंच जाएगा। इस ट्रीटमेंट को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले स्टेप में दांत के बाहरी लेवल इनामेल पर मौजूद सडऩ को हटाया जाता है। दूसरे स्टेप में डैमेज दांत के भीतरी हिस्से में हल्के से इलेक्ट्रिक करंट की मदद से मिनरल डाल दिया जाता है। 

 

दर्द से मिलेगा छुटकारा

 

यह मौजूदा प्रॉसेस की तरह तकलीफदेह नहीं है, जिसमें कैविटी भरने से पहले दांत के ऊपर इंजेक्शन लगाया जाता और फिर क्लीनिंग प्रॉसेस में भी दर्द से जूझना पड़ता है। नई डिवाइस में न्यूनतम करंट जैसी सुविधा है। ड्रिल करने की जरूरत नहीं पड़ती है। दांतों के अंदर कैल्शियम और फॉस्फेट मिनरल डाल दिया जाता है, जो नैचुरल तरीके से दांत को रिपेयर करने में मदद करता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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मंगलवार, 18 जुलाई 2023

2023 में शीर्ष एसएमबी प्रौद्योगिकी रुझान

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 एसएमबी उन आईटी समाधानों में निवेश करेंगे जो नवाचार को बढ़ावा देते हैं; और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने से बिक्री चैनल बदल जाएंगे।"

कोविड-19 ने छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (एसएमबी) के आईटी-संबंधित दृष्टिकोण और खरीद व्यवहार को प्रभावित किया है। एनालिसिस मेसन एसएमबी पारिस्थितिकी तंत्र को ट्रैक करना जारी रखता है और यहां 2023 में एसएमबी प्रौद्योगिकी रुझानों के लिए हमारी शीर्ष भविष्यवाणियां हैं। विक्रेता और ऑपरेटर अपनी एसएमबी रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन और परिष्कृत करने में मदद के लिए इनका उपयोग कर सकते हैं।

प्रारंभिक अपनाने वाले' एसएमबी आईटी खर्च को बढ़ाएंगे

जैसे-जैसे एसएमबी अपनी डिजिटल परिवर्तन पहलों में तेजी ला रहे हैं, विशेष रूप से महामारी के बाद के रुझानों से प्रेरित, 'शुरुआती अपनाने वालों' का वर्ग दुनिया भर में 145 मिलियन एसएमबी के लगभग 10% से बढ़कर लगभग 15% होने की उम्मीद है। ये वे एसएमबी हैं जिन्होंने आम तौर पर आधुनिक तकनीकों को अपनाया है और नई सुविधाओं और उत्पाद सेटों का परीक्षण किया है और परिणामस्वरूप, आईटी पर औसत से अधिक खर्च किया है।


बढ़ती ऊर्जा लागत एसएमबी के आईटी खर्च निर्णयों को प्रभावित करेगी

यूरोपीय आयोग और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण छोटे व्यवसाय कितने कमजोर हैं। एसएमबी ऊर्जा दक्षता बढ़ाना चाहेंगे और लंबी अवधि में अधिक टिकाऊ विकल्प ढूंढना चाहेंगे। इससे उन्हें IoT-संबंधित समाधान, जैसे ऊर्जा उपयोग ऐप्स और स्मार्ट मीटर खरीदने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, एसएमबी अपने बजट पर बेहतर नियंत्रण रखना चाहेंगे और वित्त और व्यय प्रबंधन अनुप्रयोगों पर खर्च बढ़ा सकते हैं।


पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) पहल एसएमबी के लिए प्राथमिकता बन जाएंगी

ईएसजी पहलों के बारे में एसएमबी की जागरूकता और प्राथमिकता बढ़ती रहेगी, जिससे आईटी निर्णय लेने पर असर पड़ेगा।हमारे हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया भर में 24% एसएमबी आंतरिक ईएसजी पहल शुरू करने की योजना बना रहे हैं और 46% स्थापित ईएसजी नीतियों वाले विक्रेताओं से खरीदारी करने की अधिक संभावना रखते हैं।. ऑपरेटर और आईटी प्रदाता जो व्यवसायों को ईएसजी नीतियां स्थापित करने में मदद करते हैं, वे पूंजी लगाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।


एसएमबी किसके साथ खर्च कर रहे हैं?

एसएमबी नए 'एंटरप्राइज़-लाइट' खाते हैं

दुनिया भर में एसएमबी द्वारा 2023 में आईटी पर 1.45 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने की उम्मीद है।हमारे सर्वेक्षण के अनुसार, 37% एसएमबी चैनल पार्टनर बदलने की योजना बना रहे हैं. जैसे-जैसे एसएमबी चालू समर्थन और सेवा की तलाश में चैनल साझेदारों को बदलना जारी रखते हैं, वे ऐसे साझेदारों की ओर पलायन कर रहे हैं जो 'एंटरप्राइज़-लाइट' अनुभव प्रदान करते हैं। परंपरागत रूप से, 500 से अधिक कर्मचारियों वाले मध्यम आकार के व्यवसायों को विक्रेताओं द्वारा एंटरप्राइज़-लाइट के रूप में माना जाता है, लेकिन छोटे व्यवसायों की बदलती तकनीक और व्यावसायिक ज़रूरतों का तात्पर्य है कि सभी एसएमबी पूर्ण ग्राहक जीवनचक्र प्रबंधन की अपेक्षा करते हैं जैसे कि पूर्व-बिक्री, ऑनबोर्डिंग, खाता प्रबंधन, परिभाषित टचप्वाइंट , संचार चैनल, आदि।


एसएमबी आईटी प्रबंधन से अधिक के लिए प्रबंधित सेवा प्रदाताओं (एमएसपी) की ओर देखेंगे

एसएमबी तेजी से जटिल होते एसएमबी सॉफ्टवेयर स्टैक को प्रबंधित करने के साथ-साथ डिजिटल पहल को आगे बढ़ाने के लिए एमएसपी से शुरू से अंत तक समर्थन मांगेंगे। एमएसपी-केंद्रित सॉफ़्टवेयर विक्रेता एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म पेशकश के हिस्से के रूप में समाधानों की एक विस्तृत श्रृंखला में निवेश कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, एमएसपी के माध्यम से एसएमबी का आईटी खर्च साल-दर-साल 11% बढ़कर 2022 में USD279 बिलियन से बढ़कर 2023 में USD311 बिलियन हो जाने की उम्मीद है।


एसएमबी ऑपरेटरों के आईटी समाधानों (संचार को छोड़कर) पर 66 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च करेंगे।

एसएमबी तेजी से आईटी सलाह, समर्थन और सेवाओं के लिए दूरसंचार प्रदाताओं की ओर देखेंगे।हमारे सर्वेक्षण के अनुसार, 80% एसएमबी ऑपरेटरों से आईटी सेवाएं लेने पर विचार करेंगे. ऑपरेटर एसएमबी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं (उदाहरण के लिए, बीटी की लघु व्यवसाय सहायता योजना और वोडाफोन का वी-हब प्लेटफॉर्म) और लक्षित आईटी सेवा बंडल बना रहे हैं। सॉफ्टवेयर/सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी से ऑपरेटरों को व्यापक एसएमबी बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी।


एसएमबी किस पर खर्च कर रहे हैं?

पीसी और डिवाइस-ए-ए-सर्विस (पीसीडीएएएस) मॉडल डिवाइस खरीद से पूरी तरह से एकीकृत आईटी अनुभव पर ध्यान केंद्रित करेंगे

हमारे सर्वेक्षण के अनुसार, 40% एसएमबी कम से कम आंशिक रूप से घर से काम करना जारी रखेंगे. हार्डवेयर खरीद और ब्रेक एंड फिक्स पर ध्यान केंद्रित करने वाली लीगेसी PCDaaS पेशकशें अब पर्याप्त नहीं होंगी। एसएमबी तेजी से एक समग्र अनुभव को महत्व देंगे जिसमें तैनाती पर सेवाएं, डेस्कटॉप समर्थन, पुनर्प्राप्ति, सुरक्षा और उनके बिखरे हुए कार्यबल के लिए प्रबंधित सेवाएं शामिल हैं।


आईटी संसाधन दक्षता को बढ़ाने के लिए एसएमबी द्वारा प्लेटफॉर्म-ए-ए-सर्विस (PaaS) समाधानों को अपनाने से वृद्धि होगी

PaaS समाधान एसएमबी को महंगे आईटी संसाधनों को समर्पित किए बिना अपने संचालन की योजना बनाने और निष्पादित करने में लचीलापन देते हैं। एसएमबी के बीच बिजनेस इंटेलिजेंस (बीआई) और एआई-संचालित अनुप्रयोगों जैसे उन्नत एनालिटिक्स टूल के बढ़ते उपयोग से विशेष रूप से शुरुआती अपनाने वालों के बीच PaaS समाधान पर खर्च को बढ़ावा मिलेगा। PaaS पर SMBs का खर्च साल-दर-साल 18% बढ़ने की उम्मीद है, जो 2022 में USD3.4 बिलियन से बढ़कर 2023 में USD4.0 बिलियन हो जाएगा।


साइबर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी

भू-राजनीतिक मुद्दे और कनेक्टेड उपकरणों की बढ़ती संख्या सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाएगी और साइबर-सुरक्षा खर्च 2022 में USD69 बिलियन से बढ़कर 2023 में USD77 बिलियन हो जाएगी। सुरक्षा प्रौद्योगिकी अपनाने से निम्नलिखित समाधानों पर खर्च को बढ़ावा मिलेगा: हार्डवेयर-आधारित प्रमाणीकरण, विस्तारित पहचान और प्रतिक्रिया , क्लाउड वर्कलोड सुरक्षा, परिचालन प्रौद्योगिकी प्रणाली सुरक्षा, एआई/एमएल द्वारा संचालित सुरक्षा समाधान और प्रबंधित सुरक्षा। 


सॉफ्टवेयर-ए-ए-सर्विस (सास) समाधानों पर एसएमबी खर्च में तेजी से वृद्धि का नेतृत्व बीआई, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) और लाइन-ऑफ-बिजनेस सॉफ्टवेयर द्वारा किया जाएगा।

एसएमबी दक्षता बढ़ाने और डेटा उपयोग में सुधार के लिए संगठन के भीतर विभिन्न कार्यों को अनुकूलित और स्वचालित करने की कोशिश कर रहे हैं। परिणामस्वरूप बीआई, ईआरपी और लाइन-ऑफ-बिजनेस सॉफ्टवेयर जैसे इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, 3डी डिजाइन और आईटी निगरानी समाधान पर खर्च तेजी से बढ़ेगा। इन समाधानों पर खर्च 2022 में USD44 बिलियन से बढ़कर 2023 तक USD54 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है, जो साल-दर-साल 22% की वृद्धि दर्शाता है।



Sabhar https://www.analysysmason.com


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2023 के लिए शीर्ष 18 नई प्रौद्योगिकी रुझान

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प्रौद्योगिकी आज तीव्र गति से विकसित हो रही है, तेजी से परिवर्तन और प्रगति को सक्षम कर रही है,  विषयसूची

शीर्ष नई प्रौद्योगिकी रुझान1. कंप्यूटिंग शक्ति 2. स्मार्ट डिवाइस 3. डेटाफिकेशन 4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंगऔर देखें

प्रौद्योगिकी आज तीव्र गति से विकसित हो रही है, तेजी से परिवर्तन और प्रगति को सक्षम कर रही है, जिससे परिवर्तन की दर में तेजी आ रही है। हालाँकि, यह केवल प्रौद्योगिकी रुझान और उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ ही नहीं हैं जो विकसित हो रही हैं, इस वर्ष COVID-19 के प्रकोप के कारण बहुत कुछ बदल गया है, जिससे आईटी पेशेवरों को एहसास हुआ कि कल संपर्क रहित दुनिया में उनकी भूमिका समान नहीं रहेगी। और 2023-24 में एक आईटी पेशेवर लगातार सीखता रहेगा, सीखता रहेगा, और पुनः सीखता रहेगाशीर्ष नई प्रौद्योगिकी रुझान (इच्छा से नहीं तो आवश्यकता से)।


प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और मशीन सीखने की प्रगति के साथ 2023 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अधिक प्रचलित हो जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें बेहतर ढंग से समझ सकता है और इस तकनीक का उपयोग करके अधिक जटिल कार्य कर सकता है। ऐसा अनुमान है कि 5G भविष्य में हमारे जीने और काम करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

शीर्ष नई प्रौद्योगिकी रुझान

संगणन शक्ति

होशियार उपकरण

डेटाफिकेशन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

विस्तारित वास्तविकता

डिजिटल ट्रस्ट

3 डी प्रिंटिग

जीनोमिक्स

नई ऊर्जा समाधान

रोबोटिक प्रक्रिया स्वचालन (आरपीए)

एज कंप्यूटिंग

क्वांटम कम्प्यूटिंग

आभासी वास्तविकता और संवर्धित वास्तविकता

ब्लॉकचेन

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)

5जी

साइबर सुरक्षा

1. कंप्यूटिंग शक्ति 

कंप्यूटिंग शक्ति ने पहले ही डिजिटल युग में अपना स्थान स्थापित कर लिया है, लगभग हर उपकरण और उपकरण कम्प्यूटरीकृत हो गए हैं। और यह यहां और भी अधिक है क्योंकि डेटा विज्ञान विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि अभी हम जिस कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं वह आने वाले वर्षों में बेहतरी के लिए विकसित होगा। वहीं, हमारे पास पहले से ही 5G है; हमारे हाथों और हमारे आस-पास के उपकरणों में अधिक शक्ति के साथ 6जी के युग के लिए तैयार हो जाइए। इससे भी बेहतर, कंप्यूटिंग शक्ति उद्योग में अधिक तकनीकी नौकरियां पैदा कर रही है लेकिन इसे हासिल करने के लिए उम्मीदवारों को विशेष योग्यता की आवश्यकता होगी। डेटा साइंस से लेकर रोबोटिक्स और आईटी प्रबंधन तक, यह क्षेत्र हर देश में रोजगार के सबसे बड़े प्रतिशत को शक्ति प्रदान करेगा। हमारे उपकरणों को जितनी अधिक कंप्यूटिंग की आवश्यकता होगी, उतने ही अधिक तकनीशियन, आईटी टीमें, संबंध प्रबंधक और ग्राहक देखभाल अर्थव्यवस्था फलेगी-फूलेगी।


इस क्षेत्र के अंतर्गत एक आवश्यक शाखा जिसे आप आज सीख सकते हैं वह है आरपीए, यानी रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन । सिम्पलीलर्न में, आरपीए कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर के बारे में है जो आपको आईटी उद्योग में उच्च-भुगतान वाली भूमिका के लिए प्रशिक्षित कर सकता है। यहां शीर्ष नौकरियां हैं जिन्हें आप आरपीए के बाद लक्षित कर सकते हैं: 


डेटा वैज्ञानिक

एआई इंजीनियर

रोबोटिक्स शोधकर्ता

एआई वास्तुकार

रोबोटिक्स डिजाइनर

2. स्मार्ट डिवाइस 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी दुनिया को स्मार्ट और स्मूथ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सिर्फ इंसानों का अनुकरण नहीं है, बल्कि हमारे जीवन को परेशानी मुक्त और सरल बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास भी कर रहा है। ये स्मार्ट डिवाइस 2023 और उससे भी आगे रहने के लिए हैं, क्योंकि डेटा वैज्ञानिक एआई होम रोबोट, उपकरण, कार्य उपकरण, पहनने योग्य और बहुत कुछ पर काम कर रहे हैं! हमारे कामकाजी जीवन को अधिक प्रबंधनीय बनाने के लिए लगभग हर काम में स्मार्ट सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों की आवश्यकता होती है। स्मार्ट डिवाइस आईटी उद्योग में एक और वृद्धि है जिसकी उच्च आवश्यकता और मांग है क्योंकि अधिक कंपनियां डिजिटल स्पेस में बदल रही हैं। आजकल लगभग हर उच्च-स्तरीय नौकरी को आगे बढ़ने के लिए आईटी और स्वचालन में अच्छी दक्षता की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि सिम्पलीलर्न का आरपीए पाठ्यक्रम आपको अपने करियर में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए इन कौशलों में महारत हासिल करने में मदद कर सकता है, चाहे वह आईटी, मार्केटिंग या प्रबंधन में हो।


आईटी प्रबंधक

डेटा वैज्ञानिक

उत्पाद परीक्षक

उत्पाद प्रबंधक

स्वचालन इंजीनियर

आईटी शोधकर्ता



इसका आपके लिए क्या मतलब है? इसका मतलब है उभरती प्रौद्योगिकियों और नवीनतम प्रौद्योगिकी रुझानों के साथ अद्यतन रहना। और इसका अर्थ यह जानने के लिए भविष्य पर नज़र रखना है कि कल सुरक्षित नौकरी पाने के लिए आपको कौन से कौशल जानने की आवश्यकता होगी और यह भी सीखें कि वहां कैसे पहुंचा जाए। विश्वव्यापी महामारी के सामने सभी नतमस्तक हैं, वैश्विक आईटी आबादी का अधिकांश हिस्सा घर पर बैठकर काम कर रहा है। और यदि आप अपना अधिकांश समय घर पर बिताना चाहते हैं, तो यहां शीर्ष 18 उभरते प्रौद्योगिकी रुझान हैं जिन पर आपको नजर रखनी चाहिए और 2023 में प्रयास करना चाहिए, और संभवतः उन नौकरियों में से एक को सुरक्षित करना चाहिए जो इन नए प्रौद्योगिकी रुझानों द्वारा बनाई जाएंगी। . विभिन्न रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का अन्वेषण करें ।


गुणवत्तापूर्ण आईआईटी पाठ्यक्रम खोज रहे हैं ? सिम्पलीलर्न आपको सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए विशेषज्ञ-आधारित कार्यक्रम प्रदान करता है।


यहां प्रौद्योगिकी के भविष्य और उन रुझानों पर एक झलक दी गई है, जिन्हें आपको 2023 में अपनाना चाहिए।sabhar https://www.simplilearn.com


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सोमवार, 17 जुलाई 2023

स्विच बदलते हैं चेहरे की बनावट

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 वैज्ञानिकों ने अलग-अलग लोगों के चेहरों में अंतर पाए जाने के कारणों को समझने में आरंभिक सफलता प्राप्त कर ली है.

चूहों पर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों को डीएनए में मौजूद हज़ारों ऐसे छोटे-छोटे हिस्सों का पता चला है जो चेहरे की बनावट के विकास में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.


शोधपत्रिका साइंस में छपे इस शोध से चेहरे में आने वाली जन्मजात विकृतियों का कारण समझने में भी मदद मिल सकती है.इस शोध में यह भी पता चला कि आनुवांशिक सामग्री में परिवर्तन चेहरे की बनावट में बहुत बारीक़ अंतर ला सकते हैं.

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह प्रयोग जानवरों पर किया गया है, लेकिन पूरी संभावना है कि मनुष्य के चेहरे का विकास भी इसी तरह होता है.

कैलीफोर्निया स्थित लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी के ज्वाइंट जीनोम इंस्टीट्यूट के प्रोफ़ेसर एक्सेल वाइसेल ने बीबीसी से कहा, "हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि चेहरे की बनावट के निर्माण के निर्देश मनुष्यों के डीएनए में कैसे मौजूद होते हैं. इन डीएनए में ही कहीं न कहीं हमारे चेहरे की बनावट का राज़ छिपा है."स्विच बदलते हैं चेहरे की बनावट

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मानव क्लोनिंग की ओर एक और कदम

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मानव क्लोनिंग की ओर एक और कदम अमरीकी वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने मानव क्लोनिंग विधि का इस्तेमाल कर एक शुरुआती भ्रूण तैयार किया है जिसे चिकित्सा क्षेत्र में "एक बड़ी कामयाबी" माना जा रहा है.


क्लोन किए गए भ्रूण को स्टेम सेल के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल किया गया जिससे हृदय की नई मांसपेशी, हड्डी, मस्तिष्क के ऊतक और शरीर की अन्य कोशिकाएं तैयार की जा सकती हैं.


'सेल' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में उन्हीं विधियों को प्रयोग में लाया गया जिनसे 1996 में ब्रिटेन में पहली क्लोन भेड़ डॉली तैयार की गई थी.


हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टेम सेल्स के लिए अन्य स्रोत भी हो सकते हैं जो अधिक आसान, सस्ते और कम विवादित हों.


वहीं आलोचकों ने मानवीय भ्रूणों पर प्रयोग को अनैतिक बताते हुए इस पर प्रतिबंध की मांग की है.


स्टेम सेल से उम्मीदें

स्टेम सेल पर चिकित्सा जगत की बड़ी उम्मीदें टिकी हैं. दरअसल नए ऊतक बनाने में सक्षम होने पर दिल के दौरे से होने वाली क्षति को ठीक किया जा सकता है या फिर क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डी को दुरुस्त किया जा सकता है.


ऐसे कुछ प्रयोग पहले से हो रहे हैं जिनमें दान किए गए भ्रूण से स्टेम सेल लेकर उनके जरिए लोगों की दृष्ठि को बहाल किया जा रहा है.


हालांकि दान की हुए ये कोशिकाएं मरीज के शरीर से मिलती नहीं हैं, और इसीलिए शरीर के द्वारा उन्हें खारिज कर दिया जाता है. क्लोनिंग से ये समस्या दूर हो जाती है.

1996 में क्लोनिंग से पहली भेड डॉली को तैयार किया गया था


1996 में जब क्लोनिंग के जरिए पहले स्तनधारी जीव के रूप में डॉली का जन्म हुआ, तभी से सोमेटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर एक जानी मानी तकनीक है और इसका इस्तेमाल भी होता है.


एक वयस्क की त्वचा कोशिकाएं लेकर आनुवांशिक सूचना के साथ उसे दानदाता के ऐसे अंडाणु में रखा गया, जिससे उसके डीएनए को अलग कर दिया गया था. इसके बाद बिजली का इस्तेमाल कर अंडाणु को एक भ्रूण में विकसित होने के लिए प्रेरित किया गया.


गुणवत्ता पर सवाल

फिर भी, इंसानों में डॉली जैसे चमत्कार को साकार करने के लिए वैज्ञानिकों ने खूब संघर्ष किया है. दरअसल अंडाणु विभाजित होना तो शुरू हो जाता है लेआलोचक नैतिकता के आधार पर मानव क्लोनिंग का विरोध करते हैं


दक्षिण कोरिया के एक वैज्ञानिक ह्वांग वू सुक ने क्लोन किए गए मानव भ्रूण से स्टेम सेल बनाने का दावा किया था लेकिन बाद में वो सही नहीं पाया गया.


अब ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने भ्रूण को ब्लास्टोसिस्ट यानी लगभग 150 कोशिकाओं के चरण तक विकसित किया है जिससे भ्रूणीय स्टेम सेल्स तैयार की जा सकती हैं.


यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रिजेनेरेटिव मेडिसन के प्रोफेसर इस प्रयोग से उत्साहित हैं.


वो कहते हैं, “उन्होंने ठीक वैसा ही किया है जैसा राइट बंधुओं ने किया था. राइट बंधुओं ने उड़ान भरी थी और वो भ्रूणीय स्टेम सेल बनाने में कामयाब रहे हैं.”


हालांकि भ्रूणीय स्टेम सेल के मुकाबले इस विधि से तैयार स्टेम सेल की कोशिकाओं की गुणवत्ता को लेकर अभी कई तरह के सवाल अनुत्तरित हैं.किन 6 से 12 कोशिकाओं के चरण से आगे नहीं बढ़ता है.

आलोचक नैतिकता के आधार पर मानव क्लोनिंग का विरोध करते हैं


दक्षिण कोरिया के एक वैज्ञानिक ह्वांग वू सुक ने क्लोन किए गए मानव भ्रूण से स्टेम सेल बनाने का दावा किया था लेकिन बाद में वो सही नहीं पाया गया.


अब ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने भ्रूण को ब्लास्टोसिस्ट यानी लगभग 150 कोशिकाओं के चरण तक विकसित किया है जिससे भ्रूणीय स्टेम सेल्स तैयार की जा सकती हैं.


यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रिजेनेरेटिव मेडिसन के प्रोफेसर इस प्रयोग से उत्साहित हैं.


वो कहते हैं, “उन्होंने ठीक वैसा ही किया है जैसा राइट बंधुओं ने किया था. राइट बंधुओं ने उड़ान भरी थी और वो भ्रूणीय स्टेम सेल बनाने में कामयाब रहे हैं.”


हालांकि भ्रूणीय स्टेम सेल के मुकाबले इस विधि से तैयार स्टेम सेल की कोशिकाओं की गुणवत्ता को लेकर अभी कई तरह के सवाल अनुत्तरित हैं.आलोचक नैतिकता के आधार पर मानव क्लोनिंग का विरोध करते हैं दक्षिण कोरिया के एक वैज्ञानिक ह्वांग वू सुक ने क्लोन किए गए मानव भ्रूण से स्टेम सेल बनाने का दावा किया था लेकिन बाद में वो सही नहीं पाया गया. अब ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं की एक टीम ने भ्रूण को ब्लास्टोसिस्ट यानी लगभग 150 कोशिकाओं के चरण तक विकसित किया है जिससे भ्रूणीय स्टेम सेल्स तैयार की जा सकती हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रिजेनेरेटिव मेडिसन के प्रोफेसर इस प्रयोग से उत्साहित हैं. वो कहते हैं, “उन्होंने ठीक वैसा ही किया है जैसा राइट बंधुओं ने किया था. राइट बंधुओं ने उड़ान भरी थी और वो भ्रूणीय स्टेम सेल बनाने में कामयाब रहे हैं.” हालांकि भ्रूणीय स्टेम सेल के मुकाबले इस विधि से तैयार स्टेम सेल की कोशिकाओं की गुणवत्ता को लेकर अभी कई तरह के सवाल अनुत्तरित हैं.

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चैटबॉट के लिए 90 फ़ीसदी स्टाफ़ की छंटनी, फ़ैसले पर सवालों में घिरे भारतीय कंपनी के सीईओ

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वोडाफोन 11,000 कर्मचारियों को दिखाएगी बाहर का रास्ता, कंपनी के सीईओ ने बताया प्लान 


रोज़गार के संकट वाले माहौल में जब किसी कंपनी के सीईओ फर्म के 90 फ़ीसदी स्टाफ़ को नौकरी से निकाल दें और उसकी जगह पर एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस चैटबॉट को काम पर लगा दें तो प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है.


जाहिर है कि इसकी आलोचना होगी और ये हो रही है.


भारत की स्टार्टअप दुनिया में इन दिनों 'दुकान' के फाउंडर सुमित शाह इसलिए सुर्खियों में हैं.


इतना ही नहीं सुमित शाह ने तो ट्विटर पर ये एलान भी कर दिया कि चैटबॉट से उनके ग्राहकों को मिलने वाले जवाब जल्दी मिलने लगे हैं और इसमें वक़्त भी पहले से कम लग रहा है.

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

ये घटना ऐसे समय में हुई है जब इस बात को लेकर बहस हो रही है कि लोगों की नौकरियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की वजह से खतरे में हैं, ख़ासकर सर्विस इंडस्ट्री में.


सुमित शाह ने कई ट्वीट्स किए हैं जिसमें उन्होंने चैटबॉट इस्तेमाल करने के कंपनी के फ़ैसले के बारे में लिखा है.


हालांकि उन्होंने छंटनी के फ़ैसले को 'मुश्किल' बताया और कहा कि ये 'ज़रूरी' था.


उन्होंने लिखा है, "अर्थव्यवस्था की हालत को देखते हुए स्टार्ट अप्स यूनीकॉर्न बनने की अपनी चाहत को लेकर मुनाफे पर अपनी प्राथमिकता तय कर रहे हैं और हम भी ऐसा कर रहे हैं."

फौरन संतुष्टि'

सुमित शाह ने ये सफ़ाई भी दी है कि कस्टमर सपोर्ट के मोर्चे पर उनकी कंपनी लंबे समय से संघर्ष कर रही थी और वे इसे दुरुस्त करना चाह रहे थे.


कस्टमर सपोर्ट के लिए बॉट और एआई प्लेटफॉर्म का निर्माण इतने कम समय कैसे किया गया, सुमित शाह ने इसकी जानकारी भी दी है.


उन्होंने बताया कि इस फैसले के बाद दुकान के ग्राहकों के पास अपना एआई असिस्टेंट होगा.


उनका कहना है कि चैटबॉट सभी तरह के सवालों के जवाब सटीक और जल्दी से देता है.


सुमित शाह ने लिखा है, "फौरन संतुष्टि के इस जमाने में कोई कारोबार शुरू करना अब बड़ी बात नहीं रह गई है. अगर आपके पास सही आइडिया हो, सही टीम हो, कोई भी अपने कारोबारी सपने को हकीकत में बदल सकता है." Sabhar BBC.COM चैटबॉट के लिए 90 फ़ीसदी स्टाफ़ की छंटनी, फ़ैसले पर सवालों में घिरे भारतीय कंपनी के सीईओ

यूनीकॉर्न कंपनी एक अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाले स्टार्ट अप्स को कहा जाता है.

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सीखने और याददाश्त के पीछे के जीन 650 मिलियन वर्ष पुराने हैं

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 कैंब्रियन विस्फोट से पहले , जिसे जैविक बिग बैंग भी कहा जाता है, पृथ्वी के महासागरों में केवल आदिम जीवन रूप थे। इस अवधि के दौरान जीवन का बड़े पैमाने पर प्रसार हुआ, जो लगभग 570 से 530 मिलियन वर्ष पहले हुआ था। अधिकांश प्रमुख जानवरों की वंशावली की शुरुआत इसी दौरान हुई और तब से उनका विकास हो रहा है। वैज्ञानिकों ने अब यह निर्धारित किया है कि सीखने, स्मृति और आक्रामकता सहित अन्य जटिल व्यवहारों के लिए जिम्मेदार जीन की उत्पत्ति इससे भी पहले, लगभग 650 मिलियन वर्ष पहले हुई थी। नेचर कम्युनिकेशंस में निष्कर्षों की सूचना दी गई है ।

तंत्रिका तंत्र में आवश्यक संदेश भेजने के लिए न्यूरोट्रांसमीटर महत्वपूर्ण हैं। इनमें डोपामाइन, सेरोटोनिन और एड्रेनालाईन/नॉरएड्रेनालाईन (जिसे एपिनेफ्रिन/नॉरएपिनेफ्रिन भी कहा जाता है) जैसे मोनोमाइन रसायन शामिल हैं, जो खाने और सोने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं के साथ-साथ सीखने और यादें बनाने में शामिल होते हैं।


इस अध्ययन ने सुझाव दिया है कि मोनोअमाइन को उत्पन्न करने, बांधने और प्रतिक्रिया करने के लिए जिन जीनों की आवश्यकता होती है, वे बिलाटेरियन, जीवों में उत्पन्न हुए हैं, जिनमें बाएं-दाएं समरूपता है, और इन जीनों ने कैंब्रियन विस्फोट के दौरान जानवरों के विविधीकरण में भूमिका निभाई हो सकती है। इन जीनों ने न्यूरोनल सर्किट को लचीलापन प्रदान किया होगा जिससे जानवरों को अपने पर्यावरण के साथ बातचीत करने में मदद मिली।


कम्प्यूटेशनल तरीकों के साथ, शोधकर्ताओं ने उन जीनों के विकास का पुनर्निर्माण किया जो मोनोमाइन उत्पादन, गिरावट, रिसेप्शन और उपयोग के लिए आवश्यक थे। वे बिलेटेरियन स्टेम समूह में वापस आते हैं। लीसेस्टर विश्वविद्यालय के संबंधित अध्ययन लेखक डॉ. रॉबर्टो फ्यूडा ने कहा, "इस खोज का जटिल व्यवहारों की विकासवादी उत्पत्ति पर गहरा प्रभाव है, जैसे कि हम मनुष्यों और अन्य जानवरों में पाए जाने वाले मोनोअमाइन द्वारा नियंत्रित होते हैं।"

यह खोज नए महत्वपूर्ण अनुसंधान के रास्ते खोलेगी जो जटिल व्यवहारों की उत्पत्ति को स्पष्ट करेगी और क्या वही न्यूरॉन्स इनाम, लत, आक्रामकता, भोजन और नींद को नियंत्रित करते हैं।"


अध्ययन लेखकों ने स्वीकार किया कि मोनोअमाइन गैर-बिलेटेरियन मेटाज़ोअन में भी पाए जा सकते हैं, और प्रस्तावित किया कि एंजाइम ऐसे जानवरों में उन अणुओं को उत्पन्न करने के लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर और कैनोर्हाडाइटिस एलिगेंस में, सुगंधित अमीनो एसिड ऑर्थोलॉग सेरोटोनिन का उत्पादन करते हैं।


स्रोत: लीसेस्टर विश्वविद्यालय , नेचर कम्युनिकेशंस

सीखने और याददाश्त के पीछे के जीन 650 मिलियन वर्ष पुराने हैं

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