Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Comments

You might like

Subscribe Us

बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

स्त्री पुरुष कि भीतरी ऊर्जा और भक्ति योग

0

 स्त्री पुरुष कि भीतरी ऊर्जा और भक्ति योग 

*पुरुष शरीर के भीतर जो ऊर्जा केन्द्र है वह लिंग से स्त्री है।

स्त्री शरीर के भीतरी जो केंद्र मे ऊर्जा हैं वह लिंग से पुरुष है।


स्त्री कि भीतर चैतन्य ऊर्जा, शिव सूक्ष्म ऊर्जा हैं ये वास्तविक चेतन उर्जा हैं ।


पुरुष के भीतर जो ऊर्जा  है वह जड़ प्रधान है इसलिए वह भीतरी तल पर भारी और जड़ उर्जा हैं इसलिए जद स्थूल होने से ये नीचे मूलाधार में स्थित हैं।


स्त्री में पुरूष ऊर्जा है शिव है वह रूपांतरण उर्जा हैं उसमें सात्विकता है  वह सत गुण भार में हल्की  सरल उर्जा है ।


पुरुष के भीतर केंद्र मे उस मूलाधार में जड़ उर्जा हैं जो AC  विद्युत की तरह खतरनाक है, ये विस्फोट झटका वाली उर्जा पुरुष के भीरत है।


जो स्त्री शरीर कि परिधि है बाहरी रंग रूप सौंदर्य है वह जड़ ऊर्जा का प्रतिक है जो पुरुष की कुंडलिनी मे मूलाधार में स्थित है, यही पुरुष का मूल अधार हैं।


स्त्री के भीतर पुरुष यानि चैतन्य ऊर्जा से उसकी वाणी उसकी चाल चलन नृत्य कूदना शरीर का मोड़ना उसके मुख्य कारण ये कि पुरूष ऊर्जा का उपयोग है ।जो सकारात्मक है , यह परमाणु रचना का प्रोटॉन जैसी ऊर्जा है।


पुरूष की भीतर जो स्त्री जड़ ऊर्जा है वह नकारात्म है। जिसे परमाणु का इलेक्ट्रॉन आवेश कहते है।जैसे पुरुष मानसिक रूप से स्थिर नहीं  है वैसे ही परमाणु मे इलेक्ट्रॉन गति शील होते हैं जो परमाणु की परिधि पर होते है।


योग धर्म संन्यास आध्यात्मिक जो भक्ति योग मार्ग हैं, यह स्त्री प्रधान है ।तब जो पुरुष पिछले जन्म में सेक्स स्त्री काम जड़ साधन के गहन अनुभवी होगा उसे काम का बोध होगा वह पुरुष सिर्फ उस जन्म में भक्ति योग में सफल होगा या समस्त स्त्री जाति भक्ति योग सफल हो सकती है ।


भक्ति जिसका हृदय चक्र  में उर्जा पूँहच गई है  ठहर गई है ,हृदय से स्त्रैण स्वभाव वाले पुरुष भक्ति में सफ़ल होते हैं ।


धर्म के विश्वाश श्रद्धा आस्था यह सब स्त्रैण है यही भक्ती मार्ग में शस्त्र है , तब यह डीबी भक्ति मार्ग में उपयोगी है ।


जिस  भक्ति गुण शस्त्र के माध्यम सी विश्वास श्रद्धा से धन साधन सफलता की मंदिरों में तीर्थों मे जो भीख मांगते है वह श्रद्धा आस्था नहीं है । जिस हथियार से भक्ति होती है उन्हें हथियार से संसार साधन संसार सुख की मांग में उपयोग करते है तब जायज हैं कि धर्म धंधा ढोंग बनेगा ही ।


 अतीत सनातन में किसी भी भक्त ने अपने श्रद्धा आस्था का उपयोग भीख मांगने के लिए र देते !तब कोई भक्त पैदा नहीं होता ?


जिसे भक्ति के मार्ग चाहिए वह अपना स्वभाव को अध्ययन करे, यदि स्वभाव में ममता करुणा दया समर्पण सेवा हो तो उसी भक्ति मार्ग में जरूर जाना चाहिए।


Read more

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान

0


 मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान –


मेथी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग शायद आप सभी करते हैं। लेकिन मेथी का पानी पीने के फायदे भी कम नहीं हैं,


 यह मेथी में मौजूद पोषक तत्‍वों को ग्रहण करने का यह सबसे अच्‍छा तरीका है। मेथी का पानी पीने से कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है। मेथी का पानी पीने के लाभ विशेष रूप से वजन कम करने में, रक्‍त शर्करा नियंत्रित करने में, रक्‍त चाप नियंत्रित करने में, पाचन को ठीक करने, पथरी का इलाज करने आदि में होते हैं। इस आर्टिकल में आप मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान जानेगें। आइए इन्‍हें जाने।


प्रकृति में गर्म होने के कारण मेथी के दानों का उपयोग भोजन पकाने के दौरान बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है। यहां तक की औषधीय उपयोग में भी मेथी की कम मात्रा ली जाती है। लेकिन मेथी के औषधीय गुणों की भरपूर मात्रा प्राप्‍त करने के लिए मेथी के पानी का उपयोग भी किया जाता है।


 1 कप मेथी का पानी बनाने के लिए 1 छोटा चम्‍मच मेथी पर्याप्‍त होती है। इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए साथ इस पानी को गर्म करना अतिरिक्‍त लाभ दिला सकता है। मेथी का पानी का नियमित सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है। आइए विस्‍तार से जाने मेथी का पानी पीने के लाभ क्‍या हैं।


मेथी का पानी फॉर वेट लॉस – 

मोटापा ग्रस्‍त लोगों के लिए मेथी का पानी पीने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। मेथी का पानी पीने से ऐसे लोग बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं। क्‍योंकि मोटापा कई बीमारियों को जन्‍म दे सकता है और मेथी का पानी मोटापे को कम करने में मदद कर सकता है। 


सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से चयापचय को बढ़ावा मिलता है। इसका सेवन करने से शरीर में प्राकृतिक गर्मी उत्‍पन्‍न होती है जो वजन घटाने में मदद करती है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो मेथी का पानी का नियमित सेवन शुरू कर सकते हैं।


मेथी का पानी पीने के लाभ महिलाओं के लिए – i


स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए विशेष रूप से मेथी का पानी फायदेमंद होता है। क्‍योंकि मेथी का पानी महिलाओं में दूध उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद करता है। मेथी का उपयोग शुरू से ही बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है लेकिन यह कई समस्‍याओं का प्रभावी उपचार कर सकता है।


 मेथी का पानी के फायदे स्‍तनपान कराने वाली माताओं के साथ ही गर्भवतियों के लिए भी फायदेमंद होता है। अध्‍ययनों से यह भी पता लगता है कि मेथी के औषधीय गुण और गर्म पानी गर्भावस्‍था को आसान बनाने में भी मदद करते हैं। इस तरह से मेथी का पानी का नियमित सेवन महिलाओं के लिए लाभकारी होता है।


मेथी का पानी बेनिफिट्स डायबिटीज के लिए –

नियमित मेथी के पानी का सेवन आपको मधुमेह की संभावनाओं से दूर रख सकता है। जब शरीर में रक्‍त शर्करा का स्‍तर अधिक हो जाता है तब मधुमेह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन आप इस समस्‍या से बच सकते हैं। मेथी रक्‍त शर्करा के स्‍तर को विनियमित करने में सहायक होती है। 


इसके अलावा मेथी के औषधीय गुण इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि अधिकांश स्‍वास्‍थ्‍य सलाहकारों द्वारा म‍धुमेह रोगी को मेथी के सेवन की सलाह दी जाती है। यदि आप मधुमेह के लक्षणों से बचना चाहते हैं तो मेथी के पानी का सेवन प्रारंभ कर दें। क्‍योंकि मधुमेह को केवल नियंत्रित किया जा सकता है ना कि इसे ठीक किया जा सकता है।


पाचन के लिए फायदेमंद मेथी का पानी पीना –


यदि आप भी पाचन समस्‍याओं से ग्रसित हैं तो मेथी का पानी का उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। आपकी पाचन व्‍यवस्‍था को खराब करने का प्रमुख कारण अम्‍लता है। लेकिन मेथी का पानी का सेवन कर आप अपने पाचन को ठीक कर सकते हैं।


 मेथी में अम्‍लत्‍वनाशक (antacid) गुण होते हैं। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्‍याएं होती हैं उन्‍हें नियमित रूप से मेथी का पानी पीना चाहिए। मेथी का पानी पाचन तंत्र को मजबूत करने और गैस्ट्रिटिस और सूजन आदि को कम करने में सहायक होता है। सर्दीयों के मौसम में मेथी का पानी पीना अधिक फायदेमंद होता है।


मेथी दाने का पानी पीने के फायदे किडनी के लिए 


आप मेथी के पानी का उपयोग अपने गुर्दे के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। यदि आप मेथी के पानी को गर्म करके पीते हैं तो यह और भी फायदेमंद होता है। यह शरीर में मौजूद विषाक्‍त पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है। इसके साथ ही मेथी का पानी का सेवन सुबह जल्‍दी उठने में भी सहायक होता है। आप अपने गुर्दे के कामकाज को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने के लिए मेथी के पानी का नियमित सेवन कर सकते हैं।


मेथी वाटर बेनिफिट्स फॉर स्किन – 

त्‍वचा को सुंदर और गोरा बनाने के लिए आप मेथी का पानी का सेवन कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि मेथी के फायदे पाचन को ठीक करने और विषाक्‍त पदार्थों को दूर करते हैं। ये विषाक्‍त पदार्थ ही आपकी त्‍वचा की सुंदरता को कम करने के लिए जिम्‍मेदार होते हैं।


 सुबह के समय मेथी का पानी का सेवन आपकी त्‍वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यह दोषमुक्‍त त्‍वचा प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय भी है। आप भी मेथी का पानी का उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।


मेथीदाना का पानी पीने के लाभ सूजन कम करे –

अपने एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों के कारण मेथी हमें कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाती है। मेथी का पानी का सेवन करने का एक और लाभ सूजन को कम करना है। इसका तात्पर्य यह है कि नियमित रूप से मेथी के पानी का सेवन करने से गठिया, पुरानी खांसी से गले की सूजन, ब्रोंकाइटिस, मुंह के छालों की सूजन, फोड़े आदि को ठीक करने में मदद करती है। यदि आप इस तरह की किसी भी समस्‍या से ग्रसित हैं तो मेथी के पानी के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।


मेथी का पानी पीने के फायदे हृदय स्‍वास्थ्‍य के लिए – 

दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आप मेथी के दानों का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन मेथी स्‍वाद में थोड़ी कड़वी होती है इसलिए इसका सेवन करने के बजाए मेथी के पानी का सेवन अधिक सुविधाजनक होता है। 


मेथी का पानी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। यह कोलेस्‍ट्रॉल आपकी रक्‍त वाहिकाओं में जमा हो कर रक्‍त परिसंचरण को अवरूद्ध कर सकता है। जिससे आपके हृदय के काम काज को प्रभावित किया जा सकता है। लेकिन मेथी का पानी का नियमित सेवन इस संभावना को कम करने में प्रभावी योगदान देता है।


मेथी दाना का पानी पीने के फायदे बुखार में –

मेथी के पानी का विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में से एक लाभ यह भी है कि यह शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इसके लिए आप 1 छोटे चम्‍मच मेथी के बीज लें और इसे 1 गिलास पानी में भिगों कर रात भर के लिए छोड़ दें। अगली सुबह आप इस पानी को पिएं और बचे हुए मेथी के बीजों को पीस लें। 


इससे बने पेस्‍ट को अपने माथे में लगाएं। यह शीतलन प्रभाव के कारण आपके शरीर के उच्‍च तापमान को कम करने में सहायक होता है।


मेथी का पानी पीने के नुकसान –


मेथी के पानी के उपयोग के साइड इफेक्ट्स में डायरिया, पेट फूलना और चक्कर आना शामिल है, लेकिन ये सभी अस्थायी होते हैं।


इसमें एक विशिष्ट और तेज गंध है, और कई लोगों ने बताया है कि उनके मूत्र और पसीने में गंध आती है।


जो लोग चने के लिए एलर्जी हैं वे मेथी के प्रतिकूल प्रतिक्रिया भी कर सकते हैं क्योंकि दोनों पौधों में समान प्रोटीन और एलर्जेंस होते हैं।


मेथी हाइपरथायरायडिज्म (चूहों में किये गए अध्ययन) का कारण बन सकती है, इसलिए थायराइड समस्याओं वाले लोगों को मेथी से बचना चाहिए।


चूंकि मेथी गर्भाशय संकुचन को प्रभावित करती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसे नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन स्तनपान के दौरान और बाद में यह सुरक्षित है #photographychallengechallenge #photo #photochallenge #photooftheday Rajiv dixitji official

Read more

चमत्कारिक पेय (काढा ) मधुमेह नियंत्रण उच्चरक्तचापऔर कैंसर जैसी बीमारी को भी अलविदा कहने में आपकी मदद करेगा

0

 यह चमत्कारिक पेय (काढा ) आपको आश्चर्यचकित कर देगा आपके शरीर में विभिन्न रोगों के लिए #मधुमेह नियंत्रण  #उच्चरक्तचापऔर  #कैंसर जैसी बीमारी को भी अलविदा कहने में आपकी मदद करेगा !!!!!


सामग्री जिसकी आपको आवश्यकता होगी


1..➡️ 4 तेज पत्ते


2..➡️ मुट्ठी भर सूखे हिबिस्कस फूल (जमैका फूल)


3..➡️ 6 अच्छी तरह धुले हुए अमरूद के पत्ते


4..➡️ 3 कप पानी


इस शक्तिशाली हर्बल पेय को कैसे तैयार करें


1.. एक बर्तन  पैन को स्टोव पर रखें।

2.. इसमें तेजपत्ता, गुड़हल के फूल और अमरूद के पत्ते डालें।

3.. इसमें तीन कप पानी डालें।

4.. मिश्रण को उबालें और 15 मिनट तक पकने दें।

5.. मिश्रण को छान लें और कप या कांच के बर्तन में परोसें।


इसका उपयोग कैसे करना है

इस हर्बल अर्क का एक कप लगातार 10 दिनों तक रोजाना पियें। आप यह देखकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे कि यह आपके स्वास्थ्य को कैसे बदल सकता है!


,➡️➡️➡️➡️♈ इस तरह के प्राकृतिक उपचार शक्तिशाली हैं, फिर भी दवा कंपनियाँ नहीं चाहतीं कि आप उनका इस्तेमाल करें ।

जानिए उनके बारे में.


यह हर्बल उपचार क्यों काम करता है?

➡️ #तेजपत्ता: रक्त शर्करा विनियमन और पाचन में सहायता करता है।


➡️ #हिबिस्कस फूल: रक्तचाप कम करने में मदद करें

रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।


➡️ #अमरूद के पत्ते: इंसुलिन बढ़ाते हैं

संवेदनशीलता को कम करें, सूजन को कम करें और पाचन में सुधार करें।


इस सरल किन्तु अत्यधिक प्रभावी हर्बल उपचार से अपने स्वास्थ्य की देखभाल करें - बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रकृति के पास रहे और प्राकृतिक वस्तुएं ही उपयोग करें

Sabhar


Ravinder Tomar Facebook wall

#gardening #viral #explore #everyone #everyonefollowers #everyonehighlights

Read more

हृदय का राजा अर्जुन छाल

0

 हृदय  का राजा अर्जुन छाल ।।


अर्जुन एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो विशेष रूप से हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दिल की मांसपेशियों को मजबूत करने, उन्हें टोन करने और हृदय को ऊर्जा देने के लिए एक प्रमुख औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। अर्जुन की छाल का सेवन हृदय के सभी पहलुओं का समर्थन करने और इसके स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

शरीर में आई सूजन को घटाने के लिए भी अर्जुन की छाल अच्छी मानी गई है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन घटाते हैं


अर्जुन की छाल के मुख्य फायदे:


1. हृदय को मजबूत बनाती है – अर्जुन छाल रक्त संचार को सही रखती है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ बनाए रखती है।


2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है – हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर दोनों को संतुलित करने में मददगार है।


3. कोलेस्ट्रॉल कम करती है – खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायक है।


4. दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है – अनियमित धड़कनों (Arrhythmia) को सही करने में मदद करती है।


5. ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है – मधुमेह के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।


6. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर – शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करके एंटी-एजिंग प्रभाव डालती है।


7. लिवर और किडनी के लिए लाभकारी – यह लिवर को डिटॉक्स करने और किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करती है।


8. तनाव और चिंता को कम करती है – यह एक प्राकृतिक एडेप्टोजेन है, जो मानसिक शांति देती है।


9. पाचन में सुधार – अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में फायदेमंद होती है।


10. घाव भरने में मदद करती है – त्वचा के घावों को जल्दी भरने में उपयोगी है।


अर्जुन की छाल का उपयोग कैसे करें?

आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, अर्जुन की छाल का सबसे प्रभावी उपयोग अर्जुन की छाल की चाय के रूप में होता है। 


1. अर्जुन चाय – 1 चम्मच अर्जुन की छाल पाउडर को 1 कप पानी में उबालकर दिन में 1-2 बार पिएं।


2. अर्जुन दूध – आधा चम्मच अर्जुन छाल पाउडर को 1 गिलास दूध में उबालकर सेवन करें।


3. कैप्सूल या टैबलेट – आयुर्वेदिक स्टोर्स में उपलब्ध अर्जुन कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।


सावधानियाँ:


गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


किसी भी दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है।


अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में शामिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।।।


#fbviral  #viralpost2025 #fbviral #explorepage #viralpage #science #viratkohli #quotes #memes #knowledge #trendingpost #trendingnow #picoftheday #history #facts #health #healthylifestyle #healthyliving #ayurved #viralpost2025シ #highlights2025 #everyoneシ゚ #highlightseveryone, #explorepage #viralpost2025シ #everyoneシ゚ #viralpost2025 #highlights2025 साभार Facebook 


Read more

कच्ची इमली खाने के है इतने फायदे लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

0


 इमली में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है. यह शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है. इसके रोजाना सेवन से शरीर साफ रहता है, पेट और अन्य अंगों 

कच्ची इमली खाने के है इतने फायदे लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

पाचन- इमली में प्राकृतिक फाइबर होता है जो पाचन को सुधारने में मदद करता है. ...

इम्यूनिटी- इमली में विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मददगार हैं. ...

दिल- हार्ट के मरीजों के लिए फायदेमंद है इमली का सेवन. ...

मोटापा- ...

सूजन- ...

स्किन-

6

इमली में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है. यह शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है. इसके रोजाना सेवन से शरीर साफ रहता है, पेट और अन्य अंगों की गंदगी दूर होती है 


रोजाना इमली खाने से शरीर में आता है ये बड़ा बदलाव, दूर होती हैं खतरनाक बीमारियां


इमली पुरुषों के लिए कई तरह से फ़ायदेमंद होती है. यह पुरुषों की यौन समस्याओं को दूर करने में मदद करती है. साथ ही, यह इम्यूनिटी को भी बढ़ाती है. 

इमली के फ़ायदे:

इमली में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है. यह पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करता है. 

इमली के चूर्ण का सेवन करने से लो-स्पर्म काउंट की समस्या दूर होती है. 

इमली का सेवन करने से इनफ़र्टिलिटी से बचा जा सकता है. 

इमली का सेवन करने से लिबिडो हार्मोन बढ़ता है. 

इमली का सेवन करने से फैटी लीवर की समस्या नहीं होती. 

इमली का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ती है. 

इमली में कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनका अच्‍छा असर स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है. 

इमली में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीड साभार Facebook 

Read more

वंशलोचन स्त्री प्रजाति के बाँस पेड़ों से प्राप्त एक प्रकार की हर्बल सिलिका है

0

 वंशलोचन स्त्री प्रजाति के बाँस पेड़ों से प्राप्त एक प्रकार की हर्बल सिलिका है,बांस सिलिका (FOLIUM BAMBUSEA) में अन्य सिलिका स्रोतों की तुलना में अधिक सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है। इसमें लगभग 70 से 90% सिलिका होती है। इसमें मुख्य तौर पर सिलिका (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) होती है, जो हड्डियों, स्नायुबंधन, tendons और त्वचा के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।


👉इसमें शरीर के लिए आवश्यक अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है l वंशलोचन का शरीर के ऊतकों पर पुनर्स्थापनात्मक प्रभाव होता है।


वंशलोचन में कई औषधि गुण होते है।👇👇


👉आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, इसलिए यह सितोपलादि चूर्ण का एक मुख्य घटक है जिसका उपयोग इम्युनो-मॉड्यूलेटर के रूप में किया जाता है।


👉यह सर्दी और बहती नाक के लिए बहुत प्रभावी दवा है।


👉वंशलोचन में अल्सर से बचाव करनेवाले गुण हैं। प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, और यशद भस्म के साथ, यह पेप्टिक अल्सर और आंत्र सूजन के रोगों जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस और Crohn's disease में उत्कृष्ट परिणाम देता है।


👉बालों के विकास को प्रोत्साहित कर बालों को मजबूत बनाता है। यह प्रभाव उसमें स्थित प्राकृतिक सिलिका के कारण है। इसमें मौजूद सिलिका बालों को पतला होने से और बाल झड़ने से रोकता है।


👉वंशलोचन के गुण-लाभ और प्रयोग- वंशलोचन उत्तेजक, ज्वरहर, कफनि:सारक, बल्य, वृष्य, प्यासशमन करने वाला, उद्वेष्ठननिरोधि एवं माही होता है।


👉वंशलोचन से वसनसंस्थान की श्लेष्मलकला को पुष्टि मिलती है तथा कफ की मात्रा कम होती है।


👉वंशलोचन से बने हुए सितोपलादि चूर्ण का व्यवहार जीर्णज्वर, श्वास, कास, क्षय, मन्दाग्नि, कमजोरी, कफ में खून जाना, दाह, पूयमेह, मूत्रदाह तथा वातविकार एवं सर्पदंश में किया जाता है।


👉इसकी कोमल गांठ तथा पत्रों का क्वाय गर्भाशय संकोचक होता है। इसका उपयोग प्रसूता में आतंवशुद्धि के लिए एवं अन्य आर्तव विकारों में किया जाता है।


👉वंशलोचन के कोमलपत्र का उपयोग कफ से खून जाना, कुष्ठ, ज्वर तथा बच्चों के सूत्रकृमि में किया जाता है।


👉वंशलोचन के प्रांकुर (Shoots) का रस निकालकर कृमियुक्त थावों पर डाला जाता है तथा बाद में उसका पुल्टिस उन पर बाँध दिया जाता है।


👉जिन लोगों का पाचन ठीक नहीं होता उनको इसके कोमल प्रांकुरों से बने सिरके का उपयोग मांस-मछली के साथ देना उपयोगी होता है। इससे भूख बढ़ती है तथा पाचन भी ठीक होता है।


👉वंशलोचन की गाँठों को पीसकर जोड़ों के दर्द पर उसका बन्धन उपयोगी है।


👉वंशलोचन के बीज को गरीब लोग चावल के रूप में खाते हैं।


👉वंशलोचन का मूल विस्फोटक व्याधियों (Eruptive affections) में बहुत उपयोगी है तथा दाद पर लाभदायक है।

वंशलोचन के पुष्परस का उपयोग कर्णबिन्दु के रूप में कर्णशूल एवं बाधिर्य आदि में किया जाता है।


👉सेवन विधि एवं मात्रा- वंशलोचन चूर्ण 1 ग्राम सादे जल या गुनगुने दूध से लेना हितकारी रहता है।


👉अमृतम द्वारा निर्मित लोजेन्ज माल्ट में वंशलोचन का विशेष पध्दति द्वारा मिश्रण किया जाता है।


👉सावधानियां : आयुर्वेद के अनुसार, वंशलोचन ज्यादा मात्रा में लेना प्रोस्टेट ग्रंथि और फेफड़ों के लिए अच्छा नहीं है I पथरी होनेपर और स्तनपान के दौरान इसका प्रयोग ना करे l

पोस्ट fb sabhar 🙏

#vanshlochan #viral2025シ #devendrasinghdev #viralphotochallenge #ayurvedalife #ayurveda #gardening #gardeningtips #ayurvedalifestyle #AyurvedaForHealth #AyurvedaHealing

Read more

रविवार, 23 फ़रवरी 2025

मरने के बाद कौन पहुंचता है देवलोक

0

 मरने के बाद कौन पहुंचता है देवलोक  ?


मरने के बाद व्यक्ति की तीन तरह की गतियां होती हैं

( १ ) : - उर्ध्व गति


( २ ) : - स्थिर गति और


( ३ ) : - अधो गति।


व्यक्ति जब देह छोड़ता है तब सर्वप्रथम वह सूक्ष्म शरीर में प्रवेश कर जाता है। सूक्ष्म शरीर की गति के अनुसार ही वह भिन्न- भिन्न लोक में विचरण करता है और अंत में अपनी गति अनुसार ही पुन: गर्भ धारण करता है।


आत्मा के तीन स्वरूप माने गए हैं


१ ) : - जीवात्मा,


( २ ) : - प्रेतात्मा और


( ३ ) : - सूक्ष्मात्मा


जो भौतिक शरीर में वास करता है उसे जीवात्मा कहते हैं। जब इस जीवात्मा का वासनामय शरीर में निवास होता है तब उसे प्रेतात्मा कहते हैं। तीसरा स्वरूप है सूक्ष्म स्वरूप। मरने के बाद जब आत्मा सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करता है, तब उसे सूक्ष्मात्मा कहते हैं।


कमजोर सूक्ष्म शरीर से ऊपर की यात्रा मुश्किल हो जाती है तब ऐसा व्यक्ति नीचे के लोक में स्वत: ही गिर जाता है या वह मृत्युलोक में ही पड़ा रहता है और दूसरे जन्म का इंतजार करता है। उसका यह इंतजार 100 वर्ष से 1000 वर्ष तक की अवधि का भी हो सकता है।


पहले बताए गए आत्मा के तीन स्वरूप से अलग


( १) : -  पहली विज्ञान आत्मा,


( २ ) : - दूसरी महान आत्मा और


( ३ ) : - तीसरी भूत आत्मा।


( १ ) : - विज्ञान आत्मा वह है, जो गर्भाधान से पहले स्त्री-पुरुष में संभोग की इच्छा उत्पन्न करती है, वह आत्मा रोदसी नामक मंडल से आता है, उक्त मंडल पृथ्वी से सत्ताईस हजार मील दूर है।


( २ ) : - महान आत्मा वह है, जो चन्द्रलोक से अट्ठाईस अंशात्मक रेतस बनाकर आता है, उसी 28 अंश रेतस से पुरुष पुत्र पैदा करता है। 28 अंश रेतस लेकर आया महान आत्मा मरने के बाद चन्द्रलोक पहुंच जाता है, जहां उससे वहीं 28 अंश रेतस मांगा जाता है। चंद्रलोक में वह आत्मा अपने स्वजातीय लोक में रहता है।


( ३ ) : - भूतात्मा वह है, जो माता-पिता द्वारा खाने वाले अन्न के रस से बने वायु द्वारा गर्भ पिण्ड में प्रवेश करता है। उससे खाए गए अन्न और पानी की मात्रा के अनुसार अहम भाव शामिल होता है, इसी को प्रज्ञानात्मा तथा भूतात्मा कहते हैं। यह भूतात्मा पृथ्वी के अलावा किसी अन्य लोक में नहीं जा सकता है।


वे लोग जो जिंदगीभर क्रोध, कलह, नशा, भोग-संभोग, मांसभक्षण आदि धर्म-विरुद्ध निंदित कर्म में लगे रहे हैं मृत्यु के बाद उन्हें अधो गति प्राप्त होती। जिन्होंने थोड़ा-बहुत धर्म भी साधा है या जो मध्यम मार्ग में रहे हैं उन्हें स्थिर गति प्राप्त होती है।


और जिन्होंने वेदसम्मत आचरण करते हुए जीवनपर्यंत यम-नियमों का पालन किया है उन्हें उर्ध्व गति प्राप्त होती है।


अधो गति वाला आत्मा कीट-पतंगे, कीड़े-मकौड़े, रेंगने वाले जंतु, जलचर प्राणी और पेड़-पौधे आदि योनि में पहुंच जाता है।


स्थिर गति वाला आत्मा पशु, पक्षी और मनुष्य की योनि में पहुंच जाता है, लेकिन जो उर्ध्व गति वाला आत्मा है उनमें से कुछ पितरों के लोक और कुछ देवलोक पहुंच जाता है।


जो आत्मा अपने आध्यात्मिक बल के द्वारा देवलोक चला जाता है वह देवलोक में रहकर सुखों को भोगता है। यदि वहां भी वह देवतुल्य बनकर रहता है तो देवता हो जाता है। लेकिन यदि उनमें राग-द्वेष उत्पन्न होता है तो वह फिर से मृत्युलोक में मनुष्य योनि में जन्म ले लेता है।


लेकिन उर्ध्व गति प्राप्त कुछ आत्माएं अपने आध्यात्मिक बल की शक्ति से पितर और देवलोक से ऊपर ब्रह्मलोक में जाकर सदा के लिए जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।


यही मोक्ष है.......

Read more

बुधवार, 19 फ़रवरी 2025

तंत्र साधना में असम को स्त्री प्रदेश भी कहा जाता हैं

0

 #कामरू_कामाख्या

असम को स्त्री प्रदेश भी कहा जाता हैं। वहां प्राचीन काल से ही तंत्र साधना के क्षेत्र में स्त्री शक्तियों का विशेष प्रभाव मौजूद रहा है। आज भी असम के कामाख्या क्षेत्र में तंत्र साधिकाओ का बहुत बड़ा वर्ग मौजूद है। जो अद्भुत तांत्रिक शक्तियों में  निपुण हैं।असम एक ऐसा क्षेत्र है जहां कामाख्या नामक शक्तिपीठ मौजूद है। शक्तिपीठ के विषय में आप सभी को जानकारी होगी। इसीलिए थोड़ा संक्षेप में विवरण दे रहा हूं। यहां भगवती का गुप्तांग गिरा था ऐसा माना जाता है। यहां पर कामाख्या मंदिर में उसी की पूजा होती है। वहां कोई भी विग्रह नहीं है बल्कि योनि मंडल बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जून के महीने में 3 दिनों के लिए योनि में रजस्त्राव होता है। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और उस क्षेत्र में पूजा-पाठ का कार्यक्रम रोक दिया जाता है। 

उस दौरान यह भी देखा गया कि ब्रह्मपुत्र नदी का जल भी लाल रंग का हो जाता है।उस समय विशेष में, मंदिर में योनि मंडल के ऊपर वस्त्र  बिछा दिये जाते है।इन वस्त्रों को प्रसाद के रूप में दर्शनार्थियों में बांट दिया जाता है। इसे कामाख्या तार कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस वस्त्र का एक भी तार अगर किसी के शरीर पर ताबीज के रूप में या किसी अन्य रुप में मौजूद हैं तो उसके ऊपर किसी भी प्रकार का तांत्रिक प्रयोग कोई प्रभाव नहीं डालेगा। 

इसे मूल शक्तिपीठ माना जाता है। सभी प्रकार के जीवो के जन्म लेने का कारण योनि ही होता है। संभवतः इसीलिए इस पीठ को सबसे ज्यादा मान्यता दी गई हैं। तांत्रिक क्षेत्र में जितने भी सिद्ध पुरुष हुए हैं उन्होंने इस तांत्रिक क्षेत्र में आकर कोई ना कोई साधना सिद्धि अवश्य प्राप्त की है।शाबर मंत्र साधना के अधिकांश विशेषज्ञ या सिद्ध पुरुष कामाख्या को ही अपनी शक्तियों का केंद्र मानते हैं वे यथासंभव वहां जाकर दर्शन करने या वहां साधना करने की कोशिश अवश्य करते हैं।इससे उनकी शक्तियां और उनकी साधनात्मक  क्षमता दोनों और बढ़ती है।कामाख्या को कामरूप, कौरु नगर जैसे नामों से भी जाना जाता है। इन स्थानों पर रहने वाली स्त्रियों को तंत्र विद्या में निपुण माना जाता है। यही नहीं यह भी मान्यता है कि पहले किसी भी जानवर जैसे पक्षी पशुओं में परिवर्तित करके अपने पास बंदी बना लेते हैं फिर उनसे मनचाहा काम भी करवाते हैं आवश्यकता अनुसार आवश्यकताओं की पूर्ति भी करती रहती हैं।

कामाख्या पीठ का लोगों का निजी अनुभव है कोई भी ऐसा काम जो नहीं हो पा रहा हो तो एक बार भगवती कामाख्या के दरवाजे पर पहुंचकर उनसे निवेदन करके जरूर देखें। साल भर के अंदर वह कार्य जरूर पूर्ण हो जाता है। 

हां! इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि वह कार्य किसी को कष्ट पहुंचाने वाला या सामाजिक मान्यता को नष्ट करने वाला न हो। 

आप अपने विकास के लिए कोई भी इच्छा  रखें और भगवती कामाख्या के दर्शन को जाऐ तो 90% संभावना है कि आपका काम हो जाएगा


इस संबंध में मुझे एक कहीं पड़ी हुई घटना की याद आ रही है। जिसे मैं आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूं। जो कामाख्या से संबंधित है और संभवत किसी विदेशी जिज्ञासु ने लिखी है। 

वह विदेशी भारत में  कामाख्या के तंत्र साधिकाओ के विषय में सुनकर आया था। बहुत मेहनत करने के बाद वह एक ऐसी ही तंत्र साधिका के सम्पर्क में आया जिसने उसे प्रत्यक्ष में तंत्र साधना का प्रयोग करके दिखाने पर सहमति व्यक्त कर दी।

साधिका के निर्देश पर वह व्यक्ति एक काला मुर्गा अपने साथ लाया। एक लगभग 8 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया गया, मुर्गे को उस गड्ढे में डाल दिया गया और उसे चटाई से ढक दिया गया।


इसके पश्चात साधिका उस गड्ढे से लगभग चार फीट दूर बैठ गयी। विदेशी भी वहीं पर बैठा रहा ताकि देखता रहे कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही हैं।

उस साधिका ने कुछ मंत्रों का उच्चारण किया और काली मिर्च के दाने उस चटाई पर फेंक दिये। उनके चटाई पर गिरने तक की हल्की आवाज तक उस विदेशी पर्यटक को सुनाई दी! 

उसके बाद मुर्गे की चीख  एक बार सुनाई थी। उसके बाद सब कुछ शांत हो गया।

कुछ समय बाद साधिका ने अपनी आंखे खोली और उस विदेशी पर्यटक को चटाई हटाकर देखने के लिए कहा।

उसे लगा कुछ खास तो घटित हुआ नहीं होगा जैसा मुर्गा है वैसा ही होना चाहिए।

लेकिन.... 

जैसे ही उसने चटाई हटाई वह मुर्गा मृत पड़ा हुआ था। वह तुरंत गढ्ढे में कूदा और उस मुर्गे को बाहर लेकर निकला।

उस मुर्गे के प्राण पखेरु उड़ चुके थे। 

मंत्र शक्ति का प्रभाव उस पर्यटक को पता चल गया था।

उस साधिका ने बताया है यह तो तुम्हें दिखाने के लिए इस गढ्ढे में मुर्गे को रखा गया है। अगर मुर्गा यहां से 100 किलोमीटर दूर भी होता तो भी इसकी यही हालत होनी थी। 


इतना कह कर वह तंत्र साधिका वहां से लुप्त हो गई।

इस घटना से आप कामाख्या तंत्र क्षेत्र की साधिकाओं की क्षमता के बारे में समझ सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनके द्वारा की गई तंत्र की काट बहुत मुश्किल होती है!लगभग असंभव।


गुरु गोरखनाथ तंत्र के अद्भुत विद्वान माने जाते हैं। और शाबर तंत्र साधना में उनका स्थान बेहद प्रतिष्ठित और सिद्ध पुरुषों में लिया जाता है। 

उनके गुरु मछेंद्रनाथ थे! जो इस क्षेत्र से गुजर रहे थे! तभी यहां की रानी ने उन्हें महल में बुलवा लिया और उस के बाद ऐसा प्रयोग सम्पन्न किया कि गुरुदेव मच्छिंन्द्रनाथ सारी दुनियादारी भूलकर राजकाज संभालकर रानी के साथ रास विलास में लीन  हो गये। 

जब काफी समय बीत गया और गुरुदेव मच्छिंन्द्रनाथ का कोई अता पता नहीं चला... 

तो गोरखनाथ अपने गुरु की तलाश में निकले! और किसी प्रकार से अपने गुरु को उस रानी के चंगुल से छुड़ा कर ले जाने में सफल हुए। 

तो कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह हैं कि कामाख्या एक रहस्यमई जगह है और वहां रहने वाली महिला साधिकाओ का रहस्य उस से भी गहरा हैं। दिखने में उनमें कोई भी विशिष्टता दिखाई नहीं देगी! वह सामान्य महिलाओ की तरह ही दिखेगी लेकिन जब वह अपनी औकात पर आ जाये तो अच्छे अच्छे तांत्रिको को अपनी पांव की जूती की नोक पर रख लेती है और अपनी अंगुलियो पर नचाती हैं। एक प्रकार से वे महामाया का ही अंश है जो इस सम्पूर्ण सृष्टि को अपनी अंगुलियों पर नचाती रहती है।

जय माँ कामरूप कामाख्या  🙏🙏🙏

#अनूप साभार  Facebook wall

Read more

अमरूद खाने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है

0

 अमरूद खाने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है


 अमरूद के फ़ायदेः 

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।

वज़न घटाने में मदद करता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है।

पाचन को ठीक रखता है।

इम्यून सिस्टम को मज़बूत करता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए फ़ायदेमंद होता है।

कब्ज़ से राहत देता है।

शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सही रखता है।

थायराइड के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद होता है।

अमरूद में मौजूद पोषक तत्वः 

विटामिन-सी, लाइकोपीन, एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फ़ाइबर, आयरन, फ़ोलिक एसिड, नियासिन (Vitamin B3), कॉपर.

अमरूद के कुछ और फ़ायदेः कैंसर के जोखिम को कम करता है, एनीमिया से राहत दिलाता है, ब्रेन फ़ंक्शनिंग में सुधार करता है, प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देता है। साभार विनोद कुमार facebook wall

Read more

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2025

जिन खोजा तिन पाईंयां--प्रवचन

0

 कभी आपने खयाल किया, आपने किसी आदमी को मरते देखा? आप कहेंगे, बहुत लोगों को देखा। पर मैं कहता हूं, नहीं देखा। आज तक किसी व्यक्ति ने किसी को मरते नहीं देखा। मरने की प्रक्रिया आज तक देखी नहीं गई। जो हम देखते हैं, वह केवल जीवन के विदा हो जाने की प्रक्रिया है, मरने की नहीं।


बटन दबाई हमने, बिजली का बल्ब बुझ गया। जो नहीं जानता, वह कहेगा, बिजली मर गई। जो जानता है, वह कहेगा, बिजली अभिव्यक्त थी, अब अप्रकट हो गई। प्रकट थी, अप्रकट हो गई। मर नहीं गई। फिर बटन दबेगा, बिजली फिर वापस लौट आएगी। फिर बटन दबाएंगे, बिजली फिर भीतर तिरोहित हो जाएगी।


जीवन समाप्त नहीं होता, केवल शरीर से विदा होता है। लेकिन विदाई हमें मृत्यु मालूम पड़ती है। क्यों मालूम पड़ती है? क्योंकि हमने कभी अपने भीतर शरीर से अलग किसी अस्तित्व का अनुभव नहीं किया है। हमारा अनुभव यही है कि मैं शरीर हूं, इसलिए जब शरीर समाप्त होगा, जलाने के योग्य हो जाएगा, तब स्वभावतः निष्कर्ष होगा कि मर गए।


शरीर से अलग जिसने अपने भीतर किसी तत्व को नहीं जाना, वह अज्ञानी है। अज्ञानी का मतलब यह नहीं कि जिसे यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं है, विश्वविद्यालय का कोई सर्टिफिकेट नहीं है। सच तो यह है कि विश्वविद्यालय ने जितने सर्टिफिकेट दिए, अज्ञान उतना बढ़ा है, कम नहीं हुआ। कारण है। कारण यह है कि विश्वविद्यालय के सर्टिफिकेट को लोग ज्ञान समझने लगे। इसलिए असली ज्ञान की खोज की कोई जरूरत नहीं मालूम पड़ती। अज्ञानी आदमी के पास सर्टिफिकेट नहीं होता; वह ज्ञान की खोज करता है। तथाकथित ज्ञानी के पास सर्टिफिकेट होता है; वह मान लेता है कि मैं ज्ञानी हूं। मेरे पास यूनिवर्सिटी की डिग्री है। और क्या चाहिए?


ज्ञान तो सिर्फ एक है, स्वयं का ज्ञान। बाकी सब सूचनाएं हैं, इनफर्मेशनस हैं, नालेज नहीं। बाकी सब परिचय है, ज्ञान नहीं।


बर्ट्रेंड रसेल ने ज्ञान के दो हिस्से किए हैं, नालेज और एक्वेनटेंस–ज्ञान और परिचय। ज्ञान तो सिर्फ एक ही चीज का हो सकता है, जो मैं हूं; बाकी सब परिचय है, ज्ञान नहीं है। अपने से पृथक जिसे भी मैं जानता हूं, वह सिर्फ एक्वेनटेंस, परिचय है। जान तो सिर्फ अपने को सकता हूं; क्योंकि अपने से जो भिन्न है, उसके भीतर मेरा प्रवेश नहीं हो सकता, सिर्फ बाहर घूम सकता हूं। परिचय ही कर सकता हूं, ऊपर-ऊपर से जान सकता हूं, भीतर तो नहीं जा सकता। भीतर तो सिर्फ एक ही जगह जा सकता हूं, जहां मैं हूं।


यह बहुत मजे की बात है, अपना परिचय नहीं होता और दूसरे का ज्ञान नहीं होता। दूसरे का परिचय होता है, अपना ज्ञान होता है। अपना परिचय नहीं होता; क्योंकि अपने बाहर घूमने का उपाय नहीं है। दूसरे का ज्ञान नहीं होता; क्योंकि दूसरे के भीतर प्रवेश नहीं है।


लेकिन हम बड़े अजीब लोग हैं! हम दूसरे का ज्ञान ले लेते हैं और अपना परिचय कर लेते हैं। हम अपना परिचय कर लेते हैं, जो कि हो नहीं सकता। और हम दूसरे के ज्ञान को ज्ञान समझ लेते हैं, जो कि हो नहीं सकता। यह अज्ञान की स्थिति है। अज्ञान में मृत्यु है।


जब आप एक व्यक्ति को बुझते देखते हैं–बुझते, मरते नहीं। इसलिए बुद्ध ने ठीक शब्द का उपयोग किया है। वह शब्द है, निर्वाण। निर्वाण का अर्थ है, दीए का बुझना। बस, दीया बुझ जाता है; कोई मरता नहीं। दिखाई पड़ती थी ज्योति, अब नहीं दिखाई पड़ती। देखने के क्षेत्र से विदा हो जाती है, अदृश्य में लीन हो जाती है। फिर प्रकट हो सकती है, फिर लीन हो सकती है। यह प्रकट-अप्रकट होने का क्रम अनंत चल सकता है। जब तक कि ज्योति पहचान न ले कि प्रकट में भी मैं वही हूं, अप्रकट में भी मैं वही हूं; न मैं प्रकट होती, न मैं अप्रकट होती, सिर्फ रूप प्रकट होता और अप्रकट होता। वह जो रूप के भीतर छिपा हुआ सत्व है, वह न प्रकट में प्रकट होता, न अप्रकट में अप्रकट होता; न जीवन में जीवित होता, न मृत्यु में मरता। तब अमृत का अनुभव है।


हम दूसरों को मरते देखकर, बुझते देखकर, हिसाब लगा लेते हैं कि सब मरते हैं, तो मैं भी मरूंगा। लेकिन कभी किसी मरने वाले से पूछा कि मर गए? लेकिन वह उत्तर नहीं देता। इसलिए मान लेते हैं कि हां में उत्तर देता होगा। मौन को सम्मति का लक्षण समझने की बात सभी जगह ठीक नहीं है। मरे हुए आदमी से पूछो, मर गए? अगर वह उत्तर दे, तो समझना मरा नहीं; और अगर मौन रह जाए, तो हम समझ लेते हैं कि मर गया!


लेकिन मौन सम्मति का लक्षण नहीं है। नहीं बोल पा रहा है, इसलिए मर गया, ऐसा समझने का कोई कारण नहीं है।


जिन खोजा तिन पाईंयां--प्रवचन--19

ओशो

.•°○●~●○°•..•°○●~●○°•..•°○●~●○°•..•°○●~●○°•.

   OMM ADI ANADI ARIHANT NAMO NAMAH

°•.●○~○●.•°°•.●○~○●.•°°•.●○~○●.•°°•.●○~○●.•°

Read more

देवीय शक्ति से साक्षात्कार कराते मंत्र

0

 



मंत्रों का प्रयोग मानव ने अपने कल्याण के साथ-साथ दैनिक जीवन की संपूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु यथासमय किया है और उसमें सफलता भी पाई है, परंतु आज के भौतिकवादी युग में यह विधा मात्र कुछ ही व्यक्तियों के प्रयोग की वस्तु बनकर रह गई है।

मंत्रों में छुपी अलौकिक शक्ति का प्रयोग कर जीवन को सफल एवं सार्थक बनाया जा सकता है। सबसे पहले प्रश्न यह उठता है कि 'मंत्र' क्या है, इसे कैसे परिभाषित किया जा सकता है। इस संदर्भ में यह कहना उचित होगा कि मंत्र का वास्तविक अर्थ असीमित है। किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए प्रयुक्त शब्द समूह मंत्र कहलाता है। 

जो शब्द जिस देवता या शक्ति को प्रकट करता है उसे उस देवता या शक्ति का मंत्र कहते हैं। मंत्र एक ऐसी गुप्त ऊर्जा है, जिसे हम जागृत कर इस अखिल ब्रह्मांड में पहले से ही उपस्थित इसी प्रकार की ऊर्जा से एकात्म कर उस ऊर्जा के लिए देवता (शक्ति) से सीधा साक्षात्कार कर सकते हैं।

ऊर्जा अविनाशिता के नियमानुसार ऊर्जा कभी भी नष्ट नहीं होती है, वरन्‌ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती रहती है। अतः जब हम मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो उससे उत्पन्न ध्वनि एक ऊर्जा के रूप में ब्रह्मांड में प्रेषित होकर जब उसी प्रकार की ऊर्जा से संयोग करती है तब हमें उस ऊर्जा में छुपी शक्ति का आभास होने लगता है। ज्योतिषीय संदर्भ में यह निर्विवाद सत्य है कि इस धरा पर रहने वाले सभी प्राणियों पर ग्रहों का अवश्य प्रभाव पड़ता है। 

चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और यह पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण खगोल में अपनी स्थिति के अनुसार मानव मन को अत्यधिक प्रभावित करता है। अतः इसके अनुसार जो मन का त्राण (दुःख) हरे उसे मंत्र कहते हैं। मंत्रों में प्रयुक्त स्वर, व्यंजन, नाद व बिंदु देवताओं या शक्ति के विभिन्न रूप एवं गुणों को प्रदर्शित करते हैं। मंत्राक्षरों, नाद, बिंदुओं में दैवीय शक्ति छुपी रहती है।

मंत्र उच्चारण से ध्वनि उत्पन्न होती है, उत्पन्न ध्वनि का मंत्र के साथ विशेष प्रभाव होता है। जिस प्रकार किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु के ज्ञानर्थ कुछ संकेत प्रयुक्त किए जाते हैं, ठीक उसी प्रकार मंत्रों से संबंधित देवी-देवताओं को संकेत द्वारा संबंधित किया जाता है, इसे बीज कहते हैं। विभिन्न बीज मंत्र इस प्रकार हैं :

ॐ👉 परमपिता परमेश्वर की शक्ति का प्रतीक है।

ह्रीं👉 माया बीज,

श्रीं👉 लक्ष्मी बीज,

क्रीं👉 काली बीज,

ऐं👉 सरस्वती बीज,

क्लीं👉 कृष्ण बीज। 

मंत्रों में देवी-देवताओं के नाम भी संकेत मात्र से दर्शाए जाते हैं, जैसे राम के लिए 'रां', हनुमानजी के लिए 'हं', गणेशजी के लिए 'गं', दुर्गाजी के लिए 'दुं' का प्रयोग किया जाता है। इन बीजाक्षरों में जो अनुस्वार (ं) या अनुनासिक (जं) संकेत लगाए जाते हैं, उन्हें 'नाद' कहते हैं। नाद द्वारा देवी-देवताओं की अप्रकट शक्ति को प्रकट किया जाता है।


लिंगों के अनुसार मंत्रों के तीन भेद होते हैं


पुर्लिंग👉 जिन मंत्रों के अंत में हूं या फट लगा होता है।

स्त्रीलिंग👉 जिन मंत्रों के अंत में 'स्वाहा' का प्रयोग होता है।

नपुंसक लिंग👉 जिन मंत्रों के अंत में 'नमः' प्रयुक्त होता है।

अतः आवश्यकतानुसार मंत्रों को चुनकर उनमें स्थित अक्षुण्ण ऊर्जा की तीव्र विस्फोटक एवं प्रभावकारी शक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। मंत्र, साधक व ईश्वर को मिलाने में मध्यस्थ का कार्य करता है। मंत्र की साधना करने से पूर्व मंत्र पर पूर्ण श्रद्धा, भाव, विश्वास होना आवश्यक है तथा मंत्र का सही उच्चारण अति आवश्यक है। मंत्र लय, नादयोग के अंतर्गत आता है। 

मंत्रों के प्रयोग से आर्थिक, सामाजिक, दैहिक, दैनिक, भौतिक तापों से उत्पन्न व्याधियों से छुटकारा पाया जा सकता है। रोग निवारण में मंत्र का प्रयोग रामबाण औषधि का कार्य करता है। मानव शरीर में 108 जैविकीय केंद्र (साइकिक सेंटर) होते हैं जिसके कारण मस्तिष्क से 108 तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) उत्सर्जित करता है। 

शायद इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने मंत्रों की साधना के लिए 108 मनकों की माला तथा मंत्रों के जाप की आकृति निश्चित की है। मंत्रों के बीज मंत्र उच्चारण की 125 विधियाँ हैं। मंत्रोच्चारण से या जाप करने से शरीर के 6 प्रमुख जैविकीय ऊर्जा केंद्रों से 6250 की संख्या में विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा तरंगें उत्सर्जित होती हैं, जो इस प्रकार हैं :

मूलाधार👉 4×125=500

स्वधिष्ठान👉 6×125=750

मनिपुर👉 10×125=1250

हृदयचक्र👉 13×125=1500

विध्रहिचक्र👉 16×125=2000

आज्ञाचक्र👉 2×125=250 

कुल योग👉 6250 (विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा तरंगों की संख्या)

भारतीय कुंडलिनी विज्ञान के अनुसार मानव के स्थूल शरीर के साथ-साथ 6 अन्य सूक्ष्म शरीर भी होते हैं। विशेष पद्धति से सूक्ष्म शरीर के फोटोग्राफ लेने से वर्तमान तथा भविष्य में होने वाली बीमारियों या रोग के बारे में पता लगाया जा सकता है। सूक्ष्म शरीर के ज्ञान के बारे में जानकारी न होने पर मंत्र शास्त्र को जानना अत्यंत कठिन होगा। 

मानव, जीव-जंतु, वनस्पतियों पर प्रयोगों द्वारा ध्वनि परिवर्तन (मंत्रों) से सूक्ष्म ऊर्जा तरंगों के उत्पन्न होने को प्रमाणित कर लिया गया है। मानव शरीर से 64 तरह की सूक्ष्म ऊर्जा तरंगें उत्सर्जित होती हैं जिन्हें 'धी' ऊर्जा कहते हैं। जब धी का क्षरण होता है तो शरीर में व्याधि एकत्र हो जाती है।

मंत्रों का प्रभाव वनस्पतियों पर भी पड़ता है। जैसा कि बताया गया है कि चारों वेदों में कुल मिलाकर 20 हजार 389 मंत्र हैं, प्रत्येक वेद का अधिष्ठाता देवता है। ऋग्वेद का अधिष्ठाता ग्रह गुरु है। यजुर्वेद का देवता ग्रह शुक्र, सामवेद का मंगल तथा अथर्ववेद का अधिपति ग्रह बुध है। 

मंत्रों का प्रयोग ज्योतिषीय संदर्भ में अशुभ ग्रहों द्वारा उत्पन्न अशुभ फलों के निवारणार्थ किया जाता है। ज्योतिष वेदों का अंग माना गया है। इसे वेदों का नेत्र कहा गया है। भूत ग्रहों से उत्पन्न अशुभ फलों के शमनार्थ वेदमंत्रों, स्तोत्रों का प्रयोग अत्यन्त प्रभावशाली माना गया है। 

उदाहरणार्थ आदित्य हृदयस्तोत्र सूर्य के लिए, दुर्गास्तोत्र चंद्रमा के लिए, रामायण पाठ गुरु के लिए, ग्राम देवता स्तोत्र राहु के लिए, विष्णु सहस्रनाम, गायत्री मंत्रजाप, महामृत्युंजय जाप, क्रमशः बुध, शनि एवं केतु के लिए, लक्ष्मीस्तोत्र शुक्र के लिए और मंगलस्रोत मंगल के लिए। मंत्रों का चयन प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथों से किया गया है। 

वैज्ञानिक रूप से यह प्रमाणित हो चुका है कि ध्वनि उत्पन्न करने में नाड़ी संस्थान की 72 नसें आवश्यक रूप से क्रियाशील रहती हैं। अतः मंत्रों के उच्चारण से सभी नाड़ी संस्थान क्रियाशील रहते हैं।

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv