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शनिवार, 1 मार्च 2025

हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं.

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 हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं..?


हमारे मन के 16 हिस्से हैं,, थॉट से लेकर लिबरेशन तक की जर्नी के चार हिस्से हैं जो इस प्रकार है मनस, बुद्धि, चित्त और अहंकार इन सभी के फंक्शन अलग-अलग हैं डे टुडे के डिसीजन मानस लेता है 


बुद्धि कैलकुलेट करता है और अहंकार जिससे हमारी पर्सनालिटी बनती है हमारी एक आइडेंटिटी बनती है और चौथा है ,चित्त यानी की मेमोरी इस मेलाइफ टाइम की मेमोरी ही नहीं होती इसमें हमारे सारे लाइफ टाइम के मेमोरी होती है


 हमारे बायोलॉजिकल शरीर से लेकर मेंटल शरीर के मेमोरी होती है यह सारे मेमोरी नहीं रहेगी तो हम फ्यूचर के बारे में प्लान नहीं कर पाएंगे,,


 इसीलिए मन का जो हिस्सा है वह बेहद जरूरी है क्योंकि हम हमारे पास्ट एक्सपीरियंस से ही अपने फ्यूचर को प्लान करते हैं ,,और अपने प्रेजेंट को भी उसी प्रकार से अपने आप से जो भी गलतियां हुई उससे सीख करके आगे  काम करते हैं।


इसमें अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारे चित्त का स्मृति जब हम किसी याद के बारे में बात करते हैं,, हमारी जो भी करंट थॉट प्रोसेस है वह हमारी स्मृति के ऊपर ही डिपेंड होता है 


अगर आप किसी व्यक्ति से मिले दो-तीन साल पहले और उसे व्यक्ति के साथ आपका एक्सपीरियंस अच्छा नहीं रहा है तो वह एक्सपीरियंस आपकी स्मृति में पहले से ही बना हुआ है 

अब आप उसे व्यक्ति से दोबारा मिलते हैं तो उसी आधार पर उसे व्यक्ति को आप जज जज करेंगे और कहीं ना कहीं आपका प्रेजेंट मोमेंट प्रभावित होगा आप उसे व्यक्ति से मिलने का मन नहीं करेगा तो यहां पर आपकी स्मृति है वह यहां पर बॉयस थिंकिंग दे सकती है और जो उसे व्यक्ति के साथ रिलेशन है वह अफेक्टेड हो सकता है तो विचारों की जन्मभूमि यही है। साभार Facebook 

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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

शाकाहार और मांसाहार तुलनात्मक अध्ययन

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 मांस एवं ऋतु का कोई मेल नहीं।शाकाहारी भोजन ऋतु के अनुसार बदल बदल कर खाया जाता है।मांस रोग बढ़ाता है,शाकाहार रोग से मुक्ति दिलाता है।



(1)ताकत के लिए-सबसे ताकतवर जानवर हाथी शाकाहारी होता है

वो ताकत के लिए कभी मांस नहीं खाता!!किसानों के साथ मेहनत करने वाला बैल कभी मांस खाता।हॉर्सपावर का इस्तेमाल किसी भी मशीन की शक्ति मापने के लिए किया जाता है।वो घोड़ा मांस खाता फिर ये कैसे कहा जा सकता है,कि मांस खाने से ताकत मिलती है?


( 2)जीभ के स्वाद के लिए-मांस में कैसा स्वाद होता है?सारा स्वाद उसमें पड़े बहुउपयोगी मसालों के कारण होता है।अगर वही मसाले इस्तेमाल किए जाएं तो बैंगन आलू की सब्जी में वही स्वाद आएगा! 


(3)विटामिन के लिए-हरी पत्तेदार सब्जियों और सूखे मेवों में मांस से कहीं ज्यादा प्रोटीन,विटामिन,पोषक तत्व होते है,तो मांस क्यों खाएं?


असल में प्रकृति ने न हमारे दांतों को मांस चबाने के लिए बनाया है, ना ही हमारी आंतों को मांस पचाने के लिए बनाया,मानव शरीर मूलत शाकाहार के लिए बनाया है।यदि ऐसा न होता तो डॉक्टर छोटे बच्चे को चावल खिचड़ी की जगह मांस के टुकड़े चबाने को कहता।इसका मतलब यह हुआ,मनुष्य स्वाभाविक मांसाहारी नहीं है!ना कभी रहा।


मांस खाने से पाचन क्रिया खराब होती है,मानसिक रोग भी होता है, जिससे अनेक रोग हो सकते हैं।मांस खाने से मनुष्य में काम,क्रोध, मद,अहंकार ईर्ष्या एवं कायरता के दुर्गुण प्रबल होते हैं।तथा राक्षसी प्रवृत्तियाँ बढ़ती हैं।कहा जाता है,मनुष्य बंदरों से विकसित हुआ है। 


बंदर आज भी शाकाहारी हैं।विकास की यात्रा में.बंदरों से मनुष्य तक

कौन जानता है कि मनुष्य पशु कैसे बन गया?मनुष्य का पेट पशुओं का कब्रिस्तान नहीं है।मनुष्य को यह बात ध्यान में रखनी होगी!शुद्ध आहार शाकाहार प्रकृति की रचना है,जो पशु होठों से पानी पीता है, वह शाकाहारी होता है,जो पशु जीभ से पानी पीता है,वह मांसाहारी होता है।शाकाहारी बनो!शरीर,मन,और विचारों की पवित्रता बढ़ाओ, शाकाहारी भोजन करो स्वस्थ रहो।यदि सहमत हो तो शाकाहारी बनो साभार निधि चौहान Facebook 

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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

किसान ने अपने अनोखे नवाचार से बैलों के वजन का भार कम कर दिया

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 एक किसान ने अपने अनोखे नवाचार से बैलों के वजन का भार कम कर दिया


है, जिससे वे अधिक समय तक बिना थके काम कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल बैलों की क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि उनकी सेहत और कार्यक्षमता को भी बनाए रखेगी।


पारंपरिक रूप से, किसान बैलों का उपयोग खेत जोतने, सामान ढोने और परिवहन के लिए करते हैं, लेकिन भारी बोझ के कारण वे जल्दी थक जाते हैं और उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। इस समस्या को हल करने के लिए एक किसान ने सरल लेकिन प्रभावी तकनीक अपनाई, जिससे बैलों पर पड़ने वाला भार समान रूप से बंट जाता है और उनकी ऊर्जा बचती है।


इस नवाचार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बैलों की शारीरिक थकान को कम करता है, जिससे वे लंबी दूरी तक आसानी से यात्रा कर सकते हैं। साथ ही, इससे उनकी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे अधिक समय तक स्वस्थ रहते हैं।


यह पहल पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा को दर्शाती है। ऐसे नवाचार न केवल खेती में मददगार होते हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। इस किसान की सोच और प्रयासों को सलाम! 👏🌿 साभार Facebook 

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लाल मिर्च का सेवन

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 बदलती दिनचर्या और अनियमित खानपान की वजह से हर दूसरे-तीसरे शख्स में डायबिटीज और जोड़ों में दर्द की समस्या देखने को मिल रही है. इसकी वजह से अस्पतालों और दवाओं पर खूब पैसे खर्च हो रहे हैं लेकिन, डायबिटीज पर कंट्रोल और जोड़ों में दर्द में जल्दी आराम के लिए लाल बड़ी मिर्च का नियमित सेवन वरदान साबित हो सकता है.

डॉक्टरों के अनुसार, लाल बड़ी मिर्च में विटामिन सी और आयरन के अलावा एक विशेष एंटी ऑक्साइड गुण पाया जाता है. हालांकि, यह मिर्च साल के दो महीने ही बाजार में मिलती है. लाल बड़ी मिर्च फरवरी से लेकर मार्च तक मिलती है. इसके बाद धीरे-धीरे कम हो जाती है लेकिन, इसका उपयोग अचार या जाइम के रूप में किया जाए तो 6-8 महीने तक आराम से चल जाता है.

सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और न्यूट्रिशन डॉ. सुमित रावत बताते हैं कि लाल मिर्च केवल दो-ढाई महीने ही बाजार में मिलती है. लेकिन, यह बड़े ही फायदे की चीज है. इसमें कैंसर निवारक गुण पाए जाते हैं. अगर किसी को पेट का कैंसर या आंख का कैंसर होने की संभावना है और वह व्यक्ति नियमित बड़ी वाली लाल मिर्च का सेवन


कर रहा है तो यह संभावना बेहद कम हो जाती है. इसके अलावा जिसको फैटी लीवर की शिकायत है, उसके लिए अभी यह बहुत अच्छी होती है. यह बहुत कारगर और रामबाण सब्जी है.

डॉ. रावत बताते हैं कि लाल बड़ी मिर्च में काफी मात्रा में विटामिन सी होता है. आयरन होता है. इसके अलावा इसमें एक एंटीऑक्सीडेंट भी होता है, यानी जिनको जोड़ों की समस्या है, डायबिटीज की समस्या है या जिनके शरीर में कुछ ज्यादा टूट होती है, अकड़न होती है, उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है.

इस लाल मिर्च का लगातार प्रयोग करना चाहिए. सीजन के दौरान इसको सब्जी में इस्तेमाल कर सकते हैं. जब सीजन चला जाए तो उसको अचार डालकर रख सकते हैं. अचार काफी लंबे समय तक चलता है. लोग इसको चटनी में भी डालते हैं. कोई भी पराठा या खाने की अन्य कोई चीज ले रहे हैं, तो उसके साथ में इसकी चटनी कंज्यूम कर सकते हैं. टमाटर या आंवला की चटनी में मिक्स करके लाल मिर्च की चटनी बना सकते हैं.

🙏 साभार 

राधादेव शर्मा

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लवंग के फायदे

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 लौंग :-  दो लौंग रोज दो बार चूसिए आजीवन स्वस्थ लीवर स्वस्थ हड्डियां जोड़ स्वस्थ फेफड़े स्वस्थ मुखमंडल 


मैंने कोरोना काल में लौंग को बहुत प्रचारित किया था वजह स्पष्ट थी उसका सबसे ज्यादा औरैक वैल्यू और गज़ब की एंटी वायरल क्षमता 

*ORAC*


          *ORAC* का अर्थ *ऑक्सीजन रेडिकल एब्सॉरबेन्ट केपेसिटी* (Oxygen Radical Absorbance Capacity.) 

          जितना अधिक ORAC, होगा उतनी ही ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता हमारे *फेफड़ो* को और *रक्त* को होगी। और यही कारण था जिन्होंने मेरी मानकर इसका उपयोग किया उन्हें ऑक्सीजन लेवल में कोई परेशानी नहीं आई अव्वल तो कोरोना काल बहुत सरलता से गुजर गया 

सारा खेल रक्त में मौजूद आक्सीजन के स्तर का है शरीर के जिस हिस्से को आक्सीजन अधिक मिलेगी वो तीव्रता से स्वस्थ होगा और कम मिलेगी तीव्रता से बीमार और कमजोर 


कैंसर का अगर कोई सबसे बड़ा बचाव है तो लौंग ही है क्योंकि शरीर में जितना ज्यादा आक्सीजन प्रवाह होगा कोशिकाओं में म्युटेशन के चांस उतने ही कम होंगे

आटो इम्युन डिज़ीज़ होने की संभावना नहीं रहेगी 

          

          आइए कुछ जड़ीबूटियों और मसालों के ORAC क्षमता (values) पर नजर डाले :

     1. लौंग Clove :

           314,446 ORAC 

    2. दालचीनी Cinnamon :

           267,537 ORAC 

     3. कॉफी Coffee. :

           243000  ORAC

     4. हल्दी Turmeric :

           102,700 ORAC 

     5. कोका Cocoa :

           80,933    ORAC 

     6. जीरा Cumin : 

          76,800  ORAC 

     7. अजवाइन Parsley :

           74,349 ORAC 

     8. तुलसी Tulsi : 

          67,553 ORAC 

     9. अजवायन के फूल Thyme : 

           27,426ORAC

     10. अदरक Ginger :

           28,811 ORAC 

कभी भी काला या पिचका हुआ तिड़का हुआ नहीं खरीदें क्योंकि उससे औषधीय तेल निकाल लिया गया होता है स्पष्ट रूप से ये भूरा तथा जैसा चित्र में है वैसा दिखता है


          

        उत्तम क्षमता वाले ORAC खाद्यपदार्थ (आहार) और पोषक तत्व (Nutrients) जैसे कि  *Iron, Vitamin C, Zinc, Omega 3, Magnesium and Vitamin D* आदि शारिरिक क्षमता और सुरक्षा कवच को सुदृढ़ तथा मजबूत करते हैं। 


लौंग में कई तरह के जीवाणु व विषाणु रोधी तत्व ( Anti bacterial anti virus element ) पाये जाते हैं। इसमें से पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन , मैंगनीज फाइबर, विटामिन , ओमेगा 3, मैग्नीशियम , सोडियम के अलावा कई अन्य तत्व सम्मिलित होते हैं। वैसे तो इसका किसी समय इस्तेमाल शरीर के लिए फायदेमंद ही साबित होता है, लेकिन रात को सोने से पहले इसका सेवन सेहत को चमत्कारी लाभ पहुंचाता है।


लौंग के फायदे से दांतों की सभी बीमारियों में भी मिलते हैं। लौंग के तेल को रूई के फाहे में लगाकर दांतों में लगाएं। इससे दांतों के दर्द से आराम मिलता है। इससे दांत में लगी सड़न भी समाप्त हो जाती है 


लौंग में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो लिवर को हेल्दी रखता है। लौंग खाने से लिवर अपना काम सही तरीके से कर सकता है। लिवर से संबंधित खतरनाक रोग जैसे फैटी लिवर, सिरोसिस के होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लौंग लीवर में होने वाले सूजन को भी कम करता है।


लौंग ब्लड शुगर को भी बढ़ने नहीं देता है। लौंग में नाइजेरिसिन नामक तत्व होता है, जो इंसुलिन को बढ़ाने का काम करता है और डायरेक्ट इंसुलिन के जैसे ही रिएक्ट कर डायबिटीज कंट्रोल करता है। डायबिटीज रोगियों का लौंग का सेवन रात में जरूर करना चाहिए।


लौंग पुरूषों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह पुरूषों से जुड़ी कुछ समस्याओं को भी दूर कर सकती है। यह पुरूषों की प्रजनन क्षमता में सुधार से लेकर उनके शरीर में टेस्टोस्टेरॉन लेवल को बढ़ाने मे भी कारगार है।


सुबह निराहार लौंग चूसने से थॉयराइड रोगियों को भी चमत्कारी लाभ मिलता है थायराइड ग्लैंड की आटो इम्यूनिटी को बहुत हद तक शांत करता है 


अतः जो चाहते हैं जिंदगी भर स्वस्थ स्फूर्तिमान रहें और चलते फिरते स्वस्थ जोड़ हड्डियां रहें दिन में दो लौंग अवश्य चूसें जब नर्म हो चबाकर खा जाएं 


गर्भवती महिलाओं को उल्टी होना आम बात है। खास बात यह है कि लौंग के फायदे इसमें बहुत आराम पहुंचाते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को बहुत आराम मिलता है। 1 ग्राम लौंग चूर्ण को मिश्री की चाशनी और अनार के रस में मिलाकर चाटें। इससे गर्भवती महिलाओं को होने वाली उल्टी बंद  हो जाती है।

 डॉ० जयवीर सिंह अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान पिंडारा फ्लाईओवर गोहाना रोड़ नजदीक राजमहल पैलेस जींद हरियाणा

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बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

स्त्री पुरुष कि भीतरी ऊर्जा और भक्ति योग

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 स्त्री पुरुष कि भीतरी ऊर्जा और भक्ति योग 

*पुरुष शरीर के भीतर जो ऊर्जा केन्द्र है वह लिंग से स्त्री है।

स्त्री शरीर के भीतरी जो केंद्र मे ऊर्जा हैं वह लिंग से पुरुष है।


स्त्री कि भीतर चैतन्य ऊर्जा, शिव सूक्ष्म ऊर्जा हैं ये वास्तविक चेतन उर्जा हैं ।


पुरुष के भीतर जो ऊर्जा  है वह जड़ प्रधान है इसलिए वह भीतरी तल पर भारी और जड़ उर्जा हैं इसलिए जद स्थूल होने से ये नीचे मूलाधार में स्थित हैं।


स्त्री में पुरूष ऊर्जा है शिव है वह रूपांतरण उर्जा हैं उसमें सात्विकता है  वह सत गुण भार में हल्की  सरल उर्जा है ।


पुरुष के भीतर केंद्र मे उस मूलाधार में जड़ उर्जा हैं जो AC  विद्युत की तरह खतरनाक है, ये विस्फोट झटका वाली उर्जा पुरुष के भीरत है।


जो स्त्री शरीर कि परिधि है बाहरी रंग रूप सौंदर्य है वह जड़ ऊर्जा का प्रतिक है जो पुरुष की कुंडलिनी मे मूलाधार में स्थित है, यही पुरुष का मूल अधार हैं।


स्त्री के भीतर पुरुष यानि चैतन्य ऊर्जा से उसकी वाणी उसकी चाल चलन नृत्य कूदना शरीर का मोड़ना उसके मुख्य कारण ये कि पुरूष ऊर्जा का उपयोग है ।जो सकारात्मक है , यह परमाणु रचना का प्रोटॉन जैसी ऊर्जा है।


पुरूष की भीतर जो स्त्री जड़ ऊर्जा है वह नकारात्म है। जिसे परमाणु का इलेक्ट्रॉन आवेश कहते है।जैसे पुरुष मानसिक रूप से स्थिर नहीं  है वैसे ही परमाणु मे इलेक्ट्रॉन गति शील होते हैं जो परमाणु की परिधि पर होते है।


योग धर्म संन्यास आध्यात्मिक जो भक्ति योग मार्ग हैं, यह स्त्री प्रधान है ।तब जो पुरुष पिछले जन्म में सेक्स स्त्री काम जड़ साधन के गहन अनुभवी होगा उसे काम का बोध होगा वह पुरुष सिर्फ उस जन्म में भक्ति योग में सफल होगा या समस्त स्त्री जाति भक्ति योग सफल हो सकती है ।


भक्ति जिसका हृदय चक्र  में उर्जा पूँहच गई है  ठहर गई है ,हृदय से स्त्रैण स्वभाव वाले पुरुष भक्ति में सफ़ल होते हैं ।


धर्म के विश्वाश श्रद्धा आस्था यह सब स्त्रैण है यही भक्ती मार्ग में शस्त्र है , तब यह डीबी भक्ति मार्ग में उपयोगी है ।


जिस  भक्ति गुण शस्त्र के माध्यम सी विश्वास श्रद्धा से धन साधन सफलता की मंदिरों में तीर्थों मे जो भीख मांगते है वह श्रद्धा आस्था नहीं है । जिस हथियार से भक्ति होती है उन्हें हथियार से संसार साधन संसार सुख की मांग में उपयोग करते है तब जायज हैं कि धर्म धंधा ढोंग बनेगा ही ।


 अतीत सनातन में किसी भी भक्त ने अपने श्रद्धा आस्था का उपयोग भीख मांगने के लिए र देते !तब कोई भक्त पैदा नहीं होता ?


जिसे भक्ति के मार्ग चाहिए वह अपना स्वभाव को अध्ययन करे, यदि स्वभाव में ममता करुणा दया समर्पण सेवा हो तो उसी भक्ति मार्ग में जरूर जाना चाहिए।


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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान

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 मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान –


मेथी एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग शायद आप सभी करते हैं। लेकिन मेथी का पानी पीने के फायदे भी कम नहीं हैं,


 यह मेथी में मौजूद पोषक तत्‍वों को ग्रहण करने का यह सबसे अच्‍छा तरीका है। मेथी का पानी पीने से कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है। मेथी का पानी पीने के लाभ विशेष रूप से वजन कम करने में, रक्‍त शर्करा नियंत्रित करने में, रक्‍त चाप नियंत्रित करने में, पाचन को ठीक करने, पथरी का इलाज करने आदि में होते हैं। इस आर्टिकल में आप मेथी का पानी पीने के फायदे और नुकसान जानेगें। आइए इन्‍हें जाने।


प्रकृति में गर्म होने के कारण मेथी के दानों का उपयोग भोजन पकाने के दौरान बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है। यहां तक की औषधीय उपयोग में भी मेथी की कम मात्रा ली जाती है। लेकिन मेथी के औषधीय गुणों की भरपूर मात्रा प्राप्‍त करने के लिए मेथी के पानी का उपयोग भी किया जाता है।


 1 कप मेथी का पानी बनाने के लिए 1 छोटा चम्‍मच मेथी पर्याप्‍त होती है। इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए साथ इस पानी को गर्म करना अतिरिक्‍त लाभ दिला सकता है। मेथी का पानी का नियमित सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है। आइए विस्‍तार से जाने मेथी का पानी पीने के लाभ क्‍या हैं।


मेथी का पानी फॉर वेट लॉस – 

मोटापा ग्रस्‍त लोगों के लिए मेथी का पानी पीने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। मेथी का पानी पीने से ऐसे लोग बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं। क्‍योंकि मोटापा कई बीमारियों को जन्‍म दे सकता है और मेथी का पानी मोटापे को कम करने में मदद कर सकता है। 


सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से चयापचय को बढ़ावा मिलता है। इसका सेवन करने से शरीर में प्राकृतिक गर्मी उत्‍पन्‍न होती है जो वजन घटाने में मदद करती है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो मेथी का पानी का नियमित सेवन शुरू कर सकते हैं।


मेथी का पानी पीने के लाभ महिलाओं के लिए – i


स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए विशेष रूप से मेथी का पानी फायदेमंद होता है। क्‍योंकि मेथी का पानी महिलाओं में दूध उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद करता है। मेथी का उपयोग शुरू से ही बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है लेकिन यह कई समस्‍याओं का प्रभावी उपचार कर सकता है।


 मेथी का पानी के फायदे स्‍तनपान कराने वाली माताओं के साथ ही गर्भवतियों के लिए भी फायदेमंद होता है। अध्‍ययनों से यह भी पता लगता है कि मेथी के औषधीय गुण और गर्म पानी गर्भावस्‍था को आसान बनाने में भी मदद करते हैं। इस तरह से मेथी का पानी का नियमित सेवन महिलाओं के लिए लाभकारी होता है।


मेथी का पानी बेनिफिट्स डायबिटीज के लिए –

नियमित मेथी के पानी का सेवन आपको मधुमेह की संभावनाओं से दूर रख सकता है। जब शरीर में रक्‍त शर्करा का स्‍तर अधिक हो जाता है तब मधुमेह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन आप इस समस्‍या से बच सकते हैं। मेथी रक्‍त शर्करा के स्‍तर को विनियमित करने में सहायक होती है। 


इसके अलावा मेथी के औषधीय गुण इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि अधिकांश स्‍वास्‍थ्‍य सलाहकारों द्वारा म‍धुमेह रोगी को मेथी के सेवन की सलाह दी जाती है। यदि आप मधुमेह के लक्षणों से बचना चाहते हैं तो मेथी के पानी का सेवन प्रारंभ कर दें। क्‍योंकि मधुमेह को केवल नियंत्रित किया जा सकता है ना कि इसे ठीक किया जा सकता है।


पाचन के लिए फायदेमंद मेथी का पानी पीना –


यदि आप भी पाचन समस्‍याओं से ग्रसित हैं तो मेथी का पानी का उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। आपकी पाचन व्‍यवस्‍था को खराब करने का प्रमुख कारण अम्‍लता है। लेकिन मेथी का पानी का सेवन कर आप अपने पाचन को ठीक कर सकते हैं।


 मेथी में अम्‍लत्‍वनाशक (antacid) गुण होते हैं। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्‍याएं होती हैं उन्‍हें नियमित रूप से मेथी का पानी पीना चाहिए। मेथी का पानी पाचन तंत्र को मजबूत करने और गैस्ट्रिटिस और सूजन आदि को कम करने में सहायक होता है। सर्दीयों के मौसम में मेथी का पानी पीना अधिक फायदेमंद होता है।


मेथी दाने का पानी पीने के फायदे किडनी के लिए 


आप मेथी के पानी का उपयोग अपने गुर्दे के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। यदि आप मेथी के पानी को गर्म करके पीते हैं तो यह और भी फायदेमंद होता है। यह शरीर में मौजूद विषाक्‍त पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है। इसके साथ ही मेथी का पानी का सेवन सुबह जल्‍दी उठने में भी सहायक होता है। आप अपने गुर्दे के कामकाज को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने के लिए मेथी के पानी का नियमित सेवन कर सकते हैं।


मेथी वाटर बेनिफिट्स फॉर स्किन – 

त्‍वचा को सुंदर और गोरा बनाने के लिए आप मेथी का पानी का सेवन कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि मेथी के फायदे पाचन को ठीक करने और विषाक्‍त पदार्थों को दूर करते हैं। ये विषाक्‍त पदार्थ ही आपकी त्‍वचा की सुंदरता को कम करने के लिए जिम्‍मेदार होते हैं।


 सुबह के समय मेथी का पानी का सेवन आपकी त्‍वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यह दोषमुक्‍त त्‍वचा प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय भी है। आप भी मेथी का पानी का उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।


मेथीदाना का पानी पीने के लाभ सूजन कम करे –

अपने एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों के कारण मेथी हमें कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाती है। मेथी का पानी का सेवन करने का एक और लाभ सूजन को कम करना है। इसका तात्पर्य यह है कि नियमित रूप से मेथी के पानी का सेवन करने से गठिया, पुरानी खांसी से गले की सूजन, ब्रोंकाइटिस, मुंह के छालों की सूजन, फोड़े आदि को ठीक करने में मदद करती है। यदि आप इस तरह की किसी भी समस्‍या से ग्रसित हैं तो मेथी के पानी के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।


मेथी का पानी पीने के फायदे हृदय स्‍वास्थ्‍य के लिए – 

दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आप मेथी के दानों का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन मेथी स्‍वाद में थोड़ी कड़वी होती है इसलिए इसका सेवन करने के बजाए मेथी के पानी का सेवन अधिक सुविधाजनक होता है। 


मेथी का पानी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। यह कोलेस्‍ट्रॉल आपकी रक्‍त वाहिकाओं में जमा हो कर रक्‍त परिसंचरण को अवरूद्ध कर सकता है। जिससे आपके हृदय के काम काज को प्रभावित किया जा सकता है। लेकिन मेथी का पानी का नियमित सेवन इस संभावना को कम करने में प्रभावी योगदान देता है।


मेथी दाना का पानी पीने के फायदे बुखार में –

मेथी के पानी का विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में से एक लाभ यह भी है कि यह शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने में सहायक होती है। इसके लिए आप 1 छोटे चम्‍मच मेथी के बीज लें और इसे 1 गिलास पानी में भिगों कर रात भर के लिए छोड़ दें। अगली सुबह आप इस पानी को पिएं और बचे हुए मेथी के बीजों को पीस लें। 


इससे बने पेस्‍ट को अपने माथे में लगाएं। यह शीतलन प्रभाव के कारण आपके शरीर के उच्‍च तापमान को कम करने में सहायक होता है।


मेथी का पानी पीने के नुकसान –


मेथी के पानी के उपयोग के साइड इफेक्ट्स में डायरिया, पेट फूलना और चक्कर आना शामिल है, लेकिन ये सभी अस्थायी होते हैं।


इसमें एक विशिष्ट और तेज गंध है, और कई लोगों ने बताया है कि उनके मूत्र और पसीने में गंध आती है।


जो लोग चने के लिए एलर्जी हैं वे मेथी के प्रतिकूल प्रतिक्रिया भी कर सकते हैं क्योंकि दोनों पौधों में समान प्रोटीन और एलर्जेंस होते हैं।


मेथी हाइपरथायरायडिज्म (चूहों में किये गए अध्ययन) का कारण बन सकती है, इसलिए थायराइड समस्याओं वाले लोगों को मेथी से बचना चाहिए।


चूंकि मेथी गर्भाशय संकुचन को प्रभावित करती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसे नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन स्तनपान के दौरान और बाद में यह सुरक्षित है #photographychallengechallenge #photo #photochallenge #photooftheday Rajiv dixitji official

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चमत्कारिक पेय (काढा ) मधुमेह नियंत्रण उच्चरक्तचापऔर कैंसर जैसी बीमारी को भी अलविदा कहने में आपकी मदद करेगा

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 यह चमत्कारिक पेय (काढा ) आपको आश्चर्यचकित कर देगा आपके शरीर में विभिन्न रोगों के लिए #मधुमेह नियंत्रण  #उच्चरक्तचापऔर  #कैंसर जैसी बीमारी को भी अलविदा कहने में आपकी मदद करेगा !!!!!


सामग्री जिसकी आपको आवश्यकता होगी


1..➡️ 4 तेज पत्ते


2..➡️ मुट्ठी भर सूखे हिबिस्कस फूल (जमैका फूल)


3..➡️ 6 अच्छी तरह धुले हुए अमरूद के पत्ते


4..➡️ 3 कप पानी


इस शक्तिशाली हर्बल पेय को कैसे तैयार करें


1.. एक बर्तन  पैन को स्टोव पर रखें।

2.. इसमें तेजपत्ता, गुड़हल के फूल और अमरूद के पत्ते डालें।

3.. इसमें तीन कप पानी डालें।

4.. मिश्रण को उबालें और 15 मिनट तक पकने दें।

5.. मिश्रण को छान लें और कप या कांच के बर्तन में परोसें।


इसका उपयोग कैसे करना है

इस हर्बल अर्क का एक कप लगातार 10 दिनों तक रोजाना पियें। आप यह देखकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे कि यह आपके स्वास्थ्य को कैसे बदल सकता है!


,➡️➡️➡️➡️♈ इस तरह के प्राकृतिक उपचार शक्तिशाली हैं, फिर भी दवा कंपनियाँ नहीं चाहतीं कि आप उनका इस्तेमाल करें ।

जानिए उनके बारे में.


यह हर्बल उपचार क्यों काम करता है?

➡️ #तेजपत्ता: रक्त शर्करा विनियमन और पाचन में सहायता करता है।


➡️ #हिबिस्कस फूल: रक्तचाप कम करने में मदद करें

रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।


➡️ #अमरूद के पत्ते: इंसुलिन बढ़ाते हैं

संवेदनशीलता को कम करें, सूजन को कम करें और पाचन में सुधार करें।


इस सरल किन्तु अत्यधिक प्रभावी हर्बल उपचार से अपने स्वास्थ्य की देखभाल करें - बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रकृति के पास रहे और प्राकृतिक वस्तुएं ही उपयोग करें

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हृदय का राजा अर्जुन छाल

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 हृदय  का राजा अर्जुन छाल ।।


अर्जुन एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो विशेष रूप से हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दिल की मांसपेशियों को मजबूत करने, उन्हें टोन करने और हृदय को ऊर्जा देने के लिए एक प्रमुख औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। अर्जुन की छाल का सेवन हृदय के सभी पहलुओं का समर्थन करने और इसके स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

शरीर में आई सूजन को घटाने के लिए भी अर्जुन की छाल अच्छी मानी गई है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन घटाते हैं


अर्जुन की छाल के मुख्य फायदे:


1. हृदय को मजबूत बनाती है – अर्जुन छाल रक्त संचार को सही रखती है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ बनाए रखती है।


2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है – हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर दोनों को संतुलित करने में मददगार है।


3. कोलेस्ट्रॉल कम करती है – खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायक है।


4. दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है – अनियमित धड़कनों (Arrhythmia) को सही करने में मदद करती है।


5. ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है – मधुमेह के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।


6. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर – शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करके एंटी-एजिंग प्रभाव डालती है।


7. लिवर और किडनी के लिए लाभकारी – यह लिवर को डिटॉक्स करने और किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करती है।


8. तनाव और चिंता को कम करती है – यह एक प्राकृतिक एडेप्टोजेन है, जो मानसिक शांति देती है।


9. पाचन में सुधार – अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में फायदेमंद होती है।


10. घाव भरने में मदद करती है – त्वचा के घावों को जल्दी भरने में उपयोगी है।


अर्जुन की छाल का उपयोग कैसे करें?

आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, अर्जुन की छाल का सबसे प्रभावी उपयोग अर्जुन की छाल की चाय के रूप में होता है। 


1. अर्जुन चाय – 1 चम्मच अर्जुन की छाल पाउडर को 1 कप पानी में उबालकर दिन में 1-2 बार पिएं।


2. अर्जुन दूध – आधा चम्मच अर्जुन छाल पाउडर को 1 गिलास दूध में उबालकर सेवन करें।


3. कैप्सूल या टैबलेट – आयुर्वेदिक स्टोर्स में उपलब्ध अर्जुन कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।


सावधानियाँ:


गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


किसी भी दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है।


अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में शामिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।।।


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कच्ची इमली खाने के है इतने फायदे लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

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 इमली में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है. यह शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है. इसके रोजाना सेवन से शरीर साफ रहता है, पेट और अन्य अंगों 

कच्ची इमली खाने के है इतने फायदे लेकिन इन बातों का रखें ध्यान

पाचन- इमली में प्राकृतिक फाइबर होता है जो पाचन को सुधारने में मदद करता है. ...

इम्यूनिटी- इमली में विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मददगार हैं. ...

दिल- हार्ट के मरीजों के लिए फायदेमंद है इमली का सेवन. ...

मोटापा- ...

सूजन- ...

स्किन-

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इमली में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है. यह शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है. इसके रोजाना सेवन से शरीर साफ रहता है, पेट और अन्य अंगों की गंदगी दूर होती है 


रोजाना इमली खाने से शरीर में आता है ये बड़ा बदलाव, दूर होती हैं खतरनाक बीमारियां


इमली पुरुषों के लिए कई तरह से फ़ायदेमंद होती है. यह पुरुषों की यौन समस्याओं को दूर करने में मदद करती है. साथ ही, यह इम्यूनिटी को भी बढ़ाती है. 

इमली के फ़ायदे:

इमली में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है. यह पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करता है. 

इमली के चूर्ण का सेवन करने से लो-स्पर्म काउंट की समस्या दूर होती है. 

इमली का सेवन करने से इनफ़र्टिलिटी से बचा जा सकता है. 

इमली का सेवन करने से लिबिडो हार्मोन बढ़ता है. 

इमली का सेवन करने से फैटी लीवर की समस्या नहीं होती. 

इमली का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ती है. 

इमली में कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनका अच्‍छा असर स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है. 

इमली में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीड साभार Facebook 

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वंशलोचन स्त्री प्रजाति के बाँस पेड़ों से प्राप्त एक प्रकार की हर्बल सिलिका है

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 वंशलोचन स्त्री प्रजाति के बाँस पेड़ों से प्राप्त एक प्रकार की हर्बल सिलिका है,बांस सिलिका (FOLIUM BAMBUSEA) में अन्य सिलिका स्रोतों की तुलना में अधिक सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है। इसमें लगभग 70 से 90% सिलिका होती है। इसमें मुख्य तौर पर सिलिका (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) होती है, जो हड्डियों, स्नायुबंधन, tendons और त्वचा के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।


👉इसमें शरीर के लिए आवश्यक अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है l वंशलोचन का शरीर के ऊतकों पर पुनर्स्थापनात्मक प्रभाव होता है।


वंशलोचन में कई औषधि गुण होते है।👇👇


👉आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, इसलिए यह सितोपलादि चूर्ण का एक मुख्य घटक है जिसका उपयोग इम्युनो-मॉड्यूलेटर के रूप में किया जाता है।


👉यह सर्दी और बहती नाक के लिए बहुत प्रभावी दवा है।


👉वंशलोचन में अल्सर से बचाव करनेवाले गुण हैं। प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, और यशद भस्म के साथ, यह पेप्टिक अल्सर और आंत्र सूजन के रोगों जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस और Crohn's disease में उत्कृष्ट परिणाम देता है।


👉बालों के विकास को प्रोत्साहित कर बालों को मजबूत बनाता है। यह प्रभाव उसमें स्थित प्राकृतिक सिलिका के कारण है। इसमें मौजूद सिलिका बालों को पतला होने से और बाल झड़ने से रोकता है।


👉वंशलोचन के गुण-लाभ और प्रयोग- वंशलोचन उत्तेजक, ज्वरहर, कफनि:सारक, बल्य, वृष्य, प्यासशमन करने वाला, उद्वेष्ठननिरोधि एवं माही होता है।


👉वंशलोचन से वसनसंस्थान की श्लेष्मलकला को पुष्टि मिलती है तथा कफ की मात्रा कम होती है।


👉वंशलोचन से बने हुए सितोपलादि चूर्ण का व्यवहार जीर्णज्वर, श्वास, कास, क्षय, मन्दाग्नि, कमजोरी, कफ में खून जाना, दाह, पूयमेह, मूत्रदाह तथा वातविकार एवं सर्पदंश में किया जाता है।


👉इसकी कोमल गांठ तथा पत्रों का क्वाय गर्भाशय संकोचक होता है। इसका उपयोग प्रसूता में आतंवशुद्धि के लिए एवं अन्य आर्तव विकारों में किया जाता है।


👉वंशलोचन के कोमलपत्र का उपयोग कफ से खून जाना, कुष्ठ, ज्वर तथा बच्चों के सूत्रकृमि में किया जाता है।


👉वंशलोचन के प्रांकुर (Shoots) का रस निकालकर कृमियुक्त थावों पर डाला जाता है तथा बाद में उसका पुल्टिस उन पर बाँध दिया जाता है।


👉जिन लोगों का पाचन ठीक नहीं होता उनको इसके कोमल प्रांकुरों से बने सिरके का उपयोग मांस-मछली के साथ देना उपयोगी होता है। इससे भूख बढ़ती है तथा पाचन भी ठीक होता है।


👉वंशलोचन की गाँठों को पीसकर जोड़ों के दर्द पर उसका बन्धन उपयोगी है।


👉वंशलोचन के बीज को गरीब लोग चावल के रूप में खाते हैं।


👉वंशलोचन का मूल विस्फोटक व्याधियों (Eruptive affections) में बहुत उपयोगी है तथा दाद पर लाभदायक है।

वंशलोचन के पुष्परस का उपयोग कर्णबिन्दु के रूप में कर्णशूल एवं बाधिर्य आदि में किया जाता है।


👉सेवन विधि एवं मात्रा- वंशलोचन चूर्ण 1 ग्राम सादे जल या गुनगुने दूध से लेना हितकारी रहता है।


👉अमृतम द्वारा निर्मित लोजेन्ज माल्ट में वंशलोचन का विशेष पध्दति द्वारा मिश्रण किया जाता है।


👉सावधानियां : आयुर्वेद के अनुसार, वंशलोचन ज्यादा मात्रा में लेना प्रोस्टेट ग्रंथि और फेफड़ों के लिए अच्छा नहीं है I पथरी होनेपर और स्तनपान के दौरान इसका प्रयोग ना करे l

पोस्ट fb sabhar 🙏

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