Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Comments

You might like

Subscribe Us

रविवार, 24 जुलाई 2022

समझदार कंप्यूटर

0

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की रिसर्च में सबसे बड़ी चुनौती है एक समझदार कंप्यूटर बनाना. कुछ लोग आगाह करते हैं कि यह तकनीक हमारे वजूद को खतरे में डाल सकती है. अगर मशीन हमसे भी ज्यादा स्मार्ट बन बैठे, तब क्या होगा? टेक्टोपिया के इस एपिसोड में हम बात करेंगे एआई की दुनिया की और उन सवालों की, जो मानवता के सामने मुंह बाए खड़े हैं. sabhar dw.de

Read more

बुधवार, 20 जुलाई 2022

घर को ठंडा रखेंगे खास तौर से तैयार किए गए शीशे

0

एयरकंडीशनर अब बीते दिनों की बात होगी क्योंकि वैज्ञानिकों ने शीशे की ऐसी खिड़कियां तैयार कर ली हैं जो गर्मी में ठंडक और जाड़े में गर्मी का अहसास दिलाएगी। खास रसायन की परत वाले ये शीशे कम आय वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। भारत जैसे विकासशील देशों में तो खास किस्म की परत वाले शीशों से बनी खिड़कियां धूम मचा सकती हैं। 'क्वींसलैंड यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' के शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैंसों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार एयरकंडीशनर का यह 'इको फ्रेंडली' विकल्प होगा। शोधकर्ताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के चमकदार परत वाले शीशों से घरों में बेतहाशा ऊर्जा की खपत कम कर 45 फीसदी तक बिजली की बचत हो सकेगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आयेगी। शोधकर्ता 'डॉ. बेल' के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में एयरकंडीशनरों का बहुत बड़ा हाथ है। उनके मुताबिक वातानुकूलित घरों और आफिसों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है । बेल ने कहा कि बाजार में उपलब्ध ये शीशे एयरकंडीशनर के मुकाबले तो कूलिंग नहीं करेंगे पर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए ये काफी हैं। ऐसे शीशे वाली खिड़कियों में टिंटेड ग्लास, फिर एयरगैप और उसके बाद खास किस्म की ऊष्मारोधी परत वाले लो-ई ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। बेल के अनुसार अच्छी खिड़कियां घरों को ऊष्मारोधी बनाने में मदद करती हैं। इससे जाड़ों में घर गर्म रहता है और गर्मी में ठंडा । शोधकर्ता ने कहा कि शीशे पर रासायनिक परत वाले और खास किस्म की खिड़कियों के ढांचे जल्द ही हर घर की शोभा बढ़ाएंगे। sabhar dipak kohali vigyan pragati

Read more

डायबिटीज से बचाते हैं खट्टे फल

0

दीपक कोहली sabhar vigyan pragati कनाडा के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि खट्टे फल वजन बढ़ने, टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग के खतरे को कम करते हैं। 'ओंटेरियो यूनीवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि खट्टे फलों में पाये जाने वाला 'फ्लेवोनॉयड नैरीनजेनिन' तत्व शरीर में अतिरिक्त वसा को नष्ट कर देता है और वजन बढ़ने से भी रोकता है। इसमें इंसुलिन जैसे गुण भी पाये जाते हैं जो डायबिटीज को रोकने में सहायक सिद्ध हुए हैं। फ्लेवोनॉयड तत्व पौधों में पाया जाता है और मनुष्यों में यह एंटीऑक्सीडेंट की सक्रियता बढ़ाने का काम करता है । अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि यह तत्व लीवर में आनुवंशिक ढंग से अतिरिक्त वसा को नष्ट करता है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर इसके सफल प्रयोग किये हैं।

Read more

जीन्स में छिपा है दीर्घायु का राज

0

। जर्मनी के गुटनबर्ग में 12 जून से 15 जून तक यूरोपियन ह्यूमन जेनेटिक्स कांफ्रेंस 2010 सम्पन्न हुई थी इस कांफ्रेंस में बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रो. पाओला सेविस्टियनी द्वारा प्रस्तुत शोध में बताया गया था कि स्वस्थ मनुष्य की जीवन शैली व वातावरण के आधार पर आयु 80 वर्ष होती है। इससे अधिक जीवित रहने का कारण जीन्स में निहित होता है। प्रो. पाओला ने अधिक उम्र वाले लोगों के डीएनए स्कैनिंग टेक्नोलॉजी के जरिये दर्शाया। उन्होंने बताया है कि मानव शरीर में 30 करोड़ (300 मिलियन) जींस में से 150 जींस इससे संबंधित होते हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है । 110 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्ति एक करोड़ में एक होते हैं। जिनमें से 85 से 90 फीसदी महिलायें होती हैं ।

Read more

कैंसर को खत्म करने वाले टीके का निर्माण

0

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टीका बनाने का दावा किया है जो सर्वाधिक घातक किस्म के कैंसरों को भी ठीक कर सकता है । मिडिलसेक्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रे आइल्स के अनुसार स्तन, पेट, अग्न्याशय, सर्विकल और अंडाशय के कैंसर से पीड़ित रोगियों पर परीक्षित इस इंजेक्शन को अगले पांच सालों के दौरान बाजार में उतार दिया जाएगा । अमेरिकी फर्म सेलफेडेक्स थिनेपियूटिक्स के साथ संयुक्त रूप से इस इंजेक्शन को विकसित किया जा रहा है। आईल्स का कहना है कि इस टीके से कैंसर को सिकोड़ा जा सकता है ताकि वह आगे नहीं बढ़े।

Read more

सोमवार, 18 जुलाई 2022

जापान चांद और मंगल पर अपने ट्रेन चलाएगा

0

 यह वीडियो अंकित अवस्थी का है उन्होंने समाचार पत्रों का रिसर्च करके बनाया है अंकित अवस्थी जी ने काफी गहराई से इसका अध्ययन किया है इसमें जापान के वैज्ञानिकों ने दावा किया है की सन 2050 के बाद चांद और मंगल के लिए ट्रेन चलाई जाएगी यह मैग्नेट पद्धति के ट्रेन पर आधारित होगी यात्रियों को चांद और मंगल पर जाने की यह सुविधा हो जाएगी


Read more

शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

गुदा कैंसर की नई दवा ने जगाई उम्मीदें

0

 अमेरिका में एक प्रयोग में शामिल हुए एक दर्जन से ज्यादा मरीजों का कैंसर ठीक होने को वैज्ञानिकों ने अद्भुत नतीजा बताया है. ये मरीज एक छोटी क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा थे.

न्यूयॉर्क के मेमॉरियल सलोन केटरिंग (एमएसके) कैंसर सेंटर की एक क्लिनिकल ट्रायल में शामिल हुए गुदा कैंसर के मरीजों का कैंसर पूरी तरह ठीक हो गया. सेंटर ने बताया कि इन मरीजों को एक प्रायोगिक दवा डोस्टरलाइमैब दी गई थी. रविवार को यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था.

सबका कैंसर ठीक हुआ

प्रकाशित अध्ययन में गुदा कैंसर से पीड़ित रहे 12 मरीजों का ब्यौरा दिया गया है. अध्ययन के मुताबिक मरीजों को हर तीन हफ्ते पर डोस्टरलाइमैब दी गई. यह प्रयोग छह महीने तक चला. प्रयोग के दौरान डॉक्टर यह मानकर चल रहे थे कि मरीजों को इसके बाद कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी आदि जैसे पारंपरिक इलाज कराने होंगे.

यह भी पढ़ेंः स्तन कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी कामयाबी, नई दवा और नई श्रेणी

लेकिन छह महीने बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रयोग में शामिल सभी मरीजों का कैंसर ठीक हो गया था. ऐसा पहली बार है जबकि किसी परीक्षण में सभी कैंसर के मरीजों को सकारात्मक नतीजे मिले हैं. इसलिए वैज्ञानिकोंके बीच इस दवा को लेकर खासा उत्साह है और वे इसे दिशा बदलने वाला प्रयोग मान रहे हैं.

मेमॉरियल सलोन केटरिंग सेंटर के डॉ. लुईस डियाज जूनियर ने न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें किसी और ऐसे अध्ययन की जानकारी नहीं है जिसमें हर मरीज का कैंसर ठीक हो गया हो. उन्होंने कहा, "मेरे विचार में कैंसर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है."

इम्यूनोथेरेपी

यह प्रयोग इम्यूनोथेरेपी पर आधारित था. इम्यूनोथेरेपी में ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिनका काम शरीर की रोगों से लड़ने वाली क्षमता को बढ़ाना होता है ताकि शरीर इतना ताकतवर हो जाए कि कैंसर को ठीक कर सके. एमएसके ने एक बयान में कहा कि प्रयोग में गुदा के कैंसर से पीड़ित ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था जिनमें एक खास तरह का कैंसर म्यूटेशन था.

ऐसे गुदा कैंसर को "मिसमैच रिपेयर डेफिशिएंट" (MMRd) रेक्टल कैंसर कहा जाता है. इस तरह के कैंसर में कीमोथेरेपी का ज्यादा असर नहीं होता है. परीक्षण के दौरान शोधकर्ता देखना चाहते थे कि क्या सिर्फ इम्यूनोथेरेपी से ऐसे कैंसर को ठीक किया जा सकता है, जो अन्य उत्तकों और अंगों में ना फैला हो.

अध्ययन कहता है कि प्रयोग अभी चल रहा है लेकिन जिन 14 मरीजों को दवा दी गई, उन सभी का ट्यूमर खत्म हो गया और किसी पर भी कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. शोधकर्ताओं ने कहा कि किसी भी मरीज को रेडिएशन, सर्जरी या कीमोथेरेपी आदि की जरूरत नहीं है और दो साल से ये मरीज बिल्कुल ठीक हैं. किसी भी मरीज का कैंसर लौटा नहीं है.

शोध में शामिल एमसके की डॉ. ऐंड्रिया केरचक कहती हैं, "मरीजों से ये खुशियों से भरे संदेश और ईमेल पाना अविश्वसनीय रूप से प्रसन्नता देने वाला है. मरीजों को अहसास हो रहा है कि वे अपनी सभी शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से कर पाएंगे, जो रेडिएशन थेरेपी से संभव ना होता."

रिपोर्टः विवेक कुमारhttps://www.dw.com/hi/small-trial-sees-potential-for-new-rectal-cancer-drug/a-62168893

Read more

गुरुवार, 14 जुलाई 2022

क्या है ॐ ध्वनि का रहस्य भाग

1

 ....4


वास्तव में, स्त्री शरीर भी अधूरा शरीर है और पुरुष शरीर भी अधूरा शरीर है; इसलिए सृजन के क्रम में उन दोनों को संयुक्त होना पड़ता है। यह संयुक्त होना दो प्रकार का है। एक पुरुष का शरीर अगर बाहर की स्त्री से संयुक्त हो, तो प्रकृति का सृजन होता है तो प्रकृति की तरफ यात्रा शुरू होती है।


और एक पुरुष का शरीर अगर अपने ही पीछे छिपे स्त्री शरीर से संयुक्त हो, तो ब्रह्म की तरफ का जन्म शुरू होता है ; परमात्मा की तरफ यात्रा शुरू होती है। ऊर्ध्वगमन का यात्रा पथ यही है..भीतर की स्त्री से संबंधित होना, और भीतर के पुरुष से संबंधित होना।


वास्तव में ,जो ऊर्जा है, वह सदा पुरुष से स्त्री की तरफ बहती है ...चाहे वह बाहर की तरफ बहे और चाहे वह भीतर की तरफ बहे। अगर पुरुष के भौतिक शरीर की ऊर्जा भीतर के स्त्री शरीर के प्रति बहे, तो फिर ऊर्जा बाहर विकीर्ण नहीं होती -ब्रह्मचर्य की साधना का यही अर्थ है।


 तब वह निरंतर ऊपर चढ़ती जाती है। चौथे शरीर तक उस ऊर्जा की यात्रा हो सकती है। चौथे शरीर पर ब्रह्मचर्य पूरा हो जाता है। इसके बाद ब्रह्मचर्य जैसी कोई चीज नहीं है; क्योंकि चौथे शरीर को पार करने के बाद साधक न पुरुष है और न स्त्री है।


अब यह जो एक नंबर का शरीर और दो नंबर का शरीर है, इसी को ध्यान में रखकर अर्धनारीश्वर की कल्पना कभी हमने चित्रित की थी। बाकी वह प्रतीक बनकर रह गई और हम उसे कभी समझ नहीं पाए। शिव शंकर अधूरे हैं,देवी पार्वती अधूरी है ..वे दोनों मिलकर एक हैं।


अर्धनारीश्वर का कि आधा अंग पुरुष का है, आधा स्त्री का है। यह जो आधा दूसरा अंग है, यह बाहर प्रकट नहीं है, यह प्रत्येक के भीतर छिपा है। तुम्हारा एक पहलू पुरुष का है, तुम्हारा दूसरा पहलू स्त्री का है। वास्तव  में, ये एक -दूसरे के परिपूरक हैं,ये दो इकाइयां नहीं हैं, ये एक ही इकाई के दो पहलू हैं।


आप देखेंगे कि पुरुष जब दिनभर कार्य करता तो उसका पहला शरीर थक जाता है। घर लौटते-लौटते वह पहला शरीर विश्राम चाहता है। भीतर का स्त्री शरीर प्रमुख हो जाता है, पुरुष शरीर गौण हो जाता है। स्त्री दिन भर स्त्री रहते-रहते पहला शरीर थक जाता है, उसका दूसरा शरीर प्रमुख हो जाता है।


इसलिए स्त्री पुरुष का व्यवहार करने लगती है और पुरुष स्त्री का व्यवहार करने लगता है ...रिवर्सन हो जाता है। ऊर्जा के आंतरिक प्रवाह ऊर्ध्व गमन का मार्ग है कि बाहर के पुरुष का भीतर की स्त्री से मिलन या बाहर की स्त्री का भीतर के पुरुष से मिलन। 


पुरुष शरीर के जो विशेष गुण हैं, वह पहला गुण यह है कि वह आक्रामक है ,दाता है, दे सकता है, ले नहीं सकता। लेकिन पुरुष ग्रहण नहीं कर पाता; उसकी ग्रहण करने की क्षमता बहुत कम है। इसलिए पुरुषों ने धर्म को जन्म तो दिया, लेकिन पुरुष धर्म का संग्रह नहीं करते।


बल्कि स्त्रियां धर्म का संग्रह करती है। स्त्री दे नहीं सकती, ले सकती है।परन्तु इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी महिमा यही है कि जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका दूसरा शरीर पुरुष का;पुनः तीसरा शरीर स्त्री का और चौथा पुरुष का। इस प्रकार जिसका पहला शरीर पुरुष का है।


 उसका दूसरा शरीर स्त्री का ;पुनः तीसरा पुरुष का और चौथा स्त्री का। चौथे शरीर के बाद स्त्री पुरुष शरीर का भेद भी खत्म हो जाता है। उनका ऊर्ध्व गमन हो जाता है। जिसका पहला शरीर स्त्री का है ;उसका चौथा शरीर पुरुष का है। जिसका पहला शरीर पुरुष का है ;उसका चौथा शरीर स्त्री का है।


इसलिए चौथे शरीर में स्त्रियां देने वाली है दाता है और चौथे शरीर में पुरुष लेने वाले भिक्षुक हैं। सांसारिक जगत में 3 शरीरों का वर्चस्व है। परंतु आध्यात्मिक जगत में यात्रा चौथे शरीर से ही शुरू होती है। स्त्रैण व्यक्तित्व का मतलब यह है कि उनमें स्त्रैण गुण हैं।


कोमलता, प्रेम, ममता, करुणा और अहिंसा आदि वे बढ़ गए; हिंसा क्रोध खत्म हो गया, आक्रमण विदा हो गया। जब भी कोई मुल्क आध्यात्मिक होगा, तो स्त्रैण हो जाएगा; और जब भी स्त्रैण होगा, तब अपने से बहुत साधारण सभ्यताएं उसको हरा देंगी।


सामान्य चौथे शरीर मे ॐ ध्वनि सुनने लगती ओर यात्रा पूर्ण समझ लोग रुक जाते। किन्तु गुरु परंपरा में गुरुजन सदैव कहते कि चौथे शरीर में जल्द आगे बढ़ो साधना समय दोगुना कर दो। क्योकि अगला शरीर आत्म शरीर है वही आपका पहला जन्म होगा स्वयं से। 


उससे पहले न जन्म है न मृत्यु हम किसी ओर के गर्भ से जन्म लेते रहते यह जीवन चक्र यू ही चलता रहता। आत्म शरीर स्वयं से जन्म लेता फिर आप को पराए गर्भ से मुक्ति मिल जाती। इसे मुक्ति कहा है यह मोक्ष या निर्वाण नही है अभी यात्रा बाकी है। 


उदहारण के लिए बौद्ध तिब्बत से निकाल दिए गए या भारत को जिन लोगों ने हराया, वे भारत से बहुत पिछड़ी हुई सभ्यताएं , एक अर्थ में बिलकुल बर्बर सभ्यताएं थीं। लेकिन हम अध्यात्म में दाता हो गए थे, हम उनको आत्मसात ही कर सके, लड़ने का कोई उपाय न था।


तो ऐसी प्रक्रियाएं हैं कि इसी हालत में व्यक्तित्व का रूपांतरण किया जा सकता है..जो तुम्हारा नंबर दो का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर एक का शरीर हो सकता है; और जो तुम्हारे नंबर एक का शरीर है, वह तुम्हारे नंबर दो का शरीर हो सकता है। 


इसके लिए प्रगाढ़ संकल्प की साधनाएं हैं, जिनसे तुम्हारा इसी जीवन में भी शरीर रूपांतरित हो सकता है। परंतु समस्या तब आती है जब हम चौथे शरीर पर ही रुक जाते हैं। चौथे शरीर के बाद पांचवें ,छठवें और सातवें शरीर की भी तो यात्रा है।


भारत चौथे शरीर पर ही रुक गया इसलिए हार गया। उदाहरण के लिए  गोपिओं को श्री कृष्ण सखी प्रतीत होते हैं; परंतु क्या महाभारत में भी उनका व्यक्तित्व ऐसा है? नही, क्योंकि उनकी यात्रा छटे शरीर की हैं। श्री कृष्ण छटे ब्रह्म शरीर मे है । भारत चौथे शरीर पर रुक गया तो हार गया।


इसीलिए चौथे शरीर के बाद रुकना नहीं हैं... सातवें शरीर तक जाना हैं। राग से शुरू कर वैराग्य के रास्ते वीतरागता तक जाना वैराग्य पर रुकना नही है। जो संसार मे लिप्त होता उसे रागी कहते ओर जो संसार को मिथ्या मान दूर भागता उसे वैरागी कहते। 


राग ओर वैराग्य से ऊपर की अवस्था होती वीतरागता। यहाँ न संसार को पकड़ा होता न ही छोड़ा होता। पूर्ण आनन्द की अवस्था होती यह। जहाँ सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए योगी जन मोक्ष की तरफ बढ़ते रहते राजा जनक की तरह। 


ॐ ध्वनि चौथे शरीर पर सुनाई देती आगे की यात्रा निःशब्द है इस लिए इसे सातवे का प्रतीक माना गया किंतु ॐ ध्वनि सुनने के उपरांत भी बढ़ते रहना है ।Sabhar kundalni shadhana avam yog Facebook wall

Read more

मंगलवार, 12 जुलाई 2022

यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए युटुब क्रिएटर्स ऑफ इंडिया की तरफ से नई जानकारी

0


https://youtu.be/x2ApKFFWsO4 

यूट्यूब कौन सी नई जानकारी लेकर आ रहा है इस तरीके से आप अपने यूट्यूब चैनल से अच्छी कमाई कर सकते हैं यूट्यूब की क्या नहीं किया है यूट्यूब वीडियो में अच्छी जानकारी दी गई है

Read more

स्तूपासन के फायदे

0

https://vigyanik.quora.com -

  • यहा आतो के इन्फेक्शन को ख़त्म करता है।
  • स्तूपासन आसन करने से पेट के स्नायुओं को शक्ति मिलती है तथा नाड़ी संस्थान को यह व्यवस्थित करता है।
    इस आसन के अभ्यास से कब्ज, पेट के विकार और वीर्य दोष दूर होते हैं तथा पूरा शरीर शुद्ध होता है।
  • उच्च स्तर पर कुण्डलिनी को जागृत करने में भी इस आसन का अभ्यास ज्यादा फायदेमंद है।
  • स्तूपासन आसन आतों की गंदगी को साफ करता है तथा पाचन क्रिया में वृद्धि करने में भी इस आसन के अनेक लाभ है

स्तूपासन करने की विधि -

  • स्तूपासन करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • अब अपने दाएं पैर को बाएं जांघ पर रखें तथा बाएं पैर को दाएं जांघ पर रखें।
  • इसके बाद दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध कर पीछे की ओर ले जाएं। अब दाएं हाथ की मुट्ठी को बाएं हाथ में कसकर पकड़ के नीचे की ओर करके रखें।
  • इसके बाद गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए सामने की ओर जितना झुकना संभव हो जब चाहें मुट्ठियों को कसकर पकड़ कर रखें।
  • आसन की इस स्थिति में 3 से 10 सेकंड तक रहें और सांस को रोक कर रखें।
  • सांस को छोड़ते हुए धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं

Read more

क्या हाइड्रोजन वाकई जादुई ईधन है ?

0

 


हाइड्रोजन ऊर्जा का एक रूप है। यह ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। बिजली की थोड़ी मात्रा का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। हाइड्रोजन गैसोलीन से बेहतर है क्योंकि यह एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है। इसकी ऊर्जा स्वच्छ, पोर्टेबल और नवीकरणीय है। जब हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में जलाया जाता है, तो केवल जलवाष्प और ऊष्मा उत्सर्जित होती है। आपको हाइड्रोजन ईंधन से कोई धुआं नहीं दिखाई देगा। हाइड्रोजन ईंधन हमारे पर्यावरण को बचाता है और हमारी हवा को सांस लेने के लिए स्वस्थ बनाता है।

हाइड्रोजन ईंधन वह ईंधन है जो हाइड्रोजन से बनता है। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे आम तत्वों में से एक है। इससे सूर्य और तारे बनते हैं। यह पानी, मीथेन और अमोनिया में भी है। यह सबसे हल्का तत्व है और इसे पहले कभी ईंधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया गया है।

हाइड्रोजन से चलने वाले ईंधन सेल, वाहन वे वाहन हैं जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया से एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प है। ईंधन सेल एक उपकरण है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच प्रतिक्रिया से बिजली पैदा करता है। इस प्रक्रिया से एकमात्र उत्सर्जन गर्मी और पानी है। ईंधन सेल बैटरी से अलग होते हैं। एक ईंधन सेल लगातार बिजली पैदा करता है जबकि एक बैटरी केवल तब तक बिजली पैदा करती है जब तक बैटरी के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया ऊर्जा जारी करती है।

Jyotsana Pal की प्रोफाइल फ़ोटो
टिप्पणी करें...


Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv