शुक्रवार, 1 जुलाई 2022
महा देव के शिवलिंग की रक्षा विदेशी ऋषि कर रहे हैं
0गुरुवार, 30 जून 2022
मिल गई कैंसर की दवा
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ONDC Project Open Network for Digital Commerce (ONDC)
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बुधवार, 29 जून 2022
Java Burn
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Introducing...

The world’s first and only 100% safe and natural proprietary, patent-pending formula, that when combined with coffee, can increase both the speed and efficiency of metabolism.
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JAVA BURN FAQs
How much Java Burn should I order?
Is Java Burn safe?
Will Java Burn work for me?
Will Java Burn affect my coffee in any way?
What is the best way to take Java Burn?
Do I have to take Java Burn in the morning?
Does Java Burn work with other beverages?
How will Java Burn be shipped to me and how quickly?
Will I be billed anything else after I order?
Is Java Burn Guaranteed?
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सोमवार, 27 जून 2022
हम क्या क्या हैं और क्या क्या नहीं हैं
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भाग--05
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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अद्भुत अलौकिक अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन
पूज्यपाद गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि वन्दन
योग की सर्वोच्च अवस्था है--परमावस्था।
इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए साधक को समय की एक लंबी यात्रा करनी पड़ती है। कई जन्म बीत जाते हैं। न जाने कितने मानसिक, वैचारिक और आत्मिक संघर्ष करने पड़ते हैं। साधना-क्रम आगे बढ़ाने के लिए योग्य गर्भ का भी होना आवश्यक है। अन्यथा साधना-क्रम भंग होने की आशंका बनी रहती है। फिर तो इधर-उधर भटकना पड़ता है और साधक को जाने कब और किस जन्म में 'परमावस्था' उपलब्ध होगी और किस जन्म में उपलब्ध होगा 'आत्म साक्षात्कार' ?
'परमावस्था' आत्मा की अद्वैत अवस्था मानी जाती है। इसी अवस्था में आत्मा को अपने निज स्वरुप का ज्ञान होता है। इसी अवस्था में आत्मा के सामने प्रकट होता है--एक दिव्य ज्योतिर्मय प्रकाश जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। क्योंकि वर्णन योग्य शब्द ही नहीं मिलते। वह प्रकाश शब्दातीत, भावातीत और वर्णनातीत है। आखिर ऐसा कौन है वह जो सबसे अतीत है ? कहने की आवश्यकता नहीं--वेदों ने, उपनिषदों ने दर्शन शास्त्रों ने, पुराणों ने उसी दिव्य ज्योतिर्मय को 'परब्रह्म परमात्मा' कहा है। वह मूल अस्तित्व है सम्पूर्ण विश्व ब्रह्माण्ड का जिसकी उपस्थित सदैव से रही है और आगे भी बराबर रहेगी। उसका न कभी निर्माण होता है और न होता है कभी नाश। वह आदि और अंत रहित है। वह साकार है और निराकार भी। वह संसार के समस्त कार्य-कारण का आधार भी है।
जो समस्त चराचर जगत में समान रूप से व्याप्त है, जिसका अंश मानव रूप में राम है, कृष्ण है, रावण है और है कंस भी। जिसका अंश समय-समय पर सिद्ध महात्माओं और सिद्ध योगियों के रूप में भी होता है प्रकट संसार में, उसी का अंश समस्त प्राणियों में विद्यमान है आत्मा के रूप में और वही हैं 'हम'। आत्मा के अतिरिक्त और कुछ नहीं हैं हम। आत्मा का अनुभव या परमात्मा का अनुभव कह तो देते हैं हम लेकिन वह अनुभव भी नहीं हैं हम। sabhar siyaram tiwari Facebook wall
रविवार, 26 जून 2022
इतिहास के पन्नों से सत्येन्द्रनाथ बोस
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#सत्येन्द्रनाथ बोस
भारत के वह शोधकर्ता थे, जिन्हें 2012 में न्यू यॉर्क टाइम्स अखबार में "गॉड पार्टिकल" के रूप में वर्णित किया गया था। वह अपने 1924 के शोध के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका यह शोध "बोस-आइंस्टीन क्वांटम" के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
तो चलिए जानते हैं "गॉड पार्टिकल" सत्येन्द्रनाथ बोस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-
1.भौतिकी के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए, विज्ञानी पाल डिरक ने ‘बोसोन पार्टिकल’ का नाम उनके नाम पर रखा था।
2. सत्येंद्रनाथ बोस को बंगाली और अंग्रेजी के अलावा, फ्रेंच, जर्मन और संस्कृत भी आती थी। इसके साथ ही वह लॉर्ड टेनीसन, रबिन्द्रनाथ टैगोर और कालिदास की कविताओं में भी रुचि रखते थे।
3. जब सत्येंद्रनाथ बोस के शोध पत्र 'प्लैंक लॉ एंड द हाइपोथिसिस ऑफ लाइट क्वांटा' को छापने से मना कर दिया गया था, तब बोस ने अपना यह शोध पत्र एल्बर्ट आइंस्टीन को भेजा, जिन्होंने इस शोध पत्र के महत्व को समझा और इसका जर्मनी में ट्रांसलेशन कर बोस के नाम पर इसे छपवाया।
4. बोस ने 1926 में ढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन तब वह इस पद के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए थे, क्योंकि उनके पास डॉक्टरेट की डिग्री नहीं थी। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन की सिफारिश के बाद, उन्हें विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया। sabhar Facebook wall
#Inspiring #History #इतिहास_के_पन्नों_से #SatyendraNathBose #indianscientists #AlbertEinstein
शनिवार, 25 जून 2022
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि
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www.drishtiias.com
वेबसाइट पर प्रकाशित कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि लेख इस इस संदर्भ में मैं कहना चाहूंगा आने वाले समय में खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग होगा ड्रोन के द्वारा दवाओं का छिड़काव कंप्यूटराइज ड्रिप आधारित प्रणाली रोग एवं कीटो का त्वरित उपचार इत्यादि होगा श्रमिक भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रोबोट भी होंगे के द्वारा डेयरी उद्योग कृषि अन्य उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग होगा दृष्टि डॉट कॉम इस संबंध में काफी अच्छा शोध पत्र प्रकाशित किया है आप लोग इसका अध्ययन कर सकते हैं
संदर्भ:
विश्व की आबादी के बढ़ने के साथ ही कृषि योग्य भूमि की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है, ऐसे में लोगों को कृषि के संदर्भ में अधिक रचनात्मकता और कुशलता आर्जित करने की आवश्यकता है। इसके तहत कम भूमि के उपयोग से ही फसल की उपज और उत्पादकता को बढ़ाने पर विशेष ज़ोर देना होगा। भारत में स्वतंत्रता के बाद से ही कृषि सुधार के कई बड़े प्रयास के बावज़ूद आज भी यह क्षेत्र मानसून की अनिश्चितता, आधुनिक उपकरणों की कमी आदि समस्याओं से जूझ रहा है। इस संदर्भ में जलवायु परिवर्तन और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक हो सकती है। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री ने ‘सामाजिक सशक्तिकरण के लिये उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन-2020’ या रेज़-2020 (RAISE 2020) का उद्घाटन करते हुए कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा को सशक्त बनाने, अगली पीढ़ी के शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास में कृत्रिम बुद्दिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) की महत्त्वपूर्ण भूमिका होने की बात कही थी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) :
- कंप्यूटर विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आशय किसी कंप्यूटर, रोबोट या अन्य मशीन द्वारा मनुष्यों के समान बुद्धिमत्ता के प्रदर्शन से है।
- दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसी कंप्यूटर या मशीन द्वारा मानव मस्तिष्क के सामर्थ्य की नकल करने की क्षमता है, जिसमें उदाहरणों और अनुभवों से सीखना, वस्तुओं को पहचानना, भाषा को समझना और प्रतिक्रिया देना, निर्णय लेना, समस्याओं को हल करना तथा ऐसी ही अन्य क्षमताओं के संयोजन से मनुष्यों के समान ही कार्य कर पाने की क्षमता आदि शामिल है।
- वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा, परिवहन और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियाँ:
- पिछले दो दशकों के दौरान देश में कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है, हालाँकि पर्याप्त संसाधनों, वैज्ञानिक परामर्श आदि की कमी के कारण कृषि क्षेत्र में फसलों की विविधता का अभाव रहा है।
- जनसंख्या में हुई व्यापक वृद्धि के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में कृषि जोत का आकार छोटा हुआ है, जिससे कृषि में किसी बड़े निवेश की संभावनाएँ भी कम हुई हैं।
- कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिये हानिकारक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग और कृषि संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से मृदा उर्वरता में गिरावट देखी गई है।
कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी संभावनाएँ:
- आपूर्ति शृंखला का संवर्द्धन: वर्तमान में वैश्विक कृषि उद्योग लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से फसलों के उत्पादन के साथ कीटों पर नियंत्रण, मृदा और फसल की वृद्धि की निगरानी, कृषि से जुड़े डेटा का प्रबंधन, कृषि से जुड़े अन्य कार्यों को आसान बनाने और कार्यभार को कम करने आदि के माध्यम से संपूर्ण खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में व्यापक सुधार किया जा सकता है।
- गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में देश में कृषि-खाद्य से जुड़े तकनीकी स्टार्ट-अप्स ने 133 सौदों के माध्यम से 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया।
- इसके साथ ही वर्ष 2019 में ही भारत के कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़कर 37.4 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। आपूर्ति शृंखला और बेहतर भंडारण तथा पैकेजिंग में निवेश के माध्यम से इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
- विकास का अवसर: वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर पर कृषि में AI अनुप्रयोग का निवेश लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक 30% वृद्धि के साथ इसके 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।
- हालाँकि, इस परिदृश्य में, भारतीय कृषि-तकनीक बाज़ार, जिसका मूल्य वर्तमान में 204 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, अपनी कुल अनुमानित क्षमता 24% बिलियन अमेरिकी डॉलर के मात्र 1% स्तर तक ही पहुँच सका है।
- विशाल कृषि डेटा संसाधन: भारत में मृदा के प्रकार, जलवायु और स्थलाकृति विविधता के कारण यहाँ से प्राप्त डेटा वैज्ञानिकों को कृषि के लिये अत्याधुनिक AI उपकरण तथा अन्य कृषि समाधान विकसित करने में सहायक होगा।
- भारतीय खेत और किसान न केवल भारत बल्कि विश्व में बड़े पैमाने पर एआई समाधान बनाने में सहायता के लिये व्यापक और समृद्ध डेटा प्रदान करते हैं। और यह उन प्रमुख कारकों में से एक है जो भारतीय कृषि में एआई के लिये उपलब्ध अवसरों को अद्वितीय बनाता है।
कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग:
- कृषि डेटा का विश्लेषण: कृषि के विभिन्न घटकों में प्रतिदिन सैकड़ों और हज़ारों प्रकार के डेटा (जैसे-मृदा, उर्वरकों की प्रभाविकता, मौसम, कीटों या रोग से संबंधित देता आदि) उपलब्ध होते हैं। AI की सहायता से किसान प्रतिदिन वास्तविक समय में कई तरह के डेटा (जैसे- मौसम की स्थिति, तापमान, पानी के उपयोग या अपने खेत से एकत्रित मिट्टी की स्थिति आदि) विश्लेषण और समस्याओं की पहचान कर बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
- विश्व के विभिन्न हिस्सों में कृषि सटीकता में सुधार और उत्पादकता बढ़ाने के लिये किसानों द्वारा मौसम के पूर्वानुमान का मॉडल तैयार करने के लिये AI का उपयोग किया जा रहा है।
- कृषि में सटीकता: कृषि में अधिक सटीकता लाने हेतु पौधों में बीमारियों, कीटों और पोषण की कमी आदि का पता लगाने के लिये कृषि एआई तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
- एआई सेंसर खरपतवारों की पहचान कर सकते हैं और फिर उनकी पहचान के आधार पर उपयुक्त खरपतवारनाशक का चुनाव कर उस क्षेत्र में सटीक मात्रा में खरपतवारनाशक का छिड़काव कर सकते हैं।
- यह प्रक्रिया कृषि में विषाक्त पदार्थों के अनावश्यक प्रयोग को सीमित करने में सहायता करती है, गौरतलब है कि फसलों में अत्यधिक कीटनाशक या खरपतवार नाशक के प्रयोग से मानव स्वास्थ्य के साथ प्रकृति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- श्रमिक चुनौती का समाधान: कृषि आय में गिरावट के कारण इस क्षेत्र को श्रमिकों द्वारा बहुत ही कम प्राथमिकता दी जाती है, वस्तुतः कृषि क्षेत्र में कार्यबल की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
- श्रमिकों की इस कमी को दूर करने में AI कृषि बाॅट्स (AI Agriculture Bots) एक उपयुक्त समाधान हो सकते हैं। ये बाॅट मानव श्रमिकों के कार्यों में अतिरिक्त समर्थन प्रदान करते हैं और इन्हें कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है, उदाहरण के लिये:
- ये बॉट मानव मज़दूरों की तुलना में अधिक मात्रा में और तेज़ गति से फसलों की कटाई कर सकते हैं, ये अधिक सटीक रूप से खरपतवारों को पहचान कर उन्हें हटाने में सक्षम हैं तथा इनके प्रयोग के माध्यम से कृषि लागत में भारी कमी की जा सकती है।
- इसके अतिरिक्त, किसानों द्वारा कृषि से जुड़े परामर्श के लिये चैटबॉट की भी सहायता ली जा रही है। कृषि के लिये विशेषज्ञों की सहायता से बनाए गए ये विशेष चैटबॉट विभिन्न प्रकार के सवालों के जवाब देने में मदद करते हैं और विशिष्ट कृषि समस्याओं पर सलाह और सिफारिशें प्रदान करते हैं।
- श्रमिकों की इस कमी को दूर करने में AI कृषि बाॅट्स (AI Agriculture Bots) एक उपयुक्त समाधान हो सकते हैं। ये बाॅट मानव श्रमिकों के कार्यों में अतिरिक्त समर्थन प्रदान करते हैं और इन्हें कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है, उदाहरण के लिये:
सरकार के प्रयास:
- सरकार द्वारा किसानों को बेहतर परामर्श उपलब्ध कराने के लिये औद्योगिक क्षेत्र के साथ मिलकर एक ‘एआई-संचालित फसल उपज पूर्वानुमान मॉडल’ के विकास पर कार्य किया जा रहा है।
- प्रणाली फसल उत्पादकता और मिट्टी की पैदावार बढ़ाने, कृषि निवेश के अपव्यय को रोकने तथा कीट या बीमारी के प्रकोप की भविष्यवाणी करने के लिये एआई-आधारित उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
- इस प्रणाली में इसरो (ISRO) द्वारा प्रदान किये गए रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड के डेटा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा मौसम की भविष्यवाणी, मिट्टी की नमी और तापमान के विश्लेषण संबंधी डेटा का उपयोग किया जाता है।
- इस परियोजना को असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 10 आकांक्षी ज़िलों में कार्यान्वित किया जा रहा
निष्कर्ष:
हाल ही में कृषि क्षेत्र में हुए बड़े सुधारों के परिणामस्वरूप भविष्य में अनुबंध कृषि में बेहतर निवेश के साथ बेहतर पैदावार और उत्पादकता के लिये कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के प्रसार की भी संभावनाएँ है। इन प्रयासों के माध्यम से कृषि में AI को अपनाए जाने की पहलों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इन AI समाधानों के विकास के लिये सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से निवेश की आवश्यकता होगी।
इस संदर्भ में, हाल ही में संपन्न हुए RAISE-2020 शिखर सम्मेलन ने सार्वजनिक हितों के तहत AI प्रयोग के रोडमैप को अंतिम रूप देने हेतु वैश्विक हितधारकों को साथ लाने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान कियाहै।https://www.drishtiias.com/hindi/daily-updates/daily-news-editorials/artificial-intelligence-agriculture
काम विज्ञान के द्वारा काम ऊर्जा का रूपांतरण
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https://youtu.be/GFm172Z8fEoभारतीय अध्यात्म की भगवान शिव के द्वारा रचित विज्ञान भैरव तंत्र में काम ऊर्जा द्वारा कुंडली ऊर्जा को जागृत करने की विधि बताई गई है ध्यान की 112 विधियों में एक विधि भी है अभी भी उन लोगों के लिए सर्वोत्तम है जो दैनिक जीवन में ज्यादा कामुक होते हैं जिनकी कुंडली उर्जा मूल आधार पर स्थित होती है वह लोग काम ऊर्जा होश पूर्वक का प्रयोग कर अपनी कुंडली को सहस्त्रार तक पहुंचा सकते हैं के संबंध में प्रख्यात दार्शनिक आचार्य रजनीश ने संभोग से समाधि की ओर एक पुस्तक लिखी है जिसका लोगों ने गलत अर्थ लगा लिया काम ऊर्जा और कामवासना में अंतर होता है काम ऊर्जा एक क्रिएटिव एनर्जी है जबकि कामवासना स्त्री या पुरुष के शरीर के प्रति आसक्ति काम ऊर्जा स्वयं के भीतर से उठती है और जो आनंद के रूप में महसूस होती है जिसे आत्मानंद या परमानंद कहते हैं क्योंकि हमारा मन सूक्ष्म गतिविधियों से प्रोग्राम होता है आता हम अपने भीतर को ही नहीं बाहरी शरीर को ही आनंद का स्रोत मान लेते हैं जबकि शरीर एक माध्यम है जो क्वांटम प्रोग्राम की तरह से चित रूपी चिप के द्वारा संचालित होती है असली आनंद आत्मा का होता है संभोग के समय ऊर्जा थोड़े समय के लिए रूपांतरित होती है और समस्त चक्रों को भेद कर ऊपर की ओर गमन करती है पता हमें आनंद की अनुभूति होती है स्त्री पुरुष का संभोग यदि मन के तल पर और आत्मा के तल पर हो तो यह मुक्ति का भी साधन बन सकता है आप समाधि में भी जा सकते हैं इसके संबंध में एक वीडियो क्वेश्चन वर्ड द्वारा बनाई गई है इसमें डिटेल रूप से दिया गया है जो आप समझ सकते हैं latest news
शुक्रवार, 24 जून 2022
अदृश्य पदार्थ और ऊर्जा
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ब्रह्मांड ब्रह्मांड विज्ञान अभी नहीं जानता कि 23% पदार्थ का रंग रूप क्या है और शेष 73% किस प्रकार की ऊर्जा है अर्थात डब्बी विज्ञान अभी ब्रह्मांड का निर्माण करने वाले पदार्थ तथा पदार्थ का मात्र 4% ही जानता है इस घोर अज्ञान के लिए विज्ञान को कोई खेत प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस अज्ञान का जानना भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ब्रह्मांड विज्ञान ने हमें ज्ञान दिया है कि ब्रह्मांड का उद्भव 13 पॉइंट 7 अरबवर्ष पहले हुआ था उसका विकास किस तरह हुआ अर्थात किस तरह ग्रह तारे मंदाकिनी मंदाकिनी यों के समूह और किस तरह से मुंह की चादर निर्मित हुई कि ब्रह्मांड में पदार्थ इतनी दूर दूर क्यों है कि पदार्थ और पति पदार्थ का निर्माण हुआ था कि अब हमारे देखने में केवल पदार्थ ही है दिग और काल निरपेक्ष नहीं वरन बैक के सापेक्ष हैं कि वे चार आयामों में घुसे हुए हैं कि बिक का बैग के साथ संपन्न होता है और काल का वितरण की ब्रह्मांड की रचना स्थाई नहीं है और उसका प्रसार हो रहा है और वह भी त्वरण के साथ एक जगत और है जो हमें दिखता नहीं है क्योंकि वह अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना है उस पर आइंस्टाइन के अपेक्षित सिद्धांत के नियम नहीं लगते है बल्कि क्वांटम यांत्रिकी नियम लगते हैं तो ब्रह्मांड विज्ञान की पिछली सती की उपलब्धियों की सूची बहुत लंबी है जिसका यहां छोटा सा प्रतिनिधित्व करने वाला नमूना दिया है इतना जानने के बाद ही पदार्थ और ऊर्जा का आदर्श होने का बोध हमें हुआ है और भी बहुत बड़े बड़े प्रश्न हमारे सामने हैं जैसे पदार्थ में द्रव्यमान कैसे आता है प्रति पदार्थ का क्या हुआ दिखे 3 से अधिक आयाम है ब्रह्मांड का क्या है भविष्य है आदि अदृश्य पदार्थ की संकल्पना का जन्म मंदाकिनी समूहों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्री बल के असंतुलन का संतुलन करने के लिए हुआ है जब कोई पिंड गोलाकार घूमता है तब उस पर अपकेंद्रीय बल कार्य करने लगता है इसी बल के कारण तेज मोटर कारें तीखे मोड़ों पर पलट जाती है मोटरसाइकिल चालक सर्कस के मौत के गोले में बिना गिरे ऊपर नीचे मोटरसाइकिल चलाता है इसी अपकेंद्रीय बल के कारण परिक्रमा रथ पृथ्वी को सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अपनी और अधिक निकट नहीं कर पाती है और वह अपनी नियत कक्षा में परिक्रमा करती रहती है जो अपकेंद्रीय बल पृथ्वी के परिक्रमा बैग से उत्पन्न होता है वह गुरुत्वाकर्षण बल का संतुलन कर लेता है इसी तरह की परिक्रमा हमारा सूर्य 200 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से अन्य तारों के साथ अपने मंदाकिनी आकाशगंगा के केंद्र के चारों ओर लगाता है क्योंकि यह सारे पिंड अपनी कक्षाओं में परिक्रमा रथ हैं अर्थात उन पर पड़ रहे गुरुत्वाकर्षण बल तथा उसके अपकेंद्री बल में संतुलन है ऐसा संतुलन नहीं है तब एक समस्या तो आएगी इसी समस्या के बौद्धिक समाधान हेतु अगर अदृश्य पदार्थ की कल्पना की गई है sabhar विश्वमोहन तिवारी आविष्कार से
गुरुवार, 23 जून 2022
मनुष्यों का संभोग में शीघ्रपतन होने का कारण
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