Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Comments

You might like

Subscribe Us

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2025

चीनी का सेवन हमारे मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है

0

 चीनी का सेवन हमारे मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है


और हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। मीठा खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है, यह जानते हुए भी कि आजकल के दौर में हम शारीरिक तौर पर ज्यादा मेहनत नहीं करते, फिर भी मीठा तो बहुत से लोगों की कमजोरी है।

         खाने के बाद मीठा तो जरूर चाहिए, मौसम अच्छा हो तो मीठा चाहिए, गर्मी ज्यादा हो तो मिल्कशेक चाहिए, ठंड हो तो जलेबी या गर्मागर्म हलवा चाहिए। बाकी बिना किसी अवसर के भी कभी-कभी मीठा खाया जाए तो कोई क्या परेशानी है।

        लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा है अगर खाने से मीठे की मात्रा हटा ली जाए, तो शरीर पर किस तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं? नहीं सोचा, तो चलिए हम ही बता देते हैं कि अगर एक महीने तक चीनी को अलविदा कह देते हैं तो इससे हमारे शारीरिक या मानसिक रूप से क्या अंतर देखने को मिलता है।

        १. हमारे दिल की सेहत बहुत अच्छी रहती है, हमारा दिल शरीर का सबसे संवेदनशील भाग होता है। इस वजह से उसे कहीं ज्यादा हमारे केयर की जरूरत होती है। अगर हम अपनी दिनचर्या से चीनी को हटा देंगे तो यकीन मानिए इससे हमारे दिल को बहुत आराम मिलेगा और साथ ही वह और जवान रहेगा।

        २. हमारी त्वचा पर भी इसका स्पष्ट असर नजर आएगा। वह स्वस्थ और चमकदार तो बनेगी ही साथ ही साथ अगर हमारे चेहरे पर गड्ढे हैं तो वह भी गायब हो जाएंगे। हम जितनी चाहे क्रीम, लोशन या फिर अन्य दवाइयां उपयोग कर लें, पर सबसे बेहतरीन असर हमें चीनी छोड़ने के बाद ही मिलेगा।

        ३. मीठा ज्यादा खा लेने की वजह से नींद भी सही से नहीं आती। जिस रात मीठा ज्यादा खा लेते हैं, उस रात नींद आने में परेशानी होती है, इसलिए हमें मीठा कम से कम ही खाना चाहिए।

        ४. जो लोग अपने भोजन में मीठे की मात्रा कम रखते हैं उनके चेहरे पर उम्र की परछाई बहुत देर से पड़ती है। ज्यादा चीनी खाने से चेहरे की त्वचा में सूजन आने लगती है, हमारा चेहरा झुर्रियों से मुक्त तभी रहेगा जब हम मीठा खाने की आदत को कम कर देंगे।

        ५. मीठा छोड़ने से वजन भी कम होता है अतः जो अपना वजन कम करना चाहते हैं उन्हें आज से ही मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी रखनी शुरू कर देनी चाहिए।

        ६. मीठा छोड़ने के बाद हमारी याद्दाश्त भी बढ़ती है तथा बोलचाल का तरीका प्रभावी होता है। हम सामने वाले की बात बड़ी आसानी और स्पष्ट तरीके से समझ सकते हैं। 

        ७. मीठे की मात्रा कम रखने से हम मधुमेह से भी बचते हैं, अगर कभी मीठा खाने का मन करे तो मेवे खाकर इसकी पूर्ति कर सकते हैं।

        ८. मीठा छोड़ने से हमारी आंतें अच्छे तरीके से काम करने लगती हैं, इससे न सिर्फ खाना आसानी से पचता है बल्कि वह हमारे पेट और आंतों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है। 

        ९. मीठा छोड़ने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बस हमें एक बार अपने मस्तिष्क को इस बात के लिए राजी करना है कि अब से हम मीठा नहीं खाएंगे। हम पायेंगे कि किस तरह हम संक्रमण और अन्य बीमारियों से खुद को बचा लेते हैं।

        १०. मीठा छोड़ने के बाद न सिर्फ हमें मानसिक रूप से सुकून मिलेगा बल्कि हमारे दांत और मसूड़े भी ज्यादा स्वस्थ रहेंगे। एक बात का ध्यान हमें अवश्य रखना चाहिए कि मीठा खाने के तुरंत बाद कभी भी ब्रश न करें क्योंकि इस समय हमारे मसूड़े बहुत ज्यादा सॉफ्ट होते हैं। उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। 

        ११. अगर हमारे जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है तो एक बार चीनी छोड़कर अवश्य देखना चाहिए, हम पायेंगे कि दर्द में हमें  बहुत फर्क नजर आयेगा। साभार फेसबुक वॉल शिव कुमार

Read more

रहस्यमय ‘डूबे हुए संसार’ (Sunken World) की खोज

0

 वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की आंतरिक संरचना की नई मैपिंग तकनीक का उपयोग करके प्रशांत महासागर के नीचे एक रहस्यमय ‘डूबे हुए संसार’ (Sunken World) की खोज


की है। यह खोज पृथ्वी के मेंटल (Mantle) में लगभग 2,900 किलोमीटर गहराई में की गई है, जहां भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) की गति अचानक धीमी हो जाती है। यह क्षेत्र लो-वेलोसिटी ज़ोन (Low-Velocity Zone) कहलाता है, जो वैज्ञानिकों को संकेत देता है कि यहाँ कोई असामान्य और अति-प्राचीन परत मौजूद हो सकती है।


‼️क्या है यह डूबा हुआ संसार?


यह संरचना पृथ्वी के शुरुआती इतिहास की एक बची हुई परत हो सकती है, जो संभवतः  4 अरब साल पुरानी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी प्राचीन महाद्वीप या थिया (Theia) नामक एक प्राचीन ग्रह के अवशेष हो सकते हैं, जो अरबों साल पहले पृथ्वी से टकराया था और जिससे चंद्रमा का निर्माण हुआ था।


‼️कैसे हुआ यह खुलासा?


शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक सेस्मिक इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया, जिससे पता चला कि यह परत आसपास के मेंटल की तुलना में घनी और गर्म है। इसका मतलब यह हो सकता है कि यह पृथ्वी के निर्माण के शुरुआती दिनों में गहरे मेंटल में समा गया कोई प्राचीन टुकड़ा है, जो अरबों सालों तक हमारी नजरों से छिपा रहा।

साभार फेसबुक ब्रह्मांड 

#research #sea #underseaworld #ancienthistory #science

Read more

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2025

हृदय का राजा अर्जुन छाल

0

 🇮🇳 हृदय  का राजा अर्जुन छाल 



अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना गया है, खासकर हृदय (दिल) से जुड़ी समस्याओं के लिए। इसे "हार्ट का राजा" कहा जाता है क्योंकि यह हृदय को मजबूत बनाने और कई हृदय रोगों को ठीक करने में मदद करता है।


अर्जुन की छाल के मुख्य फायदे:


1. हृदय को मजबूत बनाती है – अर्जुन छाल रक्त संचार को सही रखती है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ बनाए रखती है।


2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है – हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर दोनों को संतुलित करने में मददगार है।


3. कोलेस्ट्रॉल कम करती है – खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायक है।


4. दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है – अनियमित धड़कनों (Arrhythmia) को सही करने में मदद करती है।


5. ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है – मधुमेह के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।


6. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर – शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करके एंटी-एजिंग प्रभाव डालती है।


7. लिवर और किडनी के लिए लाभकारी – यह लिवर को डिटॉक्स करने और किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करती है।


8. तनाव और चिंता को कम करती है – यह एक प्राकृतिक एडेप्टोजेन है, जो मानसिक शांति देती है।


9. पाचन में सुधार – अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में फायदेमंद होती है।


10. घाव भरने में मदद करती है – त्वचा के घावों को जल्दी भरने में उपयोगी है।


अर्जुन की छाल का उपयोग कैसे करें?


1. अर्जुन चाय – 1 चम्मच अर्जुन की छाल पाउडर को 1 कप पानी में उबालकर दिन में 1-2 बार पिएं।


2. अर्जुन दूध – आधा चम्मच अर्जुन छाल पाउडर को 1 गिलास दूध में उबालकर सेवन करें।


3. कैप्सूल या टैबलेट – आयुर्वेदिक स्टोर्स में उपलब्ध अर्जुन कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।


सावधानियाँ:


गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


किसी भी दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है।


अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में शामिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Sabhar priyanka facebook wall

#viralpost2025シ #viralpost2025 #fbviral #explorepage #viralpage #science #viratkohli #quotes #memes #knowledge #trendingpost #trendingnow #picoftheday #history #facts #health #healthylifestyle #healthyliving #ayurveda #ayurvedic #ayurvedalifestyle Priyanka Tiwari @highlight

Read more

रविवार, 2 फ़रवरी 2025

भोग का अर्थ है – सुख-दुःख का अनुभ

0

 भोगायतन ----+


भोग का अर्थ है – सुख-दुःख का अनुभव। यह अनुभव शरीरी आत्मा का होता है (वस्तुतः सुख-दुःख का प्रत्यक्ष सम्बन्ध बुद्धि से ही है; निर्गुण आत्मा में सुख-दुःख का आरोपमात्र किया जाता है)। भोग की शरीर-सापेक्षता के कारण शरीर (स्थूल-सूक्ष्म) को भोग का आयतन (आश्रय) कहा जाता है। सांख्यसूत्र (5/114; 6/60) में इस दृष्टि से भोगायतन शब्द का प्रयोग भी किया गया है। भोगायतन को भोगाधिष्ठान भी कहा जाता है (व्यासभाष्य 2/5)।

भौतिकसर्ग भौतिक = पंचभूतविकार; पर ‘भौतिक सर्ग’ के प्रसंग में भौतिक का अर्थ है – भूतनिर्मित शरीर (शरीर चूंकि शरीरी क्षेत्रज्ञ के बिना नहीं रहता, अतः ‘भौतिक सर्ग’ वस्तुतः देही आत्मा के भेदों को लक्ष्य करता है)। सांख्य के अनुसार देहधारी जीवों की चौदह योनियाँ ही भौतिक सर्ग हैं (सांख्यका. 53) – देवयोनि आठ प्रकार की, तिर्यक्-योनि पाँच प्रकार की तथा मनुष्ययोनि एक प्रकार की है। ये जीव सत्त्व-रजः-तमः के प्राधान्य के अनुसार ऊर्ध्वलोक-मध्यलोक-अधोलोक के निवासी होते हैं – यह ज्ञातव्य है। पाँच भूतों के परस्पर संमिश्रण से जो स्थूल वस्तु बनती है, वह भी भौतिक कहलाती है (घट आदि पदार्थ भौतिक अर्थात् पाँच भौतिक हैं) भौतिक पदार्थों की सर्ग ( सृष्टि) – इस अर्थ में भी ‘भौतिकसर्ग’ शब्द प्रयुक्त होता है।

भ्रान्तिदर्शन नौ अन्तरायों में यह एक है (द्र. योगसू. 1/30)। स्वरूपतः यह विपर्यय ज्ञान ही है। संशय-ज्ञान से विपर्ययज्ञान में अन्तर है। संशय में दोनों ही कोटियों का ज्ञान होता है, यथा – यह स्थाणु (खूँटा) है या पुरुष है। विपर्यय में एक पदार्थ अन्य पदार्थ के रूप में ज्ञात होता है। योग का अन्तराय-रूप जो भ्रान्तिदर्शन है, वह योगसाधन-सम्बन्धी या तत्वस्वरूप-सम्बन्धी होता है। सत्त्वगुणजात आनन्द निर्गुण आत्मा में है या आत्मा आनन्दरूप है – यह एक भ्रान्तिदर्शन है। इसी प्रकार अनिद्रारोग को निद्राजय के रूप में समझना भी भ्रान्तिदर्शन है।

मठिका शैव दर्शन की भिन्न भिन्न शाखाओं को मठिका कहते हैं। वर्तमान युग में शैव दर्शन को तीन गुरुओं ने अभिनवतया चालू कर दिया। वे तीन गुरु भगवान श्रीकंठनाथ की प्रेरणा से ऊर्ध्व लोकों से इस भूलोक पर अवतार बनकर प्रकट हो गए। उनमें से अमर्दक नामक सिद्ध ने द्वैतदृष्टि से शैवदर्शन का उपदेश किया। उसकी मठिका को आमर्द मठिका या आमर्द संतति कहा गया है। दूसरी मठिका का प्रवर्तन श्रीनाथ ने किया। वह मठिका भेदाभेद प्रधान शैव मठिका थी। तीसरे गुरु त्र्यंबक ने अभेद दृष्टि प्रधान दो मठिकाओं को चलाया। उनमें से एक मठिका काश्मीर शैव दर्शन की त्रिक आगम प्रधान अद्वैत मठिका है, जिसे त्र्यंबक मठिका कहा गया है। इसे त्र्यंबक ने अपने पुत्र के द्वारा चलाया। चौथी मठिका को उसने अपनी कन्या के द्वारा चलाया। उसका अर्धत्र्यंबक मठिका नाम पड़ा। इन्हें शैव शास्त्र में साढ़े तीन मठिकाएँ कहा जाता है।

मणिपूर चक्र स्वाधिष्ठान चक्र के ऊपर नाभि के मूल भाग में मेघ के समान श्याम वर्ण दस दलों से शोभित मणिपूर चक्र की स्थिति मानी जाती है। इन दलों में अर्धचन्द्र और बिन्दु से भूषित ड से लेकर फ पर्यन्त दस वर्ण सुशोभित हैं। इसके बीच में प्रातःकाल के अरुण वर्ण से सूर्य के समान कान्ति वाले त्रिकोणात्मक वैश्वानर मण्डल में रँ बीज का ध्यान किया जाता है। यह मण्डल तीन स्वस्तिक द्वारों से अलंकृत हैं। रँ बीज का वाहन मेष है, वर्ण रक्त है और इसका शरीर चतुर्भुज है। इस वह्नि बीज के देवता रुद्र है। इनका वर्ण सिन्दूर के समान है और इसकी अधिष्ठात्री योगिनी का नाम लकिनी है। (श्रीतत्वचिन्तामणि, षट्चक्रनिरूपण 6 प्र.)। साभार फेस बुक

Read more

गुरुवार, 30 जनवरी 2025

काम वासना और जीवन:आचार्य श्री रजनीश ओशो, तंत्र

0

 ताओ कहता है अगर व्यक्ति संभोग में उतावला न हो, केवल गहरे विश्राम में ही शिथिल हो तो वह एक हजार वर्ष जी सकता है। अगर स्त्री और पुरुष एक दूसरे के साथ गहरे विश्राम में हो एक दूसरे में डूबे हों कोई जल्दी न हो, कोई तनाव न हो, तो बहुत कुछ घट सकता है रासायनिक चीजें घट सकती हैं। क्योंकि उस समय दोनों के जीवन-रसों का मिलन होता है दोनों की शरीर-विद्युत, दोनों की जीवन-ऊर्जा का मिलन होता है। और केवल इस मिलन से–क्योंकि ये दोनों एक दूसरे से विपरीत हैं–एक पॉजिटिव है एक नेगेटिव है। ये दो विपरीत धुरव हैं–सिर्फ गहराई में मिलन से वे एक दूसरे को और जीवतंता प्रदान करते हैं।


वे बिना वृद्धावस्था को प्राप्त हुए लंबे समय तक जी सकते हैं। लेकिन यह तभी जाना जा सकता है जब तुम संघर्ष नहीं करते। यह बात विरोधाभासी प्रतीत होती है। जो कामवासना से लड़ रहे हैं उनका वीर्य स्खलन जल्दी हो जाएगा, क्योंकि तनाव ग्रस्त चित्त तनाव से मुक्त होने की जल्दी में होता है।


नई खोजों ने कई आश्चर्य चकित करने वाले तथ्यों को उद्धाटित किया है। मास्टर्स और जान्सन्स ने पहली बार इस पर वैज्ञानिक ढंग से काम किया है कि गहन मैथुन में क्या-क्या घटित होता है। उन्हें यह पता चला कि पचहत्तर प्रतिशत पुरुषों का समय से पहले ही वीर्य-स्खलन हो जाता है। पचहत्तर प्रतिशत पुरुषों का प्रगाढ़ मिलन से पहले ही स्खलन हो जाता है और काम-कृत्य समाप्त हो जाता है। और नब्बे प्रतिशत स्त्रियां काम के आनंद-शिखर ऑरगॉज्म तक पहुंचती ही नहीं, वे कभी शिखर तक गहन तृसिदायक शिखर तक नहीं पहुंचतीं नब्बे प्रतिशत स्त्रियां।


इसी कारण स्त्रियां इतनी चिड़चिड़ी और क्रोधी होती हैं और वे ऐसी ही रहेंगी। कोई ध्यान आसानी से उनकी सहायता नहीं कर सकता, कोइ दर्शन, कोई धर्म, कोई नैतिकता उसे पुरुष–जिसके साथ वह रह रही है–के साथ चैन से जीने में सहायक नहीं हो सकता। और तब उनकी खीझ उनका तनाव…क्योंकि आधुनिक विज्ञान तथा प्राचीन तंत्र दोनों ही कहते हैं कि जब तक स्त्री को गहन काम-तृप्ति नहीं मिलेगी, वह परिवार के लिए एक समस्या ही बनी रहेगी। वह हमेशा झगड़ने के लिए तैयार होगी।


इसलिए अगर तुम्हारी पत्नी हमेशा झगड़े के भाव में रहती है तो सारी बातों पर फिर से विचार करो। केवल पत्नी ही नहीं, तुम भी इसका कारण हो सकते हो। और क्योंकि स्त्रियां काम संवेग, ऑरगॉज्म, तक नहीं पहुंचती, वे काम-विरोधी हो जाती हैं। वे संभोग के लिए आसानी से तैयार नहीं होतीं। उनकी खुशामद करनी पड़ती है; वे काम- भोग के लिए तैयार ही नहीं होतीं। वे इसके लिए तैयार भी क्यों हो उन्हें कभी इससे कोई सुख भी तो प्राप्त नहीं होता। उलटे, उन्हें तो ऐसा लगता है कि पुरुष उनका उपयोग करता है उन्हें इस्तेमाल किया गया है। उन्हें ऐसा लगता है कि वस्तु की भांति उपयोग कर उन्हें फेंक दिया गया है।


पुरुष संतुष्ट है क्योंकि उसने वीर्य बाहर फेंक दिया है। और तब वह करवट लेता है और सो जाता है और पत्नी रोती है। उसका उपयोग किया गया है और यह प्रतीति उसे किसी भी रूप में तृप्ति नहीं देती। इससे उसका पति या प्रेमी तो छुटकारा पाकर हल्का हो गया लेकिन उसके लिए यह कोई संतोषप्रद अनुभव न था।


नब्बे प्रतिशत स्त्रियों को तो यह भी नहीं पता कि ऑरगॉज्म क्या होता है? क्योंकि वे शारीरिक संवेग के ऐसी आनंददायी शिखर पर कभी पहुंचती ही नहीं जहां उनके शरीर का एक-एक तंतु सिहर उठे और एक-एक कोशिका सजीव हो जाए। वे वहां तक कभी पहुंच नहीं पातीं। और इसका कारण है समाज की काम-विरोधी चित्तवृत्ति। संघर्ष करनेवाला मन वहां उपस्थित है इसलिए स्त्री इतनी दमित और मंद हो गई है।


और पुरुष इस कृत्य को ऐसे किए चला जाता है जैसे वह कोई पाप कर रहा हो। वह स्वयं को अपराधी अनुभव करता है वह जानता है ”इसे करना नहीं चाहिए। ” और जब वह अपनी पत्नी या प्रेमिका से संभोग करता है तो वह उस समय किसी महात्मा के बारे में ही सोच रहा होता है। ”कैसे किसी महात्मा क पास जाऊं और किस तरह




Read more

शनिवार, 25 जनवरी 2025

दो सिर धड़ एक वाली बहने

0

 मिनेसोटा में पाँचवीं कक्षा की शिक्षिका एबी और ब्रिटनी हेन्सल, जुड़वाँ बहनें एक अनोखी कार्य व्यवस्था साझा करती हैं। अलग-अलग डिग्री और योग्यता रखने के बावजूद, उन्हें अपनी साझा नौकरी के लिए केवल एक वेतन मिलता है। जुड़वाँ बहनें, जिनके दिमाग और व्यक्तित्व अलग-अलग हैं, लेकिन शरीर एक है, कक्षा की ज़िम्मेदारियाँ साझा करती हैं और एक साथ सहजता से काम करती हैं। उनके नियोक्ता एक वेतन प्रदान करते हैं क्योंकि वे एक शारीरिक स्थिति में हैं। चुनौतियों के बावजूद, एबी और ब्रिटनी ने अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों में टीमवर्क के प्रति अपनी लचीलापन और समर्पण का प्रदर्शन करते हुए सफल करियर बनाया है


Read more

शुक्रवार, 24 जनवरी 2025

गर्म पानी पीने के फायदे

0


 पानी इंसान के शरीर की सबसे बड़ी जरुरत है। पानी से हमारा शरीर पूरे दिन तरोताजा रहता है। अगर पानी को गर्म करके पीते हैं, तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद है। रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से शरीर के कई रोग यूं ही मिट जाते हैं।


 🌼🌸


☘️ मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र में सुधार (Improves Metabolism and Digsation)


सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र में सुधार होता है।


☘️ शरीर को करता है डिटॉक्स ( Detox to Body)


आप इसे बॉडी में फिल्टरेशन भी कह सकते हैं। गर्म पानी शरीर का तापमान बढ़ाता है, जिससे पसीने के जरिए शरीर से गंद बाहर आता है और फिर शरीर की अंदरूनी सफाई से स्किन ग्लो करती है।


☘️ ब्लड सर्कुलेशन में सुधार (Improves Blood Circulation)


गर्म पानी पीने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।इससे हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम होने लगता है। 


☘️शरीर रहता है हाइड्रेट (Hydrates Body)

 शरीर में पानी की कमी भी महसूस नहीं होती है। साथ ही बॉडी टेंपरेचर कंट्रोल में रहता है, जिससे दिनभर थकान और आलस्य महसूस नहीं होता है.


☘️ वजन कम करने में मददगार (Reduce Weight)

गर्म पानी मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है, जिससे कैलोरी बर्न होती है। 


☘️ चेहरे पर आता है निखार (Glwoing Skin)

अगर आप गर्म पानी रोजाना पिएंगे, तो इससे आपके चेहरे पर नूर सा निखार आने लगेगा।


☘️गर्म पानी से बॉडी से विषाक्त बाहर जाता है और फिर इससे पेट साफ होता है। पेट साफ होने से शरीर में कोई रोग नहीं पैदा होता है।


Share This Post ❤️

Follow our page for more Health Tips ✨ 

साभार अंकिता सिंह 

https://www.facebook.com/share/1Dhqw4Fy3N/


#ankitasinghkuntal #facebookpost #health #healthtipsoftheday #healthtips #water #warmwater #skincare #healthylifestyle

Read more

धर्म के रहस्य क्या है :ऋतु सिसोदिया

0

 

आप संगीत में रुचि रखते हैं, संगीत साधना(रियाज)करना चाहते हैं।

आप चित्रकार हैं, सुंदर चित्र बनाना चाहते हैं।

आप किसी समस्या के समाधान के लिए गहन चिंतन मनन करना चाहते हैं। और आपके आसपास कोई नकारात्मक सोच वाला ,चिढ़चिढ़े स्वभाव का व्यक्ति हो ,वह कुढ़ते हुये बड़बड़ा रहा हो तो आप ठीक से अपना काम नहीं कर सकते।

जो आपसे चिढ़ते हैं वे आपके कार्य में बाधा डालने का हरसंभव प्रयास करते हैं।

------------

लोग विशिष्ट कार्यो़ के लिए विशेष स्थान का चयन करते हैं।ताकि अवांछित लोग उनके कार्य में बाधक न बन सकें।

-----------

अति महत्वपूर्ण कार्यों के संबंध में योजनाओं को यथासंभव गोपनीय रूप से पूरा करने का प्रयास करते हैं।

----------

ऋषि मुनि गहन वनों में गुफाओं में साधना के लिए  स्थान इसीलिए चुनते थे।ताकि वहाँ अवांछित नकारात्मक सोचवाले लोगों से दूर रहा जा सके।

-------------

भाव बहुत शक्तिशाली होते हैं।सारा खेल भाव ऊर्जा का ही है।अतः अपने लक्ष्य के अनुकूल भाव वालों के सानिध्य में रहना,तथा अपने लक्ष्य के प्रतिकूल भाव वाले नकारात्मक सोच वालों से दूर रहना होता है।


जब भाव बहुत सघन हो जायें तो साकार हो जाते हैं।अतः अपनी भावदशा के प्रति सचेत रहना होता है।सदैव सकारात्मक भाव दशा में रहना होता है।

----------

हमारी भावदशा हमारे आसपास विशेष आभामंडल को निर्मित करती है।जो हमारे संपर्क में आने वालों को प्रभावित करती है। 

जैसी मनसा वैसी दशा का सूत्र पुरखे पहले ही बता गए हैं।

-----------------

अनुकूल समान भाव विचार वालों के संपर्क में हमारा आभामंडल पुष्ट होता है।इसीलिए हम ऐसी स्थिति में सुख का अनुभव करते हैं।

विपरीत प्रतिकूल भाव विचार वालों के बीच हमारा  आभामंडल खंडित होता है।अतः हम इस स्थिति में दुख का अनुभव करते हैं।

जबतक हम पूर्णतः स्वयं की भावदशा पर मजबूत नियंत्रण करने में सक्षम नहीं ह़ो तबतक लोगों से मिलने जुलने पर विशेष सतर्कता आवश्यक होती है।

 --------   ------------

साभार ऋतु सिंह सिसोदिया फेस बुक वॉल

Read more

बुधवार, 22 जनवरी 2025

बिना दवाइयों के उपयोग से पाचन तंत्र कैसे मजबूत करे

0

?


पाचन तंत्र का सही से काम करना हमारे पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप बिना दवाइयों का सहारा लिए, सिर्फ कुछ आसान, प्राकृतिक उपायों से अपने पाचन तंत्र को मजबूत कर सकते हैं? जी हां, यह पूरी तरह से संभव है! इस उत्तर में हम आपको वो सभी तरीके बताएंगे जिनसे आप बिना किसी दवाई के पाचन तंत्र को स्वस्थ और मजबूत बना सकते हैं।


1. संतुलित आहार का सेवन करें:

हमारा आहार हमारे पाचन तंत्र पर सीधा प्रभाव डालता है। अगर आप तैलीय, मसालेदार और भारी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, तो पाचन तंत्र पर दबाव बनता है। इसके बजाय, ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और दालों का सेवन करें। इन खाद्य पदार्थों में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन को आसान बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। 


2. पानी पीने की आदत डालें:

हमारे शरीर का 70% हिस्सा पानी है और पाचन प्रक्रिया के लिए पानी की जरूरत होती है। पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट की सूजन को कम करने में मदद करता है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें। 


3. नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें:

व्यायाम न केवल शरीर के अन्य अंगों को फिट रखता है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। योग, ताई ची, और हल्का वॉकिंग जैसे व्यायाम पेट की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है। इससे रक्त संचार भी बेहतर होता है, जो पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। 


4. छोटी-छोटी, नियमित मात्रा में भोजन करें:

आपका भोजन पेट पर भारी न पड़े, इसके लिए दिन में तीन बड़े खाने के बजाय, 5-6 छोटे भोजन करने की आदत डालें। इससे पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ेगा और खाना अच्छे से पचेगा। इसके अलावा, खाने के बीच में लंबा समय न छोड़ें। 

5. तनाव को कम करें:

तनाव का पाचन तंत्र पर गहरा असर पड़ता है। तनाव के कारण हमारी पाचन क्रिया धीमी हो सकती है, और इससे पेट में गैस, जलन, और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए मानसिक शांति के लिए ध्यान (Meditation), गहरी साँस लेने की प्रक्रिया, और पर्याप्त नींद को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 


6. आंतों की सफाई करें (Detox):

आंतों की सफाई पाचन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आप प्राकृतिक तरीके से आंतों को डिटॉक्स कर सकते हैं। इसके लिए, नींबू पानी, अदरक, हल्दी, या शहद के साथ गर्म पानी का सेवन करें। यह आपके पाचन तंत्र को साफ करने और उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करेगा। 


7. भोजन के बाद थोड़ी देर आराम करें:

खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर न जाएं। खाने के बाद 20-30 मिनट तक हल्का टहलील (हल्का चलना) करने से पाचन क्रिया तेज होती है। ऐसा करने से पेट में भारीपन महसूस नहीं होता और खाना अच्छे से पचता है। 


8. प्रॉबायोटिक्स का सेवन करें:

प्रॉबायोटिक्स (जैसे दही, छाछ, या कुछ अन्य फर्मेंटेड फूड्स) पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं। ये आपके पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने से पेट की समस्याएं दूर होती हैं। 


9. प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करें:

अदरक, इलायची, धनिया, मेथी जैसे मसाले पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करते हैं। इनका सेवन चाय के रूप में या भोजन में भी किया जा सकता है। यह पेट की गैस, अपच और सूजन को कम करता है और पाचन को गति देता है। 


10. अच्छा नींद लें:

नींद का पाचन तंत्र से सीधा संबंध है। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो पाचन क्रिया में गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लें, ताकि शरीर को अच्छे से आराम मिले और पाचन तंत्र ठीक से काम करे। 


इन सभी उपायों को अपनी दिनचर्या में अपनाकर आप बिना दवाइयों के पाचन तंत्र को मजबूत कर सकते हैं। यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। हमेशा याद रखें, छोटे-छोटे बदलाव बड़े परिणाम लाते हैं, और अगर आप इन उपायों को नियमित रूप से अपनाएंगे तो पाचन तंत्र मजबूत होने के साथ-साथ आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

Dadima ke Gharelu Nuskhe - घरेलू नुस्खे साभार फेस बुक हेल्थ

Read more

शिव शक्ति के अमिट दिव्य प्रेम ऊर्जा

0

 स्त्री पुरुष के मद्य ब्लेम गेम की कला भारत मे कब से ज्यादा विकसित हुई...🤔

जब दोनों गैर जिम्मेदार हुए ,,बेहोश मन इंद्रियों के गुलाम हुए


इससे सर्वाधिक हानि बृक्ष की शाखाओं की हुई  बोया किसी और का काटेगा कोई और... ये हुआ आपका कार्मिक अकाउंट,,दुष्कर्म, विवाह सामाजिक व्यवस्था थी इसका उल्लंघन करने पर क्षणिक दंड भुगतान है किंतु श्रष्टि का तो सन्तुलन का नियम है


 शिव शक्ति के अमिट दिव्य प्रेम ऊर्जा को समझने हेतु चिंतन की आवस्यकता है,,विशुद्ध सात्विक मन की आवस्यकता है,, शिव व सती के पुनर्मिलन की कहानी रोचक लगती है किंतु सती के कठोर तप व साधना दृढ़ संकल्प की स्कक्ति परीक्षण श्रष्टि में मानव रूप में देनी पड़ी 

दिव्य आत्माओं का पदार्पण दुर्लभ है जटिलताओं से होकर गुजरना पड़ता है

माता पार्वती सफल हुई अंततः शिव पार्वती के विवाह की समस्त रस्मो से ही विवाह भारतीय 16 संस्कार में एक उत्तम व श्रेस्ठ संस्कार है जिसे ग्रहस्थ आश्रम नाम दिया हमारे ऋषि महाऋषियों ने


आज कल आश्रम का ही ज्ञान नहि विसंगतियां उतपन्न हो गयी विवाह संस्कार को खेल समझ लिया पशुवत आचरण मनोरंजन किया और छोड़ दिया


हालात तब बुरे बनते है जब दोनों गैर जिम्मेदार हो क्योंकी अंधे में काना चल जाता है

साभार ऋतु सिंह सिसोदिया 

Read more

मंगलवार, 21 जनवरी 2025

भ्रंगराज के लाभ

0

 

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मत है कि भृंगराज बालों और लीवर से जुड़ी समस्याओं के लिए लाभदायक है, क्योंकि इसमें केश्य गुण पाया जाता है।भृंगराज के अदभुत प्रयोग है। 

भृंगराज केशों के लिए यह महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इसके अन्य औषधीय गुण शायद और ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं क्या आप जानते है कि भृंगराज(False daisy)आपका कायाकल्प करने में भी सक्षम है यदि सही तरीके से प्रयोग किया जाये तो यहाँ तक कि कैंसर से आप इसके सहारे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं

यदि आपको बाल काले रखने हैं तो भृंगराज की ताजी पत्तियों का रस रोजाना सिर पर मल कर सोयें-

यदि पेट बहुत खराब हो तो भृंगराज की पत्तियों का रस या चूर्ण दस ग्राम लीजिये उसे एक कटोरी दही में मिला कर खा जाइए ।दिन मे 3 times 2 days लेना है।

 पीलिया एक जानलेवा रोग है लेकिन रोगी को पूरे भृंगराज के पौधे का चूर्ण मिश्री के साथ खिला दीजिये 100 ग्राम चूर्ण पेट में पहुंचाते ही पीलिया ख़त्म  या फिर भृंगराज के पौधे को ही क्रश करके 10 ग्राम रस निकालिए और उसमें एक ग्राम काली मिर्च का पावडर मिलाकर मरीज को पिला दीजिये दिन में 3 बार 3 दिनों तक इस मिश्रण में थोड़ा मिश्री का चूर्ण भी मिला ले। 

भृंगराज सफ़ेद दाग का भी इलाज करता है मगर काली पत्तियो और काली शाखाओं वाला भृंगराज चाहिए इसे आग पर सेंक कर रोज खाना होगा एक दिन में एक पौधा लगभग चार माह तक लगातार खाए। 

आँखों की रोशनी तेज रखनी है तो भृंगराज की पत्तियों का 3 ग्राम पाउडर एक चम्मच शहद में मिला कर रोज सुबह खाली पेट खाएं।

अगर कोई तुतलाता हो तो इसके पौधे के रस में देशी घी मिला कर पका कर दस ग्राम रोज पिलाना चाहिए बस एक माह तक लगातार दे ।

त्रिफला के चूर्ण को भृंगराज के रस की 3 बार भावना देकर सुखा कर रोज आधा चम्मच पानी के साथ निगलने से बाल कभी सफ़ेद होते ही नही है पर इसे किसी जानकार वैद्य से ही तैयार कराइये। 

इसके रस में यकृत की सारी बीमारियाँ ठीक कर देने का गुण मौजूद है लेकिन जिस दिन इसका ताजा रस दस ग्राम पीजिये उस दिन सिर्फ दूध पीकर रहिये भोजन नहीं करना है यदि यह काम एक माह तक लगातार कर लिया जाय तो कायाकल्प भी सम्भव है यह एक कठिन तपस्या है। 

बच्चा पैदा होने के बाद महिलाओं को योनिशूल बहुत परेशान करता है उस दशा में भृंगराज के पौधे की जड़ और बेल के पौधे की जड़ का पाउडर बराबर मात्रा में लीजिये और शहद के साथ खिलाइये 5 ग्राम पाउडर काफी होगा दिन में एक बार खाली पेट लेना है सिर्फ केवल 7 दिनों तक ही काफी है। 

इसका तेल बालों के लिये बहुत उपयोगी माना जाता है बालों को घने, काले और सुंदर बनाने के लिए भृंगराज का उपयोग कई तरह से किया जाता है भृंगराज के पत्तों का रस निकालकर बराबर का नारियल तेल लें और धीमी आंच पर रखें जब केवल तेल रह जाए तो बन जाता है "भृंगराज केश तेल"-अगर धीमी आंच पर रखने से पहले आंवले का रस मिला लिया जाए तो और भी अच्छा तेल बनेगा-बालों में रूसी हो या फिर बाल झड़ते हों तो इसके पत्तों का रस 15-20 ग्राम लें। 

 एसिडिटी होने पर भृंगराज के पौधे को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और हर्रा के फलों के चूर्ण के साथ समान मात्रा में लेकर गुड के साथ सेवन कर लिया जाए तो एसिडिटी की समस्या से निजात मिल सकती है। 

 माईग्रेन या आधा सीसी दर्द होने पर भृंगराज की पत्तियों को बकरी के दूध में उबाला जाए व इस दूध की कुछ बूँदें नाक में डाली जाए तो आराम मिलता है। 

 भृंगराज एवं आंवले लें के ताजे पत्तों को पीस कर बालों की जड़ों में लगायें साथ ही नीम-शिकाकाई आंवला-कालातिल-रीठा इन सब को साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें यह आपके लिए एक हर्बल शैम्पू का काम करेगा जो बालों को कंडिशनिंग के साथ ही जड़ों को मजबूत बनाता है।

  भ्रंगराज की पत्तियों का रस निकालकर उसमे रुई भिगोकर सरसों के तेल में काजल बनाकर आँखों में लगाने से आँखो से पानी नहीं निकलता और आँखों में खुजली भी नहीं होती हैं 


आप सभी को अगर इसके बारे में कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करे🙏


Anamika Shukla  facebook wall

अनु🥰

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv