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शुक्रवार, 24 जनवरी 2025

गर्म पानी पीने के फायदे

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 पानी इंसान के शरीर की सबसे बड़ी जरुरत है। पानी से हमारा शरीर पूरे दिन तरोताजा रहता है। अगर पानी को गर्म करके पीते हैं, तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद है। रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से शरीर के कई रोग यूं ही मिट जाते हैं।


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☘️ मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र में सुधार (Improves Metabolism and Digsation)


सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र में सुधार होता है।


☘️ शरीर को करता है डिटॉक्स ( Detox to Body)


आप इसे बॉडी में फिल्टरेशन भी कह सकते हैं। गर्म पानी शरीर का तापमान बढ़ाता है, जिससे पसीने के जरिए शरीर से गंद बाहर आता है और फिर शरीर की अंदरूनी सफाई से स्किन ग्लो करती है।


☘️ ब्लड सर्कुलेशन में सुधार (Improves Blood Circulation)


गर्म पानी पीने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।इससे हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम होने लगता है। 


☘️शरीर रहता है हाइड्रेट (Hydrates Body)

 शरीर में पानी की कमी भी महसूस नहीं होती है। साथ ही बॉडी टेंपरेचर कंट्रोल में रहता है, जिससे दिनभर थकान और आलस्य महसूस नहीं होता है.


☘️ वजन कम करने में मददगार (Reduce Weight)

गर्म पानी मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है, जिससे कैलोरी बर्न होती है। 


☘️ चेहरे पर आता है निखार (Glwoing Skin)

अगर आप गर्म पानी रोजाना पिएंगे, तो इससे आपके चेहरे पर नूर सा निखार आने लगेगा।


☘️गर्म पानी से बॉडी से विषाक्त बाहर जाता है और फिर इससे पेट साफ होता है। पेट साफ होने से शरीर में कोई रोग नहीं पैदा होता है।


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साभार अंकिता सिंह 

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धर्म के रहस्य क्या है :ऋतु सिसोदिया

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आप संगीत में रुचि रखते हैं, संगीत साधना(रियाज)करना चाहते हैं।

आप चित्रकार हैं, सुंदर चित्र बनाना चाहते हैं।

आप किसी समस्या के समाधान के लिए गहन चिंतन मनन करना चाहते हैं। और आपके आसपास कोई नकारात्मक सोच वाला ,चिढ़चिढ़े स्वभाव का व्यक्ति हो ,वह कुढ़ते हुये बड़बड़ा रहा हो तो आप ठीक से अपना काम नहीं कर सकते।

जो आपसे चिढ़ते हैं वे आपके कार्य में बाधा डालने का हरसंभव प्रयास करते हैं।

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लोग विशिष्ट कार्यो़ के लिए विशेष स्थान का चयन करते हैं।ताकि अवांछित लोग उनके कार्य में बाधक न बन सकें।

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अति महत्वपूर्ण कार्यों के संबंध में योजनाओं को यथासंभव गोपनीय रूप से पूरा करने का प्रयास करते हैं।

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ऋषि मुनि गहन वनों में गुफाओं में साधना के लिए  स्थान इसीलिए चुनते थे।ताकि वहाँ अवांछित नकारात्मक सोचवाले लोगों से दूर रहा जा सके।

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भाव बहुत शक्तिशाली होते हैं।सारा खेल भाव ऊर्जा का ही है।अतः अपने लक्ष्य के अनुकूल भाव वालों के सानिध्य में रहना,तथा अपने लक्ष्य के प्रतिकूल भाव वाले नकारात्मक सोच वालों से दूर रहना होता है।


जब भाव बहुत सघन हो जायें तो साकार हो जाते हैं।अतः अपनी भावदशा के प्रति सचेत रहना होता है।सदैव सकारात्मक भाव दशा में रहना होता है।

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हमारी भावदशा हमारे आसपास विशेष आभामंडल को निर्मित करती है।जो हमारे संपर्क में आने वालों को प्रभावित करती है। 

जैसी मनसा वैसी दशा का सूत्र पुरखे पहले ही बता गए हैं।

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अनुकूल समान भाव विचार वालों के संपर्क में हमारा आभामंडल पुष्ट होता है।इसीलिए हम ऐसी स्थिति में सुख का अनुभव करते हैं।

विपरीत प्रतिकूल भाव विचार वालों के बीच हमारा  आभामंडल खंडित होता है।अतः हम इस स्थिति में दुख का अनुभव करते हैं।

जबतक हम पूर्णतः स्वयं की भावदशा पर मजबूत नियंत्रण करने में सक्षम नहीं ह़ो तबतक लोगों से मिलने जुलने पर विशेष सतर्कता आवश्यक होती है।

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साभार ऋतु सिंह सिसोदिया फेस बुक वॉल

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बुधवार, 22 जनवरी 2025

बिना दवाइयों के उपयोग से पाचन तंत्र कैसे मजबूत करे

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पाचन तंत्र का सही से काम करना हमारे पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप बिना दवाइयों का सहारा लिए, सिर्फ कुछ आसान, प्राकृतिक उपायों से अपने पाचन तंत्र को मजबूत कर सकते हैं? जी हां, यह पूरी तरह से संभव है! इस उत्तर में हम आपको वो सभी तरीके बताएंगे जिनसे आप बिना किसी दवाई के पाचन तंत्र को स्वस्थ और मजबूत बना सकते हैं।


1. संतुलित आहार का सेवन करें:

हमारा आहार हमारे पाचन तंत्र पर सीधा प्रभाव डालता है। अगर आप तैलीय, मसालेदार और भारी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, तो पाचन तंत्र पर दबाव बनता है। इसके बजाय, ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और दालों का सेवन करें। इन खाद्य पदार्थों में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन को आसान बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। 


2. पानी पीने की आदत डालें:

हमारे शरीर का 70% हिस्सा पानी है और पाचन प्रक्रिया के लिए पानी की जरूरत होती है। पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट की सूजन को कम करने में मदद करता है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें। 


3. नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें:

व्यायाम न केवल शरीर के अन्य अंगों को फिट रखता है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। योग, ताई ची, और हल्का वॉकिंग जैसे व्यायाम पेट की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है। इससे रक्त संचार भी बेहतर होता है, जो पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। 


4. छोटी-छोटी, नियमित मात्रा में भोजन करें:

आपका भोजन पेट पर भारी न पड़े, इसके लिए दिन में तीन बड़े खाने के बजाय, 5-6 छोटे भोजन करने की आदत डालें। इससे पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ेगा और खाना अच्छे से पचेगा। इसके अलावा, खाने के बीच में लंबा समय न छोड़ें। 

5. तनाव को कम करें:

तनाव का पाचन तंत्र पर गहरा असर पड़ता है। तनाव के कारण हमारी पाचन क्रिया धीमी हो सकती है, और इससे पेट में गैस, जलन, और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए मानसिक शांति के लिए ध्यान (Meditation), गहरी साँस लेने की प्रक्रिया, और पर्याप्त नींद को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 


6. आंतों की सफाई करें (Detox):

आंतों की सफाई पाचन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आप प्राकृतिक तरीके से आंतों को डिटॉक्स कर सकते हैं। इसके लिए, नींबू पानी, अदरक, हल्दी, या शहद के साथ गर्म पानी का सेवन करें। यह आपके पाचन तंत्र को साफ करने और उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करेगा। 


7. भोजन के बाद थोड़ी देर आराम करें:

खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर न जाएं। खाने के बाद 20-30 मिनट तक हल्का टहलील (हल्का चलना) करने से पाचन क्रिया तेज होती है। ऐसा करने से पेट में भारीपन महसूस नहीं होता और खाना अच्छे से पचता है। 


8. प्रॉबायोटिक्स का सेवन करें:

प्रॉबायोटिक्स (जैसे दही, छाछ, या कुछ अन्य फर्मेंटेड फूड्स) पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं। ये आपके पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने से पेट की समस्याएं दूर होती हैं। 


9. प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करें:

अदरक, इलायची, धनिया, मेथी जैसे मसाले पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करते हैं। इनका सेवन चाय के रूप में या भोजन में भी किया जा सकता है। यह पेट की गैस, अपच और सूजन को कम करता है और पाचन को गति देता है। 


10. अच्छा नींद लें:

नींद का पाचन तंत्र से सीधा संबंध है। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो पाचन क्रिया में गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लें, ताकि शरीर को अच्छे से आराम मिले और पाचन तंत्र ठीक से काम करे। 


इन सभी उपायों को अपनी दिनचर्या में अपनाकर आप बिना दवाइयों के पाचन तंत्र को मजबूत कर सकते हैं। यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। हमेशा याद रखें, छोटे-छोटे बदलाव बड़े परिणाम लाते हैं, और अगर आप इन उपायों को नियमित रूप से अपनाएंगे तो पाचन तंत्र मजबूत होने के साथ-साथ आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

Dadima ke Gharelu Nuskhe - घरेलू नुस्खे साभार फेस बुक हेल्थ

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शिव शक्ति के अमिट दिव्य प्रेम ऊर्जा

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 स्त्री पुरुष के मद्य ब्लेम गेम की कला भारत मे कब से ज्यादा विकसित हुई...🤔

जब दोनों गैर जिम्मेदार हुए ,,बेहोश मन इंद्रियों के गुलाम हुए


इससे सर्वाधिक हानि बृक्ष की शाखाओं की हुई  बोया किसी और का काटेगा कोई और... ये हुआ आपका कार्मिक अकाउंट,,दुष्कर्म, विवाह सामाजिक व्यवस्था थी इसका उल्लंघन करने पर क्षणिक दंड भुगतान है किंतु श्रष्टि का तो सन्तुलन का नियम है


 शिव शक्ति के अमिट दिव्य प्रेम ऊर्जा को समझने हेतु चिंतन की आवस्यकता है,,विशुद्ध सात्विक मन की आवस्यकता है,, शिव व सती के पुनर्मिलन की कहानी रोचक लगती है किंतु सती के कठोर तप व साधना दृढ़ संकल्प की स्कक्ति परीक्षण श्रष्टि में मानव रूप में देनी पड़ी 

दिव्य आत्माओं का पदार्पण दुर्लभ है जटिलताओं से होकर गुजरना पड़ता है

माता पार्वती सफल हुई अंततः शिव पार्वती के विवाह की समस्त रस्मो से ही विवाह भारतीय 16 संस्कार में एक उत्तम व श्रेस्ठ संस्कार है जिसे ग्रहस्थ आश्रम नाम दिया हमारे ऋषि महाऋषियों ने


आज कल आश्रम का ही ज्ञान नहि विसंगतियां उतपन्न हो गयी विवाह संस्कार को खेल समझ लिया पशुवत आचरण मनोरंजन किया और छोड़ दिया


हालात तब बुरे बनते है जब दोनों गैर जिम्मेदार हो क्योंकी अंधे में काना चल जाता है

साभार ऋतु सिंह सिसोदिया 

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मंगलवार, 21 जनवरी 2025

भ्रंगराज के लाभ

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आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मत है कि भृंगराज बालों और लीवर से जुड़ी समस्याओं के लिए लाभदायक है, क्योंकि इसमें केश्य गुण पाया जाता है।भृंगराज के अदभुत प्रयोग है। 

भृंगराज केशों के लिए यह महत्वपूर्ण तो है ही लेकिन इसके अन्य औषधीय गुण शायद और ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं क्या आप जानते है कि भृंगराज(False daisy)आपका कायाकल्प करने में भी सक्षम है यदि सही तरीके से प्रयोग किया जाये तो यहाँ तक कि कैंसर से आप इसके सहारे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं

यदि आपको बाल काले रखने हैं तो भृंगराज की ताजी पत्तियों का रस रोजाना सिर पर मल कर सोयें-

यदि पेट बहुत खराब हो तो भृंगराज की पत्तियों का रस या चूर्ण दस ग्राम लीजिये उसे एक कटोरी दही में मिला कर खा जाइए ।दिन मे 3 times 2 days लेना है।

 पीलिया एक जानलेवा रोग है लेकिन रोगी को पूरे भृंगराज के पौधे का चूर्ण मिश्री के साथ खिला दीजिये 100 ग्राम चूर्ण पेट में पहुंचाते ही पीलिया ख़त्म  या फिर भृंगराज के पौधे को ही क्रश करके 10 ग्राम रस निकालिए और उसमें एक ग्राम काली मिर्च का पावडर मिलाकर मरीज को पिला दीजिये दिन में 3 बार 3 दिनों तक इस मिश्रण में थोड़ा मिश्री का चूर्ण भी मिला ले। 

भृंगराज सफ़ेद दाग का भी इलाज करता है मगर काली पत्तियो और काली शाखाओं वाला भृंगराज चाहिए इसे आग पर सेंक कर रोज खाना होगा एक दिन में एक पौधा लगभग चार माह तक लगातार खाए। 

आँखों की रोशनी तेज रखनी है तो भृंगराज की पत्तियों का 3 ग्राम पाउडर एक चम्मच शहद में मिला कर रोज सुबह खाली पेट खाएं।

अगर कोई तुतलाता हो तो इसके पौधे के रस में देशी घी मिला कर पका कर दस ग्राम रोज पिलाना चाहिए बस एक माह तक लगातार दे ।

त्रिफला के चूर्ण को भृंगराज के रस की 3 बार भावना देकर सुखा कर रोज आधा चम्मच पानी के साथ निगलने से बाल कभी सफ़ेद होते ही नही है पर इसे किसी जानकार वैद्य से ही तैयार कराइये। 

इसके रस में यकृत की सारी बीमारियाँ ठीक कर देने का गुण मौजूद है लेकिन जिस दिन इसका ताजा रस दस ग्राम पीजिये उस दिन सिर्फ दूध पीकर रहिये भोजन नहीं करना है यदि यह काम एक माह तक लगातार कर लिया जाय तो कायाकल्प भी सम्भव है यह एक कठिन तपस्या है। 

बच्चा पैदा होने के बाद महिलाओं को योनिशूल बहुत परेशान करता है उस दशा में भृंगराज के पौधे की जड़ और बेल के पौधे की जड़ का पाउडर बराबर मात्रा में लीजिये और शहद के साथ खिलाइये 5 ग्राम पाउडर काफी होगा दिन में एक बार खाली पेट लेना है सिर्फ केवल 7 दिनों तक ही काफी है। 

इसका तेल बालों के लिये बहुत उपयोगी माना जाता है बालों को घने, काले और सुंदर बनाने के लिए भृंगराज का उपयोग कई तरह से किया जाता है भृंगराज के पत्तों का रस निकालकर बराबर का नारियल तेल लें और धीमी आंच पर रखें जब केवल तेल रह जाए तो बन जाता है "भृंगराज केश तेल"-अगर धीमी आंच पर रखने से पहले आंवले का रस मिला लिया जाए तो और भी अच्छा तेल बनेगा-बालों में रूसी हो या फिर बाल झड़ते हों तो इसके पत्तों का रस 15-20 ग्राम लें। 

 एसिडिटी होने पर भृंगराज के पौधे को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और हर्रा के फलों के चूर्ण के साथ समान मात्रा में लेकर गुड के साथ सेवन कर लिया जाए तो एसिडिटी की समस्या से निजात मिल सकती है। 

 माईग्रेन या आधा सीसी दर्द होने पर भृंगराज की पत्तियों को बकरी के दूध में उबाला जाए व इस दूध की कुछ बूँदें नाक में डाली जाए तो आराम मिलता है। 

 भृंगराज एवं आंवले लें के ताजे पत्तों को पीस कर बालों की जड़ों में लगायें साथ ही नीम-शिकाकाई आंवला-कालातिल-रीठा इन सब को साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें यह आपके लिए एक हर्बल शैम्पू का काम करेगा जो बालों को कंडिशनिंग के साथ ही जड़ों को मजबूत बनाता है।

  भ्रंगराज की पत्तियों का रस निकालकर उसमे रुई भिगोकर सरसों के तेल में काजल बनाकर आँखों में लगाने से आँखो से पानी नहीं निकलता और आँखों में खुजली भी नहीं होती हैं 


आप सभी को अगर इसके बारे में कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करे🙏


Anamika Shukla  facebook wall

अनु🥰

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सोमवार, 20 जनवरी 2025

हमारा शरीर अपने आप में एक जटिल और अद्भुत दुनिया है

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 क्या आप जानते हैं? हमारा शरीर अपने आप में एक जटिल और अद्भुत दुनिया है


। यकीन नहीं होता? तो यह सुनिए:


•अगले 30 सेकंड में, आपका शरीर 7 करोड़ 2 लाख लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) तैयार कर चुका होगा।


•इसी दौरान, आपकी 1,74,000 स्किन कोशिकाएं झड़ जाएंगी।


•आपका खून शरीर के अंदर लगभग 7 किलोमीटर का सफर तय कर चुका होगा।


•आपके दिमाग में 25 नए विचार आ चुके होंगे।


•और आपकी आँखें 600MB डेटा को प्रोसेस कर चुकी होंगी।


सोचिए, हर सेकंड आपका शरीर कितने चमत्कार करता है। आपका शरीर सचमुच एक जीवित ब्रह्मांड है!

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#science #biology #humanity #bodybuilding #scifi #gk #knowledgeispower

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शनिवार, 18 जनवरी 2025

त्रिफला सेवन के लाभ

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 शिशिर ऋतू में ( 14 जनवरी से 13 मार्च) 5 ग्राम त्रिफला को आठवां भाग छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।


2⭐ बसंत ऋतू में (14 मार्च से 13 मई) 5 ग्राम त्रिफला को बराबर का शहद मिलाकर सेवन करें।


3⭐ ग्रीष्म ऋतू में (14 मई से 13 जुलाई ) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग गुड़ मिलाकर सेवन करें।


4⭐ वर्षा ऋतू में (14 जुलाई से 13 सितम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सैंधा नमक मिलाकर सेवन करें।


5⭐ शरद ऋतू में(14 सितम्बर से 13 नवम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग देशी खांड/शक्कर मिलाकर सेवन करें।


6⭐ हेमंत ऋतू में (14 नवम्बर से 13 जनवरी) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।


          ओषधि के रूप में त्रिफला 

  

⭐ रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।

अथवा त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होता है।

इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।


⭐ सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी ले। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंग।


⭐ शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।


⭐ एक चम्मच बारीख त्रिफला चूर्ण, गाय का घी10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते है। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।


⭐ त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते है।


⭐ त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।


⭐ चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिये।


⭐ मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले।त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।


त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।

दो माह तक सेवन करने से चश्मा भी उतर जाता है।


विधिः👉 500 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 500 ग्राम देसी गाय का घी व 250 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर शरदपूर्णिमा की रात को चाँदी के पात्र में पतले सफेद वस्त्र से ढँक कर रात भर चाँदनी में रखें। दूसरे दिन सुबह इस मिश्रण को काँच अथवा चीनी के पात्र में भर लें।


सेवन-विधि👉 बड़े व्यक्ति10 ग्राम छोटे बच्चे 5 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें दिन में केवल एक बार सात्त्विक, सुपाच्य भोजन करें। इन दिनों में भोजन में सेंधा नमक का ही उपयोग करे। सुबह शाम गाय का दूध ले सकते हैं।सुपाच्य भोजन दूध दलिया लेना उत्तम है कल्प के दिनों में खट्टे, तले हुए, मिर्च-मसालेयुक्त व पचने में भारी पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। 40 दिन तक मामरा बादाम का उपयोग विशेष लाभदायी होगा। कल्प के दिनों में नेत्रबिन्दु का प्रयोग अवश्य करें।


मात्राः 4 से 5 ग्राम तक त्रिफला चूर्ण सुबह के वक्त लेना पोषक होता है जबकि शाम को यह रेचक (पेट साफ़ करने वाला) होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें तथा एक घंटे बाद तक पानी के अलावा कुछ ना खाएं और इस नियम का पालन कठोरता से करें ।


सावधानीः👉 दूध व त्रिफला के सेवन के बीच में दो ढाई घंटे का अंतर हो और कमजोर व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को बुखार में त्रिफला नहीं खाना चाहिए।


घी और शहद कभी भी सामान मात्रा में नहीं लेना चाहिए यह खतरनाख जहर होता है ।


त्रिफला चूर्ण के सेवन के एक घंटे बाद तक चाय-दूध कोफ़ी आदि कुछ भी नहीं लेना चाहिये।


त्रिफला चूर्ण हमेशा ताजा खरीद कर घर पर ही सीमित मात्रा में (जो लगभग तीन चार माह में समाप्त हो जाये ) पीसकर तैयार करें व सीलन से बचा कर रखे और इसका सेवन कर पुनः नया चूर्ण बना लें। साभार मधु सिंह  फेस बुक वॉल

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