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रविवार, 9 मार्च 2025

भगवान राम की मुख्य शाखा :कार्तिकेय पुर राजवंश

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 कार्तिकेय पर राजवंश एक महत्वपूर्ण राजवंश है इसका भारत में काफी समय तक राज्य रहा है यह एक भगवान राम की मुख्य शाखा रही है कार्तिकेयपुर राजवंश उत्तराखंड में इसका निर्माण सर्वप्रथम बसंत देव ने का किया अयोध्या के अंतिम सम्राट सुमित्रा के बाद उनके बड़े पुत्र राजा शालीवाहन देव उत्तराखंड चले गए जहां उन्होंने जोशीमठ में अपना राज्य कायम किया बाद में उनके शासन सामंत के रूप में भी कार्य किया हर्षवर्धन कल के बाद बसंत देने अपने आप सम्राट घोषित कर दिया 

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बुधवार, 5 मार्च 2025

अपने अंदर अथाह शक्ति समाहित है :ऋतु सिसौदिया

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 अपने अंदर अथाह शक्ति समाहित है

स्वयम को स्वयं से जोड़ो प्रकर्ति के संरक्षण में ध्यान लगाओ अंतर्मन की गहराई में जाओ


सभी सनातनी कथा भागवत रामायण महाभारत को सुनते हैं अन्याय अधर्म आदि बड़ने पर क्षत्रियों ने ही आगे आकर धर्म राष्ट्र रक्षा की तो उनकी ही वीरता की कथा सुनते हैं उनकी ही उपेक्षा करते हैं तो कभी धर्म राष्ट्र की रक्षा हो सकेगी कभी नहीं चिंतन अवश्य करें


सत्य को गलत साबित करना असंभव है कोई सत्य को नहीं समझे उसकी बुद्धि ,विचार और मन की समझ ,प्रमाण की कठिनता आदि का खेल समझिए

न्याय और मर्यादा की मूर्ति क्षत्रिय,चोर, ठगों, लुटेरों को कब रास आयें गे।।


सम्पूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति को समेटे मानव पहले स्वयम को जानना अति आवश्यक तदुपरांत समाज से जुड़े स्वयम के अस्तित्व को खोकर इन निकृष्ट समाज को पा लेना मूर्खता है

इसलिए आत्मज्ञान अनिवार्य आत्मबोध अनिवार्य

ऐसे शिक्षा प्रणाली का निर्माण हो झा सबका संगर्क विकाश व आद्यत्मिक ज्ञान प्राप्त हो आत्मकल्याण कर ही मनुस्य लोककल्याण कर सकता है


ॐ परमात्मने नमः

ममहरि शरणम

🚩जय मां भवानी🚩

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स्त्री की योनि: सृजन और सम्मान का प्रतीक

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 स्त्री की योनि: सृजन और सम्मान का प्रतीक



स्त्री की योनि केवल पुरुषों के सुख का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इस संसार में नए जीवन का प्रवेश द्वार भी है। यह वह पवित्र स्थान है, जहाँ से हर नया जीवन जन्म लेता है, जहाँ से हर इंसान की यात्रा प्रारंभ होती है। योनि केवल शारीरिक संरचना नहीं, बल्कि सृजन और मातृत्व की शक्ति का प्रतीक है।

 

प्रकृति ने स्त्री को इस अद्भुत क्षमता से नवाजा है कि वह एक नए जीवन को जन्म दे सके। जब कोई शिशु जन्म लेता है, तो योनि उसके लिए इस दुनिया में आने का मार्ग बनती है। यह केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य और मातृत्व के अद्भुत संगम का प्रतीक है। हर स्त्री अपने शरीर को एक नए जीवन के लिए समर्पित करती है, और यह त्याग किसी भी तरह से कम सम्मान के योग्य नहीं हो सकता।


सम्मान का महत्व


आज भी समाज में कई लोग महिलाओं के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाते। हम उस स्थान का सम्मान करना तो दूर, उसकी महत्ता को भी नहीं समझते, जिसने हमें इस दुनिया में आने का अवसर दिया। यह एक विडंबना है कि जिस योनि से जन्म लेकर हम इस संसार में आए, उसी का अपमान करने से नहीं चूकते।


स्त्रियों का सम्मान करना केवल एक नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि समाज की उन्नति के लिए भी आवश्यक है। जब हम महिलाओं को उचित सम्मान देंगे, तभी हम एक संतुलित और उन्नत समाज की कल्पना कर सकते हैं। महिलाओं को केवल भोग की वस्तु मानना उनके अस्तित्व और शक्ति का अपमान है।


निष्कर्ष


हर पुरुष को यह समझना चाहिए कि वह भी एक स्त्री की कोख से जन्मा है। महिलाओं का सम्मान करना, उनकी गरिमा को बनाए रखना और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। यह केवल नारी सम्मान की बात नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की उन्नति से जुड़ा विषय है। अगर हम सच में एक सभ्य समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें स्त्रियों को वह सम्मान देना होगा, जिसकी वे वास्तव में अधिकारी हैं।"

 हर हर महादेव साभार Facebook 

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मंगलवार, 4 मार्च 2025

लौकिक व अलौकिक जगत में तारतम्य: ऋतु सिसौदिया

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 लौकिक व अलौकिक जगत में तारतम्य बिठाने में बढ़ी असहजता हुई 

क्योंकि आत्मज्ञान व आत्मबोध ही ना था

शायद यही कारण रहा होगा सत्य की खोज को गौतम बुद्ध ने संसार का परित्याग कर वन गमन किया

और ऐसा ही उत्तर चढ़ाव हर  तीसरे चौथे व्यक्ति के जीवन मे घटित हो रहा किन्तु वह मोह का लोभ का लालच का परित्याग नही कर पा रहा 

आत्म कल्याण करना है तो आत्मसंयमी बनो त्याग दो उस सभी का जो तुम्हारी उन्नति में बाधक है

आत्मकल्याण तुम्हारी प्राथमिकता है 

जब आप स्वयं आत्मसन्तुष्ट नही मानसिक मजबूत स्थिति में नही तो तुम किसी के सहयोगी बन ही नही सकते परोपकारी बन ही नही सकते

अतः विनम्र निवेदन सन्तानो को विवाह संस्कार से बांधकर जिम्मेदारियों में जकड़कर आप सांसारिक कर्तव्य से मुक्त हो सकते है किंतु इससे अन्य जो नई समस्याए उतपन्न होती है फिर उन जिम्मेदारियों को उठाने से मोह क्यों मोड़ते है

इन समस्याओं के जन्मदाता तो आप ही है

बुद्धि व विवेक को जाग्रत कीजिये परवरिश सुशिक्षा व संस्कार के साथ कीजिये बहुत बड़ा कर्तव्य है विवाह फिर सन्तान को विशाल बृक्ष बनाना 

ना कि तुम्हारी गलतियों की सजा का भुगतान किसी की बेटी को बलि का बकरा बनकर मूल्य पत्नी होने का चुकाना पड़े तो इस्वर के न्याय से घबराना मत


समझदार को संकेत पर्याप्त है

जागरूकता ही जीवित की निशानी है

ॐ,🚩

 मम हरि शरणं साभार ऋतु सिसोदिया 

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शनिवार, 1 मार्च 2025

हरीतकी "हरड़" का आयुर्वेदिक महत्व

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 🌹 हरीतकी को आयुर्वेद में "हरड़" के नाम से भी जाना जाता है। 

इसे "सभी रोगों की दवा" कहा जाता है।


क्योंकि यह शरीर को शुद्ध करने, पाचन सुधारने, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। यह त्रिफला (हरीतकी, बिभीतकी और आंवला) का एक मुख्य घटक है।


🌺 हरीतकी के प्रकार :==


आयुर्वेद में हरीतकी को सात प्रकारों में बांटा गया है:


1. विजया – शरीर को संतुलित रखती है।


2. रोहिणी – घाव भरने और त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद।


3. पूतना – बालों और त्वचा के लिए उपयोगी।


4. अमृता – बुखार और संक्रमण में लाभदायक।


5. अभया – नेत्र रोगों और मस्तिष्क के लिए फायदेमंद।


6. जीवनी – ऊर्जा और शक्ति बढ़ाने वाली।


7. चेतकी – पाचन तंत्र सुधारने में सहायक।


हरीतकी के फायदे :===


1. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद


कब्ज, गैस, अपच और एसिडिटी को दूर करता है।


आँतों को साफ करता है और पेट हल्का रखता है।


भूख बढ़ाने में मदद करता है।


2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाए


शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकालता है।


वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बचाता है।


सर्दी, जुकाम और खांसी में लाभदायक।


3. वजन घटाने में सहायक


चयापचय (Metabolism) को तेज करता है।


पेट की चर्बी कम करने में मदद करता है।


शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को धीरे-धीरे हटाता है।


4. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक


ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।


कोलेस्ट्रॉल कम करता है।


रक्त संचार को सुधारता है।


5. मधुमेह (Diabetes) में उपयोगी


रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नियंत्रित करने में मदद करता है।


इंसुलिन के सही स्तर को बनाए रखने में सहायक।


6. मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी


याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक।


तनाव, चिंता और डिप्रेशन को कम करता है।


7. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद


त्वचा के दाग-धब्बे और मुंहासे दूर करता है।


बालों को काला, घना और मजबूत बनाता है।


डैंड्रफ को कम करता है।


🌺 हरीतकी का उपयोग कैसे करें?


1. कब्ज और पाचन के लिए


कैसे लें?


1 चम्मच हरीतकी चूर्ण को रात में गुनगुने पानी या दूध के साथ लें।


इसे शहद के साथ भी लिया जा सकता है।


2. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए


कैसे लें?


हरीतकी चूर्ण को आंवला और गिलोय के साथ मिलाकर सेवन करें।


इसे गर्म पानी में मिलाकर दिन में एक बार पिएं।


3. वजन घटाने के लिए


कैसे लें?


हरीतकी पाउडर को गुनगुने पानी और शहद के साथ सुबह खाली पेट लें।


4. त्वचा और बालों के लिए


कैसे लगाएं?


हरीतकी पाउडर को नारियल तेल या दही में मिलाकर बालों में लगाएं।


चेहरे पर लगाने के लिए गुलाब जल के साथ पेस्ट बनाकर लगाएं।


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हरीतकी का सेवन करते समय सावधानियाँ


गर्भवती महिलाओं को हरीतकी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


अधिक मात्रा में लेने से डायरिया या पेट दर्द हो सकता है।


लो बीपी वाले लोग इसका अधिक सेवन न करें।


बच्चों को देने से पहले वैद्य या डॉक्टर से परामर्श कर लें।


निष्कर्ष :====


हरीतकी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है जो पाचन, हृदय, त्वचा, बाल, मानसिक स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे सही मात्रा में और सही तरीके से लेने से शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।


अगर आप इसे दवा के रूप में लेना चाहते हैं, तो पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

#highlight

@हाइलाइट साभार amitesh kumar Facebook 

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बेल का महत्व

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 आयुर्वेद में बेल महत्वपूर्ण औषधि माना गया है जो पाचन संबंधी कई बीमारियों में फायदेमंद है।  इस फल का हर हिस्सा ही सेहत के लिए के लिए गुणकारी है, बाहर से यह फल जितना ही कठोर होता है अंदर से उतना ही मुलायम और गूदेदार होता है। इसके गूदे में मौजूद बीज भी कई बीमारियों के इलाज में फायदा पहुंचाते हैं।

सेवन विधि : दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर बेल का जूस (bael juice) बनाएं और इस जूस का दिन में एक से दो बार सेवन करें।


किडनी के लिए फायदेमंद :

बेल का सेवन किडनी के लिए भी फायदेमंद है और यह किडनी की कार्यक्षमता को और बढ़ाती है। एक शोध के अनुसार बेल की जड़ों और पत्तियों में डायूरेटिक गुण होते हैं जो मूत्र का उत्पादन बढ़ाती हैं। यह ख़ास तौर पर वाटर रिटेंशन की समस्या से आराम दिलाने में बहुत कारगर है।


सेवन विधि : आधा चम्मच बेल की पत्तियों के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सेवन करें।


लीवर के लिए फायदेमंद :

ऐसा देखा गया है कि बेल की पत्तियां लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। लीवर से जुड़ी बीमारियां अक्सर तभी होती हैं जब शरीर में टॉक्सिन या हानिकारक विषैले पदार्थ बढ़ जाते हैं या किसी तरह का संक्रमण हो। शोध के अनुसार बेल (Bael in hindi) में एंटी-फंगल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं साथ ही इसमें बीटा-कैरोटीन भी पाया जाता है जो लीवर को किसी भी तरह के संक्रमण और चोट से बचाने में मदद करते हैं।


सेवन विधि : ताजे बेल के गूदे को निकालकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसे मैश करके खाएं।


स्कर्वी :

शरीर में विटामिन सी की कमी के कारण स्कर्वी रोग हो जाता है। इस रोग के कारण मसूड़ों से खून रिसने लगता है और शरीर पर चकत्ते पड़ने लगते हैं। ऐसे में बेल (Bael) का नियमित सेवन इस समस्या को काफी हद तक ठीक कर सकती है। बेल में मौजूद विटामिन सी, शरीर में इसकी कमी को दूर करती है और साथ ही इम्युनिटी पॉवर को भी मजबूत बनाती है।


सेवन विधि : आधा से एक चम्मच बेलगिरी चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर खाएं।


कान के दर्द से आराम :

बेल फल के फायदे सिर्फ पाचन तंत्र को ठीक करने तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि यह कान दर्द में भी बहुत उपयोगी हैं। कान में दर्द और कान से तरल का स्राव होना एक आम समस्या है। आयुर्वेद में ऐसा बताया गया है कि बेल के उपयोग से कान के दर्द, कान बहने और बहरेपन जैसी समस्याओं से आराम मिलता है। हालांकि कई बार कान में दर्द की समस्या किसी और वजह से भी हो सकती है। इसलिए कान से संबंधित इलाज में आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही बेल का सेवन करें।


उपयोग विधि : बिल्वादी तेल एक आयुर्वेदिक तेल है, इसकी मुख्य सामग्री बेल होती है। यह तेल कान के दर्द से आराम दिलाने में बहुत कारगर मानी जाती है। हालांकि इसका उपयोग आप चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें। साभार जय प्रकाश ओझा Facebook 


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हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं.

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 हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं..?


हमारे मन के 16 हिस्से हैं,, थॉट से लेकर लिबरेशन तक की जर्नी के चार हिस्से हैं जो इस प्रकार है मनस, बुद्धि, चित्त और अहंकार इन सभी के फंक्शन अलग-अलग हैं डे टुडे के डिसीजन मानस लेता है 


बुद्धि कैलकुलेट करता है और अहंकार जिससे हमारी पर्सनालिटी बनती है हमारी एक आइडेंटिटी बनती है और चौथा है ,चित्त यानी की मेमोरी इस मेलाइफ टाइम की मेमोरी ही नहीं होती इसमें हमारे सारे लाइफ टाइम के मेमोरी होती है


 हमारे बायोलॉजिकल शरीर से लेकर मेंटल शरीर के मेमोरी होती है यह सारे मेमोरी नहीं रहेगी तो हम फ्यूचर के बारे में प्लान नहीं कर पाएंगे,,


 इसीलिए मन का जो हिस्सा है वह बेहद जरूरी है क्योंकि हम हमारे पास्ट एक्सपीरियंस से ही अपने फ्यूचर को प्लान करते हैं ,,और अपने प्रेजेंट को भी उसी प्रकार से अपने आप से जो भी गलतियां हुई उससे सीख करके आगे  काम करते हैं।


इसमें अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारे चित्त का स्मृति जब हम किसी याद के बारे में बात करते हैं,, हमारी जो भी करंट थॉट प्रोसेस है वह हमारी स्मृति के ऊपर ही डिपेंड होता है 


अगर आप किसी व्यक्ति से मिले दो-तीन साल पहले और उसे व्यक्ति के साथ आपका एक्सपीरियंस अच्छा नहीं रहा है तो वह एक्सपीरियंस आपकी स्मृति में पहले से ही बना हुआ है 

अब आप उसे व्यक्ति से दोबारा मिलते हैं तो उसी आधार पर उसे व्यक्ति को आप जज जज करेंगे और कहीं ना कहीं आपका प्रेजेंट मोमेंट प्रभावित होगा आप उसे व्यक्ति से मिलने का मन नहीं करेगा तो यहां पर आपकी स्मृति है वह यहां पर बॉयस थिंकिंग दे सकती है और जो उसे व्यक्ति के साथ रिलेशन है वह अफेक्टेड हो सकता है तो विचारों की जन्मभूमि यही है। साभार Facebook 

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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

शाकाहार और मांसाहार तुलनात्मक अध्ययन

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 मांस एवं ऋतु का कोई मेल नहीं।शाकाहारी भोजन ऋतु के अनुसार बदल बदल कर खाया जाता है।मांस रोग बढ़ाता है,शाकाहार रोग से मुक्ति दिलाता है।



(1)ताकत के लिए-सबसे ताकतवर जानवर हाथी शाकाहारी होता है

वो ताकत के लिए कभी मांस नहीं खाता!!किसानों के साथ मेहनत करने वाला बैल कभी मांस खाता।हॉर्सपावर का इस्तेमाल किसी भी मशीन की शक्ति मापने के लिए किया जाता है।वो घोड़ा मांस खाता फिर ये कैसे कहा जा सकता है,कि मांस खाने से ताकत मिलती है?


( 2)जीभ के स्वाद के लिए-मांस में कैसा स्वाद होता है?सारा स्वाद उसमें पड़े बहुउपयोगी मसालों के कारण होता है।अगर वही मसाले इस्तेमाल किए जाएं तो बैंगन आलू की सब्जी में वही स्वाद आएगा! 


(3)विटामिन के लिए-हरी पत्तेदार सब्जियों और सूखे मेवों में मांस से कहीं ज्यादा प्रोटीन,विटामिन,पोषक तत्व होते है,तो मांस क्यों खाएं?


असल में प्रकृति ने न हमारे दांतों को मांस चबाने के लिए बनाया है, ना ही हमारी आंतों को मांस पचाने के लिए बनाया,मानव शरीर मूलत शाकाहार के लिए बनाया है।यदि ऐसा न होता तो डॉक्टर छोटे बच्चे को चावल खिचड़ी की जगह मांस के टुकड़े चबाने को कहता।इसका मतलब यह हुआ,मनुष्य स्वाभाविक मांसाहारी नहीं है!ना कभी रहा।


मांस खाने से पाचन क्रिया खराब होती है,मानसिक रोग भी होता है, जिससे अनेक रोग हो सकते हैं।मांस खाने से मनुष्य में काम,क्रोध, मद,अहंकार ईर्ष्या एवं कायरता के दुर्गुण प्रबल होते हैं।तथा राक्षसी प्रवृत्तियाँ बढ़ती हैं।कहा जाता है,मनुष्य बंदरों से विकसित हुआ है। 


बंदर आज भी शाकाहारी हैं।विकास की यात्रा में.बंदरों से मनुष्य तक

कौन जानता है कि मनुष्य पशु कैसे बन गया?मनुष्य का पेट पशुओं का कब्रिस्तान नहीं है।मनुष्य को यह बात ध्यान में रखनी होगी!शुद्ध आहार शाकाहार प्रकृति की रचना है,जो पशु होठों से पानी पीता है, वह शाकाहारी होता है,जो पशु जीभ से पानी पीता है,वह मांसाहारी होता है।शाकाहारी बनो!शरीर,मन,और विचारों की पवित्रता बढ़ाओ, शाकाहारी भोजन करो स्वस्थ रहो।यदि सहमत हो तो शाकाहारी बनो साभार निधि चौहान Facebook 

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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

किसान ने अपने अनोखे नवाचार से बैलों के वजन का भार कम कर दिया

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 एक किसान ने अपने अनोखे नवाचार से बैलों के वजन का भार कम कर दिया


है, जिससे वे अधिक समय तक बिना थके काम कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल बैलों की क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि उनकी सेहत और कार्यक्षमता को भी बनाए रखेगी।


पारंपरिक रूप से, किसान बैलों का उपयोग खेत जोतने, सामान ढोने और परिवहन के लिए करते हैं, लेकिन भारी बोझ के कारण वे जल्दी थक जाते हैं और उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। इस समस्या को हल करने के लिए एक किसान ने सरल लेकिन प्रभावी तकनीक अपनाई, जिससे बैलों पर पड़ने वाला भार समान रूप से बंट जाता है और उनकी ऊर्जा बचती है।


इस नवाचार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बैलों की शारीरिक थकान को कम करता है, जिससे वे लंबी दूरी तक आसानी से यात्रा कर सकते हैं। साथ ही, इससे उनकी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे अधिक समय तक स्वस्थ रहते हैं।


यह पहल पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा को दर्शाती है। ऐसे नवाचार न केवल खेती में मददगार होते हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। इस किसान की सोच और प्रयासों को सलाम! 👏🌿 साभार Facebook 

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लाल मिर्च का सेवन

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 बदलती दिनचर्या और अनियमित खानपान की वजह से हर दूसरे-तीसरे शख्स में डायबिटीज और जोड़ों में दर्द की समस्या देखने को मिल रही है. इसकी वजह से अस्पतालों और दवाओं पर खूब पैसे खर्च हो रहे हैं लेकिन, डायबिटीज पर कंट्रोल और जोड़ों में दर्द में जल्दी आराम के लिए लाल बड़ी मिर्च का नियमित सेवन वरदान साबित हो सकता है.

डॉक्टरों के अनुसार, लाल बड़ी मिर्च में विटामिन सी और आयरन के अलावा एक विशेष एंटी ऑक्साइड गुण पाया जाता है. हालांकि, यह मिर्च साल के दो महीने ही बाजार में मिलती है. लाल बड़ी मिर्च फरवरी से लेकर मार्च तक मिलती है. इसके बाद धीरे-धीरे कम हो जाती है लेकिन, इसका उपयोग अचार या जाइम के रूप में किया जाए तो 6-8 महीने तक आराम से चल जाता है.

सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और न्यूट्रिशन डॉ. सुमित रावत बताते हैं कि लाल मिर्च केवल दो-ढाई महीने ही बाजार में मिलती है. लेकिन, यह बड़े ही फायदे की चीज है. इसमें कैंसर निवारक गुण पाए जाते हैं. अगर किसी को पेट का कैंसर या आंख का कैंसर होने की संभावना है और वह व्यक्ति नियमित बड़ी वाली लाल मिर्च का सेवन


कर रहा है तो यह संभावना बेहद कम हो जाती है. इसके अलावा जिसको फैटी लीवर की शिकायत है, उसके लिए अभी यह बहुत अच्छी होती है. यह बहुत कारगर और रामबाण सब्जी है.

डॉ. रावत बताते हैं कि लाल बड़ी मिर्च में काफी मात्रा में विटामिन सी होता है. आयरन होता है. इसके अलावा इसमें एक एंटीऑक्सीडेंट भी होता है, यानी जिनको जोड़ों की समस्या है, डायबिटीज की समस्या है या जिनके शरीर में कुछ ज्यादा टूट होती है, अकड़न होती है, उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है.

इस लाल मिर्च का लगातार प्रयोग करना चाहिए. सीजन के दौरान इसको सब्जी में इस्तेमाल कर सकते हैं. जब सीजन चला जाए तो उसको अचार डालकर रख सकते हैं. अचार काफी लंबे समय तक चलता है. लोग इसको चटनी में भी डालते हैं. कोई भी पराठा या खाने की अन्य कोई चीज ले रहे हैं, तो उसके साथ में इसकी चटनी कंज्यूम कर सकते हैं. टमाटर या आंवला की चटनी में मिक्स करके लाल मिर्च की चटनी बना सकते हैं.

🙏 साभार 

राधादेव शर्मा

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लवंग के फायदे

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 लौंग :-  दो लौंग रोज दो बार चूसिए आजीवन स्वस्थ लीवर स्वस्थ हड्डियां जोड़ स्वस्थ फेफड़े स्वस्थ मुखमंडल 


मैंने कोरोना काल में लौंग को बहुत प्रचारित किया था वजह स्पष्ट थी उसका सबसे ज्यादा औरैक वैल्यू और गज़ब की एंटी वायरल क्षमता 

*ORAC*


          *ORAC* का अर्थ *ऑक्सीजन रेडिकल एब्सॉरबेन्ट केपेसिटी* (Oxygen Radical Absorbance Capacity.) 

          जितना अधिक ORAC, होगा उतनी ही ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता हमारे *फेफड़ो* को और *रक्त* को होगी। और यही कारण था जिन्होंने मेरी मानकर इसका उपयोग किया उन्हें ऑक्सीजन लेवल में कोई परेशानी नहीं आई अव्वल तो कोरोना काल बहुत सरलता से गुजर गया 

सारा खेल रक्त में मौजूद आक्सीजन के स्तर का है शरीर के जिस हिस्से को आक्सीजन अधिक मिलेगी वो तीव्रता से स्वस्थ होगा और कम मिलेगी तीव्रता से बीमार और कमजोर 


कैंसर का अगर कोई सबसे बड़ा बचाव है तो लौंग ही है क्योंकि शरीर में जितना ज्यादा आक्सीजन प्रवाह होगा कोशिकाओं में म्युटेशन के चांस उतने ही कम होंगे

आटो इम्युन डिज़ीज़ होने की संभावना नहीं रहेगी 

          

          आइए कुछ जड़ीबूटियों और मसालों के ORAC क्षमता (values) पर नजर डाले :

     1. लौंग Clove :

           314,446 ORAC 

    2. दालचीनी Cinnamon :

           267,537 ORAC 

     3. कॉफी Coffee. :

           243000  ORAC

     4. हल्दी Turmeric :

           102,700 ORAC 

     5. कोका Cocoa :

           80,933    ORAC 

     6. जीरा Cumin : 

          76,800  ORAC 

     7. अजवाइन Parsley :

           74,349 ORAC 

     8. तुलसी Tulsi : 

          67,553 ORAC 

     9. अजवायन के फूल Thyme : 

           27,426ORAC

     10. अदरक Ginger :

           28,811 ORAC 

कभी भी काला या पिचका हुआ तिड़का हुआ नहीं खरीदें क्योंकि उससे औषधीय तेल निकाल लिया गया होता है स्पष्ट रूप से ये भूरा तथा जैसा चित्र में है वैसा दिखता है


          

        उत्तम क्षमता वाले ORAC खाद्यपदार्थ (आहार) और पोषक तत्व (Nutrients) जैसे कि  *Iron, Vitamin C, Zinc, Omega 3, Magnesium and Vitamin D* आदि शारिरिक क्षमता और सुरक्षा कवच को सुदृढ़ तथा मजबूत करते हैं। 


लौंग में कई तरह के जीवाणु व विषाणु रोधी तत्व ( Anti bacterial anti virus element ) पाये जाते हैं। इसमें से पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन , मैंगनीज फाइबर, विटामिन , ओमेगा 3, मैग्नीशियम , सोडियम के अलावा कई अन्य तत्व सम्मिलित होते हैं। वैसे तो इसका किसी समय इस्तेमाल शरीर के लिए फायदेमंद ही साबित होता है, लेकिन रात को सोने से पहले इसका सेवन सेहत को चमत्कारी लाभ पहुंचाता है।


लौंग के फायदे से दांतों की सभी बीमारियों में भी मिलते हैं। लौंग के तेल को रूई के फाहे में लगाकर दांतों में लगाएं। इससे दांतों के दर्द से आराम मिलता है। इससे दांत में लगी सड़न भी समाप्त हो जाती है 


लौंग में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो लिवर को हेल्दी रखता है। लौंग खाने से लिवर अपना काम सही तरीके से कर सकता है। लिवर से संबंधित खतरनाक रोग जैसे फैटी लिवर, सिरोसिस के होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लौंग लीवर में होने वाले सूजन को भी कम करता है।


लौंग ब्लड शुगर को भी बढ़ने नहीं देता है। लौंग में नाइजेरिसिन नामक तत्व होता है, जो इंसुलिन को बढ़ाने का काम करता है और डायरेक्ट इंसुलिन के जैसे ही रिएक्ट कर डायबिटीज कंट्रोल करता है। डायबिटीज रोगियों का लौंग का सेवन रात में जरूर करना चाहिए।


लौंग पुरूषों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह पुरूषों से जुड़ी कुछ समस्याओं को भी दूर कर सकती है। यह पुरूषों की प्रजनन क्षमता में सुधार से लेकर उनके शरीर में टेस्टोस्टेरॉन लेवल को बढ़ाने मे भी कारगार है।


सुबह निराहार लौंग चूसने से थॉयराइड रोगियों को भी चमत्कारी लाभ मिलता है थायराइड ग्लैंड की आटो इम्यूनिटी को बहुत हद तक शांत करता है 


अतः जो चाहते हैं जिंदगी भर स्वस्थ स्फूर्तिमान रहें और चलते फिरते स्वस्थ जोड़ हड्डियां रहें दिन में दो लौंग अवश्य चूसें जब नर्म हो चबाकर खा जाएं 


गर्भवती महिलाओं को उल्टी होना आम बात है। खास बात यह है कि लौंग के फायदे इसमें बहुत आराम पहुंचाते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को बहुत आराम मिलता है। 1 ग्राम लौंग चूर्ण को मिश्री की चाशनी और अनार के रस में मिलाकर चाटें। इससे गर्भवती महिलाओं को होने वाली उल्टी बंद  हो जाती है।

 डॉ० जयवीर सिंह अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान पिंडारा फ्लाईओवर गोहाना रोड़ नजदीक राजमहल पैलेस जींद हरियाणा

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