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रविवार, 9 मार्च 2025

भगवान राम की मुख्य शाखा :कार्तिकेय पुर राजवंश

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 कार्तिकेय पर राजवंश एक महत्वपूर्ण राजवंश है इसका भारत में काफी समय तक राज्य रहा है यह एक भगवान राम की मुख्य शाखा रही है कार्तिकेयपुर राजवंश उत्तराखंड में इसका निर्माण सर्वप्रथम बसंत देव ने का किया अयोध्या के अंतिम सम्राट सुमित्रा के बाद उनके बड़े पुत्र राजा शालीवाहन देव उत्तराखंड चले गए जहां उन्होंने जोशीमठ में अपना राज्य कायम किया बाद में उनके शासन सामंत के रूप में भी कार्य किया हर्षवर्धन कल के बाद बसंत देने अपने आप सम्राट घोषित कर दिया 

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बुधवार, 5 मार्च 2025

अपने अंदर अथाह शक्ति समाहित है :ऋतु सिसौदिया

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 अपने अंदर अथाह शक्ति समाहित है

स्वयम को स्वयं से जोड़ो प्रकर्ति के संरक्षण में ध्यान लगाओ अंतर्मन की गहराई में जाओ


सभी सनातनी कथा भागवत रामायण महाभारत को सुनते हैं अन्याय अधर्म आदि बड़ने पर क्षत्रियों ने ही आगे आकर धर्म राष्ट्र रक्षा की तो उनकी ही वीरता की कथा सुनते हैं उनकी ही उपेक्षा करते हैं तो कभी धर्म राष्ट्र की रक्षा हो सकेगी कभी नहीं चिंतन अवश्य करें


सत्य को गलत साबित करना असंभव है कोई सत्य को नहीं समझे उसकी बुद्धि ,विचार और मन की समझ ,प्रमाण की कठिनता आदि का खेल समझिए

न्याय और मर्यादा की मूर्ति क्षत्रिय,चोर, ठगों, लुटेरों को कब रास आयें गे।।


सम्पूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति को समेटे मानव पहले स्वयम को जानना अति आवश्यक तदुपरांत समाज से जुड़े स्वयम के अस्तित्व को खोकर इन निकृष्ट समाज को पा लेना मूर्खता है

इसलिए आत्मज्ञान अनिवार्य आत्मबोध अनिवार्य

ऐसे शिक्षा प्रणाली का निर्माण हो झा सबका संगर्क विकाश व आद्यत्मिक ज्ञान प्राप्त हो आत्मकल्याण कर ही मनुस्य लोककल्याण कर सकता है


ॐ परमात्मने नमः

ममहरि शरणम

🚩जय मां भवानी🚩

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स्त्री की योनि: सृजन और सम्मान का प्रतीक

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 स्त्री की योनि: सृजन और सम्मान का प्रतीक



स्त्री की योनि केवल पुरुषों के सुख का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इस संसार में नए जीवन का प्रवेश द्वार भी है। यह वह पवित्र स्थान है, जहाँ से हर नया जीवन जन्म लेता है, जहाँ से हर इंसान की यात्रा प्रारंभ होती है। योनि केवल शारीरिक संरचना नहीं, बल्कि सृजन और मातृत्व की शक्ति का प्रतीक है।

 

प्रकृति ने स्त्री को इस अद्भुत क्षमता से नवाजा है कि वह एक नए जीवन को जन्म दे सके। जब कोई शिशु जन्म लेता है, तो योनि उसके लिए इस दुनिया में आने का मार्ग बनती है। यह केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य और मातृत्व के अद्भुत संगम का प्रतीक है। हर स्त्री अपने शरीर को एक नए जीवन के लिए समर्पित करती है, और यह त्याग किसी भी तरह से कम सम्मान के योग्य नहीं हो सकता।


सम्मान का महत्व


आज भी समाज में कई लोग महिलाओं के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाते। हम उस स्थान का सम्मान करना तो दूर, उसकी महत्ता को भी नहीं समझते, जिसने हमें इस दुनिया में आने का अवसर दिया। यह एक विडंबना है कि जिस योनि से जन्म लेकर हम इस संसार में आए, उसी का अपमान करने से नहीं चूकते।


स्त्रियों का सम्मान करना केवल एक नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि समाज की उन्नति के लिए भी आवश्यक है। जब हम महिलाओं को उचित सम्मान देंगे, तभी हम एक संतुलित और उन्नत समाज की कल्पना कर सकते हैं। महिलाओं को केवल भोग की वस्तु मानना उनके अस्तित्व और शक्ति का अपमान है।


निष्कर्ष


हर पुरुष को यह समझना चाहिए कि वह भी एक स्त्री की कोख से जन्मा है। महिलाओं का सम्मान करना, उनकी गरिमा को बनाए रखना और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। यह केवल नारी सम्मान की बात नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की उन्नति से जुड़ा विषय है। अगर हम सच में एक सभ्य समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें स्त्रियों को वह सम्मान देना होगा, जिसकी वे वास्तव में अधिकारी हैं।"

 हर हर महादेव साभार Facebook 

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मंगलवार, 4 मार्च 2025

लौकिक व अलौकिक जगत में तारतम्य: ऋतु सिसौदिया

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 लौकिक व अलौकिक जगत में तारतम्य बिठाने में बढ़ी असहजता हुई 

क्योंकि आत्मज्ञान व आत्मबोध ही ना था

शायद यही कारण रहा होगा सत्य की खोज को गौतम बुद्ध ने संसार का परित्याग कर वन गमन किया

और ऐसा ही उत्तर चढ़ाव हर  तीसरे चौथे व्यक्ति के जीवन मे घटित हो रहा किन्तु वह मोह का लोभ का लालच का परित्याग नही कर पा रहा 

आत्म कल्याण करना है तो आत्मसंयमी बनो त्याग दो उस सभी का जो तुम्हारी उन्नति में बाधक है

आत्मकल्याण तुम्हारी प्राथमिकता है 

जब आप स्वयं आत्मसन्तुष्ट नही मानसिक मजबूत स्थिति में नही तो तुम किसी के सहयोगी बन ही नही सकते परोपकारी बन ही नही सकते

अतः विनम्र निवेदन सन्तानो को विवाह संस्कार से बांधकर जिम्मेदारियों में जकड़कर आप सांसारिक कर्तव्य से मुक्त हो सकते है किंतु इससे अन्य जो नई समस्याए उतपन्न होती है फिर उन जिम्मेदारियों को उठाने से मोह क्यों मोड़ते है

इन समस्याओं के जन्मदाता तो आप ही है

बुद्धि व विवेक को जाग्रत कीजिये परवरिश सुशिक्षा व संस्कार के साथ कीजिये बहुत बड़ा कर्तव्य है विवाह फिर सन्तान को विशाल बृक्ष बनाना 

ना कि तुम्हारी गलतियों की सजा का भुगतान किसी की बेटी को बलि का बकरा बनकर मूल्य पत्नी होने का चुकाना पड़े तो इस्वर के न्याय से घबराना मत


समझदार को संकेत पर्याप्त है

जागरूकता ही जीवित की निशानी है

ॐ,🚩

 मम हरि शरणं साभार ऋतु सिसोदिया 

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शनिवार, 1 मार्च 2025

हरीतकी "हरड़" का आयुर्वेदिक महत्व

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 🌹 हरीतकी को आयुर्वेद में "हरड़" के नाम से भी जाना जाता है। 

इसे "सभी रोगों की दवा" कहा जाता है।


क्योंकि यह शरीर को शुद्ध करने, पाचन सुधारने, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। यह त्रिफला (हरीतकी, बिभीतकी और आंवला) का एक मुख्य घटक है।


🌺 हरीतकी के प्रकार :==


आयुर्वेद में हरीतकी को सात प्रकारों में बांटा गया है:


1. विजया – शरीर को संतुलित रखती है।


2. रोहिणी – घाव भरने और त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद।


3. पूतना – बालों और त्वचा के लिए उपयोगी।


4. अमृता – बुखार और संक्रमण में लाभदायक।


5. अभया – नेत्र रोगों और मस्तिष्क के लिए फायदेमंद।


6. जीवनी – ऊर्जा और शक्ति बढ़ाने वाली।


7. चेतकी – पाचन तंत्र सुधारने में सहायक।


हरीतकी के फायदे :===


1. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद


कब्ज, गैस, अपच और एसिडिटी को दूर करता है।


आँतों को साफ करता है और पेट हल्का रखता है।


भूख बढ़ाने में मदद करता है।


2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाए


शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकालता है।


वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बचाता है।


सर्दी, जुकाम और खांसी में लाभदायक।


3. वजन घटाने में सहायक


चयापचय (Metabolism) को तेज करता है।


पेट की चर्बी कम करने में मदद करता है।


शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को धीरे-धीरे हटाता है।


4. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक


ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।


कोलेस्ट्रॉल कम करता है।


रक्त संचार को सुधारता है।


5. मधुमेह (Diabetes) में उपयोगी


रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नियंत्रित करने में मदद करता है।


इंसुलिन के सही स्तर को बनाए रखने में सहायक।


6. मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी


याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक।


तनाव, चिंता और डिप्रेशन को कम करता है।


7. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद


त्वचा के दाग-धब्बे और मुंहासे दूर करता है।


बालों को काला, घना और मजबूत बनाता है।


डैंड्रफ को कम करता है।


🌺 हरीतकी का उपयोग कैसे करें?


1. कब्ज और पाचन के लिए


कैसे लें?


1 चम्मच हरीतकी चूर्ण को रात में गुनगुने पानी या दूध के साथ लें।


इसे शहद के साथ भी लिया जा सकता है।


2. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए


कैसे लें?


हरीतकी चूर्ण को आंवला और गिलोय के साथ मिलाकर सेवन करें।


इसे गर्म पानी में मिलाकर दिन में एक बार पिएं।


3. वजन घटाने के लिए


कैसे लें?


हरीतकी पाउडर को गुनगुने पानी और शहद के साथ सुबह खाली पेट लें।


4. त्वचा और बालों के लिए


कैसे लगाएं?


हरीतकी पाउडर को नारियल तेल या दही में मिलाकर बालों में लगाएं।


चेहरे पर लगाने के लिए गुलाब जल के साथ पेस्ट बनाकर लगाएं।


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हरीतकी का सेवन करते समय सावधानियाँ


गर्भवती महिलाओं को हरीतकी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


अधिक मात्रा में लेने से डायरिया या पेट दर्द हो सकता है।


लो बीपी वाले लोग इसका अधिक सेवन न करें।


बच्चों को देने से पहले वैद्य या डॉक्टर से परामर्श कर लें।


निष्कर्ष :====


हरीतकी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है जो पाचन, हृदय, त्वचा, बाल, मानसिक स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए बहुत फायदेमंद है। इसे सही मात्रा में और सही तरीके से लेने से शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।


अगर आप इसे दवा के रूप में लेना चाहते हैं, तो पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

#highlight

@हाइलाइट साभार amitesh kumar Facebook 

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बेल का महत्व

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 आयुर्वेद में बेल महत्वपूर्ण औषधि माना गया है जो पाचन संबंधी कई बीमारियों में फायदेमंद है।  इस फल का हर हिस्सा ही सेहत के लिए के लिए गुणकारी है, बाहर से यह फल जितना ही कठोर होता है अंदर से उतना ही मुलायम और गूदेदार होता है। इसके गूदे में मौजूद बीज भी कई बीमारियों के इलाज में फायदा पहुंचाते हैं।

सेवन विधि : दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर बेल का जूस (bael juice) बनाएं और इस जूस का दिन में एक से दो बार सेवन करें।


किडनी के लिए फायदेमंद :

बेल का सेवन किडनी के लिए भी फायदेमंद है और यह किडनी की कार्यक्षमता को और बढ़ाती है। एक शोध के अनुसार बेल की जड़ों और पत्तियों में डायूरेटिक गुण होते हैं जो मूत्र का उत्पादन बढ़ाती हैं। यह ख़ास तौर पर वाटर रिटेंशन की समस्या से आराम दिलाने में बहुत कारगर है।


सेवन विधि : आधा चम्मच बेल की पत्तियों के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सेवन करें।


लीवर के लिए फायदेमंद :

ऐसा देखा गया है कि बेल की पत्तियां लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। लीवर से जुड़ी बीमारियां अक्सर तभी होती हैं जब शरीर में टॉक्सिन या हानिकारक विषैले पदार्थ बढ़ जाते हैं या किसी तरह का संक्रमण हो। शोध के अनुसार बेल (Bael in hindi) में एंटी-फंगल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं साथ ही इसमें बीटा-कैरोटीन भी पाया जाता है जो लीवर को किसी भी तरह के संक्रमण और चोट से बचाने में मदद करते हैं।


सेवन विधि : ताजे बेल के गूदे को निकालकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसे मैश करके खाएं।


स्कर्वी :

शरीर में विटामिन सी की कमी के कारण स्कर्वी रोग हो जाता है। इस रोग के कारण मसूड़ों से खून रिसने लगता है और शरीर पर चकत्ते पड़ने लगते हैं। ऐसे में बेल (Bael) का नियमित सेवन इस समस्या को काफी हद तक ठीक कर सकती है। बेल में मौजूद विटामिन सी, शरीर में इसकी कमी को दूर करती है और साथ ही इम्युनिटी पॉवर को भी मजबूत बनाती है।


सेवन विधि : आधा से एक चम्मच बेलगिरी चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर खाएं।


कान के दर्द से आराम :

बेल फल के फायदे सिर्फ पाचन तंत्र को ठीक करने तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि यह कान दर्द में भी बहुत उपयोगी हैं। कान में दर्द और कान से तरल का स्राव होना एक आम समस्या है। आयुर्वेद में ऐसा बताया गया है कि बेल के उपयोग से कान के दर्द, कान बहने और बहरेपन जैसी समस्याओं से आराम मिलता है। हालांकि कई बार कान में दर्द की समस्या किसी और वजह से भी हो सकती है। इसलिए कान से संबंधित इलाज में आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही बेल का सेवन करें।


उपयोग विधि : बिल्वादी तेल एक आयुर्वेदिक तेल है, इसकी मुख्य सामग्री बेल होती है। यह तेल कान के दर्द से आराम दिलाने में बहुत कारगर मानी जाती है। हालांकि इसका उपयोग आप चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें। साभार जय प्रकाश ओझा Facebook 


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हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं.

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 हमारे अंदर विचार कहा से प्रवेश करते हैं..?


हमारे मन के 16 हिस्से हैं,, थॉट से लेकर लिबरेशन तक की जर्नी के चार हिस्से हैं जो इस प्रकार है मनस, बुद्धि, चित्त और अहंकार इन सभी के फंक्शन अलग-अलग हैं डे टुडे के डिसीजन मानस लेता है 


बुद्धि कैलकुलेट करता है और अहंकार जिससे हमारी पर्सनालिटी बनती है हमारी एक आइडेंटिटी बनती है और चौथा है ,चित्त यानी की मेमोरी इस मेलाइफ टाइम की मेमोरी ही नहीं होती इसमें हमारे सारे लाइफ टाइम के मेमोरी होती है


 हमारे बायोलॉजिकल शरीर से लेकर मेंटल शरीर के मेमोरी होती है यह सारे मेमोरी नहीं रहेगी तो हम फ्यूचर के बारे में प्लान नहीं कर पाएंगे,,


 इसीलिए मन का जो हिस्सा है वह बेहद जरूरी है क्योंकि हम हमारे पास्ट एक्सपीरियंस से ही अपने फ्यूचर को प्लान करते हैं ,,और अपने प्रेजेंट को भी उसी प्रकार से अपने आप से जो भी गलतियां हुई उससे सीख करके आगे  काम करते हैं।


इसमें अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारे चित्त का स्मृति जब हम किसी याद के बारे में बात करते हैं,, हमारी जो भी करंट थॉट प्रोसेस है वह हमारी स्मृति के ऊपर ही डिपेंड होता है 


अगर आप किसी व्यक्ति से मिले दो-तीन साल पहले और उसे व्यक्ति के साथ आपका एक्सपीरियंस अच्छा नहीं रहा है तो वह एक्सपीरियंस आपकी स्मृति में पहले से ही बना हुआ है 

अब आप उसे व्यक्ति से दोबारा मिलते हैं तो उसी आधार पर उसे व्यक्ति को आप जज जज करेंगे और कहीं ना कहीं आपका प्रेजेंट मोमेंट प्रभावित होगा आप उसे व्यक्ति से मिलने का मन नहीं करेगा तो यहां पर आपकी स्मृति है वह यहां पर बॉयस थिंकिंग दे सकती है और जो उसे व्यक्ति के साथ रिलेशन है वह अफेक्टेड हो सकता है तो विचारों की जन्मभूमि यही है। साभार Facebook 

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