प्रयोगशाला में कृत्रिम मस्तिष्क कोशिका का निर्माण

यूनिवर्सिटी आफ साउदर्न केलिफोर्निया विटरबी स्कूल आफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एलिस पार्कर ने कृत्रिम मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण प्रयोगशाला में किया है मस्तिष्क कोशिका एक प्रकार का तंत्रिकाओं के बीच का जोड़ है जो जिससे होकर विभिन्न रंग या रासायनिक संदेश एक तरीका से दूसरे तक गुजरते हैं कृत्रिम मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण करने के लिए प्रोफेसर एलिस पार्क कर और चूने तंत्रिकाओं को जोड़ने वाली डिजाइन नैनो टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ के बनाया है

ऐसा व्यक्ति जिसने दी थी एड्स को मात

अमेरिका के एक ऐसे व्यक्ति ने विश्व की सबसे खतरनाक बीमारी को मात देखकर चिकित्सा जगत को समर्पित कर दिया था वह दुनिया का ऐसा पहला मरीज है जिसके शरीर में एचआईवी वायरस पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं 45 वर्षीय तिमोथी रे ब्राउन के लिए इसे किस्मत की ही बात कहेंगे कि दरअसल व एड्स के अलावा एक और प्राण घातक बीमारी एक प्रकार का ब्लड कैंसर से पीड़ित थे के इलाज के लिए उनके शरीर में एक बार बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है उसी के बाद उनका एड्स भी ठीक होने लगा अब उनके शरीर में एचआईवी वायरस पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं डॉक्टरों ने इस अनोखी घटना को फंग्शनल चोर का 9995 में ब्राउन के शरीर में एचआईवी वायरस के संक्रमण के बारे में पता लगा था वह ल्यूकेमिया से जूझ रहे थे तब वह जर्मनी में रहते थे बर्लिन में 2007 में हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन ने उनकी जिंदगी बदल दी वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके शरीर में जिसका बोन मैरो प्रस्तावित किया गया उसके अंदर रहे होंगे जो के जरिए पहुंच गए और वह काकेशियाई मूल का रहा होगा यूरोप स्थित काकेशिया पर्वत इसके आसपास रहने वाले लोग के माने जाते हैं होते हैं और उत्तर पश्चिम एशिया पाए जाते हैं 1 प्रतिसत लोगों के शरीर में प्रतिरोध पाए जाते हैं उनमें से एक रहा होगा का मानना है कि में यूरोप में लाखों लोगों की जान लेने वाले ग्रेटर प्लेग से बच जाने वाले लोगों में स्वतः ही एड्स से लड़ने की छमता बिकसित हो गयी थी उसके बाद यह जीन पीढ़ी दर पीढ़ी उनके सन्तानो में आ गयी एच आई वी वायरस की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डाक्टर जे लेवि ने इसे चिक्तिसा जगत की एक उपलब्धि माना है उनका कहना है की उन एड्स प्रतिरोधी जीनो की संगरचना की पता लगाकर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है

महिला के रक्त की जांच से गर्भस्थ शिशु के लिंग का सटीक निर्धारण

 अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन शोध पत्रिका में प्रकाशित एक अन्वेषण के अनुसार गर्भवती महिलाओं के रुधिर के डीएनए के परीक्षण से 7 सप्ताह के गर्भस्थ शिशु के लिंग का निर्धारण किया जा सकता है और इससे उनको कोई हाथ भी नहीं पहुंचती है शोध में कहा गया है कि यदि एमियों से टेंसेस लिखित या सोनोग्राम आज विधियों की तुलना में अधिक सटीक है तथा गर्भवती महिला के गर्भाशय जहां से अधिक सुरक्षित है गर्भस्थ शिशु का अल्ट्रासाउंड भी 11 से 14 सप्ताह का होने पर ही किया जा सकता है लेकिन रक्त के डीएनए के परीक्षण के साथ सप्ताह के गर्भ में शिशु का लिंग निर्धारित किया जा सकता है

ऐसा जीन किसी भी पौधे को किसी भी मौसम में उगाने में सक्षम

 अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पादपों में एक महत्वपूर्ण अनुसार अनुवांशिक जीन की पहचान की है जो उनकी जैविक घड़ी को गतिशील रखता है det1 नामक इस जीन की मदद से पादपों में कुछ बदलाव लाकर उन्हें भिन्न मौसमों और स्थानों पर उगाया जा सकता है साथ ही इससे वैश्विक खाद्य उत्पादन बढ़ सकता है ज्ञातव्य हो कि करीब करीब सभी जिलों में एक जैविक घड़ी होती है जो दिन और रात के साथ जैविक क्रियाओं के सामान में उन्हें मदद करती है पादपों में या घड़ी वृद्धि को दोनों समय और दिन या सीजन के लिए समायोजित करने में महत्वपूर्ण है यह घड़ी प्रातः जीवन और साय जीन से संबंध है प्रातः जिनके प्रोटीन दिन निकलने पर साय जीन पर हावी हो जाते हैं और शाम होने पर इसका उल्टा होता है अल्बर्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई dt1 नामक जीन जैविक चक्कर में को दबाने में अहम भूमिका निभाता है मुख्य अनुसंधानकर्ता जिंक 1 दिन के अनुसार जो पादप कंपनी dt1 में बनाते हैं उनमें जैविक घड़ी तेज होती है उसमें कम समय में फूल आ जाते हैं beta1 नामक जीन की खोज से विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को दुर्गम स्थानों से इतर सहज और अन्य स्थानों पर भी उगाया जा सकता है इस खोज से चिकित्सा के क्षेत्र में काफी मदद मिल सकती है

क्यों होती है इम्यूनिटी कमजोर

शरीर में चर्बी का अनावश्यक रूप से जमा होना- वजन बहुत कम होना फास्टफूड, जंकफूड आदि का ज्यादा सेवन।शरीर को ठीक से पोषण न मिलना- धूम्रपान, शराब, ड्रग आदि का सेवन- पेनकिलर, एंटीबॉयोटिक आदि दवाओं का लंबे समय तक सेवन। लंबे समय तक तनाव में रहना। लंबे समय तक कम नींद लेना अथवा अनावश्यक रूप से देर तक सोना शारीरिक श्रम का अभाव। प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहना।- बचपन और बुढ़ापे में रोगप्रतिरोधक शक्ति सामान्य तौर पर कुछ कमजोर होती है, पर खराब जीवनशैली;चलते युवावस्था में भी यह कमजोर हो सकती है।- गर्भवती स्त्री का खान-पान ठीक न हो या वह कुपोषण का शिकार हो तो होने वाले बच्चे की भी रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की संभावना बनी रहत- अगर आप चीनी ज्यादा खाते हैं तो यह इम्यूनिटी के लिए नुकसानदेह है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन में छपे एक शोध के अनुसार सौ ग्राम या इससे अधिक शुगर खा लेने की स्थिति में श्वेत रुधिर कणिकाओं की रोगाणुओं को मारने की क्षमतापांच घंटे तक के लिए कमजोर पड़ जाती है। कम पानी पीने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है, क्योंकि पर्याप्त पानी के अभाव में शरीर सेविजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल पाना कठिन हो जाता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें कई बीमारियों से सुरक्षित रखती है. छोटी-मोटी ऐसी कई बीमारियां होती हैं जिनसे हमारा शरीर खुद ही निपट लेता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है. ऐसे में शरीर कमजोर हो जाता है और हम जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं.हमारा इम्यून सिस्टम हमें कई तरह की बीमारियों से सुरक्ष‍ित रखता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण,फंगस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है. इन बातों से यह तो स्पष्ट हो जाता है कि इम्यून पावर के कमजोर होने पर बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि हम अपनी इम्यून पावर को बनाए रखें.रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,;कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं : ग्रीन टी और ब्लैक टी, दोनों ही इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद होती हैं लेकिन एक दिन में इनके एक से दो कप ही पिएं.ज्यादा मात्रा में इसके सेवन से नुकसान हो सकता है.कच्चा लहसुन खाना भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में सहायक होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में एलिसिन, जिंक,सल्फर, सेलेनियम और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं. दही के सेवन से भी इम्यून पावर बढ़ती है. इसके साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मददगार. ओट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं. साथ ही इसमें एंटी-माइक्राबियल गुण भी होता है.;हर रोज ओट्स का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है.. विटामिन डी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है. साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए और दिल संबंधी बीमारियों को दूर रखने के लिए भी विटामिन डी लेना बहुत जरूरी है.संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है स्रोत हिंदुस्तानडॉट कॉम dainik jagaran

vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता

vigyan kee takneek: न्यूरो चीप बनाने में सफलता: इटली के वैज्ञानिको ने न्यूरो चीप बनाने में सफलता हासिल की है जिससे जीवित मस्तिस्क कोशिकाएं सिलिकन सर्कीट से सम्बन्ध की जा सकेगी इसके अतिर...

vigyan kee takneek: कपड़ो से पैदा होगी बिजली

vigyan kee takneek: कपड़ो से पैदा होगी बिजली: जल्द ही बाजारों में नैनो फाइबर से बने पावर सूट उपलब्ध होंगे वैज्ञानिको ने हमारी जीवन सैली में क्रांती ला दी है उन्होंने इंसान की सुख सुबिध...

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भगदड़ रोकेगा सॉफ्टवेयर

 त्योहारों और बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने के दौरान पैदा होने वाली भगदड़ जैसी स्थिति पर काबू पाना अब ज्यादा आसान होगा क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है जो बिल्कुल सही ढंग से इस बात का पता लगा सकेगा कि कोई भीड़ कर खतरे के स्तर तक पहुंचेगी जिससे भगदड़ पर काबू पाया जा सकेगा इस सॉफ्टवेयर का विकास जर्मनी के वैज्ञानिकों ने किया है और उनका कहना है कि इससे सुरक्षा कर्मचारियों को इस बात की सुविधा मिलेगी कि भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने से पहले वह भीड़ को तितर-बितर कर सकें यह सॉफ्टवेयर किसी भीड़ की स्थिति का अध्ययन और उसकी जांच करता है ऐसा वह भीड़ के वीडियो फुटेज के हर पिक्सेल को देखकर करता है जैसे ही उसे लगता है कि वीडियो पिक्सेल के बीच काफी समानता है वह सुरक्षा कर्मचारियों को अलग कर देता है

एक गोली से ही होगा त्वचा कैंसर की रोकथाम

 त्वचा कैंसर का इलाज अब निकट भविष्य में एक गोली खाने बरसे हो सकेगा वैज्ञानिकों ने ऐसी दवा विकसित करने का दावा किया है जिससे लोगों में से हुई क्षति को दुरुस्त कर इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा अमेरिका के ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने इस बात का अध्ययन किया कि पशु पक्षी किस प्रकार सूर्य की नुकसानदेह किरणों से खुद को बचाते हैं इस खोज से और ऐसी दवा विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा जो सन वर्ण से पैदा होने वाली इस बीमारी को खत्म कर देगी और सर्वाधिक विनाशकारी  कैंसर में से एक माने जाने वाले  त्वचा कैंसर से लोगों की रक्षा करेगी वास्तव में 10 सालों के शोध के बाद शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने में सफलता हासिल की है

एक दशक बाद हो सकती है मनुष्य की उम्र 1000 वर्ष

ब्रिटेन की एक बैग यह प्रसिद्ध वैज्ञानिक का दावा है कि जीवन का 150 वां बसंत देखने वाला आदमी तो पहले ही जन्म ले चुका है लेकिन यह तो कुछ भी नहीं अगले दशकों में ऐसे कई पहले व्यक्ति पैदा होंगे जो उम्र के 1000 में पड़ाव तक पहुंचेंगे लोग भले ही इस बात पर विश्वास ना करें लेकिन डॉक्टर डी ग्रे नामक इस वैज्ञानिक को पूरा विश्वास है कि उनके ही जीवन काल में बैठ डॉक्टरों के पास वह सभी साधन और औजार होंगे जिससे वे बुढ़ापे का इलाज करने में पूरी तरह सक्षम होंगे बायोमेडिकल जेंटो लार्जेस्ट तथा अध्यक्षता पर पिछले कई वर्षों से शोध करने वाले संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर डि gre  का दावा है कि ऐसा संभव होगा तमाम तरह की बीमारियों को समाप्त कर ऐसा करने से जीवन को अनिश्चित काल  के लिए बढ़ाया जा सकता है तब आदमी उम्रदराज तो होगा ना है वह स्पष्ट है इस समय जीवन प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2030 में 100 वर्ष की उम्र पार करने वाले की संख्या कई लाख में होगी इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा जीने वाला व्यक्ति कार्यकाल 122 वर्ष का है जापान में वर्ष 2010 में 44000 से ज्यादा लोग 100 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे उनका मानना है कि विकासशील देशों में कारण बाधित हो सकती है डॉक्टर डिग्री ऐसे समय को हकीकत बनते देखते हैं जब लोग अपने डॉक्टरों के पास नियमित मेंटेनेंस के लिए जाया करेंगे 
 उस समय तक जीन थेरेपी स्टेम सेल थेरेपी इम्यून सिस्टम स्टिमुलेशन एडवांस मेडिकल तकनीक आम लोगों की पहुंच तक होगी जिससे लोग अपने को फिट एवं फाइंड रख सकेंगे डॉक्टर डिग्री मानते हैं कि बुढ़ापा कुल मिलाकर हमारे शरीर में जीवन भर संजीत होने वाला अलग अलग  किस्म का सूक्ष्म और कोशिकीय loss  है और इसे रोकना संभव है इस बात पर अभी बात हो सकती है कि भविष्य में आदमी की औसत आयु कहां तक पहुंचेगी लेकिन जो प्रवृतियां है वह स्पष्ट है इस समय जीवन की प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है

चीन में मिला दुनिया की सबसे पुराना पक्षी

 चीन के जीवाश्म भी धोने पक्षी नुमा प्राचीन डायनासोर का एक सा जीवाश्म ढूंढ निकाला है जिनके दुनिया का प्रथम पक्षी होने का दावा किया जा रहा है अगर चीनी वैज्ञानिकों का यह दावा सही होता है तो यह अब तक विश्व का सबसे पुराना पक्षी माने जाने वाला जर्मनी के  aakeyo पैट्रिक्स ko पीछे छोड़ देगा  इनके जीवा सुविधाओं के अनुसार मुर्गी के आकार का या डायनासोर जीवाश्म 15.5 करोड़ वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों ने इसे shiyaotengiya jhengi नाम दिया है इस जीवाश्म को चीन के लिए प्रांत में खोजा गया है इस प्रांत में पहले भी प्राचीन काल के जीवाश्म मिलते रहे हैं shiyaotengiya jhengi akeyopatriks पक्षी के जीवाश्म से भी 5000000 वर्ष पुराना है वैज्ञानिकों को यह जीवन पत्थर की एक सीन में दबा हुआ मिला पत्थर पर से निशान भी साफ देखे जा सकते हैं जिसमें इस पक्षी के पंख भी होने के संकेत हैं इस डायनासोर रूपी पक्षी के मिलने पर वैज्ञानिकों की मौजूदा समय की पक्षियों को लेकर वैज्ञानिकों का सिद्धांत धूमिल होता जा रहा है इसमें कहा गया है कि आधुनिक पक्षी का विकास डायनासोर से ही हुआ होगा हालांकि यह खोज इस थ्योरी को पूरी तरह से खारिज नहीं करती है लेकिन इस क्षेत्र में नए सूर्य के प्रवेश द्वार खोल देती है इस डायनोसोर की रूपरेखा सीधे-सीधे आज के पक्षियों से नहीं मिलती है लेकिन arkyptrks  से काफी मिलती जुलती है उल्लेखनीय है बैटरी ब्रिटिश प्राणी वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने 18 सो 59 में अपनी पुस्तक गुणों की उत्पत्ति में डायनासोर के नष्ट हो जाने की टूटी पड़ी को जोड़ते हुए बताया था कि पक्षियों का विकास जरूर डायनासोर से हुआ होगा इस पुस्तक के प्रकाशन के 2 वर्ष बाद ही जर्मनी में arkyoptrks ko  खोज निकाला गया था

प्रकाश की गति वाले प्रयोग में चौंकाने वाले नतीजे

जिनेवा में स्थित भौतिकी की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला शरण में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने सबअटॉमिक पार्टिकल यानी अति सूक्ष्म कण ने दोनों की गति प्रकाश की गति से भी ज्यादा पाई है अगर ऐसा सच हुआ तो यह भौतिकी के मूलभूत नियमों को पलटने वाली खोज होगी क्योंकि उनके मुताबिक प्रकाश की गति से ज्यादा तेज कुछ भी नहीं है शर्म से 732 किलोमीटर दूर स्थित ग्रैंड सांसों प्रयोगशाला को भेजे गए न्यूट्रींों प्रकाश की गति से 1 सेकंड से के बहुत ही छोटे हिस्से से तेज पाए गए शोधकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि वे इस नतीजे से काफी आश्चर्यचकित है और इसलिए उन्होंने कोई दावा नहीं करते हुए अन्य लोगों से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करने की अपील की है शोधकर्ताओं के गुटके ने कहा है कि वे इस दावे को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं रिपोर्ट इटली में ग्रंथों की भूमिकाएं भेजा जिससे पता चले कि उनमें से कितने रूप बदलकर के रूप में वहां पहुंचे इस प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने देखा कि उतनी ही दूरी के कुछ हिस्से से तेजी से तय कर ली इस टीम ने नैनों की यह दूरी तय करने का प्रयोग किया उसके बाद इतनी बार इस जानकारी को पाया जिससे एक औपचारिक खोज कहा जा सके मगर वैज्ञानिकों का यह दल समझता है की प्रक्रिया में मामूली सी भी गलती से बेहद गलत नतीजे आ सकता है कि करने प्रकाश की गति को भी पछाड़ दिया इसलिए उन्होंने अपनी आंखों के सामने रख दिया है










सिंगिंग वर्ल्ड के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार

 गाने वाली चिड़िया जेबरा फिंच के जीनोम का ब्लूप्रिंट तैयार कर लेने की डॉक्टरों द्वारा घोषणा की गई है वाशिंगटन विश्वविद्यालय के डॉ वेसले वारेन के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा की गई इस खोज से कई वैज्ञानिक विधियों को सुलझाने में मदद मिलने की संभावना है खासकर इंसानों और अन्य प्राणियों में आवाज सीखने के रहस्य के बारे में जानने के लिए यह खोज काफी महत्वपूर्ण हो सकती है वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस जीनोम ब्लूप्रिंट से स्पीच डिसऑर्डर मसलन ऑटिज्म हकलाना और पार्किंसन जैसे रोगों के जेनेटिक कारण ओं को भी समझा जा सकता है जेबरा फिंच नाम की यह चिड़िया आवाज को सीखने की प्रक्रिया का बेहतरीन उदाहरण है उल्लेखनीय है कि सिंगिंग वर्ल्ड के अलावा मुर्गा ही एकमात्र ऐसा पक्षी है जिसके दिनों का पूरा खाका खींचने में सफलता वैज्ञानिकों को मिली है इस तुलना के बाद यह पता लगाया जा सका है कि आखिर कौन से ऐसे हैं जो आवाज गाने को सीखने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

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